samacharsecretary.com

पीएम जनमन योजना में जनजातीय बसाहटों में बढ़ी आधारभूत सुविधाएं

सहरिया, बैगा, भारिया परिवारों को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ भोपाल  जनजातीय बसाहटों को आधारभूत सुविधाओं से संपन्न बनाने और जनजातीय परिवारों में खुशियां लाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने पीएम जनमन योजना में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पीएम जनमन योजना में 5800 जनजातीय बसाहटों में रह रहे 2 लाख 62 हजार से ज्यादा सहरिया, बैगा और भारिया परिवारों को विभिन्न विभागों की योजनाओं का सीधा लाभ मिला है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड देने में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। वे हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ लेने में इन दस्तावेज का उपयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, बहुउद्देशीय केंद्र, हर घर नल से जल, हर घर बिजली, सबको पोषण, सबको स्वास्थ्य, सबको शिक्षा, गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क, वन धन विकास केंद्र बनाने जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं को इन बसाहटों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी योजनाओं से संबंधित विभागों को दी गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। जनजातीय परिवारों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने में शिवपुरी जिला न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में आगे है। यहां 16 हजार से ज्यादा आवास बन चुके हैं। शहडोल में 10711, श्योपुर 7639, उमरिया में 6410, छिंदवाड़ा में 5479 मंडला में 5446 आवास बने हैं। अन्य जिलों में विभिन्न स्तरों पर तेजी से काम चल रहा है। सड़क सुविधा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1570 बसाहटों में 2265 किमी सड़कें बनाने का लक्ष्य है। राष्ट्रीय ग्रामीण अधोसंरचना विकास ऐजेंसी को 269 किमी की 117 सड़कें बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। हाल में 739 किमी लंबाई की 377 सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। इनके निर्माण के लिये टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 17 जिलों में 125 बहुउद्देशीय केंद्रों के निर्माण का काम चल रहा है। सबसे ज्यादा 33 शिवपुरी और 24 श्योपुर में बन रहे हैं। हर घर नल से जल हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4843 बसाहटों में रह रहे 12 लाख 30 हजार घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य है। अब तक 8,43,258 घरों में नल से जल पहुंच रहा है। शेष घरों में दिसंबर माह तक पहुंच जाएगा। सबको स्वास्थ्य सबको स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से 3132 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं और 1268 में मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इस प्रकार 4400 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच गई हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक 4 लाख से अधिक रोगियों का परीक्षण किया गया है। विशेष रूप से टीबी और सिकल सेल की जांच की गई है। करीब 27000 रोगियों की फिजियोथैरेपी कराई गई। विद्युत सुविधा जनजातीय परिवारों को ग्रिड के माध्यम से हर घर बिजली देने में 24,800 घरों में विद्युत सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। दुर्गम क्षेत्रों में आफग्रिड के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा विभाग के सहयोग से 11 जरूरतमंद जिलों के 2060 गांवों में विद्युत सुविधा देने का काम तेजी से चल रहा है। सभी बसाहटों में पोषण देने के लिए 704 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 628 बन गये हैं और शेष अगले दो महीनों में बन जायेंगे। इसके अलावा 76 नये आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने का भी प्रस्ताव है। इन केन्द्रों में बच्चों के पोषण का स्तर लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। सबको शिक्षा सबको शिक्षा सुविधा देने के लिए जिन जनजातीय बसाहटों के पास प्राथमिक शाला की सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में 16 जिलों में 106 छात्रावास स्वीकृत किए गये हैं। मोबाइल सुविधाओं को सुदृढ़ बनाते हुए 15 जिला में उपयुक्त स्थान पर 4जी मोबाइल नेटवर्क दिया जा रहा है। टावर के लिये स्थान चिन्हित कर लिये गये हैं। इसके अलावा वन एवं तकनीकी शिक्षा विभागों द्वारा 11 जिलों में 83 वन-धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इससे 5000 जनजातीय हितग्राही जुड़े हैं। सभी को उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम और उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वन-विकास केंद्र का बिजनेस प्लान बनाने में प्रशिक्षण दिया गया है।  

