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नारायणपुर के कपरी नाला में 2.97 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण अंतिम चरण में

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के कुनकुरी तहसील अंतर्गत नारायणपुर स्थित कपरी नाला में 2 करोड़ 97 लाख रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र की लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करने और कृषि गतिविधियों को अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। कपरी नाला में निर्माणाधीन इस परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर उसका कृषि कार्यों में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। क्षेत्र में सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है। स्टॉप डैम के निर्माण से वर्षा जल को रोककर उसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकेगा। इससे किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और फसलों के बेहतर उत्पादन की संभावनाएं मजबूत होंगी। 150 हेक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित, सिंचाई का प्रतिशत बढ़कर 37.91 तक पहुंचने की संभावना कपरी नाला में स्टॉप डैम के निर्माण से लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई का प्रतिशत बढ़कर 37.91 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद किसानों को आगामी कृषि सत्र 2027-28 से सिंचाई सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को समय पर फसलों की सिंचाई करने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के अवसर भी उपलब्ध होंगे। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह परियोजना उपयोगी साबित होगी, क्योंकि सिंचाई सुविधा के विस्तार से उनकी कृषि संबंधी कठिनाइयों में कमी आने की उम्मीद है। जल संरक्षण के साथ भू-जल संवर्धन और ग्रामीण जनजीवन को मिलेगा लाभ कपरी नाला में स्टॉप डैम का निर्माण जल संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वर्षा ऋतु के दौरान बहकर निकल जाने वाले पानी को रोककर उसका संचयन किया जा सकेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने और जल स्तर में सुधार होने की संभावना है। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को निस्तारी संबंधी जरूरतों के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी। जल संचयन की इस व्यवस्था से स्थानीय जल संसाधनों के संरक्षण और उनके समुचित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने पर पेयजल स्रोतों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त कपरी नाला के आसपास स्थित शिव मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलने की संभावना है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कृषि अधोसंरचना के विकास तथा किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जशपुर जिले में जल संरक्षण और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कपरी नाला में 2.97 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टॉप डैम से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत को नियंत्रित करने और किसानों की आय में वृद्धि के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। जल संरक्षण के साथ कृषि विकास को बढ़ावा देने वाली यह परियोजना क्षेत्र के ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों ने मुख्यमंत्री  साय के प्रति जताया आभार कपरी नाला में स्टॉप डैम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंचने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है। किसानों को उम्मीद है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और खेती-किसानी से जुड़ी उनकी समस्याओं में कमी आएगी। क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई सुविधा के विस्तार और जल संरक्षण की दिशा में इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

नवरात्रि शक्ति की आराधना और नारी सम्मान का महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री निवास आज नवरात्रि की भक्ति, गरबा की लय और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत और गरबा की ताल के बीच पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित माताओं-बहनों, बेटियों एवं सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना, श्रद्धा और भक्ति के साथ नारी सम्मान का महापर्व है। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। यह पर्व हमें मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति होने के साथ हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। गुजरात की धरती से निकली गरबा की परंपरा आज पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाती है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता के भाव को और मजबूत करते हैं। हमारे पर्व समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत के पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये परिवार और समाज को जोड़ने, आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि आज गरबा देश-दुनिया में भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी गरबा के प्रति उत्साह लगातार बढ़ा है। बड़ी संख्या में माताओं-बहनों और बेटियों की सहभागिता इस उत्सव को और विशेष बनाती है। महिला सशक्तीकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नारी शक्ति का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल भाव है और महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आदरणीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक संबल मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह हमारी मातृशक्ति के परिश्रम, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं। माता कौशल्या से मां दंतेश्वरी तक, छत्तीसगढ़ की धरती शक्ति आराधना की पावन भूमि मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है और यहां आदिशक्ति की आराधना की समृद्ध परंपरा सदियों से चली आ रही है। बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी सहित अनेक देवी धाम प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक माता के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। पूरा छत्तीसगढ़ शक्ति की आराधना में लीन दिखाई देता है। ये शक्तिपीठ केवल हमारी आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान के भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश "विकास भी, विरासत भी" की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भूमिका मुख्यमंत्री  साय ने गुजराती समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुजराती समाज ने अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, सेवा भावना और सामाजिक एकता से देश के विकास में विशिष्ट पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी गुजराती समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव सभी समाजों और संस्कृतियों को आत्मीयता से अपनाने की रही है। गुजराती समाज ने भी छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। विकसित भारत के निर्माण के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में समाज की यह सहभागिता महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देती है। माता रानी के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए, यही कामना है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विभिन्न आयोग-मंडलों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष  प्रीतेश गांधी, पूर्व विधायक एवं एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष  देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष  जयंती पटेल,  मितुल कोठारी,  नितिन डोलकिया,  महेंद्र कोडियार,  बाबू भाई पटेल,  अशोक पटेल,  मुकेश शाह,  गौरंग काचा,  कीर्ति व्यास,  राजेंद्र फौजदार सहित गुजराती समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

