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सम्राट चौधरी की नई पहल: पिंक पुलिस करेगी छेड़खानी पर त्वरित कार्रवाई

पटना  पुलिस मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ जैसे ही सम्राट चौधरी ने गृह विभाग संभाला, बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक नया दौर शुरू होता दिखा. 1972 के बाद पहली बार किसी गैर-मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय की कमान ली है और सम्राट चौधरी ने आते ही घोषणा कर दी. छेड़खानी हुई तो आरोपी ही नहीं, जिम्मेदार पुलिसकर्मी भी कार्रवाई होगी. अपराधियों-कुख्यातों की संपत्ति जब्ती से लेकर साइबर अपराध पर ‘सफाई अभियान’ पर सख्त फैसला लिया. पदभार ग्रहण करते ही सम्राट चौधरी शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्होंने साफ कर दिया कि अब बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. एंटी रोमियो स्क्वॉड और पिंक पुलिस तैनात होगी सम्राट चौधरी ने महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि एंटी रोमियो स्क्वॉड यूपी मॉडल पर तैयार किया जाएगा. हर स्कूल-कॉलेज के छुट्टी समय के आसपास पिंक पुलिस तैनात रहेगी और किसी भी तरह की छेड़खानी पर सीधे कार्रवाई होगी. उन्होंने साफ कहा -अगर किसी युवती, छात्रा या महिला से छेड़खानी हुई, तो आरोपी तो गिरफ्तार होगा ही, लेकिन लापरवाही करने वाली पुलिस पर भी कार्रवाई होगी. डिजिटल अपराध के खिलाफ सफाई अभियान साइबर क्राइम और डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए गृहमंत्री ने बड़ा अभियान चलाने का एलान किया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया पर अपशब्द, भड़काऊ पोस्ट, आपत्तिजनक फोटो-वीडियो डालने वालों की पहचान तत्काल की जाए और कार्रवाई में देरी न हो. जेल प्रशासन को भी कड़ी चेतावनी दी गई है. जेल में मोबाइल मिलने पर जेल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी. डॉक्टर की अनुमति के बिना कैदियों को बाहर से भोजन भेजने पर रोक होगी. 400 माफियाओं की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू सम्राट चौधरी ने कहा कि संगठित अपराध का नेटवर्क तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हो गई है. राज्य में बालू, शराब और जमीन से जुड़े करीब 400 कुख्यात अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए सूची तैयार है. दो माफियाओं की संपत्ति जब्ती की अनुमति कोर्ट से मिल चुकी है. गृहमंत्री ने कहा— बिहार में अपराध करके करोड़ों की संपत्ति खड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. स्पीडी ट्रायल चलेगा और सजा सुनिश्चित की जाएगी. कानून-व्यवस्था सुधारने की तैयारी पदभार संभालने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने पांच पूर्व डीजीपी और निगरानी ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. बैठक में अपराध नियंत्रण, जेल मॉनिटरिंग, स्पेशल कोर्ट बढ़ाने और आर्म्स एक्ट मामलों में समयबद्ध सजा सुनिश्चित करने पर सुझाव मिले. उन्होंने कहा कि सभी सुझावों को लागू किया जाएगा और पुलिस प्रशासन को और मजबूत किया जाएगा. बिहार में सुशासन कायम रहेगा अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में कानून का राज और सुशासन को और मजबूत किया जाएगा. यूपी मॉडल की चर्चा पर उन्होंने कहा कि बिहार अपना मॉडल भी प्रभावी तरीके से लागू करेगा.

