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कोरबा जिले की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और दादरकला में बने आकर्षक बालिका शौचालय, ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान को मिल रही नई पहचान

रायपुर. शारदीय नवरात्र में जहां एक ओर पूरे प्रदेश में मातृशक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। नवरात्र के प्रथम दिन कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए निर्मित शौचालय बेटियों के सम्मान की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत कोरबा जिले के पाली विकासखंड की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत दादरकला में बालिका शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में पूर्ण हुए ये निर्माण कार्य इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ के संदेश से सजे बालिका शौचालय ग्राम पंचायत नोनबिर्री एवं दादरकला में निर्मित बालिका शौचालय को आकर्षक गुलाबी रंग और सुंदर चित्रकारी से सजाया गया है। भवन की दीवार पर बड़े अक्षरों में ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ का संदेश अंकित है। इसके साथ ही ‘स्वच्छ रहें, सुरक्षित रहें’ का संदेश भी दिया गया है। शौचालय के सामने खड़ी स्कूली बालिकाओं ने वीबी-जी रामजी के अक्षरों और स्वच्छता के प्रतीकों के माध्यम से योजना के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। बालिकाओं की यह सहभागिता दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और बेटियों के आत्मसम्मान के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है। नवरात्र में मातृशक्ति के सम्मान का साकार रूप नवरात्र का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और आराधना का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण पूर्ण होना विशेष महत्व रखता है। विद्यालयों में अलग बालिका शौचालय की उपलब्धता छात्राओं की निजता, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेष रूप से किशोरावस्था में बालिकाओं के लिए ऐसी सुविधाएं उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इससे विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में लगभग 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

सेवा संकल्प अभियान: निदान-03 शिविर से संवर रही दिव्यांगजनों की जिंदगी

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले में आयोजित तीन दिवसीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। नगरी और धमतरी में आयोजित इन शिविरों के शुरुआती दो दिनों में कुल 632 दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें एक ही छत के नीचे कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का पूरा संबल प्रदान किया गया। एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम शासकीय सुविधाएं शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। यहाँ पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक और वॉकर वितरित किए गए। साथ ही, नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक माप और प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 44 यूडीआईडी कार्ड भी प्रदान किए गए। ​शृंखला के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में भव्य शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ 460 दिव्यांगजन पहुँचे और इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न उपकरणों व सुविधाओं से लाभान्वित किया गया। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया और महापौर रामू रोहरा की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, स्मार्ट केन और वॉकर जैसी आधुनिक सामग्रियां बड़े पैमाने पर बांटी गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगजनों के बस पास, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और एम. आधार कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी तुरंत उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़े। जनसंपर्क प्रदर्शनी और जनमन पत्रिका का आकर्षण ​इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जनसंपर्क विभाग की ओर से विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई और मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ जनमन' का निःशुल्क वितरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बेहद सराहा। धमतरी कलेक्टर ने इस दौरान सभी स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण व शासकीय योजनाओं का लाभ देकर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ​इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के अंतिम दिन आज भी पंजीयन, परीक्षण और कृत्रिम अंगों के मापन की सुविधा जारी रहेगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस कल्याणकारी पहल से वंचित न रह जाए।

जशपुर में दंतैल हाथी की दस्तक, अस्पताल-कॉलेज और चर्च की बाउंड्री तोड़ी; वन विभाग अलर्ट

