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जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

करमा तिहार हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कंवर समाज ने सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया अनुकरणीय उदाहरण जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय करमा परब महोत्सव में मुख्यमंत्री ने समाजजनों को दी शुभकामनाएं : युवाओं से शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकजुटता का किया आह्वान कंवर समाज के सामाजिक भवनों एवं सांस्कृतिक मंच के लिए 90 लाख रुपए तथा राजधानी में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा रायपुर   करमा तिहार हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपरा, आस्था और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनुपम प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने के साथ प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक एकता और सामूहिकता का संदेश देता है। बदलते समय के बीच कंवर समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और रीति-रिवाजों को सहेजकर नई पीढ़ी के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना ही किसी समाज की वास्तविक शक्ति है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज युवा प्रभाग महानगर इकाई द्वारा आयोजित भव्य करमा परब महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और करमा तिहार की खुशियां समाजजनों के साथ साझा कीं। उन्होंने भादो एकादशी व्रत एवं करमा तिहार की सभी समाजजनों और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कंवर समाज के लिए कोरबा जिले के मड़वारानी में सामाजिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपए, राजधानी रायपुर के टाटीबंध में सामाजिक भवन के लिए 25 लाख रुपए तथा कांकेर के ग्राम जेफरा में सांस्कृतिक मंच के लिए 15 लाख रुपए देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने राजधानी रायपुर में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लिए कंवर समाज युवा प्रभाग और सभी सामाजिक पदाधिकारियों की सराहना की। प्रकृति और मानव जीवन के अटूट संबंध का उत्सव है करमा तिहार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करमा तिहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच अटूट संबंध का उत्सव है। इस पर्व में करम डार की पूजा की जाती है। समाज के बेटे-बेटियां श्रद्धा और आस्था के साथ उपवास रखकर विधि-विधान से करम डार की पूजा-अर्चना करते हैं। रात्रि जागरण में पारंपरिक करमा गीत और नृत्य उत्सव में उल्लास भरते हैं। अगले दिन करम डार के विसर्जन के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा प्रकृति के प्रति हमारी श्रद्धा, विश्वास और संरक्षण की भावना को अभिव्यक्त करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को कभी केवल संसाधन नहीं माना, बल्कि उसे जीवन का आधार और हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग माना है। जल, जंगल और जमीन के साथ हमारा रिश्ता केवल आवश्यकता का नहीं, बल्कि आस्था और आत्मीयता का भी है। करमा तिहार जैसी परंपराएं इसी संबंध को पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत करती आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रकृति संरक्षण की इसी भावना को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया है। देशभर में बड़ी संख्या में नागरिक इससे जुड़कर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पौधरोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। संस्कृति के संरक्षण के साथ शिक्षा और सामाजिक सुधार भी जरूरी मुख्यमंत्री साय ने कंवर समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से नशामुक्ति को लेकर समाज के भीतर हो रही सार्थक पहल सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, संस्कार, संगठन और जागरूकता आवश्यक हैं। हमारी युवा पीढ़ी आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़े, नए अवसरों का लाभ उठाए, लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को भी हमेशा साथ लेकर चले। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा सामाजिक एकजुटता को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि करमा परब महोत्सव का आयोजन युवा प्रभाग द्वारा किया जाना विशेष प्रसन्नता की बात है। यह इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर सजग है और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभा रही है। जनजातीय समाज का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं। आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। यह पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने आत्मीयता के साथ कहा कि आज छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी आपके बीच का आपका अपना ‘विष्णु भैया’ है। हमारी सरकार जनजातीय समाज के प्रत्येक परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पक्के आवास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। इसी प्रकार धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास को गति दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ जनजातीय समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसके जीवन में वास्तविक बदलाव आए। युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए … Read more

बिजली की बढ़ती मांग के बीच छत्तीसगढ़ की सप्लाई व्यवस्था मजबूत, पीक टाइम में चुनौती बरकरार

