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चोरी गया ट्रक मिला: बिहार भेजने की साजिश में शामिल गिरोह पकड़ा गया

दुमका झारखंड के दुमका जिले के सरैयाहाट के पास से पुलिस ने लोहे की छड़ से लदे एक लापता ट्रक को बरामद कर लिया है। एक अधिकारी ने  यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि 16 नवंबर को गिरिडीह जिले से ट्रक चालक का शव बरामद कर लिया गया था। बगोदर के थाना प्रभारी विनय कुमार यादव ने बताया कि उन्हें 16 नवंबर की रात को 25 वर्षीय एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। यादव ने कहा, "दुमका में ट्रक की बरामदगी के बाद ही ट्रक चालक की पहचान से जुड़ा सुराग मिलना संभव हो पाया है। चालक की पहचान बिहार के खगड़िया जिले के रहने वाले धीरज कुमार के रूप में हुई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम इस घटना की जांच कर रहे हैं। अपराधियों ने लोहे की छड़ों से लदे ट्रक को गायब करने के इरादे से शायद चालक की हत्या की होगी, लेकिन पकड़े जाने के डर से उन्हें दुमका में ट्रक को लावारिस छोड़ना पड़ा।" पुलिस अधिकारी ने बताया कि ट्रक मालिक रणजीत रॉय ने उन्हें बताया कि 15 नवंबर को रानीगंज में ट्रक में सामान लादा गया था और घटना के समय वह उत्तर प्रदेश के बनारस जा रहा था। ट्रक मालिक पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के रहने वाले हैं। ट्रक मालिक ने यह भी दावा किया कि 16 नवंबर को चालक का मोबाइल बंद पाए जाने के बाद से उनका उससे संपर्क टूट गया था। सरैयाहाट थाने के प्रभारी जय प्रकाश दास ने बताया कि रॉय ने ट्रक में लगे जीपीएस की मदद से ट्रक का पता लगाया, जिसके बाद वह सरैयाहाट के एनएच-133 पर भलुआ मोड़ पहुंचे, जहां उन्हें ट्रक लावारिस पड़ा मिला। दास ने कहा, "ट्रक मालिक ने हमसे संपर्क किया। हमने ट्रक को जब्त कर बगोदर पुलिस से संपर्क किया, जिन्होंने हमें चालक के शव की बरामदगी के बारे में सूचित किया। इस संबंध में बगोदर पुलिस थाने में एक मामला दर्ज किया गया है। हम ट्रक को बगोदर पुलिस को सौंप देंगे।" पुलिस सूत्रों ने बताया कि अपराधियों ने चालक की हत्या कर ट्रक को बगोदर से बिहार ले जाने की योजना बनाई थी।

हलफनामे पर उठे सवाल: कसबा विधानसभा में नया राजनीतिक बवाल

पूर्णिया पूर्णिया जिले के 058-कसबा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल के बीच एनडीए उम्मीदवार और नव निर्वाचित विधायक नितेश कुमार सिंह के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। उनके चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर गलत या अधूरी जानकारी दिए जाने को लेकर एक गंभीर शिकायत दर्ज की गई है, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। भूभूमि सुधार उप समाहर्ता सह 58-कसबा की निर्वाची पदाधिकारी प्रीति कुमारी ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए इसे तात्कालिक प्रभाव से उप निर्वाचन पदाधिकारी, पूर्णिया को विस्तृत जांच के लिए अग्रसारित कर दिया है। डीसीएलआर कार्यालय द्वारा 12 नवंबर को जारी पत्रांक-87 में उप निर्वाचन पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे शिकायत पर गहन जांच करते हुए निष्कर्ष के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस पूरे मामले पर विधायक नितेश कुमार सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस शिकायत की जानकारी नहीं थी। एक एप्लीकेशन आया जिसमें कहा गया कि कुछ डिटेल्स पर्याप्त नहीं हैं। हम अपने हलफनामे में दी गई सभी जानकारी पर पूरी तरह आश्वस्त हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।” यह शिकायत जिला अधिवक्ता संघ, पूर्णिया के अधिवक्ता अनिल कुमार झा द्वारा दर्ज कराई गई है। हालांकि शिकायत के विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन पत्र के विषय से स्पष्ट होता है कि यह मामला नितेश कुमार सिंह के नामांकन के साथ संलग्न शपथ पत्र में दी गई सूचनाओं की सत्यता से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, जांच में हलफनामे में अंकित संपत्ति, देनदारियों या आपराधिक विवरण जैसी जानकारियों की सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जांच रिपोर्ट के परिणाम का कसबा सीट की चुनावी राजनीति पर सीधा असर पड़ सकता है।

