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अग्निवीरों के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस में नौकरी का मौका

रायपुर राज्य सरकार ने गृह विभाग में आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इन पदों पर भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रविधान पहले ही किया जा चुका है। उनके अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य सेवाओं में लेने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने राज्य शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके तहत 'आदिम जाति विकास विभाग' का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा। पीएम मोदी की 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा पर कैबिनेट में अभिनंदन प्रस्ताव पारित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूरे होने पर बैठक में अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों को समर्पित कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक फैसलों के लिए केंद्र का आभार कैबिनेट ने जैम, जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और माओवादी हिंसा से मुक्ति सहित राष्ट्रहित में केंद्र सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों का अभिनंदन किया। सहकारी संघवाद के जरिए छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग के लिए केंद्र का आभार भी जताया।

सेवा संकल्प से संवरती ज़िंदगी: अब नारायणपुर के दूरस्थ अबुझमाड़ (कुतुल) के नयापारा में भी पहुंचेगा शुद्ध पेयजल

रायपुर.  ​छत्तीसगढ़ सरकार के 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत राज्य के अंतिम छोर पर बसे वनांचल और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार अब ज़मीनी हक़ीकत बनता जा रहा है। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र ग्राम परपा (कुतुल) के नयापारा में नलकूप खनन का कार्य तेज़ी से प्रारंभ कर दिया गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आवागमन के बावजूद शुरू की गई इस पहल से स्थानीय ग्रामीणों को जल्द ही घर के समीप शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की सौगात मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र में विकास की एक नई किरण जगी है। ​वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना केवल एक बुनियादी सुविधा का विस्तार नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को सीधे तौर पर बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कुतुल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ भौगोलिक विसंगतियाँ और आवागमन की दुश्वारियाँ विकास कार्यों के क्रियान्वयन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना देती हैं, वहाँ प्रशासन की यह पहल स्थानीय लोगों के जीवन को सुगम बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। पारंपरिक स्रोतों से पानी ढोने की मजबूरी झेल रहे परिवारों के लिए यह नलकूप खनन किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। ​इस महत्वपूर्ण पहल के धरातल पर उतरने से ग्रामीण महिलाओं और परिवारों को अपनी दैनिक ज़रूरतों के लिए पानी जुटाने की लंबी और श्रमसाध्य मशक्कत से राहत मिलेगी। घर के नज़दीक ही स्वच्छ जल उपलब्ध होने से न केवल उनका बहुमूल्य समय बचेगा, बल्कि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग अन्य रचनात्मक व आजीविका संबंधी कार्यों में कर सकेंगे। इसके साथ ही, सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों के खतरे को कम करने तथा ग्रामीण आंचल में बेहतर स्वास्थ्य संबंधी आदतों को बढ़ावा देने में भी बड़ी मदद मिलेगी। ​नारायणपुर जिले के इन दूरस्थ अंचलों में जल स्रोतों का विकास और उनका सुचारू रखरखाव इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य शासन हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। नलकूप खनन का कार्य पूरा होने के बाद पानी की गुणवत्ता की विशेष रूप से जाँच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ग्रामीणों को पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित पेयजल प्राप्त हो। यह सकारात्मक पहल न केवल नयापारा के निवासियों के जीवन को आसान बना रही है, बल्कि यह विश्वास भी दिलाती है कि विकास की धारा अब राज्य के हर कोने तक पहुँच रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को नवरात्रि से पहले बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गन्ना बोनस की गणना का आधार ₹355 से बढ़ाकर ₹425 प्रति क्विंटल कर दिया है। इस निर्णय से पेराई सत्र 2025–26 में प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ना आपूर्ति करने वाले 31,022 किसानों को लगभग ₹51.09 करोड़ की बोनस राशि प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर प्रदेश के गन्ना किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बोनस की बढ़ी हुई राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी। यह निर्णय प्रदेश में गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा। पेराई सत्र 2025–26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी ₹329.05 प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार ₹425 में से एफआरपी घटाने पर किसानों को ₹95.95 प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा।  इस निर्णय के तहत भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा के 14,961 किसानों को लगभग ₹24.55 करोड़ तथा सरदार पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया के 8,049 किसानों को लगभग ₹11.68 करोड़ की बोनस राशि मिलेगी। इसी प्रकार महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, केरता के 7,250 किसानों को लगभग ₹11.35 करोड़ और दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद के 762 किसानों को लगभग ₹3.52 करोड़ का बोनस प्राप्त होगा।