देशभर में बढ़ी बिजली की मांग के बीच छत्तीसगढ़ में आपूर्ति व्यवस्था बेहतर, पीक आवर्स में बढ़ रहा दबाव – मौसम परिवर्तन और उमस भरी गर्मी के साथ धान की सिंचाई के लिए कृषि पंपों का संचालन बढ़ने से मांग में वृद्धि रायपुर पूरे देश में बिजली की मांग बढ़ने के कारण विद्युत उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। उमस भरी गर्मी, कोयले की उपलब्धता में कमी तथा सभी राज्यों में बढ़ी हुई मांग इसके प्रमुख कारण हैं। छत्तीसगढ़ में भी बिजली की मांग बढ़ी है, हालांकि अन्य राज्यों की तुलना में यहां स्थिति बेहतर है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीमसिंह कंवर ने बताया कि हाल के दिनों में बिजली की मांग में अचानक भारी वृद्धि दर्ज की गई है। पावर एक्सचेंज में भी बिजली की उपलब्धता सीमित होने तथा ग्रिड की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह अस्थायी स्थिति बनी हुई है। वितरण कंपनी स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को हो रही परिचालन समस्याओं से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने कहा कि वन नेशन, वन ग्रिड के तहत देश की विद्युत प्रणालियां एकीकृत ग्रिड से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में ग्रिड अनुशासन, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। विद्युत ग्रिड की सुरक्षा, स्थिरता और संतुलन बनाए रखना पावर कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिजली की मांग और आपूर्ति के अंतर को दूर करने तथा उद्योगों को अधिकतम बिजली उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तकनीकी व प्रबंधकीय उपाय प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं।  वितरण कंपनी राज्य के उद्योगों को नियमित विद्युत आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है।  जल्द से जल्द सुचारू और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किये जा रहे हैं। दिन के समय प्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है। शाम के पीक आवर्स में मांग में अचानक वृद्धि होने के कारण कुछ समय के लिए विद्युत व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है।  उपलब्ध बिजली का बेहतर प्रबंधन करते हुए सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में वर्तमान औसत मांग करीब 6000 मेगावाट है, इसकी पूर्ति के लिए उपलब्ध बिजली के साथ पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही है। देशभर के सभी राज्यों में मांग अधिक होने के कारण पावर एक्सचेंज में बिजली की उपलब्धता सीमित है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त बिजली मिलना कठिन हो रहा है। बीती रात भी प्रदेश की अतिरिक्त आवश्यकता की पूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश से करीब 200 मेगावाट बिजली 10 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई। धान में सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में कृषि पंप संचालित हो रहे हैं। मौसम में परिवर्तन और उमस भरी गर्मी के कारण भी बिजली की खपत बढ़ी है। कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री कंवर ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभर में बिजली की बढ़ी मांग का असर विद्युत उपलब्धता पर पड़ा है। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए अतिरिक्त बिजली की खरीद के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्युत आपूर्ति व्यवस्था संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विद्युत कंपनी की प्राथमिकता विद्युत प्रणाली को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं को अधिकतम संभव बिजली उपलब्ध कराना है। मांग और उपलब्धता की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार बिजली की अतिरिक्त व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं।  

रजिस्ट्री हुई और तुरंत हो गया नामांतरण, अजीत राम साहू को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

