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CM भगवंत मान का नया अभियान: नशे के खिलाफ संग्राम को मजबूत करेगी मेंटल हेल्थ फैलोशिप

चंडीगढ़  पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐतिहासिक शुरुआत हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने देश की पहली सरकारी लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम लॉन्च किया है. उन्होंने कहा कि युद्ध नशे विरुद्ध सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी लड़ाई है, जिसमें हर परिवार की सुरक्षा और भविष्य दांव पर है. यह फेलोशिप 2 साल की होगी. जिसमें न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल बनने जा रही है. एम्स मोहाली और टीआईएसएस मुंबई की साझेदारी में शुरू हुई यह पहल 23 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य और नशा-निवारण को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाएगी. सरकार 35 ऐसे युवा विशेषज्ञ चुन रही है जो साइकोलॉजी या सोशल वर्क की पढ़ाई कर चुके हैं और जिनके पास मानसिक स्वास्थ्य में काम करने का अनुभव है. ये फेलो पंजाब के गांव, शहर, स्कूल, कॉलेज, कम्युनिटी सेंटर और रिहैब सुविधाओं तक पहुँचकर एक ऐसे मॉडल को लागू करेंगे जिसकी कल्पना भारत ने पहले नहीं की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास तीनों को एक साथ जोड़कर. समाज को मजबूत करने की जरूरत भगवंत मान यह मानते हैं कि नशे से लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के मन को मजबूत करने की जरूरत है. इसी सोच के चलते इस कार्यक्रम में फेलोज़ को टीआईएसएस मुंबई से विशेष ट्रेनिंग, मेंटरशिप और जमीनी नेतृत्व सीखने का मौका मिलेगा. उन्हें 60,000 रुपये महीना का सम्मानजनक रिम्यूनरेशन भी मिलेगा, ताकि वे बिना किसी दबाव के पूरी ऊर्जा से पंजाब के युवाओं और परिवारों के साथ काम कर सकें. नशा महामारी की तरह फैल चुका है यह कार्यक्रम असल मायने में पंजाब के दिल की धड़कन है. नशा एक महामारी की तरह फैल चुका था, लेकिन अब पंजाब ने यह लड़ाई विशेषज्ञों के साथ मिलकर, वैज्ञानिक तरीकों से और लोगों के बीच उतरकर लड़ने का फैसला लिया है. भगवंत मान ने दिखा दिया है कि जब नीयत साफ हो और लक्ष्य जनता की भलाई हो, तो सरकारें बदलाव लेकर आती हैं, बयान नहीं. पंजाब के भविष्य में निवेश 7 दिसंबर तक आवेदन खुले हैं, और अधिक जानकारी के लिए https://tiss.ac.in/lmhp पर जाकर देख सकते है. यह सिर्फ एक फेलोशिप नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य में निवेश है, एक ऐसा भविष्य जहां हर घर सुरक्षित हो, हर युवा स्वस्थ हो, और हर माता-पिता नशे के डर के बिना अपने बच्चों को बड़ा कर सकें. यह वही पंजाब है जिसकी कल्पना भगवंत मान ने की थी और अब वह धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है.  

प्रदूषण का नया गणित: पराली घटने पर भी क्यों नहीं सुधर रही हवा?

