samacharsecretary.com

स्कूल में बर्बरता! मोबाइल चलाने पर छात्र की बेरहमी से पिटाई, बाल आयोग की अध्यक्ष पहुंचीं नवोदय

रायपुर नवोदय विद्यालय माना में शिक्षक द्वारा एक छात्र को पीटे जाने का मामला बाल आयोग तक पहुंच गया है। बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने हॉस्टल में बच्चों के साथ क्रूरता के मामले की सूचना मिलने के बाद उस विद्यालय का तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने पीड़ित बच्चों से मुलाकात की और मामले की पूरी जानकारी ली। प्रारंभिक रूप में यह पाया गया कि एक शिक्षक ने बच्चों के साथ मारपीट की है। पीड़ित बच्चों ने बताया कि विद्यालय के ज्योग्राफी शिक्षक ने मारा था। इस क्रूरता के कारण एक बच्चे के हाथ में मामूली फ्रैक्चर और पैर में चोटें आई हैं। पीड़ित बच्चे की स्थिति को देखते हुए विद्यालय की प्राचार्या ने तुरंत उसका एक्सरे कराया, जिसमें हाथ में फ्रैक्चर और पैर में चोट का खुलासा हुआ। बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए आयोग को इस मामले का संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच प्रभावित न हो, इसलिए दोषी शिक्षक को निलंबित करने की अनुशंसा की जा रही है। डॉ. शर्मा ने कहा कि "बच्चों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" उनके साथ बाल कल्याण समिति रायपुर के एक सदस्य भी शामिल हुई, ताकि मामले सही तरीके से जांच हो सके। आयोग ने आगे की कार्रवाई के लिए त्वरित कदम उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। यह है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, नवोदय विद्यालय माना में 10वीं के कुछ बच्चे रात के समय हॉस्टल में फोन चला रहे थे। वार्डन ने इसकी सूचना शिक्षक को दी। जिस पर शिक्षक ने गुस्से में आकर छात्रों के साथ मारपीट की। जिसमें एक छात्र के हाथ में गंभीर चोट आई। वार्डन और शिक्षक का कहना है कि स्कूल में फोन लाने की अनुमति नहीं है, साथ ही बच्चे फोन में गलत चीजें देख रहे थे। क्या बोले आरोपी शिक्षक वहीं इस मामले में आरोपी शिक्षक डीके सिंह ने कहा कि मैं कोई अपराधी नहीं हूं। वार्डन ने छात्रों के रात एक बजे मोबाइल चलाने की बात बताई। मुझे देखते ही छात्र मोबाइल फेंककर भागने की कोशिश करने लगे। मैंने मोबाइल हास्टल में कहां से आया है। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एक छात्र को मार दिया। मुझे मारना नहीं चाहिए। छात्र हमारे संरक्षण में रहते हैं। इनकी देखभाल करना और अनुशासित बनाना हमारी जिम्मेदारी है। हम भी छात्रों से उनके माता-पिता की तरह प्यार करते हैं। अनुशासनहीनता करने पर कठोर निर्णय लेना पड़ता है।

भारी बाढ़ का असर, गोदावरी के उफान से NH-163 पूरी तरह बंद

बीजापुर लगातार हो रही बारिश और गोदावरी नदी के उफान ने आवागमन पर बड़ा असर डाला है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित टेकलगुड़म नाला में बाढ़ का पानी चढ़ने से बीजापुर से हैदराबाद को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-163 पिछले 24 घंटे से पूरी तरह बंद है। बर्तमान स्थिति में नाले पर पानी का बहाव कम नहीं हुआ था। सूत्रों के अनुसार सड़क के ऊपर लगभग चार फीट पानी बह रहा है, जिससे मार्ग को पार करना खतरनाक हो गया है। इस कारण भोपालपटनम-तारलागुड़ा और एटूनगरम-हैदराबाद मार्ग भी बाधित हैं। मार्ग बंद होने से दोनों ओर छोटी-बड़ी गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं। कई वाहन चालक और यात्री रातभर सड़क किनारे फंसे रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदावरी नदी का जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है और फिलहाल कमी के आसार नहीं हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन पानी का बहाव कम हुए बिना यातायात बहाल करना संभव नहीं है। इस वजह से बीजापुर से हैदराबाद जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी जा रही है। गोदावरी के बढ़ते जलस्तर और नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल सभी की नजरें पानी घटने पर टिकी हैं, ताकि जल्द से जल्द परिवहन सामान्य हो सके। गौरतलब है कि, पिछले कुछ दिनों से बस्तर संभाग में भारी बारिश हो रही है। जिस कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है। 2 दिन पहले संभाग के कई गावों का संपर्क मख्यालयों से कट गया था। दंतेवाड़ा में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई थी।

