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यूरिया–डीएपी के बढ़ते दामों से मची हाहाकार, गया जिले में खाद की किल्लत बढ़ी

गयाजी जिले में रबी फसल की बोआई का सीजन जोर पर है और इसी के साथ किसानों की आवश्यकताएं भी बढ़ गई हैं। कृषि विभाग ने दावा किया है कि बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसानों को सरकारी दुकानों और अधिकृत केंद्रों पर बीज सरलता से उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान भी विभाग की इस व्यवस्था से संतुष्ट दिख रहे हैं। उर्वरक को लेकर किसानों की परेशानी लेकिन दूसरी ओर उर्वरक को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। जिले में यूरिया और डीएपी का पर्याप्त भंडारण होने के बावजूद बाजार में इनकी कीमतें नियंत्रित स्तर से अधिक वसूली जा रही हैं। किसानों का आरोप है कि विक्रेता मनमाने दाम पर उर्वरक बेच रहे हैं। जिसके कारण बोआई लागत बढ़ गई है। शहर के किरानी घाट स्थित एक उर्वरक विक्रेता ने पुष्टि करते हुए बताया कि वर्तमान में यूरिया 360 रुपये प्रति बोरा और डीएपी 16 सौ रुपये प्रति बोरा बेचा जा रहा है। वहीं फतेहपुर एवं टनकुप्पा प्रखंड में कुल 73 निबंधित उर्वरक और बीज दुकानें हैं, लेकिन इनमें से कई दुकानों को एफएमएस आईडी नहीं मिलने के कारण संचालन अस्थायी रूप से बाधित है।  फतेहपुर में 47 में से 30 दुकानें सक्रिय फतेहपुर में 47 में से 30 दुकानें सक्रिय हैं, जबकि टनकुप्पा में 26 दुकानों से उर्वरक और प्रमाणित बीजों की बिक्री जारी है। रबी फसल के मौसम में किसानों को डीएपी के बाद यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। सरकारी दर के अनुसार डीएपी का मूल्य 1350 रुपये प्रति बोरी निर्धारित है, लेकिन किसानों का आरोप है कि बाजार में यह 15 सौ से 16 सौ रुपये तक में बेचा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां उर्वरक के साथ फास्फेट, जिंक, पोटाश जैसी पौष्टिक किट देती हैं, जिसे जोड़कर मूल्य बढ़ जाता है। किसान विनय यादव और महेंद्र यादव ने बताया कि फतेहपुर प्रखंड में बिस्कोमान का गोदाम नहीं होने से उन्हें खुदरा दुकानों से ही उर्वरक खरीदना पड़ता है। जबकि टनकुप्पा में बिस्कोमान का एक गोदाम है।  जहां किसानों को सरकारी दर पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। किसानों का कहना है कि सरकारी गोदाम फतेहपुर में भी खोला जाए, ताकि किसानों का आर्थिक बोझ कम हो सके।  सरकार द्वारा यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरा  उधर, प्रखंड कृषि पदाधिकारी टनकुप्पा सोमेश्वर मेहता और फतेहपुर बीएओ दिलीप रजक ने बताया कि विभागीय आदेश के अनुसार दुकानों की समय-समय पर जांच की जाती है। यदि किसी दुकानदार द्वारा अधिक दर पर उर्वरक बेचने की शिकायत मिलती है तो जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  वहीं गुरुआ प्रखंड क्षेत्र के गुरुआ, सगाही और भरौधा बाजार में स्थित करीब दो दर्जन उर्वरक दुकानों पर किसानों से मनमाने दाम वसूलने का आरोप लगा है। सरकार द्वारा यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरा तथा डीएपी 1350 से 1550 रुपये प्रति बैग निर्धारित है। लेकिन दुकानदार किसानों को यूरिया 350 रुपये और डीएपी 17 सौ रुपये प्रति बोरा में बेच रहे हैं। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसान रामनरेश सिंह और ललन सिंह ने बताया कि गुरुआ क्षेत्र के लगभग सभी दुकानदार अधिक कीमत लेकर ही खाद बिक्री किया जा रहा है।  इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी अमित भारती ने कहा कि यदि जांच में कालाबाजारी की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों से अपील की कि वे निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान की स्थिति में इसकी सूचना विभाग को दें।  