हरलीन देओल ने बढ़ाया हॉकी खिलाड़ियों का हौसला, उप मुख्यमंत्री अरुण साव की पहल से आयोजित हुआ प्रेरणादायक कार्यक्रम

रायपुर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी हरलीन देओल ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की रायपुर आवासीय हॉकी अकादमी के खिलाडि़यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी खिलाडि़यों से आत्मीय संवाद किया और अपने खेल जीवन के अनुभव साझा किए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी से मिलकर अकादमी के बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उप मुख्यमंत्री तथ खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ की पहल पर हरलीन देओल हॉकी अकादमी आई थीं। राज्य के युवा खिलाडि़यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने वाली खिलाड़ी के अनुभवों से परिचित कराने तथा उन्हें अपने खेल जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करने हरलीन अकादमी पहुंची थीं। खिलाडि़यों को दिया सफलता का मंत्र हरलीन देओल ने खिलाडि़यों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अकादमी में उपलब्ध खेल सुविधाओं, प्रशिक्षण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने बच्चों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन के साथ नियमित अभ्यास करने और भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए खेलने का सपना देखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, आप मेहनत कीजिए, अपने लक्ष्य के लिए पूरी लगन से प्रयास कीजिए। भगवान भी आपकी मदद करेंगे। अपने ऊपर विश्वास रखिए और देश के लिए खेलने का सपना जरूर देखिए। अपने खेल जीवन के अनुभव साझा करते हुए हरलीन देओल ने बताया कि सफलता प्राप्त करने के लिए प्रतिभा के साथ कड़ी मेहनत, धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने खिलाडि़यों को अपनी कमियों को पहचानने, उनमें सुधार करने और हर दिन पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। मेंटर के रूप में हरलीन देओल के अनुभवों से मिली सीख एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से सीधे संवाद करने का अवसर युवा खिलाडि़यों के लिए विशेष महत्व रखता है। हरलीन देओल के अनुभवों से खिलाडि़यों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, दबाव की परिस्थितियों में आत्मविश्वास बनाए रखने, असफलताओं से सीखने और निरंतर अपने प्रदर्शन में सुधार करने की प्रेरणा मिली। क्रिकेट और हॉकी अलग-अलग खेल हैं, लेकिन दोनों में सफलता के लिए अनुशासन, फिटनेस, मानसिक मजबूती, टीम भावना और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता महत्वपूर्ण है। हरलीन देओल के अनुभव ने हॉकी खिलाडि़यों को इन गुणों को अपने खेल में विकसित करने की प्रेरणा दी। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से संवाद के माध्यम से खिलाडि़यों को यह समझने का अवसर मिला कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर मेहनत, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन भी आवश्यक हैं। दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आए खिलाडि़यों को भी मिला प्रोत्साहन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की आवासीय हॉकी अकादमी में प्रदेश के दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आए प्रतिभाशाली बच्चे भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ये खिलाड़ी अपने घर-परिवार से दूर रहकर अपनी प्रतिभा को निखारने और भविष्य में देश के लिए खेलने का सपना साकार करने की दिशा में प्रयासरत हैं। अकादमी में उपलब्ध प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से इन खिलाडि़यों को अपनी खेल क्षमता विकसित करने का अवसर मिल रहा है। ऐसे में हरलीन देओल जैसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से मुलाकात उनके लिए काफी प्रेरक है।  हरलीन देओल के अनुभवों ने इन बच्चों को यह संदेश दिया कि भौगोलिक दूरी या शुरुआती संसाधनों की सीमाएं उनके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ वे भी बड़े लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम खिलाडि़यों का मनोबल बढ़ाने और उनमें देश के लिए खेलने की आकांक्षा को मजबूत करने में सहायक होते हैं। खिलाडि़यों के साथ बिताए यादगार पल मुलाकात और बातचीत के दौरान हरलीन देओल ने प्रत्येक खिलाड़ी के साथ व्यक्तिगत रूप से फोटो खिंचवाया और उनके साथ समय बिताया। खिलाडि़यों ने उनके साथ बातचीत की और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर प्राप्त किया। उनके साथ बिताए गए ये पल अकादमी के बच्चों के लिए यादगार बन गए। खेल अधिकारी और प्रशिक्षक भी रहे मौजूद इस अवसर पर खेल अधिकारी श्री शिवराज साहू, हॉकी प्रशिक्षक श्रीमती रश्मि तिर्की, सॉफ्टबॉल प्रशिक्षक श्री टी.एन. रेड्डी सहित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने खिलाडि़यों को नियमित अभ्यास करने, अकादमी में उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाने तथा अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश और देश का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

