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एनआईएफटीईएम ने दिया मोटे अनाज से बेकरी उत्पाद निर्माण का जशपुर में प्रशिक्षण

पोषण तत्वों  के साथ ही रोजगार के अवसरों की दी जानकारी रायपुर, एनआईएफ़टीईएम के छात्रों ने मोटे अनाज में पाए जाने वाले फ़ाइबर, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स के महत्व के साथ ही इनके नियमित उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को मोटे अनाज आधारित उत्पादों से होने वाली आमदनी और बाज़ार संभावनाओं के बारे में भी बताया गया। प्रशिक्षण में स्व-सहायता समूह की 25 महिलाओं की रही सहभागिता        हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट द्वारा महुआ पर स्थापित सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में विगत दिवस मोटे अनाज के पोषण तत्वों और इनके उपयोग से बेकरी उत्पाद बनाने संबंधी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण में स्व सहायता समूह की 25 महिलाओं ने सहभागिता की। मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर  पोषण स्तर में करना है वृद्धि         कार्यक्रम का उद्देश्य नान खटाई, न्यूट्रीबार, कुकीज़ जैसे बेकरी आइटम्स में मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर इनके पोषण स्तर में वृद्धि करना और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से है जोड़ना           जशपुर में एनआईएफ़टीईएम टीम वैल्यू-एडेड फ़ूड प्रोडक्ट्स के उत्पादन के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। यह पूरी पहल स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत की जा रही है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. प्रसन्ना कुमार जी.वी. और श्री अभिमन्यु गौर कर रहे हैं, जबकि यह कार्यक्रम एनआईएफ़टीईएम के डायरेक्टर डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय के निर्देशन में संचालित हो रहा है। कार्यक्रम के संचालन और विभिन्न गतिविधियों के समन्वय में मिशन मैनेजर श्री विजय शरण प्रसाद और जय जंगल एफपीसी जशपुर के डायरेक्टर श्री समर्थ जैन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

‘धान बेचने में कोई समस्या नहीं’-किसान सेत राम

किसानों की सुविधा के लिए केंद्रों में माइक्रो एटीएम सहित सभी व्यवस्थाएँ उपलब्ध रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्य के सभी 33  जिले के धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदी का कार्य सुचारू, व्यवस्थित और तेज़ी से जारी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी पंजीकृत किसानों का धान प्राथमिकता से खरीदा जाए, ताकि किसी किसान को असुविधा न हो।         जशपुर के किसान सेत राम आज कुनकुरी विकासखंड के ग्राम नारायणपुर धान खरीदी केंद्र पहुँचे और अपना टोकन कटवाकर 42 क्विंटल धान की बिक्री की। उन्होंने खरीदी केंद्र की व्यवस्थाओं पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि “धान बेचने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं आई। इस वर्ष पूरी व्यवस्था पहले से अधिक सुव्यवस्थित है।” टोकन जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था         किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों में टोकन जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था, माइक्रो एटीएम सुविधा, पर्याप्त बारदाना, शुद्ध पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। माइक्रो एटीएम सुविधा—किसानों के लिए बड़ी राहत          छत्तीसगढ़ सरकार ने धान उपार्जन केंद्रों में माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराई है, जिसके माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत निकाल सकते हैं। इस सुविधा से किसानों को बैंक जाकर कतार में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती और धान बेचने के तुरंत बाद आवश्यक नकद उपलब्ध हो जाता है।