‘मन की बात’ हर माह देती है नई प्रेरणा, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी करें योगदान : मुख्यमंत्री साय

रायपुर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 125वीं कड़ी का सीधा प्रसारण आज नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद उद्योग एवं व्यापार परिसर के कन्वेंशन सेंटर में हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक इंद्र कुमार साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण और नागरिक उपस्थित थे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की घड़ी में देशवासियों द्वारा एक-दूसरे की सहायता करना भारत की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय जो सहयोग और एकजुटता दिखाई देती है, वही भारत की संस्कृति और सामूहिक चेतना को परिभाषित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में खेलों को न केवल स्वास्थ्य बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी आधार बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि खेलकूद में सक्रिय भागीदारी कर अपने जीवन और देश दोनों को ऊर्जावान बनाएं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि ‘मन की बात’ हर माह प्रदेशवासियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक सोच और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करता है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि कौशल विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े क्षेत्रों में हुए सहयोग और निवेश से राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ में कौशल विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू होगा। राज्य की रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाए। उन्होंने कहा कि सरकार और जनता के साझा प्रयासों से राज्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का संदेश हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। हमें सामूहिक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर एक समृद्ध और स्वच्छ छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

आंगनबाड़ी और स्कूल में गैस चूल्हे से भोजन के साथ बनने लगी है सेहत

खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवई का मिल रहा स्वाद रायपुर. आंगनबाड़ियों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब पहले से बहुत खुश हैं। समय पर स्कूल और आंगनबाड़ी खुल रहे हैं। वहां मिलने वाले नाश्ते खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया, सेवई तथा भोजन से उन्हें ऊर्जा भी मिल रही है। गैस सिलेण्डर की व्यवस्था से आंगनबाड़ियों और स्कूलों में भोजन पकाने के दौरान उत्पन्न होने वाले धुएं से भी मुक्ति मिल गई है। इससे रसोईयों के साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी राहत मिली है।   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कोरबा जिले के सभी आंगनबाड़ियों तथा प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सुबह के नाश्ते की व्यवस्था डीएमएफ से की जा रही है। नाश्ते और सिलेण्डर की व्यवस्था ने आंगनबाड़ी तथा विद्यालय आने वाले बच्चों की रूचि बढ़ा दी है। अलग-अलग दिनों में निर्धारित मेनू के आधार पर उन्हें नाश्ता और भोजन परोसा जा रहा है। नाश्ते में खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा व भजिया दी जा रही है। विद्यार्थी नाश्ता खाने बहुत उत्सुक रहते हैं और समय पर विद्यालय भी पहुंच जाते हैं।  पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम धोबघाट प्राथमिक शाला में कक्षा पहली की छात्रा प्रियांशी, छात्र विनय, कक्षा दूसरी की नेहा, तीसरी की रोशनी और नर्मदा तथा कक्षा पांचवी के भूपेश ने बताया कि अब नाश्ते में अलग-अलग दिनों में उन्हें अलग-अलग खाने को मिलता है। खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवईयां मिलती है। विद्यालय में प्रधान पाठक श्री चैनसिंह पुहुप ने बताया कि नाश्ते का प्रभाव बच्चों पर पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि सिलेण्डर की व्यवस्था होने से जल्दी खाना पक जाता है। नाश्ता हो या मध्यान्ह भोजन दोनों को पकाने में आसानी हो गई है।  