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शादी के दो दिन भी नहीं टिक पाया रिश्ता! सुहागरात के बाद दुल्हन ने दिखाए असली रंग, परिवार हैरान

मोतिहारी बिहार के मोतिहारी जिले में एक नई नवेली दुल्हन ने सुहाग के महज दो दिन बाद ही अपने पति और ससुराल वालों को उस वक्त गहरा सदमा दिया, जब वह कॉलेज जाने का बहाना बनाकर अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया, बल्कि क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। घटना के बाद से दूल्हा पक्ष सदमे में है और पुलिस से न्याय की गुहार लगा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, संग्रामपुर थाना क्षेत्र के इन्द्रगछि गांव की लक्की कुमारी की शादी 20 फरवरी को तुरकौलिया थाना क्षेत्र के मझार गांव निवासी भानु शर्मा के साथ धूमधाम से हुई थी। 21 फरवरी को विदाई के बाद दुल्हन ससुराल पहुंची थी। अगले ही दिन, 22 फरवरी को दुल्हन ने एक सोची-समझी साजिश के तहत पति से कहा कि उसकी कॉलेज में परीक्षा है। पति उसे छोड़ने के लिए मोतीहारी स्थित कॉलेज लेकर पहुंचा। कॉलेज गेट पर पति को बाहर खड़ा कर वह अंदर गई, लेकिन वहां से वह वापस नहीं लौटी। आरोप है कि वह कॉलेज के अंदर से ही अपने मायके के एक युवक (प्रेमी) के साथ फरार हो गई। नकदी और जेवर लेकर हुई फरार ससुराल पक्ष का आरोप है कि जाते-जाते दुल्हन अपने साथ मायके से मिले उपहारों के अलावा ससुराल के सभी कीमती आभूषण और घर में रखे करीब एक लाख रुपये नकद भी ले उड़ी।  इस घटना के बाद दूल्हा पक्ष ने तुरकौलिया थाने में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि दुल्हन की मां एक आंगनबाड़ी सेविका है और लक्की कुमारी शादी से पहले एक निजी स्कूल में पढ़ाती थी, जहां से उसके प्रेम संबंधों की शुरुआत होने की बात सामने आ रही है। पुलिस फिलहाल मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन में जुटी है। इस घटना ने आसपास के इलाकों में रिश्तों की मर्यादाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंपई सोरेन के पोते का निधन, अंतिम यात्रा में पहुंचे CM हेमंत सोरेन; पूरे गांव में मातमी सन्नाटा

जमशेदपुर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन का गुरुवार को पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका अंतिम संस्कार जमशेदपुर के पास सरायकेला-खरसावां जिले के जिलंगगोड़ा गांव में हुआ। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कई विधायक-सांसद, समर्थक और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। वीर सोरेन अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए मनाली गए थे। जानकारी के अनुसार वे 22 फरवरी को मनाली पहुंचे थे और सिमसा के एक होम स्टे में ठहरे थे। 23 फरवरी को उन्होंने सोलंग और सेथन इलाके में घूमने गए थे। 24 फरवरी की दोपहर करीब 12:30 बजे वे घूमकर कमरे में लौटे और सिर में तेज दर्द की शिकायत की। दोस्तों ने ऑनलाइन दवा मंगाकर उन्हें दी, जिसके बाद वे आराम करने लगे। करीब 2:30 बजे कमरे से गिरने की आवाज आई। दोस्त अंदर पहुंचे तो देखा कि वीर सोरेन फर्श पर अचेत पड़े हैं। उन्हें तुरंत गाड़ी से मनाली सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अस्पताल ले जाते समय उनके मुंह से झाग निकल रहा था। गांव पहुंचते ही माहौल हुआ गमगीन गुरुवार दोपहर जब वीर सोरेन का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव जिलंगगोड़ा पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अंतिम संस्कार से पहले चंपाई सोरेन के आवास पहुंचे और वीर सोरेन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मिलकर उन्हें ढांढ़स बंधाया। सिंहभूम की सांसद जोबा माझी भी गांव पहुंचीं और वीर सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने चंपाई सोरेन से मुलाकात कर इस दुख की घड़ी में परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि यह क्षति न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए दुखद है।  

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का झारखंड आगमन, पुष्पगुच्छ भेंट कर राज्य सरकार ने किया अभिनंदन

