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लखनपुर के लिए खुशखबरी—सर्व समाज मांगलिक भवन का हुआ शुभारंभ

रायपुर : लखनपुर को मिला सर्व समाज मांगलिक भवन का तोहफा रायपुर नगर पंचायत लखनपुर, सरगुजा में समाज के लिए महत्वपूर्ण डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सर्व समाज मांगलिक भवन का लोकार्पण पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस भव्य कार्यक्रम में लुंड्रा विधायक  प्रबोध मिंज, नगर पंचायत अध्यक्ष मती सावित्री साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे। अतिथियों का पुष्पगुच्छ और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह मांगलिक भवन समाज की विविधता और एकता का दर्पण है। इससे क्षेत्र की सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और सर्व समाज को सुविधाएं उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए हम लगातार कार्य कर रहे हैं। अब इस भवन के माध्यम से बड़ी-बड़ी मांगलिक एवं सामाजिक गतिविधियां संपन्न होगी, जिससे सामाजिक समरसता और विकास को बल मिलेगा। लुंड्रा विधायक  प्रबोध मिंज ने भवन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह भवन सर्व समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित होगा। नगर पंचायत अध्यक्ष मती सावित्री साहू ने सभी अतिथियों और जनता का आभार व्यक्त किया। समारोह में उपस्थित लोगों ने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना की और उम्मीद जताई कि ऐसे प्रयास समाज के विकास को नई दिशा देंगे। भवन लोकार्पण के पश्चात मंत्री  अग्रवाल ने स्थानीय नागरिकों से संवाद किया और विकास योजनाओं की जानकारी दी। क्षेत्रवासियों ने मंत्री  अग्रवाल सहित समस्त जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

मनरेगा के सहयोग से गांव में तैयार हुआ सुरक्षित और आधुनिक भवन, नौनिहालों को मिला नया अवसर

रायपुर : गांव के नौनिहालों को मिली सुरक्षित और आधुनिक शुरुआत, भवन निर्माण में मनरेगा ने निभाई अहम भूमिका रायपुर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में आंगनबाड़ी सेवाओं का व्यापक सुदृढ़ीकरण ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बच्चों के समग्र विकास का मजबूत आधार बन रहा है। प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और अनुशासन की नींव रखने वाले आंगनबाड़ी केंद्र अब आधुनिक सुविधाओं से लैस होकर नौनिहालों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। पिछले एक दशक में महात्मा गांधी नरेगा और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले में 148 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण पूरा किया गया है। इस मॉडल ने हजारों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण और शिक्षा गतिविधियों से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। वनांचल क्षेत्र सोनहत में 26 और बैकुण्ठपुर क्षेत्र में 122 नए आंगनबाड़ी भवन तैयार किए गए हैं। सोनहत में 133 लाख रुपये और बैकुण्ठपुर में 9 करोड़ 9 लाख रुपये से अधिक की राशि मनरेगा से स्वीकृत की गई। नए मानक के अनुसार प्रति भवन 11.69 लाख रुपये की लागत निर्धारित है, जिसमें 8 लाख रुपये मनरेगा से उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्ष 2024 से पूर्व स्वीकृत भवनों की लागत 6.45 लाख रुपये थी, जिसमें 5 लाख रुपये मनरेगा से प्रदान किए जाते थे। विभागीय मांग के आधार पर जनपद पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर कलेक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा) द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाती है। प्रत्येक भवन का निर्माण ग्राम पंचायतों की देखरेख में गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कराया जाता है। कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने हाल ही में सोनहत के लिए 2 नए आंगनबाड़ी भवन और बैकुण्ठपुर के लिए 23 नए भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी है। सभी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कोरिया जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का यह सुदृढ़ विस्तार बाल विकास के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो ग्रामीण नौनिहालों को बेहतर भविष्य की मजबूत नींव प्रदान कर रहा है।

बस्तर दौरा: आकांक्षी कार्यक्रम की प्रगति पर नोडल अधिकारी शोभित जैन ने की गहन समीक्षा

