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सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

नदी में नहाना बना जानलेवा: खारून में डूबे दो किशोर, एक की लाश बरामद

दुर्ग अमलेश्वर थाना क्षेत्र में खारून नदी में 2 नाबालिग डूब गए. घटना बुधवार की है जब 6 दोस्त नदी में नहाने उतरे थे. इस दौरान अचानक तेज बहाव और भंवर में फंसने के बाद 2 युवक डूब गए. SDRF के टीम ने गुरुवार को एक 16 वर्षीय नाबालिग के शव को गुरुवार सुबह बरामद किया. जबकि दूसरे 15 वर्षीय युवक की तलाश अब भी जारी है. जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान आशीष सरोज (16 वर्ष), पिता पंकज सरोज, बजरंग नगर वार्ड 37 निवासी के रूप में हुई है. वह बीते दिन ग्राम जमराव के 5 नाबालिग दोस्तों के साथ अमलेश्वर थाना क्षेत्र में खारून नदी में नहाने गया था. नहाते समय पानी के तेज बहाव और भंवर में फंस जाने से आशीष और उसका दोस्त यशवंत हरपाल (15 वर्ष) बह गए. उन्हें डूबता देखकर बाकी 4 दोस्तों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया. लोगों ने तत्काल पुलिस को घटना की सूचना दी और डूबते नाबालिगों को ढूंढने और बचाने का प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे. डीप डाइविंग से निकाला गया शव SDRF की टीम ने पूरी रात आठ घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. लेकिन दोनों को नहीं ढूंढा जा सका था. वहीं आज गुरुवार सुबह डीप डाइविंग के अनुभवी जवान इंद्रपाल यादव और राजकुमार यादव ने दो घंटे की मेहनत के बाद आशीष का शव नदी से बाहर निकाला और पुलिस के सुपुर्द किया. लेकिन यशवंत अब तक नहीं मिल सका है. यशवंत की तलाश अब भी जारी है. पुलिस ने आशीष के शव को पोस्टमार्टम के लिए सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भिजवाया है. घटना से गांव और परिजनों में शोक की लहर है.

एग्रीकल्चर के छात्र की आत्महत्या से सनसनी, जांच जारी

भिलाई  सुपेला थाना क्षेत्र अंतर्गत साईं नगर में एक 26 वर्षीय एग्रीकल्चर के छात्र ने आत्महत्या कर ली. घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है. बुधवार शाम (23 जुलाई) को युवक घर पर अकेला था, इसी दौरान उसने खुदखुशी कर ली. घटना के बाद लोगों ने परिजनों और पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम किया और पीएम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया है. जानकारी के अनुसार, मृतक का नाम इंद्रप्रीत सिंह सैनी है और वह भिलाई में रहकर एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहा था. इंद्रप्रीत के पिता जनरल सिंह सैनी जगदलपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) में SDO हैं और मां एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं. बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिजन जगदलपुर से तुरंत भिलाई के लिए रवाना हुए और शाम तक साईं नगर स्थित घर पहुंचे. परिजनों का कहना है कि इंद्रप्रीत दो भाइयों में बड़ा और स्वभाव से बेहद शांत था. उसने किसी तरह की परेशानी में होने की बात नहीं बताई थी और न ही ऐसे कोई संकेत पहले कभी मिले थे. उसने ये कदम क्यों उठाया यह उन्हें समझ नहीं आ रहा है. आत्महत्या का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है. पुलिस परिजनों और दोस्तों समेत आस-पास के लोगों से पूछताछ कर घटना का कारण जानने का प्रयास कर रही है.

सीएम विष्णु देव साय ने हरेली पर दी प्रदेश को बधाई, कहा– प्रकृति से जुड़ने का पर्व है हरेली

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली पर्व खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्योहार है, जिसमें किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह पर्व न केवल अच्छी फसल की कामना का अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य की भावना को भी प्रकट करता है। साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस वर्ष हरेली पर्व को हम और भी सार्थक बनाएं — धरती माता की पूजा के साथ वृक्षारोपण करें, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सके। यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लेकर आए। उन्होंने सभी नागरिकों से इस लोकपर्व को आपसी सौहार्द, प्रकृति प्रेम और परंपरा के सम्मान के साथ मनाने का आह्वान किया।

