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छत्तीसगढ़ में अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने वन विभाग दे रहा विधिक साक्षरता प्रशिक्षण

रायपुर. राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं।  विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर श्री चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी। वन एवं वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि प्रकरणों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए समय-समय पर संशोधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी कार्यशालाओं के माध्यम से दी जा रही है। आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी धाराओं तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा हेतु विधिक रूप से सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

छत्तीसगढ़ में छेरछेरा तिहार पर्व है लोक परम्परा में दान और समर्पण की जीवंत मिसाल

रायपुर. घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्पराछत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। मंत्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा मंत्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है। छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर “छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…” का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें।इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है।छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।

घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा

रायपुर : छेरछेरा तिहार : सामाजिक समरसता और लोक संस्कृति का उत्सव घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा छेरछेरा तिहार : लोक परम्परा में दान और समर्पण की जीवंत मिसाल रायपुर घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्पराछत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।      मंत्री श्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।      मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।       इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।       उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है।       छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर “छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…”     का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें।इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है।छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।

3 IAS व 5 IPS अधिकारियों को पंजाब सरकार ने दी पदोन्नति

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने 3 (IAS) अधिकारियों को पदोन्नत किया है। यह पदोन्नति 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। जिन अधिकारियों को प्रमोट किया गया है, उनमें घनश्याम थोरी, कुमार अमित और विमल कुमार सेतिया के नाम शामिल हैं। जिन्हें पंजाब सरकार में सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि ये तीनों अधिकारी आगामी आदेशों तक अपने वर्तमान पदों पर कार्य करते रहेंगे और उच्च वेतनमान का लाभ प्राप्त करेंगे। इसी तरह पंजाब सरकार ने चार IPS अधिकारियों को आईजीपी पद पर पदोन्नति दी है। आईजीपी पद पर पदोन्नत होने वाले IPS अधिकारियों में जगदाले नीलांबरी विजय, राहुल एस., बिक्रम पाल सिंह भट्टी, राजपाल सिंह शामिल हैं, जबकि  इंदरबीर सिंह का नाम आईजीपी पद के लिए सील्ड कवर में रखा गया है, क्योंकि उनके विरुद्ध आपराधिक एवं विभागीय कार्यवाही लंबित है। यह सील्ड कवर केवल कार्यवाही के अंतिम निपटारे के बाद ही खोला जाएगा। एक IPS अधिकारी को ADGP पद पर पदोन्नति पंजाब सरकार के गृह विभाग ने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) पद पर पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं। जानकारी अनुसार कौस्तुभ शर्मा, IPS को यह पदोन्नति दी गई है। जबकि दो अधिकारियों के नाम सील्ड कवर में रखे गए हैं, जिनमें गौतम चीमा व परमराज सिंह उमरानंगल के नाम शामिल है। आदेश के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध लंबित मामलों के निपटारे के बाद ही सील्ड कवर खोला जाएगा।