रांची  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को अपने निर्धारित दौरे पर झारखंड की राजधानी रांची पहुंचीं। उनका स्वागत बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर भव्य तरीके से किया गया। राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने भव्य जगन्नाथ मंदिर का किया शिलान्यास राष्ट्रपति के आगमन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस और विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए, ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। स्वागत समारोह के बाद राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर के जरिए जमशेदपुर के लिए रवाना हो गईं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी उनके साथ थे। जमशेदपुर प्रशासन ने भी सुरक्षा को लेकर पूरी तैयारी कर ली थी। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुआ भूमि पूजन जमशेदपुर के कदमा मरीन ड्राइव पहुंचकर राष्ट्रपति ने भव्य जगन्नाथ मंदिर का शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच विधि-विधान से भूमि पूजन संपन्न हुआ। यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनेगा।  

तीन दिन सीमांचल में अमित शाह, सियासी एजेंडे पर होगा मंथन

पटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर बुधवार शाम पहुंच चुके। पूर्णिया एयरपोर्ट पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मंत्री लेशी सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया। यहां से वह सड़क मार्ग से किशनगंज पहुंचे। यहां पर लैंड पोर्ट अथॉरिटी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए। किशनगंज में ही रात्रि विश्राम किया। आज यानी गुरुवार को गृह मंत्री अररिया में रहेंगे, जहां वह सुबह 11 बजे लेट्टी सीमा चौकी पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के जिला अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल सीमा से संबंधित मुद्दों का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें सुरक्षा को लेकर बातचीत होगी। आज ही वह दूसरे चरण की वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे और फिर रात रुकने के लिए पूर्णिया लौटेंगे। शुक्रवार यानी 27 फरवरी को गृह मंत्री शाह पूर्णिया में सीमावर्ती जिलों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बार फिर अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। समीक्षा बैठकों के अंतिम दौर के समापन के बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। यह तो थी अमित शाह के कार्यक्रम की जानकारी आगे आपको बताते हैं अमित शाह के कार्यक्रम का एजेंडा क्या है? 'यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है' वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि गृह मंत्री की यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है। इसमें सिलिगुड़ी कॉरिडोर का मुद्दा प्रमुख है। दूसरी जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज के कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। गृह मंत्री का इस कार्यक्रम पर काफी फोकस है। अररिया में वह वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इसके साथ ही वह सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा उपायों, प्रशासनिक तैयारियों और चल रही विकास पहलों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान वे भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 'बंगाल के कुछ प्रमुख नेता मुलाकात करने आएंगे' गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे का बंगाल चुनाव से जोड़कर देखा जाए या नहीं? इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि बंगाल चुनाव से इसे नहीं जोड़ना उचित नहीं होगा। अगर बंगाल चुनाव मुद्दा रहता तो वह बंगाल में ही प्रवास करते हैं। वह सीमा सुरक्षा पर बातचीत करने आए हैं। हां, सीमावर्ती जिले जैसे उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर या अन्य जिलों के कुछ नेता गृह मंत्री से मुलाकात करने जरूर आएंगे। 'सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे' वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि अमित शाह के सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि भारत सरकार सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। गृह मंत्री शाह ने हाल के वर्षों में कई बार सीमांचल का दौरा किया है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी वह कई बार घुसपैठियों का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप भी लगाया था कि क्षेत्र में अवैध प्रवासियों के माध्यम से वोट बैंक बनाने के प्रयास चल रहे हैं। सभी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह से रोक लगाने की बात कही थी। 'इन चीजों पर भी मंथन करेंगे अमित शाह' वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि दूसरी बात यह है कि सीमांचल के जिलों की सीमा पश्चिम बंगाल से सटती है। इस सीमवर्ती गांवों में सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिनका संबंध बंगाल से भी है। उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर के विधानसभा सीटों पर भाजपा फोकस कर रही है। किशनगंज और पूर्णिया में रात्रि विश्राम के दौरान वह सीमावर्ती जिलों के कुछ प्रमुख नेताओं से मिलकर रणनीति बना सकते हैं। इसके अलावा घुसपैठियों का मुद्दा भी है। यह कॉमन मुद्दा है जो कि सीमांचल और बंगाल में दोनों जगहों पर है। इसके अलावा बार्डर पर सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जाए? इन चीजों पर भी मंथन करेंगे। गृह मंत्री के दौरे पर भाजपा ने क्या कहा? भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से हमलोग गृह मंत्री का स्वागत करते हैं। गृह मंत्री का घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रूख है। वह घुसपैठियों को हर हाल में देश के बाहर करना चाहते हैं। आतंकवाद और आतंरिक सुरक्षा पर भी उनका काफी फोकस है। तीन दिवसीय दौरे पर वह इन्हीं मुद्दों पर फोकस करेंगे। तेजस्वी यादव गृह के सीमांचल दौरे पर क्या बोले? तेजस्वी यादव ने गृह मंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही राजनीतिक कवायद है। उन्होंने कहा कि घुसपैठ कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है और इससे पहले भी झारखंड व बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया था। अब बंगाल चुनाव में इस मुद्दे को उठाकर जनता को भटकाने की कोशिश की जा रही है।