निवेश मित्र नीतियों से हुई मप्र के निर्यात में 6% की बढ़ोतरी

अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का हुआ निर्यात भोपाल मध्यप्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात में अपनी रेंकिंग में सुधार करते हुए अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का निर्यात किया है। निर्यात में 6% की बढ़ोतरी हुई है जो फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया उत्पादों में निर्यात बढ़ने के फलस्वरूप हुई है। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में 66,218 करोड रुपए का योगदान है जबकि स्पेशल इकोनामिक जोन में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने राज्य के एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो में 4038 करोड रुपए का योगदान दिया है। इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास बढ़ने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात में मध्यप्रदेश की रैंकिंग 15 से 11 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित कृषि उत्पाद मिलाकर मध्यप्रदेश ने विश्व बाजार के प्रतिमानों के अनुसार निर्यात रैंकिंग में बढ़ोतरी की है। निवेश मित्र औद्योगिक विकास की नीतियां, औदयोगीकरण का बढ़ता आधार मध्यप्रदेश का निर्यात बढ़ने के प्रमुख कारण है। इसके अलावा निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली अधोसंरचना में बढ़ोतरी होना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित होने को भी प्रमुख है। पिछले साल तक फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्यूमिनियम और टेक्सटाइल पांच ऐसे निर्यात सेक्टर थे जो प्रथम पांच निर्यातकों में शामिल थे। मुख्य रूप से बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड में मध्यप्रदेश को निर्यात का बड़ा मार्केट मिला है। फार्मास्यूटिकल और मशीनरी के निर्यात में मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूएस है। मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 11,968 करोड रुपए के फार्मास्यूटिकल्स, 6062 रुपए के एनिमल फीड, 4795 करोड रुपए के एल्युमिनियम, 4656 रुपए का निर्यात और 5497 रुपए की मशीनरी का निर्यात हुआ। पिछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में 37,692 करोड रुपए, 2020-21 में 47,959 करोड रुपए, 2021-22 में 58,407 करोड रुपए, 2022-23 में 65,878 करोड रुपए, 2023-24 में 65,255 करोड़ रुपए और 2024-25 में 66,218 करोड रुपए का निर्यात मध्यप्रदेश से हुआ। इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े भी शामिल है। धार जिला निर्यात में प्रथम है। यहां से 17,830 करोड रुपए का निर्यात हुआ जबकि इंदौर से 13,500 करोड रुपए का निर्यात हुआ। यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ। उज्जैन ने भी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,288 करोड रुपए का निर्यात किया, जिसमें इंडस्ट्रियल, कृषि आधारित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास पर फोकस रखते हुए और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है। इससे न सिर्फ राज्य की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिली है बल्कि देश के कुल निर्यात में भी मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है।  

Bhopal पुलिस ने मछली गैंग पर कसा शिकंजा, अब तक 15 गिरफ्तार और 50 से ज्यादा पूछताछ

