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बिहार परिवहन विभाग दुर्घटनाएं रोकने सरकारी से ओला-उबर तक के ड्राइवरों को देगा विशेष प्रशिक्षण

पटना. परिवहन विभाग सरकारी चालकों के साथ बस-ट्रक, ऑटो एवं ओला-उबर के ड्राइवरों को भी सुरक्षित यातायात को लेकर प्रशिक्षण देगा। इसमें वाहन चालकों को सड़क यातायात के संकेतों तथा सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसकी शुरुआत मंगलवार से हो गई। बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् की ओर से मंगलवार को विश्वेश्वरैया भवन के सभा कक्ष में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण दो सत्र में हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 329 सरकारी वाहनों एवं आउटसोर्सिंग से रखे गए वाहन चालकों ने भाग लिया। परिवहन सचिव राज कुमार ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे माह आयोजित किए जाएंगे, जिसमें चरणबद्ध तरीके से विभिन्न श्रेणियों के वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए कानून के साथ-साथ जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। वाहन चालकों का सही प्रशिक्षण और यातायात नियमों के प्रति उनकी समझ विकसित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। छोटी लापरवाहियाें से बड़ी दुर्घटना का खतरा प्रशिक्षण में चालकों को यातायात संकेतों की पहचान, लेन ड्राइविंग, गति सीमा का पालन, सुरक्षित ओवरटेकिंग, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, हेलमेट एवं सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग से होने वाले खतरों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि छोटी-छोटी लापरवाहियां किस प्रकार गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। प्रशिक्षण सत्र के दौरान वाहन फिटनेस, थकान की स्थिति में वाहन न चलाने, आपातकालीन परिस्थितियों में सतर्कता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर भी विशेष बल दिया गया।

भागलपुर में रेलवे की जमीन पर बनीं 80 दुकानों पर चला बुलडोजर

भागलपुर/नवगछिया. नवगछिया रेलवे स्टेशन की जमीन पर अवैध रूप से संचालित विभिन्न प्रकार की दुकानों पर बुलडोज़र चला कर मंगलवार को ध्वस्त कर दिया गया। रेल प्रशासन के साथ ही स्थानीय प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशन और रोड के बीच अवैध रूप से संचालित इन दुकारों को तोड़कर रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इस दौरान बिहपुर के आइएन केके मिश्रा, आइओडब्लू अविनाश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर मुन्ना कुमार पासी, कटिहार के रेल इंस्पेक्टर राकेश रंजन झा, नवगछिया जीआरपी थानाध्यक्ष अरुण कुमार चौधरी एवं नवगछिया बीडीओ सह दंडाधिकारी पंकज कुमार दास मौजूद रहे। दंगा निरोधक दस्ता के साथ-साथ स्थानीय पुलिस भी इस दौरान मुस्तैद रही। मौके पर केके मिश्रा ने बताया कि गेट नंबर 12 मिल टोला के समीप से काली स्थान के बीच में लगभग 80 दुकानों को बुलडोज़र से तोड़ा गया है। इस से बाजार में हड़कंप मच गया। लोग अतिक्रमित की गई जगह को तत्काल खाली करने लगे जिससे वहां पर अफरातफरी का माहौल बन गया। अवैध रूप से लगी दुकानों को हटा लेने को लेकर रेलवे ने दुकानदारों को पहले ही सूचना दे दी थी। नहीं हटाने वालों की दुकानें तोड़ी गई। इधर, स्थानीय लोगों ने रेल प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। मालूम हो कि रेलवे की ज़मीन पर लगभग 153 अस्थाई दुकानें हैं जो रेलवे द्वारा स्वीकृत की गई हैं। अस्थाई दुकान को लेकर लगभग 57 लाख की लागत से संवेदक तय किया गया है। जो 97 मीटर में 30 दुकान निर्माण कर आवंटित किए जाएंगे। मौके पर आरपीएफ के दारोगा रवि कुमार, जीआरपी के एएसआइ रास बिहारी सहित पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे। इधर, भाकपा माले व खेग्रामस ने अतिक्रमण हटाने के खिलाफ वैशाली चौक पर प्रदर्शन किया। नवगछिया, कटारिया व खरीक के बीच रेलवे ने लिया 4 घंटा ब्लाक नवगछिया, कटरिया एवं खरीक रेलवे स्टेशन के बीच अपलाइन की पटरी पर मरम्मत को लेकर दोपहर 1:00 बजे से लेकर संध्या 4:00 बजे तक अपलाइन ब्लाक रखा गया। ब्लाक के कारण अपलाइन से गुजरने वाली सभी गाड़ियां डाउनलाइन प्लेटफार्म संख्या एक से गुजराई गई। ब्लॉक एवं ट्रेन विलंब होने को लेकर यात्रियों में अफरातफरी रही। प्लेटफार्म नंबर 2 से कटिहार की ओर से आने वाले सभी गाड़ियां प्लेटफार्म संख्या एक होकर गुजरी। जिसमें टाटा लिंक एक्सप्रेस, सवारी गाड़ी, राधिकापुर एक्सप्रेस एवं राजधानी एक्सप्रेस आदि ट्रेनें थी। यात्रियों द्वारा बताया गया कि अचानक ट्रेन को दो नंबर के बदले एक नंबर प्लेटफार्म आने की घोषणा के कारण यात्रियों को या तो प्लेटफार्म के फुट ओवर ब्रिज से आना पर रहा था। जीआरपी थानाध्यक्ष के द्वारा पटरी पार करने पर कई लोगों को फटकार भी लगाई गई। बताया गया कि ब्लाक आगे एक सप्ताह तक रहने की आशंका है। पटरी की मरम्मत कार्य चल रहा है।

