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सरकारी टेंडर में भ्रष्टाचार केस में नया मोड़, संतोष कुमार को भेजा गया जेल

पटना बिहार में सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार मामले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने ठेकेदार रिशु श्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। संतोष एसवीयू में दर्ज केस (05/2025) के उन चार नामजद अभियुक्तों में शामिल है, जिसमें रिशु श्री की गिरफ्तारी हो चुकी है। संतोष कुमार उस मातृस्वा कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल था, जिस पर कई सरकारी ठेकों में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। यह कंपनी रिशु श्री की बताई जाती है। माना जा रहा है कि इस मामले में अब बड़े अधिकारियों पर जांच एजेंसी हाथ डाल सकती है। सरकार इस मामले में किसी को बख्शने के मूड में नहीं है। संतोष पर भ्रष्टाचार में शामिल रहे बिहार सरकार के अधिकारियों तक नकदी और महंगे गिफ्ट पहुंचाने के भी आरोप हैं। एसवीयू ने संतोष की गिरफ्तारी के बाद उसे निगरानी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए 11 जून तक बेऊर जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसी उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। सरकारी ठेकों में लेन-देन में उसकी मुख्य भूमिका दर्ज एफआईआर के मुताबिक सरकारी ठेकों में रिशुश्री और अधिकारियों के बीच हुए भ्रष्ट लेन-देन में संतोष कुमार की मुख्य भूमिका रही थी। इस मामले में पटना से गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ की गयी। फिर न्यायालय में पेशी कर जेल भेज दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है कि रिशु श्री के कहने पर संतोष कुमार ने कई सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों तक रिश्वत के रूप में नकद व महंगे गिफ्ट पहुंचाए। संतोष पर भ्रष्ट अधिकारी-कर्मियों के लिए अचल संपत्तियां खरीदने का भी आरोप है। एसवीयू संतोष के जरिए उन अधिकारियों तक पहुंचना चाहती है जिन्हें टेंडर माफिया कमीशन के रूप में नगद या सेवा का लाभ पहुंचाते थे। इसके लिए पैसे की व्यवस्था मातृस्वा कंस्ट्रक्शन कंपनी में फर्जी व मनगढ़ंत खर्चे दिखा कर की गयी थी। इस संबंध में ईडी ने 20 जनवरी 2025 को संतोष का बयान भी दर्ज किया है। संतोष पटना के जक्कनपुर थाना अंतर्गत मीठापुर बी एरिया बंगाली रोड के रहने वाले हैं। एसवीयू ने बताया कि रिशुश्री ने संतोष कुमार के नाम से मातृस्वा कंस्ट्रक्शन प्रा लि के अलावा मेसर्स अर्बन इन्वायरमेंटल सॉल्युशंस प्रा लि कंपनी भी बना रखी थी और इनके माध्यम से सरकारी टेंडर प्राप्त करता था। ठेके हासिल करने को बनाई थी कई कंपनियां एसवीयू के मुताबिक रिशु श्री ने सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कई कंपनियां बना रखी थी। इन कंपनियों के माध्यम से उसने कई सरकारी परियोजनाओं में उप ठेकेदार बन कर काम किया। कंपनियों में अपने करीबियों को निदेशक बना रखा था, ताकि उनसे मनमुताबिक काम कराया जा सके। दर्ज एफआईआर में रिशु श्री और संतोष कुमार के अलावा आईएएस संजीव हंस और मेसर्स मातृस्वा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार भी नामजद अभियुक्त हैं। इनके अलावा एफआईआर में बिहार सरकार के कई अज्ञात सरकारी अधिकारी व अन्य को भी आरोपित बनाया गया है।

