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शिरोमणि अकाली दल के वर्चस्व को AAP की चुनौती?

चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक पंथक सियासत शिरोमणि अकाली दल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सिख पंथ से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक मुद्दों पर अकाली दल की पकड़ मजबूत मानी जाती थी लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह समीकरण तेजी से बदलता दिख रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र आयोजित करना और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के गायब होने के मामले में तीखी कार्रवाई ने पंथक राजनीति में आप की गंभीर एंट्री का संकेत दिया है। वहीं, श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंथक मामले में तलब करके मामले को और गरमा दिया है। अकाली दल का जन्म ही पंथक आंदोलन से हुआ। गुरुद्वारा सुधार आंदोलन से लेकर एसजीपीसी पर नियंत्रण तक, अकाली दल ने सिख धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। ग्रामीण पंजाब, खासकर माझा और मालवा के पंथक बहुल क्षेत्रों में अकाली दल लंबे समय तक स्वाभाविक विकल्प रहा। पंजाब के कुल मतदाताओं में करीब 30-35 फीसदी ऐसे हैं, जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पंथक मुद्दों से प्रभावित होते हैं। इनमें से अधिकांश का झुकाव ऐतिहासिक रूप से अकाली दल की ओर रहा। आप सरकार के तीन बड़े कदम पंथक सियासत में नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि सिख इतिहास और अस्मिता को संवैधानिक सम्मान देने का संदेश था। वहीं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूप गायब होने के मामले में तेज जांच और कार्रवाई ने पंथक मतदाताओं में यह धारणा बनाई कि सरकार केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने को तैयार है। तीसरा कदम तीन शहरों को धार्मिक दर्जा देने का रहा, जो पंथक वोटर के लिए सकारात्मक संकेत माना गया। अकाली दल पहले ही नेतृत्व संकट, परिवारवाद और सीमित नेतृत्व विकल्पों से जूझ रहा है। विधानसभा और लोकसभा में उसकी सीटें घटकर बहुत कम रह गई हैं। बेअदबी प्रकरणों में निर्णायक कार्रवाई न होना और युवा पंथक मतदाताओं से भावनात्मक दूरी ने उसकी विश्वसनीयता कमजोर की है। ऐसे में जो पंथक वोटर कभी अकाली दल के साथ खड़ा होता था, अब विकल्प तलाश रहा है। सियासी जानकार भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि अगर पंथक वोटर का केवल 10-15 फीसदी हिस्सा भी अकाली दल से खिसकता है, तो इसका सीधा असर 15–20 विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है। माझा क्षेत्र के अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, आनंदपुर साहिब, फतेहगढ़ साहिब, मोगा, बठिंडा और बरनाला में अकाली दल की पारंपरिक पकड़ कमजोर होने लगी है जबकि आप ने पंथक वोटरों पर सेंधमारी कर ली है। अकाली दल की ऐतिहासिक भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता, लेकिन अब उसका पंथक एकाधिकार कमजोर हुआ है। आम आदमी पार्टी ने प्रशासनिक और नीतिगत कदमों के जरिए पंथक राजनीति में नए समीकरण खड़े किए हैं। पंजाब की पंथक राजनीति अब केवल विरासत से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और विश्वसनीयता से तय होगी। यही अकाली दल की सबसे बड़ी परीक्षा है और आम आदमी पार्टी के लिए नया राजनीतिक अवसर। इस वर्ष को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में किसी भी तरह के पंथक मामले को सियासत से जोड़ कर देखा जाना स्वाभाविक है।

पंजाब में हालात बेकाबू — तरुण चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को घेरा

अमृतसर अमृतसर में एक शादी समारोह के दौरान सरपंच की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना को लेकर पंजाब की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोला है और मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की है। भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इस घटना को पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण बताया है। बातचीत करते हुए तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब में हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि अपराधियों के मन में कानून का कोई डर नहीं बचा है। पहले अपराधी मुंह ढककर वारदात को अंजाम देते थे, लेकिन अब वे खुलेआम आते हैं। वे शादी के मैरिज पैलेस में घुसते हैं, दिनदहाड़े गोलियां चलाते हैं, खुशियों के माहौल को मातम में बदल देते हैं, और बेखौफ होकर निकल जाते हैं। तरुण चुघ ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। राज्य अब कानून का नहीं, बल्कि अपराधियों का राज बनता जा रहा है। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें किसी का डर नहीं है। तरुण चुघ ने यह भी आरोप लगाया कि जब पत्रकार इस तरह की घटनाओं पर सवाल पूछते हैं, तो उन्हें डराया और धमकाया जाता है। सरकार सच्चाई को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीन पर हालात बेहद गंभीर हैं। तरुण चुघ ने आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "आम आदमी की जान आम आदमी पार्टी की सरकार में सबसे सस्ती हो गई है। जिस पार्टी ने ईमानदार और सुरक्षित शासन का वादा किया था, वही आज लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।" उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े हत्या जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि राज्य में अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ चुका है। शादी जैसे पवित्र और खुशी के अवसर पर इस तरह की वारदात होना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। तरुण चुघ ने इस घटना को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगा है और कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आम लोगों का सरकार से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

