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आखिर पहुंची उम्मीद की रोशनी: पतुरियाडाँड़ हाई स्कूल में अंग्रेजी व्याख्याता मिलने से छात्रों के सपनों को मिली नई उड़ान

रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन की युक्तियुक्तकरण योजना से स्कूलों में शैक्षणिक सुविधा बढ़ने से विद्यार्थियों को फायदा हो रहा है। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतिम छोर पर बसे छोटे से गाँव पतुुरियाडाँड़ के लिए हाई स्कूल खुलना किसी वरदान से कम नहीं था। वर्षों तक आसपास के गांवों के बच्चे सिर्फ इसलिए आगे की पढ़ाई से वंचित हो जाते थे क्योंकि हाई स्कूल की दूरी अधिक थी। लेकिन जब गाँव में हाई स्कूल प्रारंभ हुआ, तो यह न सिर्फ गांववासियों के लिए खुशी का क्षण था, बल्कि उन बच्चों के लिए नई उम्मीद की किरण थी जो उच्च शिक्षा का सपना मन में लिए बैठे थे। हाई स्कूल खुलने के बावजूद छात्रों के सामने एक बड़ी चुनौती थी कि अंग्रेजी विषय का नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं था। गांव के अधिकांश बच्चे अंग्रेजी और गणित को कठिन विषय मानते थे। अंग्रेजी शिक्षक न होने के कारण खासकर छात्राओं के सपनों पर असर पड़ने लगा था, क्योंकि इस स्कूल में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाली अधिकांश विद्यार्थी लड़कियां ही थीं। सरकार की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया इस विद्यालय के लिए किसी सौभाग्य की तरह साबित हुई। इसी प्रक्रिया के तहत यहाँ अंग्रेजी विषय के व्याख्याता श्री विजय कुमार राठौर की नियुक्ति हुई। व्याख्याता के रूप में उन्होंने चार-पांच महीने पहले ज्वाइनिंग दी और तभी से छात्रों के लिए अंग्रेजी का डर धीरे-धीरे कम होता गया। अब बच्चे बताते हैं कि “सर के आने के बाद अंग्रेजी पढ़ना मुश्किल नहीं लगता। अब हमें समझ में भी आता है और नियमित क्लास भी होती है।” कक्षा 9वीं की छात्राएँ कुमार धन कुंवर, सुनती, सरिता, सपना, विक्रम और 10वीं के विद्यार्थी आकांक्षा, अमृता, राजकुमारी, विजय, विष्णु, अशोक सभी एक ही बात कहते हैं “अगर शिक्षक नहीं होते तो हम कठिन विषय में फेल भी हो सकते थे। अब हमें अपने भविष्य पर भरोसा है।” गांव के लोगों के चेहरे पर भी खुशी झलकती है। वर्षों से जिस योग्य शिक्षक की कमी महसूस होती थी, वह अब पूरी हो गई है। आज गांव के बच्चे अंग्रेजी में मजबूत हो रहे हैं, परीक्षा के लिए तैयार हो रहे हैं और अपने सपनों को उड़ान देने के लिए आत्मविश्वास से भर चुके हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति ने पतुरियाडाँड़ के इस विद्यालय का भविष्य ही नहीं बदला है, बल्कि उन सैकड़ों बच्चों की जिंदगी में नई रोशनी भरी है, जो कल अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।

सैगोना में 41.65 लाख की सड़क निर्माण का भूमिपूजन, मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना को मिली रफ्तार

रायपुर, उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा के लगातार प्रयास से कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिली हैं। इसी क्रम में ग्राम सैगोना के लिए मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण के लिए 41 लाख 65 हजार रूपए लागत के कार्य की स्वीकृति मिली है। जिसका आज आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में राजेश पटेल एवं पटेल समाज सामुदायिक भवन को यादव समाज सामुदायिक भवन से जोड़ने वाले लगभग 500 मीटर लंबे पहुंच मार्ग का विधिवत भूमिपूजन किया गया। यह सड़क स्थानीय ग्रामीणों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी और दोनों समाज सामुदायिक भवनों के बीच सुगम आवागमन उपलब्ध कराएगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू ने कहा कि उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के नेतृत्व और निरंतर प्रयासों से कवर्धा विधानसभा के प्रत्येक ग्राम में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सड़क निर्माण से स्थानीय निवासियों, किसानों एवं विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। उन्होंने निर्माण एजेंसी को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में कवर्धा विधानसभा विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ अब गाँव–गाँव तक पहुंच रहा है, जिससे क्षेत्र के नागरिकों की लंबे समय से चली आ रही मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं। इस अवसर पर रामकुमार भट्ट, संतोष पटेल, जनपद अध्यक्ष सुषमा गनपत बघेल, उपाध्यक्ष गणेश तिवारी, जिला पंचायत सदस्य सुमित्रा विजय पटेल, बीरसिंह पटेल, जनपद सदस्य आनंद मिश्रा, रोहित नाथ योगी, दिलीप गोलू साहू, नागेश्वर जायसवाल, माखन पटेल,  निहाली पटेल सहित ग्रामीण, युवा जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

