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मुख्यमंत्री साय ने पारस पोर्टल के माध्यम से की प्रमुख योजनाओं एवं विकास कार्यों की राज्य स्तरीय समीक्षा

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसका प्रभाव धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पारस (Project Assessment, Review and Analysis System) पोर्टल के माध्यम से योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित निगरानी के साथ विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री  साय आज मंत्रालय महानदी भवन में पारस पोर्टल के माध्यम से आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनसेवाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री  साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली तथा निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में प्राप्त करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन की कार्यप्रणाली में अंतर्विभागीय समन्वय की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। अनेक विकास परियोजनाओं में एक से अधिक विभागों की अनुमति, सहभागिता अथवा सहयोग आवश्यक होता है। ऐसे में विभाग अलग-अलग स्तर पर कार्य करने के बजाय समन्वित दृष्टिकोण अपनाएं। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, अनावश्यक विलंब दूर होगा तथा समय और लागत दोनों की बचत होगी। उन्होंने कहा कि पारस पोर्टल का उद्देश्य केवल योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन कारणों की पहचान कर समाधान सुनिश्चित करना भी है, जिनके कारण कोई परियोजना या योजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। राज्य स्तर से लेकर जिलों तक सभी अधिकारी इसे परिणाम आधारित प्रशासन के प्रभावी माध्यम के रूप में उपयोग करें। एग्रीस्टैक में कोई भी पात्र किसान पंजीयन से न रहे वंचित मुख्यमंत्री  साय ने एग्रीस्टैक में प्रत्येक पात्र किसान का शत-प्रतिशत पंजीयन निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक को केवल धान खरीदी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ अधिक सरलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण आधारभूत व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिलों में विशेष अभियान चलाकर एग्रीस्टैक तथा डीसीएस से संबंधित लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। प्रत्येक वास्तविक किसान का पंजीयन सुनिश्चित हो और किसी पात्र किसान को धान विक्रय अथवा शासन की अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में सामने आई व्यावहारिक कठिनाइयों से सीख लेते हुए इस वर्ष पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही के कारण यदि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित होता है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जिलेवार प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अपेक्षाकृत पीछे चल रहे जिलों को निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस कार्य में लापरवाही अथवा अपेक्षित सहयोग नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। बाढ़ प्रभावित परिवारों तक शीघ्र पहुंचे राहत और सहायता मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में विगत दिनों हुई भारी बारिश और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति तथा संचालित राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि भारी बारिश से प्रदेश के 17 जिलों के 500 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं और बस्तर संभाग के जिलों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को जनहानि, मकानों, पशुधन, अनाज तथा अन्य संपत्तियों को हुई क्षति का सर्वेक्षण शीघ्र पूरा करने और पात्र प्रभावित परिवारों तक सहायता राशि यथाशीघ्र पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षति के आकलन से लेकर सहायता राशि प्रदान करने तक की प्रक्रिया संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी की जाए। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों एवं स्वास्थ्य शिविरों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने हैंडपंपों का क्लोरीनीकरण कराने तथा नागरिकों को पानी उबालकर पीने के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को यह भरोसा होना चाहिए कि सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। राहत और पुनर्वास के प्रत्येक कार्य में मानवीय संवेदना सर्वोपरि होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान देने वाले स्व-सहायता समूहों, चेंबर ऑफ कॉमर्स, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना की और कलेक्टरों को ऐसे समूहों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों तथा अन्य सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का आकलन कर जानकारी तत्काल शासन को भेजने को कहा, ताकि उनकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ की जा सके। उन्होंने पात्र प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को मिले अपेक्षित गति मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसके क्रियान्वयन में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह योजना परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने योजना के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वेंडर्स की संख्या बढ़ाने, सोलर दीदियों को प्रोत्साहित करने तथा हितग्राहियों के लिए ऋण की उपलब्धता को और सुगम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा योजना में उपलब्ध कराई जा रही सब्सिडी का अधिक से अधिक पात्र परिवार लाभ उठा सकें, इसके लिए जिलों में व्यापक जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने कलेक्टरों को योजना में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए बैंकिंग सुविधा, वेंडर चयन से लेकर सोलर संयंत्र की स्थापना तक पूरी प्रक्रिया को हितग्राही के लिए सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश दिए। सड़क और पुल-पुलियों के लंबित कार्यों की बाधाएं तत्काल दूर करें मुख्यमंत्री  साय ने लोक … Read more