झारखंड विधानसभा में ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति पर घमासान

रांची. डुमरी विधायक जयराम महतो ने गुरुवार को झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ओबीसी छात्रों को अब तक छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने का गंभीर मामला सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति में हो रही देरी से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जयराम महतो ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि आखिर कब तक छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति की राशि मिलेगी? उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय विषय नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। मंत्री का जवाब: केंद्र से राशि नहीं मिली जवाब में कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि केंद्र सरकार से केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं होने के कारण राज्यांश की राशि भी जारी नहीं की जा सकी है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग के एक संकल्प के अनुसार जब तक केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं होती, तब तक राज्यांश की निकासी संभव नहीं है। मंत्री ने स्वीकार किया कि इसी प्रक्रिया संबंधी बाध्यता के कारण छात्रवृत्ति भुगतान में विलंब हुआ है। राज्य सरकार कर रही वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार मंत्री चमरा लिंडा ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है। वित्त विभाग के उस संकल्प को शिथिल करने पर मंथन चल रहा है, जिसमें केंद्रांश की राशि मिलने से पहले राज्यांश जारी करने पर रोक है। यदि इस संकल्प में ढील दी जाती है, तो राज्यांश की राशि जारी कर छात्रों को जल्द राहत दी जा सकेगी। ब्याज रहित ऋण का सुझाव, मंत्री ने किया असंभव बहस के दौरान जयराम महतो ने सुझाव दिया कि जब तक छात्रवृत्ति की राशि जारी नहीं होती, तब तक छात्रों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जाए या विधायक निधि से अस्थायी सहायता दी जाए, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो। इस पर मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने दोहराया कि व्यावहारिक समाधान वित्त विभाग के संकल्प में शिथिलता लाने में ही है। छात्रों की निगाह सरकार के फैसले पर ओबीसी छात्रवृत्ति का मामला राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों से जुड़ा है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार वित्तीय नियमों में कब और कैसे बदलाव करती है, ताकि लंबित छात्रवृत्ति राशि का भुगतान सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रपति ने जमशेदपुर में जगन्नाथ आध्यात्मिक केंद्र की रखी नींव

रांची. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को झारखंड के जमशेदपुर स्थित कदमा इलाके में 'श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चैरिटेबल सेंटर' की नींव रखी। राष्ट्रपति ने पुजारियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि भूमि पूजन किया और इसकी आधारशिला रखी। दिग्गज हस्तियां भी रहीं मौजूद इस मौके पर राष्ट्रपति के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। इनके अलावा टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। इससे पहले, रांची एयरपोर्ट पहुंचने पर मुख्यमंत्री सोरेन और राज्यपाल गंगवार ने राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। क्या है परियोजना की खासियत? श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी और उद्योगपति एस.के. बेहरा ने बताया कि यह प्रस्तावित केंद्र ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर की हूबहू नकल (कॉपी) होगा। इसे खरखाई नदी के किनारे लगभग 2.5 एकड़ जमीन पर बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये है। युवाओं के विकास पर जोर इस केंद्र के निर्माण से झारखंड में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य इस केंद्र को युवाओं के चरित्र निर्माण और नैतिक विकास के एक बड़े हब के रूप में विकसित करना है। एस.के. बेहरा के अनुसार, यह केंद्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के समग्र व्यक्तित्व विकास (होलिस्टिक पर्सनैलिटी डेवलपमेंट) को बढ़ावा देने का काम करेगा। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए है। इस आध्यात्मिक केंद्र के बनने से जमशेदपुर की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।