बिहार मंत्रिमंडल में ताज़ा अपडेट: नए 26 मंत्रियों को आवास, 13 मिनिस्टर्स को मिला नया एड्रेस

पटना बिहार सरकार के सभी नए 26 मंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित कर दिए हए हैं। जिसमें 13 पुराने और 13 नये मंत्री शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, मंगल पांडेय, नितिन नवीन, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, संतोष कुमार सुमन, सुनील कुमार और मो जमा खान को पुराना बंगला ही आवंटित हुआ है। 13 नये बने मंत्रियों में उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल को 2 स्ट्रैंड रोड का बंगला मिला है। यह बंगला बिहार विधानसभा अध्यक्ष के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर यादव को आवंटित था। पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता को 33 हार्डिंग रोड, आईटी एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह को चार स्ट्रैंड रोड, श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह टाइगर को 41 हार्डिंग रोड, पर्यटन तथा कला संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद को 25 हार्डिंग रोड बंगला मिला है। कृषि मंत्री रामकृपाल यादव को 43 हार्डिंग रोड, आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद को 12 हार्डिंग रोड, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद को तीन सर्कुलर रोड, एससी एवं एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन को 26 एम स्ट्रैंड रोड, सहकारिता एवं पर्यावरण मंत्री डॉ प्रमोद कुमार को 27 हार्डिंग रोड, गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार को 21 हार्डिंग रोड, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह को 13 हार्डिंग रोड और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को 24 एम स्ट्रैंड रोड का बंगला आवंटित हुआ है।  

तेज रफ्तार ने ली पाँच जानें: बिहार में ट्रक-ऑटो भीषण भिड़ंत

पटना  बिहार के शेखपुरा जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। ऑटो-रिक्शा और ट्रक के बीच हुई आमने-सामने की टक्कर में कम से कम पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा शेखपुरा-सिकंदरा रोड पर मनिंडा गांव के पास हुआ, जो नेशनल हाईवे 33ए का हिस्सा है। शेखपुरा जिले के एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने हादसे की पुष्टि की और कहा कि शवों को सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसपी ने कहा कि टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो-रिक्शा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे बचाव दल को अंदर फंसे शवों को निकालने के लिए जेसीबी मशीन का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ऑटो-रिक्शा शेखपुरा शहर की ओर जा रहा था, तभी कथित तौर पर गलत दिशा से तेज गति से आ रहे एक ट्रक ने नियंत्रण खो दिया और यात्री वाहन को टक्कर मार दी। टक्कर के कारण, तिपहिया वाहन सड़क से कई फीट दूर जा गिरा। ऑटो-रिक्शा में कुल सात यात्री सवार थे। पुलिस ने बताया कि स्थानीय लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, घायलों को बाहर निकाला और अधिकारियों को सूचित किया। बरबीघा और शेखपुरा पुलिस स्टेशनों से पुलिस टीमें तुरंत पहुंचीं, इलाके की घेराबंदी की और ट्रैफिक के लिए रास्ता साफ किया। गंभीर रूप से घायल सभी लोगों को सदर हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी गंभीर हालत की वजह से उन्हें पावापुरी के हायर मेडिकल सेंटर में रेफर कर दिया गया। इस दुखद घटना से इलाके में बहुत गुस्सा फैल गया। लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया, कहा कि तेज रफ्तार, गलत लेन में गाड़ी चलाने, ओवरलोड गाड़ियों और सड़क की खराब मॉनिटरिंग की वजह से ऐसे हादसे अक्सर होते हैं। उन्होंने कड़ी कार्रवाई और हाईवे पर भारी गाड़ियों के बेहतर रेगुलेशन की मांग की। अचानक हुए नुकसान की खबर सुनकर मृतकों के परिवार वाले स्तब्ध हैं। जिला प्रशासन ने इस बात की डिटेल में जांच शुरू कर दी है कि ट्रक ड्राइवर तेज रफ्तार से गाड़ी चला रहा था या उसकी लापरवाही की वजह से हादसा हुआ। अधिकारी मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने पर भी विचार कर रहे हैं। आगे की जांच चल रही है।

सरकारी आदेश से हलचल: राबड़ी देवी को छोड़ना पड़ेगा 10 सर्कुलर रोड बंगला, नया ठिकाना क्या होगा?