मीटिंग में विवाद के नारे, तेजस्वी यादव ने संजय यादव का लिया पक्ष—जानें क्या कहा

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हालात ऐसे हैं कि भाजपा और जेडीयू की जोरदार जीत से ज्यादा आरजेडी की हार के चर्चे हैं। खासतौर पर तेजस्वी यादव और उनके दो करीबियों संजय यादव और रमीज नेमत खान को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य समेत पार्टी के कई लोगों ने संजय यादव और रमीज को लेकर सवाल उठाए हैं। आरोप हैं कि संजय यादव की सलाह पर ही तेजस्वी सारे फैसले लेते हैं और पार्टी के काडर एवं पुराने नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस बीच सोमवार को जब हार की समीक्षा और विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए तेजस्वी यादव के आवास पर मीटिंग हुई, तब भी यह मसला उठा। पटना के 1, पोलो रोड स्थित तेजस्वी के आवास पर मीटिंग से पहले आरजेडी के कुछ कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा सांसद संजय यादव के खिलाफ नारेबाजी भी की। संजय यादव हरियाणा जाओ के नारे लगे। इस बीच जब मीटिंग शुरू हुई तो संजय यादव का बचाव करने के लिए तेजस्वी खुद आगे आए। अपने करीबी पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा कि संजय ने बहुत मेहनत की है। उन्होंने कहा कि संजय यादव ने पार्टी के लिए जितना मेहनत किया, वह हम जानते हैं। दूसरे लोग इस बारे में नहीं जानते। इस दौरान संजय यादव भी मौजूद थे और सभी नेता चुपचाप सुनते रहे। आरजेडी की यह मीटिंग भी कम घटनाक्रम वाली नहीं रही। तेजस्वी यादव ने तो भावुक होकर खुद के विधायक दल का नेता ना बनने तक का प्रस्ताव रख दिया था। उनका कहना था कि यदि आप लोगों को लगता है कि कोई और नेता पार्टी के हितों के लिए ज्यादा बेहतर होगा तो उसे ही चुन लिया जाए। इस पर लालू यादव ने खुद दखल दिया और विधायकों से उन्हें मनाने के लिए कहा। यही नहीं लालू यादव ने इस दौरान परिवार में उपजे विवाद को भी निपटाने की बात कही। उन्होंने विधायकों से कहा कि आप लोग पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रयास करें। परिवार के विवाद आंतरिक मसले हैं और इन्हें हम खत्म कर लेंगे। गौरतलब है कि संजय यादव हरियाणा के रहने वाले हैं, वहीं रमीज नेमत खान यूपी के बलरामपुर के हैं। आरोप है कि तेजस्वी यादव इन्हीं सलाहकारों से घिरे हुए हैं और पार्टी के अन्य अहम लोगों से दूर हो गए हैं। इसके अलावा टिकट बंटवारे में भी इन्हीं लोगों की सलाह पर काम करने का आरोप है। ऐसे में अब जब नतीजे विपरीत आए हैं तो तेजस्वी के दोनों सलाहकार विरोधियों के निशाने पर हैं।  

रांची बिरसा मुंडा कारागार: HC ने सरकार को 48 घंटे में जेल अधीक्षक बहाल करने का आदेश दिया

रांची झारखंड उच्च न्यायालय ने बीते मंगलवार को राज्य सरकार को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के प्रबंधन के लिए तत्काल एक नियमित अधीक्षक की नियुक्ति करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ मीडिया के एक वर्ग में हाल ही में प्रकाशित खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन खबरों में जेल परिसर में दो विचाराधीन कैदियों के “एक हॉल के अंदर नाचने” का जिक्र था, जिसका वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। अदालत ने सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मोबाइल फोन, चार्जर, मादक पदार्थ आदि जेल परिसर में नहीं पहुंच सकें। पीठ ने जिला प्रशासन के साथ-साथ झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के अधिकारियों को जेल के अंदर नियमित अंतराल पर औचक निरीक्षण करने को कहा। इस मामले में अगली सुनवाई पांच जनवरी 2026 को होगी। ये विचाराधीन कैदी शराब घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर हिरासत में हैं। आईजी (जेल) सुदर्शन मंडल ने 12 नवंबर को खबर प्रकाशित होने के तुरंत बाद बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के सहायक जेलर देवनाथ राम और वार्डर बिनोद यादव को कर्तव्य में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया था।

