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KPMG रिपोर्ट में बड़ा बदलाव: पूर्वी सिंहभूम ने शिक्षा रैंकिंग में लगाई छलांग, 1 नंबर पर पहुंचा

रांची झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा देश की प्रतिष्ठित कंसल्टिंग एजेंसी केपीएमजी द्वारा जारी अप्रैल-मई 2026 की जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट (12वां संस्करण) में पूर्वी सिंहभूम ने पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है. 24 जिलों के शैक्षणिक प्रदर्शन, प्रशासनिक दक्षता और बुनियादी ढांचे के मूल्यांकन के बाद पूर्वी सिंहभूम को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया है. यह उपलब्धि किसी एक परीक्षा परिणाम का नतीजा नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित मॉनिटरिंग, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और डेटा आधारित प्रबंधन का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है. जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडेय की टीम के प्रयासों का असर अब राज्य स्तरीय रैंकिंग में साफ दिखाई देने लगा है. लगातार सुधार के दम पर शीर्ष पर पहुंचा पूर्वी सिंहभूम पिछले कुछ महीनों की रैंकिंग पर नजर डालें तो पूर्वी सिंहभूम का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है. दिसंबर 2025 में जिला पांचवें स्थान पर था. जनवरी 2026 में यह सातवें स्थान पर खिसक गया, जबकि फरवरी में 11वें स्थान पर पहुंच गया था. इसके बाद मार्च में जिले ने शानदार वापसी करते हुए चौथा स्थान हासिल किया और अप्रैल-मई 2026 की रिपोर्ट में सीधे पहले स्थान पर पहुंच गया. यानी कुछ ही महीनों में जिले ने तीन पायदान की छलांग लगाकर रामगढ़ और लोहरदगा जैसे जिलों को पीछे छोड़ दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा संचालन पर विशेष ध्यान, समय पर डेटा रिपोर्टिंग और मजबूत जिला स्तरीय समन्वय के कारण यह सफलता संभव हुई है. पिछले महीनों में पूर्वी सिंहभूम की रैंकिंग     दिसंबर: 5वां स्थान     जनवरी: 7वां स्थान     फरवरी: 11वां स्थान     मार्च: चौथा स्थान     अप्रैल-मई: पहला स्थान 13 प्रमुख संकेतकों के आधार पर तैयार हुई रैंकिंग शिक्षा विभाग की समीक्षा रिपोर्ट 13 प्रमुख मानकों के आधार पर तैयार की गई है. इसमें हाई प्रायोरिटी संकेतकों को 70 प्रतिशत और इनेबलर्स को 30 प्रतिशत महत्व दिया गया है. झारखंड के टॉप-5 जिले     पूर्वी सिंहभूम: 77.95 प्रतिशत (रैंक-1)     लोहरदगा: 69.77 प्रतिशत (रैंक-2)     रामगढ़: 68.56 प्रतिशत (रैंक-3)     सरायकेला-खरसावां: 67.88 प्रतिशत (रैंक-4)     दुमका: 67.31 प्रतिशत (रैंक-5) वहीं दुमका, धनबाद और हजारीबाग ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है. सबसे पिछड़े तीन जिले     गिरिडीह: 49.81 प्रतिशत (रैंक-22)     गोड्डा: 46.25 प्रतिशत (रैंक-23)     गढ़वा: 45.49 प्रतिशत (रैंक-24) रिपोर्ट के अनुसार खूंटी और गढ़वा की रैंकिंग में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है. मैट्रिक परीक्षा 2026 में पूर्वी सिंहभूम का शानदार प्रदर्शन जिले ने जैक मैट्रिक परीक्षा 2026 में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. पूर्वी सिंहभूम के 128 स्कूलों में एक भी छात्र फेल नहीं हुआ. इस मामले में जिले ने गुमला के 127 और दुमका के 100 स्कूलों को पीछे छोड़ दिया. जिले के आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां सभी विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की. केवल चार स्कूल ऐसे रहे, जहां 20 प्रतिशत से अधिक छात्र असफल हुए. यह आंकड़ा रांची के 14 और पश्चिमी सिंहभूम के 15 स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है. 98 प्रतिशत रहा औसत सफलता प्रतिशत मैट्रिक परीक्षा में जिले का औसत पास प्रतिशत 98 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राज्य के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में शामिल है. विज्ञान, वाणिज्य और कला तीनों संकायों में पूर्वी सिंहभूम के स्कूलों ने शानदार प्रदर्शन किया. जिले के आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां तीनों संकायों में शत-प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए. यह उपलब्धि हजारीबाग, रांची और धनबाद जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों से भी बेहतर रही. प्रथम श्रेणी में उत्कृष्ट परिणाम     विज्ञान संकाय में 21 स्कूलों के सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए.     वाणिज्य संकाय में 13 स्कूलों ने यह उपलब्धि हासिल की.     कला संकाय में तीन स्कूलों के सभी छात्र प्रथम श्रेणी से पास हुए. 100 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूल     विज्ञान: 40 स्कूल     वाणिज्य: 30 स्कूल     कला: 21 स्कूल छात्र उपस्थिति में भी आया उल्लेखनीय सुधार पूर्वी सिंहभूम के सरकारी और सहायता प्राप्त 1,675 स्कूलों में अप्रैल महीने के दौरान विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति 66.50 प्रतिशत दर्ज की गई. इस क्षेत्र में जिले ने पांच रैंक का सुधार किया है. सामूहिक प्रयासों का दिखा असर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति या एक परीक्षा का परिणाम नहीं है. नियमित मॉनिटरिंग, जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों का असर अब सामने आने लगा है. पूर्वी सिंहभूम की यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक सकारात्मक संकेत भी है कि योजनाबद्ध प्रयास और प्रभावी प्रशासन के जरिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव संभव है. आखिर शिक्षा की असली परीक्षा सिर्फ बोर्ड रिजल्ट नहीं, बल्कि लगातार बेहतर होते स्कूल और सीखते हुए बच्चे होते हैं.