यूनिटी मार्च के लिए राज्य के 68 युवाओं के दल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

सरदार पटेल की कर्मभूमि करमसद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया तक पदयात्रा में शामिल होंगे युवा रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित पदयात्रा में शामिल होने के लिए गुजरात जाने वाले राज्य के 68 युवाओं के दल को आज रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये युवा सरदार पटेल की कर्मभूमि करमसद से केवड़िया तक आयोजित राष्ट्रीय पदयात्रा में हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की 562 रियासतों और ब्रिटिश शासन के अधीन क्षेत्रों को एकजुट कर अखंड भारत की नींव रखी। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, अटल संकल्प और अथक परिश्रम ने भारत को एक सूत्र में पिरोया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विगत दिनों वे गुजरात के केवड़िया में आयोजित भारत पर्व में सम्मिलित हुए थे, जहाँ उन्होंने विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा—स्टैच्यू ऑफ यूनिटी—के दर्शन किए और भारत की सांस्कृतिक एकता की जीवंत झलक देखी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, विविधता और व्यंजनों का भी प्रदर्शन किया गया था। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 26 नवम्बर से 06 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले यूनिटी मार्च में छत्तीसगढ़ के युवाओं के साथ देशभर के जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक एकता के निर्माण में सरदार पटेल का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने रियासतों के विलय का ऐतिहासिक कार्य किया जो भारत की एकता और अखंडता का आधार बना। उन्होंने चयनित युवाओं को राष्ट्रीय पदयात्रा के लिए शुभकामनाएँ एवं बधाई दी। जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने युवाओं को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पदयात्रा में शामिल होने के लिए उन्हें शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, पूर्व विधायक नवीन मार्कण्डेय, जी. वेंकट राव, श्याम नारंग, राहुल टिकरिया, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार सहित बड़ी संख्या में युवा, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

नवाचार की नई मिसाल : जैविक खेती, फसल विविधता, पशुपालन और मत्स्य पालन का एकीकृत मॉडल