कृषक उन्नति योजना से शंकर प्रसाद की खेती को मिलेगा आर्थिक संबल, तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती पर मिलेंगे 45 हजार रुपये

रायपुर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषक हितैषी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। किसानों को परंपरागत खेती के साथ नवाचार, उन्नत कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से मिलने वाला आर्थिक संबल किसानों को खेती में नए प्रयोग करने और अपनी आय बढ़ाने के अवसर प्रदान कर रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लक्ष्मणगढ़ निवासी किसान  शंकर प्रसाद ने भी परंपरागत धान की जगह सुगंधित धान की खेती अपनाकर इस दिशा में नई पहल की है। उन्हें योजना के अंतर्गत तीन एकड़ कृषि भूमि के लिए कुल 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम लक्ष्मणगढ़ के कृषक  शंकर प्रसाद ने इस वर्ष अपनी तीन एकड़ कृषि भूमि में सुगंधित धान की खेती की है। उन्होंने परंपरागत धान की खेती से अलग हटकर सुगंधित धान का चयन किया है, जिससे बेहतर उत्पादन और आर्थिक लाभ की संभावनाएं विकसित हो सकें। खेती में बदलाव का उनका यह प्रयास दर्शाता है कि शासन की प्रोत्साहन आधारित योजनाएं किसानों को कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित कर रही हैं। तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती, बेहतर आमदनी की उम्मीद किसान  शंकर प्रसाद ने इस वर्ष अपनी खेती में बदलाव करते हुए तीन एकड़ भूमि में सुगंधित धान लगाया है। सुगंधित धान की खेती से उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। परंपरागत धान की जगह नई किस्म की खेती अपनाने का उनका निर्णय कृषि गतिविधियों में विविधता लाने और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  शंकर प्रसाद की इस पहल को कृषक उन्नति योजना से आर्थिक संबल भी मिलेगा। योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की दर से तीन एकड़ के लिए उन्हें कुल 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त होगी। इससे खेती से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करने और आगामी कृषि कार्यों की तैयारी में सहायता मिल सकेगी। शासन की यह सहायता उन्हें खेती में नई तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी। 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि से खेती को मिलेगी मजबूती खेती में बीज, खाद, कृषि आदान और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए किसानों को आर्थिक संसाधनों की जरूरत होती है। विशेषकर सीमित कृषि भूमि वाले किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत  शंकर प्रसाद को मिलने वाली 45 हजार रुपये की राशि उनके कृषि कार्यों को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी। इस राशि का उपयोग वे खेती की आवश्यकताओं को पूरा करने, आगामी फसल की तैयारी और बेहतर कृषि प्रबंधन के लिए कर सकेंगे। प्रोत्साहन राशि मिलने से किसानों को कृषि कार्यों में निवेश करने का अवसर मिलता है और वे अपनी खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। फसल विविधीकरण और कृषि नवाचार से बढ़ेंगी किसानों की संभावनाएं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों को परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ फसल विविधीकरण और उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि में विविधता लाने से किसानों को बाजार की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों का चयन करने के अवसर मिलते हैं। सुगंधित धान जैसी विशिष्ट किस्मों की खेती भी किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं विकसित कर सकती है।  शंकर प्रसाद द्वारा तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती का निर्णय इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। उनकी पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी खेती में नए प्रयोग करने, फसल चयन में बदलाव लाने और उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों की समृद्धि को मिल रही प्राथमिकता मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कृषक उन्नति योजना किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ कृषि गतिविधियों को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई किसान  शंकर प्रसाद की यह कहानी शासन की कृषक हितैषी योजनाओं से मिलने वाले प्रोत्साहन का उदाहरण है। तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती अपनाकर उन्होंने कृषि नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं योजना से मिलने वाली 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि उनके प्रयासों को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी। शासन की सहायता और किसानों की मेहनत से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं तथा ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की बैठक संपन्न