रायपुर जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने और लंबे इंतजार की परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से कम हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के श्री अजीत राम साहू ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पहले जिस नामांतरण के लिए उन्हें अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था और काम पूरा होने का इंतजार करना पड़ता था, इस बार वह रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही पूरा हो गया। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा से उन्हें न केवल कार्यालयों की अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिली, बल्कि समय की भी बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने के साथ आधार आधारित ई-केवाईसी जैसी सुविधाओं से नागरिकों के लिए संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए पंजीयन विभाग ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है। पहले नामांतरण के लिए करना पड़ता था इंतजार, अब रजिस्ट्री के साथ ही पूरा हुआ काम श्री अजीत राम साहू ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। इससे खेती-किसानी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए समय निकालने में भी परेशानी होती थी। इस बार ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण पूरा हो गया। इससे उन्हें अलग से तहसील कार्यालय जाने और नामांतरण के लिए इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। श्री साहू ने बताया कि इस सुविधा से उनका समय बचा और संपत्ति से जुड़े आगे के कार्यों को पूरा करने में भी आसानी हुई। ऑटोम्यूटेशन से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया हुई आसान पंजीयन विभाग द्वारा लागू ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग की संबंधित प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और बार-बार संबंधित कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है। इस व्यवस्था का विशेष लाभ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है, जिन्हें पहले जमीन के नामांतरण के लिए तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया जुड़ने से समय की बचत और अनावश्यक दौड़भाग में कमी आ रही है। आधार आधारित ई-केवाईसी से पंजीयन में बढ़ रही पारदर्शिता पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग केवल नामांतरण तक सीमित नहीं है। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे पहचान संबंधी प्रक्रिया अधिक सुगम होने के साथ गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका कम करने में मदद मिल रही है। तकनीक आधारित इन सुधारों से पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर समय और अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अजीत राम की कहानी—तकनीक से आसान हुआ जमीन का काम श्री अजीत राम साहू ने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने और कार्यालयों के अतिरिक्त चक्कर से राहत मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री साहू का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में तकनीकी सुधारों का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। उनके लिए ऑटोम्यूटेशन केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि लंबे इंतजार से मुक्ति, समय की बचत और संपत्ति संबंधी कार्यों को आसानी से पूरा करने का माध्यम बना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई अजीत राम साहू की यह कहानी पंजीयन सेवाओं में आ रहे बदलाव का उदाहरण है। जहां पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, वहीं अब तकनीक के माध्यम से दोनों प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय से नागरिकों को सुविधा मिल रही है।

सहायक शिक्षक भर्ती विज्ञापन में दिव्यांगता की श्रेणी के निर्धारण के संबंध में संशोधित अधिसूचना