हिजाब पहनकर सोना खरीदना हुआ प्रतिबंधित, बिहार में लागू हुआ नया नियम

पटना बिहार के सर्राफा बाजार से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है. सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के उद्देश्य से बिहार अब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां ज्वेलरी दुकानों में हिजाब, नक़ाब, हेलमेट या चेहरा ढककर आने पर रोक लगा दी गई है. ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन (AIJGF) के निर्देश पर लिया गया यह फैसला कल से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगा. सुरक्षा कारणों से लिया गया निर्णय ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम किसी धार्मिक या व्यक्तिगत भावना को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से सुरक्षा कारणों से लिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कल से राज्य की किसी भी ज्वेलरी दुकान में पूरी तरह चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को न तो प्रवेश दिया जाएगा और न ही उन्हें किसी प्रकार की बिक्री की जाएगी. सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतें फेडरेशन के मुताबिक, वर्तमान में सोने और चांदी की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर हैं. 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1,40,000 और एक किलो चांदी की कीमत करीब ₹2,50,000 तक पहुँच चुकी है. इतनी हाई-वैल्यू कमोडिटी होने के कारण ज्वेलरी दुकानें हमेशा अपराधियों के निशाने पर रहती हैं. अपराध पर लगाम लगाने की कोशिश अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि पिछले कुछ समय में लूटपाट की कई घटनाओं में यह देखा गया है कि अपराधी फुल हेलमेट, घूंघट या नक़ाब पहनकर 3-4 के समूह में आते हैं. चेहरा ढका होने के कारण सीसीटीवी कैमरों में उनकी पहचान करना असंभव हो जाता है. व्यापारियों का तर्क है कि ग्राहकों और दुकानदारों दोनों की जान-माल की सुरक्षा के लिए यह अनिवार्य हो गया था कि दुकान में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई दे. व्यापारियों का समर्थन बिहार के ज्वेलरी व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल चोरी और लूट की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि पुलिस को भी संदिग्धों की पहचान करने में आसानी होगी. फेडरेशन ने सभी ग्राहकों से अपील की है कि वे सुरक्षा के इस नए प्रोटोकॉल का पालन करें और दुकान में प्रवेश करते समय अपना चेहरा खुला रखें.