मोदी सरकार के 12 साल पर बोले सम्राट चौधरी, बिहार को औद्योगिक हब बनाने की तैयारी

पटना पटना के एक निजी होटल में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश और बिहार में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और बिहार के विकास को लेकर सरकार की आगामी योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं. अब सरकार का लक्ष्य भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और बिहार भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भाजपा ने अपने संकल्पों को पूरा किया सम्राट चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा अपने वैचारिक और राजनीतिक संकल्पों को पूरा करने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि जनसंघ के दौर से लेकर आज तक पार्टी ने जो वादे किए, उन्हें पूरा करने की दिशा में काम किया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने को ऐतिहासिक फैसला बताया. साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा सपना बताया, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में साकार हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा कभी अपने एजेंडे और विचारधारा से पीछे नहीं हटी है. यही कारण है कि जनता लगातार पार्टी पर भरोसा जता रही है. बिहार में 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई नई औद्योगिक परियोजनाओं की शुरुआत हुई है और बड़े निवेशक बिहार में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने घोषणा की कि सरकार ने 20 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारने का लक्ष्य तय किया है. उनका कहना था कि यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में डाटा सेंटर परियोजना पर जल्द काम शुरू होने वाला है, जिससे आईटी और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे. उद्योगों को 30 दिनों में मिलेगी मंजूरी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के लिए आवेदन करने वाले निवेशकों को अब लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत उद्योगों से जुड़े जरूरी प्रस्तावों को 30 दिनों के भीतर मंजूरी मिल जाएगी. इससे कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. राजगीर और मुंगेर में बनेगा डिफेंस कॉरिडोर मुख्यमंत्री ने बिहार में रक्षा क्षेत्र के विकास को लेकर भी बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि राजगीर और मुंगेर को डिफेंस कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. उनका कहना था कि देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बिहार भी इस विकास यात्रा का हिस्सा बनेगा. डिफेंस कॉरिडोर बनने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में निवेश बढ़ेगा. एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप पर जोर सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के हर जिले को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राजगीर और सासाराम-कैमूर क्षेत्र के बीच नई एयरस्ट्रिप बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार विभिन्न जिलों में एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप विकसित किए जाएंगे. इससे पर्यटन, उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने पटना एयरपोर्ट के नए स्वरूप की भी सराहना की और कहा कि अब वहां पहुंचकर बिहार में बदलाव साफ दिखाई देता है. सड़क, बिजली और सौर ऊर्जा पर फोकस मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सड़क और बिजली के क्षेत्र में बिहार ने बड़ी प्रगति की है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण और गांवों को जोड़ने के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के जरिए लाखों परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी तथा बिजली बिल का बोझ कम होगा. जीएसटी और जनधन योजना का किया जिक्र सम्राट चौधरी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. उन्होंने बिहार की 14 करोड़ आबादी को राज्य की सबसे बड़ी ताकत बताया. उन्होंने जनधन योजना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है. इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है. शिक्षकों के वेतन और पेंशन पर नहीं लगेगी रोक राज्य की वित्तीय स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों के वेतन और पेंशन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वेतन और पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में रोका नहीं जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं के उपयोगिता प्रमाणपत्र जरूर लिए जाएं, लेकिन वेतन और पेंशन भुगतान में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए. बड़ी परियोजनाओं की खुद करेंगे समीक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को लंबित योजनाओं की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है. इसी के तहत बिहार सरकार ने भी बड़ा फैसला लिया है. सम्राट चौधरी ने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा वह स्वयं करेंगे. इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी की वजहों का पता चलेगा और विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