प्रसूति स्वास्थ्य में ऐतिहासिक बदलाव: पंजाब सरकार की पहल से आम आदमी क्लीनिक बने गर्भवती महिलाओं का सहारा

चंडीगढ़ आने वाली पीढ़ियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने प्रसूति स्वास्थ्य देखभाल को सफलतापूर्वक विकेंद्रित किया है और आम आदमी क्लीनिक (ए.ए.सी.) गर्भवती महिलाओं के लिए नई जीवन रेखा के रूप में उभर रहे हैं। एक विशेष प्रोटोकॉल-आधारित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू करने के मात्र चार महीनों के अंदर सेवाएं हासिल करने वालों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है और हर महीने लगभग 20,000 गर्भवती महिलाएं इन क्लीनिकों में पहुंच रही हैं। इस पहल की सफलता को साझा करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत पहले ही एक यूनिक रैफरल सिस्टम के माध्यम से 10,000 से अधिक महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान की गई हैं। इसके साथ ही लगभग 500 निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को सूचीबद्ध करके राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को विभिन्न स्कैन: जिनकी कीमत आम तौर पर 800 रुपये से 2,000 रुपये के बीच होती है – की सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी जा रही है। इस सुविधा से मात्र 120 दिनों के छोटे समय में पंजाबी परिवारों को अनुमानित 1 करोड़ रुपये की बचत हुई है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में 70 प्रतिशत से कम गर्भवती महिलाओं ने अपना पहला एंटे-नेटल चेक-अप करवाया है और लगभग 60 प्रतिशत से कम ने सिफारिश अनुसार पूरे चार चेक-अप करवा लिए हैं, जबकि राज्य में माताओं की मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 90 रही है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इन आंकड़ों ने राज्य भर में एक व्यापक, पहुंचयोग्य गर्भावस्था देखभाल मॉडल की तुरंत आवश्यकता को उजागर किया। पंजाब में हर साल लगभग 4.3 लाख प्रसव होते हैं, जिससे माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए जल्दी पता लगाना, नियमित निगरानी और समय पर रैफरल बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पिछले तीन सालों में, मान सरकार ने 881 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए हैं, जो पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की रीढ़ के रूप में उभरे हैं, जिसमें 4.6 करोड़ से अधिक ओपीडी विजिट और रोजाना लगभग 70,000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए, सरकार ने लगभग चार महीने पहले ए.ए.सीज़. के माध्यम से एक विस्तृत, प्रोटोकॉल-संचालित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू किया। इस सुधार के तहत, सभी जरूरी एंटे-नेटल चेक-अप अब आम आदमी क्लीनिकों में उपलब्ध हैं। इनमें एच.आई.वी. और साइफिलिस स्क्रीनिंग, खून के सभी टेस्ट, शुगर, थायरॉइड, हेपेटाइटिस, भ्रूण की दिल की धड़कन, कोलेस्ट्रॉल और हीमोग्लोबिन मूल्यांकन जैसे रूटीन और महत्वपूर्ण टेस्ट शामिल हैं। यदि अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है तो ए.ए.सी. डॉक्टर द्वारा रैफरल स्लिप जारी की जाती है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाएं मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्राप्त कर सकती हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि, लगभग 5,000 महिलाओं को हर महीने उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के रूप में पहचाना जा रहा है ताकि निरंतर ट्रैकिंग, केंद्रित सहायता और विशेषज्ञ देखभाल के लिए उच्च चिकित्सा सुविधाओं के लिए समय पर रैफरल किया जा सके। इस सुधार से मरीज के अनुभव में भी काफी सुधार हुआ है। महिलाएं अब गर्भावस्था से संबंधित ज्यादातर टेस्ट अपने घरों के नजदीक ही करवा सकती हैं, जिससे बड़े अस्पतालों में जाना और लंबी कतारों की परेशानी से बचते हुए मिनटों में चिकित्सकीय सलाह ले सकती हैं और बिना किसी वित्तीय बोझ के अल्ट्रासाउंड सेवाओं तक पहुंच कर सकती हैं। जन्म से पहले की पहली जांच से लेकर जन्म के बाद के फॉलो-अप तक, यह पहल तकनीकी, मानक क्लीनिकल प्रोटोकॉल, रैफरल प्रणालियों और कम्युनिटी-स्तरीय सहायता को एकीकृत करके पूरी गर्भावस्था देखभाल को मजबूत बनाती है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कहा कि यह पहल जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी अगुवाई के तहत, पंजाब एक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का निर्माण कर रहा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि हर मां को घर के नजदीक मानक देखभाल मिले। सालाना 4.3 लाख गर्भावस्थाओं के साथ, आम आदमी क्लीनिकों में गर्भावस्था देखभाल सेवाओं का विस्तार एक परिवर्तनकारी कदम है और भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है।” सरकार का मानना है कि यह पहल पिछले कुछ सालों में माताओं और बच्चे के स्वास्थ्य में पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी महिला भौगोलिक स्थिति, आय या जागरूकता की कमी के कारण इस लाभ से वंचित न रहे। इसके साथ ही राज्य भर में माताओं और नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य परिणामों में लगातार सुधार किया जा रहा है।

मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ पंजाब में AAP का जोरदार प्रदर्शन

अमृतसर. मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ और इसे कमजोर किए जाने का आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी ने शनिवार को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन में हजारों मनरेगा मजदूरों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शन का नेतृत्व फतेहगढ़ साहिब से आम आदमी पार्टी के विधायक लखबीर सिंह राय ने किया. प्रदर्शन में शामिल हुए मनरेगा मजदूर प्रदर्शन में दलित, गरीब और मजदूर वर्ग से जुड़े बड़ी संख्या में मनरेगा कामगार शामिल हुए. लखबीर सिंह राय और आम आदमी पार्टी पंजाब की एससी विंग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी सहित पार्टी के कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. सभी ने एक सुर में कहा कि जब तक मजदूर विरोधी वीबी जी राम जी कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. सभा को संबोधित करते हुए विधायक लखबीर सिंह राय ने कहा कि मोदी सरकार मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी करने के जरिए राजनीति कर रही है और इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. 'पूरे पंजाब में आंदोलन करेगी AAP' गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने पंजाब को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने युवाओं, महिलाओं और उद्योगों से किए गए वादे पूरे नहीं किए और पंजाब के फंड रोककर विकास में बाधाएं पैदा कीं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मनरेगा मजदूरों का उत्पीड़न बंद नहीं किया गया, तो आम आदमी पार्टी पूरे पंजाब में बड़ा और तेज आंदोलन शुरू करेगी.

मुख्यमंत्री मान ने सरपंच की हत्या के आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के DGP को दिए निर्देश

अमृतसर. पंजाब के अमृतसर में एक दिन पहले रविवार को दिनदहाड़े आम आदमी पार्टी (आप) के सरपंच की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। सरपंच जर्मल सिंह वल्टोहा की हत्या मामले को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सख्ती दिखाई है। सीएम मान ने डीजीपी गौरव यादव से फोन पर बात की है और पूरे मामले की अपडेट भी ली। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सरपंच की हत्या मामले में जो भी आरोपी हैं उनकी जल्द पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि आप के सरपंच को अमृतसर में एक शादी समारोह में सरेआम दिनदहाड़े गोलियां मारी गई थीं। तरन तारन के विधानसभा हलका खेमकरण के आप विधायक सरवण सिंह धुन्न के करीबी सरपंच जर्मल सिंह वल्टोहा की हत्या के बाद विरोधी पार्टियों के नेता सरकार को घेर भी रहे हैं। दरअसल, विदेश बैठे गैंगस्टर प्रभदीप सिंह उर्फ प्रभ दासूवाल द्वारा छह महीने से सरपंच वल्टोहा से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। दो बार पहले भी उनपर हमला हो चुका था। रविवार को सरपंच जर्मल सिंह वल्टोहा शादी समारोह में शामिल होने के लिए अमृतसर के मेरी गोल्ड पैलेस में आए थे, यहां पैलेस में दाखिल होकर हमलावरों ने उनके सिर पर दो गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