JDU ने नीतीश को चुना नेता, कल शपथ समारोह में PM मोदी भी रहेंगे मौजूद

पटना जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायकों ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विधानमंडल दल का नेता चुन लिया है। सीएम आवास पर जदयू की बैठक में उन्हें नेता चुना गया। शाम 3.30 बजे राष्ट्रीय जनातंत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद नीतीश राजभवन जाकर सरकार बनाने का पेश करेंगे। एनडीए को बिहार चुनाव में दो तिहाई से भी ज्यादा बहुमत मिला है। विधानसभा की लगभग 83 फीसदी सीटों पर एनडीए के 202 विधायक बैठे नजर आएंगे। नीतीश गुरुवार को गांधी मैदान में शपथ लेंगे और उनके साथ कल गठबंधन के पांच दलों के लगभग डेढ़ दर्जन मंत्री शपथ ले सकते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी शपथ समारोह में शामिल होने कल सुबह 11 बजे पटना पहुंच रहे हैं। विधानसभा में एनडीए गठबंधन के सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों की बैठक में सम्राट चौधरी को विधानमंडल दल का नेता और विजय कुमार सिन्हा को उप-नेता चुना गया है। यानी दोनों नीतीश की नई सरकार में डिप्टी सीएम बने रहेंगे। सम्राट चौधरी का कद और प्रभाव पहले की तरह ज्यादा रहेगा। बिहार बीजेपी दफ्तर में विधानमंडल दल की बैठक के बाद इस चुनाव के पर्यवेक्षक और यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के नेता और उपनेता चुने जाने का ऐलान किया। नीतीश कुमार बिहार में साल 2000 में चुनाव के बाद हफ्ते भर के लिए पहली बार मुख्यमंत्री बने थे लेकिन बाद में वह सरकार गिर गई। 2005 में नीतीश बहुमत के साथ एनडीए सरकार का दूसरी बार मुखिया बने। उसके 8 साल से ऊपर लगातार सीएम रहे लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से नाता तोड़ लिया था। लोकसभा चुनाव में जेडीयू की हार के बाद उन्होंने सीएम पद की कुर्सी छोड़ दी और जीतनराम मांझी को कुछ समय के लिए पद पर बिठाया। इसके बाद मांझी को हटाकर नीतीश चौथी बार महागठबंधन सरकार के सीएम बने। फिर 2022 में नीतीश एक बार और महागठबंधन के साथ हो गए, लेकिन 2024 में फिर एनडीए से मिल गए। नीतीश की यह दसवीं सरकार होगी, लेकिन एनडीए की आठवीं सरकार होगी।

