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बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ा एक्शन: फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त, 20 बच्चों को मिला संरक्षण

बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल आयोग का बड़ा एक्शन डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई जोखिमपूर्ण फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त, कुल 20 बच्चों को संरक्षण दूसरे प्रदेशों के नाबालिगों का रेस्क्यू, बाल तस्करी के एंगल से होगी जांच रायपुर,   विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण हेतु प्रदेशभर में विशेष कार्रवाई की गई। इस दौरान रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से 9 नाबालिग बच्चों, बिलासपुर में आरपीएफ के माध्यम से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों का रेस्क्यू कर कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इसी क्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में राजधानी रायपुर के उरला स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में विशेष औचक छापामार कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोहे की फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से गंभीर एवं जोखिमपूर्ण प्रकृति का कार्य कराया जा रहा था। मौके से 9 बच्चों को तत्काल संरक्षण में लेकर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किया गया तथा उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का रहने वाला है। मामले में संबंधित ठेकेदार, बच्चों को यहां लाने वाले अन्य व्यक्तियों तथा संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रकरण में प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण एवं अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 एवं 143 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बाल श्रम एवं संभावित बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि, बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, विशेषकर तब जब उनसे जोखिमपूर्ण उद्योगों में कार्य कराया जाता है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बाल श्रम एवं बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध आयोग पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति रही। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी? मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायतों के बाद तबादलों की अटकलें तेज

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के समापन के साथ ही अब शासन का फोकस जनता से मिले फीडबैक और शिकायतों के विश्लेषण पर केंद्रित हो गया है। प्रदेशभर में आयोजित शिविरों में लाखों आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी करती दिखाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो कई विभागों में व्यापक स्तर पर तबादले और जिम्मेदारियों में फेरबदल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है। सुशासन तिहार के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कुल 6 लाख 43 हजार 334 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 4 लाख 17 हजार 111 मांग संबंधी जबकि 26 हजार 223 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल हैं। बड़ी संख्या में सामने आई शिकायतों ने शासन का ध्यान खींचा है और अब इन्हीं आंकड़ों के आधार पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खाद्य एवं सामाजिक कल्याण विभाग से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक सामने आई हैं। लोगों ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही, भ्रष्टाचार, समय पर कार्य नहीं करने तथा आम जनता से दूरी बनाए रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कई जिलों से लगातार मिल रही शिकायतों ने शासन को संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर पर भी शिविरों से प्राप्त फीडबैक की नियमित समीक्षा की जा रही है। जिन विभागों और क्षेत्रों में शिकायतों का प्रतिशत अधिक है, वहां अलग से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जिलों से मिले प्रतिवेदनों में यह परखा जा रहा है कि किन अधिकारियों के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज हुई हैं और किन क्षेत्रों में जन असंतोष सबसे अधिक है। सरकार केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन कारणों की भी पड़ताल कर रही है जिनकी वजह से जनता को बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में अब जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि जिन जिलों में शिकायतों का आंकड़ा अपेक्षाकृत अधिक रहा है, वहां अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन का विशेष मूल्यांकन किया जाएगा। खराब प्रदर्शन और लगातार शिकायतों के आधार पर तबादले, जिम्मेदारियों में बदलाव या विभागीय कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। स्पष्ट संकेत हैं कि सुशासन तिहार केवल शिकायतें सुनने का अभियान नहीं था, बल्कि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार के एक बड़े आधार के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में यदि बड़े पैमाने पर तबादले और जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिलें, तो इसे सुशासन तिहार से निकले जनमत का सीधा प्रभाव माना जाएगा।

छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव- 16 जून से ऑनलाइन हाजिरी और लीव जरूरी, लापरवाही पर रुकेगा जून का वेतन