गिरफ्तारी पर सस्पेंस: खान सर के वकील का दावा, FIR में उनका कोई रोल नहीं

पटना खान सर पर दर्ज एफआईआर और उनकी संभावित गिरफ्तारी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनके वकील अरविंद कुमार मऊआ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि खान सर सरेंडर नहीं करेंगे. उनकी ओर से सोमवार को कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दाखिल की जाएगी. लेकिन अभी नहीं हुई है. शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में अरविंद कुमार मऊआ ने कहा कि खान सर के कोर्ट पहुंचकर सरेंडर करने की खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा कि खान सर कोर्ट नहीं पहुंचे थे. सरेंडर करने की बात सही नहीं है. खान सर के वकील ने क्या-क्या बताया? खान सर के वकील ने आगे बताया कि खान सर पर कोई धारा नहीं लगता है,ना कोई लगाया गया है. जो भी आरोप है गार्ड्स पर है. हवाई फायरिंग हुई है. जिसके लिए 25(9) आर्म्स एक्ट का प्रोविजन लॉ में आया हुआ है. जो बेलेबल सेक्शन है. वकील अरविंद कुमार मऊआ ने आगे बताया कि सोशल मीडिया के वायरल वीडियो के आधार पर FIR दर्ज की गई है. खान सर का नाम डिस्क्लोजर स्टेटमेंट पर इंसर्ट कर दिया गया है. जबकि उनकी कोई भूमिका नहीं है. पत्रकारों ने पूछा कि बॉडीगार्ड ने बयान दिया है कि खान सर के कहने पर गोली चलाई गई. इसपर उनके वकील ने कहा कि बॉडीगार्ड का इस तरह का कोई स्टेटमेंट नहीं है, वो डिस्क्लोजर स्टेटमेंट है. वैसा कोई स्टेटमेंट बॉडीगार्ड्स के द्वारा नहीं दिया गया है. पत्रकारों से बातचीत करते खान सर के वकील अरविंद कुमार मऊआ गिरफ्तारी होगी या नहीं? वकील ने पुलिस पर छोड़ा फैसला जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या पुलिस खान सर को गिरफ्तार कर सकती है, तो वकील ने कहा कि यह पूरी तरह पुलिस का अधिकार क्षेत्र है. उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी करनी है या नहीं, यह फैसला पुलिस को करना है. शुक्रवार को दर्ज हुई थी एफआईआर शुक्रवार को फैसल खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर माहौल गर्म बना हुआ है. कोचिंग संस्थान के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जुटे रहे और खान सर के समर्थन में नारेबाजी करते दिखाई दिए. शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक छात्रों की भीड़ कोचिंग के बाहर डटी रही. पुलिस ने कई बार छात्रों से वहां से हटने की अपील की, लेकिन समर्थक लगातार मौके पर मौजूद रहे. पुलिस को है खान सर की तलाश मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब खान सर की तलाश कर रही है. पुलिस टीम मुसल्लहपुर स्थित खान ग्लोबल स्टडीज परिसर भी पहुंची थी, लेकिन वहां खान सर नहीं मिले. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामला जिन धाराओं में दर्ज हुआ है, वे गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में आती हैं. ऐसे में जांच के दौरान पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है. किन धाराओं में दर्ज हुआ है मामला? खान सर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(9), 27 और 35 के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच एजेंसियों के अनुसार ये धाराएं गंभीर अपराधों से जुड़ी मानी जाती हैं और इनमें गिरफ्तारी का प्रावधान है. क्या कहती है BNS की धारा 109? BNS की धारा 109 हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से संबंधित है. जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी की जान लेने की कोशिश करता है तो यह धारा लागू हो सकती है. इसमें बंदूक, चाकू या अन्य खतरनाक हथियार से हमला करने जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं.     इस अपराध में 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.     इसे गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है. आज फिर हो सकती है पुलिस की कार्रवाई पुलिस सूत्रों के अनुसार खान सर की गिरफ्तारी के लिए दोबारा प्रयास किया जा सकता है. शुक्रवार को भी पुलिस ने कार्रवाई की कोशिश की थी, लेकिन कोचिंग के बाहर छात्रों की भारी भीड़ जुटने के कारण स्थिति संवेदनशील हो गई थी. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सोमवार को अग्रिम जमानत याचिका पर क्या कदम उठाया जाता है और उससे पहले पुलिस क्या कार्रवाई करती है. क्या है पूरा विवाद? यह पूरा मामला 2 जून की रात खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच हुए विवाद से जुड़ा है. आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद के दौरान मारपीट हुई, जिसमें खान ग्लोबल के सुरक्षा गार्ड चुनचुन घायल हो गए. इस मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. वायरल वीडियो के बाद बढ़ीं मुश्किलें इसी विवाद के बीच खान सर के दो निजी सुरक्षा गार्डों का फायरिंग करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ. इसके बाद पुलिस ने खान सर और दोनों गार्डों से पूछताछ की. पुलिस के अनुसार पूछताछ में गार्डों ने बताया कि विवाद के दौरान बड़ी संख्या में लोग कोचिंग के बाहर पहुंच गए थे. उनका आरोप है कि हंगामे के बीच फायरिंग हुई, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया. अब पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है.