अपराध पर जीरो टॉलरेंस: सम्राट चौधरी बोले— बिहार में बदमाशों की अब खैर नहीं

पटना बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस बार गृह मंत्रालय की भी जिम्मेदारी मिली है। इस बीच, गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने शनिवार को साफ कर दिया कि बिहार में अपराधियों की खैर नहीं है, उन्हें प्रदेश से बाहर ही जाना होगा। दरअसल, गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे। प्रदेश कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस बीच, मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, " भाजपा नेतृत्व, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर मुझे गृह मंत्री के तौर पर काम करने का मौका दिया है। बिहार की जनता को मैं आश्वस्त करता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार में लगातार सुशासन स्थापित होने की चिंता की जाएगी।" उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार ने लगातार सुशासन स्थापित किया है। आगे भी सुशासन की पूरी व्यवस्था उनके ही मार्गदर्शन और नेतृत्व में होगी।" बिहार के उप मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "बिहार में सुशासन है। बिहार में एक व्यवस्था खड़ी है। बिहार के सुशासन ने अराजकता और जंगलराज को समाप्त कर दिया है और उसी व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा। लेकिन इतना तय है कि अपराधियों के लिए बिहार नहीं है। बिहार से बाहर ही अपराधियों को जाना होगा।" दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद शुक्रवार को बिहार सरकार में विभागों का बंटवारा कर दिया गया। नई कैबिनेट में सबसे अहम गृह विभाग डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को सौंपा गया है। भाजपा कोटे से आने वाले सम्राट चौधरी अब नीतीश सरकार में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की कमान संभालेंगे। गुरुवार को नीतीश कैबिनेट में कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर जबरदस्त सफलता हासिल की है। 

सरकार पहुँची गांव-गांव: DC ने जनसमस्याओं का किया समाधान, लोगों ने जताई संतुष्टि

 गढ़वा  गढ़वा जिले में जनता तक सुशासन पहुंचाने के लिए “आपकी योजना–आपकी सरकार–आपके द्वार” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। झारखंड राज्य स्थापना दिवस के रजत पर्व पर जनता को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए इस मुहिम की शुरुआत की गई। सेवा का अधिकार का ये कार्यक्रम सप्ताह तक चला जाएगा। गढ़वा के चिनियां प्रखंड के बरवाडीह पंचायत में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त दिनेश यादव ने किया। वहीं कार्यक्रम स्थल पर अलग अलग विभागों द्वारा लगाए गए जनकल्याणकारी योजनाओं के स्टॉलों का भी डीसी ने जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनहित से जुड़े कार्यों को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए। शिविर में पहुंचे लाभुकों से उपायुक्त ने सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।  

सरकार बदली, चुनौतियाँ वही: शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या होगा असर?