रायपुर मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की एक उच्चस्तरीय महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में जल जीवन मिशन के तहत तैयार बुनियादी ढांचे के निर्माण के बाद अब इसके सुचारू संचालन, संधारण (रखरखाव) और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की सतत आपूर्ति और जल संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने राज्य में स्थित सभी आदिवासी बसाहटों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। बैठक में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्य सचिव ने राज्य में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पेयजल की शुद्धता की निरंतर एवं कड़ाई से जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत कार्ययोजना और रणनीति पर गहन चर्चा की गई। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय बसाहटों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को लेकर संसाधनों और रूपरेखा की समीक्षा की गई। भूजल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण व सुरक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। राज्य में संचालित सोलर व रेट्रोफिटिंग तथा बल्क वॉटर योजनाओं की वर्तमान प्रगति एवं वित्तीय भुगतानों की विस्तृत समीक्षा की गई। जल जीवन मिशन की गतिविधियों को तकनीकी एवं प्रबंधकीय रूप से सुदृढ़ करने हेतु जिला तकनीकी इकाई तथा परियोजना प्रबंधन इकाई की नियुक्ति को लेकर अहम निर्णय लिए गए।     विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था हेतु प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। विशेष क्षेत्रों एवं बसाहटों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की गई। ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई।  12 ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त निविदाओं की दरों की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया।    जलापूर्ति योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव हेतु (ऑपरेशन्स एंड मेंटेनेंस पॉलिसी) के नवीन ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा हुई।  बैठक में जल-जीवन मिशन के तहत कर्मचारियों का प्रशिक्षण तथा जनभागीदारी को मजबूत करने पर बल दिया गया। योजनाओं के दीर्घकालिक और सफल संचालन के लिए ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय समुदायों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए अधिकारियों को दिए गए है।  बैठक में वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, जल जीवन मिशन के मिशन डायरेक्टर  रिमिजियुस एक्का सहित महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्कूल शिक्षा सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