प्रशांत किशोर फिर चर्चा में: नई शर्तों के साथ राजनीति से दूरी और मौन व्रत की घोषणा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आखिरकार सामने आ ही गए। पटना में उन्होंने प्रेस वार्ता की। उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि हमलोगों से जरूर कुछ गलती हुई है। इसलिए ऐसा परिणाम दिया। जनता ने हमलोगों को नहीं चुना। जनता ने हमलोगों पर विश्वास नहीं दिखाया। इस हार की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरी है। जिस प्रयास से हमलोग जुड़े थे, उनका विश्वास नहीं जीत पाया। हमलोग सामूहिक तौर पर हारे हैं। जो लोग जीतकर आए, उन्हें मैं बधाई देता हूं। सीएम नीतीश कुमार और भाजपा को बधाई। हमलोग बिहार से गरीबी दूर करने और पलायन कम होने की कामना करते हैं। मैं बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खड़ा नहीं उतर सका, इसके लिए मैं माफी चाहता हूं। प्रायश्चित के तौर पर मैं भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखूंगा। जो भी जनसुराज के साथी हैं, सभी लोग भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का उपवास रखूंगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि गलती हो सकती है। लेकिन, हमने गुनाह नहीं किया है। मैं सिर उठाकर कह सकता हूं कि मैंने कोई गुनाह नहीं किया है। मैंने जातियों का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया। मैंने जनता का मत खरीदने की कोशिश नहीं की। जिस तरह महाभारत में अभिमन्यु को घेरकर छल से मार दिया गया। लेकिन, महाभारत नहीं जीता नहीं गया। जीत उसकी ही हुई जो धर्म के साथ थे। हमलोग फिर से खड़े होंगे। हमलोग जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं। जब तक व्यवस्था को सुधार नहीं देते तब तक पीछे नहीं हटेंगे। अब दोगुनी मेहनत से बिहार की जनता के लिए काम करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि 10 हजार रुपये की बड़ी चर्चा हो रही है। यह बात सही नहीं है। 10 हजार रुपये के लिए जनता अपने बच्चों का भविष्य नहीं बेच सकते हैं। लोगों ने सिर्फ 10 हजार रुपये के लिए अपना वोट नहीं बेचा। चुनाव आयोग पर भी टीका-टिप्पणी करने का वक्त नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र लगाया गया यह बताने में कि अगर आप एनडीए को वोट करते हैं, आप दो लाख रुपये दिया जाएगा। इसके लिए 10 हजार रुपये बयाना के तौर पर दिया गया। हर विधानसभा जीविका, आंगनबाड़ी, ममता, प्रवासी मजदूरों को करीब 29 हजार करोड़ रुपये सरकार ने बांट दिए। 40 हजार करोड़ रुपये की योजना लाई। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार से मैं अपील करता हूं कि आपने जिन्हें 10 हजार रुपये दिए, उन सभी महिलाओं को दो लाख रुपये दे दीजिए। ताकि वह अपना रोजगार खड़ा कर सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 10 हजार रुपये केवल वोट के लिए खरीदे गए। मैंने जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर मैंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही थी। मैं इस पर अब भी अडिग हूं। नीतीश कुमार को 25 सीट से ज्यादा न आनी चाहिए थी और न आती। लेकिन, 10 हजार रुपये देकर उन्होंने वोट खरीदा। मैंने आज एलान करता हूं कि अगले छह महीने में एनडीए सरकार ने 10 हजार देने वालों को दो लाख रुपये दे देगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैंने आपको शिकायत करने के लिए नंबर भी जारी कर दिया। यह चौबीसों घंटे सातों दिन चालू रहेगा। अगर आपके खाते में दो लाख रुपये छह महीने के अंदर नहीं आते हैं तो आप इस पर फोन कर जानकारी दें। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। 'मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं, इसलिए संन्यास नहीं ले सकता' वहीं जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर सन्यास लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं। इसलिए मैं किस हक से संन्यास लूं। मैंने राजनीति छोड़ने की बात कही थी। मैं इस बात पर अडिग हूं। मैंने राजनीति नहीं कर रहा हूं। नीतीश सरकार ने डेढ़ करोड़ लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए हैं। पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान पैसे बांटने दिए, यह उनकी गलती है? इस पर मैंने टिप्पणी नहीं करूंगा। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हमलोग हारे नहीं हैं। हमलोग तो रेस में ही नहीं हैं। पीके ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी पर भी उठाया सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि मधुबनी क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल कोई नहीं जानता है। लेकिन, उस क्षेत्र में सवा लाख वोट आया। जो लोग कई साल से वहां राजनीति कर रहे हैं, उन्हें हजार में वोट आया है। कई सीटें ऐसी है कि चुनाव से 10 दिन पहले तय हुआ कि इस सीट से कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी? इसके बाद उस पार्टी उन सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट आया है। मेरा यही सवाल है कि ऐसी कौन सी विधा है कि यह लोग ऐसा कर दिए। हमलोग तीन साल से उस क्षेत्र में घूमे। करीब 30 प्रतिशत लोगों को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल नहीं पता था। ऐसे में एक लाख से ज्यादा वोट कैसे आ गया? यह बड़ा सवाल है। पाकिस्तान के इमरान खान का भी पीके ने दिया उदाहरण प्रशांत किशोर ने पाकिस्तानी में इमरान खान के चुनाव लड़ने के मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में इमरान खान ने करीब 25-30 साल पहले अपनी पार्टी शुरू की। उनकी पार्टी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ी थे। सभी सीटों पर इमरान खान की पार्टी हार गई। तो मेरे चुनाव लड़ने या नहीं लड़ना फैसला एक अलग विषय है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछले तीन साल में जनसुराज ने जो भी प्रयास किया, उसे जनता ने स्वीकार नहीं किया। मुझे लालू यादव, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी जैसे धुरंधर नेताओं की तरह बिहार की समझ नहीं है। क्योंकि, मैंने भ्रष्टाचार नहीं किया। मुझे नहीं समझ है कि बिहार को जातियों, धर्म के नाम पर बिहार को कैसे बांटा जाए? मुझे नहीं समझ है कि बिहार में 10 हजार रुपया देकर वोट कैसे खरीदे जाए।  