हरसिंह ओयामी का एकीकृत खेती मॉडल बना प्रेरणादायक रायपुर, वन एवं दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार जिले में खेती-किसानी में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड गीदम के ग्राम बिंजाम के 57 वर्षीय प्रगतिशील किसान श्री हरसिंह ओयामी जिले में जैविक खेती के प्रमुख प्रेरणास्रोत के रूप में उभरकर सामने आए हैं। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी कृषि व्यवस्था को पूरी तरह जैविक, टिकाऊ और लाभकारी मॉडल में बदल दिया है। परिवार का सहयोग, लगातार मेहनत और वैज्ञानिक सोच ने उन्हें जिले के अग्रणी जैविक किसानों की श्रेणी में शामिल कर दिया है। पशुपालन ने जैविक खेती को और मजबूत बनाया कृषि विभाग की सहायता से श्री ओयामी को पक्का पशु शेड, नाडेप टांका, वर्मी टांका सहित विभिन्न जैविक संरचनाओं का लाभ मिला। देशी गायों के सुव्यवस्थित पशुपालन ने उनकी जैविक खेती को और भी मजबूत बनाया। कृषक श्री ओयामी अब अपने खेत में वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र जैसे देशी जैविक उर्वरक और कीटनाशक स्वयं तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत कम हुई है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। जैव विविधतापूर्ण फसल में रूचि श्री ओसमी की खेती की सबसे बड़ी विशेषता फसल विविधता है। वे श्री विधि, लाइन विधि और पारंपरिक विधि से देशी धान का उत्पादन करते हैं। इसके साथ ही बैंगन, टमाटर, गोभी, मटर, मूली, गाजर, लाल भाजी, मेथी, दलहन, तिलहन सहित अनेक सब्जियों एवं फसलों की वर्षभर खेती करते हैं। मिलेट्स के अंतर्गत रागी, कोदो-कुटकी तथा बागवानी फसलों में आम, अमरूद और वाटर एप्पल की खेती ने उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उनके जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग ने उन्हें बाजार में अलग पहचान दिलाई है। एग्री-फिशरी मॉडल अपनाकर आय के नए स्रोत हुई विकसित श्री ओयामी ने कृषि के साथ-साथ  मत्स्य पालन में भी सफलता प्राप्त की है। उन्होंने एग्री-फिशरी मॉडल अपनाकर आय के नए स्रोत विकसित किए हैं। डबरी और ओरनामेंटल फिश पद्धति से वे लगभग 1,00,000 रुपये वार्षिक शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। डबरी का पोषक जल उनकी जैविक खेती में अत्यंत उपयोगी साबित हुआ, जिससे फसल उत्पादन बढ़ा, कीटनाशकों की जरूरत कम हुई और मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रही। किसान जैविक कृषि और मत्स्य पालन की नई तकनीकें सीखने आते हैं आज कृषक श्री हरसिंह ओयामी की जैविक खेती, फसल विविधता, पशुपालन और मत्स्य पालन का एकीकृत मॉडल उन्हें लगभग 7,00,000 रुपये की वार्षिक आय दे रहा है। उनका खेत अब केवल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि एक प्रेरणा मॉडल फार्म बन चुका है, जहाँ अन्य किसान जैविक कृषि और मत्स्य पालन की नई तकनीकें सीखने आते हैं। जैविक खेती समृद्ध कृषि का मजबूत आधार श्री ओयामी ने साबित किया है कि जैविक खेती न केवल परंपरा है, बल्कि भविष्य की सतत और समृद्ध कृषि का मजबूत आधार भी है। स्थानीय संसाधनों का समझदारीपूर्ण उपयोग, मेहनत और नवाचार उन्हें दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनाते हैं।

1.40 करोड़ इनामी नक्सली एर्रा सहित 37 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, तेलंगाना में बड़ा सरेंडर ऑपरेशन

जगदलपुर तेलंगाना में माओवादी संगठन को तगड़ा झटका लगा है, जहां पहली बार बड़ी संख्या में शीर्ष नेतृत्व से जुड़े माओवादियों ने एक साथ हथियार डाले हैं। तेलंगाना डीजीपी शिवधर रेड्डी के सामने कुल 37 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 3 स्टेट कमेटी सदस्य शामिल हैं। सरेंडर करने वालों में कोय्यादा सम्बैया उर्फ आजाद, अप्पासी नारायण उर्फ रमेश और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य मूचाकी सोमडा उर्फ एर्रा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। एर्रा को लंबे समय से हिड़मा के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिना जाता था। सरेंडर लिस्ट में 3 स्टेट कमेटी सदस्य, 3 डिवीजनल कमेटी सदस्य, 9 एरिया कमेटी मेंबर और 22 पार्टी कमेटी सदस्य शामिल हैं। इन सभी पर कुल 1,40,05,000 रुपए का इनाम घोषित था, जो तेलंगाना–दक्षिण बस्तर बेल्ट में संगठन की सक्रियता को दर्शाता है। सरेंडर करने वाले अपने साथ एक AK-47, दो SLR, चार 303 रायफल सहित अन्य हथियार लेकर पहुंचे हैं। 37 माओवादियों में 12 तेलंगाना स्टेट कमेटी से जुड़े थे, जबकि 23 दक्षिण बस्तर डिवीजन कमेटी और 2 PLGA के सक्रिय सदस्य थे। आजाद ने सरेंडर के दौरान खुलकर कहा कि वे लंबे समय से मुख्यधारा में लौटना चाहते थे और संगठन को इसकी जानकारी देकर ही आए हैं। सरेंडर किए नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं का मिलेगा लाभ अधिकारियों का कहना है कि यह सरेंडर माओवादियों की दक्षिण बस्तर–तेलंगाना सीमा पर कमजोर होती पकड़ का बड़ा संकेत है। विशेष रूप से हिड़मा के नेटवर्क में सक्रिय एर्रा का आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा मनोबल गिराने वाला माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी संगठन के भीतर बढ़ते अविश्वास और लगातार दबाव की परिणति बता रही है। तेलंगाना पुलिस का दावा है कि भविष्य में और बड़े स्तर पर सरेंडर की संभावनाएं है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सरेंडर करने वालों को पुनर्वास योजनाओं का लाभ देने की घोषणा की है। इस सामूहिक आत्मसमर्पण से दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