भोपाल राजधानी में चर्चित हाई-प्रोफाइल ड्रग्स-हथियार तस्करी मामले में पुलिस ने यासीन मछली और शाहवर मछली के नेटवर्क की परत-दर-परत पोल खोल दी है। यह खुलासा न केवल ड्रग माफिया के काम करने के तरीके को उजागर करता है, बल्कि शहर के पार्टी कल्चर की उस अंधेरी सच्चाई को भी सामने लाता है, जहां नशा मौज-मस्ती से आगे बढ़कर संगठित अपराध का बड़ा जरिया बन चुका है। 15 की गिरफ्तारी, 50 से पूछताछ अब तक क्राइम ब्रांच यासीन के 15 करीबियों को गिरफ्तार कर चुकी है और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है। पूरे रैकेट का पर्दाफाश यासीन और शाहवर के मोबाइलों में मिली ड्रग चैट और फोटो से हुआ है। रिमांड के दौरान पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि इस रैकेट में 50 से ज्यादा लोग काम करते थे, जो दिल्ली और राजस्थान से माल लाकर भोपाल में सप्लाई करते थे। यासीन पब और क्लब में आने वाले युवाओं को टारगेट करता था। शुरुआत में उन्हें मुफ्त ड्रग दी जाती थी ताकि लत लग जाए, फिर महंगे दामों में ड्रग बेचे जाते थे।   अब तक ये 15 हुए गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों में सोहेल खान, समीर उद्दीन, आशू उर्फ शाहरूख, सैफुद्दीन, यासीन उर्फ मिंटू उर्फ मछली, शाहवर मछली, जगजीत सिंह उर्फ जग्गा, अंशुल सिंह उर्फ भूरी, अंकित कहार, अमन दहिया, शुभम शर्मा, शकीर उर्फ छोटू, तौफीक निजामी, थाई महिला बेंचामत मून, नाइजीरियन नागरिक और चार अन्य शामिल हैं।

जनजातीय संग्रहालय में संभावना में नृत्य गायन एवं वादन प्रस्तुति हुई

भोपाल  मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि "संभावना" का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 10 अगस्त को अग्नेश केरकेट्टा एवं साथी, भोपाल द्वारा उरांव जनजाति नृत्य सरहुल एवं उमाशंकर नामदेव एवं साथी, दमोह द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। अग्नेश केरकेट्टा एवं साथी, भोपाल द्वारा उरांव जनजाति नृत्य सरहुल की प्रस्तुति दी गई। मध्यप्रदेश के जनजातियों में उराँव जनजाति रायगढ़ जिले की जशपुर तहसील के आसपास निवास करती हैं। उराँव जनजातियों का सर्वाधिक प्रसिद्ध नृत्य है सरहुल। उराँव जनजाति शाल सरई वृक्ष में अपने ग्राम देवता का निवास मानती हैं, इसलिए वर्ष में एक बार चैत्र मास की पूर्णिमा को शाल वृक्ष की पूजा करते हैं और शाल वृक्ष के आसपास नृत्य करते हैं। शाल वृक्ष पर सफेद कपड़े का झण्डा फहराया जाता है।  सरहुल एक समूह नृत्य है इसमें युवक-युवतियां और प्रौढ़ उरांव शामिल होते हैं। नृत्य में पद संचलन वाद्य तालों पर नहीं बल्कि गीतों की लय और तोड़ पर होता है। नृत्य धीमी गति के साथ प्रारंभ होता है और अत्यन्त तीव्र गति के चरम पर समापन। इस नृत्य में पुरूष नर्तक एक विशेष प्रकार का साफा बाँधते हैं तथा महिलाएँ अपने जूड़े में बगुला पंख की सफेद कलंगी लगाती हैं। नर्तकों के वस्त्र प्रायः सफेद होते हैं। सरहुल नृत्य के प्रमुख वाद्य मांदर, झाँझ और नगाड़ा है। कहीं-कहीं चौमुखा चकोल भी बजाते हैं। उमाशंकर नामदेव एवं साथी, दमोह द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। बुन्देलखण्ड अंचल की अपनी जातीय परम्परा मूलतः शौर्य और श्रृंगार परक है। यह अकारण नहीं है कि बुन्देलखण्ड के प्रख्यात लोकनृत्य राई में एक ओर तीव्र शारीरिक चपलता, बेग, अंग, मुद्राएं और समूहन के लयात्मक विन्यास है, वहीं दूसरी ओर नृत्य के लास्य का समावेश और लोक कविता के रूप में उद्याम श्रृंगार परक अर्थों की नियोजना। इसमें ऊर्जा, शक्ति और लालित्य एकमेक है। इस नृत्य को बुन्देलखण्ड में मंचीय नृत्य की स्थिति मात्र में सीमित नहीं किया गया है। बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे के जन्म के समय और विवाह के अवसर पर राई नृत्य का आयोजन प्रतिष्ठा मूलक माना जाता है। अनेक बार किसी अभीप्सित कार्य की पूर्ति होने या मनौती होने पर भी राई नृत्य के आयोजन किये जाते हैं। राई एक जीवन्त कलात्मक हिस्सेदारी की तरह ही है। जीवन का अटूट हिस्सा जिसमें आनंद की स्वच्छंद अभिव्यक्ति मनुष्य की जीवनी शक्ति जैसा प्रकट होता है। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय परिसर में प्रत्येक रविवार दोपहर 2 बजे से आयोजित होने वाली गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा।  