बिलासपुर सुबह का वक्त था. बच्चे स्कूल के हॉस्टल में थे. किसान अपने खेतों में धान की फसल को लेकर उम्मीद लगाए हैं. तभी खबर आई कि इलाके में हाथियों का झुंड पहुंच गया है. एक-दो नहीं, पूरे 53 हाथी. स्कूल की बाउंड्री टूट गई. खेतों में खड़ी फसल रौंद दी गई. अब जरा छत्तीसगढ़ के दूसरे जिले की तस्वीर देखिए. यहां हाथियों का पूरा झुंड नहीं, बल्कि एक दंतैल हाथी शहर के भीतर पहुंच गया. कभी अस्पताल परिसर, कभी कॉलेज और फिर चर्च तक. तीन जगहों की बाउंड्रीवाल टूट गई. ये दोनों घटनाएं रविवार को छत्तीसगढ़ के कोरबा और जशपुर में सामने आईं. कोरबा में 53 हाथियों के झुंड ने मिशन स्कूल और किसानों के खेतों में नुकसान पहुंचाया. वहीं, जशपुर जिले के कुनकुरी में झुंड से बिछड़ा एक दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया. वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं. सवाल ये है कि जंगल में रहने वाले हाथी स्कूल, खेत, अस्पताल और शहर तक कैसे पहुंच रहे हैं? और जब ऐसा होता है, तो इंसानों और हाथियों, दोनों को सुरक्षित कैसे रखा जाए? पहली कहानी कोरबा जिले के तेलियामार की है. यहां जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड मिशन स्कूल के पास पहुंच गया. झुंड में कुल 53 हाथी थे. हाथियों ने स्कूल की बाउंड्रीवाल तोड़ दी. स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के बीच डर का माहौल बन गया. नुकसान सिर्फ स्कूल की दीवार तक सीमित नहीं रहा. हाथियों के झुंड ने आसपास के खेतों में धान की फसल को रौंद डाला. सवाल है कि 53 हाथियों का इतना बड़ा झुंड आबादी के करीब पहुंच जाए, तो उससे निपटने की तैयारी कैसी होनी चाहिए? क्योंकि हाथियों को देखकर शोर मचाना, उनके करीब जाना या उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करना खतरे को बढ़ा सकता है. अब जशपुर की कहानी सुनिए, जहां दंतैल शहर में घुस आया दूसरी घटना जशपुर जिले के कुनकुरी की है. यहां एक दंतैल हाथी अपने झुंड से बिछड़कर रिहायशी इलाके में पहुंच गया. दंतैल यानी नर हाथी, जिसके लंबे दांत बाहर निकले होते हैं. इस हाथी की मौजूदगी ने इलाके में हलचल पैदा कर दी. वह हॉली क्रॉस मिशन हॉस्पिटल के परिसर तक पहुंच गया और वहां की बाउंड्रीवाल तोड़ दी. इसके बाद हाथी लोयला कॉलेज परिसर में पहुंचा. फिर उसकी मौजूदगी चर्च परिसर में भी देखी गई. हाथी ने कुल तीन स्थानों की बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचाया. अक्सर हाथी को देखने की उत्सुकता में लोग घरों से बाहर निकलने लगते हैं. कोई मोबाइल से वीडियो बनाना चाहता है, कोई पास जाकर उसे देखना चाहता है. लेकिन हाथी कोई ऐसा जानवर नहीं है, जिसके सामने खड़े होकर आराम से वीडियो बनाया जा सके. वह डर जाए, खुद को घिरा हुआ महसूस करे या अचानक दिशा बदल दे, तो गंभीर हादसा हो सकता है. इसीलिए वन विभाग की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हाथी की लोकेशन पता करना नहीं, बल्कि लोगों को उससे सुरक्षित दूरी पर रखना भी है. जंगल से बस्ती तक पहुंचने की वजह क्या है? सवाल है कि हाथी आबादी के करीब पहुंचते ही क्यों हैं? इसकी कोई एक वजह हर मामले में नहीं होती. हाथियों की आवाजाही पर जंगल में भोजन और पानी की उपलब्धता, उनके पारंपरिक रास्ते, जंगलों के आसपास खेती और मानवीय गतिविधियों का असर पड़ सकता है. लेकिन कोरबा और कुनकुरी की इन दोनों घटनाओं में हाथियों के आबादी तक पहुंचने की सटीक वजह सामने नहीं आई. हाथियों के रास्तों और इंसानी बस्तियों के बीच टकराव की समस्या केवल दीवार टूटने या फसल बर्बाद होने तक सीमित नहीं रहती. कई बार इससे इंसानों की जान पर खतरा पैदा हो जाता है. कोरबा के वन मंडलाधिकारी जितेंद्र शुक्ला के मुताबिक, हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही हैं. उन्होंने बताया कि हाथी ऐप के जरिए ग्रामीणों को भी हाथियों की मौजूदगी के बारे में तत्काल सूचना दी जा रही है. अधिकारी के अनुसार, जनहानि की खबर नहीं है. वन विभाग इतने बड़े झुंड पर निगरानी रखे हुए है, ताकि हाथियों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने दिया जा सके. हाथी ऐप से समय पर मिली जानकारी लोगों को सतर्क रहने का मौका देती है. अगर ग्रामीणों को पता हो कि हाथियों का झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है, तो वे उस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं और बच्चों को भी सुरक्षित रख सकते हैं. हालांकि, केवल सूचना देना ही पर्याप्त नहीं है. ऐसी घटनाओं में स्थानीय स्तर पर निगरानी, लोगों को जागरूक करना और हाथियों की आवाजाही के दौरान भीड़ को कंट्रोल करना भी होता है. हाथी दिख जाए, तो क्या नहीं करना चाहिए? अगर गांव के रास्ते में सामने हाथी दिखाई दे जाए. या फिर मोबाइल पर सूचना आए कि पास के खेत में हाथियों का झुंड मौजूद है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि हाथी के पास जाने या उसका रास्ता रोकने की कोशिश करने से बचा जाए. हाथी को घेरने या उसे उकसाने से बचना चाहिए. उसके सामने भीड़ लगाकर वीडियो नहीं बनाना चाहिए. बच्चों और दूसरे लोगों को हाथी के करीब नहीं जाने देना चाहिए. स्थानीय वन विभाग को जानकारी देनी चाहिए. सुरक्षित दूरी बनाए रखकर वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए. खासकर जब हाथियों का बड़ा झुंड मौजूद हो, तब यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है कि वे किस दिशा में जाएंगे. इसलिए उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करने के बजाय वनकर्मियों को स्थिति संभालने देना ज्यादा सुरक्षित है. कोरबा में 53 हाथियों का झुंड मिशन स्कूल की बाउंड्री तोड़कर खेतों तक पहुंचा. जशपुर के कुनकुरी में एक दंतैल हाथी अस्पताल, कॉलेज और चर्च परिसर तक पहुंच गया. एक तरफ स्कूल में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा का सवाल है, दूसरी तरफ किसानों की मेहनत से तैयार होती फसल का. और इन सबके बीच उन लोगों की चिंता भी है, जिन्हें रोजमर्रा के काम के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है. फिलहाल वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है.    