अतिक्रमण और प्रदूषण पर सख्ती, कांके डैम की ड्रोन मैपिंग कराएगा नगर निगम

 रांची विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रांची नगर निगम ने शहर की प्रमुख जलसंपदा कांके डैम के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निगम और अंचल प्रशासन की टीम के साथ वार्ड संख्या 1 स्थित कांके डैम के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्वच्छता, अतिक्रमण, अवैध कब्जा, निर्माण कार्यों और ड्रेनेज व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। नगर आयुक्त ने मिशन गली, कांके डैम तट से लेकर कांके डैम पार्क तक के क्षेत्र का भ्रमण करते हुए अधिकारियों को डैम संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके लिए स्वच्छता शाखा, नगर निवेशक शाखा, अभियंत्रण शाखा, ट्रांसपोर्ट शाखा, भू-संपदा शाखा और अंचल कार्यालय के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का आदेश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने डैम में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए अभियंत्रण शाखा को निर्देश दिया कि डैम में सीधे गिरने वाले सभी नालों की पहचान कर उनके प्रवाह को तत्काल रोका जाए। साथ ही घरों से निकलने वाले गंदे पानी को डायवर्ट करने, सोकपिट निर्माण को बढ़ावा देने तथा डैम में किसी भी प्रकार के प्रदूषित तरल अपशिष्ट के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। कांके डैम के कैचमेंट एरिया की सुरक्षा को लेकर भू-संपदा शाखा और अंचल प्रशासन को पूरे क्षेत्र की मापी कराने और उसकी घेराबंदी करने का निर्देश दिया गया। एंड टू एंड वाकवे निर्माण शहरवासियों के लिए कांके डैम को एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। अभियंत्रण शाखा को पूरे कैचमेंट एरिया में एंड टू एंड वाकवे निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे लोगों को मार्निंग और इवनिंग वाक की बेहतर सुविधा मिल सके। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जलाशयों के संरक्षण से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नियमानुसार किसी भी जलाशय की अधिगृहित भूमि से 15 मीटर की परिधि के भीतर किसी प्रकार का भवन या अन्य निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में योजनाबद्ध तरीके से कांके डैम को अतिक्रमण मुक्त, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाते हुए इसे शहरवासियों के लिए एक आकर्षक और प्रस्तुत करने योग्य स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। डैम साइड स्थित अवैध खटालों पर होगी कार्रवाई नगर आयुक्त ने कहा कि कैचमेंट एरिया में आने वाली सभी अवैध संरचनाओं और अतिक्रमणों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डैम क्षेत्र में संचालित अवैध खटालों, अवैध निर्माणों और अवैध बाउंड्री वॉल को लेकर भी निगम सख्त रुख अपनाने जा रहा है। नगर आयुक्त ने इनफोर्समेंट टीम को तत्काल कार्रवाई कर ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जलाशय क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध गतिविधि किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। डैम की निगरानी के लिए होगी ड्रोप मैपिंग डैम क्षेत्र की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए ड्रोन मैपिंग कराने का निर्णय लिया गया है। ड्रोन सर्वे के माध्यम से पूरे कैचमेंट एरिया का प्लाटवार आकलन किया जाएगा, जिससे अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों की सटीक पहचान हो सके चिन्हित मामलों में नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कांके डैम में तेजी से फैल रही जलकुंभी और जमा हो रही गाद को हटाने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नगर आयुक्त ने स्वच्छता और ट्रांसपोर्ट शाखा को पोकलेन मशीन और वीड हार्वेस्टिंग मशीन की मदद से नियमित सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया। साथ ही डैम के किनारों पर उगी झाड़ियों और घासों की छंटाई भी कराई जाएगी ताकि क्षेत्र की सुंदरता और स्वच्छता बनी रहे।  