छत्तीसगढ़ को मिलेंगी 240 इलेक्ट्रिक बसें, सस्ता और प्रदूषणमुक्त सफर होगा आसान; नवंबर से शुरुआत

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में 240 इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव की मौजूदगी में आज चारों नगर निगमों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इन चारों शहरों ने ई-बस संचालन शुरू करने की दिशा में आज बड़ा कदम बढ़ाया है। विभाग आगामी नवम्बर में बिलासपुर और भिलाई में 20-20 ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने की तैयारी में है। नागरिकों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मिलेगी उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नवा रायपुर में अपने निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षर कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा स्वच्छ, हरित और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बढ़ते शहरीकरण के साथ यातायात, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता और ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दर्शनीय स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना जरूरी है। ई-बस सेवा से नागरिकों को बेहतर परिवहन विकल्प मिलेगा और शहरों को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। इसके लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में 50-50 तथा कोरबा में 40 बसें चलेंगी योजना के प्रथम चरण में रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 और कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नवम्बर-2026 तक भिलाई और बिलासपुर में प्रतीकात्मक रूप से 20-20 बसों का संचालन शुरू करने की योजना है।   मोबाइल स्कैनर से भुगतान और ऑनलाइन टिकट की सुविधा होगी यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ई-बस में छह कैमरे लगाने का प्रावधान है। मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी मिल सकेगी। इलेक्ट्रिक बसों से कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। वहीं, चार्जिंग स्टेशन, रखरखाव केंद्र और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यक्रम में योजना के उद्देश्यों और संचालन की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और परिवहन की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण आवश्यक है। योजना की सफलता के लिए चार्जिंग व्यवस्था, डिपो, बस-स्टॉप और रखरखाव केंद्र सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास, विभागीय समन्वय और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करना जरूरी है। उन्होंने नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप परिवहन सुविधाएं विकसित करने तथा संचालन की तैयारियों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री नीलेश महादेव क्षीरसागर, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री पंकज गांधी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। 5 नगरीय निकायों के महापौर भी हुए शामिल ई-बस सेवा वाले नगरीय निकायों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कोरबा की महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर श्रीमती अलका बाघमार और बीरगांव के महापौर श्री नंदलाल देवांगन मौजूद थे। रायपुर नगर निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा, बिलासपुर के आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे, कोरबा के आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय, भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरुचि सिंह, दुर्ग की आयुक्त श्रीमती लीना कोसम, रिसाली की आयुक्त श्रीमती मोनिका वर्मा और भिलाई-चरोदा के आयुक्त श्री दशरथ सिंह राजपूत भी इस दौरान उपस्थित थे। बसों के कट-आउट और रंग का हुआ विमोचन प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ ही चारों निकायों में चलने वाली बसों के रंग और कट-आउट का भी विमोचन किया गया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता श्री सुनील सिंह और सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील अग्रहरि भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश कुमार बंसल ने सड़कों, पुलों और भवनों का किया निरीक्षण, अधिकारियों और ठेकेदारों को समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश

रायपुर.  बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। सचिव बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सचिव बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी। सचिव बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।

धमतरी में ’निदान-03’ शिविर: दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन को सुगम बनाने की ऐतिहासिक पहल

रायपुर धमतरी के इंडोर स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस अभिनव शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सहज व सुविधाजनक बनाना था। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन के अंतिम दिन भी जिलेभर से पहुंचे दिव्यांगजनों और बुजुर्गों ने अपने परिजनों के साथ पहुंचकर शिविर का अभूतपूर्व लाभ उठाया। शिविर स्थल पर सुबह से ही जरूरतमंदों का तांता लगा रहा, जहां विशेषज्ञों की टीम ने दिव्यांगजनों की आवश्यकता का आकलन कर उन्हें कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, व्हीलचेयर और श्रवण यंत्र जैसे महत्वपूर्ण सहायक उपकरण निःशुल्क प्रदान किए। आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की ओर कदम इस विशेष आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण यह रहा कि बुजुर्गों और दिव्यांगों को अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई, क्योंकि एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुए उनकी आंखों और कानों की बारीकी से जांच की गई और मौके पर ही उन्हें चश्मे तथा सुनने की मशीनें वितरित की गईं, जिससे उनके दैनिक जीवन की कई बाधाएं दूर हो गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगता प्रमाण पत्र, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र यानी यूडीआईडी, बस पास और एम-आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया भी सुगमता से पूरी की गई। ‘निदान-03’ शिविर ने समाज के उपेक्षित और जरूरतमंद वर्गों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन करने के अवसर प्रदान कर यह साबित कर दिया है कि संवेदनशीलता और प्रशासन की संयुक्त इच्छाशक्ति से समाज के अंतिम छोर तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन प्राप्त करने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी

रायपुर छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण, जैविक उत्पादों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज के लिए यह प्रमाणन मिला है। इस उपलब्धि से बस्तर के प्राकृतिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की नई राह खुली है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी सभी महिलाओं और बिहान मिशन की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए स्थानीय संसाधनों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय भागीदारी पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ा रही है। इस मॉडल में महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग प्रमुख आधार हैं। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर की धरती प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है और यहां की महिलाएं पीढि़यों से वनोपज के संग्रहण एवं संरक्षण का कार्य करती आ रही हैं। एनपीओपी प्रमाणन मिलने से उनके परिश्रम और पारंपरिक ज्ञान को औपचारिक पहचान मिलेगी। अब दंतेवाड़ा के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे संग्राहकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होने की उम्मीद है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक प्रमाणन केवल उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान नहीं है, बल्कि यह बस्तर की महिलाओं की मेहनत और सामूहिक उद्यमशीलता को नई पहचान दिलाने का माध्यम भी है। वनोपज के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही काम के अवसर मिलेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। श्री शर्मा ने कहा कि शासन की मंशा है कि बस्तर के ऐसे गांवों, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों और रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है, वहां के कृषि उत्पादों और वनोपज को निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ा जाए। इससे बस्तर की प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पादन प्रणाली को विशिष्ट पहचान मिलेगी। साथ ही स्थानीय समुदायों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य, बेहतर बाजार और स्थायी आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘दण्डक ब्रांड’ बस्तर की मेहनतकश महिलाओं, समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय उत्पादों को एक साझा पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 1080 महिला शेयरधारक, 60 उत्पादक समूह और एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनकी आजीविका बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है। वर्तमान में कंपनी से 1080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से जुड़ी 2100 वनोपज संग्राहक दीदियां भी कंपनी की गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। ये महिलाएं स्थानीय स्तर पर वनोपज के संग्रहण और विपणन से जुड़ी हैं। कंपनी के माध्यम से इन महिलाओं को संगठित बाजार व्यवस्था, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बेहतर कीमत प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया है। पिछले वर्ष लगभग 54 लाख रुपए के उत्पादों की बिक्री की गई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 50 लाख रुपए से अधिक के वनोपज की खरीदी की जा चुकी है। एनपीओपी प्रमाणन मिलने के बाद इन उत्पादों के बेहतर मूल्य पर विपणन की उम्मीद है। कंपनी अब केवल वनोपज की खरीदी-बिक्री तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के माध्यम से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।