रायपुर छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अब ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति (हाजिरी) और ऑनलाइन अवकाश (छुट्टी) आवेदन व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक, आगामी 16 जून 2026 से सभी के लिए डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी। नियमों की अनदेखी करने पर जून महीने का वेतन रोक दिया जाएगा। स्कूलों के लिए VSK App और कार्यालयों के लिए AEBAS अनिवार्य शासन ने विभाग के हर स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए दो अलग-अलग डिजिटल माध्यम तय किए हैं। शासकीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र (टैज्ञ) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के तहत कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और बाबुओं को आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS)के जरिए अपनी हाजिरी लगानी होगी। हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं यदि 16 जून से किसी भी कर्मचारी की उपस्थिति VSK App या बायोमेट्रिक प्रणाली में दर्ज नहीं पाई जाती है, तो उसकी उपस्थिति को शून्य माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित कर्मचारी का जून माह का वेतन जारी नहीं किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDOs) की होगी। ऑफलाइन छुट्टी पर पूर्ण प्रतिबंध, मनमर्जी करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज संचालनालय ने साफ किया है कि शिक्षा विभाग के कर्मियों के अवकाश आवेदन और उसकी स्वीकृति के लिए 'HRMIS पोर्टल' की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर अब भी ऑफलाइन (कागज पर) आवेदन लिए जा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब ऑफलाइन अवकाश आवेदनों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। अब सभी प्रकार की छुट्टियां केवल ऑनलाइन माध्यम से ही ली और मंजूर की जा सकेंगी। यदि किसी अधिकारी ने ऑफलाइन आवेदन स्वीकार या मंजूर किया, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश  लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के सभी संयुक्त संचालकों (JDs), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और आहरण व संवितरण अधिकारियों (DDOs) को पत्र जारी कर इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस नई व्यवस्था से विभाग में लेटलतीफी और बिना सूचना गायब रहने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से लगाम कसने की उम्मीद है।

बुनकरों और शिल्पियों की आय बढ़ाने के लिए डिजाइन प्रशिक्षण एवं नवाचार पर जोर

रायपुर केंद्रीय मंत्री  गिरिराज सिंह ने रेशम उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए विभागीय अधिकारियों को प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनकरों, शिल्पियों एवं कारीगरों को डिजाइन विकास संबंधी नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़े तथा उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।           केंद्रीय वस्त्र मंत्री  गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में राज्य अतिथि गृह (पहुना) में आज आयोजित समीक्षा बैठक में रायपुर लोकसभा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष मती शालिनी राजपूत, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष  राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष  भोजराज देवांगन, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव  राजेश सिंह राणा, छत्तीसगढ़ माटी कला एवं हस्तशिल्प बोर्ड के प्रबंध संचालक  जयप्रकाश मौर्य, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की प्रबंध संचालक मती लीना कमलेश मंडावी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।         केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग क्षेत्र के उद्यमियों की वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों को निर्यात एजेंसियों से जोड़ा जाए तथा उनके उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सके।             बैठक में सिल्क एवं कॉटन उत्पादों में अन्य प्राकृतिक रेशों के समावेश के माध्यम से नवीन उत्पाद विकसित करने तथा बाजार विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।         केंद्रीय मंत्री ने रेशम केंद्रों में रेशम पौधों के साथ फ्लोरीकल्चर एवं सब्जी उत्पादन की मिश्रित खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे कृमिपालकों एवं कीटपालकों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सके। उन्होंने वस्त्र निर्माण में प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए हल्दी, कत्था, मेहंदी तथा विभिन्न पुष्पों से प्राप्त रंगों के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता बताई। साथ ही हथकरघा क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक डिजाइन एवं उत्पाद विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के सहयोग से कार्य करने के निर्देश भी दिए।            बैठक में खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा, हस्तशिल्प एवं रेशम क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के विभिन्न उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कला, संस्कृति और सिनेमा के संरक्षण-संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में संस्कृति विभाग एवं छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माताओं, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों के सम्मान समारोह में शामिल हुए।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और संवेदनाओं को दिशा देने वाली सशक्त विधा हैं। एक अच्छी फिल्म समाज में जागरूकता पैदा करती है और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मदर इंडिया जैसी फिल्मों ने भारतीय समाज में नैतिक मूल्यों, त्याग और आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा का गौरवशाली इतिहास रहा है। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म कही देबे संदेश ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सार्थक संदेश दिया था। आज छालीवुड की फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विस्तार से फिल्मों की पहुंच समाज के हर वर्ग तक हुई है, ऐसे में जिम्मेदार, सकारात्मक और मूल्याधारित सिनेमा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम को पुनः सक्रिय किया गया है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एवं कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का भूमिपूजन किया गया है। इस परियोजना से राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, हजारों कलाकारों, तकनीशियनों एवं श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा फिल्म पर्यटन को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम एवं संस्कृति विभाग को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की कला, संस्कृति और सिनेमा को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह सराहनीय पहल है। ऐसे सम्मान समारोह कलाकारों और रचनाकारों का मनोबल बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में 11 देशों में सम्मानित छत्तीसगढ़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म "छत्तीसगढ़ का भीम – चिंताराम" का विशेष प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन को जन्मदिवस की शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर उन्होंने गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र स्थित गिधनी पाठ में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये तथा धमतरी में सेन समाज भवन निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की घोषणा की। इस अवसर पर सर्व सेन समाज के प्रदेश अध्यक्ष  पुनीत सेन, वरिष्ठ फिल्म निर्माता  मोहन सुंदरानी, छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग से जुड़े निर्माता, निर्देशक, कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