वायु प्रदूषण से राहत का देसी उपाय, इंदौर की छात्राओं ने खोजा 11 औषधियों का धूपन फार्मूला

इंदौर वर्तमान समय में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसके कारण श्वसन तंत्र से जुड़ी अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग इन बीमारियों से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। इंदौर के अष्टांग आयुर्वेदिक कालेज की छात्राओं ने एक शोध में यह पाया है कि 11 औषधियों के धूपन से वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। छात्रा हिमानी सोनी ने 11 औषधियों का किया उल्लेख यह शोध केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद की स्पार्क (स्टूडेंटशिप प्रोग्राम फार आयुर्वेदा रिसर्च केन) योजना के अंतर्गत किया गया है। इसमें कालेज की दो छात्राओं का शोध चयनित हुआ है। तृतीय वर्ष की छात्रा हिमानी सोनी ने आचार्य सुश्रुत द्वारा बताए गए तरीकों पर शोध किया। हिमानी ने बताया कि आचार्य सुश्रुत ने दो श्लोकों में 11 औषधियों का उल्लेख किया है।   शोध में यह जानने का प्रयास किया गया कि इन औषधियों को हजारों वर्ष पहले क्यों शामिल किया गया था। शोध से यह स्पष्ट हुआ कि ये औषधियां कृमिनाशक और विषनाशक हैं। यदि वायु में सूक्ष्म जीव या विष मौजूद हैं, तो ये औषधियां उनका नाश करती हैं। इस शोध को आज के संदर्भ में जोड़ते हुए बताया गया कि प्रदूषित वायु के सेवन से लंग्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब इन औषधियों का धूपन (एक आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया) किया जाता है, तो यह बाहरी प्रदूषण के साथ-साथ हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले सूक्ष्म जीवों से भी लड़ती हैं। इसमें लाक्षा, हल्दी, अतीस, हरितकी, नागरमोथा, हरेणु, एला, तेजपत्र, वक्र, कुष्ठ और प्रियंगु जैसी औषधियां शामिल हैं। शोध में कुछ व्यक्तियों को एक माह तक 15 मिनट तक धूपन दिया गया, जिससे उनकी ब्रेथ होल्डिंग केपेसिटी में वृद्धि हुई। इससे यह सिद्ध होता है कि प्रदूषित वायु के स्थान पर हम शुद्ध वायु ग्रहण कर सकते हैं और यह प्रक्रिया हम अपने घर के कक्ष में भी कर सकते हैं। अनुवांशिक मधुमेह के कारणों पर शोध दूसरी ओर, कालेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा अंशिका तोमर ने अनुवांशिक मधुमेह के कारणों पर शोध किया। अंशिका ने बताया कि आयुर्वेद में अनुवांशिक मधुमेह का कारण सात प्रकृति को माना जाता है। शोध में यह पाया गया कि टाइप 2 डायबिटीज एक सामान्य जीवनशैली विकार है, जिसके मुख्य कारण अनुचित आहार-विहार, चयापचय की गड़बड़ी, हार्मोन असंतुलन, मानसिक तनाव और आनुवांशिक कारक हैं। इन कारणों का निदान पंचक के माध्यम से किया जा सकता है। आयुर्वेद में आचार्यों द्वारा बताया गया है कि संतुलित आहार और जीवनशैली का पालन स्वास्थ्य बनाए रखने और रोगों की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है। शोध में यह भी ज्ञात हुआ कि जो व्यक्ति अपनी प्रकृति के अनुसार पथ्य-अपथ्य का पालन करते हैं, उनमें मधुमेह होने की आशंका कम हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि प्रकृति भले ही स्थिर हो, लेकिन जीवनशैली में सुधार कर रोगों की आशंका को कम किया जा सकता है। देशभर के 300 विद्यार्थियों का हुआ चयन  इन शोधों पर अब राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लाभ मिलेगा। केंद्रीय स्पार्क योजना के तहत शोध के लिए देशभर के करीब 300 विद्यार्थियों का चयन किया गया है, जिन्हें 50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। देशभर के 539 आयुर्वेदिक कालेजों से हजारों विद्यार्थियों ने शोध के विषय भेजे थे और इन्हें शोध पूरा करने के लिए दो माह का समय दिया गया था। 