शिक्षा मंत्री सख्त: 10 साल पुराने मुकदमों की 15 दिन में होगी पहचान और समीक्षा

पटना बिहार का शिक्षा विभाग वर्षों से मुकदमों के बोझ तले दबा जा रहा है। हाल यह है कि विभाग 10145 मुकदमों में उलझा हुआ है। हालांकि अब इसके निपटारे की कार्ययोजना बनायी जा रही है। विभाग लंबित मुकदमों में से 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर बिहार मुकदमा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करेगा। लंबित मुकदमों के मामले को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने कहा कि मुकदमे न केवल प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि ये शिक्षकों, कर्मियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े निर्णयों में भी अनावश्यक विलंब का कारण बनते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की विशेष सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। मंत्री ने 15 दिनों के भीतर दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की पहचान, वर्गीकरण और प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर बिहार मुकदमा नीति के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ करने को कहा है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुकदमों के बोझ से मुक्त होने पर विभाग का समय, ऊर्जा और संसाधन सीधे तौर पर जनहितकारी कार्यों में लगाए जा सकेंगे। विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे के विकास में, शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की लंबित समस्याओं के समाधान में तथा सरकारी शिक्षा योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन में इसका उपयोग हो सकेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार मुकदमा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा विभाग के मुकदमों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। बिहार सरकार जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा विभाग इस दिशा में सुशासन की एक नई नजीर पेश करेगा।

मौसम बदलेगा मिजाज: पूरे झारखंड में बारिश के आसार, पलामू-गढ़वा में 40°C तक पहुंचेगा पारा

 रांची  झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची (IMD Ranchi) ने राज्य के विभिन्न जिलों के लिए आज का मौसम पूर्वानुमान (Jharkhand Weather Forecast) जारी कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आज पूरे राज्य में कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज ऐसा कोई जिला नहीं बचेगा, जहां एक-दो स्थानों पर बारिश न हो। यानि पूरे झारखंड में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा, बिजली कड़कने और बादल गरजने का भी अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 की रफ्तार से हवा चलेगी। बारिश के बाद जहां कई स्थानों में चुभती गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं जिन स्थानों पर बारिश नहीं होगी, वहां तापमान बढ़ेगा इन स्थानों पर बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के मुताबिक, आज झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में पारे का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा। पलामू और गढ़वा जैसे उत्तर-पश्चिमी जिले आज सबसे गर्म रहने वाले हैं, जहां अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 40°C तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, राजधानी रांची सहित मध्य झारखंड के इलाकों जैसे खूंटी और गुमला में आज अधिकतम तापमान 36°C और न्यूनतम तापमान 24°C से 25°C के आसपास बने रहने की उम्मीद है, जिससे यहां थोड़ी राहत रहेगी। इसके विपरीत, संताल परगना और उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद और दुमका जैसे जिलों में अधिकतम तापमान 36°C के आसपास रहेगा, जबकि गोड्‌डा और पाकुर में यह 37°C तक जा सकता है। दक्षिण झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में भी पारा 38°C के करीब रहने से दोपहर में उमस भरी गर्मी का अहसास होगा। मौसम विभाग की आज के लिए जरूरी चेतावनी वज्रपात (बिजली गिरने) से सावधान: जिन 15 जिलों में बारिश का अनुमान है, वहाँ तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कने की आशंका है। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों या पक्के मकानों में शरण लें। पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। दोपहर में निकलने से बचें: पलामू, गढ़वा और चतरा के लोग दोपहर 12 से 3 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर ही घर से बाहर निकलें।

