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नवसंकल्प की सफलता: जशपुर के 12 युवाओं का अर्धसैनिक बलों में चयन

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन की पहल एवं जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित नव संकल्प शिक्षण संस्थान, जशपुर ने युवाओं को रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। इस संस्थान के 12 छात्र-छात्राओं का चयन वर्ष 2025 में कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित कांस्टेबल जनरल ड्यूटी (एसएससी जीडी) परीक्षा के माध्यम से विभिन्न अर्धसैनिक बलों में हुआ है। ज्ञातव्य है कि एसएससी जीडी की लिखित परीक्षा फरवरी-मार्च 2025 में आयोजित की गई थी, जिसमें नव संकल्प शिक्षण संस्थान के 36 विद्यार्थी सफल हुए। इसके पश्चात शारीरिक दक्षता परीक्षा एवं मेडिकल परीक्षण नवंबर-दिसंबर 2025 में सम्पन्न हुए। सभी चरणों में सफल होने के उपरांत हाल ही में घोषित अंतिम परिणाम में संस्थान के कुल 12 विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। चयनित विद्यार्थियों में 5 का चयन केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), 3 का केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), 2 का सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), 1 का भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) तथा 1 का सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में हुआ है। सीआईएसएफ में बालेश्वर नाग, नोवेल टोप्पो, सोंकेश्वर प्रधान, नेहरू लाल एवं अरुण कुमार पैकरा, बीएसएफ में ब्रिन्देश्वर एवं सृष्टि तिर्की, सीआरपीएफ में रोहित केरकेट्टा, अरविंद केरकेट्टा एवं सुरेन्द्र राम, एसएसबी में देव प्रसाद नाग तथा आईटीबीपी में चन्दन कालो का चयन हुआ है। उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में भी नव संकल्प शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों का विभिन्न सुरक्षा बलों में चयन होता रहा है। केवल वर्ष 2025 में ही संस्थान के 125 विद्यार्थियों का चयन होमगार्ड्स, जिला पुलिस बल एवं केन्द्रीय पुलिस बलों में हुआ है। पूर्व में जशपुर जैसे सुदूर जिले के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता था, किंतु अब नव संकल्प शिक्षण संस्थान जिले के युवाओं के लिए शासकीय सेवाओं में प्रवेश का एक सशक्त, भरोसेमंद एवं प्रेरणादायी माध्यम बनकर उभरा है

कोसीर एवं सरिया क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन पर सख्त कार्रवाई, ट्रैक्टर जब्त

रायपुर. सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। खनिज अमले द्वारा विगत दिनों कोसीर एवं सरिया तहसील क्षेत्रों में अवैध रेत परिवहन में संलिप्त वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई है। सारंगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम मल्दा, दहिदा एवं जसपुर क्षेत्र में गौण खनिज रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त 02 ट्रैक्टरों को जब्त कर उन्हें थाना कोसीर के सुपुर्द किया गया, जबकि सरिया तहसील के पिहरा क्षेत्र में रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त 03 ट्रैक्टरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें थाना सरिया के सुपुर्द किया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर नियंत्रण हेतु यह जांच-पड़ताल और कार्रवाई का अभियान निरंतर जारी रहेगा तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने किया विकास कार्यो का भूमिपूजन व लोकार्पण