जंगल से गांव तक… कूनो के चीते पहुंचे मानपुर, कुत्ते और लोगों ने किया पीछा

श्योपुर मानपुर क्षेत्र के बालापुरा और काशीपुर गांवों में दो जंगली चीते खेतों, पगडंडियों और गांव की सड़कों पर टहलते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले कभी भी चीते नहीं देखे गए थे। वायरल हुए वीडियो में चीतों के पीछे एक कुत्ता और ग्रामीण हाथ में डंडा लिए नजर आ रहे हैं। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम और ‘चीता मित्र’ गांवों में पहुंच गए हैं। चीता मित्र लगातार निगरानी कर रहे हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों चीतों की लोकेशन पर ड्रोन और बीट गार्ड्स के जरिए नजर रखी जा रही है। यदि वे लंबे समय तक गांवों में ठहरते हैं, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस कूनो नेशनल पार्क के क्षेत्र में भेजा जाएगा।   ग्रामीणों से अपील चीतों से दूर रहें ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग विशेष टीम तैनात करे। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति चीतों के पास न जाए और न ही उन्हें फोटो खींचने के लिए उकसाए, क्योंकि इससे खतरा बढ़ सकता है। इसके पहले चीतों का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो बंधी हुई गाय के सामने ही उसके बछड़े का शिकार कर लेते हैं। वह कुछ देर तक वहीं रुककर उसे खाते हुए नजर आते हैं। चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो नेशनल पार्क में लाए गए चीते कई बार पार्क की सीमाओं को लांघकर गांवों में पहुंचे हैं। अब उनके किसी गांव में पहुंचाना आम हो गया है, लेकिन चीता मित्र लगातार उन पर निगाह रखकर ग्रामीणों को उनके लिए सतर्क करते रहते हैं।  

वीआईपी के लिए रोके गए दर्शन, कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन पर लगाया ₹55 हजार का जुर्माना