गुरदासपुर  इस साल गुरदासपुर जिले में खेतों में आग लगाने (स्टबल बर्निंग) के मामलों में करीब 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता अभी भी खराब बताई जा रही है। इस समय हवा का गुणवत्ता सूचकांक 134 के करीब है, जो सेहत के लिए ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता। बेशक खेतों में आग कम लगी है, जिस कारण प्रदूषण के लिए खेतों में लगाई जाने वाली आग को कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश न होने के कारण हवा का गुणवत्ता सूचकांक डगमगा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस साल जिले के अंदर खेतों में आग लगाने के सिर्फ 86 मामले सैटेलाइट के माध्यम से रिपोर्ट हुए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल 2024 के 199 मामलों से काफी कम है, जबकि 2023 में 359 केस सामने आए थे। इस प्रकार, इस बार खेतों में आग के मामलों में तकरीबन 57 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि पराली प्रबंधन अभियान की कामयाबी की ओर इशारा करती है। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल किसानों में जागरूकता अभियान, मशीनरी की उपलब्धता और प्रशासन की तरफ से निगरानी व सख्त कार्रवाई के कारण पराली जलाने के इन मामलों में बड़ी कमी आई है। हवा की गुणवत्ता में सुधार की बजाय गिरावट क्यों? हालांकि खेतों में आग कम लगी, पर दूसरी ओर गुरदासपुर में हवा का गुणवत्ता सूचकांक बेहतर होने की बजाय कई जगहों पर बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक, हवा में प्रदूषण बढ़ा हुआ है, और इसका मुख्य कारण लंबे समय से बारिश न होना माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले कई हफ्तों से जिले में बारिश न होने के कारण हवा में मिट्टी और धूल के कण बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। वाहनों की रोजाना आवाजाही और निर्माण कार्यों की धूल भी हवा में मिलकर प्रदूषण को बढ़ा रही है। आम तौर पर पराली जलाने का रुझान कम होने के कारण हवा की गुणवत्ता में सुधार आना चाहिए, लेकिन इस बार स्थिति विपरीत नजर आ रही है। कुछ दिनों से जिले का हवा सूचकांक 130 से 140 के आस-पास रिकॉर्ड हो रहा है, जो ‘पुअर ज़ोन' में आता है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषित हवा के कारण बुजुर्गों, छोटे बच्चों और दमा के मरीजों के लिए स्थिति चिंताजनक है। खांसी, गले में जलन, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याओं के मामले बढ़ने लगे हैं।

मंदिर के दरवाज़े खुलते ही मचा हड़कंप, रहस्यमयी हालात देख पुलिस भी दंग

लुधियाना  पंजाब में बेअदबी के मामला थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। ऐसा ही एक मामला लुधियाना से सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, थाना दुगरी की पुलिस ने इलाके में स्थित एक मंदिर में भगवान शिव व नंदी की मूर्तियों का अनादर करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने अर्बन एस्टेट दुगरी के रहने वाले सुरेंद्र पुरी के बयान पर अज्ञात को नामजद किया है। पुलिस को दी शिकायत में सुरेंद्र पुरी ने बताया कि वह हर रोज की तरह सुबह मोक्षद्वार श्री काशी विश्वनाथ शिव मंदिर श्मशान घाट फेस 2 दुगरी में गया तो वहां पर देखा कि भगवान शिव व नंदी की मूर्तियों का अनादर किया हुआ है। जिस पर उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला तो पता चला किएक अज्ञात व्यक्ति ने रात को यह हरकत की है। जांच अधिकारी ने बताया कि मामले को लेकर कार्रवाई की जा रही है। फुटेज से आरोपी की पहचान की जा रही है। 

शिमला हुआ फीका—पंजाब का ये शहर बना उत्तरी भारत का नया ‘फ्रीजर’

पंजाब  पंजाब और चंडीगढ़ में सर्दी अब पूरी तरह दस्तक दे चुकी है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी कर दिया है। मंगलवार को फरीदकोट का तापमान गिरकर 3 डिग्री पर पहुँच गया, जो शिमला से भी ठंडा रहा। वहीं शिमला में 4 डिग्री की गिरावट के बाद न्यूनतम तापमान 5 डिग्री दर्ज हुआ। राज्य के कई पहाड़ी और मैदानी इलाके भी तेज सर्दी की चपेट में हैं, जहां रात का तापमान 8 डिग्री से कम रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के निदेशक डॉ. सुरेंद्र पाल के अनुसार, दिसंबर में ठंड लगातार बढ़ती जाएगी और तापमान में और गिरावट देखने को मिलेगी। उनका कहना है कि उत्तर से बहने वाली हवाएं पहाड़ों की शीतलहर को मैदानों तक ला रही हैं, जिससे चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में भी ठंड तेज हो गई है। आने वाले दिनों में दिन और रात दोनों तापमान सामान्य से कम रहेंगे। हालांकि, 20 दिसंबर के बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी बढ़ेगी और इसका असर मैदानी क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। ऐसे में अनुमान है कि दिसंबर के आखिरी हफ्ते से लेकर जनवरी तक चंडीगढ़ सहित पंजाब के कई हिस्सों में कड़कड़ाती ठंड पड़ने लगेगी।  

Insta Queen की Thar से Wedding Talk तक: सामने आई पर्सनल लाइफ की सबसे बड़ी खबर!