विष्णु देव साय कैबिनेट के 2 बड़े फैसले, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी पत्रकार-वार्ता में उपस्थित थे। कैबिनेट की बैठक में पूर्व अग्निवीरों को राज्य की सेवाओं में अवसर देने और आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलने से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने पत्रकार-वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 25 वर्षों में हुए विकास कार्यों और छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार से मिले सहयोग का भी उल्लेख किया। पूर्व अग्निवीरों को आरक्षक भर्ती में मिलेगा अवसर छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध पूर्व अग्निवीरों की भर्ती की अनुमति प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। इस फैसले से पूर्व अग्निवीरों को राज्य की पुलिस सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी। आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर होगा जनजातीय कार्य विभाग कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके तहत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में लगातार 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल उपलब्धि का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों पर आधारित एक असाधारण कार्ययात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और मंत्रिपरिषद की ओर से प्रधानमंत्री के कर्मयोग, जनसेवा और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घकालीन राष्ट्रसेवा की कामना भी की। निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर किए गए सुधार पत्रकार-वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कई नीतिगत और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ के तहत औद्योगिक अनुमतियों को सरल बनाया गया है। निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर स्वतः स्वीकृति यानी डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान किया गया है। प्रस्तुत विवरण के अनुसार, राज्य में 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। इनके परिणामस्वरूप 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रधानमंत्री आवास और आयुष्मान भारत योजना से लाखों परिवारों को लाभ मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख पक्के आवास पूरे हुए हैं। पिछले पौने तीन वर्षों में 11.78 लाख आवास बनाए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 2.49 करोड़ पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनाए गए हैं। वहीं, 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग 11,877 करोड़ रुपये का निःशुल्क उपचार मिला है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 39.73 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए जाने की जानकारी भी दी गई। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 68 लाख माताओं और बहनों को प्रतिमाह 1,000 रुपये यानी सालाना 12,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को आर्थिक संबल और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा पत्रकार-वार्ता में कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ छत्तीसगढ़ के 26.57 लाख किसानों के खातों तक पहुंचा है। राज्य में धान उपार्जन 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के स्तर पर पहुंचने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं और सहयोग से किसानों, महिलाओं, गरीब परिवारों तथा जनजातीय समुदायों के विकास को गति मिली है। बस्तर में विकास और नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों का उल्लेख मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षा बलों के साहस से 31 मार्च 2026 को नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। उन्होंने बताया कि नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से 2,080 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिली है। आत्मसमर्पण करने वाले कैडर और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15,000 आवास स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी से संबंधित विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ से विकसित भारत 2047 का लक्ष्य मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है। इसका उद्देश्य विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के माध्यम से विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि खनिज और ऊर्जा संसाधन, मेहनती किसान, सशक्त महिलाएं, युवा शक्ति, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और निवेश के अनुकूल वातावरण राज्य की प्रमुख ताकत हैं। सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा बोले – जैविक प्रमाणन से बस्तर के वनोपज को मिलेगा वैश्विक बाजार, महिलाओं और युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण, जैविक उत्पादों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज के लिए यह प्रमाणन मिला है। इस उपलब्धि से बस्तर के प्राकृतिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की नई राह खुली है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी सभी महिलाओं और बिहान मिशन की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए स्थानीय संसाधनों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय भागीदारी पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ा रही है। इस मॉडल में महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग प्रमुख आधार हैं। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बस्तर की धरती प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है और यहां की महिलाएं पीढ़ियों से वनोपज के संग्रहण एवं संरक्षण का कार्य करती आ रही हैं। एनपीओपी प्रमाणन मिलने से उनके परिश्रम और पारंपरिक ज्ञान को औपचारिक पहचान मिलेगी। अब दंतेवाड़ा के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे संग्राहकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होने की उम्मीद है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक प्रमाणन केवल उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान नहीं है, बल्कि यह बस्तर की महिलाओं की मेहनत और सामूहिक उद्यमशीलता को नई पहचान दिलाने का माध्यम भी है। वनोपज के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही काम के अवसर मिलेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। शर्मा ने कहा कि शासन की मंशा है कि बस्तर के ऐसे गांवों, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों और रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है, वहां के कृषि उत्पादों और वनोपज को निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ा जाए। इससे बस्तर की प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पादन प्रणाली को विशिष्ट पहचान मिलेगी। साथ ही स्थानीय समुदायों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य, बेहतर बाजार और स्थायी आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘दण्डक ब्रांड’ बस्तर की मेहनतकश महिलाओं, समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय उत्पादों को एक साझा पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 1080 महिला शेयरधारक, 60 उत्पादक समूह और एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनकी आजीविका बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है। वर्तमान में कंपनी से 1080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से जुड़ी 2100 वनोपज संग्राहक दीदियां भी कंपनी की गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। ये महिलाएं स्थानीय स्तर पर वनोपज के संग्रहण और विपणन से जुड़ी हैं। कंपनी के माध्यम से इन महिलाओं को संगठित बाजार व्यवस्था, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बेहतर कीमत प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया है। पिछले वर्ष लगभग 54 लाख रुपए के उत्पादों की बिक्री की गई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 50 लाख रुपए से अधिक के वनोपज की खरीदी की जा चुकी है। एनपीओपी प्रमाणन मिलने के बाद इन उत्पादों के बेहतर मूल्य पर विपणन की उम्मीद है। कंपनी अब केवल वनोपज की खरीदी-बिक्री तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के माध्यम से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। ‘दण्डक ब्रांड’ से दंतेवाड़ा के स्थानीय उत्पादों को मिलेगी विशिष्ट पहचान माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी ने अपने उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए ‘दण्डक ब्रांड’ की शुरुआत की है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा में कंपनी के विशेष बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया है। इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उत्पादित एवं संग्रहित विभिन्न खाद्य पदार्थ और वनोपज अब एक ही छत के नीचे उपभोक्ताओं को उपलब्ध हो सकेंगे।  दण्डक ब्रांड को राज्य स्तर एवं देश-विदेश में छत्तीसगढ़ के स्थानीय छत्तीसकला ब्रांड के अंतर्गत विक्रय किया जाएगा। दण्डक ब्रांड के अंतर्गत नीम फूल, एचएमटी चावल, लाल चूड़ी चावल, बासमती चावल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित विभिन्न स्थानीय उत्पादों को बाजार में उतारा गया है। इन उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर आकर्षक पैकेजिंग के साथ बिक्री की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे बस्तर के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी। एनपीओपी प्रमाणन के माध्यम से निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रमाणित उत्पादों को जैविक उत्पाद के रूप में विपणन करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से निर्यात की संभावनाएं भी तलाशी जा सकेंगी। पहले स्थानीय बाजार तक सीमित थे उत्पाद, अब देश-दुनिया तक पहुंचने की उम्मीद– विमला ठाकुर दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड अंतर्गत ग्राम नेलेवाड़ा निवासी एवं माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पहले उनके द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी। इससे उत्पादों का अपेक्षित मूल्य प्राप्त नहीं हो पाता था। ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से महिलाओं में नया उत्साह है। उन्होंने कहा कि हम सभी सदस्य बहुत खुश हैं। अब हमारे वनोपज को अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है। … Read more