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आयुष्मान योजना में गड़बड़ी पर कलेक्टर सख्त, दो ऑपरेटरों को हटाने के निर्देश

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. जिला अस्पताल में ​IPD में भर्ती मरीजों के अनुपात में आयुष्मान योजना के लाभ में मिली भारी कमी पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है. कलेक्टर विजय दयाराम के. ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो ऑपरेटरों को बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं. ​प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से भविष्य में कार्य में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है. ​जिला चिकित्सालय के सभाकक्ष में जीवन दीप समिति की कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई. कलेक्टर विजय दयाराम के. की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में आयुष्मान भारत योजना के तहत किए जा रहे कार्यों में भारी खामियां पाई गई. बैठक के दौरान जब अस्पताल के इंडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) में भर्ती मरीजों की संख्या का मिलान आयुष्मान योजना के तहत लाभान्वित मरीजों से किया गया, तो आंकड़ों में भारी अंतर और गिरावट सामने आई. योजना के अंतर्गत क्लेम प्रस्तुत करने की रफ्तार भी बेहद धीमी पाई गई. इस असंतोषजनक कार्यप्रगति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जीवन दीप समिति के आयुष्मान ऑपरेटर अजय कुमार राठौर और अक्षय गुप्ता के खिलाफ नियमानुसार बर्खास्तगी की कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए. ​पारदर्शिता और समयबद्धता पर विशेष जोर ​ कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट किया कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ​पात्र मरीजों के उपचार से जुड़े अभिलेखों का संधारण पूरी तरह व्यवस्थित होना चाहिए. ​क्लेम प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर विलंब न हो. कोई भी पात्र मरीज जानकारी या कागजी प्रक्रिया के अभाव में आयुष्मान योजना के लाभ से वंचित न रहे.

मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के अस्पतालों ने टाली हड़ताल, भुगतान का मुद्दा अब भी अटका

जबलपुर. आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत मरीजों के कैशलेस इलाज पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है, लेकिन राहत अधूरी है। जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के निजी अस्पताल आठ अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले थे। भोपाल में सात और आठ अक्टूबर को आयुष्मान विभाग के सीईओ तथा दीनदयाल स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद के साथ लंबी बातचीत के बाद हड़ताल टाल दी गई। अस्पतालों ने इलाज जारी रखने का फैसला लिया है। सरकार ने भुगतान प्रक्रिया तेज करने और नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल्स (एनएबीएच) प्रमाणपत्र की अनिवार्यता से फिलहाल छूट देने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद भुगतान और अस्पतालों की पात्रता को लेकर विवाद बरकरार है। जबलपुर के करीब 70 निजी अस्पतालों का 50 से 60 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा है, जबकि एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश स्तर पर पोर्टल-1 में 1200 करोड़ और पोर्टल-2 में 1500 करोड़ रुपये अटके हैं। 739 अस्पतालों के सामने नई शर्त आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर से एनएबीएच प्रमाणपत्र की शर्त लागू हो चुकी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में योजना से जुड़े 739 अस्पताल हैं। इनमें करीब 310 अस्पतालों के पास एनएबीएच प्रमाणपत्र बताया गया है। सरकारी अस्पतालों को अलग करने पर करीब 300 निजी अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता नई शर्त से प्रभावित होने की आशंका है। अस्पताल संगठनों की मांग है कि एनएबीएच को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन नियम अस्पताल के आकार, बिस्तरों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से व्यावहारिक होने चाहिए। इलाज की मंजूरी के बाद भी क्लेम कटने पर सवाल अस्पताल संचालकों का कहना है कि मरीज को भर्ती करने और उपचार शुरू करने से पहले बीमारी, उपचार और पैकेज के आधार पर प्री-ऑथराइजेशन लिया जाता है। इसके बाद अस्पताल अपने संसाधनों से मरीज का इलाज करता है। लेकिन उपचार पूरा होने के बाद तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से क्लेम रिजेक्ट या बड़ी राशि काट दिए जाने से अस्पतालों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है। आईएमए मध्य प्रदेश अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत के मुताबिक पुराने और वर्तमान पोर्टल पर भुगतान लंबित हैं। सीपीडी स्तर पर क्लेम अटके हैं और रिजेक्शन व कटौती की समस्या भी बनी हुई है। संगठनों का कहना है कि कई बार ज्ञापन और बैठकों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। अस्पतालों की मांग-भुगतान की भी तय हो समय-सीमा यूपीएचडीए मध्य प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने कहा कि अस्पतालों के लंबित भुगतान और क्लेम से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समय-सीमा और जवाबदेही तय होनी चाहिए। अस्पतालों का कहना है कि यदि मरीज के इलाज की प्रक्रिया के लिए नियम और समय-सीमा तय है तो इलाज के बाद भुगतान के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा होनी चाहिए। अस्पताल संगठनों ने प्रत्येक क्लेम रिजेक्शन या कटौती का लिखित कारण बताने, योग्य चिकित्सकों से क्लेम की जांच कराने और प्रभावी अपील व्यवस्था बनाने की मांग की है। साथ ही पैकेज दरों को वास्तविक उपचार खर्च के अनुरूप संशोधित करने की मांग भी रखी गई है। 