फायरिंग केस में नाम आने के बाद खान सर का सरेंडर, जानें पूरा मामला

पटना खान सर पर प्राथमिकी दर्ज हुए 24 घंटे बीत गए लेकिन पटना पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर पाई। अब फैजल खान पटना सिविल कोर्ट पहुंच चुके हैं। वह सरेंडर करेंगे। कोर्ट में पेश होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार रात्रि से शनिवार सुबह तक पटना पुलिस की टीम खान सर के कोचिंग के पास तो छात्रों की भीड़ जुटने लगी। विधि व्यवस्था प्रभावित न हो, इसलिए पटना पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक गिरफ्तार नहीं किया। देर रात छात्रों की संख्या कम हुई लेकिन इसके बावजूद खान सर ने न तो सरेंडर किया और न ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। शनिवार दोपहर खान सर सरेंडर करने कोर्ट पहुंच गए।   छात्रों को मैसेज आया कि खान सर आज क्लास लेंगे इधर, शनिवार सुबह खान सर के कोचिंग से जुड़े छात्रों को मैसेज आया कि खान सर आज क्लास लेंगे। वह सुबह 10 से 11 बजे क्लास लेंगे। हालांकि, उन्होंने क्लास तो नहीं लिया लेकिन वह सरेंडर करने जरूर सामने आए। पटना पुलिस ने छात्रों से फिर से अपील की है कि वह किसी कोचिंग वालों के बहकावे में नहीं आएं। विधि व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करें। पटना पुलिस निष्पक्ष होकर कार्रवाई कर रही है। खान सर पर गोली चलाने के आदेश देने का आरोप थाने में दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि दोनों सुरक्षा गार्डों ने लोगों में भय और दहशत फैलाने तथा सार्वजनिक रूप से हथियार का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से फायरिंग की। दोनों अंगरक्षकों ने कबूल किया है कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही फायरिंग की। दोनों ने स्पष्ट कहा कि कुछ लोग उग्र होकर कोचिंग के बाहर सुरक्षा गार्ड को बेरहमी से पीट रहे थे। इतना ही नहीं कुछ अन्य असमाजिक तत्व बैनर और पोस्टर भी फाड़ने लगे। हंगामा के बाद हमलोग खान सर के साथ बाहर आए। हंगामा देखकर खान सर ने कहा कि देख क्या रहे हैं हो, अविलंब फायर करो जो होगा मैं समझ लूंगा। इस आदेश के बाद हमलोगों ने दो दो राउंड फायरिंग की। खान सर को कितने साल की सजा हो सकती है? पटना पुलिस ने फैसल खान उर्फ खान सर पर बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 (9)/ 27/ 35 के तहत हत्या के प्रयास और लापरवाही से हथियार (जैसे बंदूक या पिस्टल) लहराने या इस्तेमाल करने का केस दर्ज होता है। पटना हाईकोर्ट के वकील आलोक आनंद ने कहा कि गोली चलाने का आरोप खान सर के दोनों अंगरक्षकों पर लगा है। अगर यह बात साबित हो जाती है कि खान सर के आदेश पर दोनों अंगरक्षकों ने गोली चलाई तो वह भी सामान्य रूप से बीएनएस की धारा 109 में दोषी पाए जाएंगे। अगर दोषी पाए गए तो 10 साल तक की सजा उन्हें हो सकती है। उनपर आर्म्स एक्ट की धारा 35 भी लगी है। इससे खान सर नहीं बच सकते हैं। जो धाराएं लगाई हैं वह खान को परेशान करेगी।    

निशांत समेत 8 नामों का ऐलान, सामाजिक समीकरण साधने में जुटा एनडीए

पटना बिहार विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव और 9 सीटों पर चुनाव को लेकर एनडीए ने आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। एनडीए के दोनों प्रमुख दलों जदयू और भाजपा ने अपने-अपने कोर वोटरों का पूरा ध्यान रखा है। इन आठ उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ा समाज से जबकि तीन महिलाएं हैं। जदयू ने तीन जबकि भाजपा ने दो अतिपिछड़ों को मौका दिया है। भाजपा ने अपने हिस्से की चार सीटों में से दो सवर्णों के हवाले किया है। घोषित उम्मीदवारों में भाजपा के संजय मयूख को छोड़कर निशांत समेत शेष सात उम्मीदवार पहली बार विधान परिषद जाएंगे। एनडीए की ओर से 9वीं सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश का भी विधान परिषद जाना तय है। जल्द ही रालोमो उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करेगी। जदयू ने उम्मीदवारों के चयन में आधार वोट के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा है। जदयू की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी दी गयी है। पार्टी के चार उम्मीदवारों में एक पिछड़ा तो तीन अति पिछड़ा हैं। इनमें एक कुर्मी, एक नोनिया, एक कुम्हार और एक धानुक जाति से हैं। भाजपा प्रत्याशियों में दो सवर्ण और दो अतिपिछड़ा हैं। सवर्ण में एक राजपूत तो एक कायस्थ हैं जबकि अतिपिछड़ा में एक नाई और दूसरी प्रजापति हैं। चार में एक महिला को भी है। इनमें तीन पहली बार तो एक तीसरी बार विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। जदयू की सूची में पहला नाम निशांत का है। उन्हें जदयू का अगला चेहरा माना जा रहा है। डॉ. भारती मेहता बीते 25 वर्षों से जदयू के लिए काम कर रही हैं। इस समय जदयू महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं, शिवरानी प्रजापति 20 वर्षों से पार्टी में सक्रिय हैं। वे बेतिया जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं। अति पिछड़ी वर्ग में कुम्हार जाति से आती हैं। ललन प्रसाद समता पार्टी के समय से यानी लगभग 32 वर्षों से पार्टी के काम में जुटे हैं। अति पिछड़ा वर्ग के धानुक जाति से आते हैं। भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह काराकाट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़े थे। हाल के दिनों में पवन सिंह की मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेताओं से हुई थी। उसी समय से कयास लगाया जा रहा था कि पवन सिंह को कुछ अहम जिम्मेवारी दी जाएगी। वहीं, डॉ. संजय मयूख को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है। वे लगातार तीसरी बार उच्च सदन के सदस्य होंगे। इसके पहले पार्टी ने गंगा प्रसाद और मंगल पांडेय को लगातार तीन बार विधान परिषद भेजा था। अनिल कुमार ठाकुर अतिपिछड़ा वर्ग में नाई जाति से आते हैं। वे अभी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वहीं शीला पंडित (प्रजापति) अभी बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं। वह डॉ. संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहते प्रदेश मंत्री और सम्राट चौधरी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर चुकी हैं।

