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राजगीर दौरे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, 31 मार्च को नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में होंगी शामिल

राजगीर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 31 मार्च को बिहार में राजगीर के दौरे पर आएंगी, जहां वह नालंदा विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक जानकारी दी। यह अवसर नालंदा विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि नव-निर्मित स्थायी परिसर में आयोजित होने वाला यह पहला दीक्षांत समारोह होगा। इस परिसर का उद्घाटन जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। पुनरुद्धार के बाद यह विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षांत समारोह है; पहला समारोह वर्ष 2016 में आयोजित हुआ था। विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक राष्ट्रपति इस अवसर पर दीक्षांत भाषण देंगी, विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करेंगी तथा मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित भी करेंगी। इसके साथ ही वह विश्वविद्यालय के नवनिर्मित 2,000 सीटों वाले सभागार "विश्वमित्रालय" का उद्घाटन भी करेंगी। कुल 10 PHD उपाधियां और 36 स्वर्ण पदक किए जाएंगे प्रदान दीक्षांत समारोह में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट पाठ्यक्रमों के सभी विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से डिग्री प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया गया है। ये विद्यार्थी अर्जेंटीना, वियतनाम, भूटान, इंडोनेशिया, केन्या, लाओस, म्यांमार, सर्बिया, घाना, थाईलैंड, नेपाल, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे सहित विभिन्न देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। समारोह में कुल 10 पीएचडी उपाधियां और 36 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे, जो विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाते हैं। इस अवसर पर "मंजिरी" नामक एक विशेष पत्रिका का भी विमोचन किया जाएगा, जो विश्वविद्यालय के मौजूदा छात्रों द्वारा तैयार की गई है। कई गणमान्य अतिथि होंगे शामिल इसमें प्रथम बैच से लेकर अब तक के पूर्व छात्रों की यात्राओं, अनुभवों और उपलब्धियों को संकलित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दिन के उत्तरार्ध में दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस केंद्र की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22वें आसियान–भारत शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। करीब नौ वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित हो रहे इस दीक्षांत समारोह में देश-विदेश से आए छात्र, उनके परिजन और कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे। प्रमुख अतिथियों में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पेरियासामी कुमारन शामिल रहेंगे।  

राष्ट्रपति मुर्मु का बयान—राम मंदिर हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक

अयोध्या  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नवरात्र के प्रथम दिन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पावन प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम अब धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन चुका है और यह मंदिर परिसर भारत की सनातन चेतना, ऊर्जा और पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत का पुनर्जागरण केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सभी आयामों में हो रहा है। राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का नमन करना और भारत माता का वंदन करना एक ही भाव है। देवभक्ति और देशभक्ति का मार्ग अलग नहीं, बल्कि एक ही है। राष्ट्रपति ने रामराज्य की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के सर्वोच्च आदर्शों को प्रस्तुत करता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के रामायण में वर्णित आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों माता शबरी से भावपूर्ण मिलन, निषादराज से स्नेह, जटायु के प्रति सम्मान, वानर सेना का सहयोग, जामवंत और यहां तक कि गिलहरी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी उदाहरण एक सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी जीवन दर्शन को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जो नवरात्र का प्रथम दिन है, इस पावन अवसर पर अयोध्या आकर वह स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हैं। साथ ही उन्होंने देशवासियों को रामनवमी के अवसर पर अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। इस मौके पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अयोध्या आस्था, संस्कार और विरासत की भूमि है और आज यह वैश्विक चेतना का केंद्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भारतीय संदेश के कारण आज विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। राज्यपाल ने कहा कि भारत वह भूमि है जहां शक्ति का अर्थ सृजन, आस्था का अर्थ करुणा और धर्म का सार समाज को जोड़ना है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर को देशवासियों के लिए सदैव स्मरणीय बताया।

राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिका को पढ़ाने का किया आह्वान

रायपुर. बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।  जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े। राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल  रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे। राज्यपाल  डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है। बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।        

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 को जगदलपुर में संभागीय बस्तर पंडुम में आएंगी

जगदलपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 7 फरवरी को बस्तर पंडुम संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जगदलपुर आएंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई है। मुख्य सचिव विकास शील ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर प्रवास के मद्देनजर आज यहां मंत्रालय में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली। मुख्य सचिव विकास शील ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेकर बस्तर पंडुम के संभागीय कार्यक्रम के आयोजन और इससे संबंधित अन्य तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य सचिव विकासशील ने राष्ट्रपति महोदया के प्रवास अवसर पर सुरक्षा, चिकित्सा, आवागमन सहित तमाम जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बस्तर कलेक्टर से वहां की सभी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने रायपुर कलेक्टर को भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में जनसम्पर्क एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।

जालंधर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का विशेष दौरा खराब मौसम के कारण रद्द

जालंधर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जालंधर दौरे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति मुर्मू का जालंधर दौरा रद्द हो गया है। जानकारी के अनुसार खराब मौसम के कारण उनकी फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी। उनकी फ्लाइट अमृतसर से उड़ाने भरने वाली थी। उन्होंने अमृतसर से स्पेशल विमान से जालंधर आना था। बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू ने जालंधर में एन.आई.टी. के कन्वोकेशन समागम में शिरकत करनी थी लेकिन उनकी फ्लाइट खराब मौसम के चलते टेकऑफ नहीं कर सकी जिसके चलते वह समागम में नहीं पहुंच रहीं। एक दिन पहले गुरुवार को ही सीएम भगवंत मान ने अमृतसर के होटल ताज स्वर्ण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को श्री हरिमंदिर साहिब की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति ने सीएम मान और राज्यपाल के साथ रात्रि भोज किया।

संविधान की नई पहचान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में किया संविधान का विमोचन

नई दिल्ली  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष हम ओल चिकी लिपि की शताब्दी मना रहे हैं। उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की, जिन्होंने शताब्दी वर्ष में भारत के संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करवाया। भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में बताया गया, "अलचिकि लिपि में लिखित संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है। यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित हुआ है।"पोस्ट में आगे लिखा गया, "संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संताली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संताली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे। संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे।" इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे। बता दें कि संथाली भाषा, जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल में भरी शानदार उड़ान, अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर गार्ड ऑफ ऑनर

अंबाला  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरी. राष्ट्रपति सुबह 9.15 बजे स्पेशल विमान से अंबाला पहुंची थीं. यहां एयरफोर्स स्टेशन पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया. कैप्टन अमित गेहानी राफेल के पायलट: कैप्टन अमित गेहानी राष्ट्रपति को ले जाने वाले विमान के पायलट हैं. वो भारतीय वायु सेना की नंबर 17 स्क्वाड्रन, "गोल्डन एरो" के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) भी हैं. भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ने भी भरी उड़ान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विमान के साथ भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी एक अन्य राफेल विमान से उड़ान भरी. राष्ट्रपति को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर: अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर सबसे पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की और एयरफोर्स स्टेशन की विभिन्न यूनिट्स का निरीक्षण किया. इसके अलावा राष्ट्रपति अधिकारियों से राफेल विमान की तकनीक, परिचालन प्रणाली और सुरक्षा रणनीति से जुड़ी जानकारी ली. अंबाला एयरपोर्ट स्टेशन के आसपास की सुरक्षा कड़ी: कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करेंगी. राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए अंबाला प्रशासन और एयरफोर्स ने सुरक्षा कड़ी कर दी है. वायुसेना और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. एयरफोर्स स्टेशन के आसपास के इलाके को नो ड्रोन जोन घोषित किया गया है. नो ड्रोन जोन घोषित: अंबाला SP अजीत सिंह शेखावत ने बताया "सुरक्षा के लिए हर एरिया में पुलिस, एसपीजी और एयरफोर्स की टीमें तैनात की गई है. अंबाला एयरपोर्ट स्टेशन और आसपास के इलाकों को नो ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया है." बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान भारत ने फ्रांस से खरीदे हैं. 5 राफेल की पहली खेप 27 जुलाई 2020 को मिली थी. ये विमान सबसे पहले अंबाला एयरबेस पहुंचे थे.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी का किया उद्घाटन