नक्सली बारसे देवा का तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर

सुकमा. नए साल की शुरुआत होते ही लाल आतंक को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष नक्सली हिड़मा के करीबी और पीएलजीए कमांडर बारसे देवा ने आज शनिवार, 3 दिसंबर 2026 को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सली कमांडर बारसे देवा के सरेंडर के बाद की सबसे पहली तस्वीर सामने आई है। तेलंगाना पुलिस जल्द ही देवा के सरेंडर की आधिकारिक घोषणा करने वाली है। आपको बता दें कि कल पीएलजीए कमांडर बारसे देवा के सरेंडर करने की सूचना मिली थी। बताया गया था कि आज वह तेलंगाना के डीजीपी के सामने हैदराबाद में आत्मसमर्पण करेंगे। बारसे देवा पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। वह नक्सल संगठन के भीतर एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। हिड़मा के एनकाउंटर के बाद बारसे देवा को पीएलजीए का कमांडर बनाया गया था। इसके बाद से वह संगठन की सैन्य गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे थे। 2025 में तेलंगाना में घुसा देवा सूत्रों के अनुसार, यह समूह अक्टूबर 2025 में तेलंगाना के जंगलों में घुसा था और वरिष्ठ माओवादी बारे चोक्का राव उर्फ दामोदर के नेतृत्व वाली राज्य समिति के साथ मिलकर काम कर रहा था। तेलंगाना की खास ग्रेहाउंड्स फोर्स और खुफिया अधिकारियों द्वारा लगातार की गई घेराबंदी और तलाशी अभियानों ने उनकी गतिविधियों को सीमित कर दिया था। साथ ही, पुलिस के शीर्ष अधिकारियों द्वारा लगातार की गई अपीलें भी देवा के आत्मसमर्पण का कारण बनीं। बारसे देवा ने 2000 में माओवादी आंदोलन में कदम रखा था। 2003 तक, उसने छत्तीसगढ़ के पुव्वारथी में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ के लिए काम किया। दिसंबर 2022 में, वह दंडकारण्य विशेष ज़ोनल समिति के सदस्य बने और जून 2023 में उन्हें PLGA का बटालियन कमांडर नियुक्त किया गया। सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था देवा देवा का सीपीआई (Maoists) के साथ 25 साल का जुड़ाव मध्य भारत के कुछ सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 2013 में झीरम घाटी नरसंहार का आरोप है, जिसमें बस्तर में 27 कांग्रेस नेताओं की जान चली गई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2021 में बीजापुर के टेकलगुडेम में हुए हमले में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे। 2006 से 2019 के बीच कम से कम पांच बड़े IED हमलों में भी उनका हाथ माना जाता है, जिसमें बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत वाला धमाका भी शामिल था। जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 16 जनवरी 2025 को तेलंगाना के कुमारम भीम आसिफाबाद जिले में धर्माराम बेस पर हमला और 30 जनवरी को छत्तीसगढ़ के जीरमगुडा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले का नेतृत्व किया था।   बारसे देवा माओवादी पार्टी की सैन्य टुकड़ियों (सशस्त्र बलों) की गतिविधियों को संभाल रहा था। नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है, और इसका कमांडर बारसे देवा है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन तीन जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। माओवादी पार्टी को हथियारों की सप्लाई में बारसे देवा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती रही है। हिड़मा और बारसे देवा दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे हिड़मा पूवर्ती गांव का रहने वाला था। वहीं बारसे देवा भी सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला है। करीब 2 साल पहले जब हिड़मा को सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया तो उसने ही बारसे देवा को PLGA बटालियन नंबर 1 का कमांडर बनाया था। देवा के साथ बड़ी संख्या में नक्सली थे। लेकिन अब पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद से बटालियन भी लगभग टूट गई है। 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को नक्सल संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। हालांकि, अब फोर्स ने इस टीम को काफी बैकफुट कर दिया है। इस टीम में AK-47, इंसास, SLR, स्नाइपर गन जैसे हथियारों से लैस सैकड़ों नक्सली थे। टेकलगुडेम, बुरकापाल, मिनपा, ताड़मेटला, टहकवाड़ा में नक्सलियों की इसी टीम ने बड़े हमले किए थे। जिसमें सैकड़ों जवानों की शहादत हुई है। हालांकि, अब ये टीम भी कमजोर हो गई है। अब देवा सरेंडर करना चाह रहा है। जानकारी ये भी है कि किसी माध्यम से उसने अपना संदेश बाहर भी भिजवाया है। देवा सरेंडर करता है तो उसकी बटालियन टूट जाएगी। इसका नेतृत्व करने वाला कोई नक्सली नहीं रहेगा। गृह मंत्री ने मां से की थी मुलाकात दरअसल, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा कुछ दिन पहले पूवर्ती गांव गए थे। वहां उन्होंने देवा और हिड़मा इन दोनों की मां से मुलाकात की थी। इनके माध्यम से उनसे सरेंडर करने की अपील की थी। वहीं हिड़मा नहीं माना और आंध्र प्रदेश के जंगल में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पत्नी राजे समेत 6 साथियों के साथ मारा गया। जिसके बाद अब देवा बारसे छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने की कोशिश कर रहा है। 15 में से 7 एरिया कमेटी बची, डिवीजन भी खत्म बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक बस्तर में नक्सलियों की कुल 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटी सक्रिय थी। माड़ डिवीजन, केशकाल और दरभा डिवीजन में नक्सली लगभग खत्म हो गए हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन में कुछ नक्सली हैं। लेकिन अब 7 एरिया कमेटी में कुछ छिटपुट नक्सली ही बचे हैं। दंडकारण्य इलाके में महज 120 से 150 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय हैं। ये नक्सली खत्म हुए तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो जाएगा।

