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मां दंतेश्वरी के दर्शन होंगे आसान, बस्तर से दंतेवाड़ा तक मुफ्त बस सेवा शुरू

जगदलपुर. नगरनार स्थित एनएमडीसी के स्टील प्लांट के भीतर आग लगने की एक और घटना सामने आई है. इस बार प्लांट परिसर में टीआरएल कंपनी के स्टोर में आग लग गई. घटना के बाद मौके पर पहुंचे फायर फाइटर ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया. राहत की बात यह रही कि आग पर नियंत्रण कर लिया गया, लेकिन घटना के कारणों और इससे हुए नुकसान को लेकर अब तक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, वहीं प्लांट प्रबंधन ने घटना को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. उल्लेखनीय है कि स्टल प्लांट परिसर के भीतर आग लगने की सूचना से कुछ समय के लिए हलचल की स्थिति निर्मित हो गई. आग किस वजह से लगी, स्टोर में किस तरह की सामग्री रखी हुई थी और आग से कितना नुकसान हुआ है, इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं. आग बुझाने के लिए फायर फाइटर को मौके पर पहुंचना पड़ा, उनके प्रयासों से आग पर काबू पा लिया गया. घटना को लेकर प्लांट प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. प्रबंधन के टिप्पणी करने से इनकार के कारण आग लगने की वजह, नुकसान की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि घटना की विस्तृत जांच कराई जा रही है या नहीं. औद्योगिक इकाई के भीतर आग लगने की घटनाओं में समय पर आग पर नियंत्रण के साथ-साथ उनके कारणों का पता लगाना भी महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके. अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रबंधन घटना को लेकर कब तक आधिकारिक जानकारी देता है, और आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा कब होता है. नगरनार स्टील प्लांट में इससे पहले भी आग लगने की घटना सामने आ चुकी है. ऐसे में एक बार फिर प्लांट परिसर में आग लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि पिछली और वर्तमान घटना के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बीच आग लगने के कारणों की जांच और औद्योगिक सुरक्षा उपायों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है.

CG Teacher Recruitment 2026: दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत, शिक्षक भर्ती के नियमों में संशोधन

छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026- दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विस्तृत विज्ञापन में संशोधन  दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेगा आवेदन का नया अवसर रायपुर छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती 2026 के अंतर्गत दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शिक्षक भर्ती के विस्तृत विज्ञापन में शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इस संशोधन के तहत विभिन्न विषयों के शिक्षक पदों के लिए उपयुक्त दिव्यांगता की श्रेणियों का विस्तार किया गया है, जिससे पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करने का एक नया अवसर मिलेगा। हाईकोर्ट के निर्देश पर हुआ संशोधन        लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी शुद्धि पत्र के अनुसार, यह कदम छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा याचिका क्रमांक WPS No. 6783 of 2026 (मीनाक्षी मंगलेकर एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) में 9 अक्टूबर 2026 को पारित निर्णय के अनुपालन में उठाया गया है। इससे पहले स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय शालाओं में ई एवं टी संवर्ग के शिक्षक पदों के लिए छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की वेबसाइट  vyapamcg.cgstate.gov.in पर 7 अगस्त 2026 को विस्तृत विज्ञापन जारी किया गया था। दिव्यांगता की श्रेणियों में किए गए मुख्य बदलाव         हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और सामाजिक विज्ञान विषय के लिए समाज कल्याण विभाग की 11 सितंबर 2026 की संशोधित अधिसूचना के अनुसार इन विषयों के लिए पूर्ण दृष्टिबाधिता (Blind) और सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) को उपयुक्त दिव्यांगता की श्रेणियों में शामिल किया गया है। इसी प्रकार गणित विषय के शिक्षक पद के लिए सेरेब्रल पाल्सी एवं कुष्ठ रोग से उपचारित दिव्यांगता तथा कृषि विषय के शिक्षक पद के लिए सेरेब्रल पाल्सी को शामिल किया गया है।       गणित इस विषय के शिक्षक पद के लिए सेरेब्रल पाल्सी एवं कुष्ठ रोग से उपचारित दिव्यांगता को शामिल किया गया है।      कृषि विषय के शिक्षक पद के लिए सेरेब्रल पाल्सी को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का वितरण चार प्रमुख समूहों—दृष्टिबाधिता (VI), श्रवण बाधिता (HI), अस्थिबाधिता (OI) एवं बहुदिव्यांगता (MD) के अनुसार श्रेणीवार निर्धारित किया गया है। कुल 1654 पदों का विषयवार विवरण       लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार संशोधित विज्ञापन के अनुसार ई-संवर्ग के 868 और टी-संवर्ग के 786 पदों (कुल 1654 पद) पर भर्ती की प्रक्रिया होगी। ई-संवर्ग (कुल 868 पद) हिंदी के 109, संस्कृत के 150, अंग्रेजी के 319, गणित के 135, सामाजिक विज्ञान के 150 और कृषि के 5 पद और टी-संवर्ग (कुल 786 पद)रू हिंदी के 141, संस्कृत के 150, अंग्रेजी के 185, गणित के 115, सामाजिक विज्ञान के 100 और कृषि के 95 पद शामिल हैं। आवेदन की तिथि जल्द होगी घोषित       लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन के दायरे में आने वाले नए दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा अलग से घोषित की जाएगी। शुद्धि पत्र से संबंधित विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट पर देखी जा सकती है। इसके अलावा 7 अगस्त 2026 को जारी विज्ञापन की अन्य सभी शर्तें और कंडिकाएं यथावत रहेंगी।