छत्तीसगढ़ में खाद खरीदने का बदलेगा तरीका, किसानों को मोबाइल ऐप से करनी होगी खरीदी

दुर्ग. किसानों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग उर्वरक विक्रय की नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर रहा है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को अब खरीफ और रबी सीजन की खेती के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की खरीदी करनी होगी। रबी सीजन में किसानो को टोकन के माध्यम से खाद मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली को पहले गरियाबंद एवं बीजापुर जिलों में मॉडल के रूप में संचालित किया गया था। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब रबी सीजन 2026-27 से इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है। यह किसानों के लिए नई व्यवस्था होगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण को सुव्यवस्थित करना, कालाबाजारी पर नियंत्रण रखना तथा किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में होने वाली अनावश्यक परेशानियों को कम करना है। नई प्रणाली के माध्यम से पीओएस मशीन से अनिवार्य विक्रय, उपलब्ध स्टाक का रियल टाइम मिलान, पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं आधार लिंकिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे उर्वरकों की अग्रिम मांग का आकलन करने, भंडारण एवं वितरण की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने तथा अमानक उर्वरकों और कालाबाजारी पर निगरानी मजबूत करने में सहायता मिलेगी। टोकन के लिए करना होगा यह प्रक्रिया नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से उर्वरक खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। जिन किसानों के पास स्वयं का मोबाइल फोन नहीं है, वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस फर्टिलाइजर ऐप इंस्टाल कर आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद टोकन अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से नजदीकी निर्धारित केंद्र से अनुशंसित मात्रा में उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़: औंधी में लावारिस हालत में मिले जहरीले कीटनाशक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