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों को सुविधा, सुबह-शाम आसान हुआ सफर

रायपुर गांव से काम पर जाना हो, बच्चों को स्कूल-कॉलेज पहुंचना हो या किसी जरूरी काम से बाहर निकलना हो, नियमित परिवहन सुविधा ग्रामीण जीवन की महत्वपूर्ण जरूरत है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने राजपुर तहसील के ग्राम सिधमा के ग्रामीणों की इसी जरूरत को पूरा किया है। गांव तक बस पहुंचने से अब रोजगार के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों के साथ विद्यार्थियों का सफर भी आसान हुआ है। पहले बस पकड़ने के लिए दूसरे गांव काकना तक जाना पड़ता था, लेकिन अब सुबह और शाम गांव से ही बस की सुविधा मिल रही है। ग्राम सिधमा निवासी ज्ञानेश्वर बर्तनों में पॉलिश करने का काम करते हैं। रोजगार के सिलसिले में उन्हें लगभग रोज ही आना-जाना पड़ता है। गांव में बस सुविधा नहीं होने के कारण पहले उन्हें बस पकड़ने के लिए काकना जाना पड़ता था। वहां तक पहुंचने के लिए बाइक या अन्य साधन की व्यवस्था करनी होती थी। इससे अतिरिक्त समय लगता था और रोजमर्रा के सफर में परेशानी भी होती थी। अब गांव से ही मिल रही बस, काकना जाने की परेशानी हुई कम मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू होने के बाद ज्ञानेश्वर की रोजमर्रा की आवाजाही आसान हुई है। वे बताते हैं कि अब गांव से ही सुबह और शाम बस मिल रही है। इससे काम के लिए नियमित आने-जाने में सहूलियत हुई है और बस पकड़ने के लिए पहले दूसरे गांव तक जाने की जरूरत कम हुई है। बस सेवा का लाभ केवल कामकाजी ग्रामीणों तक सीमित नहीं है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी भी इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। गांव तक नियमित परिवहन साधन पहुंचने से शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवागमन अधिक सुविधाजनक हुआ है। रोजगार के लिए रोजाना सफर करने वाले ज्ञानेश्वर को मिली राहत ज्ञानेश्वर जैसे ग्रामीणों के लिए यह बस सेवा विशेष रूप से उपयोगी है, जिनका रोजगार नियमित आवाजाही पर निर्भर है। पहले काम पर निकलने से पहले काकना तक पहुंचने के लिए अलग साधन की व्यवस्था करनी पड़ती थी। अब गांव से ही बस मिलने से उनके सफर की एक बड़ी परेशानी कम हुई है। सुबह और शाम बस की उपलब्धता से ग्रामीण अपनी दिनचर्या के अनुसार आवागमन कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों को भी स्कूल-कॉलेज आने-जाने के लिए परिवहन का साधन मिला है। गांव तक बस पहुंचने से शिक्षा और रोजगार की राह हुई आसान ज्ञानेश्वर ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि गांव तक बस पहुंचने से लोगों के लिए काम, शिक्षा और जरूरी कार्यों से आने-जाने की राह आसान हुई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सिधमा की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि गांव तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी उपयोगी हो सकती है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सिधमा के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ रोजगार और पढ़ाई के लिए नियमित सफर भी आसान हुआ है।

रसोइयों के मानदेय भुगतान की मुश्किल होगी दूर, 117 करोड़ के पुनर्विनियोजन को वित्त विभाग की मंजूरी