दहेज में 3 करोड़ और लग्जरी कार की मांग का आरोप, शादी के तुरंत बाद विवाद चर्चा में

रायपुर. छत्तीसगढ़ में डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे पर दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है. डिप्टी कलेक्टर और उनके परिजनों के खिलाफ उनकी पत्नी ने प्रताड़ना, मारपीट और करोड़ों रुपये दहेज मांगने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शादी के दूसरे दिन से ताने और करोड़ों की मांग जानकारी के अनुसार, आरंग के ग्राम भानसोज निवासी पूजा बंजारे का विवाह जुलाई 2024 में धमतरी के जोधापुर वार्ड निवासी मनोज बंजारे के साथ हुआ था. मनोज बंजारे राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. पीड़िता का आरोप है कि विवाह के दौरान उनके परिवार ने घरेलू सामान, सोने की चेन और अन्य उपहार दिए थे. इसके बावजूद शादी के महज दूसरे दिन से ही ससुराल वाले कम दहेज मिलने को लेकर ताने देने लगे. मायके की जमीन बेचकर पैसे लाने का दबाव पीड़िता का आरोप है कि पति मनोज बंजारे, सास ललिता बंजारे और ससुर कोमल सिंह बंजारे लगातार एक लग्जरी कार और 2 से 3 करोड़ रुपये नकदी की मांग कर रहे थे. शिकायत में इसकी भी उल्लेख है कि 4 जनवरी 2025 को मनोज बंजारे ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि वह अपने मायके की जमीन बेचकर  2-3 करोड़ रुपये लेकर आए. मना करने पर मारपीट की गई. काउंसलिंग नाकाम, पुलिस ने दर्ज किया मामला पीड़िता का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद भी ससुराल वालों का अत्याचार कम नहीं हुआ. बच्चे के जन्म के बाद पति ने उसे मायके में ही छोड़ दिया. 2 सितंबर 2026 को पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने भानसोज स्थित मायके में साथ मारपीट की. मामला महिला थाने पहुंचा, जहां परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराई गई. हालांकि, सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं. आखिरकार पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे और उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है.