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने किया विकास कार्यो  का भूमिपूजन व लोकार्पण कोरबा नगर निगम के बालको जोन अंतर्गत वार्ड क्र. 47 एवं 39 को आज शनिवार को 02 करोड़ 17 लाख रूपए के विकास कार्यो  की सौगात मिली, जिसमें नवनिर्मित सामुदायिक भवन के लोकार्पण, विभिन्न वार्डों  के 08 स्थानों पर आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण सहित सड़क, नाली व पाईप लाईन विस्तार के नवीन कार्य शामिल हैं। प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने इन विकास कार्यो  का भूमिपूजन व लोकार्पण किया। उन्होने पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करते हुए समयसीमा में कार्य को पूरा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्र. 47 शिवनगर बिरसामुन्डा मोहल्ला में 25 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है। इसी प्रकार निगम द्वारा वार्ड क्र. 47 अंतर्गत शिवनगर बिरसामुन्डा बस्ती में 30 लाख रूपये की लागत से आर.सी.सी.नाली एवं सी.सी. रोड का निर्माण, बालको जोन के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर 01 करोड़ 04 लाख रूपये की लागत से 08 नग आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण, वार्ड क्र. 39 अंतर्गत रिंग रोड से रोहित घर तक एवं रिंकी घर से विबल साहू घर तक 41 लाख 66 हजार रूपये की लागत से ओ.पी.व्ही.सी. पाईप बिछाने का कार्य एवं वार्ड क्र. 47 अंतर्गत पॉलिटेक्निक कालेज बस्ती 16 लाख 48 हजार रूपये की लागत से ओ.पी.व्ही.सी. पाईप बिछाने का कार्य कराया जाना हैं।  इस मौके पर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा कि वार्डवासियों व आमजन की मांग एवं आवश्यकता के अनुरूप वार्डों  में विकास कार्य किए जाएं, यह हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जनता जनार्दन की मांग को पूरा करना, मैं अपना प्रथम कर्तव्य समझता हू। उन्होने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान शिवनगर बिरसामुन्डा मोहल्ला के नागरिक बंधुओं एवं शिव फाउंडेशन के द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण की मांग मेरे समक्ष रखी गई थी, उनकी मांग का सम्मान करते हुए 25 लाख रूपये की लागत से यह भवन बनाया गया है, आज यह भवन यहॉं की जनता जनार्दन की सेवा के लिए समर्पित किया गया, अब बस्ती के लोगों को अपने विभिन्न आयोजनों, कार्यक्रमों के लिए एक सुविधापूर्ण स्थान उपलब्ध हो चुका है। मंत्री  देवांगन ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के आशीर्वाद एवं उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री  अरूण साव के मार्गदर्शन में कोरबा नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं हो रही है, जो भी प्रस्ताव मेरे द्वारा या महापौर के द्वारा उनके समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, उन पर शीघ्र स्वीकृति मिल रही है, जिसके कारण कोरबा में तेजी से विकास हो रहा है। उन्हेने आगे कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने देश में दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर लोगों के दुख दर्द को दूर किया है, तो वहीं देश के सर्वांगीण विकास की दिशा में भी ऐतिहासिक रूप से कार्य हो रहे है।  इस अवसर पर महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश के उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन कोरबा के विकास के लिए सदैव समर्पित रहे हैं, उन्होने कोरबा के विकास के लिए, वार्ड बस्तियों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किया है। महापौर मती राजपूत ने उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि अपने जिस आशा व विश्वास के साथ मुझे एवं उद्योग मंत्री  देवांगन को अपना आशीर्वाद दिया है, आपके उस विश्वास, आपकी उस उम्मीद को कभी खंडित नहीं होने दिया जाएगा तथा हम सदैव आपके सुख-दुख में आपके साथ खडे़ नजर आएंगे, मैं यह विश्वास दिलाती हूॅं। इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र देवांगन, सत्येन्द्र दुबे, वार्ड पार्षद सीमाबाई कंवर व चंदादेवी, पार्षद मुकुंद सिंह कंवर व जनकसिंह राजपूत, मनोज लहरे, प्रफुल्ल तिवारी, तुलसी ठाकुर, नारायण सिंह ठाकुर, ईश्वर साहू, हेतराम चन्द्रा, किशोर साहू, भूपेन्द्र साहू, धनबाई निर्मलकर सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। रविवार को होगा विकास कार्यो  का भूमिपूजन उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत के द्वारा रविवार 08 फरवरी को नगर पालिक निगम कोरबा के टी.पी.नगर जोनांतर्गत एवं कोरबा जोनांतर्गत वार्ड क्र 09 में किए जाने वाले पेयजल व्यवस्था से जुड़े साढे़ 87 लाख रूपये के कार्यो  का भूमिपूजन किया जाएगा, भूमिपूजन का यह कार्यक्रम टी.पी.नगर स्थित टैगोर उद्यान में दोपहर 03 बजे से आयोजित किया गया है। 

अमित शाह के दौरे से पहले बड़ा घटनाक्रम: 103 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, शीर्ष रैंक के कैडर शामिल