रायपुर  राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत रसोइयों के मानदेय की टॉपअप राशि के लिए 117 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन को प्रशासकीय स्वीकृति दी है। विभागीय आदेश के अनुसार, केंद्र प्रवर्तित योजनाओं का संचालन जुलाई 2026 से एसएनए-स्पर्श के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत रसोइयों के मानदेय भुगतान के लिए टॉपअप राशि के लिए पृथक से राज्य आयोजना मद  में प्रावधान है। राज्य आयोजना मद में प्रावधानित राशि को केंद्र प्रवर्तित योजना के राज्यांश मद में पुनर्विनियोजित किया गया है। आदेश में संबंधित बजट शीर्षों के बीच 102 करोड़, 10 करोड़ और 5 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन का विवरण दिया गया है। यह पहले से प्रावधानित राशि का पुनर्विनियोजन है। विभाग ने राशि का मदवार व्यय विवरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

राज्योत्सव स्थल का अधिकारियों ने किया निरीक्षण, तैयारियों एवं व्यवस्थाओं के संबंध में की चर्चा

रायपुर  नवा रायपुर अटल नगर  स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर मेला ग्राउंड में आयोजित होने वाले राज्योत्सव की तैयारियों  के संबंध में मुख्य सचिव श्री विकासशील के निर्देश पर पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ एस भारतीदासन एवं  कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह  सहित अन्य  अधिकारियों ने  स्थल निरीक्षण कर जायजा लिया।  इस दौरान  सीएसआईडीसी के एमडी श्री विश्वेश झा, नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, पर्यटन मंडल के एमडी श्री सौमिल रंजन चौबे, एस पी ग्रामीण श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, एडीएम श्री उमाशंकर बंदे, एनआरडीए के प्रतिनिधि सहित संबंधित विभागों के अधिकारीगण  उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान आगामी राज्योत्सव के आयोजन की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों ने एग्जिबिशन सेंटर, सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल, शिल्पग्राम, प्रशासनिक भवन, हेलीपैड, पार्किंग जोन, फूड जोन, फन जोन, मुख्य प्रवेश द्वार एवं बस स्टॉप सहित विभिन्न स्थलों को  निर्धारित समय पूर्व सुव्यवस्थित करने  के संबंध चर्चा की। इस दौरान आयोजन स्थल पर जेसीबी के माध्यम से  समतलीकरण कार्य करने, पार्किंग व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, सिटिंग अरेंजमेंट तथा विभिन्न स्टालों की तैयारियों के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई। सचिव डॉ एस भारतीदासन एवं कलेक्टर डॉ गौरव सिंह से एस पी ग्रामीण श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने राज्योत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग जोन में वाहनों की सुचारू आवाजाही तथा कार्यक्रम स्थल पर भीड़ प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं के संबंध में  विस्तार से चर्चा की । उन्होंने मुख्य प्रवेश द्वार एवं निकास मार्गों, पार्किंग क्षेत्रों तथा आगंतुकों के सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक पुलिस बल की तैनाती एवं यातायात व्यवस्था के बेहतर समन्वय पर चर्चा की। अधिकारियों ने राज्योत्सव में आने वाले नागरिकों एवं आगंतुकों की सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से सुव्यवस्थित करने तथा निर्धारित समय-सीमा में तैयारियां पूर्ण करने पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान आयोजन स्थल की समस्त व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा तैयारियों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

उप मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों और युवाओं से किया संवाद