कृषि मंत्री विश्व मात्स्यिकी दिवस पर आयोजित कृषक संगोष्ठी में हुए शामिल

रायपुर, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मछलीपालन मंत्री रामविचान नेताम आज विश्व मात्स्यिकी दिवस पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम सभागार में आयोजित एक दिवसीय मत्स्य कृषक संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रति वर्ष 21 नवंबर को विश्व मात्स्किी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन के महत्व, मछुआ समुदाय के अधिकारों, आर्थिक आजिविका, खाद्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत एवं समुदाय सशक्तिकरण हेतु जागरूकता लाना है। श्री नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर रजत जयंती मना रहा है। राज्य में प्राकृतिक रूप से मछली पालन के स्त्रोत प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। मत्स्य किसानों के विकास के लिए आवश्यकता है केवल नवीन तकनीक, मानव कौशल विकास, आर्थिक प्रोत्साहन एवं सहायता की। मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6 वें स्थान पर कृषि मंत्री नेताम ने बताया कि शासन ने राज्य निर्माण के पश्चात राज्य एवं केन्द्र की विभिन्न योजनाओं जैसे कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नील काति, प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के माध्यम से मछली पालन विकास के सतत् प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में कुल 1,30,001 जल स्त्रोत (2.039 लाख हेक्टेयर) उपलब्ध है जिनमें 98 प्रतिशत् में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन हो रहा है। 3571 किलोमीटर का नदीय जलक्षेत्र भी उपलब्ध है। सघन मत्स्य पालन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र निर्मित किया जा रहा है, अब तक कुल 7580 हेक्टर जलक्षेत्र निजी क्षेत्र में अतिरिक्त निर्मित हो चुका है। मछली पालन हेतु गुणतत्ता युक्त मत्स्य बीज एक आधारभूत आवश्यकता है। राज्य को मत्स्य बीज के क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु निरंतर प्रयास जारी है। अब तक कुल 82 नवीन हैचरी निर्मित कर 120 हैचरियों के माध्यम से 583 करोड़ मत्स्य बीज प्रति वर्ष उत्पादित हो रहा है, एवं राज्य देश में 6 वें स्थान पर है। हमारा राज्य मत्स्य बीज उत्पादन में न सिर्फ आत्मनिर्भर हुआ अपितु अन्य राज्यों को निर्यात भी हो रहा है। मंत्री नेताम ने कहा कि विपणन व्यवस्था को सुदृढ बनाने एवं उपभोक्ता तक ताजी मछली पहुंचाने के लिए 1008 मोटर साइकल, आईस बॉक्स, 10 थी व्हीलर एवं 05 इन्सुलेटेड ट्रक, 114 वाहन (लाइव फिश वेडिंग सेन्टर) वितरित किए गए। रायपुर दुर्ग बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना की गई। मंत्री श्री नेताम ने इस मौके पर मछुआ संघ की ओर से हितग्राहियों को लाभांश राशि का चेक प्रदान किया। मत्स्य पालन बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा और रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू ने भी सम्बोधित किया। मछलीपालन पालन विभाग के संचालक एमएस नाग ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि भारत के मध्यस्थल पर स्थित प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन विकास काफी प्रगति पर है। राज्य में उपलब्ध जल संसाधन की दृष्टि से मछली पालन एक विशिष्ट स्थान रखता है, राज्य की भौगोलिक एवं कृषि जलवायु स्थितियां भी मछलीपालन हेतु उपयुक्त है। यह ग्रामीण क्षेत्रों की बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को मछलीपालन की आधुनिक तकनीकी पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1840 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से 63 हजार 280 सदस्य मत्स्य पालन कर रहे हैं। संगोष्ठी में मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखन लाल धीवर, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, मछुआ कल्याण बोर्ड के भूतपूर्व अध्यक्ष बसंत तारख और रामकृष्ण धीवर सहित बड़ी संख्या में मत्स्य किसान शामिल थे।

मां और दूसरे पति ने मिलकर की बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई आजीवन सजा

दुर्ग दुर्ग में अपने ही 4 साल के बच्चे की हत्या मामले में उसकी मां और सौतेले पिता को कठोर सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी है. साथ ही 1000 रुपए अर्थ दंड भी लगाया है. वहीं जुर्माना न भरने पर 8 महीने अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. दरअसल, पूरा मामला 2 साल पुराना है. आरोपी गायत्री को पहले पति से जगदीप सिंह (4 साल) का बेटा था. जगदीप का सौतेला पिता मनप्रीत उसके साथ आए दिन मारपीट करता था और गायत्री भी उसे मारती थी. इसी दौरान 31 जनवरी 2023 की रात दोनों ने जब जगदीप सिंह को खूब पीटा. अंदरूनी चोट आने से 4 साल का जगदीप बेहोश हो गया, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई. दंपति ने चुपचाप उसका अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन पुलिस को इस बात की भनक लग गई. पुलिस ने मौके पर पहुंच गई और मासूम का पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम में जानकारी सामने आई कि अत्यधिक मारपीट होने की वजह से मासूम की मौत हो गई. जिसके बाद पुलिस ने पति पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