छतीसगढ़  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे से ठीक 2 दिन पहले बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें 49 नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए का इनाम घोषित है। सरेंडर नक्सलियों में डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), प्लाटून पार्टी कमेटी जानकारी के मुताबिक सिर्फ बीजापुर जिले में ही 1 जनवरी 2025 से अब तक 421 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। 410 माओवादियों ने हथियार छोड़ दिया है। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 137 माओवादी मारे गए हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। बीजापुर जिले में गुरुवार को 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। कैडर सरेंडर नक्सलियों की संख्या DVCM    1 PPCM    4 ACM    4 प्लाटून पार्टी सदस्य    1 DKAMS अध्यक्ष    3 CNM अध्यक्ष    4 KAMS अध्यक्ष    2 एरिया कमेटी पार्टी सदस्य    5 मिलिशिया कमांडर, डिप्टी कमांडर    5 जनताना सरकार अध्यक्ष    4 PLGA सदस्य    1 CNM सदस्य    12 जनताना सरकार उपाध्यक्ष    4 DAKMS उपाध्यक्ष    1 जनताना सरकार सदस्य    22 मिलिशिया प्लाटून सदस्य    23 जीपीसी    2 DAKMS सदस्य    4 भूमकाल मिलिशिया सदस्य    1 बीजापुर SP जितेंद्र यादव ने कहा कि अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप की स्थापना के साथ सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली और शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजना ग्रामीणों तक पहुंचने लगी है। सुरक्षा बलों का ग्रामीणों के साथ सकारात्मक संवाद हो रहा है। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर और कई माओवादी नेताओं के मारे जाने या उनके आत्मसमर्पण करने के बाद इन लोगों ने वामपंथी उग्रवादी आंदोलन छोड़ने का फैसला किया। SP ने बताया कि माओवादियों के एक डिवीजनल कमेटी सदस्य लच्छू पुनेम उर्फ ​​संतोष (36), गुड्डू फरसा (30), भीमा सोढ़ी (45), हिड़मे फरसा (26) और सुखमती ओयम (27), सभी प्लाटून पार्टी कमेटी के सदस्य हैं। प्रत्येक पर 8 लाख रुपए का इनाम था। इसके अलावा 4 नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपए का इनाम था। 15 कैडरों पर 2-2 लाख रुपए का इनाम था। 10 पर 1-1 लाख रुपए का इनाम था। 12 कैडरों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था और 3 पर 10-10 लाख रुपए का इनाम था। SP के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादियों के आरपीसी (क्रांतिकारी पार्टी समिति) सदस्यों की संख्या ज्यादा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। 4 अक्टूबर को आ रहे शाह 4 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर आएंगे। वे जगदलपुर में बस्तर दशहरा की मुरिया दरबार रस्म और लाल बाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला में शामिल होंगे। अमित शाह के दौरे को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। पहले 71 नक्सलियों ने किया था सरेंडर बता दें कि इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर कुल 71 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इनमें 21 महिला और 50 पुरुष नक्सली शामिल थे। 30 नक्सलियों पर 64 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में डिवीजन कमेटी मेंबर (DVCM) और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रैंक के नक्सली हैं। कई नक्सली ऐसे थे, जो कई बड़ी मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं। क्या है लोन वर्राटू अभियान लोन वर्राटू का मतलब होता है घर वापस आइए। इस अभियान के तहत दंतेवाड़ा पुलिस अपने जिलों के ऐसे युवाओं को पुनर्वास करने और समाज की मुख्य धारा में लौटने का संदेश देती है, जो नक्सलियों के साथ हो गए हैं। पुलिस की इस योजना के तहत गांवों में उस इलाके के नक्सलियों की सूची लगाई जाती है। उनसे घर वापस लौटने की अपील की जाती है। उन्हें पुनर्वास योजना के तहत कृषि उपकरण, वाहन और आजीविका के दूसरे साधन दिए जाते हैं, जिससे वे नक्सल विचारधारा को छोड़कर जीवन यापन कर सकें। शाह की डेडलाइन, 2026 तक करेंगे नक्सलवाद का खात्मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे। वे यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें। हिंसा करोगे तो हमारे जवान निपटेंगे। वहीं उन्होंने एक डेडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं। लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे इससे पहले 21 मई को हुई मुठभेड़ में 27 नक्सली मारे गए। इसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था। 21 मई की मुठभेड़ से 7 दिन पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की भी जानकारी दी थी। इसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया था।छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक ऑपरेशन चलाया था।  

तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

रायपुर. तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  संतोष पांडेय, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, विधायक  मोतीलाल साहू,  राजेश मूणत, मुख्य सचिव  विकास शील, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह)  मनोज पिंगुआ तथा रायपुर  पुलिस कमिश्नर  संजीव शुक्ला उपस्थित थे।

जनजातीय परंपराओं की समृद्ध विरासत से रूबरू हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

रायपुर.  द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली। राष्ट्रपति  मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की। बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया। एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया। जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए। बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति  मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया। लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।  

राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिका को पढ़ाने का किया आह्वान

रायपुर. बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।  जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े। राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल  रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे। राज्यपाल  डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है। बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।        