रामगढ़ में सांसद ने NHAI अधिकारियों को ‘एक झांप मारेंगे’ की दी धमकी

रामगढ़. रामगढ़ के कुल्ही चौक के पास उस वक्त माहौल गरमा गया, जब सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी एनएचएआई के अधिकारियों पर भड़क गए। पूछा-ये किसका रोड है, आपको पता भी है? बिना रोड ट्रांसफर हुए सड़क को कैसे ब्लॉक किया जा रहा है? एनएचएआई के अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। तब गुस्साए सांसद बोले- अक्कल है? एक झांप मारेंगे न… किसका रोड है, ये भी नहीं पता। सांसद ने कहा कि पीडब्ल्यूडी का कौन है। आपको रोड ट्रांसफर नहीं हुआ है, तो कैसे काम कर रहे हैं। जबतक फार्मेलिटी पूरा नहीं हो जाता कैसे काम कर रहे हैं। आप लोग गुंडा बन रहे है क्या? गुंडा गर्दी मत करो? आपलोग प्रशासन के लोग हैं। ऐसा मत करिए। रोड ट्रांसफर नहीं हुआ तो कैसे हो रहा काम एनएचआईए के अधिकारियों ने कहा कि इसमें गुंडागर्दी की क्या बात है। सांसद ने कहा कि आप जवाब क्यों नहीं दे रहे है। आप कैसे काम करने के लिए आ गए। रोड ट्रांसफर नहीं हुआ तो कैसे काम हो रहा। एप्रोच रोड जो पीडब्ल्यूडी का है, उसका पेमेंट भी ले लिए हो। लूटने नहीं देंगे। बिना पीडब्ल्यूडी के पूछे आप रोड कैसे काट दिए। बताया गया कि भारत माला परियोजना के तहत इसी सड़क से निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क की घेराबंदी को लेकर लोगों ने शिकायत की थी, जिसके बाद सांसद पहुंचे थे। सांसद की सफाई: गड़बड़ियां दिखीं, इसलिए सख्त बोला सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने बाद में कहा कि एनएचएआई के अधिकारी गड़बड़ी कर रहे हैं। बिना पीडब्ल्यूडी के अनुमति के काम हो रहा है। कई जगहों पर खामियां मिली हैं। एप्रोच रोड को ब्लॉक कर दिया गया है। पहाड़ काट कर पत्थर का उपयोग कर लिया जा रहा है। जब अधिकारियों से गड़बड़ियों का जवाब मांगा गया, तो वे जवाब नहीं दे पाए। इसलिए उन्होंने ऐसा कहा।

सांसद पप्पू यादव ने केंद्रीय मंत्री से माँगा पूर्णिया के युवाओं के लिए इंटरनेशनल स्किल सेंटर