यूपी में रामपुर की बड़ी उपलब्धि, आयुष्मान कार्ड बनाने में प्रदेश में पाया पहला स्थान

 लखनऊ  योगी सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में रामपुर ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में रामपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पिछले एक वर्ष के दौरान सर्वाधिक 1 लाख 79 हजार आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इस उपलब्धि के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कैंसर पीड़ित को सौंपा आयुष्मान कार्ड रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। रामपुर में विभिन्न विभागों के समन्वय और अभियान के प्रभावी संचालन से बड़ी संख्या में पात्र लोगों को योजना से जोड़ने में सफलता मिली है। आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के क्रम में जिलाधिकारी ने जनता दर्शन के दौरान गंभीर बीमारियों से पीड़ित और दिव्यांग लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए। इनमें टांडा तहसील के ग्राम पोयली नायक निवासी कैंसर पीड़ित केविन्दर सिंह और मिलक तहसील के राजकुमार माहेश्वरी शामिल रहे। राजकुमार माहेश्वरी के पैर की सर्जरी होनी है। इसके अलावा स्वार तहसील क्षेत्र के 100 प्रतिशत दिव्यांग हेमराज और प्रेमशंकर को भी आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। रामपुर में अब तक बने 6.91 लाख से अधिक कार्ड जिलाधिकारी ने बताया कि रामपुर में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक कुल 6,91,928 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। पिछले एक वर्ष में 1.79 लाख कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करना जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। वहीं, जनता दर्शन के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों को कार्ड उपलब्ध कराने से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

Ayushman Scheme पर MP में बढ़ा विवाद, 8 अक्टूबर से इलाज बंद करने की चेतावनी; दिल्ली जाएंगे निजी डॉक्टर

भोपाल. मध्य प्रदेश के निजी अस्पतालों में आगामी 8 अक्टूबर से आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज पूरी तरह ठप हो जाएगा। योजना की भारी-भरकम बकाया राशि का भुगतान न होने और एनबीएचएस (एनबीएचएस) सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता के विरोध में प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके साथ ही मांगों की अनदेखी किए जाने पर 1000 एंबुलेंस के साथ दिल्ली कूच करने की चेतावनी भी दी गई है। डेढ़ से दो करोड़ रुपये प्रति अस्पताल बकाया इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए) मध्य प्रदेश और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन ( यूपीएचडीए) सहित विभिन्न अस्पताल संगठनों ने संयुक्त रूप से इस आंदोलन का शंखनाद किया है। राजधानी भोपाल के अधिकांश प्रमुख निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत औसतन 1.5 से 2 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से बकाया राशि न मिलने के कारण अस्पतालों का संचालन करना और कर्मचारियों का वेतन देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान – योगी सरकार की तत्परता से सुलझी बैंकिंग की तकनीकी समस्या, 14 मई से रुक गया था भुगतान  – तकनीकी समस्या के कारण रुक गया था अस्पतालों का 600 करोड़  रुपये का भुगतान  – 23 मई को जारी हुए 100 करोड़, अगले एक-दो दिन में 500 करोड़ रूपये का हो जाएगा भुगतान  लखनऊ  योगी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (ABPMJAY)को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसी का नतीजा है कि योजना के शुरू होने के बाद अब तक 50 लाख से अधिक मरीजों ने 91 लाख से अधिक बार अस्पतालों में अपना इलाज कराया। इसके लिए योगी सरकार द्वारा 15 हजार करोड़ से अधिक अस्पतालों को भुगतान किया जा चुका है। वहीं 14 मई से 22 मई तक बैंक में तकनीकी समस्या से अस्पतालों का भुगतान रुक गया था, जिसे ठीक करके 23 मई से दोबारा शुरू कर दिया गया है।  23 मई को अस्पतालों को किया गया 100 करोड़ रु. का भुगतान साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि 14 मई को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) और संबंधित बैंकों के बीच भुगतान फाइलों के आदान-प्रदान के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके चलते लगभग 633 करोड़ रुपये की राशि होल्ड पर चली गई थी। भुगतान प्रक्रिया बाधित होने के कारण योजना से जुड़े अस्पतालों को क्लेम राशि मिलने में देरी हो रही थी, जबकि अधिकांश दावों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी थी। तकनीकी बाधा के चलते अस्पतालों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा था, जिससे निजी और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों में चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू की। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एनएचए और संबंधित बैंकों के साथ कई दौर की बैठकें कर समस्या के समाधान के लिए लगातार समन्वय बनाए रखा। उन्होंने बताया कि 22 मई को बैंक स्तर पर आई तकनीकी समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया गया। इसके बाद 23 मई को अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर शेष लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान भी संबंधित अस्पतालों को कर दिया जाएगा। लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ा जा रहा साचीज की सीईओ ने बताया कि तकनीकी समस्या पूरी तरह दूर होने के बाद भुगतान प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू कर दी गई है। अब सूचीबद्ध अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान भेजा जा रहा है ताकि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े। उन्होंने बताया कि योगी सरकार लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ रही है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा गोल्डन कार्ड वितरण अभियान, ई-केवाईसी, हेल्प डेस्क और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित घोष ने भी योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों के भुगतान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही तकनीकी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