कदमघर खरीदारों के हित में छत्तीसगढ़ रेरा का अहम निर्णय छत्तीसगढ़ में

रायपुर. रेरा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में छत्तीसगढ़ रेरा का महत्वपूर्ण कदम छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन तथा रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 14 बैंकों को अंतिम पैनल (फाइनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया है। रेरा अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा 03 अप्रैल 2025 को 17 बैंकों को अस्थायी पैनल (प्रोविजनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया गया था। निर्धारित प्रक्रियाओं, आवश्यक शर्तों एवं मापदंडों की पूर्ति के उपरांत अब इनमें से 14 बैंकों को अंतिम पैनल में सम्मिलित किया गया है। अंतिम पैनल में शामिल बैंकों में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, केनरा बैंक, डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा यूको बैंक शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेरा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित पृथक रेरा खाते केवल उन्हीं बैंकों में संचालित किए जाएं, जो रेरा नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करते हों। इससे परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन स्थापित होगा, निधियों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा घर खरीदारों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इस संबंध में छत्तीसगढ़ रेरा के अध्यक्ष  संजय शुक्ला ने कहा कि रेरा के अंतर्गत पंजीकृत परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बैंकों के अंतिम पैनल में शामिल होने से परियोजना खातों की निगरानी एवं नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे घर खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनेगा। छत्तीसगढ़ रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी, व्यवस्थित एवं भरोसेमंद बनाने के लिए इस प्रकार की पहलें भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगी।

नन्हे वीरों की बड़ी उड़ान: अबूझमाड़ के मल्लखंब खिलाड़ियों ने राष्ट्रपति के समक्ष रचा इतिहास

रायपुर. राष्ट्रपति  मुर्मु ने की प्रशंसा, ताली बजाकर हौसला बढ़ाया छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और लंबे समय तक संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ ने शनिवार को अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के शुभारंभ समारोह में अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी के नन्हे खिलाड़ियों ने देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु के समक्ष मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु स्वयं बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव नारायणपुर जिले के उन दुर्गम और बीहड़ इलाकों में पड़ी है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं सीमित हैं। कुटूर, करपा और परपा जैसे सुदूर वनांचलों से निकलकर इन बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा न तो संसाधनों की मोहताज होती है और न ही भौगोलिक सीमाओं की। इस संघर्षपूर्ण यात्रा के प्रेरणास्रोत मनोज प्रसाद हैं, जो एकेडमी के संस्थापक होने के साथ-साथ 16वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, अनुशासन और सतत मार्गदर्शन में इन बच्चों ने अभावों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इन नन्हे मल्लखंब खिलाड़ियों ने ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ का खिताब जीतकर और ‘रोमानियाज गॉट टैलेंट’ में उपविजेता बनकर पहले ही वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में 40 से 50 से अधिक टेलीविजन शो, देशभर में सैकड़ों मंचीय प्रस्तुतियों, तथा अनेक प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर यह टोली निरंतर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है। अब यह दल अपनी मिट्टी की खुशबू, लोक-संस्कृति और अद्वितीय कौशल को और अधिक सशक्त रूप में सात समंदर पार ले जाने के लिए तैयार है। एकेडमी का अगला लक्ष्य भविष्य में ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ और ‘ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट’ जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भारत और अबूझमाड़ की लोक-कला का प्रदर्शन करना है। जगदलपुर में हुआ यह ऐतिहासिक प्रदर्शन न केवल अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन ‘बदलते बस्तर’ की उस सशक्त तस्वीर को प्रस्तुत करता है, जहां संघर्ष की जमीन से प्रतिभा के नए सितारे उभर रहे हैं।

जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज अब भी अधूरा

जगदलपुर. जगदलपुर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बस्तरवासियों के लिए राहत का केंद्र बनना था, लेकिन अब सवालों में है. दिल, किडनी और न्यूरो इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म करने का दावा अब खोखला दिख रहा है. 240 बिस्तरों वाला अस्पताल शुरू तो हो गया, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है. कई विभागों में आधुनिक मशीनें मौजूद हैं, पर उन्हें संचालित करने वाले विशेषज्ञ नहीं. ओपीडी को आनन-फानन में शुरू कर दिया गया, लेकिन परामर्श की व्यवस्था कमजोर बनी हुई है. आईसीयू और आपात सेवाओं के 24 घंटे संचालन के दावे जमीन पर पूरे नहीं उतर रहे. गंभीर मरीजों को आज भी बड़े शहरों में रेफर किया जा रहा है. सरकारी दरों पर इलाज का वादा, निजी मॉडल की कार्यप्रणाली में उलझता दिख रहा है. मरीजों से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं अधूरी हैं. अब सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनी यह व्यवस्था आम जनता को कब राहत देगी. स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रशासनिक निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है.