अब संपत्तियों की होगी ड्रोन आधारित जांच, रडार तकनीक बनाएगी 3D इमेज

 रायपुर  नगर निगम जल्द ही राजधानी की सभी संपत्तियों का व्यापक और तकनीकी आधारित नया सर्वे शुरू करने जा रहा है. निगम सूत्रों के अनुसार, इस माह के अंत तक सर्वे प्रक्रिया का शुभारंभ किया जाएगा. इसके लिए नगर निगम एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध की अंतिम तैयारी में है. वर्क ऑर्डर जारी होते ही कंपनी घर-घर जाकर संपत्तियों का सर्वे करेगी. उद्देश्य उन संपत्तियों को टैक्स दायरे में शामिल करना है जो अब तक निगम के रिकॉर्ड से बाहर हैं, साथ ही पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल और सटीक रूप में अपडेट करना है. पिछला सर्वे 2017-18 में हुआ था… नगर निगम द्वारा अंतिम बार सर्वे वर्ष 2017-18 में विश्व बैंक की सहायता से जीआईएस तकनीक पर आधारित कराया गया था. उस समय करीब 3.52 लाख संपत्तियों को निगम के रिकॉर्ड में शामिल किया गया था. लेकिन इसके बाद शहर का तेजी से विस्तार हुआ और बड़ी संख्या में नए आवासीय, व्यावसायिक भवन, मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट और प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स विकसित हुए. निगम का अनुमान है कि पिछले सर्वे के बाद से लगभग 50 से 60 हजार नई संपत्तियां रिकॉर्ड में नहीं जुड़ीं. अब 62 करोड़ आएगा खर्च पहले योजना थी कि सर्वे ड्रोन तकनीक से किया जाए, लेकिन निगम कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस बार रडार सर्वे जिसमें 3डी इमेज के जरिए सर्वे किया जाएगा. रडार तकनीक से सटीक त्रि-आयामी (3डी) मानचित्र तैयार होगा, जिसमें प्रत्येक भवन की ऊंचाई, फ्लोर, कंस्ट्रक्शन टाइप और वास्तविक भू-आकृति स्पष्ट रूप से दर्ज होगी. इस हाई-रेजोल्यूशन मैपिंग से भविष्य में सिवरेज नेटवर्क, पेयजल लाइन, सड़क निर्माण और नगरीय ढांचे की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी. कुल परियोजना लागत पहले अनुमानित 60 करोड़ थी, लेकिन रडार तकनीक अपनाने से लगभग 2 करोड़ ज्यादा लगेंगे. प्रोजेक्ट के लिए 10 कंपनियों ने दिया प्रेजेंटेशन इस परियोजना के लिए नगर निगम ने 10 अलग-अलग कंपनियों से तकनीकी प्रस्तुतीकरण लिए थे. इनमें ड्रोन, रडार और सैटेलाइट आधारित सर्वे की अलग-अलग तकनीकों की तुलना की गई. पिछली त्रुटियों को ध्यान में रखते हुए निगम ने इस बार दोहरी पद्धति अपनाने का निर्णय लिया है. पिछले सर्वे में मिलीं थीं कई बड़ी गड़बड़ियां 2017-18 के सर्वे में लगभग 80 हजार संपत्तियों में माप, वर्गीकरण और स्वामित्व दर्ज करने में त्रुटियां पाई गई थीं. लगभग 1.5 लाख संपत्तियों में पूरा डेटा उपलब्ध नहीं था. करीब 40 हजार संपत्तियों में मालिक बदलने के बाद भी रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ. कई मामलों में निगम के पास न तो मोबाइल नंबर थे और न ही वर्तमान पता. डोर-टू-डोर सत्यापन और दावा-आपत्ति प्रणाली रडार सर्वे के बाद दूसरे चरण में निगम की टीम घर-घर जाकर डेटा सत्यापन करेगी. प्रत्येक संपत्ति मालिक को फोटो और विवरण सहित एक डिमांड नोटिस दिया जाएगा. यदि मालिक को डेटा में कोई त्रुटि लगती है, तो वह 7 दिनों के भीतर निगम में दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकेगा. इसके लिए अलग सेल बनाई जाएगी. ऐसे समझें खर्च और लाभ     रडार सर्वे की लागत: लगभग 80-90 करोड़ रूपए     रडार सर्वे की लागत लगभग 150 रूपए प्रति संपत्ति     अनुमानित नई संपत्तिया: 50,000- 60,000     संभावित वार्षिक अतिरिक्त राजस्व लगभग 100 करोड़ रूपए  