छत्तीसगढ़ में बिजली की बढ़ती मांग के बीच बड़ा इंतजाम, 6300 मेगावाट तक आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी

बढ़ी मांग के बीच छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति सुचारू रखने, 6300 मेगावाट तक उपलब्धता सुनिश्चित – रविवार शाम को बिजली की मांग 6300 मेगावाट पहुंची, पीक आवर्स में एक्सचेंज से खरीदी जा रही अतिरिक्त बिजली रायपुर,  देशभर में बिजली की बढ़ती मांग के बीच छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं की आवश्यकता के अनुरूप बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। पीक आवर्स में प्रदेश में बिजली की मांग बढ़कर करीब 6300 मेगावाट तक पहुँच गई है, जिसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई।  उमस भरे मौसम, कृषि पंपों के बढ़ते संचालन और एयर कंडीशनर सहित अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से प्रदेश में बिजली की खपत बढ़ी है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि प्रदेश में सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को निरंतर और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। मांग में वृद्धि का आकलन करते हुए बिजली की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है।   आवश्यकता पड़ने पर पावर एक्सचेंज से 10 रुपये प्रति यूनिट तक की दर पर भी बिजली खरीदी जा रही है, ताकि पीक आवर्स में आपूर्ति बनाए रखी जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे देश में अधिक दरों पर भी बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।   पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश से 200 मेगावाट बिजली प्राप्त की गई थी। वर्तमान में भी मांग और उपलब्धता की स्थिति का आकलन करते हुए पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही है। इसकी मात्रा मांग के अनुसार करीब 100 से 700 मेगावाट तक रहती है। हाल के दिनों में हरियाणा में बारिश के कारण वहां उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का लाभ भी एक्सचेंज के माध्यम से छत्तीसगढ़ को मिला है। देशभर में बिजली की मांग बढ़ने से अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। विभिन्न राज्य अपनी आवश्यकता के अनुसार पावर एक्सचेंज के माध्यम से बिजली खरीदने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन एक साथ बढ़ी मांग के कारण अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता सीमित है। पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक सहित कई राज्यों में बिजली की उपलब्धता को लेकर दबाव की स्थिति बताई जा रही है। ऐसे में उपलब्ध बिजली का समुचित प्रबंधन और समयानुसार अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। छत्तीसगढ़ में धान की सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में कृषि पंपों का संचालन हो रहा है। इसके साथ उमस भरे मौसम के कारण घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कूलिंग उपकरणों का उपयोग बढ़ने से बिजली की मांग अधिक बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में भी उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। मौसम में ठंडक आने के बाद बिजली की खपत में कमी आने की उम्मीद है। कंवर ने कहा कि बिजली की मांग और उपलब्धता की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के साथ आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है। विद्युत ग्रिड की सुरक्षा और संतुलन बनाए रखते हुए कृषि, घरेलू, वाणिज्यिक तथा औद्योगिक उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना कंपनी की प्राथमिकता है।  

छत्तीसगढ़ मध्य भारत के बड़े मेडिकल हब के रूप में हो रहा विकसित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

*रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल, कैंसर उपचार केंद्र का हुआ भूमिपूजन* *मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा – प्रदेश में ही कैंसर मरीजों को मिलेंगी उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं, दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम* *नवा रायपुर में 200 एकड़ में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क* *शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस* *आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनीं जरूरतमंद परिवारों का संबल* *मेडिसिटी से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा, फार्मा उद्योग, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार* रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से मध्य भारत के एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हों तथा आर्थिक अभाव किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल एवं कैंसर उपचार केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और ओमेगा ग्रुप की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ पूरा परिवार कठिन दौर से गुजरता है। यदि उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न्यूनतम हो और उन्हें अपने परिवार के बीच रहते हुए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि ओमेगा अस्पताल का प्रस्तावित ऑन्कोलॉजी सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी। स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांव, गरीब और सुदूर जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक पैथोलॉजी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सुविधाओं के अंतर को कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है। गंभीर बीमारी में परिवारों का संबल बन रही सरकार मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं होती, बल्कि कई बार परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने ऐसे लाखों परिवारों को उपचार की चिंता से राहत दी है। शासकीय अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके और बीमारी के उपचार के लिए किसी परिवार को अपनी जमीन, घर या गहने बेचने जैसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े। अबूझमाड़ और सुदूर वनांचलों तक पहुंच रहा स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा बदलाव केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता अबूझमाड़ सहित प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, वहां आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वनांचलों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की जांच और उपचार किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ चिकित्सकों, दवाइयों और आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है जिसमें बस्तर के सुदूर गांव से लेकर राजधानी रायपुर तक हर नागरिक को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। नवा रायपुर में 200 एकड़ में मेडिसिटी और फार्मा पार्क से खुलेगा संभावनाओं का नया द्वार मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मेडिसिटी और फार्मा पार्क के माध्यम से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, फार्मास्युटिकल उद्योग, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को एक मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध होगा। इससे चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में सुपर स्पेशलिटी एवं मल्टीस्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य इकाइयों … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत, ओडिशा सीमा के गांवों को मिलेगी राहत