हाई कोर्ट ने कहा मौलिक अधिकारों का हनन, पीजी मेडिकल में डोमिसाइल आरक्षण खत्म

बिलासपुर पीजी मेडिकल में प्रवेश के संबंध में छत्तीसगढ़ में स्थायी निवास आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। बेंच ने स्थायी निवास आधारित आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए रद कर दिया है। याचिकाकर्ता डॉ. समृद्धि दुबे ने सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव, अधिवक्ता संदीप दुबे, मानस वाजपेयी और कैफ अली रिजवी के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें छत्तीसगढ़ मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(बी) को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने के कारण असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी। डॉ. समृद्धि दुबे ने अपनी याचिका में बताया कि वह छत्तीसगढ़ राज्य की स्थायी निवासी है। उनके माता-पिता छत्तीसगढ़ राज्य के स्थायी निवासी हैं। वर्ष 2018 में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा के आधार पर वीएमकेवी मेडिकल कॉलेज सेलम आवंटित किया गया। एमबीबीएस कोर्स पूरा कर अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप भी पूरी की। इसके बाद स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उसने नीट (पीजी) परीक्षा 2025 में शामिल होने आवेदन किया और प्रवेश कार्ड प्राप्त किया। परीक्षा तीन अगस्त को हुई। परीक्षा उत्तीर्ण की और अखिल भारतीय रैंक 75068 प्राप्त की। परिणाम को देख याचिकाकर्ता प्रवेश पाने के लिए पात्र है। नियम पांच की वैधानिकता को दी गई थी चुनौती राज्य सरकार ने अधिसूचना 2021 द्वारा स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के उद्देश्य से चिकित्सा महाविद्यालयों के स्नात्कोत्तर पथ्यक्रमों में प्रवेश अधिनियम, 2002 के तहत प्रवेश नियम 2021 नामक नियम बनाए हैं। उस समय पीजी प्रवेश नियम 2021 लागू था, जो चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का प्रविधान करता है। पुराने नियम में एनआरआइ छात्रों के प्रवेश के लिए पात्रता की अतिरिक्त शर्तें" प्रदान करता है। नियम 5 अपात्रता प्रदान करता है, नियम 6 से 8 "सीटों का आरक्षण" प्रदान करता है। नियम 11(ए) में प्रविधान है कि राज्य कोटे में सीटों पर प्रवेश पहले उन उम्मीदवारों को दिया जाएगा, जिन्होंने राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है या जो सेवारत उम्मीदवार हैं। नियम 11(बी) में प्रविधान है कि यदि नियम 11 के उपनियम (बी) में उल्लिखित सभी पात्र उम्मीदवारों को प्रवेश देने के बाद सीटें खाली रहती हैं, तो उन रिक्त सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों को प्रवेश दिया जाएगा, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री की है। राज्य सरकार की ओर से पेश की गईं ये दलीलें राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए उप-महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कहा कि इससे पहले प्रवेश नियम, 2021 लागू थे और प्रवेश नियम, 2021 के नियम 11 (ए) और 11 (बी) छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज में राज्य कोटे की सीटों पर पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के संबंध में वरीयता से संबंधित थे। यह प्रस्तुत किया गया है कि नियम 2021 के नियम 11 (बी) में अधिवास के आधार पर उम्मीदवारों को वरीयता प्रदान करने के संबंध में प्रविधान था। हालांकि प्रवेश नियम 2025 में अधिवास के आधार पर उक्त वरीयता को हटा दिया गया है क्योंकि प्रवेश नियम 2025 के नियम 11 (बी) में ऐसी शर्तें या प्रविधान नहीं थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ सेंटर और आयुष विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ के तहत कुल 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और चार निजी मेडिकल कॉलेज मान्यता प्राप्त हैं। आयुष विश्वविद्यालय के जरिए मेडिकल कॉलेजों में उम्मीदवारों को प्रवेश दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया गया हवाला अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा ऐसी आरक्षण की अनुमति दी जाती है तो यह मौलिक अधिकारों का हनन होगा, जिनके साथ केवल इस आधार पर असमान व्यवहार किया जा रहा है कि वे संघ के एक अलग राज्य से हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता का उल्लंघन होगा और कानून के समक्ष समानता से इन्कार के समान है।