श्रावणी मेले में कांवरियों को मिलेगी टेंट सिटी और स्वच्छ भोजन की सुविधा

पटना विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू हो रहा है, जो 30 जुलाई से 28 अगस्त तक होगा। मेले को भव्य, सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाने के लिए प्रशासनिक तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। इस संबंध में पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि हर साल करीब 40 लाख से अधिक श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर पैदल देवघर के लिए रवाना होते हैं। इस भारी भीड़ को देखते हुए सुल्तानगंज के बाबा अजगैबीनाथ मंदिर से लेकर दुम्मा बॉर्डर तक के पूरे मेला पथ को शिवमय बनाया जाएगा।  अत्याधुनिक टेंट सिटी और स्विस कॉटेज की सौगात इस संबंध में पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए तीनों जिलों के विभिन्न रूटों पर अत्याधुनिक टेंट सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें कुल 3000 कांवरियों के रुकने की क्षमता होगी। इसके अलावा, भागलपुर में वीआईपी सुविधाओं से युक्त 25 स्विस कॉटेज भी बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धौरी और असरगंज में पहली बार ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। जिलों के अनुसार भोजन और आराम करने की हो रही व्यवस्था पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ में 500 बेड की टेंट सिटी बनाई जा रही है। वहीं बांका जिला के अबरखा में 600 बेड, गोड़ियारी में 250 बेड और धौरी में 200 बेड की व्यवस्था की जा रही है। लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि धौरी में पहली बार इस तरह की व्यवस्था की जा रही है। वहीं मुंगेर जिला के  खैरा, धोबई, तारापुर और संग्रामपुर में 200-200 बेड, जबकि असरगंज में 300 बेड की व्यवस्था की जा रही है। असरगंज में भी इस तरह की व्यवस्था पहली बार की जा रही है। इतना ही नहीं सभी टेंट सिटी में भोजन प्रबंधन का जिम्मा जीविका दीदी की रसोई को सौंपा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को पूरी तरह शुद्ध और स्वच्छ भोजन मिल सके।

पटना नगर निगम का बड़ा प्लान: 4400 दुकानदारों को मिलेगा आधुनिक वेंडिंग जोन में ठिकाना