यात्री के साथ लापरवाही पड़ी भारी, सीट न देने पर रेलवे पर लगा हजारों का जुर्माना

पटना  भारतीय रेलवे में लाखों यात्री हर दिन रिजर्वेशन कर सफर करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि कंफर्म टिकट मिलने के बाद उनकी सीट सुरक्षित होगी। बिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पर कंफर्म टिकट होने के बावजूद भी चार यात्रियों को रिजर्व्ड सीट नहीं मिली। उन्हें पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा। इस मामले के सामने आने के बाद यात्रियों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई थी और अब उपभोक्ता आयोग ने इस पर बड़ा फैसला दे दिया है। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में रेलवे की गलती मानी है और चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा है।  यह मामला उस समय सामने आया जब चार यात्री उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से बिहार के आरा के लिए LTT-पटना एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। यात्रियों के पास पहले से कंफर्म रिजर्व टिकट था लेकिन ट्रेन में चढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी निर्धारित बर्थ पर दूसरे लोग बैठे हुए हैं। शिकायत में दावा किया गया कि सीटों पर रेलवे स्टाफ मौजूद था और कई बार अनुरोध के बावजूद सीट खाली नहीं कराई गई।  रेलवे अधिकारियों ने नहीं की मदद यात्रियों ने मौके पर अपनी समस्या हल कराने की कोशिश की। उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन, रेलवे सेवा पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें शिकायत संख्या भी जारी हुई, लेकिन यात्रा के दौरान उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। बाद में यात्रियों ने टीटीई से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें भीड़ का हवाला देकर किसी तरह यात्रा पूरी करने को कहा गया। नतीजा यह हुआ कि चारों यात्रियों को पूरा सफर खड़े होकर तय करना पड़ा।  कोर्ट ने क्या कहा? मामला भोजपुर कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने यात्रियों की ओर से पेश किए गए टिकट, शिकायत रिकॉर्ड और अन्य सबूतों पर विचार किया। आयोग ने माना कि यात्रियों ने वैध आरक्षण कराया था लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार रिजर्व्ड सीट नहीं दी गई। इसे रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना गया।  आयोग ने कहा कि यात्रियों को सिर्फ असुविधा नहीं हुई बल्कि उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ी। आयोग ने यह भी माना कि किसी यात्री को कंफर्म सीट के बावजूद खड़े होकर यात्रा करने के लिए मजबूर करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद रेलवे को चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा गया।  रेलवे को कितना भुगतान करना होगा? फैसले में रेलवे को निर्देश दिया गया कि यात्रियों की टिकट राशि 1,876.80 रुपये ब्याज सहित वापस की जाए। इसके अलावा यात्रियों को 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी दिया जाए। आयोग ने आदेश दिया कि यह भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ सकता है।  सभी को पता होना चाहिए नियम भारत में रोजाना लाखों लोग रेल से सफर करते हैं। ज्यादातर लोगों को अपने अधिकारों के बारे में नहीं पता होता और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर आपका टिकट कंफर्म है और सीट रिजर्व है तो ट्रेन में आपको आरक्षित सीट मिलनी चाहिए। अगर आपकी सीट पर कोई और बैठा हो तो आप रेलवे कर्मचारियों से कहकर सीट खाली करवा सकते हैं। अगर रेलवे मदद नहीं करता है तो कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन या कंज्यूमर कोर्ट में अपील कर सकते हैं।   

हेमंत सोरेन को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें? जमीन घोटाले में 8 जून को आएगा कोर्ट का फैसला