छपरा बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की उम्मीद लगाए बैठी जनता तब हैरान रह गई, जब मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री जैसे अहम पद फिर से पुराने चेहरों को ही सौंप दिए गए। इसके बाद राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तविक सुधार को लेकर कई सवाल तेज हो गए हैं। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में स्थिरता प्रशासनिक निरंतरता के लिहाज से फायदेमंद हो सकती है, लेकिन जिन विभागों की पिछले कार्यकाल में सबसे ज्यादा आलोचना हुई, जैसे सरकारी अस्पतालों की बदहाली, चिकित्सकों-कर्मियों की कमी, स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और कमजोर आधारभूत संरचना उनमें बदलाव न होना जनता के मन में संदेह पैदा कर रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर बढ़ा असंतोष स्थानीय लोगों का कहना है कि सदर अस्पतालों से मरीजों को बिना इलाज रेफर कर देने की पुरानी व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की आधारभूत संरचना तो तैयार कर दी गई है, लेकिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की भारी कमी आज भी बनी हुई है। विगत वर्षों में स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, अस्पतालों में दवाओं और मशीनों की कमी, पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर होना और बेहतर इलाज के लिए बिहार से बाहर जाने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे में पुरानी टीम का ही पुनः जिम्मेदारी संभालना जनता के बीच यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या अबकी बार वाकई बदलाव देखने को मिलेगा। सारण प्रमंडल के सारण, सिवान और गोपालगंज जिलों सहित कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं “इलाज” से ज्यादा “रेफर” आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। सड़क हादसे, गोलीबारी और अन्य आपात मामलों में प्रखंड अस्पतालों से लेकर जिला सदर अस्पताल तक केवल औपचारिकता निभाकर मरीजों को पटना पीएमसीएच या अन्य मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। शिक्षा विभाग में भी सुधारों पर सवाल शिक्षा विभाग पर भी सरकार लगातार निशाने पर रही है। शिक्षकों की भारी कमी, स्कूलों में संसाधनों की दयनीय स्थिति और सरकारी स्कूलों के गिरते परिणामों ने चिंता बढ़ाई है। विभाग से जुड़े अधिकारियों व शिक्षक संघों का कहना है कि बिना संरचनात्मक सुधार के केवल घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। हालांकि राज्य सरकार ने दावा किया है कि 2025–30 के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और बजट व इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों स्तरों पर बड़े कदम उठाए जाएंगे। क्या बदलेगी बिहार की तस्वीर? अब जनता की नजर इस बात पर है कि क्या पुरानी टीम, नई नीतियों और नई ऊर्जा के साथ सचमुच स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों की जर्जर स्थिति को बदल पाएगी। विशेषकर शिक्षा विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मौजूदा शिक्षा मंत्री को सौंपी गई है। जनता अब सरकारी दावों नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव का इंतजार कर रही है।

गे-लेस्बियन विवाह से भूकंप की बात कहकर कन्हैया भेलारी हुए ट्रोल, रोहिणी का पुराना बयान फिर चर्चा में

पटना  बेटियों को मायके से दूर रहना चाहिए जैसा बयान देने पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या से भर पेट बात सुनने वाले बिहार के पत्रकार कन्हैया भेलारी का एक नया वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में उनकी पौराणिक सोच का स्तर और नीचे गिरते देखा जा सकता है। यू-ट्यूब चैनल लल्लटॉप के शो में कन्हैया भेलारी यह कहकर सबको चौंका दे रहे हैं कि लड़का का लड़का और लड़की का लड़की से शादी (सेम सेक्स मैरिज, गे मैरिज, लेस्बियन मैरिज, समलैंगिक संबंध) करने के कारण भूंकप आ रहे हैं। चैनल का पत्रकार जब उनको भूकंप के वैज्ञानिक कारण बताता है तो वो और जिद पकड़ लेते हैं और कहते हैं कि एडवांस होने का मतलब ये सब नहीं है।   कन्हैया भेलारी को रोहिणी आचार्या ने टीवी चैनलों पर उनके बयानों को लेकर 18 नवंबर को फोन करके काफी फटकारा था। भेलारी ने किसी चैनल पर कहा था कि बेटियों को शादी के बाद नैहर यानी मायके से दूर रहना चाहिए। बेटियों को शादी, पर्व त्योहार और न्योता पर ही मां-बाप के घर आना चाहिए। बता दें कि चुनाव नतीजों के अगले दिन लालू यादव के परिवार में रोहिणी आचार्या और तेजस्वी यादव के बीच हार के कारणों को लेकर विवाद हुआ था। रोहिणी ने आरोप लगाया था कि संजय यादव का नाम लेने पर उन्हें गाली दी गई और उन पर चप्पल चलाया गया। रोहिणी तब से दिल्ली होते हुए मुंबई में अपनी सास के पास हैं। ताजा वायरल बयान में कन्हैया भेलारी महिला का महिला और पुरुष का पुरुष से समलैंगिक संबंध को गलत बताते हुए कह रहे हैं कि इन्हीं कारणों से भूकंप आता है। भेलारी ने कहा है कि आजकल ऐसा हो गया है कि लड़का दूसरे लड़के से शादी कर लेता है और कोई लड़की किसी लड़की से ही शादी कर लेती है। वो इसे ठीक नहीं मानते। जब उनसे कहा गया कि अगर कोई समलैंगिक संबंध से खुश है तो उनको क्या समस्या है। उनके अपने अधिकार हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने रजामंदी दे दी है। इसे अपराध की श्रेणी से बाहर रखा है। इस पर भेलारी ने अजीबोगरीब जवाब दिया। भेलारी ने कहा कि इसीलिए भूकंप आता है। जब चैनल ने भूकंप का वैज्ञानिक कारण बताया तो भेलारी ने कहा- इसका कोई मतलब है जी। एडवांस होने का यह अर्थ नहीं है। हम इसको नहीं मानते। कन्हैया भेलारी ने एक न्यूज चैनल के डिबेट में कहा था कि ब्याही बेटियों को अपने मायके में कम रहना चाहिए। यहां कुंडली मारकर नहीं बैठना चाहिए। उन्हें किसी खास अवसर पर मायके आना चाहिए और फिर चले जाना चाहिए। बेटियों को पिता परिवार के मसलों में दखल नहीं देना चाहिए। इस पर रोहिणी आचार्या ने उनकी क्लास लगा दी थी और कहा था कि बेटियों के हक में दखल देने का अधिकार आपको किसने दे दिया। रोहिणी ने फोन पर बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था।