फर्जी कॉल्स से बचें: SIR पोर्टल के नाम पर OTP ठगी के खिलाफ आयोग का अलर्ट

जगदलपुर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत गणना फार्म भरने वाले मतदाताओ और नागरिकों को साइबर ठगी को लेकर सतर्क किया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में गुरुवार को एक सूचना जारी की गई है। आयोग की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि एसआईआर फार्म भरते समय मोबाइल नंबर देना पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ साइबर अपराधी इसी बहाने ठगी करने की कोशिश कर सकते हैं। बताया गया कि बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) के माध्यम से एसआईआर फार्म भरने के लिए किसी भी प्रकार के ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती है। कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या बीएलओ आपसे ओटीपी नहीं मांगता है। यदि कोई व्यक्ति फोन करे और कहे कि आपके एसआईआर से जुड़े मोबाइल पर जो ओटीपी आया है, वह हमें दे दीजिए तो उन्हें तुरंत मना कर दें। कॉल करने वाले व्यक्ति को साफ-साफ मना करते हुए निर्वाचन कार्यालय अथवा बीएलओ से संपर्क कर इसकी जानकारी दे दी जाए। आयोग ने दबाव या धमकी की स्थिति में पुलिस को सूचना देने के लिए कहा है। पुलिस ने भी की अपील पुलिस ने भी नागरिकों को एसआईआर फार्म भरने की प्रक्रिया से जुड़ी एक नई प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी (स्कैम) के प्रति सतर्क किया है। साथ ही लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में अपने मोबाइल फोन में प्राप्त वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। आवश्यकता पड़ने पर जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 तथा इंटरनेट मीडिया पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी छत्तीसगढ़ के फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम में जुड़ सकते हैं। एसआईआर ने पकड़ा जोर बस्तर जिले में एसआईआर का कार्य जोर पकड़ चुका है। बीएलओ गणना पत्रक भरवा रहे हैं। मतदाता और अन्य नागरिक भी इस कार्य में पूरा सहयोग कर रहे हैं। नईदुनिया ने शुक्रवार को शहर के समीप ग्राम पंचायत आड़ावाल के नयापारा में एसआईआर गणना पत्रक भरने एकत्र लोगों से चर्चा की तो उनका कहना था कि बीएलओ फार्म भरने में सहयोग कर रहे हैं। 2003 की मतदाता सूची से मतदाता संबंधी जानकारी भी बता रहे हैं इससे काम आसान हो गया है।

रायगढ़ में बड़ी कार्रवाई: 30 प्रकरणों से 3,266 क्विंटल अवैध धान जब्त, कीमत एक करोड़ पार