पुष्पा नेताम ने खेत में काटी धान, मंत्री परिवार की भागीदारी से किसानों में जोश

बलरामपुर रामानुजगंज कृषि मंत्री राम विचार नेताम की पत्नी एवं जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष पुष्पा नेताम इन दिनों अपने गृह ग्राम सनवाल में धान कटाई के कार्य में पूरी तल्लीनता से जुटी हुई हैं। अक्सर रायपुर में मंत्री पति के साथ रहने वाली पुष्पा नेताम खेती के मौसम में पूरी तरह ग्रामीण जीवन में रम जाती हैं। इन दिनों वे गांव की महिलाओं के साथ खेतों में हाथ से धान काटते हुए दिखाई देती हैं, जिसे देखकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। ग्रामीणों के अनुसार पुष्पा नेताम हर साल बुवाई से लेकर कटाई तक खेतों में सक्रिय रूप से मौजूद रहती हैं। खेती-किसानी से उनका जुड़ाव परिवार की पारंपरिक परंपरा का हिस्सा है। यही वजह है कि वे अपनी व्यस्त राजनीतिक दिनचर्या से समय निकालकर भी धान कटाई में हाथ बंटाती हैं। उधर, कृषि मंत्री राम विचार नेताम भी अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद खेतों से जुड़ाव बनाए रखते हैं। रामानुजगंज विधानसभा के हालिया प्रवास के दौरान वे स्वयं धान काटने वाली मशीन चलाते हुए देखे गए, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुए। ग्रामीणों ने बताया कि मंत्री नेताम जब भी मौका मिलता है, खेतों का रुख जरूर करते हैं, क्योंकि खेती को लेकर उनकी रुचि बचपन से रही है। मंत्री नेताम का कहना है कि “खेती से हमारा संबंध सिर्फ आज का नहीं, बल्कि पीढ़ियों से रहा है। धान बुवाई और कटाई का समय हमारे लिए खास होता है। मेरी श्रीमती हमेशा इस दौरान खेतों में मौजूद रहती हैं, और मैं भी समय मिलते ही खेतों की ओर खिंचा चला जाता हूँ।” सनवाल गांव में इन दिनों धान कटाई जोर पर है और मंत्री दंपति का श्रमदान ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बन गया है। यह नज़ारा न केवल किसानों में उत्साह भर रहा है, बल्कि राजनीति में जमीन से जुड़े रहने का एक अनोखा उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है।