रायपुर नीति आयोग द्वारा नियुक्त बस्तर जिले के नोडल अधिकारी एवं संयुक्त सचिव  शोभित जैन ने बस्तर आकांक्षी जिला और ब्लॉक कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा बैठक जिला कार्यालय के आस्था सभाकक्ष में ली। बैठक में  कलेक्टर  हरिस एस ने जिले और ब्लॉक में आकांक्षी कार्यक्रम के अंतर्गत योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी और समस्याओं के संबंध में भी अवगत करवाया। संयुक्त सचिव  जैन ने आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत निर्धारित जिला एवं ब्लॉक स्तरीय चयनित इंडिकेटर्स की वर्तमान स्थिति, क्रियान्वयन और प्रगति पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, आधारभूत संरचना और वित्तीय समावेशन सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों के लक्ष्यों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इंडिकेटर्स की प्रगति में तेजी लाते हुए जमीनी स्तर पर योजनाओं का अधिक प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही डेटा की जानकारी देते समय आंकड़ों का आंकलन और जांच कर भरा जाए। उन्होंने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम का उद्देश्य विकास कार्यों को गति देते हुए नागरिकों तक योजनाओं एवं सेवाओं को पहुंचाना है, इसलिए विभागीय समन्वय और नियमित निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में ब्लॉक स्तर पर चल रही गतिविधियों, उपलब्धियों, चुनौतियों तथा सुधार की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यवाही करने और प्रत्येक इंडिकेटर की प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने निर्देश दिए। इस दौरान अति. मुख्य कार्यपालन अधिकारी  बीरेन्द्र बहादुर, आकांक्षी कार्यक्रम से संबंधित विभागों के अधिकारी, शाखा प्रभारी उपस्थित रहे ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी को पूरा करने की दिशा में एक और कदम

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में महिलाओं आजीविका का नया अवसर रायपुर महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के मामले में एक और उपलब्धि छत्तीसगढ़ ने आज दर्ज की है। सूरजपुर जिले में एक नए पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र की शुरूआत हुई है। यह सयंत्र सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के दर्रीपारा में आकांक्षा स्व सहायता समूह द्वारा संचालित होगा। इस संयंत्र का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने किया और महिला समूहों से जुड़ी सदस्य महिलाओं को इस के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। सूरजपुर जिले के दर्रीपारा में शुरू हुए इस पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्य में पूरक पोषण निर्माण में महिला स्व-सहायता समूहों की सहभागिता की गारंटी को पूरा करने की दिशा में एक और कदम है। यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा मोदी जी के गारंटी को पूरा करने के लिए पूरक पोषण आहार निर्माण की सर्वप्रथम जवाबदारी महिला समूहों को रायगढ़ जिले में सौंपी गई थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी 17 अगस्त 2025 को कोतरलिया में सर्वप्रथम पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र का शुभारंभ हुआ था। इसके पश्चात बस्तर और दंतेवाड़ा में पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र के संचालन की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंप दी गई है। सूरजपुर के दर्रीपारा में शुरू हुआ यह चौथा पूरक पोषण आहार है। इस अवसर पर मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर के दर्रीपारा में शुरू हुए इस आधुनिक संयंत्र से मीठा शक्ति आहार एवं नमकीन पौष्टिक दलिया का उत्पादन होगा, जिसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और पोषक पूरक आहार उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था प्रधानमंत्री मोदी की कुपोषण मुक्त भारत की प्रतिबद्धता और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पोषण युक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने में मददगार साबित होगा। उन्होंने आगे कहा कि दर्रीपारा में शुरू हुए इस संयंत्र के माध्यम से भैयाथान परियोजना के अंतर्गत आने वाले 366 आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित रूप से मीठा शक्ति आहार एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा, आपूर्ति व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी। मंत्री मती राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिला समूहों के विस्तार, प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाओं के लिए हरसंभव सहयोग देगी। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह, जनपद उपाध्यक्ष राजीव प्रताप सिंह, मंडल अध्यक्ष सुनील साहू, एसडीएम मती चांदनी कंवर, तहसीलदार शिवनारायण राठिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। यहां यह उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा पूरक पोषण आहार उत्पादन का दायित्व पुनः महिला स्व सहायता समूहों को सौंपे जाने के लिए प्रथम चरण में राज्य के 6 जिले चयनित किए गए हैं, जिसमें रायगढ़, कोरबा, बलौदाबाजार, बस्तर, दंतेवाड़ा और सूरजपुर शामिल हैं। 4 जिलों में पूरक पोषण आहार संयंत्र का शुभारंभ हो चुका है। जल्द ही बलौदाबाजार और कोरबा में भी पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र शुरू होगा। इससे महिला समूहों के लिए नए रोजगार और आजीविका अर्जन का नया अवसर मिलेगा।