औंधी/मानपुर/राजनांदगांव. मोहला मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के अति संवेदनशील व महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्र आंधी तहसील मुख्यालय से कृषि विभाग की घोर आपराधिक लापरवाही और पदीय शक्तियों के दुरुपयोग का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। औधी स्थित दो गोदामों के ठीक बीच के खुले परिसर में भारी मात्रा में जहरीले कीटनाशक, जैव- उर्वरक और रासायनिक पैकेजिंग सामग्री को लावारिस हालत में फेंक दिया गया है। मौके पर किए गए इन्वेस्टिगेटिव सर्वे में साफ देखा गया कि सड़क किनारे फैले इस जहरीले रासायनिक कचरे में Profen 44 जैसे जानलेवा तरल कीटनाशक, Coral जैव उर्वरक और घनश्याम खाद की सैकड़ों बोतलें, सीलबंद पैकेट और बोरियां लावारिस पड़ी सड़ रही हैं। लगातार पड़ रही धूप और बारिश के कारण इन बोतलों से जहरीले रसायनों का रिसाव होकर मिट्टी और भूजल में मिल रहा है, जिससे स्थानीय वनांचल के गरीब मवेशियों, बच्चों और आसपास के पेयजल स्रोतों पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। इस पूरे भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों का रवैया और भी गैर- जिम्मेदाराना नजर आ रहा है। जब मामले को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी गोविंद मानपुर धुर्वे से सवाल किए गए, तो उन्होंने ऑन रिकॉर्ड यह तो स्वीकार किया कि रसायनों को इस तरह खुले मैदान में फेंकना नियम विरुद्ध, खतरनाक और गैर- कानूनी है, लेकिन अपनी गर्दन बचाने के लिए पूरा ठीकरा सात साल पुराने कर्मचारियों पर फोड़ दिया। अधिकारी का दावा है कि यह सामग्री लगभग सात से आठ साल पुरानी है, जिसे तत्कालीन कर्मचारियों द्वारा समय पर किसानों को वितरित नहीं किया गया था। अधिकारी ने यह भी माना कि नियमानुसार एक्सपायर दवाओं को बाकायदा गड्ढा खोदकर डीकंपोज यानी सुरक्षित विनिष्ट किया जाना चाहिए था, न कि इस तरह खुले में फैलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ करना चाहिए था। अधिकारी के इस रटे-रटाए जवाब ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सात साल पुराना मामला बताकर अफसर अपनी आपराधिक जवाबदेही से बच सकते हैं? अगर दवाइयां सात साल पुरानी थीं, तो इतने वर्षों में जितने भी अधिकारी और गोदाम प्रभारी बदले, उन्होंने प्रभार हस्तांतरण और भौतिक सत्यापन के दौरान इस अनुपयोगी स्टॉक का रिकॉर्ड उच्च कार्यालय को क्यों नहीं भेजा ? हर साल होने वाले सरकारी ऑडिट में लाखों रुपये का यह सरकारी माल कागजों में दर्ज क्यों नहीं हुआ? क्या साक्ष्य मिटाने और सरकारी चोरी छुपाने की नीयत से इस रासायनिक कचरे को हाल ही में गोदाम के अंदर से निकालकर खुले मैदान में फेंका गया है? मीडिया में मामला उजागर होने और साक्ष्य सामने आने के बाद अब विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर पल्ला झाड़ने में जुट गए हैं। वर्तमान में पदस्थ अधिकारियों का कहना है कि उनके चार्ज लेने से पहले यह सामग्री वहां नहीं थी, जबकि स्थानांतरित गए पूर्व अफसरों का दावा है कि माल गोदाम के भीतर ही था। वनांचल क्षेत्र का गरीब किसान साल-दर-साल खाद-बीज और कीटनाशकों के लिए तरसता रहा और दूसरी तरफ जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई शासकीय दवाइयां अफसरों की नाकामी से गोदामों में सड़ती रहीं।