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने आज राजनांदगांव के पद्म गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में खिलाड़ियों और युवाओं से संवाद किया। वे जल, जन एवं सेवा संकल्प यात्रा के अभिनंदन और स्वागत कार्यक्रम में भी शामिल हुए।  उप मुख्यमंत्री  साव ने खिलाड़ियों को निरंतर मेहनत, अनुशासन, एकाग्रता और समर्पण के साथ आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव की पहचान खेल नगरी के रूप में है और यहां की खेल प्रतिभाओं ने प्रदेश एवं देश का नाम गौरवान्वित किया है। एक खिलाड़ी की सबसे बड़ी विशेषता एकाग्रता होती है। खिलाड़ी को अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह केंद्रित और अनुशासित रहना चाहिए।  उन्होंने खिलाडिय़ों से कहा कि वे खेल भावना के साथ अपनी प्रतिभा को निखारें और आने वाले समय में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें। उन्होंने छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियां विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। कबड्डी में संजू देवी ने एशियन गेम्स-2026 में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने बताया कि संजू देवी बिलासपुर की बहतराई कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने जूनियर महिला हॉकी एशिया कप विजेता टीम की सदस्य छत्तीसगढ़ की बेटियों गीता यादव और मधु सिदार तथा कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। छत्तीसगढ़ में पहली बार हो रही सरकार द्वारा प्रायोजित हॉकी लीग उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेल और खिलाडिय़ों की तरक्की एवं बेहतरी के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में पहली बार राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित हॉकी लीग का आयोजन किया जा रहा है। यह लीग 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक आयोजित होगी। लीग के लिए लगभग 400 खिलाडिय़ों ने पंजीयन कराया है, जिनमें से 223 खिलाडिय़ों ने पहले दिन के ट्रायल में हिस्सा लिया है। चयन प्रक्रिया के बाद छह टीमें गठित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव की टीम का नाम यहां की पहचान संस्कारधानी के नाम पर रखा गया है। इसी प्रकार विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक एवं स्थानीय पहचान को टीमों के नाम से जोड़ा गया है। हॉकी लीग में छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति एवं पहचान को भी विशेष महत्व दिया गया है।  खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने योजनाबद्ध प्रयास उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलो इंडिया सहित विभिन्न माध्यमों से खेल और खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने का कार्य किया जा रहा है। विकसित भारत के लक्ष्य में आर्थिक विकास के साथ खेल सहित प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत को खेलों के क्षेत्र में भी विश्व के अग्रणी देशों में शामिल करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।  कार्यक्रम में वड़नगर-वाराणसी सेवा संकल्प अभियान यात्रा के तहत राजनांदगांव पहुंचे बाइकर्स का जोरदार स्वागत किया गया। उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि गुजरात के वड़नगर से निकली यह सेवा यात्रा प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की जन्मस्थली से जुड़ी है। उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं का स्वागत करते हुए सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढऩे का आह्वान किया। सांसद  संतोष पाण्डेय ने कार्यक्रम में कहा कि वड़नगर से वाराणसी तक की यह यात्रा सेवा, आस्था और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है। उन्होंने यात्रा में शामिल सभी सेवा यात्रियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यात्रा की भारतीय परंपरा में विशेष महत्ता रही है। सेवा और सद्भावना के उद्देश्य से निकली इस यात्रा से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचता है।  उन्होंने यात्रियों को मां बम्लेश्वरी सहित छत्तीसगढ़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया तथा उनकी यात्रा की सफलता की कामना की। उन्होंने युवाओं और खिलाडिय़ों से संवाद करते हुए उनसे अपने अनुभव साझा करने तथा सेवा एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। महापौर  मधुसूदन यादव ने भी युवाओं और खिलाड़ियों को संबोधित किया। सेवा संकल्प यात्रा के प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद  राजेश शुक्ला, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष  सचिन बघेल, राजगामी संपदा न्यास की अध्यक्ष मती पूर्णिमा साहू,  कोमल सिंह राजपूत,  सौरभ कोठारी और मती गीता साहू सहित जनप्रतिनिधियों, खिलाड़ियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भागीदारी की।

श्री गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के सप्तम दिवस मुख्यमंत्री योगी ने श्रद्धालुओं को किया संबोधित, अंत में किया पूजन और आरती