20 को शपथ समारोह: BJP-JDU के बराबर मंत्री, चिराग–मांझी–कुशवाहा की पार्टियों को मिला प्रतिनिधित्व

पटना बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेतृत्व में नई सरकार की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कैबिनेट की बैठक के बाद राज्यपाल इस्तीफा सौंपेंगे और इसके बाद नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 20 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके समेत कुल 36 मंत्री नई सरकार में मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इसका फॉर्मूला तय हो चुका है। एनडीए के सभी घटक दल के नेता नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री आवास पर जाकर मिल चुके हैं। नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाईटेड से 16, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। 24 से 48 घंटे में सभी पार्टियां अपने-अपने मंत्रियों की सूची फाइनल कर लेगी।   दिल्ली में हुई थी एनडीए के वरिष्ठ नेताओं की बैठक दरअसल, रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी के एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई थी। इसमें नई सरकार के रूपरेखा पर बातचीत हुई। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह के साथ जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की बैठक में किस पार्टी के कितने मंत्री होंगे? यह तय हो चुका है। इधर, एनडीए के घटक दल अपने-अपने विधायक दल के नेता चुनने की कवायत में लगे हैं। चिराग पासवान ने अपने दल का नेता राजू तिवारी को चुना है। जानिए, क्या है फॉर्मूला मंत्री बनाने का दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई बैठक में छह विधायकों पर एक मंत्री बनाने का फॉर्मूला तय हुआ है। इसके आधार पर जदयू के खाते में सीएम नीतीश कुमार समेत 16 मंत्री, भाजपा के खाते में दो डिप्टी सीएम समेत 16 मंत्री, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के खाते में दो मंत्री पद देने की बात सामने आ रही है। हालांकि, चिराग की पार्टी के नेता अपने खाते में तीन मंत्री चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर छह विधायकों के फॉर्मूले को मनाना है तो उस हिसाब से उनके 19 विधायक हैं। इसलिए तीन मंत्री का पद देना ज्यादा बेहतर होगा। राजनीतिक पंडितो का कहना है कि विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए वह दो सीएम सीएम समेत 16 मंत्री को शपथ दिला सकती है। वहीं जदयू को सीएम पद के साथ 15 मंत्री शपथ दिला सकते हैं। अगर जदयू 15 पर मान लेती है तो इसका फायदा चिराग को मिलेगा। इस स्थिति में चिराग की पार्टी में तीन मंत्री शपथ ले पाएंगे। जानिए किस पार्टी के कितने विधायक एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। इसमें भाजपा ने अधिकतम 89 सीटें जीतीं, उसके बाद जदयू ने 85 सीटें जीतीं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने 19 सीटें हासिल की। वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा से पांच और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से चार विधायक बने। 

नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की कमान, भाजपा ने सम्राट चौधरी को बनाया नेता—विजय सिन्हा उपनेता

पटना जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसका फैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारे अभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। इधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया है। वह भी दूसरे डिप्टी सीएम बन सकते हैं। लेकिन, दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए फिलहाल मंथन जारी है। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखना चाहती है। इधर, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है। दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीय जनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।