दिव्य साधना का समापन: शालीभद्र महाराज ने 16 दिनों बाद शांतिपूर्वक देह त्यागी

 बालोतरा बालोतरा शहर में शुक्रवार का दिन आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। जैन समाज के विख्यात संत शालीभद्र महाराज ने 16 दिन की संथारा साधना पूर्ण करते हुए शांतचित्त मन से देह त्याग दी। स्थानक भवन परिसर में पिछले दिनों से उनके दर्शन करने और साधना का साक्षी बनने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे थे। शुक्रवार को निकली उनकी बैकुंठ यात्रा में जिस तरह से सभी समाजों के लोगों का सैलाब उमड़ा, वह बालोतरा शहर ने पहले कभी नहीं देखा था। शालीभद्र महाराज का जीवन एक विलक्षण यात्रा रहा। 12 अक्टूबर 1947 को अलवर में जन्मे प्रकाश संचेती (सांसारिक नाम) बचपन से ही धार्मिक और अनुशासित वातावरण में पले-बढ़े थे। युवा अवस्था में उन्होंने जयपुर में रत्नों का व्यवसाय शुरू किया, और जल्द ही उनका व्यापार अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों तक फैल गया। अंतरराष्ट्रीय पहचान के बावजूद उनके भीतर आध्यात्मिकता का बीज लगातार बढ़ता रहा। उनकी मां की प्रेरणा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसी प्रेरणा से उन्होंने 12 वर्षों तक गहन मौन और वैराग्य का जीवन जिया। अंततः 8 सितंबर 1994 को उन्होंने दीक्षा लेकर सभी सांसारिक मोह छोड़ दिए और ‘शालीभद्र जी’ के रूप में जैन समाज के प्रतिष्ठित संत बन गए। साल 2018 में बालोतरा उनका प्रमुख प्रवास स्थान बना, जहां उन्होंने प्रवचन, साधना और सेवा के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। 5 नवंबर 2025 को उन्होंने पूर्ण प्रसन्नता और आत्मिक तृप्ति के साथ संथारा साधना का संकल्प लिया। 16 दिनों तक उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर ध्यान, जप और आत्मचिंतन में स्वयं को समर्पित कर दिया। उनके दर्शन के लिए लगातार श्रद्धालु आते रहे और उनके शांत, तेजस्वी चेहरे को देख भाव-विह्वल होते रहे। जैन धर्म में संथारा को मृत्यु नहीं, बल्कि आत्मा की अंतिम साधना माना जाता है, जहां व्यक्ति पूर्ण क्षमा, शांति और निर्मलता के साथ जीवन की यात्रा को विराम देता है। शुक्रवार की सुबह उन्होंने समाधि अवस्था में देह त्याग दी। दोपहर में निकली बैकुंठ यात्रा के दौरान शहर जैसे ठहर गया। सड़कों पर लोगों का जनसैलाब उमड़ आया, दुकानों पर शटर बंद रहे, जगह-जगह पुष्पवृष्टि हुई और वातावरण “शालीभद्र महाराज अमर रहें” के जयघोष से गूंज उठा। लोग घरों और छतों से फूल बरसाते रहे और पूरे शहर में श्रद्धा, शांति और भावुकता का अद्भुत माहौल रहा। बालोतरा के धार्मिक इतिहास में यह दिन एक अविस्मरणीय अध्याय की तरह दर्ज हो गया।  

मौसम में दोहरा असर: दिन में गर्माहट, रात में ठंडक—तापमान 3 डिग्री बढ़ा

रायपुर  पूर्वी हवा के प्रभाव से राज्य में शीतलहर का प्रभाव टल गया है. अभी की स्थिति में रात में हल्की ठंड है और दिन में गर्मी महसूस हो रही है. 6 डिग्री तक लुढ़क चुका राज्य का न्यूनतम तापमान 11 के करीब पहुंच गया है. शहर में भी ठंड सुबह-सुबह ही महसूस हो रही है और आउटर में इसका प्रभाव ज्यादा है. राज्य में अब पूर्वी हवा का प्रभाव असर दिखा चुका है और कड़ाके की ठंड अब हल्की हो चुकी है. इस तरह का प्रभाव अगले दो से तीन दिन रहने की संभावना है. इसके बाद हवा का आगमन फिर से उत्तर से होता है तो तापमान में गिरवाट की शुरुआत होगी. इधर विभिन्न इलाकों में सर्दी अपनी सामान्य स्थिति में आ चुकी है. पिछले चौबीस घंटे में अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था, जो चार दिन पहले 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था. इसी तरह 13 डिग्री के पारा के साथ रायपुर में अच्छी ठंड पड़ रही थी जो अब सुबह सुबह ही ज्यादा प्रभाव दिखा रही है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में आज आकाश साफ रहने की संभावना है. इस दौरान तापमान 16 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रिकॉर्ड किया जा सकता है.

रायपुर: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में सड़क और पुलिया निर्माण का औचक निरीक्षण किया

रायपुर : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में सड़क एवं पुलिया निर्माण का किया औचक निरीक्षण गुणवत्ता पर नाराजगी, पुनः निर्माण और कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के धरसेड़ी-कर्री-कुप्पी मार्ग पर लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित सड़क और पुलिया का औचक निरीक्षण किया।  निरीक्षण के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने नव-निर्मित सड़क की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग तथा संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि सड़क के कई हिस्सों में निर्माण मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया है और कार्य अभी भी अधूरा है। इस पर उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को पूरे मार्ग का पुनः निर्माण मानक गुणवत्ता के साथ कराने तथा निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें आमजन की जीवनरेखा हैं, जिस पर आवागमन, एम्बुलेंस सुविधा, बच्चों की स्कूल पहुँच और आवश्यक सेवाओं की निर्भरता होती है। इसलिए कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, ओड़गी क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

मंत्री नेताम का सुझाव: मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीक एवं स्किल डेवलपमेंट अपनाने की आवश्यकता