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सनातन धर्म भारत का मूल धर्म है। अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज की समरसता को जिन्होंने नहीं समझा, वे उत्तर प्रदेश और भारत को भी नहीं समझ पाएंगे। भारतीयों की कमी यह रही कि हमने स्वयं को विस्मृत कर दिया, जबकि दुनिया जब अंधकार में जी रही थी, तब भारत के पास सुसभ्य, सुसंस्कृत और समृद्ध परंपरा मौजूद थी।   मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के सप्तम दिवस श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में भीषण आपदा से जनजीवन प्रभावित होने के बावजूद यहां कथा अनवरत चलती रही। श्रद्धालुओं का आगमन भी नहीं रुका। आपदा भी उनके मार्ग में बाधक नहीं बन पाई, यही भारत की पहचान है।   मुख्यमंत्री योगी ने व्यासपीठ से कथा सुना रहे मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य का आभार जताया। कहा कि सात दिनों तक उन्होंने कथा के साथ समसामयिक और ज्वलंत विषयों पर होने वाली गोष्ठियों में भी मार्गदर्शन दिया। उनके संदेश व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।   गौ संरक्षण में समाज भी निभाए जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सनातन की पहचान गौ माता में है। भारतीय परंपरा में पहला ग्रास गौ माता और अंतिम ग्रास श्वान के लिए निकालने की व्यवस्था थी। इसका पालन होता तो गौवंश सड़कों पर नहीं घूमता और निराश्रित कुत्ते राहगीरों को अपना शिकार नहीं बनाते।   उन्होंने भारतीय नस्ल के गोवंश के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार 7,700 से अधिक गोआश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक गोवंश का पालन कर रही है। किसान अपने घर में निराश्रित गोवंश रखता है तो प्रति गोवंश 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। चार गोवंश रखने पर यह राशि छह हजार रुपये प्रतिमाह होगी।   कुपोषित बच्चे वाले परिवार को गोआश्रय स्थल से ब्याही गाय देने के साथ उसके पालन के लिए भी प्रतिमाह 1,500 रुपये देने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि घर में स्थान नहीं होने पर लोग गोशाला में गाय गोद लेकर उसके संरक्षण में सहयोग कर सकते हैं।   प्राकृतिक खेती से जुड़ने का आह्वान मुख्यमंत्री योगी ने रासायनिक खाद, केमिकल और पेस्टिसाइड के अत्यधिक प्रयोग को खाद्यान्न के प्रदूषित होने से जोड़ते हुए गौ आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष से एक वर्ष में गरीबों के उपचार के लिए 1,400 करोड़ रुपये देने पड़े हैं। यह आयुष्मान कार्ड पर खर्च होने वाली राशि से अलग है।   उन्होंने भारतीय गोवंश के गोबर और गोमूत्र से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार ने गोवंश संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाया है, लेकिन दूध लेने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ने वालों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सरकार के प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।   महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ की स्मृति में कथा मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पावन स्मृति में गोरखनाथ पीठ पर कथा का आयोजन होता है। उन्होंने यजमानों, श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई दी। संबोधन के बाद मुख्यमंत्री योगी ने पूजन एवं आरती की।   ये रहे मौजूद कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल देवाचार्य, बाबा मस्तनाथ पीठ रोहतक के महंत बालकनाथ समेत अन्य संतजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में 26 अक्टूबर से सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का होगा आयोजन

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सभी शासकीय विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग (नई दिल्ली) के निर्देशों के अनुपालन में यह अभियान प्रदेशभर में 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा। इस वर्ष के जागरूकता अभियान की मुख्य थीम ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ निर्धारित की गई है। शपथ ग्रहण समारोह सप्ताह के पहले दिन  26 अक्टूबर 2026 को प्रातः 11 बजे प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार के खिलाफ तथा पूरी ईमानदारी व सत्यनिष्ठा से कार्य करने की शपथ लेंगे। इस शपथ का मुख्य लक्ष्य जीवन के हर क्षेत्र में ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की भावना विकसित करना और रिश्वत के लेन-देन से पूरी तरह दूर रहने का संकल्प लेना है। साथ ही नैतिक मूल्यों और कानून के शासन को मजबूत कर एक भ्रष्टाचार-मुक्त वातावरण का संदेश देना है। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के मुताबिक, सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट एक निर्धारित प्रपत्र में तैयार कर केंद्रीय सतर्कता आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।

नई दिल्ली राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए मंत्रीरामविचार नेताम