रायपुर: CM विष्णु देव साय ने लोक सेवा आयोग परीक्षा-2024 के सफल अभ्यर्थियों को दी बधाई

रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षा-2024 में सफलता प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि युवा शक्ति की कड़ी मेहनत, अनुशासन, निरंतर तैयारी और समर्पित प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश की सेवा में एक नई शुरुआत के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी ने हमेशा उत्कृष्टता, साहस और लगन का परिचय दिया है। इस परीक्षा में सफल हुए सभी प्रतिभागियों ने अपने धैर्य और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता  से यह सिद्ध किया है कि प्रदेश की नई पीढ़ी प्रशासनिक सेवाओं में एक सशक्त स्थान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत और दृढ़ निश्चय से प्राप्त यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि ये नवचयनित अधिकारी सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की नई ऊँचाइयों को स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को जनोन्मुखी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, और इन नई नियुक्तियों से शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि  सभी युवा अधिकारी छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, महिला-शिक्षा सशक्तिकरण और ग्रामीण उन्नति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देंगे। मुख्यमंत्री  साय ने यह भी कहा कि इन सफल प्रतिभागियों की उपलब्धि प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि यह सफलता संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और अनुशासन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे निरंतर सीखते रहें, स्वयं को बेहतर बनाते रहें और जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं। मुख्यमंत्री ने सभी सफल अभ्यर्थियों को उज्ज्वल, सुखद एवं सफल जीवन की मंगलकामनाएँ देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार उनके साथ है और हर स्तर पर एक संवेदनशील, पारदर्शी और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने में उनका सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रायपुर: प्रदेशवासियों के सपनों को पूरा करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है—CM साय

रायपुर : प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रही है कार्य: मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री "छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  राजधानी रायपुर में आयोजित “छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की 25 वर्ष की स्वर्णिम विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने बस्तर सहित पूरे प्रदेश में विकास में बाधक नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने से सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में किए जा रहे प्रयासों से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अपने मूल स्वरूप में भयमुक्त होकर प्रदेश के विकास में बेहतर भागीदारी देगा।  साय ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से बस्तर की संस्कृति और प्रतिभा को दुनिया ने देखा है। बस्तर में शांति, समृद्धि और खुशहाली के नए युग का आरंभ हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पूरी दृढ़ता से लागू है। पूर्व में जो अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुए, उस पर कड़ा प्रहार किया गया है, जिसका परिणाम भी सभी देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने भूखमरी जैसे अभिशाप को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए थे, जिसके तहत गरीब परिवारों को अनाज उपलब्ध कराया गया। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को आज आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के सुशासन के सपनों को साकार करने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लगभग सभी गारंटियों को पूरा कर दिया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण ‘चरण पादुका योजना’ को भी पुनः प्रारंभ किया गया है।  मुख्यमंत्री ने नई उद्योग नीति के आकर्षक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अब तक राज्य सरकार को पौने आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास में योगदान देने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  अलोक सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रायपुर: PM मोदी और मंत्री मांडविया के नेतृत्व में ऐतिहासिक श्रम सुधार, CM विष्णु देव साय ने दी बधाई

रायपुर : प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में श्रम सुधारों का ऐतिहासिक क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दी बधाई रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  देश में चार श्रम संहिताओं के ऐतिहासिक क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि श्रम सुधारों का यह महत्वपूर्ण निर्णय देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की एक अभूतपूर्व गारंटी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन का अधिकार, महिलाओं को समान वेतन का प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रत्येक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा और ओवरटाइम पर डबल वेतन जैसी व्यवस्थाएँ पूरे देश में सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से न केवल श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक वातावरण अधिक पारदर्शी, संतुलित और श्रमिक-हितैषी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने जिस समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है, श्रम संहिताओं का लागू होना उस दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की कार्यशील जनसंख्या राष्ट्र की उत्पादन शक्ति और आर्थिक समृद्धि की आधारशिला है, और उनके अधिकारों का संरक्षण किसी भी सशक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है। यह संहिताएँ देश की श्रम शक्ति को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार नई अर्थव्यवस्था, बेहतर औद्योगिक संबंधों और मजबूत श्रम बाजार का आधार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देशभर में रोजगार, उत्पादन, निवेश और औद्योगिक विकास की गति और अधिक मजबूत होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