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ एवं सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत करने और आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सिकरिमा से विदुरपुर तक 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क का मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य 89 लाख 53 हजार रुपये की लागत से पूर्ण कर लिया गया है। सड़क के डामरीकरण से क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है। विशेष रूप से बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियां दूर होने के साथ अब ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा। सिकरिमा से विदुरपुर मार्ग की स्थिति खराब होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। विशेषकर बारिश के मौसम में सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती थी। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों और स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ता था। अब सड़क का मरम्मत एवं डामरीकरण कार्य पूर्ण होने से ग्रामीणों को सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। ओडिशा सीमा से लगे गांवों में सड़क संपर्क हुआ मजबूत जशपुर जिले का सिकरिमा-विदुरपुर मार्ग ओडिशा राज्य की सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क के जीर्णाेद्धार से सीमावर्ती गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क बेहतर होगा। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने तथा ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए आवागमन करने में भी सहूलियत होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बरसात में आवागमन की परेशानी से मिलेगी राहत सिकरिमा से विदुरपुर तक सड़क का डामरीकरण कार्य पूर्ण होने से ग्रामीणों को विशेष रूप से बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। पहले सड़क की खराब स्थिति के कारण दोपहिया और अन्य वाहनों के आवागमन में कठिनाई होती थी। अब सड़क की स्थिति बेहतर होने से विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने, मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने तथा ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन करने में सुविधा होगी। लंबे समय से प्रतीक्षित सड़क का कार्य पूर्ण होने पर ग्रामीणों में खुशी सिकरिमा से विदुरपुर तक सड़क का मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य पूर्ण होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में प्रसन्नता है। लंबे समय से बेहतर सड़क सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों को अब आवागमन में सहूलियत मिलेगी। सड़क के बेहतर होने से गांवों के बीच संपर्क मजबूत हुआ है और दैनिक जरूरतों के लिए आवाजाही आसान होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ, ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सिकरिमा-विदुरपुर मार्ग का जीर्णाेद्धार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीणों के दैनिक जीवन में सुविधा बढ़ने के साथ सीमावर्ती क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

*मुख्यमंत्री श्री साय ने देवपुरी में सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल का किया शुभारंभ* *छत्तीसगढ़ मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से हो रहा विकसित : मुख्यमंत्री श्री साय* *प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम* *नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी, मेडिकल टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा* रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी संकल्प के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ आज मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के देवपुरी में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में निर्मित 125 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर अस्पताल का शुभारंभ किया और अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में ही उपलब्ध हों बेहतर और आधुनिक उपचार सुविधाएं मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार को उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़े तो आर्थिक बोझ के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को अधिक से अधिक विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता लगातार कम होगी। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ के नागरिकों, बल्कि आसपास के राज्यों से आने वाले मरीजों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में एक मजबूत हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। आधुनिक अस्पतालों के खुलने से जहां लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिलेगी, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में व्यापक विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार इस योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया है। जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। सुदूर वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों तक चिकित्सकीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच स्पष्ट है – बेहतर स्वास्थ्य सेवा पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है, चाहे वह राजधानी में रहता हो या प्रदेश के किसी सुदूर वनांचल में। नवा रायपुर की मेडिसिटी से स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना आने वाले समय में प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मेडिसिटी में आधुनिक और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की व्यापक संभावनाएं होंगी। इससे प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश तथा रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के लगातार विस्तार से छत्तीसगढ़ की पहचान एक बड़े हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत हो रही है। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के बेहतर उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि दूसरे राज्यों के लोग गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए छत्तीसगढ़ आएं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक संस्थानों की स्थापना प्रदेश में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के निरंतर विस्तार का परिचायक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सेवा, संवेदनशीलता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मरीजों के हित में कार्य करने का आह्वान किया। स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन और रोजगार का भी हो रहा विस्तार मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों का विस्तार छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार हो और युवाओं को अपने प्रदेश में ही बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचे और हर परिवार को आवश्यकता के समय बेहतर उपचार का भरोसा मिले। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा … Read more

महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकर्ता बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है और महिला सशक्तिकरण विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारा लक्ष्य महिलाओं को केवल शासकीय योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में हिंदी खबर द्वारा आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं का सम्मान किया और उनसे संवाद भी किया। मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। नवरात्रि मातृशक्ति की आराधना का महापर्व है। हमारी परंपरा में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मां के संघर्ष और संस्कारों ने सिखाया सेवा और संवेदनशीलता का महत्व मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी माता को अनेक कठिनाइयों के बीच परिवार को संभालते और खेती-बाड़ी करते हुए देखा। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां के संघर्ष, सेवाभाव, सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और परिवार के प्रति समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। जनसेवा और जरूरतमंद के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार और विशेष रूप से अपनी माता से मिली। आज मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व निभाते हुए भी वे उन्हीं संस्कारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। महतारी वंदन ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में 20 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है। इस राशि ने महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता देने के साथ परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि योजना की पात्र कोई भी महिला इसके लाभ से वंचित न रहे। तकनीकी कारणों, दस्तावेजों, आधार अथवा बैंक खाते से जुड़ी त्रुटियों के कारण जिन पात्र महिलाओं को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण कर आवश्यक समाधान किया जा रहा है। लक्ष्य से लगभग दोगुनी उपलब्धि, 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 14 लाख ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रदेश की 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु वनोपज, डेयरी, मशरूम उत्पादन, मिलेट प्रसंस्करण, सिलाई और रेडीमेड वस्त्र निर्माण सहित विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल स्वरोजगार से न जुड़ें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर दूसरे लोगों को भी रोजगार देने की स्थिति में आएं। 481 महतारी सदन बनेंगे महिला समूहों की गतिविधियों के केंद्र मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र बालिकाओं के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर डेढ़ लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है। बस्तर में लौटी शिक्षा की रोशनी, नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर खुले मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी बेटी के सपनों की राह में दूरी, गरीबी या असुरक्षा बाधा न बने, इसके लिए सरकार शिक्षा के अवसरों का लगातार विस्तार कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावासों, आश्रमों, आवासीय विद्यालयों और प्रयास संस्थानों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि बस्तर में लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण अनेक गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और स्कूल बंद हो गए थे। शांति और विश्वास की स्थापना के साथ राज्य सरकार ने ऐसे 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया है। वर्षों बाद इन स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई की आवाज लौटना बदलते बस्तर की सबसे सुखद तस्वीरों में से एक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों के बच्चों, विशेषकर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने परिवार और गांव से बहुत दूर न जाना पड़े। स्वस्थ महिला से स्वस्थ … Read more

ट्रेन हादसे के दर्द पर ‘सेवा संकल्प’ का मरहम, धमतरी के तेजराम को दो घंटे में मिला कृत्रिम हाथ, लौटी जिंदगी की रंगत