पटना बिहार की नई एनडीए सरकार में अब नई व्यवस्था बन रही है। इसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का आधिकारिक आवास खाली करना होगा। राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता विपक्ष की हैसियत में नई सरकार ने नया आवास आवंटित किया है। भवन निर्माण विभाग ने उन्हें अब 39 हार्डिंग रोड का आवास आवंटित किया है। इसको लेकर भवन निर्माण विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। यह बदलाव लालू परिवार के लिए एक झटका है क्योंकि लालू परिवार लंबे समय से इस आवास में रह रहा था। 2005 में राज्य में नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद 16 जनवरी 2006 को इस आवास में लालू परिवार की एंट्री हुई थी, जो आज तक नहीं बदल पाया था। लेकिन इस बार नई सरकार में लालू परिवार का यह ठिकाना अब बदलने जा रहा है। दरअसल, नई सरकार में भाजपा का दबदबा दिख रहा है और यह उसी का संकेत लगता है। हालांकि, भवन निर्माण विभाग का जिम्मा जेडीयू कोटे से मंत्री बने विजय चौधरी के पास है। औपचारिक पत्र जारी मंगलवार को मंत्रियों और बिहार विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष के लिए भवन निर्माण विभाग ने आवास का आवंटित किया है। इसी के तहत राबड़ी देवी को अब 39 हार्डिंग रोड का आवास आवंटित किया गया है। भवन निर्माण विभाग के संयुक्त सचिव-सह-भू-सम्पदा पदाधिकारी शिव रंजन ने इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी कर दिया है। भाजपा ने ली चुटकी, रहेगी पैनी नजर इस बदलाव पर भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि अगर राबड़ी देवी जी को 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली करने का आदेश हुआ है तो उन्हें तुरंत वह आवास खाली कर देना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने ये भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस बार वह अपने परिवार के ट्रैक रिकार्ड की तरह किसी सरकारी संपत्ति की चोरी वहां से नहीं करेंगीं और ना ही नुकसान पहुंचाएंगी। बाथरूम से टोटी भी नहीं खोलेंगे क्योंकि हम लोगों की पैनी नजर रहेगी।  

युवाओं के लिए सुनहरा मौका: बिहार के एक विभाग में 33,000+ पदों पर भर्ती की तैयारी तेज

पटना  बिहार के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पदभार ग्रहण करते ही कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 33 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया आने वाले दिनों में पूरी की जाएगी। बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही प्रशासनिक निर्णयों के लेने की गति तेज हो गई है।  26 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में पांडेय ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़े कदमों की घोषणा की। पांडेय ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि विभाग में 26 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 7,600 अतिरिक्त पदों पर नियुक्ति की योजना भी शीघ्र लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई सरकार की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाना है। स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के युवाओं के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अगले वर्ष वैशाली, सीवान और भोजपुर में तैयार हो रहे तीन नए मेडिकल कॉलेज काम करना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के शुरू होने से राज्य में चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी और स्वास्थ्य शिक्षा एवं चिकित्सा सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।  पांडेय ने कहा कि सरकार अब स्वास्थ्य ढांचे के उन्नयन, चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधारने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने बताया कि अस्पतालों के आधुनिकीकरण, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य तेज किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में भर्ती प्रक्रियाओं में सुस्ती की वजह से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नियुक्ति पाने की प्रतीक्षा में थे। पांडेय के अनुसार, नई घोषणाओं से स्वास्थ्य विभाग की कार्य क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।   