मुंगेली बना डिजिटल इंडिया का भागीदार, अटल केन्द्रों से बदली तस्वीर

आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न सुविधाओं का स्थानीय स्तर पर मिल रहा लाभ रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा की अनुरूप मुंगेली जिला डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुंगेली जिले के तीनों विकासखण्डों की 30 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र की स्थापना होने से ग्रामीणों को काफी सुविधा मिल रही हैं। पहले आय, जाति, निवास आदि कार्यों के लिए च्वाईस सेंटर, लोक सेवा केन्द्र के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब ग्रामीणों को उनके घर के पास ही सभी सुविधाएं मिलने लगी है। इससे समय और धन दोनों की बचत हुई है। भटगॉव के युवा लेखराम साहू ने बताया कि पहले पैसे जमा या निकासी के लिए 20 किलोमीटर दूर मुंगेली जाना पड़ता था, लेकिन अब ये सुविधा केन्द्र खुलने से यह प्रक्रिया बहुत आसान हो गई है। इससे ग्रामीणों को समय, मेहनत और यात्रा खर्च की बचत हो रही है। इसी तरह डिजिटल सेवा का लाभ लेने पहुंची गंगा साहू ने भी शासन की इस पहल की सराहना की। गंगा साहू ने कहा कि यह पहल ग्रामीण स्वावलंबन और पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में मददगार कदम है। इस पहल ने न सिर्फ आर्थिक रूप से गाँवों को मज़बूत किया, बल्कि युवाओं को स्वरोज़गार के अवसर भी दिए। डिजिटल सेवाओं के जरिये शासन की मुख्यधारा अब अंतिम छोर तक पहुँच रही है, जिससे स्थानीय जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर शुरू हुए थे एडीएसके इस वर्ष 24 अपै्रल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर शासन द्वारा जिले के तीनों विकासखण्डों में पहले चरण मे 10-10 ग्राम पंचायतों में अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केन्द्र का शुभारंभ किया गया है। इन केन्द्रों में आमजनों को बैंकिंग, बीमा, पेंशन, बिजली बिल भुगतान, रेलवे टिकट, छात्रवृत्ति, और जन्म-मृत्यु सहित जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज़ों सहित खाता खोलने की सुविधा दी जा रही है। इससे गाँव के लोग पंचायत स्तर पर ही ज़रूरी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

हरेली उत्सव में छत्तीसगढ़ी परंपराओं का रंग: मुख्यमंत्री निवास बना सांस्कृतिक केंद्र

रायपुर, छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। काठा सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था। खुमरी सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था। कांसी की डोरी यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है। झांपी ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है। कलारी बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और सुंदर नाचा की छटा

  रायपुर, मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा के साथ सुंदर नाचा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण से सराबोर है। ग्रामीण परिवेश की जीवंत छवि इस सुंदर माहौल में साकार हो गई है। कहीं सुंदर वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत बिखरी है, तो कहीं आदिवासी कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य की मोहक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ का अद्भुत ग्रामीण लैंडस्केप अपनी संपूर्ण सांस्कृतिक सुंदरता के साथ यहां सजीव रूप में अवतरित हो गया है। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य अपने चरम पर है। राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है। राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है। राउत नाचा की प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों — जैसे ढोल, मांदर और नगाड़ा — का प्रयोग होता है। इनकी थाप पर नर्तक सामूहिक रूप से तालबद्ध होकर नृत्य करते हैं। यह नृत्य केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, श्रम की महत्ता, पशुपालन के योगदान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देता है। नाचा के साथ गाए जाने वाले गीतों को ‘राउत गीत’ कहा जाता है, जिनमें धर्म, वीरता, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है।

कैदी की जान के बदले फिरौती: जेल से गैंग चलाकर लाखों वसूले, रवि विठ्ठल समेत 4 गिरफ्तार