पंजाब  चिट्टा रखने के मामले में पकड़ में आने के बाद सुर्खियों में रही पंजाब पुलिस की बर्खास्त महिला कांस्टेबल और इंस्टा क्वीन अमनदीप कौर के खिलाफ अदालत ने भ्रष्टाचार एक्ट के तहत चार्ज फ्रेम कर दिए हैं। कुछ माह पहले एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स ने उसे 17 ग्राम चिट्टा सहित गिरफ्तार किया था। मामला तूल पकड़ने पर विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया था। इस बीच विजिलेंस ने उसकी संपत्ति की जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया कि उसने आय से अधिक खर्च कर संपत्ति बनाई है, जिसके आधार पर विजिलेंस ने केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। कुछ दिन पहले ही वह जेल से जमानत पर बाहर आई है। जब वह जेल में थी, तभी विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत में भ्रष्टाचार एक्ट के तहत चालान पेश कर दिया था। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने उस पर चार्ज फ्रेम कर दिए। अब अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी। गुरमीत कौर नामक महिला ने अमनदीप पर लगाए गंभीर आरोप इसी बीच, गुरमीत कौर नाम की एक महिला ने SSP बठिंडा को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि बर्खास्त कांस्टेबल अमनदीप कौर ने उसके पति से बिना तलाक के शादी कर ली। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शादी के लिए दोनों ने ही गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। पुलिस ने शिकायत मिलते ही मामले की जांच शुरू कर दी है। क्या है मामला  बता दें कि गत  2 अप्रैल को अमनदीप को उसकी थारा गाड़ी से 17.71 ग्राम हेरोइन बरामद होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसपर कथित तौर पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया। जांच के बाद बठिंडा रेंज के विजिलेंस पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें उसकी चल और अचल संपत्तियों के साथ-साथ उसके वेतन, बैंक खातों और ऋण रिकार्ड की जांच की गई। अमनदीप को इसी साल 3 अप्रैल को बर्खास्त कर दिया गया था और वह बठिंडा सेंट्रल जेल में बंद थी।   

पंजाबवासियों के लिए जरूरी सूचना: जिले में कड़े नियम लागू, तुरंत पढ़ें पूरी खबर

नवांशहर डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट अंकुरजीत सिंह ने इंडियन सिविल सिक्योरिटी कोड के तहत एक ऑर्डर जारी किया है। इसमें जिले में किसी भी तरह के मैरिज पैलेस/रिसॉर्ट, मेले, धार्मिक जगहों, जुलूस, बारात, शादी पार्टियों या दूसरे इवैंट्स/पब्लिक गैदरिंग और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में हथियार ले जाने और प्रदर्शन करने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है। इसके अलावा, हथियारों के निजी और सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर भी रोक लगाई गई है। विरोध प्रदर्शन और 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी एक और आदेश में, डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट अंकुरजीत सिंह ने जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, पब्लिक जगहों पर नारे लगाने/भड़काऊ भाषण देने, बिना इजाजत के जुलूस/मीटिंग/रैली निकालने पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि खास हालात में सब-डिविजनल मैजिस्ट्रेट से पहले इजाजत लेकर पब्लिक मीटिंग, जुलूस या रैली की जा सकती है। यह आदेश आर्मी की वर्दी में पुलिस/मिलिट्री के जवानों, ड्यूटी पर तैनात किसी दूसरे सरकारी कर्मचारी और शादी/विवाह/शोक सभा/धार्मिक जगहों/संस्थाओं के अंदर में परमात्मा व अकाल पुरख की स्तुति शब्द कीर्तन करने पर लागू नहीं होगा। सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने का आदेश इस तरह जिले के पैट्रोल पंप के मैनेजर और मालिकों को आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने पैट्रोल पंप और बैंकों में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाएं, जिनकी रिकॉर्डिंग कैपेसिटी कम से कम 7 दिन की होनी चाहिए। बिना परमिशन के ट्यूबवैल और सबमर्सिबल पंप लगाने पर रोक डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट अंकुरजीत सिंह ने इंडियन सिविल प्रोटैक्शन कोड, 2023 के सैक्शन 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, सैंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी ने ब्लॉक औड़ और बंगा को नोटिफाइड एरिया घोषित किया होने के कारण इस एरिया में बिना एन.ओ.सी. के ट्यूबवैल/सबमर्सिबल पंप लगाने पर रोक लगा दी है। जारी किए गए आदेशों के अनुसार, ब्लॉक औड़ और बंगा में बिना जरूरी मंजूरी के ट्यूबवैल/सबमर्सिबल नहीं लगाए जा सकते और अगर कोई मंजूर किए गए कामों से ट्यूबवैल/सबमर्सिबल लगाना चाहता है, तो उसे डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस में एन.ओ.सी. के लिए अप्लाई करना होगा और मंजूरी लेनी होगी।   बिना इजाजत बोरवैल/ट्यूबवैल खोदने और रिपेयर करने पर रोक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अंकुरजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिसोर्सेज, भारत सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइंस के हिसाब से शहरी और ग्रामीण इलाकों में कच्चे कुएं और ट्यूबवैल की खुदाई के कारण लोगों और बच्चों के इन बोरवैल में गिरने के डर को देखते हुए जिले में बिना इजाजत बोरवैल खोदने या उन्हें गहरा करने पर रोक लगा दी है।