प्रभारी सचिव ने विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव  सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग जिला मुख्यालय में अधिकारियों की बैठक लेकर विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बिजली, पानी, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के साथ जिले में संचालित विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता, समयबद्धता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि जिले के समग्र विकास के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग बढ़ाने के साथ मानवीय संवेदनाओं एवं जनहित को सर्वोपरि रखने को कहा।  आवास एवं राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश जिले के प्रभारी सचिव  बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा पात्र हितग्राहियों को भूमि पट्टे एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा और बीबीजीआरवाई के अंतर्गत संचालित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालय निर्माण सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। उन्होंने तहसीलों और ग्राम पंचायतों में नामांतरण, बंटवारा तथा अन्य राजस्व प्रकरणों, विशेषकर एक वर्ष से लंबित मामलों का त्वरित और पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला पंचायत और नगरीय निकायों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए स्टडी-टूर और क्रॉस-लर्निंग विजिट आयोजित करने के निर्देश दिए। स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर वन विभाग की समीक्षा के दौरान स्वामी आत्मानंद मॉडल कॉलेज, बोरी में पौधरोपण तथा तांदुला पार्क में नगर वन एवं हर्बल गार्डन की स्थापना जैसे नवाचारों की जानकारी दी गई। प्रभारी सचिव ने जिला शिक्षा अधिकारी को पीएम सहित अन्य उत्कृष्ट विद्यालयों में साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, कचरा पेटी और उद्यान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पात्र गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा। रैनबसेरों की सुविधाएं बेहतर बनाने कहा प्रमुख सचिव  बोरा ने आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के कार्ड बनाने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही कुष्ठ रोग, सिकलसेल और टीबीमुक्त अभियान के अंतर्गत जारी जांच एवं उपचार कार्यों की समीक्षा की गई। प्रभारी सचिव  बोरा ने नगर निगम आयुक्तों को रैनबसेरों की सुविधाएं बेहतर बनाने तथा शहरी प्रधानमंत्री आवास क्षेत्रों में सामुदायिक भवन, बुजुर्गों के बैठने के लिए बेंच, बच्चों के लिए पार्क और बेहतर जल निकासी व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  बोरा ने बैठक में सड़क निर्माण और अधोसंरचना विकास परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। वन मंडलाधिकारी  सी.पी. अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल, एडीएम  विरेन्द्र सिंह, भिलाई नगर निगम की आयुक्त सु सुरूचि सिंह, दुर्ग नगर निगम की आयुक्त सु लीना कोसम, रिसाली नगर निगम की आयुक्त मती मोनिका वर्मा और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी बैठक में मौजूद थे। नारकोटिक्स नियंत्रण की भी समीक्षा की दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव  सोनमणि बोरा ने नारकोटिक्स नियंत्रण की समीक्षा के दौरान एनडीपीएस के मामलों, मादक पदार्थों की जब्ती और सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की। उन्होंने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने, तस्करी के नेटवर्क की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल ने बैठक में बताया कि पिछले वर्ष एनडीपीएस के तहत 107 कार्रवाई की गई थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 157 हो गई है। इसी प्रकार गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 262 से बढ़कर 330 हो गई है। मादक पदार्थों की जब्ती का मूल्य भी पिछले वर्ष के 1.40 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर इस वर्ष 10.88 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। भिलाई-दुर्ग क्षेत्र के कुछ मोहल्लों और कुम्हारी के संवेदनशील इलाकों में अवैध नशा कारोबार पर निगरानी बढ़ाई गई है। प्रमुख सचिव  बोरा ने स्कूलों, कॉलेजों और व्यावसायिक संस्थानों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा टोल-फ्री नंबर 1933 का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेंटिंग प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों और अन्य जनभागीदारी आधारित गतिविधियों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों एवं रोकथाम के उपायों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने पर जोर दिया। साथ ही नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, पुनर्वास और समय पर काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

सुनीता को रजिस्ट्री में मिली 3,940 रुपये की आर्थिक राहत, स्वतः नामांतरण से कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी भी हुई दूर

रायपुर छत्तीसगढ़ में संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को सरल, सुगम और किफायती बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधार आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सूरजपुर जिले की ग्रामीण क्षेत्र की गृहिणी  सुनीता के लिए जमीन की रजिस्ट्री कराना अब पहले से अधिक सुविधाजनक और कम खर्चीला हो गया है। महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें 3,940 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। वहीं रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की सुविधा से उन्हें अलग से आवेदन करने और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। आर्थिक राहत के साथ समय की बचत ने उनके लिए संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सहज बना दिया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री  ओ.पी. चौधरी की पहल और मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट, रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण और डिजिटल सेवाओं का विस्तार इन सुधारों में प्रमुख हैं। इन व्यवस्थाओं का लाभ हितग्राहियों तक किस प्रकार पहुंच रहा है, यह जानने के लिए विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं। रजिस्ट्री में बचे 3,940 रुपये, घरेलू जरूरतों के लिए बनी सहूलियत सेवा संकल्प अभियान के तहत अपना अनुभव साझा करते हुए  सुनीता ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिला क्रेता के लिए निर्धारित पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ मिला। इससे उनके 3,940 रुपये बच गए। ग्रामीण परिवेश से आने वाली गृहिणी  सुनीता के लिए यह राशि महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में हुई बचत का उपयोग वे अपने परिवार की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में करेंगी। राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित पात्र दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने से संपत्ति खरीदने वाली महिलाओं को आर्थिक राहत मिल रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन मिलने के साथ परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हो रहा है। रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण, राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से मिली मुक्ति  सुनीता के लिए पंजीयन शुल्क में छूट के साथ स्वतः नामांतरण की सुविधा भी बड़ी राहत साबित हुई। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था और राजस्व कार्यालयों में जाना पड़ता था। अब ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। इससे उनके समय और प्रयास दोनों की बचत हुई। पूर्व व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में 90 से 240 दिन तक का समय लग सकता था। नई व्यवस्था के अंतर्गत पंजीयन के बाद राजस्व अभिलेखों में क्रेता का नाम अद्यतन करने की प्रक्रिया को अधिक तेज और व्यवस्थित बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 42 हजार से अधिक स्वतः नामांतरण किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिली है। पंजीयन सेवाओं में सुधार से महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा लाभ वित्त एवं पंजीयन मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को बढ़ावा देते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन भुगतान और स्वतः नामांतरण जैसी सुविधाओं से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया सरल हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को इन सुधारों का लाभ मिल रहा है। सुनीता ने शासन के प्रति जताया आभार  सुनीता ने कहा कि पंजीयन शुल्क में छूट मिलने से उनके पैसे बचे और स्वतः नामांतरण की सुविधा से समय की भी बचत हुई। अब उन्हें जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से परेशान नहीं होना पड़ा। उन्होंने इन सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री  ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। सूरजपुर की  सुनीता का अनुभव दर्शाता है कि पंजीयन विभाग के सुधारों का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। रजिस्ट्री में 3,940 रुपये की बचत और स्वतः नामांतरण की सुविधा उनके लिए आर्थिक राहत के साथ शासकीय सेवाओं में सुगमता का उदाहरण बन गई है।