पंजाब सरकार देगी सरकारी स्कूलों के छात्रों को IIT, NIT और AIIMS की मुफ्त कोचिंग

अमृतसर. पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों के सपनों को नई उड़ान दी है. राज्य के सरकारी स्कूलों के 1700 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को अब आईआईटी, एनआईटी और एम्स जैसी देश की शीर्ष संस्थाओं की निःशुल्क तैयारी का अवसर मिल रहा है. यह सुविधा पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस (पेस) कार्यक्रम के तहत आयोजित विंटर रेज़िडेंशियल कोचिंग कैंपों के माध्यम से प्रदान की गई है. तीन जिलों में लगे विशेष कोचिंग कैंप शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इन कैंपों को बठिंडा, लुधियाना और मोहाली (SAS नगर) में आयोजित किया गया था. इन केंद्रों में कुल 1728 विद्यार्थियों ने भाग लिया. बठिंडा केंद्र में 601, लुधियाना में 573 और मोहाली में 554 विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय कोचिंग दी गई. इन कैंपों में छात्राओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जो सरकार की समावेशी शिक्षा नीति को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि यह पहल मान सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके तहत सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना हर होनहार विद्यार्थी को समान अवसर दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्रों में अपार प्रतिभा है और सही मार्गदर्शन मिलने पर वे देश की शीर्ष परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं. पेस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया से किया गया. मॉक टेस्ट, अवधारणात्मक समझ, अकादमिक निरंतरता और शिक्षकों की सिफारिश के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन हुआ. इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र में 20 प्रतिशत सीटें सामान्य सरकारी स्कूलों और ड्रॉप-ईयर अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गईं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके. नामी संस्थानों के विशेषज्ञों ने दिए टिप्स इन रेज़िडेंशियल कैंपों में फिजिक्सवाला, विद्या मंदिर और अवंती फेलोज़ जैसी नामी कोचिंग संस्थाओं के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया. जेईई और नीट पैटर्न के अनुरूप पढ़ाई, डाउट-क्लियरिंग सत्र, वन-टू-वन मेंटरिंग, तनाव प्रबंधन और करियर मार्गदर्शन पर विशेष जोर दिया गया. सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, 24 घंटे निगरानी और चिकित्सा सुविधाओं ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल प्रदान किया. शिक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष सरकारी स्कूलों के 265 छात्रों ने जेईई मेन्स, 45 ने जेईई एडवांस्ड और 847 छात्रों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की थी. इससे साफ है कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब देश के शीर्ष पेशेवर कोर्सेज के लिए मजबूत लॉन्चपैड बनते जा रहे हैं.

पंजाब के मजदूर माता-पिता की बेटी परम पहुंची UK में गाने की रिकॉर्डिंग करने

अमृतसर. मोगा जिले के गांव दुननेके में जन्मी परमजीत उर्फ परम ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। गरीब परिवार में जन्मी 19 वर्षीय परम ने कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर अपने रैप वीडियो से धमाल मचाया। उनका गाना नहीं, बल्कि सड़कों और गलियों में किया गया रैप लोगों के दिलों को छू गया, जिसके बाद फैंस ने उन्हें प्यार से ‘दैट गर्ल’ का नाम दिया। परम का बचपन गरीबी में बीता। मां दूसरों के घर झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करती थीं, जबकि पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। बावजूद इसके, परम ने बीएम कॉलेज मोगा में पढ़ाई के साथ अपने संगीत करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने एक क्लासमेट के साथ मोगा दाना मंडी में गाने का रियाज किया, जो उन्हें रातों-रात स्टार बना गया। सोशल मीडिया पर उन्हें लेडी सिद्धू मूसेवाला का स्वरूप बताया गया और वे पंजाब में ट्रेंड करने लगीं। यूके में नई शुरुआत अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाने के लिए परम अब यूके पहुंच चुकी हैं, जहां वे अपने आगामी गाने की रिकॉर्डिंग कर रही हैं। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में परम ने अपनी नई यात्रा की झलक दी। उन्होंने बताया कि वहाँ सब अच्छा है, लेकिन भारत जैसा खाना नहीं मिल रहा। चाइनीज खाने के लिए वह चाइनाटाउन पहुंचीं, लेकिन चॉपस्टिक से खाने में असफल रहीं। शूटिंग के दौरान कड़ाके की ठंड में कंबल में लिपटकर समय बिताना पड़ा। वहीं, यूके में फैंस ने उन्हें पहचानना शुरू कर दिया, और लोग उनके साथ सेल्फी लेने पहुंचे। प्रेरणा की मिसाल एक मेहनती मजदूर परिवार की बेटी ने जिस मुकाम को हासिल किया है, वह देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है। परम ने साबित किया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हौसला, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।