भोपाल वीआईपी की वजह से भोपाल के एक परिवार को मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित प्रसिद्ध शारदा माता मंदिर में दर्शन नहीं हो पाए थे। उन्होंने आवाज उठाई तो कर्मचारियों ने उन्हें अपमानित किया। इस परिवार ने मंदिर प्रबंधन की ओर से तय शुल्क देकर वाहन पार्किंग की थी। रोपवे का शुल्क दिया था। अब भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को इस परिवार के लिए 55 हजार रुपये का हर्जाना अदा करने का निर्णय दिया है। भोपाल के बागमुगालिया स्थित अरविंद विहार निवासी ललित कुमार गुप्ता पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों के साथ चार साल पहले 2021 में मैहर में मां शारदा देवी के दर्शन करने गए थे। वहां उन्होंने 50 रुपये पार्किंग शुल्क दिया। मंदिर तक जाने के लिए रोपवे के लिए पांच टिकटों के लिए 130 रुपये प्रति टिकट की दर से 650 रुपये का भुगतान किया। उनका समूह लाइन में लगा रहा, लेकिन उनको दो घंटों के बाद भी दर्शन नहीं हो पाए।   पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी थी इस बीच रोपवे प्रणाली के कर्मचारी बिना टिकट वाले वीआईपी लोगों को शीघ्र दर्शन कराकर ले आए। इस परिवार ने इस पर आपत्ति जताई तो उनके साथ रोपवे प्रणाली के कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया। इससे आहत होकर उन्होंने 2022 में मां शारदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और दामोदर रोपवे इंफ्रा लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर करके पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, सदस्य अंजुम फिरोज व प्रीति मुद्गल की बैंच ने सुनवाई में इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन समिति और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को परिवार को दर्शन से वंचित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने कहा- मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआईपी नहीं होता उपभोक्ता मामलों की अधिवक्ता संभावना राजपूत ने बताया कि प्रकरण में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था ही आधार बनी है। जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्णय में कहा कि किसी भी मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआइपी नहीं होता है। सभी को एक ही श्रेणी में रखकर लाइन में लगाकर मां शारदा का दर्शन कराने का नियम होना चाहिए। यदि कोई भक्त रोपवे से टिकट लेकर लाइन में लगा और दो घंटे बाद भी दर्शन नहीं हो पाए, वहीं दूसरों को विशेष श्रेणी का दर्जा देकर दर्शन कराया गया तो यह सेवा में कमी है। कलेक्टर ने खड़े कर दिए हाथ मामले में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर को प्रतिवादी बनाया गया था। कलेक्टर का कहना था कि मंदिर प्रबंध समिति में दर्शन के काम के लिए दूसरे लोग तैनात हैं। वहीं रोपवे संचालक कंपनी ने अत्यधिक भीड़ को इसकी वजह बताई।

आज और कल MP के 22 जिलों में बारिश, 13 अगस्त से फिर तेज बरसात के संकेत

भोपाल अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी क्रम में शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक दमोह में 92, पचमढ़ी में 29, रीवा में 15, खजुराहो में पांच, सिवनी में तीन, जबलपुर एवं सीधी में दो, छिंदवाड़ा में एक मिलीमीटर बारिश हुई। आज और कल भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, गुना, ग्वालियर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना, श्योपुर, भिंड, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सागर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक 13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है। उसके असर से एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। रविवार, सोमवार को सागर, नर्मदापुरम, भोपाल, ग्वालियर, चंबल संभाग के जिलों में मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है।   यहां बना हुआ है चक्रवात मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके रायकवार ने बताया कि मानसून द्रोणिका वर्तमान में भटिंडा, रोहतक, दिल्ली, हरदोई, बाराबंकी, देहरी, बांकुरा, कोंटाई से बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर झारखंड तक एक द्रोणिका बनी हुई है। इसी चक्रवात से एक अन्य द्रोणिका गुजरात तक बनी हुई है, जो पश्चिमी मध्य प्रदेश से होकर जा रही है। मध्य प्रदेश में फिर शुरू होगी अच्छी बारिश 13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है। इस मौसम प्रणाली के असर से मध्य प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि मानसून द्रोणिका नीचे आने लगी है। पश्चमी मध्य प्रदेश से होकर द्रोणिका भी गुजर रही है। इस वजह से रुक-रुककर बारिश होने लगी है। 13 अगस्त को कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।

विधायक सिंगरौली रामनिवास शाह ने अपने कार्यालय में आयोजित किया रक्षाबंधन का पर्व !

सिंगरौली हजारों की संख्या में माताएं बहने हुई शामिल उक्त रक्षाबंधन को भव्य बनाने में पार्टी कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़कर लिया भाग , बहनों ने विधायक को बांधी राखी माथे में तिलक लगाकर उनके लंबी आयु का वरदान मांगा वहीं उपरोक्त अवसर पर विधायक के द्वारा माताओं बहनों को उपहार स्वरूप हेल्मेट के साथ टिफीन बाँटा और उन्होंने कहा की बहनो के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एक भाई की होती है बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर उपस्थित बहनों को हेल्मेट प्रदान किया और हर घर परिवार के लोगों को सुरक्षा बरतने को कहा इस प्रकार से सामुहिक रूप से रक्षाबंधन का पर्व भव्य रूप में मनाने को लेकर उपस्थित लोगो ने जमकर सराहना की !