पहाड़ों पर बर्फबारी की दस्तक! हिमाचल में Orange Alert, पंजाब में ठंड बढ़ने के संकेत

पंजाब  शिमला मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में 4 और 5 दिसंबर को बर्फबारी और बारिश की चेतावनी जारी की है। सर्दी का सीज़न उत्तर भारत में पहले ही अपने पांव पसार चुका है, और अब एक नई पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के असर से हिमाचल के मध्य और ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। इसके अलावा, इस हफ्ते के बाकी दिन अधिकांश इलाकों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार यह नया सिस्टम फिलहाल उत्तर हरियाणा के ऊपर 1.5 से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे सिस्टम आमतौर पर आसपास के राज्यों में सर्दी बढ़ा देते हैं। पंजाब में आने वाले दिनों में इसका साफ असर देखने को मिल सकता है। हिमाचल में बर्फबारी के दौरान पंजाब के तापमान में आमतौर पर 2–5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होती है। इसके साथ ही कोहरा और बढ़ी हुई नमी ठंड को और तीखा महसूस कराती है, भले ही मैदानों में बर्फबारी न हो। आईएमडी चंडीगढ़ ने पहले ही 30 नवंबर से 2 दिसंबर तक जालंधर, मोगा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, बठिंडा, मुक्तसर और फाजिल्का जिलों के लिए कोल्ड वेव (Cold Wave) का यलो अलर्ट जारी किया है। फरीदकोट में राज्य का सबसे कम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमृतसर, पटियाला, लुधियाना, पठानकोट और बठिंडा में भी ठंड के असर के चलते तापमान में गिरावट आई। हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी की तैयारी के बीच, पंजाब के लोग आने वाले दिनों में ठंडी सुबहों, कोहरे भरी सड़कों और सर्दी के तेज असर के लिए खुद को तैयार रखें। 