रांची. ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में बड़गाई अंचल के 8.46 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत अपना निर्णय आठ जून को सुनाएगी। मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए हेमंत सोरेन ने पांच दिसंबर को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की है। हेमंत सोरेन की ओर से डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर कहा गया था कि वह इस मामले में निर्दोष है। उनके खिलाफ लगे सभी आरोप निराधार हैं। मामले में हेमंत सोरेन सहित 18 आरोपितों के खिलाफ ईडी ने चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोप तय किया जाना है। समय / वर्ष     घटनाक्रम वर्ष 2024     बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025     हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026     ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026     विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत इस डिस्चार्ज याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायालय के इस फैसले के बाद केस में आगे क्या होगा- यदि डिस्चार्ज याचिका स्वीकार होती है: अगर अदालत हेमंत सोरेन की दलीलें मान लेती है, तो उन्हें इस मामले से बरी किया जा सकता है (यानी उन पर ट्रायल नहीं चलेगा)। यदि डिस्चार्ज याचिका खारिज होती है: अगर अदालत याचिका खारिज कर देती है, तो अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत हेमंत सोरेन और अन्य सभी 18 आरोपितों पर कोर्ट में औपचारिक रूप से आरोप तय (Frame of Charges) किए जाएंगे और नियमित ट्रायल शुरू होगा। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।

पूजा सिंघल दंपती ने कोर्ट के निर्देश पर सरेंडर किए पासपोर्ट, विदेश यात्रा से लौटने के बाद कार्रवाई

रांची ईडी कोर्ट में मनी लांड्रिंग में आरोपित आइएएस पूजा सिंघल और उनके पति अभिषेक झा ने बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। दोनों हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं, जहां वे अपनी बेटी के इलाज के लिए गए थे। इससे पहले पूजा सिंघल और अभिषेक झा ने अदालत में याचिका दाखिल कर पासपोर्ट रिलीज करने तथा विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया था कि उनकी बेटी गंभीर न्यूरोलाजिकल बीमारी से पीड़ित है और उसके इलाज के लिए सिंगापुर जाना आवश्यक है। अदालत ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देते हुए शर्त रखी थी कि वे 31 मई तक रांची लौट आएंगे और वापसी के एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करेंगे। अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए दोनों बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। चिल्ड्रेन कोर्ट से हत्या के मामले में नाबालिग बरी चिल्ड्रेन कोर्ट ने हत्या के मामले के नाबालिग आरोपित को बुधवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाता है। घटना को लेकर युवती के पिता ने 23 मई 2024 को लापुंग थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि बेटी नाबालिग लड़के से बातचीत करती थी। 15 मई 2024 को घर से सहेली के मिलने के निकली, लेकिन वापस नहीं आई। पिता ने हत्या करने का आरोप लगाते हुए नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष पाई गई, जिसके कारण उसका मामला अलग कर चिल्ड्रेन कोर्ट में चलाया गया। बैटरी चोरी के मामले में पांच आरोपित बरी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मयंक मलियाज की अदालत ने टेलीकाम टावर से बैटरी चोरी के मामले में लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद पांच आरोपितों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। मामले से शहनवाज, साजिद अंसारी, रिजवान, आर्यन खान तथा नायर आलम को बरी किया गया। मामला नामकुम (खरसीदाग ओपी) थाना से जुड़ा था। प्राथमिकी के अनुसार 26 जुलाई 2024 की रात करीब 2:30 बजे एक टेलीकाम टावर के शेल्टर का ताला तोड़ कर वहां रखी 48 बैटरियों में से 24 एक्साइड बैटरियां अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को गवाह प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। अदालत ने समन, वारंट, एसएसपी को पत्र और अंतिम अवसर तक प्रदान किया, लेकिन इसके बाद एक भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह नो एविडेंस का मामला है। दहेज उत्पीड़न मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज न्यायायुक्त की अदालत ने वैवाहिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के मामले में पत्नी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें केवल पति सुखराम हजाम के संज्ञान लिया गया था। यह मामला शिकायतवाद से जुड़ा है। मामले में शिकायतकर्ता सुरेखा प्रमाणिक ने आरोप लगाया था कि पति के साथ-साथ सास-ससुर एवं अन्य ससुराल वालों ने भी उसे प्रताड़ित किया और पांच लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने दलील दी थी कि जांच के दौरान गवाहों ने सभी आरोपितों की भूमिका की पुष्टि की है। इसलिए उनके खिलाफ भी संज्ञान लिया जाना चाहिए था। लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।