पटना में शिक्षक को गोलियों से भुना, इलाज के दौरान PMCH में दम तोड़ा

वैशाली बिहार के सोनपुर में शुक्रवार की शाम एक शिक्षक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना पहलेजा थाना क्षेत्र के खरिक बाजार के पास हुई, जहां प्राथमिक विद्यालय गंगाजल में पदस्थापित 45 वर्षीय शिक्षक सनोज कुमार को बाइक सवार दो अपराधियों ने सिर में गोली मारकर फरार हो गए। शिक्षक सनोज कुमार स्कूल से अपनी बाइक पर घर लौट रहे थे और घर से कुछ ही दूरी पर थे कि पीछे से आए दो अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोली चलाई। गोली सिर के पीछे लगी और वह सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें गंभीर हालत में पटना PMCH ले जाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दिनदहाड़े बाजार के पास हुई इस वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही सारण एसपी डॉ. कुमार आशीष, ग्रामीण एसपी संजय कुमार और सोनपुर एसडीपीओ प्रीतीश कुमार मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसडीपीओ ने बताया कि मौके से एक खोखा बरामद किया गया है और प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह पैसों के लेनदेन का विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गोली शिक्षक के सिर के पीछे से दागी गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। फिलहाल परिजनों द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के पिता ने बताया कि सनोज कुमार का लगभग तीन लाख रुपये के लेनदेन को लेकर एक ग्रामीण से विवाद चल रहा था और इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। परिवार में घटना के बाद कोहराम मचा हुआ है, वहीं पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।  