सभी अंतरराज्यीय एवं आंतरिक चेक पोस्टों पर 24×7 रखी जा रही कड़ी निगरानी        रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अवैध धान भंडारण एवं परिवहन पर सभी अंतरराज्यीय सीमाओं पर पर बसे ज़िलों पर कड़ी निगरानी की जा रही है। साथ ही इस कार्य में संलिप्त पाए जाने वालों पर त्वरित एवं सख्त कार्रवाई की जा रही हैं। इसी क्रम में समर्थन मूल्य पर पारदर्शी एवं निष्पक्ष धान खरीदी नीति के तहत प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान में  रायगढ़ में विगत 15 दिनों में 30 प्रकरणों के द्वारा कुल 3,266 क्विंटल अवैध धान जब्त किया गया है, जिसकी कीमत 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 1 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है।            कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले की सीमाओं पर स्थित सभी अंतरराज्यीय एवं आंतरिक चेक पोस्टों पर 24×7 कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है, वहीं अनुविभागीय स्तर पर विशेष निगरानी दल सक्रिय हैं। अवैध धान भंडारण एवं परिवहन में शामिल हर व्यक्ति पर कार्रवाई करते हुए मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर ने आम नागरिकों एवं किसानों से अपील की है कि अवैध धान परिवहन या भंडारण की कोई भी जानकारी तुरंत निकटतम पुलिस थाना, तहसील कार्यालय या चेक पोस्ट पर दें। कार्रवाई में सहयोग करना खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता को मजबूत करेगा। उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से सुचारु रुप से संचालित हो रहा धान खरीदी कार्य          जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 105 उपार्जन केन्द्र बनाए गए है। शासन के निर्देशानुसार सभी उपार्जन केन्द्रों में चेक लिस्ट के अनुरुप मूलभुत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। 105 उपार्जन केन्द्रों में से 15 केंद्रों को संवेदनशील और 4 केंद्रों को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। अवैध धान की आवाजाही रोकने के लिए 24 चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं, इनमें भुईंयापाली, बेलरिया, लारा, रेंगालपाली, एकताल, जमुना, तोलमा, हाड़ीपानी, लमडांड, हमीरपुर, मेनरोड हाटी, गोलाबुड़ा, फतेपुर, केशरचुंवा, टांगरघाट, बिजना, बरकछार, उर्दना बेरियर, बोईरदादर, बेरियर, पलगड़ा, भालूनारा, बाकारुमा बेरियर, ऐडू बेरियर एवं रीलो बेरियर सहित 24 अंतराज्यीय एवं आंतरिक चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं। इन चेकपोस्टों पर 24 घंटे निगरानी के लिए तीन-तीन पालियों में चार टीमें तैनात की गई हैं। तुहर टोकन मोबाइल एप के जरिए ऑनलाईन टोकन एवं माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध           धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने और किसानों को पारदर्शी सुविधा प्रदान करने के लिए “तुंहर टोकन” मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है और सोसायटी संचालक सुबह 9.30 बजे से टोकन जारी कर कर रहे है। टोकन सात दिनों तक वैध रहेंगे और आधार आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है, जिससे बिना किसान की सहमति कोई टोकन जारी नहीं हो सकेगा। सेवा सहकारी समितियों में कृषकों को लिए नगद लेनदेन हेतु माइक्रो एटीएम की भी सुविधा उपलब्ध है। जिसके माध्यम से कृषक एटीएम कार्ड के माध्यम से प्रतिदिन 10 हजार रुपए तक की राशि आहरण कर सकते है। सुगम एवं पारदर्शी धान खरीदी के लिए जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित           शासन के नीति के अनुरूप जिले में सुगम एवं पारदर्शी धान खरीदी के लिए कलेक्टर द्वारा जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई हैं। जांच कमेटी में अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, संयुक्त कलेक्टर श्री राकेश कुमार गोलछा, खाद्य अधिकारी श्री चितरंजन सिंह, जिला विपणन अधिकारी कु.जान्हवी जिलहरे, उप आयुक्  सहकारिता श्री व्यास नारायण साहू, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम श्री सी आदि नारायण एवं विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्री एस.पी.सिंह शामिल है।

चर्चित मामले में फैसला: सरगुजा राज परिवार और नंदकुमार साय के पक्ष में कोर्ट का निर्णय