बिहार में औद्योगिक और तकनीकी विकास की तैयारी, नीतीश सरकार का बड़ा रोजगार योजना

पटना  बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के युवाओं के लिए एक बड़े लक्ष्य की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि सरकार ने अगले पांच वर्षों, यानी 2025 से 2030 के बीच, 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराना शुरू से ही उनकी सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने दावा किया कि सात निश्चय-2 के तहत 2020-25 के बीच 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार दिया गया है। अब इस लक्ष्य को दोगुना करते हुए नई कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। ‘नीतीश सरकार का प्लान विकसित बिहार’ अगले 5 साल में 1 करोड़ नौकरी, औद्योगिक विकास और टेक्नोलॉजी हब बनाने का खाका किया तैयार टेक्नोलॉजी और उद्योग पर फोकस नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य में ‘न्यू ऐज इकोनॉमी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित नवाचारों पर केंद्रित होगी। इस विजन को साकार करने के लिए बिहार को पूर्वी भारत के नए ‘टेक्नोलॉजी हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत राज्य में कई बड़ी परियोजनाओं की स्थापना की योजना है, जिनमें शामिल हैं:     डिफेंस कॉरिडोर     सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क     ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स     मेगा टेक सिटी     फिनटेक सिटी सरकार का लक्ष्य बिहार को एक ‘वैश्विक बैक-एंड हब’ और ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’ के रूप में स्थापित करना है, जिसके लिए विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की मदद से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।     “बिहार की जनसंख्या में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक है। इसको सार्थक दिशा देने पर बिहार देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य बन सकता है।” — नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की भी जानकारी दी। यह समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में काम करेगी। समिति का मुख्य कार्य उद्योगों को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, समिति योजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी। चीनी मिलों से लेकर AI मिशन तक औद्योगिक विकास के साथ-साथ सरकार ने पारंपरिक उद्योगों को भी पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। इसके लिए राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना और पुरानी बंद पड़ी मिलों को फिर से चालू करने के लिए एक नई नीति और कार्ययोजना बनाई गई है। इसके अलावा, राज्य के प्रमुख शहरों को सुंदर बनाने और नई तकनीकों का उपयोग कर बिहार को अग्रणी बनाने हेतु ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन’ की भी स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा, “बिहार की नवनिर्वाचित नई सरकार दुगुनी ताकत से राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग लगाने हेतु कृतसंकल्पित है। जो काम हमलोग शुरू करते हैं, उसे पूरा करते हैं।”     राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, ये शुरू से ही हमलोगों की प्राथमिकता रही है। सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हमलोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं…

सीएम नीतीश का विकास पैकेज: डिफेंस कॉरिडोर से लेकर मेगा टेक सिटी तक, कई बड़े ऐलान

पटना  बिहार में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को कई बड़े ऐलान किए हैं। सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, ये शुरू से ही हमलोगों की प्राथमिकता रही है। सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हमलोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मंगलवार को एक्स पर यह जानकारी देते हुए कहा कि नई सरकार के गठन के पश्चात् राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने एवं अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध करने के लिए हमलोगों ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। बदलते बिहार के विकास की गति को बल देने हेतु बिहार में प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित नवाचारों की न्यू ऐज इकोनॉमी के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।   इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु इस क्षेत्र की बिहार से संबंध रखनेवाले अग्रणी उद्यमियों के सुझाव प्राप्त कर योजनाओं एवं नीतियों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही बिहार को एक ‘वैश्विक- बैक एंड हब एवं ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’ के रूप में विकसित एवं स्थापित करने हेतु महत्वपूर्ण विभागों तथा प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों एवं विशेषज्ञों के सहयोग से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि बिहार की जनसंख्या में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक है। इसको सार्थक दिशा देने पर बिहार देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य बन सकता है। बिहार के बड़ी संख्या में उपलब्ध युवा मानव संसाधन को ध्यान में रखते हुए बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए बिहार में डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी व फिनटेक सिटी की स्थापना की जाएगी एवं उद्योगों का जाल बिछाने हेतु वृहद कार्ययोजना तैयार कर योजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा। चालू होंगी बंद पड़ी चीनी मिलें सीएम नीतीश कुमार ने बताया है कि राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना एवं पुरानी बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने हेतु नीति एवं कार्ययोजना बनाई गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी प्रमुख शहरों को बेहतर एवं सुंदर बनाने की योजना पर कार्य करने हेतु तैयारी एवं नई तकनीकों का उपयोग कर राज्य को अग्रणी बनाने हेतु बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन की स्थापना की जाएगी। उक्त सभी बिन्दुओं पर कार्ययोजना तैयार करने हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी गई है। यह समिति राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने एवं युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन तथा अनुश्रवण का कार्य करेगी। आप सभी को पता है कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में औद्योगीकरण ने रफ्तार पकड़ी है। बिहार की नवनिर्वाचित नई सरकार दुगुनी ताकत से राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग लगाने हेतु कृतसंकल्पित है। इसके लिए औद्योगिक कॉरिडोर, उच्च गुणवत्ता की आधारभूत संरचना, हाई क्वालिटी पावर सप्लाई, जल प्रबंधन एवं कुशल मानव संसाधन आवश्यक है, जो अब बिहार में उपलब्ध हैं। राज्य में औद्योगिक विकास एवं अगले 5 वर्षों में युवाओं को नौकरी एवं रोजगार के लिए हमलोगों ने तेजी से काम शुरू कर दिया है और जो काम हमलोग शुरू करते हैं, उसे पूरा करते हैं।  