रायपुर छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती वर्ष 2026 के अंतर्गत 2,292 पदों का संक्षिप्त विज्ञापन दिनांक 16 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। इसके पश्चात 24 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट पर विस्तृत विज्ञापन जारी किया गया तथा उसी दिन ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। आवेदन की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2026 निर्धारित थी। समाज कल्याण विभाग द्वारा 25 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना में विभिन्न विभागों के पदों के लिए दिव्यांगता की चिह्नांकित श्रेणियों का उल्लेख किया गया था। उक्त अधिसूचना के अनुसार सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (B) श्रेणी का चिह्नांकन नहीं किया गया था। इसी आधार पर भर्ती के विस्तृत विज्ञापन में दिव्यांगता के आरक्षित पदों का निर्धारण किया गया तथा पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी को शामिल नहीं किया गया।  इसके बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी की गई, जिसमें सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (B) श्रेणी को भी शामिल किया गया।  संशोधित अधिसूचना जारी होने से पहले सहायक शिक्षक भर्ती का संक्षिप्त एवं विस्तृत विज्ञापन जारी किया जा चुका था और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। ऐसी स्थिति में संशोधित अधिसूचना के आधार पर पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी को वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना विधिक एवं व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने रायपुर नगर निगम के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर . नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज रायपुर नगर निगम के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम भवन में आयोजित बैठक में रायपुर में इज ऑफ लीविंग (Ease of Living) और नागरिक-केन्द्रित (Citizen-Centric) प्रशासन पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सिटीजन को कस्टमर भी मानें और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता एवं जवाबदेही से पूर्ण करें। नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक  नीलेश क्षीरसागर, सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल और रायपुर नगर निगम के आयुक्त  संबित मिश्रा भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे। प्रमुख सचिव  बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों में गोलमोल जवाब पर अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गरीबों के आवास में गुणवत्ताहीन काम और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके कार्यों में कोताही न बरतें। उन्होंने शहर में साफ-सफाई की कमजोर व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने निगम के अधिकारियों को शहर में गंदगी की तस्वीरें दिखाकर सफाई की सुदृढ़ और प्रभावी व्यवस्था बनाने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने काम में लापरवाही पर दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव  बोरा हुए नाराज, अफसरों को लगाई कड़ी फटकार नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में केंद्र प्रवर्तित फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए अफसरों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने जोन आयुक्तों एवं अभियंताओं को आड़े हाथों लेते हुए कार्यों में प्रगति तथा सुधार लाने की नसीहत दी। अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने जोन कमिश्नरों, उपायुक्तों एवं अपर आयुक्तों को भी प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट करने के निर्देश दिए। उन्होंने मॉर्निंग विजिट की रिपोर्ट ग्रुप में साझा करने के भी निर्देश दिए।   बोरा ने रायपुर नगर निगम में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अफसरों की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं की निगरानी तथा मॉनिटरिंग सीसीटीवी कैमरे लगाकर की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में इतनी ढिलाई किसी भी स्थिति में सही नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि इन परियोजनाओं की मॉनिटरिंग एवं क्रियान्वयन की मुख्यालय स्तर पर निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि जोन स्तर पर जोन आयुक्तों तथा अभियंताओं के कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए वे आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।  समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव  बोरा द्वारा जोन-8 की जोन आयुक्त मती राजेश्वरी पटेल से पीएम आवास योजना के संबंध में सवाल पूछने पर वे कोई जवाब नहीं दे पाईं। जिस पर प्रमुख सचिव खासे नाराज दिखे और कहा कि यदि जोन आयुक्त को ही योजना की जानकारी नहीं है तो योजना की प्रगति का अंदाजा मैं लगा सकता हूं।  प्रमुख सचिव ने जेम पोर्टल में निविदाओं में विलंब पर रायपुर नगर निगम के प्रभारी कार्यापालन अभियंता  योगेश कङू को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरोत्थान योजना के कार्यों में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधीक्षण अभियंता  इमरान खान को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।  प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग को नागरिकों को उपभोक्ता की तरह मानना चाहिए। जिस प्रकार एक ग्राहक अपने दुकानदार से ये अपेक्षा रखता है कि वो उसे सही समय पर सही सामग्री उपलब्ध कराएगा और उसकी शिकायतों का विनम्रतापूर्वक निवारण करेगा। उन्होंने इसे समझाने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स और एयरलाइन कंपनियों के उदाहरण भी दिए।   बोरा ने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग सहित सभी निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्दश दिए। उन्होंने कहा कि हर तिमाही में कार्यों की अच्छी प्रगति दिखना चाहिए। उन्होंने निगम के अभियंताओं और अधिकारियों को विजन के साथ काम करते हुए निकट भविष्य में होने वाले कार्यों की रूपरेखा भी बनाकर रखने को कहा। उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।  बोरा ने रायपुर में बन रहे नए नालंदा परिसर में पुराने नालंदा परिसर की कमियों-खामियों को दूरकर आधुनिक परिसर और उच्च स्तरीय व्यवस्थाएं सुनिश्चत करने के निर्देश दिए। उन्होंने नए भवन में दिव्यांगजनों के लिए भी सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चत करने को कहा।  बोरा ने निगम द्वारा संचालित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स और सीवेज ट्रीटमेट प्लांट्स में बिजली की खपत को कम करने एनर्जी इफिसिएंट  (Energy-Efficient) तकनीकों का उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने जन सुविधाओं को नागरिकों तक पहुंचाने, जरूरत के अनुसार उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने और राजस्व वसूली में डिजिटल व आधुनिक तकनीकों को अपनाने को कहा। इससे नागरिकों की सुविधाएं बढ़ेंगी और उन्हें तेजी से नागिरक सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रमुख सचिव ने मिशन अमृत 2.0 के तहत रायपुर के शीतला तालाब के पुनरोद्धार और सौंदर्यीकरण के कार्यों को आगामी मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने वहां गहरीकरण, पिचिंग, पेवर-ब्लॉक इत्यादि कार्यों में टाइमलाइन के अनुसार प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निदान-1100 में प्राप्त नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक  एस.के. सुंदरानी और मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा सहित रायपुर नगर निगम के सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त, अभियंता और सभी जोनों के कमिश्नर भी बैठक में उपस्थित थे।