कोविड महामारी में यशोदा मेडिसिटी का बड़ा योगदान, उत्तर भारत में 'स्टेप्स' मॉडल लागू करने वाला पहला अस्पताल : द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति ने यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन डॉ. पीएन अरोड़ा को दी शुभकामनाएं, कहा- यह अस्पताल बनेगा हेल्थकेयर में बदलाव की मिसाल  'अफोर्डेबल वर्ल्ड क्लास हेल्थ सर्विस टू ऑल' के मिशन को पूरा करेगी यशोदा मेडिसिटी : राष्ट्रपति गाजियाबाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को गाजियाबाद के इंदिरापुरम में यशोदा मेडिसिटी का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे और जनसेवा की भावना की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि देशवासियों को निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों में आकर उन्हें गर्व और खुशी दोनों का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि यशोदा मेडिसिटी ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरी निष्ठा के साथ अपनाया है। कोविड महामारी के दौरान इस संस्थान ने बड़ी संख्या में लोगों का उपचार किया और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत भी उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने बताया कि 'सिस्टम फॉर टीबी एलिमिनेशन इन प्राइवेट सेक्टर (स्टेप्स)' के तहत उत्तर भारत का पहला केंद्र यशोदा मेडिसिटी को बनाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान सिकल सेल एनीमिया जैसी जनजातीय क्षेत्रों में होने वाली बीमारियों पर विशेष रूप से काम कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यशोदा मेडिसिटी इस दिशा में और अधिक योगदान देगी। अस्पताल के चेयरमैन और एमडी डॉ. पी.एन. अरोड़ा के प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने सेल्फ मेड हेल्थकेयर मिशन के तहत एक विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित किया है, जो समाज सेवा और राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को अपनी माता यशोदा जी के नाम पर रखना भारतीय संस्कारों और स्वदेशी भावना का उदाहरण है। राष्ट्रपति मुर्मु ने अस्पताल का दौरा भी किया और कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना अत्याधुनिक अस्पताल देखा है, जहां एक ही छत के नीचे सभी परीक्षण और उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों का कीमती समय बचता है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और यह तभी संभव है जब देश का हर नागरिक स्वस्थ हो। उन्होंने कहा कि इस तरह की मेडिसिटी न केवल इलाज के लिए बल्कि अनुसंधान और नवाचार के लिए भी जरूरी हैं। राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि यशोदा मेडिसिटी आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों के साथ मिलकर कैंसर की जीन थैरेपी जैसी स्वदेशी तकनीकों को अपनाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है और सरकार इस दिशा में निरंतर काम कर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि निजी क्षेत्र के अच्छे स्वास्थ्य संस्थान देश के लिए अमूल्य योगदान दे सकते हैं। मेडिकल रिस्पॉन्सिबिलिटी के साथ सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी निभाना इन संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए। अंत में उन्होंने यशोदा मेडिसिटी से उम्मीद जताई कि यह 'अफोर्डेबल वर्ल्ड क्लास हेल्थ सर्विस टू ऑल' के मिशन को पूरा करेगी और देश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराएगी। उन्होंने डॉ. पी.एन. अरोड़ा और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं कि वे सेवा, गुणवत्ता और नवाचार के साथ देश को गौरवान्वित करते रहें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएन अरोड़ा, सीईओ डॉ उपासना अरोड़ा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। विशेष शॉल भेंट कर हुआ अतिथियों का स्वागत यशोदा मेडिसिटी के उद्घाटन समारोह में शामिल सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत संस्थान के चेयरमैन और एमडी डॉ पीएन अरोड़ा ने विशेष शॉल भेंट कर किया। शॉल पर रामायण के दृष्यों को रेशम के धागों से उकेरा गया है और प्रत्येक शॉल को बनाने में कारीगरों को एक वर्ष का समय लगा है। इसके साथ ही अतिथियों को शंख और स्मृति चिह्न देकर उनका अभिवादन किया गया।