दीपावली से पहले आयोजित होगा चंबल संभाग स्तरीय औद्योगिक सम्मेलन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य शासन प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्योगों की स्थापना एवं विस्तार के लिए शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि दीपावली से पहले चंबल संभाग स्तरीय औद्योगिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को विस्तार देने और नए उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में कृषि मंत्री  ऐदल सिंह कंसाना, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल तथा सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. सुदाम खाड़े सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनविश्वास अभियान के अंतर्गत आयोजित उद्यम संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों से संवाद कर क्षेत्र में औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार सृजन, निर्यात तथा उद्योगों के विस्तार से जुड़े विषयों पर चर्चा की। संवाद में लगभग 20 उद्यमियों ने सहभागिता की और शासन से प्राप्त सहयोग, उपलब्ध सुविधाओं तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, औद्योगिक क्लस्टर की स्थापना तथा पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। उन्होंने चंबल एक्सप्रेस-वे के आसपास नवीन औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की संभावनाओं पर भी उद्यमियों के साथ चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैसर्स एजीआई ग्रीन पैक की ग्लास विनिर्माण इकाई की सराहना करते हुए कहा कि ग्लास उद्योग को प्रोत्साहित कर प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में प्रभावी पहल की जा सकती है। मध्यप्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने तथा उद्योगों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। कंपनी को लगभग 27 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है, जहां ग्लास विनिर्माण इकाई स्थापित की जा रही है। वर्तमान में इकाई का निर्माण कार्य जारी है। इस परियोजना में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है तथा करीब 2,000 व्यक्तियों को रोजगार मिलने की संभावना है। कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है। मुख्यमंत्री ने मैसर्स बायोरा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की पहल की भी सराहना की। यह कंपनी बायोमास पैलेट्स का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक इकाइयां फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग और पराली प्रबंधन को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कृषि अपशिष्ट से बायोमास पैलेट्स एवं बायोचार का निर्माण कर अपशिष्ट का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा औद्योगिक विकास को एक साथ प्रोत्साहन मिलेगा। उद्यम संवाद में सिनोरिया फार्मा के उद्यमी  कपिल सत्यवानी ने बताया कि उनकी इकाई का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वर्ष 2024 में वर्चुअली किया गया था। इकाई में चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा संबंधी उपकरणों का निर्माण किया जाएगा। निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और दीपावली तक उत्पादन प्रारंभ करने की तैयारी है। इस इकाई में लगभग 6 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इकाई की स्थापना एवं उत्पादन प्रारंभ करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए उद्यमी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उद्यम संवाद में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शासन से प्राप्त सहयोग और विभागीय समन्वय से उनकी औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी इकाइयों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा कुछ इकाइयों के उत्पादों का निर्यात भी किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पोरसा और सबलगढ़ सहित क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना है। उद्योगों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास का लाभ सभी क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें और समग्र क्षेत्रीय विकास को गति मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दोहराया कि राज्य शासन उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने से स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवाद में बटेश्वर इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के  संजीव कुचिया, मैसर्स योगराज हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के  पुनीत बंसल, मैसर्स एजीआई ग्रीन पैक के  पी. गिरिधर, मैसर्स फ्यूमा लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के  शुभम सिंह, मैसर्स अन्नपूर्णा दाल मिल के  संजय शर्मा, मैसर्स बायोरा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के  आशीष गुप्ता, मैसर्स सिंघसा मेडीकेयर के  विश्वजीत सिंह तथा मैसर्स सिनोरिया फार्मा के  कपिल सत्यवानी सहित अन्य उद्यमियों से चर्चा की।  

छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी बातें सुनना, उनकी परेशानियों को समझना और गांव की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों की घोषणा करना, उप मुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा का यही सहज अंदाज ग्राम बंदौरा और ठकुराइनटोला में आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान देखने को मिला। उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी मांगे और समस्याएं सुनीं और गांव के विकास से जुड़ी मांगों पर गंभीरता से चर्चा की। इस दौरान गांव वाले की मांग पर विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए 74.80 लाख रुपए की घोषणाएं कीं। वहीं, बंदौरा में सड़क की खराब स्थिति की शिकायत सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारी को फोन कर सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। ग्रामवासियों की मांगों पर विकास कार्यों की मिली सौगात ग्राम बंदौरा में उप मुख्यमंत्री शर्मा ने वार्ड क्रमांक 10 में कबीर कुटी निर्माण के लिए 10 लाख रुपए, सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए और नवधा मंच निर्माण के लिए 3 लाख रुपए की घोषणा की। इसके अलावा मुक्तिधाम में शेड निर्माण तथा गांव में शेड निर्माण के लिए 18 लाख रुपए देने की घोषणा की। ग्राम ठकुराइनटोला में 7.80 लाख रुपए की लागत से सीसी सड़क, 10 लाख रुपए की लागत से सामाजिक भवन और मुक्तिधाम के लिए 6 लाख रुपये की घोषणा की गई। वहीं, ग्राम नयापारा पंचायत में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। इन कार्यों से ग्रामीणों को सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सड़क की परेशानी बताई तो तत्काल अधिकारी को फोन कर सुधारने के दिए निर्देश    ग्राम बंदौरा में ग्रामीणों ने सड़क की खराब स्थिति की समस्या उप मुख्यमंत्री के सामने रखी। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद श्री शर्मा ने संबंधित अधिकारी से फोन पर बात की और खराब सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए।  गांवों के विकास के लिए लगातार हो रहे कार्य ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, धार्मिक पर्यटन और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर विभिन्न विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कवर्धा में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हो चुका है और इसके भवन का निर्माण किया जा रहा है। शहर में यातायात सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बिलासपुर रोड और रायपुर रोड से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर 54 करोड़ रुपए की लागत से फोरलेन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है।  उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर के विकास के लिए 146 करोड़ रुपए के कार्य किए जा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के 85 हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की सुविधा विकसित की जा रही है। इनमें से 50 स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगाए जा चुके हैं और शेष 35 स्कूलों में भी इन्हें लगाने की योजना है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। राज्य में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 425 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में महतारी सदन बनाने का काम भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध हो सकेगा।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने एसटीपी प्लांट और पीएमई-बस डिपो का किया अवलोकन

रायपुर  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव  सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग के उरला में निर्माणाधीन एसटीपी प्लांट और प्रधानमंत्री ई-बस योजना के डिपो का अवलोकन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से एसटीपी प्लांट के कार्यों की अद्यतन प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इसके कार्यों में तेजी लाते हुए काम जल्दी पूरा करने को कहा।  बोरा ने अगले महीने नवम्बर में दुर्ग-भिलाई में प्रारंभ होने जा रहे ई-बस सेवा अंतर्गत बस डिपो का अवलोकन किया और आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्हों ने डिपो में चार्जिंग पाइंट लगाने के कार्य शीघ्र पूर्ण करने और स्थल में आवश्यक मरम्मत कराने के निर्देश दिये। दुर्ग नगर निगम की आयुक्त सु लीना कोसम, एसडीएम  प्रफुल्ल गुप्ता, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य और अधीक्षण अभियंता  सुनील सिंह भी इस दौरान मौजूद थे।