भिलाई में विकास को मिलेगी रफ्तार, 662 करोड़ के फंड से निगम पूरा करेगा 5 बड़े प्रोजेक्ट

भिलाई नगर. नगर निगम भिलाई ने अर्बन चैलेंज फंड के तहत पीपीपी मोड़ पर 5 बड़ी परियोजनाओं के लिए 662 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एमआईसी में रखा है। इसमें केंद्र का हिस्सा 25% यानी 165.50 करोड़ और बैंक, बाहरी स्रोत से 50% यानी 496.50 करोड़ जुटाया जाएगा। पीपीपी मोड पर कुल परियोजना लागत करोड़ रुपए केंद्र का हिस्सा 25% रुपए करोड़ बैंक, बाहरी स्रोत 25% / 50% करोड़ रुपए परियोजना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है। आकाश गंगा सुपेला मार्केट शहरी पुनविर्कास, सुपेला मुख्य बाजार 45 वर्ष पुराना परिसर तोड़कर आकाश गंगा के रूप में नया निर्माण बहुमंजिला नया व्यावसायिक परिसर कई प्रकार के व्यवसाय पूरे निगम की नीलामी / विक्री से निर्माण लागत का 50% क्रॉस-सब्सिडी मॉडल। एसटीपी से उपचारित गंदे पानी का उद्योग में पुनः भिलाई नगर निगम का 150 एमएलडी एसटीपी उपचारित पानी उद्योगों को बेचा जाएगा। शीतल कॉम्प्लेक्स बहुमंजिला मार्केट पुनविर्कास, शीतल मार्केट, पावर हाउस क्षेत्र 150 पुरानी दुकानों तोड़कर नया निर्माण बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर, फूड जोन, आधुनिक दुकानें, व्यवस्थित पार्किंग नगर निगम की नीलामी, बिक्री से निर्माण लागत का 50% क्रॉस-सब्सिडी मॉडल, प्रियदर्शिर्नी परिसर में 6 मंजिला व्यावसायिक परिसर उत्तरी गंगा विस्तार क्षेत्र में प्रमुख व्यावसायिक विकास, परिसर की बिक्री, किराया क्षेत्र में जमीन के मूल्य में वृद्धि होगी।

डोंगरगढ़ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, सुरक्षा के लिए बाइपास तक बनाया गया सेफ कॉरिडोर