पटना पटना के फुटपाथी दुकानदारों को जल्द ही नया ठिकाना मिलने वाला है. नगर निगम की ओर से शहर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए कई पहल किए जा रहे हैं. ऐसे में अब नए वेंडिंग जोन बनाने का फैसला लिया गया है. जानकारी के मुताबिक, शहर के अलग-अलग इलाकों में 31 वेंडिंग जोन बनेंगे. इनमें से 19 के लिए 760.81 डिसमिल जमीन चिह्नित कर ली गई है. मिली जानकारी के मुताबिक, पटना में बनने वाले वेंडिंग जोन पर 124.4 करोड़ खर्च किए जायेंगे. इसमें नौ जगहों पर नगर निगम की अपनी जमीन है, जबकि बाकी 10 जगहों के लिए पथ निर्माण, सिंचाई और भवन निर्माण विभाग से उनकी जमीन पर वेंडिंग जोन बनाने के लिए स्वीकृति मिल गई है. हर वेंडिंग जोन में 200 से 235 दुकानें होंगी. 4400 रजिस्टर्ड दुकानदारों को बेहद कम रेट पर जगह मिल सकेगी. किस जगह कितने बनेंगे वेंडिंग जोन? पटना के नूतन राजधानी अंचल में 61.69 करोड़ रुपये से आठ वेंडिंग जोन बनेंगे, इसके तहत शेखपुरा रैन बसेरा, अमला टोला, पंच मंदिर, इको पार्क डीपीएस के पास, चित्रगुप्त समाज मंदिर, साकेत नगर, बेऊर मोड़ और जंक्शन रोड मल्टी लेवल पार्किंग के पीछे जी प्लस वन वेंडिंग जोन बनेंगे. पाटलिपुत्र अंचल में 24.29 करोड़ से चार वेंडिंग जोन बनेंगे. इनमें मछली मार्केट के पास आरसीडी की जमीन, वार्ड 20 में सब्जी मार्केट के पास, वार्ड 8 में बीएमएसआइसीएल के सामने और वार्ड 24 में दीघा पोस्ट के सूर्य मंदिर के पास आधुनिक जी प्लस वन परिसर तैयार किए जायेंगे. मुसल्लहपुर हाट और गांधी सेतु के पास भी बनेंगे वेंडिंग जोन जानकारी के अनुसार, बांकीपुर अंचल में निगम की जमीन पर 18.82 करोड़ से मैकडोवेल गोलंबर और खेतान मार्केट के सामने बिरला मंदिर रोड में जी प्लस वन, जबकि वार्ड 50 में मुसल्लहपुर हाट के पास जी प्लस टू भवन बनेगा. अजीमाबाद अंचल में 15.54 करोड़ से गांधी सेतु के नीचे, गायघाट और मीना बाजार में जी प्लस टू होंगे. पटना सिटी अंचल में 4.11 करोड़ से सती चौराहा गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ पर निगम की जमीन पर एक जी प्लस वन वेंडिंग जोन बनेगा. म्यूनिसिपल बॉन्ड के खर्च किए जायेंगे पैसे वेंडिंग जोन बनाने में म्यूनिसिपल बॉन्ड के पैसे खर्च किए जायेंगे. पटना नगर निगम 200 करोड़ रुपये का म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने जा रहा है. इसके लिए बाजार नियामक सेबी से हरी झंडी मिल चुकी है. पटना नगर निगम के मौजूदा रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में टोटल 20, 862 फुटपाथी दुकानदार रजिस्टर्ड हैं. लेकिन पिछले करीब 10 सालों से शहर के वेंडर कार्ड जारी नहीं किए गए हैं.