एग्जाम सेंटर में अव्यवस्था हावी, भीड़भाड़ पर जेपीयू ने मांगा जवाब

  छपरा बिहार में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक अव्यवस्था की तस्वीरें अक्सर सामने आती रही हैं। कहीं आधारभूत संरचना का अभाव है, तो कहीं शिक्षकों और कर्मियों की भारी कमी। इसी बीच उच्च शिक्षा प्रणाली की लचर स्थिति को उजागर करती एक और घटना सामने आई है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर स्थापित जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) के स्नातक CBCS चार वर्षीय सत्र 2024–2028 की द्वितीय सेमेस्टर परीक्षा के दौरान गंभीर कुव्यवस्था सामने आई है। परीक्षा में भरी अव्यवस्था 20 नवंबर 2025 को आयोजित स्नातक द्वितीय सेमेस्टर परीक्षा के दौरान सिवान जिला मुख्यालय स्थित राजा सिंह महाविद्यालय परीक्षा केंद्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इस तस्वीर में एक ही बेंच पर पांच-पांच और छह-छह परीक्षार्थियों को बैठाकर परीक्षा कराई जा रही थी। यह स्थिति न केवल परीक्षा अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि कदाचार की संभावना को भी बेहद बढ़ाती है। तस्वीर सामने आने के बाद छात्रों, अभिभावकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने जेपीयू प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की कड़ी आलोचना की। मेहनती छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। विश्वविद्यालय ने तुरंत लिया संज्ञान, जारी किया नोटिस वायरल तस्वीर को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने केंद्राधीक्षक को नोटिस जारी किया है। Letter No. CE 2456, Dated 21/11/2025 के माध्यम से दो दिनों के अंदर घटना पर स्पष्ट प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है। पत्र के साथ वह वायरल तस्वीर भी संलग्न की गई है, जिसमें अव्यवस्था साफ दिखाई दे रही है। केंद्राधीक्षक से कड़ा स्पष्टीकरण मांगा गया पत्र में उल्लेख है कि परीक्षा केंद्र पर व्यवस्था की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और केंद्राधीक्षक की है। वायरल फोटो विश्वविद्यालय की साख को धूमिल करने वाली है और इस पर तत्काल जवाब आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई कर सकता है। कॉलेज प्रशासन की भूमिका, परीक्षा कक्षों की क्षमता और व्यवस्थाओं की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने उच्च शिक्षा में परीक्षा अनुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि ऐसी अव्यवस्थाएं उनका भविष्य प्रभावित करती हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि जेपीयू कठोर कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका वनडे मुकाबला 30 नवंबर को, रांची में टिकटों की धूम

 रांची  झारखंड की राजधानी के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम (IND vs SA ODI JSCA Stadium) में 30 नवंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाले एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (ODI) मैच को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। स्टेडियम को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतकर्ता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।   जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव ने बताया कि आयोजन को यादगार बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। दोनों टीमें 27 नवंबर को चाटर्ड प्लेन से रांची पहुंचेगी। एयरपोर्ट से खिलाड़ियों को सीधे होटल ले जाया जाएगा। सुरक्षा के लिए विशेष रूट और अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जाएगी। वहीं 21 नवंबर यानी आज से टिकट जेनीईिटकट साइट पर ऑनलाइन टिकट  मिलना शुरू होगा और 25 नवंबर से सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्टेडियम टिकट काउंटर पर ऑफलाइन टिकट बिक्री शुरू होगी। दर्शकों से समय पर पहुंचने की अपील की गई है। किसी भी उम्र के बच्चे को प्रवेश के लिए अलग टिकट लेना अनिवार्य होगा। जेएससीए ने टिकटों की कीमत भी जारी कर दी है। वींग एक के लोअर टियर के लिए 1600 रुपए देने होंगे, वहीं अपर टियर के लिए 1300 रुपए का भुगतान करना होंंगा। इसके अलावा विंग बी के लिए टिकटों की कीमत लोअर टियर में 2200 रुपए  जबकि अपर टियर में 1700 रुपए जबकि  विंग डी में लोअर टियर की कीमट 2200 रुपए, स्पाइस बॉक्स के लिए 1700 रुपए, जबकि ईस्ट-वेस्ट हिल के लिए 1200 रुपए देने होंगे। इसके अलावा विंग सी के अपर टियर के लिए 1300 रुपए, जबकि लोअर टियर के लिए 1600 रुपए अदा करने होंगे।   एक टिकट पर सिर्फ एक बार प्रवेश    वहीं दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए है। पानी की बोतल छोड़कर कोई भी खाद्य पदार्थ स्टेडियम में ले जाना प्रतिबंधित है। एक टिकट पर सिर्फ एक बार प्रवेश मिलेगा। छोटे बच्चों को गोद में लाने की अनुमति नहीं – हर बच्चे का टिकट जरूरी। टिकट पर लिखे ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ, साउथ विंग के अनुसार ही संबंधित कतार में खड़ा होना होगा।गलत विंग की कतार में खड़े होने पर प्रवेश नहीं मिलेगा।करीब 39,000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम में भीड़ को सुचारू तरीके से संभालने के लिए अतिरिक्त गेट, पुलिस बल और वॉलंटियर्स लगाए जाएंगे। स्टेडियम को आकर्षक रोशनी और सजावट से संवारने का काम भी तेजी से चल रहा है। रांची में इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह है। जेएससीए का कहना है कि जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए मैच को पूरी तरह सफल बनाने की तैयारी जारी है।

