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SC आयोग में रवनीत बिट्टू की पेशी, कहा- बयान पर खेद है, पहले ही मांग चुका हूं माफी

चंडीगढ़. केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू बुधवार को पंजाब एससी आयोग के समक्ष पेश हुए। जातिसूचक टिप्पणी मामले में बिट्टू ने अपने वकीलों के माध्यम से आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि घटना के दौरान उनके मुंह से निकले शब्द कानूनी तौर पर पूरी तरह गलत थे और इसके लिए वह पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। बिट्टू ने आयोग को बताया कि विवाद वाले दिन हालात बेहद तनावपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने संबंधित वीडियो अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट से भी डिलीट कर दी थी। बिट्टू के मुताबिक, उन्हें सबसे पहले संगरूर में एक एसपी रैंक के अधिकारी ने रोका था। उस अधिकारी ने बताया था कि भाजपा नेता ओंकार सिंह को बलिया थाने में हिरासत में रखा गया है। आरोप- रवनीत बिट्‌टू साथ हुई बदसलूकी उन्होंने कहा कि वह तुरंत बलिया थाने पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि ओंकार को संगरूर ले जाया गया है। बिट्टू ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई और कुछ ऐसे शब्द कहे गए, जिससे वह आहत हुए। बिट्टू के अनुसार, जब वह दोबारा संगरूर पहुंचे तो वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उनका रास्ता रोकते हुए कहा कि ओंकार धूरी में हैं। इसके बाद वह धूरी पहुंचे, जहां एक एसएचओ रैंक के अधिकारी ने उनकी गाड़ी के सामने वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां भी उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। व्यवाहर के कारण भावुक हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुलिस के व्यवहार और तनावपूर्ण माहौल के कारण वह भावुक हो गए थे। उन्होंने आयोग के समक्ष दोहराया कि यदि उनके मुंह से कोई आपत्तिजनक शब्द निकले, तो उसके लिए वह खेद व्यक्त करते हैं। बिट्टू ने कहा, “मैं उस पार्टी से आता हूं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर सम्मान दिया था।” मामला निकाय चुनाव के दिन का दरअसल, यह विवाद 26 मई 2026 को पंजाब निकाय चुनाव के मतदान के दिन शुरू हुआ था। धूरी (संगरूर) में भाजपा नेता ओंकार सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उन्हें छुड़ाने और धूरी में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान रवनीत बिट्टू और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद बिट्टू पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगे थे। आम आदमी पार्टी ने इस घटना को ‘गुंडागर्दी’ करार दिया था। मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब एससी आयोग ने बिट्टू को तलब किया था और संगरूर पुलिस से रिपोर्ट भी मांगी थी। बिट्टू को पहले 4 और 15, जून को पेश होना था, लेकिन निजी कारणों और दिल्ली में व्यस्तता के चलते वह उपस्थित नहीं हो सके थे। उस समय उनके वकील आयोग के समक्ष पेश हुए थे और आयोग अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी को उनकी व्यस्तता की जानकारी दी थी। अब बिट्टू ने आयोग के सामने व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रख दिया है।

5 साल पुराने कांड में विवाद, रवनीत बिट्टू ने प्रियंका गांधी पर लगाए गंभीर आरोप

चंडीगढ़  केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला है। बिट्टू ने ऐलान किया है कि वह प्रियंका गांधी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करवाएंगे। यह शिकायत करीब पांच साल पहले किसान आंदोलन के दौरान घटी उस घटना की जांच के लिए होगी, जब बिट्टू को प्रदर्शनकारी किसानों के बीच भेजा गया था और वहां उन पर 'जानलेवा हमला' हुआ था। बिट्टू का दावा: 'लिंचिंग' की साजिश थी 'द ट्रिब्यून' को दिए एक इंटरव्यू में रवनीत बिट्टू ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें प्रियंका गांधी की मंशा पर कोई संदेह नहीं था, बावजूद इसके कि प्रियंका यह अच्छी तरह जानती थीं कि किसान बिट्टू के प्रति कितने आक्रोशित थे। बिट्टू ने कहा- मैं इस बात की जांच करवाना चाहता हूं कि आखिर मुझे वहां भेजने के पीछे उनकी मंशा क्या थी। क्या वह कोई बड़ी घटना करवाना चाहती थीं? उस दिन कुछ भी हो सकता था। प्रियंका गांधी की ओर से यह एक हताशा भरा प्रयास था ताकि किसानों के बीच भाजपा विरोधी भावनाओं को और भड़काया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि वह और विधायक कुलबीर जीरा उस दिन किसानों की भीड़ द्वारा लगभग 'लिंच' कर दिए गए होते। उन्हें अब आशंका है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने का एक पूर्व-नियोजित 'प्लान और डिजाइन' तैयार किया गया था, ताकि इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदला जा सके। राहुल गांधी के 'गद्दार' वाले बयान पर पलटवार बिट्टू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उन्हें गद्दार कहे जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस तरह की हल्की बातें करके अपने पद की गरिमा गिराई है। बिट्टू ने सवाल किया कि कांग्रेस में कई ऐसे नेता और सांसद हैं जो दूसरी पार्टियों से आए हैं। तो क्या राहुल गांधी का मतलब है कि उनके साथ मौजूद ऐसे सभी नेता गद्दार हैं? कांग्रेस का पलटवार: 'आकाओं को खुश करने की कोशिश' पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने बिट्टू के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि बिट्टू द्वारा प्रियंका गांधी को इस विवाद में घसीटना केवल सुर्खियां बटोरने की एक हताश कोशिश है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- सालों बाद बिट्टू की याददाश्त अचानक वापस आ गई है, ठीक उसी वक्त जब उनके राजनीतिक आकाओं ने उन पर शिकंजा कसा है। पंजाब की राजनीति का यह 'फुस हो चुका कारतूस' अब सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बिट्टू के आरोपों को बचकानी हरकत बताया। उन्होंने कहा- यह कहना कि प्रियंका गांधी ने उन्हें जबरदस्ती विरोध प्रदर्शन स्थल पर भेजा, हास्यास्पद है। बिट्टू को अपने नए आकाओं की 'गुड बुक्स' में रहने के लिए क्या-क्या करना पड़ रहा है, यह देखकर दुख होता है।