अंबिकापुर नगर के बहुचर्चित प्रीति श्रीवास्तव हत्याकांड को लेकर दिसंबर 1998 में प्रकाशित एक विवादित रिपोर्ट पर लगभग 26 वर्ष बाद अदालत ने एक अखबार के मालिकों और संपादक पर जुर्माना लगाया है। मामले में मध्य प्रदेश के तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नंद कुमार साय को राहत मिली है। न्यायालय ने फैसले में कहा कि एक दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार साय के बयान को तोड़मरोड़कर प्रस्तुत किया गया और ऐसी बातें जोड़ दी गईं जिनका उन्होंने उल्लेख नहीं किया था। इस रिपोर्ट के कारण सरगुजा राजपरिवार की प्रतिष्ठा को अनावश्यक क्षति पहुंची, जिससे यह समाचार मानहानि की श्रेणी में आता है। प्रथम व्यवहार न्यायाधीश पल्लव रघुवंशी ने अपने निर्णय में अखबार के तीन स्वामी, तत्कालीन संपादक, प्रकाशक और मुद्रक को दोषी ठहराते हुए एक रुपये का अर्थदंड देने का आदेश दिया है। ज्ञात हो कि तीन दिसंबर 1998 को अंबिकापुर के गर्ल्स कॉलेज परिसर में छात्रा प्रीति श्रीवास्तव की जीप चढ़ाकर हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। इस घटना के चार दिन बाद आठ दिसंबर को अंबिकापुर के संगम चौक पर आयोजित सभा में तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार साय ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। अगले दिन उक्त अखबार में प्रकाशित समाचार में यह लिखा गया कि इस जघन्य हत्या के आरोपी सरगुजा राजपरिवार के रिश्तेदार हैं और पैलेस के दबाव में जांच को प्रभावित किया जा रहा है। खबर में यह भी जोड़ा गया कि यदि जांच गहराई से की गई तो कई हत्याकांड और उजागर होंगे। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार आने के बाद सामंती प्रवृत्तियां सक्रिय हो गई हैं। राज परिवार ने दायर किया था मानहानि का दावा इन कथनों को आधार बनाकर सरगुजा राजपरिवार की ओर से अदालत में मानहानि का दावा दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान नंदकुमार साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने सरगुजा राजपरिवार या महाराज एमएस सिंहदेव के विरुद्ध कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की थी और समाचार पत्र ने उनके भाषण को अपने स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने ऐसा कुछ कहा होता तो अन्य अखबारों और समाचार माध्यमों में भी वह अवश्य दिखाई देता, जबकि ऐसा नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि प्रकाशित रिपोर्ट में तथ्यात्मक छेड़छाड़ की गई। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि समाचार पत्र ने भाजपा अध्यक्ष के कथनों को बढ़ाया-घटाया तथा टिप्पणी में ऐसे तत्व जोड़े जिन्हें बोलने का कोई प्रमाण नहीं था। इस प्रकार समाचार प्रस्तुत करने से सरगुजा राजपरिवार की छवि धूमिल हुई और यह मानहानि का स्पष्ट मामला है। तीन दशक बाद आया फैसला लगभग तीन दशक बाद आया यह फैसला सरगुजा राजपरिवार के लिए महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है। राजपरिवार के मुखिया और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के लिए भी यह निर्णय राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर बड़ी राहत लेकर आया है। यह फैसला उस दौर की राजनीतिक बयानबाज़ी तथा पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर एक गंभीर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।  

धान खरीदी तिहार लेकर आया खुशियों और राहत की सौगात

खेम पटेल ने बेचा 86 क्विंटल धान, बोले- मिले पैसों से चुकाएंगे मकान बनाने का कर्ज रायपुर, 15 नवंबर से प्रदेश में शुरू हुआ धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है।कबीरधाम जिले के ग्राम खिरसाली के किसान खेम सिंह पटेल को धान खरीदी के तहत अपनी उपज बेचकर बड़ी आर्थिक राहत मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कृषक हितैषी नीतियों और पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम है कि धान खरीदी प्रक्रिया अब अधिक सरल और सुगम हो चुकी है। जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। ख़ेम बताते हैं कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के चलते खरीदी केंद्रों में भीड़ से छुटकारा मिला और सहजता से 86.40 क्विंटल धान बिना किसी परेशानी के बेच दिया। सरकार द्वारा निर्धारित प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी तथा 31 सौ रूपये प्रति क्विंटल कीमत ने खेम पटेल को उनकी मेहनत का पूरा सम्मान दिया। करीब 5 एकड़ जमीन से मिली इस कमाई ने उनके परिवार की एक बड़ी चिंता दूर कर दी है। खेम पटेल बताते हैं कि पिछले वर्ष परिवार—माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों—के लिए उन्होंने एक पक्का मकान बनवाया था, जिसका कुछ कर्ज शेष था। धान का भुगतान समय पर मिलने से अब वे सबसे पहले अपना मकान का बाकी कर्ज चुकाने जा रहे हैं। खेम पटेल कहते हैं कि पारदर्शी व्यवस्था, सही मूल्य और राशि का त्वरित सीधे बैंक खाते में भुगतान किसानों में भरोसा बढ़ा रहा है। उनके अनुसार सरकार की यह व्यवस्था न केवल किसानों को राहत दे रही है, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई का सही सम्मान भी सुनिश्चित कर रही है।