पूर्णिया. युवाओं को रोजगार, आधुनिक कौशल और वैश्विक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने दिल्ली में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में पूर्णिया इंटरनेशनल स्किल सेंटर की स्थापना का ठोस प्रस्ताव रखते हुए मंत्रालय को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। सांसद पप्पू यादव ने कहा कि पूर्णिया केवल एक जिला नहीं, बल्कि कोसी-सीमांचल और पूर्वोत्तर बिहार के लाखों युवाओं की उम्मीदों का केंद्र है, जहां सही दिशा में निवेश से ऐतिहासिक बदलाव संभव है। सांसद ने अपने ज्ञापन में बताया कि पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी युवा वर्ग की है, लेकिन आधुनिक कौशल प्रशिक्षण संरचनाओं के अभाव में यह ऊर्जा और प्रतिभा पलायन का शिकार हो रही है। बिहार, नेपाल और उत्तर-पूर्व भारत के बीच स्थित यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के बावजूद आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्किल इंफ्रास्ट्रक्चर से वंचित है। उन्होंने कहा कि यहां के युवा मेहनती हैं, सीखने की इच्छा रखते हैं, पर अवसरों की कमी उन्हें दिल्ली, मुंबई, पंजाब और खाड़ी देशों की ओर पलायन के लिए मजबूर कर रही है। इन क्षेत्रों में अपार संभावनाएं पप्पू यादव ने कहा कि पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार सहित पूरा कोसी-सीमांचल कृषि, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और घरेलू उद्योगों की अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। उभरती एयर कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल और पूर्वोत्तर के लिए गेटवे की भूमिका इसे पूर्वी भारत का सबसे संभावनाशील स्किल-इकोनॉमी जोन बनाती है। ऐसे में यदि यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाए तो यह क्षेत्र न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए कुशल मानव संसाधन का हब बन सकता है। इसी सोच के तहत सांसद ने पूर्णिया इंटरनेशनल स्किल सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं आईटी, एविएशन और एयरपोर्ट ऑपरेशन, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर असिस्टेंट, एग्री-टेक एवं फूड प्रोसेसिंग, सोलर एवं ग्रीन एनर्जी टेक्नीशियन, साथ ही विदेशी भाषा प्रशिक्षण (अरबी, जापानी, फ्रेंच आदि) जैसे कोर्स संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह सेंटर पूर्वोत्तर बिहार का पहला उन्नत बहु-क्षेत्रीय कौशल संस्थान होगा, जो युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए तैयार करेगा। मुलाकात के दौरान स्किल रेजोल्यूशन 2026 के तहत ड्रोन आधारित कृषि, सक्षम कौशल प्रशिक्षण और आधारभूत संरचना विकास पर भी गहन चर्चा हुई। सांसद ने बताया कि पूर्णिया में ड्रोन कृषि के प्रयोग से मात्र 6 मिनट में एक एकड़ में स्प्रे, फसल स्वास्थ्य की निगरानी और लागत में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी संभव है, जिसका सफल प्रदर्शन स्थानीय युवा कार्तिक द्वारा किया जा चुका है। युवा बन सके उद्यमी उन्होंने ‘ड्रोन शक्ति’ और ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी पहलों के तहत अप्रेंटिसशिप को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, ताकि युवा स्वयं उद्यमी बन सकें। सांसद पप्पू यादव ने मंत्रालय से अनुरोध किया कि स्किल रेजोल्यूशन 2026 के अनुरूप पूर्णिया के लिए 150 करोड़ का विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए, जिसके अंतर्गत 10 आधारभूत प्रशिक्षण केंद्र, 2,000 ड्रोन पैकेज (प्रशिक्षण सहित) तथा बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ अभिसरण स्थापित किया जाए। इससे 5,000 से अधिक युवाओं, विशेषकर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को अनुमोदित रिमोट पायलट ट्रेनिंग मिल सकेगी और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। अपने दूसरे पत्र में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र बार-बार बाढ़, भारी पलायन, सीमावर्ती चुनौतियों और आर्थिक पिछड़ेपन से जूझता रहा है। ऐसे में इस परियोजना को राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले जिलों के मॉडल के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।

दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में 30 कलाकार देंगे कड़शा नृत्य की प्रस्तुति