बिहार में काशी-अयोध्या की तर्ज पर बनेगा शिव सर्किट

मुजफ्फरपुर. बिहार की धरती अब सिर्फ ज्ञान, अध्यात्म और विरासत की पहचान भर नहीं रहेगी, बल्कि भगवान शिव के भक्तों के लिए एक भव्य आस्था गलियारे के रूप में भी विकसित होने जा रही है. राज्य सरकार ने बिहार में ‘बुद्ध सर्किट’ और ‘रामायण सर्किट’ के बाद अब ‘शिव सर्किट’ विकसित करने का मास्टरप्लान तैयार कर लिया है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. विधानसभा में पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य के प्रमुख शिव मंदिरों को बेहतर सड़क और सुविधाओं से जोड़ा जाएगा. इस योजना के तहत बाबा गरीबनाथ मंदिर से लेकर अजगैबीनाथ मंदिर तक की दूरी न सिर्फ आसान होगी, बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और सुविधाजनक बन जाएगी. विधायकों से मांगी जाएगी मंदिरों की सूची राज्य सरकार इस योजना को पूरी तरह समावेशी और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है. पथ निर्माण मंत्री ने विधायकों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के उन मंदिरों की जानकारी उपलब्ध कराएं, जहां सावन समेत पूरे वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. इन सुझावों के आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे बजट और सहयोग के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. सरकार की मंशा ‘शिव सर्किट’ को पहले से विकसित धार्मिक पर्यटन मार्गों की तर्ज पर मजबूत आधार देना है. यदि यह पहल सफल होती है तो राज्य के प्रमुख शिव धामों तक श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है. कई प्रसिद्ध शिव धाम हो सकते हैं शामिल विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान विधायकों ने कई प्रमुख शिव मंदिरों को प्रस्तावित सर्किट में शामिल करने की मांग उठाई. इनमें मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर, मधुबनी का उगना महादेव मंदिर, सोनपुर का हरिहरनाथ मंदिर, गुरुआ का बैजूधाम सहित कई प्रसिद्ध शिवालयों का नाम सामने आया. इसके साथ ही पूर्वी चंपारण का सोमेश्वरनाथ मंदिर, लखीसराय का अशोक धाम और मधेपुरा स्थित सिंघेश्वर महादेव मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को भी इस योजना में जोड़ने की बात कही गई. चर्चा के दौरान कांवर यात्रा मार्गों को बेहतर बनाने और नए कांवर पथ विकसित करने की मांग भी उठी, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बन सके. पर्यटन विभाग का मानना है कि यदि सर्किट आकार लेता है तो बिहार में सालभर धार्मिक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा. बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक सुविधाएं और सुनियोजित प्रचार-प्रसार के जरिए राज्य के प्राचीन शिव धाम राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित हो सकते हैं.

मुजफ्फरपुर में अपराध रोकने कई थानों के थानाध्यक्ष बदले

मुजफ्फरपुर. अपराध नियंत्रण व विधि व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने थानाध्यक्ष समेत 11 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है। इसके तहत मनियारी, औराई, गायघाट समेत छह थानों में नए थानाध्यक्षों की तैनाती की गई है। पूर्व से जमे कई थानाध्यक्षों को क्राइम कंट्रोल में विफलता के लिए हटाया गया है। एसएसपी कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञिप्ति में बताया गया कि कार्यकुशलता, लोकहित एवं रिक्ति के आधार पर इन पुलिस पदाधिकारियों को पुलिस उपमहानिरीक्षक तिरहुत क्षेत्र के अनुमोदन उपरांत पदस्थापित किया गया है। जारी सूची के अनुसार अहियापुर के अपर थानाध्यक्ष दारोगा जितेंद्र महतो को मनियारी थानाध्यक्ष बनाया गया है। औराई थानाध्यक्ष राजा सिंह को गायघाट थानाध्यक्ष। औराई थाना में अनुसंधान इकाई में तैनात दारोगा हेमलता कुमारी को औराई थानाध्यक्ष। काजीमोहम्मदपुर थाना के अनुसंधान इकाई से दारोगा शिवचन्द्र यादव को बरियारपुर थानाध्यक्ष, अनुसंधान इकाई कांटी थाना से दारोगा यशवंत कुमार मिश्रा को बोचहां थानाध्यक्ष, अनुसंधान इकाई मोतीपुर थाना से दारोगा अमिता सिंह को महिला थानाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा मनियारी थानाध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता को वहां से बदलकर अनुसंधान इकाई साइबर थाना में तैनात किया गया है। बोचहां थानाध्यक्ष श्रीकांत चौरसिया को अनुसंधान इकाई सदर थाना में तैनात किया गया है। बरियारपुर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार को अनुसंधान इकाई अहियापुर थाना, महिला थानाध्यक्ष सबिता कुमारी को प्रभारी एएचटीयू कोषांग एसएसपी कार्यालय और गायघाट थानाध्यक्ष सरूण कुमार मंडल को अनुसंधान इकाई अहियापुर थाना में तबादला किया गया हैं। 