सुकमा: जहाँ सड़कों का अंत होता है, वहीं से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण

सुकमा जहाँ सड़कें खत्म होती हैं, वहाँ से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है रायपुर छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है। दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार            इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर              हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया। आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी              मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो। आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम             छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।  जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव            अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।             पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।

यूपी बना आयुष्मान भारत योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य, एनएचए ने किया सम्मान

आयुष्मान भारत का लाभ देने में यूपी देश में अव्वल, एनएचए ने किया सम्मानित   नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी ने पुणे में आयोजित दो दिवसीय शिविर में किया सम्मानित   प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन को मिला पुरस्कार   प्रदेश में डिजिटलीकरण और व्यापक नेटवर्क से मरीजों को मिल रही बेहतर सुविधा लखनऊ  योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। योगी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का लाभ शत-प्रतिशत लाभार्थियों को देने एवं धरातल पर उतारने में पूरे देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी (एनएचए) द्वारा पुणे में 17 और 18 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन के लिए सम्मानित किया गया। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी और साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डिजिटलीकरण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों का नतीजा है। आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों में मिल रही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सुविधा साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 6,433 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध हैं, जिनमें 3,521 निजी और 2,912 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योगी  ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान शामिल हैं, जहां एबीडीएम-इनेबेल्ड एचएमआईएस(हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) की सुविधा उपलब्ध है, जिससे मरीजों को डिजिटल और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं। पिछले एक वर्ष में प्रदेश ने उच्च गुणवत्ता वाले अस्पतालों को प्राथमिकता देते हुए सूचीबद्ध करने की नीति अपनाई है।  गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा हुई बेहतर स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि हाल ही में 100 या उससे अधिक बेड वाले 55 बड़े अस्पतालों को योजना से जोड़ा गया है। इन अस्पतालों के शामिल होने से प्रदेश में द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है, जिससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा और बेहतर हुई है। योगी सरकार ने केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया है। न्यूरोसर्जरी, नियोनेटल केयर, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और बर्न मैनेजमेंट जैसी विशेष सेवाओं को प्राथमिकता देकर प्रदेश ने स्वास्थ्य सुविधाओं को नई ऊंचाई दी है। इन सुविधाओं के विस्तार से उन मरीजों को भी राहत मिली है, जिन्हें पहले इलाज के लिए बड़े शहरों या अन्य प्रदेश का रुख करना पड़ता था। इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है। पहले जहां इन क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब आयुष्मान भारत योजना के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि गरीब और कमजोर वर्गों के लिए इलाज का आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।

जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि

रायपुर जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसे बस्तर जिले ने जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य पोर्टल द्वारा 11 मार्च 2026 तक जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिला आयुष्मान भारत और वय वंदन कार्ड वितरण के मामले में प्रदेश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो गया है। कठिन रास्तों और भाषाई विविधताओं के बावजूद जिला प्रशासन की सक्रियता का ही परिणाम है कि आज बस्तर स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में कई विकसित और शहरी जिलों को पीछे छोड़ते हुए सफलता की नई इबारत लिख रहा है यह प्रगति मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की बस्तर में सुविधाओं के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि       बस्तर की इस अभूतपूर्व सफलता की पटकथा लिखने में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उल्लेखनीय है कि जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारी के अधिकांश पदों पर महिलाओं की नियुक्ति है, जिन्होंने अपनी संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा से इस अभियान को जन-आंदोलन बना दिया है। इन महिला स्वास्थ्य अधिकारियों – कर्मचारियों ने हाट-बाजारों से लेकर सुदूर दुर्गम गाँवों तक पहुँचने की रणनीति अपनाई, जिससे भाषाई और भौगोलिक बाधाएं भी विकास की राह नहीं रोक सकीं। जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि     आयुष्मान भारत योजना के तहत शत-प्रतिशत कवरेज की दिशा में बढ़ते हुए बस्तर ने अब तक 98.2 प्रतिशत आबादी को सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है। जिले के कुल निर्धारित 7,87,364 सदस्यों के लक्ष्य के मुकाबले 7,73,468 कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो न केवल जिले की प्रशासनिक सजगता को दर्शाता है बल्कि राज्य के औसत 90.8 प्रतिशत से भी कहीं अधिक है। विशेष रूप से पारीवारिक कवरेज के मामले में तो बस्तर ने अपने लक्ष्य को पार करते हुए 116.4 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की है, जो इस बात का प्रमाण है कि जिले का हर परिवार अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में आ चुका है।        वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी वय वंदन कार्ड योजना में भी बस्तर का प्रदर्शन स्वर्णिम रहा है। जिले ने न केवल अपने लिए निर्धारित 13,640 कार्डों के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त किया, बल्कि 103.8 प्रतिशत की शानदार प्रगति के साथ अब तक 14,156 कार्ड जारी किए हैं। वर्तमान में बस्तर इस श्रेणी में समूचे छत्तीसगढ़ में तीसरे स्थान पर काबिज है। पिछले सात दिनों के भीतर जिले में लगभग 300 से ज्यादा नए कार्ड जारी किए गए हैं, जो यह स्पष्ट करता है कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने का यह अभियान अभी भी पूरी ऊर्जा के साथ जारी है।

आयुष्मान कार्ड को लेकर सरकार का नया आदेश, इन श्रेणियों के लोगों को नहीं मिलेगा मुफ्त इलाज

नई दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब नए आयुष्मान कार्ड आधार आधारित ई-केवाईसी के बाद ही जारी किए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इसके लिए बेनिफिशयरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (BIS-2.0) को लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत सभी लाभार्थियों की पहचान आधार ई-केवाईसी के माध्यम से अनिवार्य रूप से सत्यापित की जाएगी। नए सदस्य जोड़ने का विकल्प भी समाप्त इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड में नए सदस्य जोड़ने (एड मेंबर) का विकल्प भी समाप्त कर दिया गया है। अब केवल एसईसीसी-2011 के तहत शेष पात्र परिवारों में ही, निर्धारित नियमों के अनुसार नए सदस्यों को जोड़ा जा सकेगा। ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर से कार्डों की निगरानी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि संदिग्ध आयुष्मान कार्डों की पहचान स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट पोर्टल (SAFU BIS) के माध्यम से की जा रही है। एनएचए द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे कार्डों की नियमित निगरानी की जाती है। कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं इस तकनीक के जरिए संदिग्ध कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं और तत्काल उन पर इलाज की सुविधा रोक दी जाती है। इसके बाद इन कार्डों की जांच ऑडिटर द्वारा कराई जाती है। जांच में सही पाए जाने वाले कार्डों को संदिग्ध श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है। 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं अर्चना वर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 से अब तक जारी किए गए आयुष्मान कार्डों में से 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं। इनकी जांच जिला स्तर पर फील्ड इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (FIO) द्वारा की जा रही है। अब तक 48,435 कार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है। सूची भेजकर जांच के निर्देश दिए गए उन्होंने बताया कि सभी जिलाधिकारियों (डीएम), मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को संदिग्ध कार्डों की सूची भेजकर जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर उसे हटा दिया गया है।