पवित्रता जीवन का सबसे बड़ा गहना है: राजयोगिनी बीके छाया दीदी

– परमात्म रक्षासूत्र कार्यक्रम आयोजित – बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षासूत्र सेंधवा ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के सेंधवा सेवाकेंद्र में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर परमात्म रक्षासूत्र समारोह आयोजित किया गया। इसमें ब्रह्माकुमारी बहनों ने भाइ बहनों की कलाई पर परमात्म रक्षासूत्र बांधकर सदा पवित्रता के पथ पर और ईश्वरीय मार्ग पर चलने का संकल्प कराया। मुख्य संचालिका राजयोगिनी छाया दीदी ने सभी वरिष्ठ भाई और बहनों को रक्षासूत्र बांधा। समारोह में राजयोगिनी बीके साधना दीदी ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा हम मनुष्य आत्माओं को पवित्रता का प्यारा बंधन बांधने के लिए परमधाम से आते हैं। पवित्रता जीवन का सबसे बड़ा गहना है। रक्षाबंधन पवित्रता का पर्व है। यह भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने संस्था का अनुभव बताते हुए कहा कि संस्था में 1966 में माउंट आबू में मात्र पांच ही भाई थे, बाकी सभी बहनें थीं। लेकिन आज यह हजारों भाई समर्पित रूप से सेवाएं दे रहे हैं। इन पांच बातों का रखें ध्यान- राजयोगिनी छाया दीदी ने कहा कि परमात्मा हम बच्चों को मुख्य पांच बातों के आधार पर ईश्वरीय ज्ञान देते हैं। आज के दिन सभी यह पांच संकल्प करें- पहला है पढ़ाई। पढ़ाई अर्थात् शिव बाबा रोज हमें जो ज्ञान मुरली के माध्यम से पढ़ाई पढ़ाते हैं और नई-नई बातें सिखाते हैं उन्हें जीवन में धारण करना है। रोज अच्छी तरह से मुरली का अध्ययन करें और देखें कि आज मुझे किस बात पर ध्यान देना है। दूसरा है- जीवन में सच्चाई। यदि हमारा आत्मिक चरित्र ऊंच, महान और सच्चाई युक्त है तो ऐसे जीवन का हर किसी पर प्रभाव पड़ता है। हमारा चाल, चलन, चरित्र पवित्रतायुक्त हो। तीसरा है- अपने विकारों, कमियों और कमजोरियों का दान करना है। आज के दिन सभी संकल्प करें कि अपने अंदर जो कमी कमजोरी है उसे पहचानकर दूर करेंगे।  चौथा है जीवन को आदर्श और मूल्यवान बनाना और पांचवा है- स्मृति। सदा यह स्मृति रहे कि मेरा लक्ष्य क्या है। मुझे क्या करना है। देशभर में मनाया जा रहा है रक्षाबंधन- छाया दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी बहनों जेल से लेकर जवानों, वृद्धाश्रम, अनाथालय, ऑफिसों में भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। बहनों के त्याग-तपस्या, सेवा का परिणाम है कि आज यह ईश्वरीय विद्यालय यहां तक पहुंचा है। इस मौके पर एडवोकेट संजय मोरे, धार जिले से गणेश भाई, स्वर्ण समाज के सुबोध सोनीजी, सम्माज सेविका बहन दुर्गा गुप्ता भाई सहित बड़ी संख्या में भाई-बहन मौजूद रहे।    श्री आर्य जी को राखी बांधी अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य जी को रक्षा सूत्र बांधे व सौगात दी,तथा संस्था के मुख्यालय पधरने का निमंत्रण भी दिया। वरिष्ठ कार्यकर्ता विकास आर्य को भी राखी बांधी।