HIV रिपोर्ट्स से हटेंगे पहचान चिन्ह, गोपनीयता सुनिश्चित करने को नई व्यवस्था लागू

रायपुर शासन ने अस्पताल में इलाज के दौरान एचआईवी मरीजों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए गाइडलाइन जारी की है. यह गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दी गई है. अब एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी इलाज करने वाले डॉक्टर या नियंत्रण अधिकारी के पास ही रहेगी. यही नहीं फाइल, रजिस्टर, कंप्यूटर रिकार्ड लेवल पर अलग से कोई चिह्न नहीं बनाया जाएगा. भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की 2018 में जारी अधिसूचना के अनुसार एचआईवी, एड्स से ग्रसित लोगों की चिकित्सीय, व्यक्तिगत एवं पहचान संबंधी सभी जानकारी पूर्णत: गोपनीय रखी जानी है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया ने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को गाइडलाइन जारी कर पालन करने को कहा है. सर्जरी या डिलीवरी के समय ऑपरेशन करने वाली टीम को सुरक्षा के बतौर नाम उजागर किए बिना मरीज की जानकारी दी जा सकती है. यही नहीं, मरीज की स्थिति की जानकारी इलाज करने वाले डॉक्टर व जरूरी स्टाफ तक सीमित रहेगी. किसी भी परिस्थिति में मरीज की स्थिति को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित, चर्चा या प्रचारित नहीं किया जाएगा. एचआईवी-एड्स मरीजों से संबंधित दस्तावेज, रजिस्टर व रिपोर्ट सुरक्षित स्थान पर रखे जाएंगे. सिर्फ अधिकृत अधिकारी की अनुमति से ही उपलब्ध कराए जाएंगे. गोपनीयता का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. संक्रमण से बचाव के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मी यूनिवर्सल प्रकाशन का पालन करेंगे. रक्त, सुई, ब्लेड या किसी भी शारीरिक द्रव के संपर्क से बचाव के लिए डिस्पोजेबल दस्ताने, मॉस्क, एप्रन, सेफ्टी गॉगल्स आदि का इस्तेमाल किया जाए. इस्तेमाल के बाद सुइयों को निडिल डेस्ट्रोयर या शॉर्प कंटेनर में ही नष्ट किया जाए. सभी को सुई या ब्लेड का दोबारा उपयोग नहीं करने को कहा गया है. ताकि संभावित संक्रमण से बचा जा सके. बायो मेडिकल वेस्ट नियम का पालन जरूरी गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि अस्पतालों में सभी उपकरणों का उचित स्टरलाइजेशन किया जाए. साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम का पालन किया जाए. ब्लड ट्रांसफ्यूजन केवल स्क्रीन किए गए रक्त से किया जाएगा. ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम एवं ड्रेसिंग रूम में संक्रमण नियंत्रण के सभी प्रोटोकॉल लागू करें. यही नहीं इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी हर माह निरीक्षण कर जरूरी रिपोर्ट तैयार करें. एचआईवी मदर, 2 लाख का मुआवजा आंबेडकर अस्पताल में हाल ही में एक शिशु के बेड के सामने एचआईवी मदर का बोर्ड टांग दिया गया था. मीडिया में मामला आने के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अस्पताल को पीड़ित महिला को दो लाख का मुआवजा देने को कहा. कॉलेज प्रबंधन ने बिना देरी करते हुए अगले ही दिन महिला को दो लाख रुपए का चेक भी दे दिया.