राज्यसभा चुनाव में पोलिंग एजेंट की भूमिका अहम, क्रॉस वोटिंग रोकने पर नजर

रांची  झारखंड में दो सीटों के लिए निर्धारित राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवारों के होने से निगाहें 18 जून पर टिक गई हैं जिस दिन मतदान होना है। निर्वाची पदाधिकारी ने बुधवार को निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी के नामांकन से संबंधित शिकायतों के बाद उसपर लगे होल्ड को वापस लेने का निर्णय सुनाकर सभी को चुनाव लड़ने का मौका दे दिया है। इस परिस्थिति में 18 जून को मतदान की तिथि पर सभी की निगाहें टिक गई हैं और इस दिन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में विभिन्न दलों के अधिकृत पोलिंग एजेंट होंगे। ऐसा इसलिए कि सभी विधायकों को मतदान के पूर्व अपनी पार्टी के पोलिंग एजेंट को भरा हुआ मतपत्र दिखाना है। पोलिंग एजेंट की भूमिका महत्वपूर्ण झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए झामुमो से बैद्यनाथ राम, कांग्रेस से प्रणव झा और निर्दलीय परिमल नथवाणी मैदान में हैं। ऐसे में अब पार्टियों के अधिकृत पोलिंग एजेंट की नियुक्ति और उसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सभी दलों के विधायकों को अपनी पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंट को बैलेट पेपर दिखाने की बाध्यता है। बैलेट पेपर नहीं दिखाने की स्थिति में उनके मत को रद किया जा सकता है। यह व्यवस्था क्रास वोटिंग को रोकने के लिए है। यह भी पक्की बात है कि अगर क्रास वोटिंग के बाद भी वह विधायक अपना मतपत्र दिखाकर भर देता है तो उसका मत रद नहीं होगा। इस प्रविधान के कारण अब पोलिंग एजेंटों की नियुक्ति महत्वपूर्ण है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अगर किसी दल का विधायक और उसका पोलिंग एजेंट आपस में मिल जाते हैं तो क्रास वोटिंग करने वाले विधायक की पहचान करना मुश्किल है। झारखंड में इस तरह का प्रकरण पहले भी हो चुका है और लोग महीनों तक अनुमान ही लगाते रहे कि किस विधायक ने क्रॉस वोटिंग की और किस ने नहीं।

डॉग लवर संस्था नहीं मिली, नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला; चाकुलिया भेजे जाएंगे आवारा कुत्ते

 धनबाद  धनबाद के आवारा कुत्तों का आश्रय गृह अब चाकुलिया होगा क्योंकि धनबाद में डॉग लवर नहीं है और न हीं ऐसी कोई संस्था जो आवारा कुत्तों के लिए कार्य करती है। नगर निगम ने ऐसी संस्था को ढ़ूढने के लिए खूब पसीना बहाया पर न केवल जिले बल्कि आस-पास के जिलों में भी ऐसी कोई संस्थान नहीं मिली। जिसके बाद नगर निगम ने शहर के आवारा कुत्तों को चाकुलिया के डॉग सेल्टर होम में भेजने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य है कि आवश्यकता अनुसार आवारा कुत्तों के लिए सेल्टर होम में भेजने से उपचार एवं देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो पाएगी। नगर निगम धनबाद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण, डॉग बाइट की घटनाओं में कमी तथा रेबीज उन्मूलन के उद्देश्य से एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से कर रहा है। नगर निगम ने अब तक लगभग 32,046 आवारा कुत्तों का बंध्याकरण (स्टरलाइजेशन) कर उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन दे चुका है। इसके साथ ही प्रतिदिन औसतन 25 कुत्तों को विभिन्न क्षेत्रों से पकड़कर उनका बंध्याकरण एवं टीकाकरण कराया जा रहा है। एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम, 2023 एवं निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप आवारा कुत्तों का बंध्याकरण, टीकाकरण एवं उपचार किया जा रहा है तथा उन्हें उनके मूल स्थान पर सुरक्षित छोड़ा जा रहा है। डॉग बाइट के मामलों में कमी लाने हेतु पोस्ट बाइट एंटी रेबिज वेक्सिनेशन व्यवस्था सुदृढ़ रूप से संचालित किया जा रहा है। साथ ही प्रीवेंशन एंटी रेबिज वेक्सिनेशन अभियान भी चलाया जा रहा है। 55 स्थलों को फीडिंग जोन के रुप में किया है अधिसूचित नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों के सुव्यवस्थित प्रबंधन हेतु कुल 55 स्थलों को फीडिंग जोन के रूप में अधिसूचित किया गया है। जहां ही डॉग फीडिंग की व्यवस्था की गई है। यह वीडियो भी देखें इन स्थलों पर स्वच्छता एवं व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नगर निगम द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि चिह्नित फिडिंग जोन के अतिरिक्त अन्यत्र डॉग फीडिंग किए जाने पर झारखंड नगर पालिका अधिनियम 2011 के प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान सतत प्रक्रिया है। जिसकी नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि शहर में आवारा कुत्तों से संबंधित समस्याओं का प्रभावी एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। सेल्टर होम में आवारा कुत्तों का उपचार एवं देखभाल की समुचित व्यवस्था है। धनबाद में काफी प्रयास के बाद भी डॉग लवर संस्था नहीं मिला। शहर के नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए आवारा कुत्तों को चाकुलिया डॉग सेल्टर होम भेजने का निर्णय लिया गया है। आशीष गंगवार, नगर आयुक्त