बच्चों के लिए खुशखबरी! इस राज्य में एक हफ्ते की स्कूल की छुट्टी, जानें वजह

पटना अक्टूबर के त्योहारों की छुट्टियों के बाद अब फिर से बच्चों की मौज लगने वाली है। दरअसल, नवंबर का महीना खत्म होने वाला है और ठंड भी तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियों को लेकर चर्चा तेज हो गई। अब अभिभावकों और बच्चों को यह इंतजार है कि इस सर्दी में स्कूल कब बंद होंगे और कितने दिन तक छुट्टियां रहेंगी। बिहार में कब से शुरू होंगी सर्दी की छुट्टियां ? अगर बिहार की बात करें तो पिछले साल के अनुभव के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सर्दी की छुट्टियां लगभग 7 दिन की होगी, जिसमें क्रिसमस और गुरु गोबिंद सिंह जयंती शामिल हो सकती है। पिछले वर्षों के अनुसार, छुट्टियों की संभावित तिथि 26 दिसंबर 2025 से 1 या 6 जनवरी 2026 तक हो सकती है। पूरे राज्य में तापमान में गिरावट के कारण छात्रों के लिए स्कूल जाना कठिन हो सकता है। ऐसे में सर्दियों की छुट्टियों का समय बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत भरा रहेगा। 1 से 8वीं तक के स्कूल 7 दिनों के लिए बंद हालांकि, बिहार सरकार ने अभी तक अधिकृत शेड्यूल जारी नहीं किया है, लेकिन पिछले सालों के आधार पर अनुमान है कि क्लास 1 से 8वीं तक के स्कूल 7 दिनों के लिए बंद रहेंगे। बिहार सरकार कुछ दिनों तक विंटर वेकेशन 2025 की आधिकारिक घोषणा कर सकती है। 

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बिगड़े बोल, SIR और BLO को लेकर चुनाव आयोग ने लिया नोटिस