रवनीत बिट्टू ने अमृतपाल पर दिया विवादित बयान, कहा— अंतरिम पैरोल से इंकार क्यों?

चंडीगढ़  केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने जेल में बंद खालिस्तान समर्थक व कट्टपपंथी सांसद अमृतपाल सिंह को अंतरिम पैरोल देने की सार्वजनिक रूप से वकालत की है। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल इस समय सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में नजरबंद हैं। बिट्टू ने मंगलवार को नई दिल्ली में संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। बिट्टू का यह रुख पंजाब में राजनीतिक जमीन तलाश रही भाजपा की रणनीतिक तैयारियों का संकेत माना जा रहा है, जहां पार्टी के पास 117 सदस्यीय विधानसभा में एक भी सीट नहीं है और ‘आप’ सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। बिट्टू की ये टिप्पणियां अमृतपाल पर उनकी पहले की तीखी आलोचना से बिल्कुल विपरीत है। अमृतपाल ने नजरबंदी के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव खडूर साहिब से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ा और जीत हासिल की। उन्हें भारत–पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित इस संसदीय क्षेत्र से 4,00,000 से अधिक वोट मिले। जून 2024 में उन्हें दिल्ली में संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए चार घंटे की पैरोल मिली थी, जिसके दौरान उन्होंने ‘खालसा राज्य’ संबंधी अपने दृष्टिकोण की फिर पुष्टि की। इस दौरान उन्होंने सिख अलगाववादी विचारों का उल्लेख किया, जिसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी आलोचना की। बिट्टू ने अमृतपाल को अंतरिम पैरोल देने की मांग ऐसे समय में उठाई है जब संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए बिट्टू ने आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली पंजाब सरकार पर अमृतपाल की पैरोल अर्जी में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख (उर्फ इंजीनियर राशिद) की मिसाल देते हुए कहा, “पंजाब सरकार जानबूझकर एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को पैरोल देने से इनकार कर रही है। अगर जम्मू–कश्मीर के सांसद इंजीनियर राशिद को गंभीर आरोपों के बावजूद सत्र में शामिल होने के लिए हिरासती पैरोल मिल सकती है, तो अमृतपाल सिंह को ऐसी सुविधा क्यों नहीं? खडूर साहिब की आवाज संसद में कौन उठाएगा?” बिट्टू ने कहा कि राशिद आतंक–वित्त पोषण के आरोपों का सामना करते हुए अंतरिम जमानत पर सत्रों में उपस्थित हो रहे हैं। भाजपा–नीत केंद्र सरकार को विवाद से दूर रखने के प्रयास में बिट्टू ने जोर देकर कहा कि NSA के तहत पैरोल देने का फैसला राज्य सरकार के पास होता है। उन्होंने कहा, “केंद्र अमृतपाल को जेल में नहीं रख रहा है, यह पंजाब सरकार की जिम्मेदारी है। भाजपा पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। हम लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।” बिट्टू का यह बयान केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीधे आरोपों से अलग करता दिखाई देता है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि अमृतपाल पर NSA लगाने में केंद्र और राज्य दोनों की साझा भूमिका रही थी। पिछले बयानों से बिल्कुल उलट रुख अमृतपाल के लिए अंतरिम पैरोल की वकालत बिट्टू के पुराने बयानों से पूरी तरह उलट है। 2024 के चुनावों के दौरान लुधियाना से भाजपा उम्मीदवार रहते हुए बिट्टू ने अमृतपाल को पंजाब की शांति के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि “अमृतपाल सिंह जैसे लोग पंजाब में शांति पसंद लोगों को रहने नहीं देंगे।” बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी 1995 में खालिस्तानी उग्रवादियों से जुड़े एक आत्मघाती हमले में हत्या हो गई थी। वे लंबे समय से खुद को अलगाववाद विरोधी मजबूत आवाज के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। जुलाई 2024 में लोकसभा में अमृतपाल की नजरबंदी के मुद्दे पर बिट्टू की कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के साथ तीखी बहस भी हुई थी। बिट्टू ने NSA का बचाव करते हुए इसे “कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ हथियार” बताया था। “कट्टरपंथी और खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के नेता अमृतपाल सिंह (32) को अप्रैल 2023 में पंजाब पुलिस ने हिंसा भड़काने, अलगाववाद को बढ़ावा देने और कानून–व्यवस्था भंग करने के आरोपों में, एक महीने तक चली तलाश–अभियान के बाद गिरफ्तार किया था।”