रायपुर  छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री  रामविचार नेताम आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए। 28 और 29 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्रियों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। भारत सरकार के कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान एवं राज्यमंत्री की उपस्थिति में आगामी रबी फसल को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में कृषि मंत्री  नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के विभिन्न घटकों का प्रभावी क्रियान्वयन करने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक किसानों को कृषि योजनाओं का लाभ पहुंचाना, कृषि की लागत को कम करना और किसानों की आय में वृद्धि के लिए प्रभावी कदम उठाना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए 182 करोड़ रुपए का आवंटन जारी किया गया और इसका पत्र भी प्रदान किया गया। उन्होंने प्रदेश के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह राशि छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कृषि मंत्री  नेताम ने कहा कि इस राशि से प्रदेश में चलाए जाने वाले ’विकसित संकल्प अभियान‘ को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही आगामी समय में ‘खेत बचाओ अभियान‘ के माध्यम से किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। दलहन और तिलहन के रकबे को बढ़ाने, कृषि उत्पादन में वृद्धि करने तथा किसानों को बेहतर उपज दिलाने के लिए भी इस सहायता का प्रभावी उपयोग किया जाएगा। मंत्री  नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास है कि केंद्र सरकार की योजनाओं और राज्य की कृषि नीतियों के बेहतर समन्वय से प्रदेश के किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिले। कृषि क्षेत्र में नई तकनीक, कम लागत और बेहतर उत्पादन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त यह सहायता छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को और गति प्रदान करेगी तथा प्रदेश को कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने में सहयोगी होगी। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने की परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए प्रदेश में सुरक्षित, सुगम और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को न्यूनतम करने के लिए सभी संबंधित विभाग मिशन मोड में समन्वित रूप से कार्य करें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली प्रत्येक संभावित जनहानि को रोकना होना चाहिए। इसके लिए दुर्घटना से पहले रोकथाम और दुर्घटना के बाद त्वरित सहायता एवं उपचार—दोनों स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करनी होगी। उन्होंने ‘जीरो फेटेलिटी’ के लक्ष्य की दिशा में परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग और नगरीय निकायों सहित सभी संबंधित विभागों को विस्तृत और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से जुड़ा विषय है। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित सड़क संरचना, यातायात नियमों का प्रभावी पालन, वाहनों की तकनीकी फिटनेस, प्रशिक्षित चालक और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता जैसे सभी पहलुओं पर एक साथ कार्य करने की आवश्यकता है। ब्लैक स्पॉट पर तेजी से हों सुधारात्मक कार्य मुख्यमंत्री  साय ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां आवश्यक सुधारात्मक एवं सुरक्षात्मक उपाय प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों को तेजी से पूरा करने तथा दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटना होने के बाद शुरुआती समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। घायल व्यक्ति तक जितनी जल्दी सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुंचेगी, जीवन बचाने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने दुर्घटना की सूचना, एम्बुलेंस की उपलब्धता, नजदीकी अस्पताल तक पहुंच और उपचार की पूरी व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएं नागरिक, योजनाओं का हो व्यापक प्रचार मुख्यमंत्री  साय ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम-राहत योजना और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों तक यह संदेश प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए कि सड़क दुर्घटना देखकर घबराएं नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आएं। बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के अंतर्गत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर सहायता करने वाले नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता से सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार दिलाने में बड़ी मदद मिल सकती है। दूरस्थ गांवों तक पहुंचे सार्वजनिक परिवहन, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का होगा विस्तार मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की समीक्षा करते हुए इसे और विस्तार देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे ग्रामीण, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता से चिन्हित किया जाए, जहां अभी नियमित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण आधार है। दूरस्थ गांव को बस सेवा से जोड़ने का अर्थ वहां के लोगों के लिए अनेक नए अवसरों के द्वार खोलना है। शासन का प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी सुगम, सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक परिवहन सेवा पहुंचे। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधा से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने और आवश्यकता के अनुसार योजना का विस्तार करने के निर्देश दिए। कोंटा-जगरगुंडा बस सेवा से दुर्गम क्षेत्र में आसान हुआ सफर बैठक में दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के सकारात्मक प्रभावों की भी जानकारी दी गई। कोंटा से जगरगुंडा के बीच पहली बार प्रारंभ हुई बस सेवा से क्षेत्र के नागरिकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिली है। बताया गया कि अंदरूनी और सुदूर क्षेत्रों से इस यात्रा में पहले लगभग छह घंटे तक का समय लग जाता था। बस सेवा प्रारंभ होने के बाद यही सफर लगभग 45 मिनट में पूरा हो रहा है। इससे स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी विकास की गति को तेज करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जिन क्षेत्रों में वर्षों तक सार्वजनिक परिवहन सीमित रहा है, वहां नियमित बस सेवा आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। पर्यटन मिशन से जुड़े परिवहन विभाग, पर्यटन स्थलों तक बढ़े कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में पर्यटन विकास की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन स्थलों तक सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित करने में परिवहन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पर्यटन मिशन के साथ परिवहन विभाग की भूमिका को प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन और कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए। पर्यटकों के लिए सुविधाजनक आवागमन की व्यवस्था से प्रदेश के पर्यटन स्थलों तक पहुंच बढ़ेगी। इसका लाभ स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों तथा रोजगार के अवसरों को भी मिलेगा। वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को बनाएं और प्रभावी मुख्यमंत्री  साय ने वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था की समीक्षा करते हुए इसे और अधिक प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की वर्तमान व्यवस्था और नए केंद्रों की स्थापना के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाहनों की तकनीकी स्थिति का निष्पक्ष और प्रभावी परीक्षण सड़क … Read more