अम्बिकापुर में आयोजित हुई समान नागरिक संहिता पर विशाल बैठक

रायपुर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में समाज के विभिन्न वर्गों के विचार एवं सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से सरगुजा संभाग के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समूह चर्चा और बैठक का आयोजन गुरुवार को अम्बिकापुर स्थित शासकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में किया गया। इस बैठक में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों से एक हजार से अधिक गणमान्य नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों तथा निगम, मंडल एवं आयोग के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्री एम.के. राउत (यूसीसी समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी), श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता), डॉ. ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्या), श्री श्याम लाल धावड़े (उच्च स्तरीय समिति के सचिव एवं आयुक्त रायपुर संभाग), श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा (सरगुजा संभागायुक्त) उपस्थित रहे। इन प्रमुख मुद्दों पर खुलकर रखी गई राय   बैठक के दौरान समिति के समक्ष विवाह और तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभिन्न पक्षों ने खुलकर अपने सुझाव और विचार रखे। सत्र के दौरान उपस्थित समाज प्रतिनिधियों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की मूल अवधारणा, इसके विभिन्न पहलुओं और समिति द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। व्यापक सामाजिक भागीदारी इस बैठक में सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले पांचों जिलों-सरगुजा, बलरामपुर-रामानुजगंज, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर एवं कोरिया के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें पंडो समाज, उरांव समाज, सर्व आदिवासी समाज, गोंड समाज, केवट समाज, नगेशिया समाज, बिंझिया समाज, पनिका समाज, यादव समाज, ब्राह्मण समाज, स्वर्णकार समाज, रोमन कैथोलिक समाज, मझवार समाज, रजवार समाज, साहू समाज, चेरवा समाज, मुण्डा समाज, चिक समाज, मुस्लिम सुन्नी समाज, अंजुमन इस्लामिया कमिटी, सर्व पिछड़ा वर्ग समाज, रौनियार समाज और राजपूत समाज सहित विभिन्न संगठनों के लोगों ने लिखित एवं मौखिक रूप से अपने अभिमत प्रस्तुत किए। सुझावों के आधार पर तैयार होगा ड्राफ्ट  समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वर्गों और संगठनों से प्राप्त सभी सुझावों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। इन सुझावों के संकलन और विश्लेषण के बाद ही समान नागरिक संहिता का अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। ऑनलाइन माध्यम से भी दे सकते हैं सुझाव समिति ने नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि जो लोग इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। अपने विचार भेजने के लिए आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in या ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in का उपयोग किया जा सकता है।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से जीएसटी की राष्ट्रीय लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