बिहार राजनीति में हलचल: सम्राट चौधरी की सीमांचल यात्रा से बढ़ा सियासी तापमान

 पूर्णिया  भाजपा की अगुवाई में बिहार में बनी पहली सरकार के मुखिया की यह पहली सीमांचल यात्रा है। पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इस इलाके का राजनीतिक समीकरण कुछ अलग है। बड़ी मुस्लिम आबादी फिर बांग्लादेश व नेपाल की सीमा से जुड़ाव से यहां का राजनीतिक गणित अलग है। ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की यात्रा की प्रबल संभावना से राजनीतिक गलियारों की नजर भी सजग हो गई है। उनकी यात्रा 16 जून् को प्रस्तावित है। वे सहयोग शिविर के माध्यम आम लोगों को मिल रही राहत को देखने पहुंचेंगे। शिविर का उद्देश्य धरातल पर कितना सफल हो रहा है, इसका फीडबैक वे लेंगे। उनकी यह यात्रा धमदाहा प्रखंडके रंगपुरा दक्षिण पंचायत से शुरू होगी। धमदाहा विधानसभा क्षेत्र से लगातार छह जीत दर्ज करने वाली बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह के चुनाव प्रचार के दौरान के भी उनका आगमन हुआ था। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में उनके विकास की सराहना भी की थी। इस यात्रा से एक बड़ा संदेश भी देना है। मुख्यमंत्री की डायरी में भी विकास ही प्राथमिकता है। सीमांचल विधानसभा चुनाव के पूर्व से ही केंद्र सरकार की प्राथमिकता में रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह यहां तीन दिवसीय प्रवास पर रहे थे। देश की सुरक्षा के लिए भी यह इलाका अहम है और केंद्र की मंशा को जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता भी। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पूर्व ही इलाके में आयोजित सभा के दौरान अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का नाम बता चुके थे। यह राजग के राजनीतिक समीकरण को साधने की कला भी थी। निश्चित रूप से सीमांचल में पूर्व मुख्यमंत्री की छवि विकास पुरुष के रूप में थी। सामाजिक समीकरणों को साध राजग की लगातार बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीति की उसी ट्रैक में उनकी भी गाड़ी बढ़ सकती है, यह संभावना पहले से बनी हुई है। प्रशासनिक अमला अपनी तैयारी में है। सहयोग शिविर के मायने की झलक जमीन पर दिखे, यह प्रयास किया जा रहा है। आम लोग भी उत्साहित हैं। इस शिविर के माध्यम उनकी ऐसी समस्याओं के समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिनके लिए वे सरकारी दफ्तर की दौड़ लगा रहे थे। कार्यकर्ता मुख्यमंत्री में देखते हैं पूर्व मुख्यमंत्री की छवि: आशीष कुमार बब्बू जदयू के प्रदेश महासचिव आशीष कुमार बब्बू ने कहा कि मुख्यमंत्री के धमदाहा आगमन की संभावना बनी है। यह एक सरकारी कार्यक्रम है। निश्चित रूप से उनके आने की सूचना से कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। कार्यक्रम सरकारी है और इसलिए उनका शेड्यूल तय होगा। इन स्थितियों के बीच राजग कार्यकर्ताओं में उनके आने की सूचना मात्र से काफी उत्साह है। कार्यकर्ता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि देखते हैं। मुख्यमंत्री का एक मात्र उद्देश्य बिना विभेद क्षेत्र के साथ-साथ जन-जन का कल्याण है। धमदाहा इलाके से उनका पुराना नाता रहा है। कई घरों में उनका पूर्व से आना-जाना रहा है। बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह से भी पारिवारिक रिश्ता रहा है। धमदाहा से उनकी यात्रा की शुरुआत से जदयू के साथ-साथ भाजपा, लोजपा आर, रालोसपा सहित हर घटक दल के कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है।