ग्रेड-पे की मांग पर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन का बड़ा फैसला

रायपुर. छत्तीसगढ़ में नर्सिंग संवर्ग ने ग्रेड पे वेतनमान पर बने प्रस्ताव को लागू कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने चेतावनी दी है कि यदि दीपावली से पहले शासन ने ग्रेड पे संबंधी प्रस्ताव को लागू नहीं किया तो 18 नवंबर से प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग संवर्ग अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार, संगठन लंबे समय से अपनी एक सूत्रीय मांग ग्रेड पे वेतनमान पर बने प्रस्ताव को लागू करने की मांग को लेकर संघर्षरत है। इसी क्रम में 28 सितंबर को कोरबा, अंबिकापुर और महासमुंद मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालयों के नर्सिंग संवर्ग ने अस्पताल परिसर में दो घंटे का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। 29 सितंबर को भी दो घंटे प्रदर्शन किया जाएगा। इससे पहले रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय परिसर में 9, 10 और 11 सितंबर को भी नर्सिंग कर्मचारियों ने दो घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन किया था। संगठन का कहना है कि लगातार विरोध और मांग उठाए जाने के बावजूद शासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इन मेडिकल कॉलेजों में भी होगा प्रदर्शन एसोसिएशन ने बताया कि आने वाले सप्ताह में जगदलपुर, कांकेर और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग संवर्ग द्वारा भी सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का दावा है कि प्रदेशभर का नर्सिंग संवर्ग ग्रेड पे के मुद्दे पर शासन से नाराज है। एसोसिएशन ने कहा है कि 18 नवंबर से प्रस्तावित आंदोलन में सभी 10 मेडिकल कॉलेजों के नियमित, संविदा और डेली वेजेस पर कार्यरत नर्सिंग कर्मचारी शामिल होंगे। 50 दिन पहले आंदोलन की सूचना देने की तैयारी संगठन के मुताबिक, अनिश्चितकालीन आंदोलन की पूर्व सूचना देने के लिए स्कूटी रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की अनुमति मांगी गई है। एसोसिएशन का कहना है कि आंदोलन की सूचना करीब 50 दिन पहले देने की प्रक्रिया की जा रही है। 2018 में हुआ था 18 दिनों का आंदोलन नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अपने पुराने आंदोलन का भी हवाला दिया। संगठन के अनुसार, 2018 में नर्सेज संघ ने 18 दिनों तक प्रदेशव्यापी आंदोलन किया था, जिसमें दो दिनों तक नर्सिंग कर्मचारियों को जेल में भी रखा गया था। एसोसिएशन का दावा है कि उस समय उनकी मांगों पर शासन की ओर से अनुशंसा की गई थी, लेकिन बाद में जून 2021 में उसे अमान्य कर दिया गया। संगठन ने पीजी स्टूडेंट्स के स्टाइपेंड में वर्ष 2019, 2023 और 2026 में लगातार तीसरी बार वृद्धि के आदेश जारी होने का भी उल्लेख किया है। नर्सिंग संवर्ग न्याय चाहता है : प्रदेश अध्यक्ष नर्सिंग आफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत ने कहा कि चिकित्सकों को अस्पताल का मस्तिष्क और नर्सिंग स्टाफ को रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। ऐसे में नर्सिंग संवर्ग के साथ भेदभाव की नीति न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा नर्सिंग समुदाय अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है और मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 18 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए तैयार है।