दुर्ग केंद्रीय जेल दुर्ग में विचाराधीन बंदी को जान से मारने की धमकी देकर उनके परिवार से अवैध वसूली करने का मामला सामने आया है। आरोपी रवि विठ्ठल उसी जेल में हत्या की सजा काट रहा है। जिसने जेल में बंद कैदी को जान से मारने की धमकी देकर उससे परिजनों से लाखों रुपये वसूले हैं। मामला 10 महीने पुराना बताया जा रहा है। जिसमें पहले ही तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, रवि विठ्ठल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उस कोर्ट में पेश कर राजनांदगांव जेल वापस भेजा गया। पूरा मामला 4 अक्टूबर 2024 को तब सामने आया जब पीड़ित ने सुपेला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि उसका भाई पिछले दो वर्षों से दुर्ग जेल में बंद है। वहीं, उसी जेल में हत्या के आरोप में सजा काट रहा कैदी रवि विठ्ठल, अपने साथियों विशाल सोनी उर्फ उड़िया, परबदीप सिंह और गुरमीत कौर की मदद से पीड़ित को मोबाइल पर धमकियां दे रहा था। धमकी दी गई कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो जेल में बंद उसके भाई को जान से मार दिया जाएगा। आरोपियों ने जेल में बंद लोकेश पांडेय के परिजनों ने धमकी के चलते रवि विठ्ठल को कुल 7.95 लाख रुपए दिए, जिसमें से 5 लाख रुपए नकद और 2.95 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके अलावा 11 जुलाई 2023 को आरोपी की बेटी के जन्मदिन पर एक सोने की चेन और लॉकेट भी जबरन मंगवाए गए। 19 जुलाई 2023 को दुर्ग कोर्ट परिसर में भी धमकी देकर आरोपी को 5 लाख रुपए कैश दिए गए। जिसे आरोपी की मां गुरमीत कौर और भाई परबदीप ने लिया था। इस मामले में पुलिस पहले ही महेश्वरी बघेल, गुरमीत कौर और विशाल सोनी को गिरफ्तार कर चुकी है। मुख्य आरोपी रवि विठ्ठल को प्रोडक्शन वारंट के जरिए पेश कर पूछताछ की गई। जिसमें उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश कर राजनांदगांव जेल वापस भेजा गया। दुर्ग पुलिस प्रवक्ता पद्मश्री तंवर ने बताई कि इस मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस ने अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जेल के भीतर से अपराध संचालित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सड़कों पर बेकाबू रफ्तार अब नहीं चलेगी: चालकों पर कार्रवाई तेज, चालान का सिलसिला जारी

जगदलपुर जगदलपुर में तय गति से तेज वाहन चलाने वालों की अब खैर नहीं है। ट्रैफिक पुलिस दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए तेज गति से वाहन चलाने वालों का चालान इंटरसेप्टर के माध्यम से कर रही है। तय मानक से तेज वाहन चलाने और इससे होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस कमर कस ली है। लगातार ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। शहर में 14 जुलाई से लगातार विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में जब यात्रियों की जान को जोखिम में डालकर सरपट दौड़ रही यात्री बस अपनी निर्धारित स्पीड से ज्यादा में दौड़ रही थी, तभी यातायात पुलिस के द्वारा ओवरस्पीड को अपने इंटरसेप्ट में कैद होने के कारण यातायात पुलिस के द्वारा कार्रवाई की गई। ओवर स्पिड 95/किमी. से कोंडागांव तरफ से जगदलपुर की ओर आ रही थी, जिसे कैमरा में रिकॉर्ड किया गया, जो निर्धारित अधिकतम गति सीमा 80/किमी. का उल्लंघन करना पाए जाने पर कार्रवाई की गई। यातायात पुलिस के द्वारा लगातार देखा जा रहा था कि यात्री बस चालकों की लापरवाही के कारण कई बड़ी घटनाएं हुईं, जिसे रोकने के लिए हाइवे पर लगातार यातायात पुलिस कार्रवाई कर रही है। पुलिस के इंटरसेप्टर वाहन के कैमरे में ओवर स्पीड रिकॉर्ड दर्ज किया गया। 14 जुलाई से लगातार विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें 10 दिन में 516 वाहनों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ कुमार सिन्हा के निर्देश व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग के मार्गदर्शन में सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क दुर्घटना के रोकथाम एवं बचाव के लिए बस्तर जिले में ओवर स्पीड से वाहन चलाने वाले चालकों पर यातायात पुलिस के द्वारा कार्रवाई की जा रही है। उप पुलिस अधीक्षक यातायात संतोष जैन एवं यातायात प्रभारी मधुसूदन नाग लगातार ऐसे वाहन चालकों को सबक सिखाने में लगे हैं।