बैलगाड़ी से निकली बारात ने देसी थीम वाली शादी की ताजा की यादें

समस्तीपुर. शहर की सड़कों पर बुधवार की शाम कुछ अलग ही था। न डीजे की कानफोड़ू आवाज, न रोशनी की चकाचौंध, न लग्जरी गाड़ियों की कतार। अगर कुछ था तो बैलों की सधी हुई चाल, लकड़ी की बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट और लोकगीतों की कोमल तान। यह नजारा देख हर राहगीर ठिठक गया, मोबाइल कैमरे निकल आए और एक ही सवाल गूंजने लगा, अब भला बैलगाड़ी से भी कोई बरात जाता है?  आलोक की अनूठी शादी यह अनोखी और पूरी तरह देसी थीम वाली बरात शहर के जाने-माने कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी की थी। गोला रोड स्थित होटल से जब शाम ढलते ही बरात निकली, तो मानो समय कुछ पल के लिए पीछे लौट गया। दूल्हा रथ पर सवार था। सिर पर सेहरा, चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और मन में परंपरा को जीने का संकल्प। उसके पीछे-पीछे 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।  बैलगाड़ी की शाही सवारी  इन बैलगाड़ियों पर बैठे बाराती किसी शाही सवारी का आनंद ले रहे थे। कहीं सोफा सेट लगे थे, तो कहीं गद्दों पर बैठकर लोग लोकधुनों के साथ झूम रहे थे। करीब दो किलोमीटर का यह सफर तय कर जब बरात मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंची, तब तक यह केवल एक विवाह जुलूस नहीं रह गई थी, बल्कि चर्चा का विषय बन चुकी थी। इस बारात की खास बात यह थी कि यह पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त थी। न धुएं का गुबार, न शोर-शराबा। सिर्फ उल्लास, अपनापन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। बैलगाड़ी के पहियों की आवाज, फूलों की खुशबू और लोकगीतों की तान ने ऐसा दृश्य रचा, जैसे गांव की आत्मा खुद इस विवाह की साक्षी बन गई हो। पर्यावरण संरक्षण का संदेश कार्यक्रम संयोजक और पशुप्रेमी महेंद्र प्रधान बताते हैं कि इस देसी और पर्यावरण-संवेदनशील आयोजन के लिए आसपास के गांवों से 35 जोड़ी बैलगाड़ियों को बुलाया गया था। सभी को पारंपरिक अंदाज में सजाया गया। कुछ खास मेहमानों के लिए बैलगाड़ियों पर सोफा लगाए गए, जबकि बाकी में गद्दों की व्यवस्था की गई थी। जब यह अनोखी बरात सड़क पर निकली, तो देखने वालों के चेहरे पर हैरानी और मुस्कान एक साथ थी। किसी ने कहा,“यह तो असली शादी है”, तो किसी ने इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर मेल बताया। शोर और दिखावे के इस दौर में यह देसी थीम वाली शादी यह संदेश दे गई कि सादगी, संस्कृति और पर्यावरण के साथ भी उत्सव उतना ही भव्य हो सकता है। वहीं दूल्हा आलोक ने कहा कि कुछ अलग करने की चाहत थी, लेकिन उसका यह स्वरूप होगा, सोचा नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन को दी राहत, ED की खिंचाई, CJI ने दी अहम नसीहत

रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज शिकायत वाद पर रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने रांची की MP-MLA कोर्ट की विशेष अदालत में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही ED को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद फिलहाल निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है। सीजेआई की अगुवाई वाली खंडपीठ में हुई सुनवाई मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। बहस के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने ED को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ED के जवाब के बाद ही मामले में अगली सुनवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल, MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक से राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।