कैंट बोर्ड स्कूलों में नई व्यवस्था: पारंपरिक हाज़िरी की जगह आएगा आधुनिक सिस्टम

अंबाला  अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर लगातार कवायद की जा रही है। बच्चों को स्कूल में बेहतर शिक्षा के साथ-साथ बेहतर माहौल मिले, इसके प्रयास बोर्ड द्वारा किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब स्कूलों में फेस रिकग्निशन कैमरे के साथ बायोमीट्रिक हाजिरी लगेगी। इसके लिए मशीनों को कक्षाओं के बाहर लगाया गया है। कक्षा में प्रवेश से पहले ही छात्र अपनी हाजिरी लगा सकेंगे, इससे शिक्षकों के समय की बचत होगी और हर छात्र पर स्मार्ट तरीके से निगरानी रहेगी।  स्कूलों में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी यह सुविधा तोपखाना परेड के स्कूल में प्राथमिक चरण में शुरु की गई है, यहां पांच मशीनें लगा दी गई हैं, जल्द ही अन्य पांच मशीनों को भी कक्षाओं के बाहर स्थापित कर दिया जाएगा। विद्यालय से बाहर रहने पर एप से हाजिरी नहीं लगेगी, इससे स्कूलों में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि विद्यालय में छात्रों व शिक्षकों की उपस्थिति बढ़ने के साथ शैक्षणिक माहौल में भी सुधार होगा। ऐसी कुछ शिकायतें पूर्व में भी बोर्ड अधिकारियों के पास पहुंची थी कि शिक्षक एक दिन पहले ही रजिस्टर में सुबह व शाम की हाजिरी लगा लेते हैं। इससे स्कूल की शिक्षा के स्तर पर असर पड़ता है, अगर कोई दूसरा शिक्षक इस संबंध में शिकायत करता था तो उसके साथ मनमुटाव रखा जाता था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कैंटोनमेंट बोर्ड ने अभी अपने अधीनस्थ एक स्कूल में इस सुविधा को शुरु किया है। इसके बाद यह सुविधा बोर्ड के अधीन पांच स्कूलों में भी शुरु की जाएगी। मौजूदा समय में कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन छह स्कूलों मे 2598 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें तोपखाना परेड के आरएचए बाजार स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 1012 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसी प्रकार आरएचए बाजार के प्राइमरी स्कूल में 267 बच्चे, बीसी बाजार के मिडिल स्कूल में 281 बच्चे, बीआई बाजार के हाई स्कूल में 396 बच्चे, रुट्स पब्लिक स्कूल में 514 बच्चे और वात्सल्य स्कूल में 128 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य अजय बवेजा ने कहा स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए यह एक अच्छा प्रयास है, इससे बच्चों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और शिक्षक भी सौहार्दपूर्ण माहौल में बच्चों को शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।

लंबे इंतज़ार के बाद बिल पास—राष्ट्रपति की हरी झंडी से पंजाब सरकार को सशक्तीकरण

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा से पास हुए पंजाब पशु चारा, कंसंट्रेटस और मिनरल मिक्सचर बिल-2018 को सात साल बाद राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। जिसके बाद अब पंजाब सरकार राज्य में जानवरों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी पर नजर रखेगी ताकि जानवरों को संतुलित चारा दिया जा सके। इस बिल के कानूनी होने से राज्य सरकार अब जानवरों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी पर नजर रख सकेगी और खराब क्वालिटी का चारा बनाने वालों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई भी कर सकेगी। जानकारी के मुताबिक, 2018 में पंजाब में उस समय की कांग्रेस सरकार ने जानवरों की सेहत और प्रोडक्शन को बेहतर बनाने और चारे की क्वालिटी बढ़ाने के लिए विधानसभा में पंजाब पशु चारा, कंसंट्रेट और मिनरल मिक्सचर बिल-2018 पास किया था। विधानसभा से बिल पास होने के बाद, उस समय के कानूनी सलाहकारों ने मंज़ूरी देने से मना कर दिया था और इसे सलाह के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने का दावा किया था, जिसके बाद साल 2019 में यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिसे सात साल के लंबे गैप के बाद मंजूरी मिली है। दूसरी ओर, पंजाब के पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भंडारी ने कहा कि वह जानवरों के चारे की क्वालिटी सुधारने के लिए बिल का मुद्दा लंबे समय से केंद्र के सामने उठा रहे थे। काफी सोच-विचार के बाद बिल को मंजूरी दी गई है। पंजाब पशु चारा, कंसन्ट्रेट और मिनरल मिक्सचर बिल-2018 के कानूनी तौर पर लागू होने से राज्य में डेयरी फार्मिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। इस बिल से जानवरों के चारे की क्वालिटी सुधरेगी और दूध का प्रोडक्शन बढ़ेगा। खेती के अलावा दूसरे बिजनेस से भी गांव वालों की इनकम बढ़ेगी। सूत्रों के मुताबिक, इस बिल से राज्य में 25 लाख मवेशियों और 40 लाख भैंसों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी सुधरेगी। इससे राज्य के लगभग दो हजार पशु चारा उत्पादकों द्वारा बनाए गए चारे की क्वालिटी की निगरानी के लिए नियम और कानून बनाने में मदद मिलेगी।

रवनीत बिट्टू ने अमृतपाल पर दिया विवादित बयान, कहा— अंतरिम पैरोल से इंकार क्यों?