सीएम हेल्पलाइन पर अब तक 2.31 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज, 2.05 लाख से अधिक का हुआ निराकरण

रायपुर आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, संवेदनशील और प्रभावी समाधान सुशासन की पहली कसौटी है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 कम समय में ही प्रदेशवासियों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। राशन, पेंशन, बिजली, आवास, पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। नागरिक घर बैठे 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री  साय ने आज नवा रायपुर स्थित सीबीडी बिल्डिंग में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 के कार्यालय पहुंचकर इसके कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से लिए जा रहे फीडबैक तथा विभागवार और जिलेवार प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से  जिलों में शिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न जिलों के शिकायतकर्ताओं से स्वयं बातचीत कर जाना कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं। नागरिकों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद में अपने अनुभव साझा किए और शिकायतों के निराकरण पर संतुष्टि व्यक्त की। 2.31 लाख शिकायतें दर्ज, 88.85 प्रतिशत का हो चुका निराकरण समीक्षा बैठक में बताया गया कि 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सीएम हेल्पलाइन 1076 पर कुल 2 लाख 31 हजार 850 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 2 लाख 5 हजार 996 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 25 हजार 854 शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार अब तक प्राप्त कुल शिकायतों में से 88.85 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने हेल्पलाइन के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पिछली समीक्षा में दिए गए निर्देशों पर भी अच्छा कार्य हुआ है। इस व्यवस्था को निरंतर बेहतर बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का निराकरण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिक को वास्तविक रूप से राहत मिले और वह समाधान से संतुष्ट हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सबसे महत्वपूर्ण है। शिकायत बंद करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित नागरिक की समस्या वास्तव में दूर हुई है। नागरिकों से मिलने वाला फीडबैक ही इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता का आधार होना चाहिए। एक शिकायत से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत, बदला गया खराब ट्रांसफॉर्मर मुख्यमंत्री  साय ने समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के शिकायतकर्ता  दमन साहू से सीधे बातचीत की।  साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे गांव के लगभग 80 से 85 परिवार प्रभावित थे। स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।  साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब गांव में बिजली व्यवस्था सामान्य है और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने संबंधित अधिकारियों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सीधे आम नागरिक के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसी शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिकायत का संवेदनशीलता से समाधान कई परिवारों के जीवन में राहत ला सकता है। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के दस दिनों के भीतर मिली पीएम आवास की लंबित किस्त जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड निवासी  वीरेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उनके आवास निर्माण की दूसरी किस्त मिलने में विलंब हो रहा था। राशि नहीं मिलने से आवास निर्माण का काम भी प्रभावित हो रहा था। उन्होंने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज कराई। शिकायत के लगभग दस दिनों के भीतर उनके बैंक खाते में आवास की दूसरी किस्त के रूप में 55 हजार रुपए की राशि प्राप्त हो गई।  यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि राशि मिलने से अब वे अपने आवास का निर्माण आगे बढ़ा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। पात्र हितग्राहियों को योजना की किस्त समय पर मिलनी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे प्रकरणों में विशेष संवेदनशीलता बरतने को कहा। नौ महीने से रुकी थी पेंशन, 1076 पर शिकायत के बाद मिला लाभ मुंगेली जिले के ग्राम करही निवासी  तोरण साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी माताजी को लगभग नौ महीने से पेंशन की राशि नहीं मिल रही थी। पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग द्वारा प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी माताजी की पेंशन पुनः प्रारंभ हुई और लंबित राशि का भी भुगतान किया गया।  साहू ने समस्या का समाधान होने पर संतुष्टि जताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन वृद्धजनों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल है। पात्र हितग्राहियों को इसके लिए परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। आम नागरिक के लिए छोटी समस्या भी हो सकती है बड़ी परेशानी : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि शासन-प्रशासन की दृष्टि में कोई प्रकरण सामान्य हो सकता है, लेकिन संबंधित नागरिक के लिए वही समस्या बहुत महत्वपूर्ण होती है। राशन कार्ड में सुधार, पेंशन का भुगतान, बिजली आपूर्ति, पेयजल, आवास की किस्त या राजस्व संबंधी छोटे से कार्य में देरी भी किसी … Read more