रायपुर.  यह सिर्फ कृत्रिम हाथ नहीं, मेरी संपूर्णता और स्वाभिमान का अहसास है!"—यह शब्द हैं धमतरी जिले के ग्राम गोजी निवासी तेजराम साहू के, जिनके जीवन में वर्षों के संघर्ष के बाद आखिरकार आत्मविश्वास और मुस्कान वापस लौट आई है। छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में किस तरह बदलाव की नई इबारत लिख रहा है, इसकी एक जीती-जागती मिसाल तेजराम की यह कहानी है। ​जीवन की राह में कभी-कभी एक पल का हादसा इंसान के सामने अनगिनत चुनौतियां खड़ी कर देता है। तेजराम साहू की जिंदगी में भी ऐसा ही मोड़ तब आया जब महज 18 वर्ष की उम्र में एक भीषण ट्रेन दुर्घटना में उनका दायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गंभीर चोटों के चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा। इतनी कम उम्र में आए इस संकट ने उनके सामने न केवल रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्यों को करने का गंभीर संकट खड़ा किया, बल्कि आजीविका के लिए संघर्ष को भी और कठिन बना दिया। हाथ का अभाव केवल एक शारीरिक कमी नहीं था, बल्कि हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की विवशता भी थी। हालांकि, इन विकट परिस्थितियों के बावजूद तेजराम ने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाते रहे। ​उनके इसी संघर्ष को आसान बनाने और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाने का काम किया जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर ने। सेवा संकल्प अभियान के तहत लगाए गए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि जनकल्याणकारी सेवाओं और उपकरणों का लाभ बिना किसी देरी के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे। जब तेजराम इस शिविर में पहुंचे, तो वहां मौजूद भगवान महावीर सेवा संस्थान के इंजीनियरों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत उनके हाथ का माप लिया और आवश्यक प्रक्रिया शुरू की। हैरान करने वाली बात यह रही कि महज डेढ़ से दो घंटे की रिकॉर्ड समयसीमा के भीतर उन्हें कृत्रिम हाथ तैयार कर सौंप दिया गया। ​इतनी जल्दी और सहजता से मिली इस सहायता ने तेजराम के लिए वर्षों की कठिनाइयों के बीच संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए। कृत्रिम हाथ मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं और चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि व खुशी साफ झलकने लगी। उन्होंने भावुक होकर जिला प्रशासन और समिति के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनके जीवन की राह बहुत आसान हो जाएगी और वे अपने दैनिक काम खुद कर पाएंगे। ​तेजराम साहू की यह कहानी महज एक उपकरण मिलने की नहीं, बल्कि सेवा संकल्प अभियान के उस मानवीय पक्ष की है जो किसी जरूरतमंद को सिर्फ सुविधा नहीं देता, बल्कि उसे सहायता से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है। शिविर में तेजराम के चेहरे पर खिली यह मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित सेवा का समन्वय होता है, तो वह किसी के भी जीवन में नई ऊर्जा और रंगत भरने की ताकत रखता है।

‘निदान-03’ शिविर से दिव्यांगजनों को मिल रही नई उम्मीद, सेवा संकल्प अभियान बना सहारा

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले में आयोजित तीन दिवसीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। नगरी और धमतरी में आयोजित इन शिविरों के शुरुआती दो दिनों में कुल 632 दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें एक ही छत के नीचे कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का पूरा संबल प्रदान किया गया। एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम शासकीय सुविधाएं शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। यहाँ पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक और वॉकर वितरित किए गए। साथ ही, नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक माप और प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 44 यूडीआईडी कार्ड भी प्रदान किए गए। श्रृखला के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में भव्य शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ 460 दिव्यांगजन पहुँचे और इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न उपकरणों व सुविधाओं से लाभान्वित किया गया। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावडि़या और महापौर रामू रोहरा की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, स्मार्ट केन और वॉकर जैसी आधुनिक सामग्रियां बड़े पैमाने पर बांटी गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगजनों के बस पास, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और एम. आधार कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी तुरंत उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़े। जनसंपर्क प्रदर्शनी और जनमन पत्रिका का आकर्षण इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जनसंपर्क विभाग की ओर से विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई और मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ जनमन' का निःशुल्क वितरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बेहद सराहा। धमतरी कलेक्टर ने इस दौरान सभी स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण व शासकीय योजनाओं का लाभ देकर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।        इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के अंतिम दिन आज भी पंजीयन, परीक्षण और कृत्रिम अंगों के मापन की सुविधा जारी रहेगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस कल्याणकारी पहल से वंचित न रह जाए।