यात्रियों की जेब पर डाका: छोटी दूरी के लिए ऑटो चालक वसूल रहे मनमाना किराया

रायपुर  रेलवे स्टेशन परिसर में खड़े रहने वाले ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं. यहां प्री-पेड बूथ होने के बाद भी ऑटो चालक यात्रियों से तय रेट से ज्यादा किराया ले रहे हैं. कई ऑटो चालक किराए को लेकर यात्रियों से अभद्रता भी कर रहे हैं. ऑटो चालक यात्रियों के ट्रेन से उतरते ही परिसर में उन्हें घेर लेते हैं और ज्यादा किराए की डिमांड करते हैं. तीन किलोमीटर दूरी तक जाने के लिए ऑटो वाले 80 से 100 रुपए की मांग करते हैं. वहीं सात किलोमीटर की दूरी के लिए 200 से 225 रुपए तक किराया मांगते हैं. यात्रियों की शिकायत मिलने पर जब इसकी पड़ताल की तो ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से ज्यादा किराया वसूल किए जाने की बात सामने आई. यह है रेट लिस्ट स्थान दिन रात अग्रसेन चौक 60 75 आंबेडकर चौक 60 75 अवंती बाई चौक 100 120 अनुपम नगर 120 150 डीडी नगर 120 150 इंद्रप्रस्थ कॉलोनी 200 240 उरकुरा 190 230 टाटीबंध 130 150 तेलीबांधा 100 120 बुढापारा 100 120

स्कूलों में आवारा कुत्ता नियंत्रण का नया निर्देश विवादों में, शिक्षकों ने जताई आपत्ति

रायपुर आवारा कुत्तों पर नियंत्रण को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों का शिक्षकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्कूल परिसरों में कुत्तों की एंट्री रोकने की जिम्मेदारी सीधे प्राचार्यों पर डाल दी गई है, जिसे शिक्षक संघ ने “अतिरिक्त और अव्यावहारिक बोझ” बताते हुए वापस लेने की मांग की है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों को सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए हैं. इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन ने आधा दर्जन से अधिक विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित पत्र जारी किया है. राज्य शासन ने सभी विभागों को आदेश जारी करते हुए सरकारी व प्राइवेट स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की एंट्री रोकने के काम में लगा दिया है. इसके लिए 7 दिन के भीतर ऐसे स्थानों की पहचान कर फेंसिंग, गेट और अन्य सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे, जहां आवारा कुत्ते घुस जाते हैं. हर स्थान के लिए एक नोडल अफसर की नियुक्ति भी की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बड़ा अभियान पहले चरण में स्कूलों के प्राचार्य, अस्पतालों के सीएमओ/अधीक्षक, बस स्टैंड/स्टेशन के मैनेजर अपने परिसर में कुत्तों की एंट्री के रास्तों की पहचान करेंगे और उन्हें रोकने के उपाय करेंगे. जरूरत पड़ने पर अन्य शासकीय विभागों से सहयोग भी लिया जाएगा. नोडल अफसर इस बात की निगरानी करेंगे कि कुत्तों की एंट्री पूरी तरह बंद रहे और वे परिसर के आसपास भी न भटकें. विभागों की जिम्मेदारी तय: पशुधन विकास विभाग     आवारा कुत्तों की नसबंदी     आरक्षित आश्रय स्थलों पर पशु चिकित्सक की नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग     सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना लोक निर्माण विभाग (PWD)     कुत्तों की एंट्री वाले स्थानों की पहचान     फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल और गेट का निर्माण शिक्षा विभाग     सभी स्कूलों में छात्रों व कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था     कुत्तों के काटने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराना नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत     हर तीन महीने में निरीक्षण कर कुत्तों की एंट्री बंद होने की पुष्टि     आवारा कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी की व्यवस्था     कुत्तों के लिए बाड़ा, चिकित्सक और देखभाल कर्मचारियों की नियुक्ति     प्रत्येक वार्ड में कुत्तों के लिए भोजन स्थलों की व्यवस्था     लोगों को स्ट्रीट डॉग गोद लेने के लिए प्रेरित करना खेल मैदान प्रबंधन     आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने सुरक्षा या ग्राउंड कीपिंग स्टाफ की तैनाती शिक्षकों पर नई जिम्मेदारी, संगठन ने जताया कड़ा विरोध इन निर्देशों में स्कूल प्राचार्यों को परिसर में आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने, फेंसिंग की निगरानी, साफ-सफाई से लेकर अप्रिय घटना होने पर जिम्मेदारी संभालने जैसे कार्य सौंपे गए हैं. इस पर शालेय शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है. संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा- “शिक्षकों पर पहले से ही शैक्षणिक कार्यों के अलावा कई गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां हैं. अब आवारा कुत्तों को भगाने और सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी देना न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि शिक्षकों पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है. किसी अप्रिय घटना की स्थिति में संस्था प्रमुख को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है.” उन्होंने मांग की कि यह निर्णय तुरंत वापस लिया जाए और आवारा कुत्तों के नियंत्रण की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी जाए, जो इसका विशेषज्ञ विभाग है.