रायपुर : मत्स्य किसानों को आर्थिक समृद्धि हेतु नवीन तकनीक एवं कौशल विकास को अपनाने की जरूरत: मंत्री  रामविचार नेताम मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6 वें स्थान पर कृषि मंत्री विश्व मात्स्यिकी दिवस पर आयोजित कृषक संगोष्ठी में हुए शामिल रायपुर कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मछलीपालन मंत्री  रामविचान नेताम विश्व मात्स्यिकी दिवस पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम सभागार में आयोजित एक दिवसीय मत्स्य कृषक संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रति वर्ष 21 नवंबर को विश्व मात्स्किी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन के महत्व, मछुआ समुदाय के अधिकारों, आर्थिक आजिविका, खाद्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत एवं समुदाय सशक्तिकरण हेतु जागरूकता लाना है।  नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर रजत जयंती मना रहा है। राज्य में प्राकृतिक रूप से मछली पालन के स्त्रोत प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। मत्स्य किसानों के विकास के लिए आवश्यकता है केवल नवीन तकनीक, मानव कौशल विकास, आर्थिक प्रोत्साहन एवं सहायता की। मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6 वें स्थान पर कृषि मंत्री  नेताम ने बताया कि शासन ने राज्य निर्माण के पश्चात राज्य एवं केन्द्र की विभिन्न योजनाओं जैसे कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नील काति, प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के माध्यम से मछली पालन विकास के सतत् प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में कुल 1,30,001 जल स्त्रोत (2.039 लाख हेक्टेयर) उपलब्ध है जिनमें 98 प्रतिशत् में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन हो रहा है। 3571 किलोमीटर का नदीय जलक्षेत्र भी उपलब्ध है। सघन मत्स्य पालन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र निर्मित किया जा रहा है, अब तक कुल 7580 हेक्टर जलक्षेत्र निजी क्षेत्र में अतिरिक्त निर्मित हो चुका है। मछली पालन हेतु गुणतत्ता युक्त मत्स्य बीज एक आधारभूत आवश्यकता है। राज्य को मत्स्य बीज के क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु निरंतर प्रयास जारी है। अब तक कुल 82 नवीन हैचरी निर्मित कर 120 हैचरियों के माध्यम से 583 करोड़ मत्स्य बीज प्रति वर्ष उत्पादित हो रहा है, एवं राज्य देश में 6 वें स्थान पर है। हमारा राज्य मत्स्य बीज उत्पादन में न सिर्फ आत्मनिर्भर हुआ अपितु अन्य राज्यों को निर्यात भी हो रहा है।  रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना मंत्री  नेताम ने कहा कि विपणन व्यवस्था को सुदृढ बनाने एवं उपभोक्ता तक ताजी मछली पहुंचाने के लिए 1008 मोटर साइकल, आईस बॉक्स, 10 थी व्हीलर एवं 05 इन्सुलेटेड ट्रक, 114 वाहन (लाइव फिश वेडिंग सेन्टर) वितरित किए गए। रायपुर दुर्ग बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना की गई। मंत्री  नेताम ने इस मौके पर मछुआ संघ की ओर से हितग्राहियों को लाभांश राशि का चेक प्रदान किया।  मत्स्य पालन बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष  भरत मटियारा और रायपुर ग्रामीण विधायक  मोतीलाल साहू ने भी सम्बोधित किया। मछलीपालन पालन विभाग के संचालक  एमएस नाग ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि भारत के मध्यस्थल पर स्थित प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन विकास काफी प्रगति पर है। राज्य में उपलब्ध जल संसाधन की दृष्टि से मछली पालन एक विशिष्ट स्थान रखता है, राज्य की भौगोलिक एवं कृषि जलवायु स्थितियां भी मछलीपालन हेतु उपयुक्त है। यह ग्रामीण क्षेत्रों की बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को मछलीपालन की आधुनिक तकनीकी पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1840 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से 63 हजार 280 सदस्य मत्स्य पालन कर रहे हैं। संगोष्ठी में मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखन लाल धीवर, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष  नेहरू निषाद, मछुआ कल्याण बोर्ड के भूतपूर्व अध्यक्ष  बसंत तारख और  रामकृष्ण धीवर सहित बड़ी संख्या में मत्स्य किसान शामिल थे।