भिलाई नगर. नवरात्रि पर्व के दौरान दुर्ग पुलिस ने डोंगरगढ़ दर्शन के लिए जाने वाले पैदल श्रद्धालुओं तथा वाहन चालकों के सुगम व सुरक्षित आवागमन हेतु कुम्हारी से अंजोरा बाईपास तक विशेष रूट निर्धारित कर कॉरिडोर बनाया गया है। इस दौरान 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक 03 पेट्रोलिंग वाहन लगातार 24 घंटे मार्ग पर तैनात रहेंगे। जो पेट्रोलिंग वाहन लाउडस्पीकर के माध्यम से पदयात्रियों को बाएं चलने और यातायात सुचारू रखने के निर्देश देंगे। पदयात्रियों की सुविधा व सुरक्षा हेतु मार्ग में अस्थायी पुलिस सहायता केंद्र भी बनाये जा रहे है। कुम्हारी टोल प्लाजा सिरसा गेट चौक डबरापारा तिराहा – खुर्सीपार तिराहा- पावर हाउस अंडरब्रिज मुर्गा चौक सेंट्रल एवेन्यू सेक्टर- 09 चौक -ठगड़ा बांध ओवरब्रिज जेल तिराहा गौरव पथ – गांधी पुतला – पटेल चौक गंजपारा पुलगांव चौक – शिवनाथ नदी ब्रिज -अंजोरा बाइपास – राजनांदगांव होते हुए डोंगरगढ़ जाएंगे। वहीं दुर्ग शहर एवं सेक्टर एरिया की यातायात व डायवर्शन व्यवस्था की है। पावर हाउस अंडरब्रिज से मुर्गा चौक / सेंट्रल एवेन्यू की ओर जाने वाले सभी चार पहिया वाहनों को फॉरेस्ट एवेन्यू एवं गैरेज रोड की ओर डायवर्ट किया जाएगा और दुर्ग से सेंट्रल एवेन्यू की ओर आने वाले चार पहिया वाहनों को भी सेक्टर 09 चौक से फॉरेस्ट एवेन्यू एवं गैरेज रोड में डायवर्ट किया जाएगे। वहीं दुर्ग शहर (रात्रि नो एंट्री एवं बस, डायवर्शन भी किया है। भारी / मध्यम वाहन प्रतिबंधितः रात्रि के समय शहर के भीतर मध्यम एवं भारी वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र पुलगांव चौक, पोटिया चौक, महाराजा चौक, जेल तिराहा, गुरुद्वारा तिराहा, धमधा रोड, नयापारा से दुर्ग शहर की ओर ) गंजपारा दुर्गा पंडाल व्यवस्था में गंजपारा दुर्गा पंडाल के पास रात्रि में पुलिस लाइन एवं गंजपारा से आने वाले सभी दो पहिया व चार पहिया वाहनों को गंज मंडी के पीछे से डायवर्ट किया जाएगा। वहीं बस डायवर्जन में रात्रि के समय पुलगांव चौक से आने वाली सभी बसों को महाराजा चौक- जेल तिराहा होते हुए बस स्टैंड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। इसी प्रकार दुर्ग बस स्टैंड से पुलगांव की ओर जाने वाले बस इसी मार्ग का उपयोग करेंगे।

छत्तीसगढ़: बिलासपुर में 21 आजीवन कैदियों को मिली राहत, अच्छे व्यवहार के चलते रिहाई

बिलासपुर. अच्छे व्यवहार, अनुशासन और बेहतर आचरण ने जेल की सलाखों के पीछे जीवन बिता रहे 21 कैदियों के लिए नई उम्मीद का रास्ता खोल दिया. बिलासपुर केंद्रीय जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 21 कैदियों को रिहा किया गया है. इनमें 20 पुरुष और एक महिला कैदी शामिल हैं. इन सभी ने जेल में करीब 14 साल या  उससे अधिक समय बिताया है. जेल में उनके व्यवहार और आचरण को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर उनकी रिहाई का निर्णय लिया गया. इस फैसले को कैदियों के जीवन में सुधार लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता पिछले कुछ महीनों से लगातार बिलासपुर केंद्रीय जेल का दौरा कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कैदियों से जुड़े विभिन्न मामलों पर गंभीरता से ध्यान दिया. साथ ही, कैदियों की मानसिक स्थिति, जेल में उनके व्यवहार और आचरण को समझने पर विशेष जोर दिया गया. जेल अधीक्षक के मुताबिक, डीजी हिमांशु गुप्ता ने ऐसे कैदियों को रिहा कर समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने के लिए शासन स्तर पर पहल की, जिनका जेल में रहते हुए आचरण अच्छा रहा है और जिन्होंने अनुशासन का पालन किया है. इसी पहल के तहत 21 आजीवन कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ. जेल से रिहा हुए कैदियों के लिए यह केवल सलाखों से बाहर आने का अवसर नहीं, बल्कि अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने की उम्मीद भी है. लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब उन्हें समाज के बीच लौटकर सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा. इस पहल का उद्देश्य अन्य कैदियों को भी सकारात्मक व्यवहार और अनुशासन के लिए प्रेरित करना है. जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने कहा कि राज्य शासन के द्वारा आज 21 दंडित बंदियों को शासन माफी के तहत आजीवन कारावास के बंदियों को रिहा किया गया है. कुछ को निर्शत कुछ को सर्शत मुचलका के द्वारा छोड़ा गया है. सभी बंदी 14 से 16 साल तक की सजा काट चुके है.