होर्डिंग्स विवाद में मंत्री सोंध नंगे पांव सतनाम वाहेगुरु का जाप करते पहुंचे

अमृतसर. पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध सोमवार को अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए अमृतसर पहुंच गए हैं। मंत्री नंगे पांव ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए हेरिटेज स्ट्रीट से श्री अकाल तख्त साहिब तक पहुंचे और माथा टेका। तस्वीर विवाद को लेकर पांच सिंह साहिबानों द्वारा स्पष्टीकरण देने के लिए उन्हें अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में तलब किया गया था। पेशी के बाद तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का हर आदेश उन्हें सिर-माथे स्वीकार है। उन्होंने कहा कि गुरु घर के समक्ष उनका सिर हमेशा झुका है और वे सिख मर्यादा का पूर्ण सम्मान करते हैं। सरकार के खिलाफ सख्त फैसला ले सकते हैं पांच सिंह साहिबान श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों से जुड़े गंभीर मामले को लेकर सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर 5 जनवरी को तख्तों के पांच सिंह साहिबान की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में पावन स्वरूप प्रकरण पर एक बार फिर विस्तार से विचार किया जाएगा और पंजाब सरकार की कथित दखलअंदाजी पर कड़ा रुख अपनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार सिंह साहिबान इस मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अथवा सिख संगठनों को पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने या पंथक संगठनों की तत्काल संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दे सकते हैं। एसजीपीसी पहले ही सरकार पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाती रही है। मंत्री सौंद की पेशी भी एजेंडे में बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया गया है। उन पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी के अवसर पर गुरु साहिब से संबंधित आपत्तिजनक होर्डिंग्स लगाए जाने का आरोप है। सिंह साहिबान मंत्री सोंध को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। संतोषजनक जवाब न मिलने पर धार्मिक सजा सुनाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा। सीकेडी प्रधान को भी बुलावा इसी दिन चीफ खालसा दीवान के प्रधान डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर को भी सिंह साहिबान के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे संगठन के अमृतधारी और गैर-अमृतधारी सदस्यों की सूची सौंपने को कहा गया है। पंथक और धार्मिक हलकों में इस बैठक को लेकर खासा उत्साह है। माना जा रहा है कि आज होने वाले फैसले सरकार और पंथक संस्थाओं के संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।

‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान का दूसरा चरण पंजाब में शुरू, नशे के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया शुरू

मोहाली पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया है। इस चरण में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग का फील्ड स्टाफ गांवों और शहरों में घर-घर जाकर नशे से जुड़े आंकड़े एकत्र करेगा और लोगों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेगा। मोहाली में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सौंध ने बताया कि इस अभियान के तहत नशा छोड़ चुके युवाओं को प्रेरक वक्ता के रूप में समाज के बीच लाया जाएगा। ये युवा अपने अनुभव साझा कर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे और खासतौर पर युवाओं को इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा नशे की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और समाज की सक्रिय भागीदारी से इस समस्या को जड़ से खत्म करना है।  स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि अब तक करीब 20 हजार नशा पीड़ित युवाओं को नशे की लत से बाहर निकाला जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि कई नशा मुक्ति केंद्रों में अब नए मामले सामने नहीं आ रहे हैं, जो पहले चरण की बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में नशा रोकथाम के साथ-साथ पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंत्रियों ने पंचायतों, विभागीय कर्मचारियों और आम जनता से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जा सके।

शीतलहर का कहर जारी, घने कोहरे को लेकर 7 जनवरी तक अलर्ट

पंजाब पंजाब और चंडीगढ़ में सर्द मौसम ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के चलते मौसम विभाग ने 7 जनवरी तक अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राज्य के कई इलाकों में सुबह और रात के समय कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार आज पंजाब के लगभग सभी जिलों में घना कोहरा देखने को मिल सकता है। वहीं, करीब 10 जिलों में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी काफी कम हो गई है, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित हो रहा है। अमृतसर में विजिबिलिटी बेहद कम दर्ज की गई, जबकि फरीदकोट जैसे इलाकों में भी हालात सामान्य नहीं रहे। तापमान की बात करें तो फरीदकोट राज्य का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान करीब पांच डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। पंजाब में अधिकतर स्थानों पर न्यूनतम तापमान 6 से 10 डिग्री के बीच बना हुआ है, जबकि दिन का तापमान भी कई जगह सामान्य से नीचे चल रहा है। आने वाले दिनों में जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, गुरदासपुर, मोहाली, पटियाला सहित पठानकोट अधिकांश जिलों में कोहरे का असर बना रह सकता है। जालंधर, कपूरथला, फरीदकोट, मुक्तसर, तरनतारन, अमृतसर, मोगा, बठिंडा, फाजिल्का और फिरोजपुर जिले में ठंडी हवाओं के चलते शीतलहर की स्थिति जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है।   विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी इलाकों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण पंजाब में ठंड बढ़ रही है। फिलहाल प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है और मौसम 9 जनवरी तक शुष्क बना रह सकता है। मौसम विभाग ने वाहन चालकों को कोहरे के दौरान सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दी है।