कोरबा विकासखण्ड के दूरस्थ गांव लामपहाड़ में पहाड़ी कोरवा बच्चों में भी नाश्ते का प्रभाव पड़ा है। आंगनबाड़ी केंद्र हो या स्कूल दोनों जगह उनकी उपस्थिति नजर आती है। पहले सुबह से ही अपने परिजनों के साथ जंगल की ओर प्रस्थान कर जाने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चे अब समय से पहले स्कूल पहुंचते हैं। लामपहाड़ आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता सुशीला तिर्की और सहायिका सुलोचनी यादव बताती है कि केंद्र में ज्यादातर बच्चे पहाड़ी कोरवा जनजाति के हैं। कई बच्चों को घर पर पर्याप्त आहार उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में नाश्ता और भोजन उनके शारीरिक विकास के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह दस बजे के आसपास नाश्ता देने के साथ ही दोपहर को एक बजे भोजन दिया जाता है।  आंगनबाड़ी में आने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चों सम्पति, रवीना, सुखमनिया, सुशील और कविता ने बताया कि उन्होंने सुबह नाश्ते में दलिया खाया और दोपहर को दाल, भात और सब्जी खाई है। हर दिन गरम भजिया, पोहा, खीर, पूड़ी, उपमा का नाश्ता मिलता है और इसे खाना भी अच्छा लगता है। यहां भोजन पकाने वाली सहायिका सुलोचनी यादव का कहना था कि पहले बारिश के दिनों में चूल्हा जलाना बहुत मुश्किल हो जाता था। सूखी लकड़ियों की व्यवस्था करना, फिर चूल्हा जलाकर धुएं के बीच खाना पकाना बहुत परेशानी वाला काम था। अब तो गैस से मिनटों में बिना परेशानी के खाना बनने लगा है।  लामपहाड़ के प्राथमिक और माध्यमिक शाला में भी विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की उपस्थिति तथा नाश्ते व मध्याह्न भोजन में रूचि नजर आने लगी है। कक्षा चौथी की देवशीला एवं फूलमनिया ने बताया कि स्कूल में मिलने वाला नाश्ता उन्हें अच्छा लगता है। पाली विकासखंड के दूरस्थ गांव पण्डोपारा में प्राथमिक शाला में लगभग 25 बच्चे हैं। नये भवन में आंगनबाड़ी संचालित है। दोनों जगह बच्चों को समय पर नाश्ता और भोजन मिलता है। गांव में रहने वाली पूजा पण्डो ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। एक आंगनबाड़ी में और दो स्कूल में पढ़ाई करते हैं। तीनों को सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना मिलता है। पहले वे बहाना बनाकर स्कूल जाने में आनाकानी करते थे, पर अब नियमित जाते हैं। स्थानीय प्रशासन ने सभी स्कूलों में नाश्ते का मीनू लिखाने तथा स्थानीय उपलब्धता और विद्यार्थियों की पसंद के अनुरूप नाश्ता परोसने के निर्देश दिए हैं। सवा दो लाख बच्चे हो रहे लाभान्वित करीब एक साल पहले 14 अगस्त 2024 को कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा और कोरबा विकासखंड के शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की थाली में गरम नाश्ता परोसने का सिलसिला प्रारंभ किया गया है। ढाई माह तक नाश्ता परोसने और इससे हुए सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए इसे जिले के सभी विकासखण्डों में प्रारंभ करने के निर्देश दिए। पिछले साल दीपावली अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही कोरबा, पाली, करतला और कटघोरा के शेष स्कूलों में भी नाश्ता देना प्रारंभ किया गया। जिले के सभी आंगनबाड़ियों, स्कूलों और छात्रावासों में सिलेण्डर की व्यवस्था कर प्रतिमाह गैस रिफलिंग की सुविधा भी प्रदान की गई है।  कोरबा जिले के 2602 आंगनबाड़ियों में छह माह से लेकर तीन वर्ष तक के 48 हजार 217 और तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 56 हजार 477 बच्चे दर्ज हैं। इसी तरह 1502 प्राइमरी स्कूलों में 73 हजार 810 और 537 मिडिल स्कूलों में 47 हजार 122 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ये सभी बच्चे नाश्ते और मध्यान्ह भोजन से लाभान्वित हो रहे हैं। नाश्ता और भोजन पकाने के लिए डीएमएफ से गैस सिलेण्डर की व्यवस्था की गई है।  