​​​​​​​गुमला. इस वर्ष दिल्ली में 26 जनवरी गणतंत्र‎ दिवस का समारोह गुमला जिला के लिए‎ गर्व की अनुभूति कराएगा। वजह है, भारत ‎की राजधानी दिल्ली के लाल किला के‎ ग्राउंड में होने वाले ऐतिहासिक गणतंत्र‎ दिवस की परेड में झारखंड की‎ बहुचर्चित लोक नृत्य शैली कड़शा की ‎झांकी झारखंड के गुमला जिला के ‎भरनो निवासी प्रसिद्ध लोक गायिका सह‎शिक्षिका सुषमा नाग के नेतृत्व में 30 ‎कलाकारों का दल 7 जनवरी को गुमला‎ जिला के भरनो से दिल्ली के लिए‎ रवाना होगी। इसमें ‎भरनो, सिसई, बसिया, चैनपुर सहित कई ‎प्रखंडों के महिला, पुरुष कलाकार भाग ‎लेंगे। सुषमा नाग झारखंड का ‎प्रतिनिधित्व करेंगी भरनो मुख्यालय स्थित अमनपुर ‎निवासी बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुषमा‎ नाग अपनी प्रतिभा से कई बार गुमला ‎जिला को गौरवान्वित किया ‎‎है, परंतु इस बार की उपलब्धि और बड़ी‎ है। भारत सरकार के कला संस्कृति‎ मंत्रालय के निमंत्रण पर कड़शा नृत्य में ‎‎महारत सुषमा नाग झारखंड का ‎प्रतिनिधित्व करेंगी। युद्ध‎स्तर पर की जा रही तैयारी 26 जनवरी 2026 ‎गणतंत्र दिवस समारोह स्थल लाल किला ‎में प्रस्तुत होने वाले कड़शा नृत्य की झांकी‎ को लेकर कलाकार खासे उत्साहित हैं। युद्ध‎स्तर पर तैयारी की जा रही हैं। सुषमा‎ नाग ने बताया ‎‎कि झारखंड की लोक संस्कृति की अद्भुत‎ नृत्य शैली कड़शा है। उन्होंने कहा- यह झारखंड की‎ संस्कृति, सभ्यता, समृद्धि एवं पारंपरिक‎ जीवन शैली को प्रदर्शित करती है। गणतंत्र ‎‎दिवस समारोह में कड़शा नृत्य शैली की ‎‎झांकी दिखलाने का मौका मिला‎ है। झारखंडी नृत्य शैली को वैश्विक ‎पहचान मिलेगी और झारखंडी सभ्यता ‎‎संस्कृति को पूरी दुनिया के लोग देखेंगे।‎ 2021 में जनजाति लोक नृत्य में मिला था प्रथम स्थान कड़शा का अर्थ कलश होता है, जो उरांव जनजाति का प्रतीक चिन्ह है। इस नृत्य को अतिथियों के आगमन पर विशेष तौर पर आयोजित किया जाता है। इसमें कलश में नए धान की गुथी हुई बाली को डालकर पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी महिलाओं द्वारा अभिवादन किया जाता है, जो एकता पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक होता है। उरांव जनजाति नृत्य शैली विभिन्न मौसमी रागों पर आधारित नृत्य शैली होती है। सुषमा नाग ने बताया कि रायपुर में 2021 में आयोजित जनजाति लोक नृत्य में इस नृत्य काे प्रस्तुत किया गया था। जहां उनकी टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों का आतंक: एक ही परिवार के 3 लोगों को कुचला

गोइलकेरा. गोइलकेरा में पगलाए जंगली हाथी ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली। प्रखंड के आराहासा पंचायत अंतर्गत सोवां गांव में सोमवार–मंगलवार की दरमियानी रात हाथी के हमले में एक व्यक्ति और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। मृत बच्चों में एक साल का बेटा और तीन साल की एक बेटी है। वहीं, मृतक की पत्नी ने एक दुधमुंही बच्ची के साथ भागकर किसी तरह अपनी जान बचा पाई। हाथी के हमले से अब तक सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान वन प्रमंडल के अलग अलग गांवों में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, गोइलकेरा प्रखंड के सायतबा, कितापी और बिला गांव में एक एक व्यक्ति को मौत की नींद सुलाने के बाद लगातार चौथे दिन हाथी ने सोवां में एक ही परिवार के तीन लोगों को मार डाला। जानकारी के अनुसार वन विभाग सोमवार देर रात हाथी को ट्रैक कर उसे जंगल की ओर भगाने का अभियान चला रहा था। इसी दौरान विभाग को सूचना मिली कि हाथी को बाईहातु के पास देखा गया है। टीम के वहां पहुंचने पर पता चला कि सोवां में हाथी ने एक परिवार पर हमला कर दिया है। वन विभाग के कर्मी मशाल लेकर टुंगरी पर स्थित झोंपड़ी तक पहुंचे। जहां हाथी के हमले में एक व्यक्ति और उसके बच्चे की मौत हो चुकी थी, जबकि एक बेटी घायल अवस्था में थी और उसकी सांसें चल रही थी। उसे बचाने के लिए देर रात ही विभाग द्वारा मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार में पांच लोग थे और वे टुंगरी पर झोंपड़ी बनाकर रहते थे। आसपास कोई बस्ती नहीं थी, जिससे हाथी के हमले के दौरान उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी। घटना से पूरे इलाके में दहशत है। निगरानी में जुटा वन विभाग, अंधेरे में हो परेशानी : हाथी को सुरक्षित और सघन जंगल में भगाने के लिए वन विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पश्चिम बंगाल से आई एक्सपर्ट की टीम भी है। सोमवार की रात वन विभाग का 25 सदस्यीय दल हाथी को ट्रैक करने में जुटा था। इसी दौरान सोवां गांव में यह दर्दनाक हादसा हो गया। टीम मौके पर पहुंची लेकिन तमाम प्रयास के बावजूद घायल बच्ची को बचाया नहीं जा सका। वहीं, सुदूर क्षेत्र में सड़कों की खराब हालत और अंधेरे के चलते अभियान में परेशानी आ रही है। हाथी के हमले के बाद देर रात अभियान रोक कर बच्ची को अस्पताल ले जाया गया था। सुबह फिर से अभियान की शुरुआत की गई है।