चंडीगढ़  केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने जेल में बंद खालिस्तान समर्थक व कट्टपपंथी सांसद अमृतपाल सिंह को अंतरिम पैरोल देने की सार्वजनिक रूप से वकालत की है। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल इस समय सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में नजरबंद हैं। बिट्टू ने मंगलवार को नई दिल्ली में संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। बिट्टू का यह रुख पंजाब में राजनीतिक जमीन तलाश रही भाजपा की रणनीतिक तैयारियों का संकेत माना जा रहा है, जहां पार्टी के पास 117 सदस्यीय विधानसभा में एक भी सीट नहीं है और ‘आप’ सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। बिट्टू की ये टिप्पणियां अमृतपाल पर उनकी पहले की तीखी आलोचना से बिल्कुल विपरीत है। अमृतपाल ने नजरबंदी के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव खडूर साहिब से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ा और जीत हासिल की। उन्हें भारत–पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित इस संसदीय क्षेत्र से 4,00,000 से अधिक वोट मिले। जून 2024 में उन्हें दिल्ली में संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए चार घंटे की पैरोल मिली थी, जिसके दौरान उन्होंने ‘खालसा राज्य’ संबंधी अपने दृष्टिकोण की फिर पुष्टि की। इस दौरान उन्होंने सिख अलगाववादी विचारों का उल्लेख किया, जिसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी आलोचना की। बिट्टू ने अमृतपाल को अंतरिम पैरोल देने की मांग ऐसे समय में उठाई है जब संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए बिट्टू ने आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली पंजाब सरकार पर अमृतपाल की पैरोल अर्जी में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख (उर्फ इंजीनियर राशिद) की मिसाल देते हुए कहा, “पंजाब सरकार जानबूझकर एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को पैरोल देने से इनकार कर रही है। अगर जम्मू–कश्मीर के सांसद इंजीनियर राशिद को गंभीर आरोपों के बावजूद सत्र में शामिल होने के लिए हिरासती पैरोल मिल सकती है, तो अमृतपाल सिंह को ऐसी सुविधा क्यों नहीं? खडूर साहिब की आवाज संसद में कौन उठाएगा?” बिट्टू ने कहा कि राशिद आतंक–वित्त पोषण के आरोपों का सामना करते हुए अंतरिम जमानत पर सत्रों में उपस्थित हो रहे हैं। भाजपा–नीत केंद्र सरकार को विवाद से दूर रखने के प्रयास में बिट्टू ने जोर देकर कहा कि NSA के तहत पैरोल देने का फैसला राज्य सरकार के पास होता है। उन्होंने कहा, “केंद्र अमृतपाल को जेल में नहीं रख रहा है, यह पंजाब सरकार की जिम्मेदारी है। भाजपा पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। हम लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।” बिट्टू का यह बयान केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीधे आरोपों से अलग करता दिखाई देता है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि अमृतपाल पर NSA लगाने में केंद्र और राज्य दोनों की साझा भूमिका रही थी। पिछले बयानों से बिल्कुल उलट रुख अमृतपाल के लिए अंतरिम पैरोल की वकालत बिट्टू के पुराने बयानों से पूरी तरह उलट है। 2024 के चुनावों के दौरान लुधियाना से भाजपा उम्मीदवार रहते हुए बिट्टू ने अमृतपाल को पंजाब की शांति के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि “अमृतपाल सिंह जैसे लोग पंजाब में शांति पसंद लोगों को रहने नहीं देंगे।” बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी 1995 में खालिस्तानी उग्रवादियों से जुड़े एक आत्मघाती हमले में हत्या हो गई थी। वे लंबे समय से खुद को अलगाववाद विरोधी मजबूत आवाज के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। जुलाई 2024 में लोकसभा में अमृतपाल की नजरबंदी के मुद्दे पर बिट्टू की कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के साथ तीखी बहस भी हुई थी। बिट्टू ने NSA का बचाव करते हुए इसे “कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ हथियार” बताया था। “कट्टरपंथी और खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के नेता अमृतपाल सिंह (32) को अप्रैल 2023 में पंजाब पुलिस ने हिंसा भड़काने, अलगाववाद को बढ़ावा देने और कानून–व्यवस्था भंग करने के आरोपों में, एक महीने तक चली तलाश–अभियान के बाद गिरफ्तार किया था।”