राज्यगीत और भोजन मंत्र; शिक्षा विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश

रायपुर छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना और भारतीय संस्कृति से गहराई से जोड़ा जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने नवीन शिक्षा सत्र 2026-27 से प्रदेश की सभी शालाओं में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के नियमित व अनिवार्य संचालन के कड़े निर्देश जारी किए हैं।             मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से जारी इस आदेश के तहत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को अपने-अपने क्षेत्रों में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तीन सत्रों में बंटा होगा शेड्यूल- सुबह से शाम तक का पूरा टाइम-टेबल            विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में अब प्रतिदिन तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित क्रम में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रातःकालीन सत्र स्कूल प्रारंभ होने पर सुबह की प्रार्थना सभा में एक तय क्रम के अनुसार ये प्रस्तुतियां अनिवार्य होंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का सामूहिक वाचन कराया जाएगा। बौद्धिक और नैतिक विकास है मुख्य उद्देश्य           स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों के नियमित और प्रभावी संचालन से छात्रों में न केवल राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी सही विकास होगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी। लापरवाही पर होगी कार्रवाई   शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन स्कूलों का औचक निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं। निर्धारित क्रम में अवहेलना पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या प्राचार्यों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

​बलौदाबाजार को 3.5 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किया भूमिपूजन और लोकार्पण

​रायपुर छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने आज बलौदाबाजार नगर पालिका क्षेत्र को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। मंत्री  वर्मा ने कुल 3 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत वाले विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया, साथ ही दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए 12.32 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित रैन बसेरा का लोकार्पण भी किया। ​विकास कार्यों का लेखा-जोखा    भूमिपूजन एवं लोकार्पण के इन विकास कार्यों  पर नजर डालें तो नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत वार्ड क्रमांक 16 में 56.86 लाख रुपए की लागत से 12 नग राहत शिविरों का निर्माण किया जाएगा, वहीं वार्ड क्रमांक 12 में भी 60.25 लाख रुपए की राशि से 10 नग राहत शिविरों की आधारशिला रखी गई है। स्थानीय नागरिकों की संवेदनशीलता और जरूरत को देखते हुए वार्ड क्रमांक 17 में 61.44 लाख रुपए खर्च कर मुक्तिधाम का उन्नयन एवं जीर्णोद्धार कार्य कराया जाएगा।  इसी तरह ​शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए अधिसंरचना एवं पर्यावरण निधि के अंतर्गत 1.17 करोड़ रुपए की एक बड़ी राशि स्वीकृत की गई है, जिससे विभिन्न वार्डों में 10 अलग-अलग विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके साथ ही, आम जनता को स्वच्छ और सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अलग-अलग क्षेत्रों में 40.72 लाख रुपए की लागत से पाइपलाइन विस्तार का कार्य शुरू किया गया है। इन सभी भूमिपूजन कार्यों के साथ-साथ, सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देते हुए बस स्टैंड के पास विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए 12.32 लाख रुपए की लागत से एक आधुनिक रैन बसेरे का निर्माण पूरा कर उसका लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर  राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों को पूरी गति के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि गाँव हो या शहर, विकास की राह में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। हमारी डबल इंजन की सरकार तेज गति से विकास के पथ पर दौड़ रही है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। युवा, महिला, किसान और बुजुर्ग—हर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं और जनता इनका सीधा लाभ उठाकर खुशहाल है। ​भूमिपूजन कार्यक्रम के पश्चात मंत्री  वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने पास में स्थित डबरी (तलाब) की मेढ़ पर आंवले का पौधा लगाया। इसके साथ ही उन्होंने जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में नीम का पौधा भी रोपा। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  अशोक जैन, जनपद अध्यक्ष मती सुलोचना यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और अधिकारी उपस्थित थे।