विभागीय जांच में पकड़े गए 4 कथित कर्मचारी

खैरागढ़. राज्य शिक्षा आयोग के नाम से जारी फर्जी आदेशों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है. जांच में दोषी पाए गए टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. विभागीय जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में इन चारों की नियुक्ति सहायक ग्रेड-3 और संबंधित पदों पर जिन आदेशों के आधार पर हुई थी, वे आधिकारिक रूप से जारी ही नहीं किए गए थे. दस्तावेजों की सत्यता परखने पर पत्र क्रमांक और हस्ताक्षर विभागीय अभिलेखों से मेल नहीं खाए. मामले के खुलासे के बाद सभी कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया, लेकिन प्रस्तुत स्पष्टीकरण और दस्तावेज नियुक्ति को वैध सिद्ध नहीं कर सके. इसके बाद शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए चारों को सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया. यह मामला सामने आने के बाद विभागीय नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

चंगोराभाठा में अनुमति के विपरीत निर्माणाधीन भवन पर चला बुलडोजर

रायपुर. नगर पालिक निगम के आयुक्त विश्वदीप के आदेशानुसार और नगर निगम जोन 5 जोन कमिश्नर खीरसागर नायक के निर्देशानुसार नगर निगम जोन 5 मगर निवेश विभाग की टीम ने जोन 5 क्षेत्र अंतर्गत रिंग रोड अंतर्गत चंगोराभाठा में अनुमति के विपरीत निर्माणाधीन भवन को हटाने की कार्यवाही जेसीबी मशीन की सहायता से की गयी. कार्यवाही के दौरान नगर निगम कार्यपालन अभियंता लाल महेंन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता नागेश्वर राव रामटेके, उप अभियंता टिकेन्द्र चंद्राकर सहित नगर निगम मुख्यालय नगर निवेश उड़न दस्ता की टीम की स्थल में उपस्थिति रही.

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जानने, समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर फोटो प्रदर्शनी

रायपुर. छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक नृत्यों और विविध लोक कलाओं को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने के उद्देश्य से क्लाउड एवं संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ के सहयोग से एक विशेष फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन विधायक पुरंदर मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी राज्य की जनजातीय, ग्रामीण और लोक परंपराओं की जीवंत, कलात्मक और प्रामाणिक झलक प्रस्तुत कर रही है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त रूप से दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कला प्रेमियों के साथ-साथ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, संस्कृति अध्येताओं और आम नागरिकों के लिए भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जानने, समझने और अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध होगा। दीपेंद्र दीवान ने बताया कि यह फोटो प्रदर्शनी 02 जनवरी से 04 जनवरी 2026 तक कला वीथिका, महंत घासीदास परिसर, घड़ी चौक, रायपुर में आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 11बजे से सायं 7 बजे तक खुली रहेगी । प्रदर्शनी देखने प्रवेश सभी के लिए पूर्णतः निःशुल्क है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सांस्कृतिक आयोजन से जुड़ कर अपने छत्तीसगढ की सांस्कृतिक वैभव की जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि यह फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से न केवल दृश्य सौंदर्य प्रस्तुत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोक जीवन, लोक संस्कृति की विविधता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दे रही है। फोटो प्रदर्शनी लगाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है एंव लोक कलाकारों और शिल्पकारों के योगदान को रेखांकित कर तथा लोक कला के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।