कोचिंग संस्थानों को शिक्षा मंत्री की चेतावनी, खान सर-रौशन आनंद विवाद के बीच दिया बड़ा संदेश

जमुई. पटना के चर्चित कोचिंग संचालक खान सर और रौशन आनंद के बीच उपजे हालिया विवाद पर बिहार सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इस मामले पर सूबे के शिक्षा मंत्री मिथलेश कुमार तिवारी ने बड़ा बयान देते हुए दो टूक कहा है कि कोचिंग संस्थान सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई के लिए होते हैं, लड़ाई-झगड़े और व्यक्तिगत वर्चस्व की जंग के लिए नहीं। जमुई पहुंचे शिक्षा मंत्री ने कोचिंग संस्कृति में आ रहे इस भटकाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ कोचिंग संचालक अपने मुख्य उद्देश्य यानी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के रास्ते से पूरी तरह भटक चुके हैं। वे पढ़ाई छोड़ विवाद और गुटबाजी की राह पर चल पड़े हैं, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। कोचिंग संस्थानों को दी चेतावनी शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस पूरे मामले को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्पष्ट निर्देश पर ऐसे विवादों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भविष्य में भी अगर कोई कोचिंग संचालक इस तरह की अमर्यादित हरकत में शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। "शिक्षा के मंदिरों को राजनीति, व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता और शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। सरकार छात्रों के भविष्य और उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कोचिंग सेंटरों का काम छात्रों का भविष्य संवारना मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अनुशासित, पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। कोचिंग सेंटरों को यह समझना होगा कि उनका काम छात्रों का भविष्य संवारना है, न कि कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी करना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित में सरकार आगे भी ऐसे सख्त और आवश्यक कदम उठाती रहेगी।

मनरेगा भुगतान में तेजी: जामताड़ा समेत संताल के जिलों को करोड़ों की राशि आवंटित

जामताड़ा  झारखंड सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) आयुक्त कार्यालय ने राज्य के सभी जिलों को बड़ी राहत देते हुए सामग्री मद के भुगतान के लिए 172.65 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। यह राशि एसएनए-स्पर्श माडल के माध्यम से जारी की गई है। इससे विभिन्न लंबित भुगतानों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। जामताड़ा जिले के 10.50 करोड़ रुपये की राशि मिली है। संताल में सबसे अधिक राशि गोड्डा को जिले 15 करोड़ रुपये मिली है। आयुक्त कार्यालय के पत्र में कहा गया है कि सामग्री मद में केंद्र एवं राज्य सरकार की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में है। जिलों को निर्देश दिया है कि आवंटित राशि का उपयोग तय प्राथमिकताओं के अनुसार किया जाए, ताकि लंबित देनदारियों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित हो सके। बताया गया कि तकनीकी सहायकों, सहायक अभियंताओं, कनीय अभियंताओं व बीएफटी के जून 2026 तक के वेतन का भुगतान, मेट के लंबित मानदेय का भुगतान, दीदी बगिया योजना से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की बकाया राशि का भुगतान, विशेष हरित ग्राम योजना की लंबित देनदारियों का निपटारा और पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भुगतान कर उन्हें मनरेगासॉफ्ट में बंद करना है। एक जुलाई से नए कानून के लागू होने से पहले खर्च करें पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार एक जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबीरामजी एक्ट लागू किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में एसएनए-स्पर्श माडल के तहत आवंटित राशि के उपयोग में भविष्य में प्रशासनिक कठिनाइयां आ सकती हैं। इसी को देखते हुए जिलों को उपलब्ध राशि का समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित व्यय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी कर्मियों, मेट, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े लाभुकों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही लंबित भुगतानों के निपटारे से ग्रामीण विकास परियोजनाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है। संताल परगना के छह जिलों को मिली राशि क्रम     जिला     आवंटित राशि 1     गोड्डा     15.00 2     जामताड़ा     10.50 3     पाकुड़     9.30 4     दुमका     8.80 5     देवघर     8.40 6     साहिबगंज     7.70