ठंड बढ़ने की चेतावनी: बिहार में पारा गिरने के आसार, सतर्क रहें

पटना मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में आगामी दो दिनों तक न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, शनिवार से राज्य के विभिन्न हिस्सों में रात का पारा गिरना शुरू हो सकता है, जिससे रात के समय ठंढ में बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि अगले 48 घंटों तक प्रदेश में तापमान की स्थिति लगभग स्थिर बनी रहेगी। इसके बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के अधिकांश इलाकों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इस बदलाव के चलते देर रात और सुबह के समय शीतलहर जैसे हालात बनने की संभावना है। लोगों को ठंड से बचाव के आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। राज्य में दिन का तापमान अगले तीन से चार दिनों तक लगभग सामान्य रहने का अनुमान है। समस्तीपुर रहा सबसे ठंडा मौसम विभाग के मुताबिक अधिकतम तापमान में किसी बड़े उतार- चढ़ाव के संकेत नहीं मिले हैं। गुरुवार को समस्तीपुर राज्य का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पूरे प्रदेश का औसत न्यूनतम तापमान 13 से 20 डिग्री के बीच रहा। वहीं दूसरी ओर फारबिसगंज में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो दिन में सबसे गर्म रहा। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान 26.9 से 30.8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तरी भारत में हवाओं की दिशा बदलने और बादलों की कमी के कारण रात के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखी जायेगी। कुल मिलाकर, बिहार में अभी दिन में हल्की गर्माहट बनी रहेगी, लेकिन शनिवार से शुरू होने वाली ठंड रात के समय सिहरन बढ़ा सकती है।

फिर से जोड़े जाएंगे नए लाभुक: मंईयां योजना कैंप में इन जरूरी कागज़ों के साथ पहुँचे

पलामू आज से झारखंड में 'आपकी सरकार-आपके द्वार' कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू से ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इस दौरान आम जनता की समस्याओं को सुना और निपटाया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम में ही नए लाभुकों को मंईयां योजना से जोड़ने वाले हैं। आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू के लेस्लीगंज में इस अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। लाभुक अपने जरूरी दस्तावेज के साथ आपकी सरकार, आपकी योजना, आपके द्वार कार्यक्रम के कैंप में पहुंचेंगे और वहीं दस्तावेजों की जांच के बाद आवेदन स्वीकृत कर दिया जाएगा। कैंप लगाकर पात्र महिलाओं से लिया जाएगा आवेदन मंईयां सम्मान योजना में आवेदन के लिए आवेदकों को आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक, स्व-सत्यापन फॉर्म, दो पासपोर्ट साइज फोटो देनी होगी। 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। सभी जिलों में कैंप लगाकर पात्र महिलाओं से आवेदन लिया जाएगा। कैंप में ही दस्तावेज की जांच और स्वीकृति दोनों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अगर आप के परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, टैक्स जमा करता हो तो आप इस योजना में नहीं जुड़ सकती है। इन सब के बावजूद अगर आप योजना से जुड़ती है तो आप पर कार्रवाई भी की जा सकती है और फिर पैसे की वसूली भी की जाती है।