बिहार में हाइवे-एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को अब नहीं लगेगा अड़ंगा

पटना. बिहार में हाइवे, एक्सप्रेसवे और अन्य सड़कों के निर्माण के लिए सबसे प्रमुख माने जाने वाली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में अब रुकावट नहीं आएगी। इसके लिए नीतीश सरकार ने विशेष पहल की है। इसके तहत विभागों की आपसी असहमति को दूर करने की कोशिश की गई है। दरअसल, पथ निर्माण विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के बीच जमीन की रिपोर्ट मांगने-देने में कई बार देरी हो जाती है। इसका असर, विभिन्न सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पड़ता है। इसका समाधान निकालने के लिए बिहार में अब जमीन अधिग्रहण के लिए परियोजनावार राजस्व अधिकारी तैनात किए जाएंगे। पथ निर्माण ने इसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा है। विभाग की यह कवायद सड़क परियोजनाओं के लिए तेजी से जमीन अधिग्रहण करना है, ताकि उसे समय पर पूरा किया जा सके। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के आसार हैं। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में जब पथ निर्माण विभाग किसी खास परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रगति की रिपोर्ट मांगता है तो वे जिले भर की परियोजना का हवाला देते हुए अपनी उपलब्धि गिनाने लगते हैं। साथ ही परियोजनाओं की संख्या गिनाते हुए अपनी व्यस्तता भी गिनाने लगते हैं। उनकी इस दलील के कारण यह हो रहा है कि कोई-कोई परियोजना में सालों बाद भी भी जमीन अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए अब विभाग ने तय किया है कि राज्य की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए अधिकारियों को नामित कर दिया जाए। खासकर नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे में अधिकारियों को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय की ओर से नामित किया जाता है। बिहार में सड़क निर्माण परियोजनाओं की बाधा दूर ऐसे में अगर पथ निर्माण विभाग किसी अधिकारी का नाम केंद्र को भेज देगा तो वे अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं पाएंगे। ऐसे अधिकारियों की मांग पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग से की है। ये अधिकारी एडीएलओ (अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी) होंगे। ये जिलों में ही डीएलओ के अधीन काम करते हैं। अनुमंडल में बैठने वाले डीसीएलआर के समकक्ष इनकी शक्ति होती है। दोनों विभागों में बनी सहमति, जल्द निकलेगा आदेश पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग को कहा है कि वह परियोजनावार एडीएलओ दे। वे पथ निर्माण के लिए सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करेंगे। केंद्र सरकार, पथ निर्माण के साथ ही राजस्व विभाग के साथ समन्वय कायम करने की जिम्मेदारी एडीएलओ की होगी। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग और पथ निर्माण विभाग के बीच इस पर सहमति बन गई है। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस बाबत विधिवत आदेश निकाला जाएगा।