रांची अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के एक और वायरल वीडियो से सियासी माहौल गरमा गया है। इस वीडियो में इरफान अंसारी चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR पर विवादित बयान देते नजर आ रहे हैं। वह एक सभा में कहते नजर आ रहे हैं कि यदि कोई बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ आपके इलाके में एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए आए तो उसे घर में बंद कर दें। इस पर भाजपा ने पलटवार किया है तो चुनाव आयोग ने भी झारखंड सरकार से रिपोर्ट तलब की है। BLO नाम काटने आए तो घर में बंद कर दो वायरल वीडियो जामताड़ा जिले में आयोजित सेवा के अधिकार सप्ताह कार्यक्रम का बताया जा रहा है। इसमें झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी कहते नजर आ रहे हैं कि यदि कोई बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आपके इलाके में एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए घर आए तो उसे घर में बंद कर दें। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि एसआईआर के नाम पर आने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर नाम काटने न दें और उनकी जानकारी सीधे उनसे साझा करें। हालांकि इस बयान पर इरफान अंसारी का स्पष्टिकरण भी आ गया है। BJP का सवाल- संविधान खतरे में है या नहीं? इस बयान के बाद भाजपा ने इरफान अंसारी की तीखी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन और अराजकता को बढ़ावा देने वाला करार दिया। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी सार्वजनिक तौर पर बोल रहे हैं कि यदि चुनाव आयोग का कोई बूथ स्तर का अधिकारी आपके पास जानकारी लेने आए तो उसे बंधक बना लो। मैं इंडी गठबंधन से पूछना चाहता हूं कि यह लोकतंत्र को बंधक बनाने की निंदनीय कोशिश है या नहीं? क्या संविधान खतरे में है या नहीं? भाजपा ने इंडिया गठबंधन को घेरा भाजपा सांसद सुधाशु त्रिवेदी ने आगे आरोप लगाया कि जहां इंडी गठबंधन के लोग सत्ता में आते हैं, वहां संविधान की भावना दरकिनार कर दी जाती है। किस के लिए? कुछ संदिग्ध स्रोतों से वोट प्राप्त करके सत्ता पर काबिज होने के लिए। चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट वहीं इस पूरे प्रकरण पर चुनाव आयोग ने झारखंड सरकार से रिपोर्ट मांग ली है। चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसका मकसद मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना है। झारखंड में इस प्रक्रिया का अभी पूर्वाभ्यास चल रहा है लेकिन राजनीतिक दल इसे चुनावी हथियार बना रहे हैं। एसआईआर की प्रक्रिया में मतदाता सूची से मृत, फर्जी या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने का काम होता है। सफाई दी, कहा- नकली BLO के बारे में कही थी बात सियासी माहौल गरमाने के बीच इरफान अंसारी की ओर से सफाई भी आ गई है। उन्होंने एक्स पर अपने एक पोस्ट में लिखा- कुछ मीडिया संस्थानों ने मेरी बातों को गलत संदर्भ में पेश किया है जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं। मैंने केवल इतना कहा था कि हमारे क्षेत्र में कुछ फर्जी लोग नकली BLO बनकर गरीबों को डराने और पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति नाम काटने या कोई अवैध कार्य करने आए तो उसकी सूचना तुरंत हमें और प्रशासन को दें। बदले सुर अब कहा- BLO हमारे सम्मानित पदाधिकारी झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने आगे कहा है कि BLO चुनाव आयोग के अंग और हमारे सम्मानित पदाधिकारी हैं। उनकी जगह कोई फर्जी व्यक्ति नहीं ले सकता है। मैंने केवल यह मांग की है कि चुनाव आयोग सही तरीके से प्रक्रिया चलाए ताकि किसी गरीब, वंचित या आम नागरिक का नाम गलत तरीके से न कटने पाए। मैं हमेशा लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हूं।

इमरजेंसी में डॉक्टर गायब! घायल मरीज तड़पते रहे, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

गढ़वा वैसे तो झारखंड सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ताजा मामला गढ़वा से आया है जहां बीते रविवार को सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सक गायब रहे। मरीज के परिजनों ने किया हंगामा गढ़वा सदर अस्पताल के ड्यूटी रोस्टर के अनुसार बीते रविवार को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक इमरजेंसी में डॉक्टर सरफराज की ड्यूटी थी, लेकिन जानकारी के मुताबिक डॉक्टर सरफराज शाम 4:45 बजे के बाद इमरजेंसी ड्यूटी में पहुंचे। इस दौरान गंभीर रूप से घायल दो मरीजों को इलाज करने के लिए लाया गया था, लेकिन उन्हें इमरजेंसी में चिकित्सक के आने का घंटों इंतजार करना पड़ा जिसके बाद मरीज के परिजनों ने हंगामा भी किया। यहां पर चिकित्सक ही बराबर गायब रहते हैं सदर अस्पताल आए लोगों का कहना है कि लोग बड़ी उम्मीद के साथ सदर अस्पताल में अपने मरीज को लेकर आते हैं कि वहां पर अच्छा इलाज होगा, लेकिन यहां पर चिकित्सक ही बराबर गायब रहते हैं। लोगों का ये भी कहना है कि डॉक्टर ओपीडी में भी देर से आते हैं और पहले ही चले जाते हैं। गायनी विभाग का भी यही हाल है। वहीं, इमरजेंसी में चिकित्सक का न होना सवाल पैदा करता है।