रायगढ़ में महिला के पेट पर बिना चीरा सफल ऑपरेशन

रायगढ़. कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार गुणवत्ता और सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसी कड़ी में मातृ एवं शिशु 100 बिस्तर अस्पताल रायगढ़ में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक जटिल समस्या का सफल उपचार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में निवास करने वाली 55 वर्षीय महिला लंबे समय से गर्भाशय में दर्द एवं गर्भाशय बाहर आ जाने की गंभीर समस्या से पीड़ित थीं। आर्थिक एवं भौगोलिक कारणों से महिला बड़े शहरों में उपचार नहीं करा पा रही थीं। मातृ एवं शिशु रोग अस्पताल रायगढ़ पहुंचने पर महिला की जांच सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल के नेतृत्व में तथा डॉ. अभिषेक अग्रवाल के मार्गदर्शन में की गई। वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिशा ठाकुर क्षत्रिय एवं डॉ. उपमा पटेल द्वारा मरीज की पहले विस्तृत काउंसलिंग की गई। आवश्यक जांचों के पश्चात महिला का वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। यह शल्य प्रक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें पेट पर किसी प्रकार का चीरा नहीं लगाया जाता और मरीज को शीघ्र आराम मिलता है। चिकित्सकों के अनुसार 45 वर्ष की आयु के बाद एवं मेनोपॉज के पश्चात कई महिलाएं भय के कारण इस समस्या का उपचार नहीं करातीं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। समय पर किए गए इस ऑपरेशन से महिला को राहत मिली है और वह अब सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं। इस सफल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ.पी.एल.पटेल, सिस्टर इंचार्ज लता मेहर एवं जैसिंता सिस्टर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक रंजना पैकरा ने बताया कि अब जिले की महिलाओं को जटिल स्त्री रोग संबंधी उपचार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह उपलब्धि जिले में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है।

सीएम साय ने प्रदेशवासियों को लोकपर्व छेरछेरा की दी बधाई

रायपुर. छत्तीसगढ़ में धान और अन्न के दान का सबसे बड़ा पर्व लोकपर्व छेरछेरा पुन्नी आज मनाया जा रहा है. इस दिन को पौष पूर्णिमा व शांकभरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है. छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी का अलग ही महत्व है. वर्षों से मनाया जाने वाला ये पारंपरिक लोक पर्व साल के शुरुआत में मनाया जाता है. इस दिन रुपए-पैसे नहीं बल्कि अन्न का दान करते हैं. इस पर्व में सरकार भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है.महादान और फसल उत्सव के रूप त्यौहार मनाया जाने वाला छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता, समृद्ध दानशीलता की गौरवशाली परम्परा का संवाहक है. इस दिन ‘छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरहेरा’ बोलते हुए गांव के बच्चे, युवा और महिलाएं खलिहानों और घरों में जाकर धान और भेंट स्वरूप प्राप्त पैसे इकट्ठा करते हैं और इकट्ठा किए गए धान और राशि से वर्षभर के लिए कार्यक्रम बनाते हैं. छत्तीसगढ़ के किसानों में उदारता के कई आयाम दिखाई देते हैं. यहां उत्पादित फसल को समाज के जरूरतमंद लोगों, कामगारों और पशु-पक्षियों के लिए देने की परम्परा रही है. छेरछेरा का दूसरा पहलू आध्यात्मिक भी है, यह बड़े-छोटे के भेदभाव और अहंकार की भावना को समाप्त करता है. फसल के घर आने की खुशी में पौष मास की पूर्णिमा को छेरछेरा पुन्नी तिहार मनाया जाता है. इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती भी मनाई जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं. पौष पूर्णिमा धान के लिए प्रसिद्ध है. संपूर्ण भारतवर्ष में इस शुभदिन अन्न, दलहन-तिलहन का दान करना बेहद शुभ माना जाता है. यह सूर्य के उत्तरायण की प्रथम पूर्णिमा है. अत: इसका विशेष महत्व माना गया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकपर्व छेरछेरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है। नई फसल घर आने की खुशी में यह पर्व पौष मास की पूर्णिमा को बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिन मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है, जो अन्न, प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश देती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण की थी। इसी परंपरा के अनुरूप छेरछेरा पर्व पर धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल एवं अन्य अन्न का दान कर लोग परस्पर सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छेरछेरा पर्व हमें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस लोकपर्व को सद्भाव, उल्लास और पारंपरिक मूल्यों के साथ मनाने का आह्वान किया।