कोयल ब्रिज में दरार के कारण लोहदरगा नहीं आएगी मेमू

लोहरदगा/रांची. रांची-लोहरदगा-टोरी रेल लाइन के कोयल नदी स्थित रेलवे ब्रिज संख्या 115 के पिलर संख्या 4 और 5 में आई दरार के बाद ट्रेनों का परिचालन फिलहाल रद है। इस मामले को लेकर मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र तकनीकी टीम के साथ रेलवे के स्पीक कोच से लोहरदगा कोयल नदी पुल तक पहुंचे। इस दौरान महाप्रबंधक ने रेलवे ब्रिज का निरीक्षण किया। तकनीकी टीम के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की, जिसमें पिलर संख्या 5 की सबसे पहले मरम्मत करने की बात कही गई। इसके बाद पिलर संख्या 6 और 7 की भी मरम्मत की जाएगी। वहीं, 15 फरवरी तक सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि मार्च के अंतिम तक ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। सभी मरम्मत कार्य मई 2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे। साथ ही रेलवे इस लाइन पर कोयल नदी में नए पुल के निर्माण को लेकर भी योजना पर काम करेगी। इरगांव तक चलेगी मेमू, मिलेगी बस सर्विस रेलवे महाप्रबंधक ने कहा कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन लोहरदगा स्टेशन से सात किलोमीटर दूर इरगांव हॉल्ट तक करेगी। यात्रियों को लोहरदगा से ईरगांव तक के लिए बस की सुविधा प्रदान की जाएगी। वहीं लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन की सुविधा भी शुरू की जाएगी। फिलहाल रांची से लोहरदगा के बीच एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन नहीं होगा। उन्होंने यह भी महत्वपूर्ण बात कही कि बालू के उठाव और कटाव की वजह से रेलवे पुल को नुकसान पहुंचा है। पुल की मरम्मत के लिए तीन-चार टीम लगातार 24 घंटे काम करेगी। पुल का पिलर संख्या 4, 5, 6 और 7 जैकेटिंग और पाइलिंग के जरिए दुरुस्त किया जाएगा। साथ ही स्टील गार्डर के माध्यम से फिलहाल परिचालन प्रारंभ करने का प्रयास किया जाएगा। लगभग दो घंटे तक रेलवे महाप्रबंधक यहां पर मौजूद रहे और उन्होंने तकनीकी टीम और अलग-अलग एजेंसियों के साथ बात की और उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए।

लालू-राबड़ी के नाती लेंगे 2 साल की मिलिट्री ट्रेनिंग, रोहिणी ने दी जानकारी

पटना. RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य के घर काफी दिनों के बाद खुशियां लौटी हैं। यह मौका उन्‍हें उनके बड़े बेटे की वजह से म‍िला है। बेटे की सफलता पर मां (रोहिणी आचार्य) गर्व महसूस कर रही हैं। दरअसल रोहिणी के बेटे ने प्री यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी कर ली है और वे बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए गए हैं। रोहिणी ने खुद अपने एक्‍स हैंडल पर यह साझा किया है। तस्‍वीर और वीडियो शेयर करते हुए उन्‍होंने लिखा है-"आज मेरा दिल गर्व से भरा हुआ है। दो वर्ष की मिलिट्री ट्रेनिंग पर गया आदित्‍य आज अपनी प्री – यूनिवर्सिटी ( Pre-University) की पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 साल की उम्र में हमारा बड़ा बेटा आदित्य 2 साल की Basic Military Training के लिए गया है। आदित्य .. तुम बहादुर , साहसी और अनुशासन के साथ रहने वाले हो, जाओ कमाल कर दिखाओ , हमेशा याद रखना जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं .. हम सबों का सारा प्यार और हौसला हमेशा तुम्हारे साथ है।" ममता बनर्जी को बताया मजबूती की मिसाल सोशल मीडिया पर एक्‍ट‍िव रहने वालीं रोहिणी अक्‍सर समकालीन विषयों पर पोस्‍ट करती रहती हैं। इससे पूर्व उन्‍होंने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को जन्‍मदिन की बधाई दी। उन्‍हें मजबूती की मिसाल और प्रेरणास्रोत बताया है। इसके अलावा एक दिन पहले सावित्रीबाई फुले की जयंती पर भी उन्‍होंने पोस्‍ट किया था। उसमें उन्‍होंने मह‍िलाओं का महत्‍व बयां किया था। रोहिणी ने लिखा-"खुशी हुई देखकर कि कल पूरा देश सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहा था। कहीं पढ़ी थी सावित्री माई कहती हैं क‍ि स्त्री को नीचा दिखाकर जो मर्द ऊँचा लगता है, वह असल में खड़ा नहीं, टिका हुआ है। और ऐसे टिके हुए तिनकों को बरगद समझने वालों के लिए उन्होंने कहा था “स्त्री को पापी बताने वाला समाज, अपने पाप छुपाना चाहता है।”