मानसून अपडेट: प्रदेश में दर्ज हुई 874 मि.मी. औसत वर्षा

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 874.0 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1265.6 मि. मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 430.6 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 752.2 मि.मी. बलौदाबाजार में 616.2 मि.मी. गरियाबंद में 733.6 मि.मी. महासमुंद में 646.5 मि.मी. और धमतरी में 782.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 833.1 मि.मी. मुंगेली में 817.0 मि.मी. रायगढ़ में 1040. 3 मि.मी. सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 7138 मि.मी. जांजगीर-चांपा में 1020.0 मि.मी. सक्ती में 905. 9 मि.मी. कोरबा में 8440 मि.मी. और गोरेला-पेण्ड्रा-मरवाडी 847.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। I दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 713.8 मि.मी. कबीरधाम में 613.5 मि.मी. राजनांदगांव में 784.6 मि. मी. मोडला मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1091.0 मि.मी. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 654.6 मि. मी. और बालोद में 940.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 6226 मि.मी. सूरजपुर में 959.9 मि.मी. जशपुर में 863.8 मि.मी. कोरिया में 982.6 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 878.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 1248.2 मि.मी. कोंडागांव में 8042 मि.मी. कांकेर में 1018.4 मि.मी. नारायणपुर में 1110.3 मि.मी. दतेवाड़ा में 1195.2 मि.मी. सुकमा में 941.1 मि.मी. और बीजापुर में 1170.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

सुरक्षा बलों की कामयाबी: नक्सलियों के ठिकाने से मिली अहम सामग्री

गरियाबंद गरियाबंद जिले में नक्सलियों के द्वारा जंगल में छुपा कर रखे गए सामग्रियों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ द्वारा बरामद कर उसे नष्ट किय गया है. प्राप्त गोपनीय खुफ़िया सूचना के आधार पर केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की 65वीं बटालियन द्वारा 30 अगस्त को गरियाबंद जिले के थाना-मैनपुर अंतर्गत भालुडिग्गी वन क्षेत्र में एक “सी” स्तर का एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन चलाया गया. इस अभियान में एफ/65 एवं जी/65 कंपनियों की संयुक्त टुकड़ी सम्मिलित रही. सर्चिंग अभियान के दौरान कुल्हड़ीघाट एवं बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा भारी मात्रा में छिपाकर रखी गई उपयोगी सामग्री बरामद की गई, जिसमें सिलाई मशीन, पिट्ठू बैग, प्लास्टिक के जूते, तिरपाल, दवाइयां दैनिक उपयोग की सामग्री राशन सामग्री शामिल थी. जिसे बरामद हुई तथा मौके पर ही नष्ट कर दी गई. इस प्रकार की बरामदगी से स्पष्ट होता है कि नक्सली संगठन अब भी जंगलों में अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए स्थानीय स्तर पर सामग्री एकत्र करने का प्रयास कर रहे हैं. सीआरपीएफ़ द्वारा चलाए जा रहे निरंतर ऑपरेशन से नक्सलियों की आपूर्ति श्रृंखला एवं छिपे रहने के साधनों को लगातार ध्वस्त किया जा रहा है. 65 वीं बटालियन सीआरपीएफ़ क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा कायम रखने के लिए स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन के सहयोग से नियमित एरिया डॉमिनेशन, सर्च एवं कॉम्बिंग ऑपरेशन संचालित करती रहेगी.

रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों को उप मुख्यमंत्री साव ने किया सम्मानित