छत्तीसगढ़: बिलासपुर में छात्राओं का प्रदर्शन लाया रंग, प्राचार्य और दो व्याख्याताओं पर गिरी गाज

बिलासपुर. मल्हार के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शैक्षणिक वातावरण को बिगाड़ने, छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करने और गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. कलेक्टर के अनुमोदन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राचार्य सहित तीन शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से अन्य संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया गया है. इसके साथ ही छात्राओं की जीत हुई है. मल्हार स्कूल में विद्यालयीन प्रशासनिक व्यवस्था और छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार को लेकर जनप्रतिनिधियों और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से लगातार शिकायतें मिल रही थीं. एक अक्टूबर को विद्यालय की छात्राओं ने सीधे कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर प्राचार्य एवं अन्य शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. मामले की गंभीरता को देख जिला प्रशासन द्वारा एक त्रिस्तरीय जांच दल का गठन किया गया था. जांच दल ने 7 अक्टूबर को अपना विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें कई गंभीर खुलासे हुए. इसमें पाया गया कि स्कूल के प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार, सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने में अनियमितता, शाला शुल्क के नाम पर प्रति छात्र 500 रूपए की अतिरिक्त अवैध वसूली और शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही मिली. इसी तरह व्याख्याता संजय दुबे छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार और अन्य प्रशासनिक व शैक्षणिक अनियमितताएं के आरोप सही पाए गए. व्याख्याता अर्थशास्त्र रश्मि गुप्ता छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार तथा उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन व अध्यापन कार्य भृत्य से कराए जाने जैसी गंभीर लापरवाही पाया गया. विद्यार्थियों के भविष्य, विद्यालय में स्वच्छ शैक्षणिक माहौल और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन के आगामी आदेश तक तीनों प्राचार्य और दोनों व्याख्याताओं को अन्य संस्थाओं में अस्थायी रूप से कार्य करने के लिए आदेशित किया गया है. इसमें प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला को मल्हार से स्थानांतरित कर शासकीय हाई स्कूल कुकुदीर्केरा विकासखंड मस्तूरी भेजा गया है. व्याख्याता संजय दुबे को मल्हार से स्थानांतरित कर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर विकासखंड मस्तूरी और व्याख्याता रश्मि गुप्ता को मल्हार से स्थानांतरित कर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी विकासखंड मस्तूरी भेजा गया है. जहां शासन के आगामी आदेश तक काम करेंगे. इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

CG Voter Update: वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का मौका, BLO घर-घर जाकर करेंगे सर्वे

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) यशवंत कुमार ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से छूटे हुए और पात्र नए नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए एक महीने के विशेष अभियान की घोषणा की है. इस पहल के तहत, जो लोग इस वर्ष फरवरी में संपन्न हुए SIR अभ्यास के दौरान घर पर अनुपस्थित रहने या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होने के कारण नामांकित होने से वंचित रह गए थे, उन्हें वोटर लिस्ट में जोड़ने का अवसर दिया जाएगा।  निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें केवल वर्तमान में 18 वर्ष पूर्ण कर चुके युवा ही नहीं, बल्कि 17 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके वे किशोर भी अग्रिम पंजीकरण करा सकेंगे, जो अगले एक वर्ष के भीतर 18 वर्ष के होने वाले हैं।  अभियान को प्रभावी बनाने के लिए बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे. इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बुधवार और गुरुवार को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।  युवा और संभावित मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर शुक्रवार और शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे. CEO यशवंत कुमार ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और कोई भी पात्र नागरिक किसी भी समय इसके लिए आवेदन कर सकता है।  दूसरी ओर, इस घोषणा का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि वे इस विशेष अभियान की लगातार मांग और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि SIR के बाद मतदाता सूची से बाहर रहे सभी 24 लाख लोगों तक पहुँच बनाकर उन्हें अपने दावों के सत्यापन का पूरा अवसर प्रदान किया जाए. उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले 2.12 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के बाद केवल 1.87 करोड़ लोगों के नाम ही सूची में रह गए हैं।