नगर निगम की बड़ी पहल: पटना के 6 अंचलों में सहयोग शिविर, 10 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा

पटना इस बात 16 जून को पटना के अलग-अलग अंचलों में ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से बताया गया है कि इन शिविरों के माध्यम से नागरिक न केवल पटना नगर निगम से संबंधित शिकायतें एवं सुझाव दर्ज करा सकेंगे, बल्कि अन्य विभागों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए भी आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सरकार की जन-अनुकूल पहल ‘सहयोग’ का उद्देश्य नागरिकों को एक ही मंच पर विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों के पंजीकरण एवं उनके समयबद्ध निवारण की सुविधा उपलब्ध कराना है। पटना नगर निगम इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए नियमित रूप से ऑफलाइन सहयोग शिविरों का आयोजन महीने के पहले एवं तीसरे मंगलवार को कर रहा है, जिससे आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ें। आइये जानते हैं इस बार कहां-कहां लग रहे हैं शिविर     नूतन राजधानी अंचल: खाजपुरा सामुदायिक भवन, वार्ड संख्या-04     पाटलीपुत्र अंचल: आर.एस. दरबार कम्युनिटी हॉल, आशियाना नगर, फेज-2, वार्ड संख्या-02     कंकड़बाग अंचल: सामुदायिक भवन, दसरथा, वार्ड संख्या-30     बांकीपुर अंचल: सामुदायिक भवन, कदमकुआं, वार्ड संख्या-38     अजीमाबाद अंचल: गुलजारबाग स्टेडियम, वार्ड संख्या-53     पटना सिटी अंचल: टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर, वार्ड संख्या-66 सहयोग पोर्टल पर अपलोड किया जाता है सहयोग शिविरों में प्राप्त सभी आवेदनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहयोग पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। प्रत्येक आवेदन के पंजीकरण के साथ एक यूनिक रेफरेंस नंबर जारी किया जाता है, जिससे शिकायतकर्ता अपने आवेदन की प्रगति एवं निष्पादन की स्थिति की जानकारी कभी भी प्राप्त कर सकते हैं। नागरिक घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त आगामी सहयोग शिविरों में पहुंचकर रेफरेंस नंबर के आधार पर पूर्व में दर्ज शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। घर बैठे भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत नगर निगम की ओर से बताया कि सहयोग पोर्टल नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करता है। किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत अथवा सुझाव को पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित आवेदन के लिए एक रेफरेंस नंबर स्वतः जनरेट हो जाता है, जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता आवेदन की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शिकायत पंजीकृत होने के साथ ही संबंधित विभाग को उसकी सूचना स्वतः उपलब्ध हो जाती है, जिसके आधार पर विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की जाती है। इस व्यवस्था से शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध बन रही है। सहयोग पोर्टल से प्राप्त 98 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा पटना नगर निगम द्वारा सहयोग पोर्टल एवं सहयोग शिविरों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निष्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राप्त आवेदनों का अधिकतम 10 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। गुरुवार तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सहयोग पोर्टल के माध्यम से कुल 463 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 452 आवेदनों का सफलतापूर्वक निपटान किया जा चुका है। इस प्रकार प्राप्त शिकायतों में से 98 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान सुनिश्चित किया गया है। शेष लंबित मामलों पर भी संबंधित विभागों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है। Bihar : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का हो रहा आगाज, पर्यटन विभाग तैयारी में जुटी; जानिए क्या है इस बार अलग ? नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है नगर निगम मुख्यालय स्तर से प्राप्त सभी प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है। शिकायतों के निष्पादन की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो तथा नागरिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान उपलब्ध कराया जा सके। पटना नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सहयोग शिविरों एवं सहयोग पोर्टल की सुविधाओं का अधिकाधिक उपयोग करें तथा अपनी समस्याओं एवं शिकायतों के समाधान के लिए इस जनहितकारी व्यवस्था का लाभ उठाएं। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से प्रशासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा तथा सुशासन के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।