बिहार विधानसभा का अध्यक्ष के लिए प्रेम कुमार और तारकिशोर आगे

पटना बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनने के लिए एनडीए के घटक दलों में लंबी कतार है। जदयू भी अध्यक्ष पद पर दावा कर रहा है, लेकिन भाजपा निश्चिंत है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद का नाम आगे चल रहा है। कुमार नौंवी बार गया शहर से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। निवर्तमान मंत्रिमंडल में सहकारिता मंत्री हैं। वे अति पिछड़ी जाति से आते हैं। तारकिशोर प्रसाद पांचवीx बार कटिहार से भाजपा उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव जीते हैं। वे 2020-22 के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे हैं। सामाजिक समीकरण के हिसाब से वे वैश्य बिरादरी के हैं, जिन्हें भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। इनके अलावा दानापुर के भाजपा विधायक रामकृपाल यादव को भी इस पद के योग्य माना जा रहा है।रामकृपाल केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं।वे उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें लोकसभा, राज्यसभा, विधान परिषद और विधानसभा सदस्य बनने का अवसर मिला है। वे पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं। अगर यह पद जदयू के हिस्से में जाता है तो 17वीं विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव को अध्यक्ष पद पर बिठाया जा सकता है। सहज और मृदुभाषी नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिला के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। नेतृत्व का हरेक निर्णय स्वीकार्य: प्रेम कुमार भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार ने कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व का हरेक निर्णय उन्हें स्वीकार्य है। विधानसभा अध्यक्ष बनने के प्रश्न पर मंगलवार को उन्होंने कहा-नेतृत्व अगर निर्देश देता है तो वे इस भूमिका को सहर्ष स्वीकार करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा उनसे मिलने पहुंचे थे। सिन्हा ने कहा कि प्रेम कुमार ने पार्टी की ओर से दी गई हरेक भूमिका का निर्वहन गंभीरता से किया किया है। कृषि और सहकारिता मंत्री के रूप में उनकी सेवा यादगार है।

विधानसभा नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—अभी नहीं होगी CBI जांच

रांची झारखंड विधानसभा में नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इस मामले में सीबीआई जांच शुरू नहीं होगी। अदालत ने मंगलवार को सीबीआई द्वारा दायर उस इंटरलोक्यूटरी आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उसने विधानसभा नियुक्ति घोटाले पर लगी रोक हटाकर प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी) आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान झारखंड विधानसभा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है।  जब भी इस तरह के मुद्दे आते हैं, सीबीआई बिना कारण बीच में कूद पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही सीबीआई जांच पर रोक लगा चुकी है, इसलिए सीबीआई का इस मामले में आगे बढ़ने का कोई आधार नहीं है। सीबीआई की ओर से एएसजी एसवी राजू ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि नियुक्तियों में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और एजेंसी को जांच करने दी जानी चाहिए। हालांकि, पीठ ने यह तर्क अस्वीकार कर दिया और कहा कि दायर आवेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है। सुनवाई के दौरान पीठ ने सीबीआई की भूमिका पर तीखी टिप्पणी की। सीजेआई गवई ने सवाल किया, ''आप अपनी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए एजेंसी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? कई मामलों में हमने कहा है कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर रोक लगनी चाहिए।'' दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता शिव शंकर शर्मा ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विधानसभा में बड़े पैमाने पर अवैध नियुक्तियां हुई हैं, जिनकी सीबीआई कराई जानी चाहिए। याचिका में कहा गया था कि 2018 में तत्कालीन राज्यपाल ने विधानसभा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच के लिए 30 बिंदुओं पर कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। सितंबर 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए सीबीआई को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोप गंभीर हैं और इनमें ''उच्च पदों पर बैठे लोगों की मिलीभगत'' की आशंका है, इसलिए राज्य पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच संभव नहीं मानी जा सकती।  हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ झारखंड विधानसभा और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। इस याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने बिना मजबूत आधार के, राज्य की एजेंसी को अयोग्य बताते हुए सीधे सीबीआई को पहली जांच एजेंसी बना दिया, जो न्यायिक दृष्टि से सही नहीं है। इस याचिका पर नवंबर 2024 में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले यह तय किया जाएगा कि क्या सीबीआई को सीधे जांच सौंपने का आधार मजबूत था या नहीं। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सीबीआई के आवेदन और हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर विस्तृत सुनवाई करेगा।