विशेष सचिव शीतल वर्मा के कड़े निर्देश, हर हफ्ते तय हो निराकरण की तिथि

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाने के लिए शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) में वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स उप समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनहित की योजनाओं से जुड़े ऋण (लोन) और अनुदान (सब्सिडी) के मामलों को बैंकर्स बिना किसी देरी के जल्द से जल्द स्वीकृत करें। प्रमुख योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा          बैठक में मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय योजनाओं के तहत 31 मार्च तक बैंकों द्वारा दिए गए लोन और वित्तीय सहायता के मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें  प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, अंत्योदय स्वरोजगार योजना सहित अन्य योजनाओं के 31 मार्च तक के हितग्राहियों को बैंकों द्वारा प्रदत्त लोन एवं अन्य वित्तीय सहायता के प्रकरणों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। अनावश्यक रूप से पेंडिंग न रखें फाइलें- विशेष सचिव          विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा ने बैंक प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत आने वाले हितग्राहियों के आवेदनों को बेवजह लंबित न रखा जाए। फाइलों के त्वरित निपटारे के लिए उन्होंने बैंकर्स को एक व्यावहारिक व्यवस्था बनाने को कहा है। लोन के लिए हर हफ्ते तय हो एक दिन        बैंकर्स से कहा गया है कि वे स्वरोजगार और अन्य योजनाओं के हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रति सप्ताह एक निर्धारित दिन (फिक्स डे) तय करें, ताकि उसी दिन सभी आवेदनों की जांच कर उनका तत्काल निपटारा किया जा सके।         इस उच्च स्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और विभिन्न राष्ट्रीयकृत व क्षेत्रीय बैंकों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। शासन की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आम नागरिकों और ग्रामीण उद्यमियों को बैंकों से ऋण मिलने की प्रक्रिया बेहद सुगम और पारदर्शी हो जाएगी।

सूरज की रोशनी से चमका राजनांदगांव

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले  ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने उसे देशभर में नई पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राजनांदगांव देश में सर्वाधिक सोलर क्षमता वाले कनेक्शन स्थापित करने वाला जिला बन गया है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी सौर ऊर्जा को लेकर लोगों का उत्साह तेजी से बढ़ रहा है। कलेक्टर  जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन तथा विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है। योजना के तहत जिले में अब तक 6776 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6381 हितग्राहियों ने वेंडर का चयन कर लिया है। वहीं 3255 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 2218 लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान भी किया जा चुका है। जिले में 3255 घरेलू सोलर कनेक्शनों के माध्यम से लगभग 9 मेगावाट, 162 व्यावसायिक सोलर कनेक्शनों से 3.40 मेगावाट तथा 31 पावर प्लांटों के जरिए 383 मेगावाट क्षमता विकसित की गई है। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि ढाबा स्थित मेसर्स सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के 160 मेगावाट क्षमता वाले सोलर कनेक्शन की है, जो देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा कनेक्शन माना जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को सम्मानित कर अन्य नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राजनांदगांव की यह उपलब्धि हरित ऊर्जा की दिशा में देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है।

छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

रायपुर कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।  छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।    कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (च्ड ैट।छपकीप) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।      योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।      पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।     छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।