रायपुर छत्तीसगढ़ में जीएसटी प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ द्वारा कर प्रशासन में सुधार के लिए अपनाई गई तकनीकी पहलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा किया गया। इसके साथ ही वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। इससे प्रदेश के व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। जीएसटी परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने किया। छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचार बने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जीएसटी प्रशासन को अधिक सरल, सटीक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। राज्य में मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से कर प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में विभिन्न पहल की गई हैं। इन तकनीकी नवाचारों का उद्देश्य कर संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण करना, कर अनुपालन में सुधार लाना, संभावित कर अनियमितताओं की समय पर पहचान करना तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ करदाताओं को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए छत्तीसगढ़ के नवाचार जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में लागू तकनीक आधारित सुधारों पर तैयार प्रस्तुतीकरण राजस्व सचिव द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुतीकरण को देश के सभी राज्यों के साथ भी साझा किया गया। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि किस प्रकार मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर उपयोग कर कर अनुपालन को मजबूत बनाने, संभावित अनियमितताओं की पहचान करने और करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनाने में सहायता मिल सकती है। छत्तीसगढ़ की इन पहलों की सराहना करते हुए अन्य राज्यों को भी राज्य के अनुभवों से सीख लेने तथा अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप इन तकनीकी नवाचारों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के इन नवाचारों को इससे पूर्व राष्ट्रीय समन्वय समिति की छठी बैठक में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। राष्ट्रीय जीएसटी लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, व्यावहारिक और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी की पहल के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में शामिल किया गया है। देश के 12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को इस समिति में प्रतिनिधित्व मिलने से जीएसटी कानूनों और प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विचार-विमर्श में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी। जीएसटी लॉ कमेटी कर कानूनों, नियमों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करने वाला महत्वपूर्ण मंच है। इस समिति में विभिन्न राज्यों के अधिकारी कर कानूनों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली कठिनाइयों, कानूनी प्रावधानों की व्याख्या से संबंधित मुद्दों तथा व्यापार एवं उद्योग जगत की समस्याओं पर चर्चा करते हैं। प्रदेश के व्यापारियों और उद्योगों की आवाज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगी लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व मिलने से प्रदेश के व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, कर सलाहकारों और विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। राज्य में जीएसटी कानूनों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, प्रक्रियागत जटिलताओं और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विषयों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर समिति के समक्ष रखा जा सकेगा। इन विषयों के परीक्षण और विचार-विमर्श के आधार पर आवश्यक सुझाव जीएसटी परिषद के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकेंगे। इससे छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत की अपेक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर कर नीति एवं प्रक्रियाओं से संबंधित विचार-विमर्श में स्थान मिलेगा। साथ ही जीएसटी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, सरल और करदाताओं के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में राज्य अपनी भूमिका निभा सकेगा। तकनीक आधारित कर प्रशासन और व्यापार सुगमता को मिलेगा बढ़ावा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में कर प्रशासन के आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचारों और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण, विभागीय निगरानी और कर अनुपालन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे विभागीय कार्यों में दक्षता बढ़ने के साथ करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की बढ़ती भागीदारी जीएसटी प्रशासन में छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और लॉ कमेटी में राज्य को प्रतिनिधित्व मिलना कर प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। एक ओर राज्य के तकनीकी नवाचारों और अनुभवों को अन्य राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लॉ कमेटी में भागीदारी से छत्तीसगढ़ को जीएसटी कानूनों एवं प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इन दोनों पहलों से छत्तीसगढ़ में तकनीक आधारित कर प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ व्यापारियों और उद्योगों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक जीएसटी व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

शहर के समग्र विकास और बेहतर प्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

रायपु नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज रायपुर के जयस्तंभ चौक स्थित मल्टी लेवल पार्किंग के तीसरे माले में संचालित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) वार रूम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर शहर में यातायात प्रबंधन, महिला सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अवैध निर्माण और खुदाई पर नियंत्रण तथा नागरिकों में नागरिक बोध (सिविक सेंस) विकसित करने से जुड़े विषयों की समीक्षा की। उन्होंने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने और विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।  बोरा ने आईटीएमएस वार रूम में तकनीकी संसाधनों, निगरानी व्यवस्था और उपलब्ध आंकड़ों के उपयोग के विभिन्न पहलुओं का निरीक्षण किया। उन्होंने आईटीएमएस वार रूम को सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के रूप में विकसित करने शहरी प्रबंधन, विभागीय समन्वय और नागरिक सुविधाओं को अधिक प्रभावी बनाने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। यातायात व्यवस्था के लिए प्रमुख मार्गों का होगा आकलन बैठक में शहर के प्रत्येक प्रमुख मार्ग पर वाहनों की क्षमता, यातायात के दबाव और सड़क की उपलब्ध क्षमता का आकलन करने तथा नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और यातायात संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान की दिशा में काम करना है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और नगर निगम की संयुक्त टीम बनाकर समन्वित प्रयास करने तथा जनजागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। सैनिटेशन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में शहर की स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रमुख मार्गों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई तथा घर-घर कचरा संग्रहण को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने आईटीएमएस की निगरानी व्यवस्था के माध्यम से गंदगी वाले स्थलों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। शहर में स्वच्छता एवं सैनिटेशन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने और कचरे के उचित प्रबंधन पर भी चर्चा की गई। स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और स्वच्छ व्यवहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए जनजागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। महिला सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर जोर शहर में महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने और आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को बेहतर करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। आईटीएमएस के माध्यम से उपलब्ध निगरानी व्यवस्था और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। आपदा प्रबंधन के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर जोर दिया गया, ताकि आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अवैध खुदाई और निर्माण पर प्रभावी निगरानी बैठक में शहर में अवैध खुदाई और अवैध निर्माण की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। निर्माण स्थलों पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और सुरक्षा मानकों के बिना किए जा रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक स्थलों पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकना है। जनजागरूकता से मजबूत होगा नागरिक बोध बैठक में नागरिकों को यातायात नियमों के पालन, सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और शहर की व्यवस्थाओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और नगर निगम की संयुक्त भागीदारी से जनजागरूकता अभियान चलाने की दिशा में काम करने पर चर्चा हुई। इसके माध्यम से नागरिकों में सिविक सेंस विकसित करने और शहर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जनभागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य है। प्रमुख सचिव  बोरा के आईटीएमएस के निरीक्षण के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश महादेव क्षीरसागर, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुमित अग्रवाल, रायपुर नगर निगम के आयुक्त  संबित मिश्रा, अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, डीसीपी सु अर्चना सिंह, एसीपी ट्रैफिक सु स्नेहिल साहू, संयुक्त संचालक  एस.के. सुंदरानी, अपर आयुक्त  लोकेश्वर साहू, उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील अग्रहरि और अधीक्षण अभियंता  प्रदीप यादव भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल

रायपुर   डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं और इनसे सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता, सतर्कता और जनभागीदारी है। साइबर सुरक्षा केवल शासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हमें साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी हम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026’ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।    डिजिटल क्रांति ने जीवन आसान बनाया, अब साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता जरूरी मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने देश में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री  मोदी ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत की थी, उस समय इतने विशाल देश और बड़ी ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव का सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने जहां नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी रूप से जानकार व्यक्ति भी इनके जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। सात सप्ताह के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने साइबर सुरक्षा के संदेश को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अभिनव गतिविधियां आयोजित की गईं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर नागरिकों को जागरूक किया गया। अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई और लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक से जुड़ा विषय बन चुका है। अभियान का समापन नहीं, यह एक नई शुरुआत है : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि साइबर जागृति अभियान को किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सात सप्ताह का यह अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर जागरूकता के संवाहक के रूप में आगे आकर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए। रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने युवाओं के अभिनव सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार मुख्यमंत्री  साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर का तेजी से विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।  सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा जो समाधान उपयोगी और व्यवहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ की गई है। विशेष रूप से वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा है कि यह सेवा किस तरह लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां लेकर आई है। डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका, सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में हो रहा है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल लेनदेन ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अभिनव पहल की है। अभियान के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, … Read more

गरबा पोशाक में सिगरेट पीने और पिस्टल दिखाने वाली 3 लड़कियां गिरफ्तार, कुल 9 आरोपी पकड़े गए

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रास गरबा कार्यक्रम के दौरान बनाई गई एक रील सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में कुछ युवतियां गरबा की वेशभूषा में सिगरेट पीते और पिस्टलनुमा वस्तु लहराते नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की है। इस मामले में सिविल लाइन थाने में अपराध दर्ज कर कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो गरबा टिकट और मेकअप के प्रचार-प्रसार के लिए बनाया गया था। वीडियो में गरबा की पारंपरिक वेशभूषा में युवतियों को सिगरेट पीते और पिस्टलनुमा वस्तु का प्रदर्शन करते देखा गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही सभी आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को पाबंद करने के लिए बाउंड ओवर की प्रक्रिया भी जारी है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर पुलिस की चेतावनी बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का आपत्तिजनक प्रदर्शन करने तथा सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने ऐसे मामलों में नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। वायरल रील को लेकर हुई इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर भी मामला चर्चा में है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर कोई भी सामग्री पोस्ट करने से पहले प्रकृति और संभावित प्रभाव का ध्यान रखें।