  रेशम कृषि मेला-सह-मेरा रेशम, मेरा अभिमान कार्यक्रम का आयोजन रायपुर, उप मुख्यमंत्री तथा कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने आज छत्तीसगढ़ में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने रेशम कृषि मेला-सह-मेरा रेशम, मेरा अभिमान का शुभारंभ किया। उन्होंने कार्यक्रम में रेशम उत्पादक किसानों को चेक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। अपने उद्बोधन में श्री साव ने कहा कि मेरा रेशम, मेरा अभिमान कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक मशीनों के संबंध में जानकारी प्रदान करना, प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर हुए रेशम उत्पादन से जोड़ना ही नहीं है, बल्कि आमदनी बढ़ाना, आत्मनिर्भर बनाकर प्रदेश और देश को आर्थिक प्रगति की राह में आगे ले जाना भी है। अभी रेशम उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे नंबर पर है, इसे पहले पायदान पर लेकर जाना है। श्री साव ने इस आयोजन को मील का पत्थर बताते हुए इसमें सभी की सहभागिता को आवश्यक बताया। उन्होंने किसानों के प्रशिक्षण तथा मेरा रेशम, मेरा अभिमान कार्यक्रम की प्रगति के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास से एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की।      कोरबा के पाली विकासखंड में केंद्रीय रेशम बोर्ड- बुनियादी बीज का प्रगुणन एवं प्रशिक्षण केन्द्र में केरेबो-बुनियादी टसर रेशम कीट बीज संगठन, केन्द्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बिलासपुर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री साव ने रेशम उत्पादन को आमदनी का प्रमुख स्रोत बताते हुए कहा कि किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। किसान जितने सक्षम होते जाएंगे, हमारा प्रदेश और देश भी उतना ही सक्षम होगा। इस अभियान से किसानों को प्रशिक्षण की सुविधा मिलने के साथ ही रेशम उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। श्री साव ने रेशम उत्पादन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की बात कही। इसके लिए रेशम विभाग से जुड़े अधिकारियों को कार्यालय आकर समस्याओं को चिन्हित कराने को कहा। उप मुख्यमंत्री श्री साव और अन्य अतिथियों ने मेरा रेशम, मेरा अभिमान के पोस्टर का विमोचन भी किया। उन्होंने रेशम कृषि मेले में लगे स्टॉल्स का अवलोकन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल ने कहा कि हमारे जिले में बड़ी मात्रा में रेशम का उत्पादन होता है। यह रेशम कीमती होने के साथ ही किसानों के आय का प्रमुख जरिया भी है। रेशम उत्पादन से बहुत से लोगों को रोजगार भी मिला है। प्रधानमंत्री की मंशा है कि किसानों की आमदनी भी दोगुनी हो, ऐसे में स्थानीय किसानों को इससे जुड़कर आमदनी अर्जित करना होगा। पाली-तानाखार के विधायक श्री तुलेश्वर सिंह मरकाम ने कहा कि कोरबा की पहचान पहले से ही रेशम के पटल पर विश्व विख्यात है। यहाँ से बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं। मेरा रेशम, मेरा अभिमान स्थानीय किसानों के लिए लाभदायक होगा। कोरबा के कलेक्टर अजीत वसन्त, केंद्रीय रेशम बोर्ड रांची के निदेशक डॉ. एन.बी. चौधरी, बिलासपुर के डॉ. नरेन्द्र कुमार भाटिया, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर, महापौर संजू देवी राजपूत, नगर पंचायत पाली के अध्यक्ष अजय जायसवाल, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, डीएफओ कुमार निशांत, रेशम विभाग के सी.एस. नोन्हारे, डॉ. जयप्रकाश पाण्डेय, डॉ. हसनसाब नदाफ, डॉ. विनोद सिंह, बलभद्र सिंह भंडारी और कृषि महाविद्यालय अनुसंधान केन्द्र कटघोरा के डॉ. एस.एस.पोर्ते सहित रेशम विभाग से जुड़े वैज्ञानिक एवं अधिकारी, जनप्रतिनिधि गोपाल मोदी, डॉ. राजीव सिंह तथा आम नागरिकगण भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

कंवर समाज ने मुख्यमंत्री साय को दी बधाई, करमा तिहार में आने का न्योता

रायपुर, जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास से लौटने के उपरांत  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से कंवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री हरवंश मिरी एवं महासचिव श्री नकुल चंद्रवंशी के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास में भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशिल्या साय को बधाई दी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को आगामी भादो एकादशी पर्व पर आयोजित होने वाले करमा तिहार के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह आयोजन दिनांक 03 सितम्बर 2025 को नवा रायपुर, अटल नगर स्थित नवीन मुख्यमंत्री निवास परिसर में संपन्न होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज के उपाध्यक्ष थानसिंह दीवान, कोषाध्यक्ष बसंत दीवान, कार्यकारिणी सदस्य शिवकुमार कंवर, महानगर इकाई के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोहर पैंकरा, सचिव मनहरण चंद्रवंशी, सदस्य हेमलाल कंवर सहित युवा कंवर प्रभाग के युवा संरक्षक  तीरमेंद्रू सिंह कंवर एवं टुकेश कंवर भी उपस्थित थे।

किसानों को नैनो खाद के उपयोग के लिए किया जा रहा है जागरूक

  चालू खरीफ सीजन के लिए 7.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया के विरूद्ध 6.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया का वितरण 5.30 लाख बॉटल नैनो उर्वरक का भंडारण कर किसानों को 4.18 लाख बॉटल नैनो उर्वरक का किया गया वितरण रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेश के किसानों को हर संभव रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं रासायनिक उर्वरक की लागत में कमी लाने तथा डीएपी खाद की आपूर्ति में कमी को ध्यान में रखते हुए नैनो उर्वरक के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार द्वारा 14.62 लाख मीट्रिक टन विभिन्न रासायनिक खादों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य के विरूद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के विरूद्ध किसानों को 13.19 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया है। समितियों एवं निजी क्षेत्रों में भी यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। किसान भी उत्साह पूर्वक नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 25 अगस्त की स्थिति में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन एवं निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। भंडारण के विरूद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है, जबकि पिछले खरीफ सीजन वर्ष 2024 में 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया था। इसी तरह नैनो यूरिया का सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 बॉटल (500 मि.ली.) एवं निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140 बॉटल इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल  भंडारण किया गया है। वहीं नैनो डीएपी का सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 बॉटल तथा निजी क्षेत्र में 79 हजार 810 बॉटल इस तरह कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल भंडारण किया गया है। भंडारण के विरूद्ध नैनो यूरिया किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल और नैनो डीएपी 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल (500 मि.ली.) वितरित किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल (500 मि.ली.) नैनो यूरिया का वितरण किया गया है जिससे 2 हजार 617 मीट्रिक टन परंपरागत यूरिया की आपूर्ति के बराबर प्रभाव पड़ा। वहीं 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल (500 मि.ली.) नैनो डीएपी का वितरण किया गया जो 4 हजार 628 मीट्रिक टन परंपरागत डीएपी के बराबर है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नैनो उर्वरको का उपयोग परंपरागत उर्वरक भार को कम करने और आपूर्ति में संतुलन लाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि नैनो यूरिया उपयोग से 80 से 90 प्रतिशत पोषक तत्व प्राप्त होता है इसके साथ ही लागत मंे भी कमी आती हैं वहीं साथ ही पर्यावरण के अनुकूल होते है तथा प्रदूषण स्तर को घटाता है। नैनो यूरिया के उपयोग से परिवहन और भंडारण पर बचत होती है तथा पर्यावरण पर भी कम प्रभाव पड़ता है।       कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की एक एकड़ फसल के लिए आवश्यक 50 किलोग्राम ठोस डीएपी खाद के स्थान पर केवल 25 किलोग्राम ठोस डीएपी तथा एक आधा लीटर नैनो डीएपी की बोतल पर्याप्त होती है। कृषि विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर कृषि चौपालों एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान के माध्यम से किसानों को डेमो दिखाए गए और विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, नैनो उर्वरक से संबंधित पंपलेट, बैनर और पोस्टर सहकारी समितियों में प्रदर्शित किए गए हैं। कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारी द्वारा लगातार खेतों का भ्रमण कर रहे हैं और किसानों को नैनो उर्वरक के प्रयोग और इसके लाभों की जानकारी दे रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप किसान पूरे विश्वास के साथ अपनी धान की फसल में नैनो उर्वरक का उपयोग कर रहे हैं।

महानदी जल विवाद सुलझाने को आगे आए छत्तीसगढ़-ओडिशा, शुरू हुई साझा पहल

इंजीनियरों की टीम हर हफ़्ते करेगी काम, महानदी पर बनेगा समन्वय का नया ढाँचा नई दिल्ली, भारत की एक प्रमुख नदी, महानदी, जो छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है, लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई है। इस लंबे विवाद को बातचीत से हल करने के लिए 30 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई। इसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया। बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह समस्या बहुत पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और दोनों राज्यों के भले के लिए इसका समाधान मिल-बैठकर निकालना ही होगा। बैठक में यह भी तय हुआ कि सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियाँ, जिनमें इंजीनियर और विशेषज्ञ होंगे, हर हफ़्ते बैठक करेंगी। ये समितियाँ मुख्य मुद्दों को पहचानेंगी और उनका हल निकालने की कोशिश करेंगी। साथ ही, वे यह भी देखेंगी कि कैसे दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव एक और बैठक करेंगे। इसमें जल संसाधन सचिव भी शामिल होंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मुलाक़ात कर सकते हैं और आगे की दिशा तय करेंगे। अंत में दोनों राज्यों ने यह वादा किया कि वे ईमानदारी और खुले मन से बातचीत करेंगे, ताकि महानदी जल विवाद का हल ऐसा निकले जो सबके लिए लाभकारी हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रही, तो यह न सिर्फ ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल होगी कि बड़े और पुराने विवाद भी आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं।