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ग्वालियर में राज्यपाल का दौरा कल, छात्रों को देंगे उपाधियां; किसानों को भी मिलेगी सौगात

ग्वालियर  मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल गुरुवार 15 अक्टूबर को एक दिवसीय दौरे पर ग्वालियर आ रहे हैं. वे ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे. कार्यक्रम में राज्यपाल के साथ ही कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना भी शिरकत करेंगे।  600 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी उपाधियां ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए 15 अक्टूबर महत्वपूर्ण दिन होने वाला है, क्योंकि इसी दिन 600 से ज़्यादा छात्रों को दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्रदान की जाएंगी. वैसे तो विश्वविद्यालय का यह 12वां कन्वोकेशन है लेकिन यूनिवर्सिटी के अपने इतिहास में ये पहली बार होगा जब दीक्षांत समारोह समय पर आयोजित हो रहा है और पिछले सत्र में उत्तीर्ण हुए छात्रों को समय पर कॉन्वोकेशन आयोजित कर डिग्री और उपाधियां प्रदान की जाएंगी।  सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का लोकार्पण करेंगे राज्यपाल कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए आयोजित कृषि विश्वविद्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलगुरु प्रो अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया, '' दीक्षांत समारोह में कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा उपाधियां प्रदान की जाएंगी. लेकिन इससे पहले वे ग्वालियर कृषि महाविद्यालय के सीएआईई में हाल ही में स्थापित की गई नई सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का लोकार्पण भी करेंगे. इसके बाद ही दीक्षांत समारोह कार्यक्रम की शुरुआत होगी।  666 छात्रों को प्रदान की जाएंगी उपाधियां कुलगुरु अरविंद शुक्ला ने बताया, '' इस कन्वोकेशन में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में स्नातक के 345, स्नातकोत्तर के 294 और पीएचडी के 27 विद्यार्थी कुल 666 छात्र शामिल हैं. ये उपाधियां 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रदान की जाएंगी. इस कार्यक्रम में 4 छात्र-छात्राओं को मेडल भी प्रदान किए जाएंगे. इनमें 2 स्नातक के, 1 स्नातकोत्तर और पीएचडी का 1 विद्यार्थी शामिल है. इसके अलावा 3 छात्र, छात्राओं को सिरताज बहादुर सिन्हा स्मृति नगद पुरस्कार दिया जाएगा।  स्टार्टअप्स के जरिए कमाई का साधन बनेगी 'सीपीयू' आपको बता दें कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एग्रीकल्चर कॉलेज में स्थापित की गई सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में पांच तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे. ये इकाइयां उन छात्रों और किसानों के लिए लगाई गई है, जो किसी बेहतर स्टार्टअप और एफपीओ बनाकर उसे रोजगार का जरिया बनाने की चाह रखते हैं. इसका संचालन नाबार्ड के साथ किया जा रहा है. इनमें मध्य प्रदेश में पहली बार मसाला मेकिंग यूनिट जिसमे नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे मशीन गर्म नहीं होगी और मसाले अपने असल एरोमा के साथ तैयार होंगे और उनका जायका कम नहीं होगा. इसके अलावा टोमेटो प्यूरी या कैचअप यूनिट, पोहा मेकिंग यूनिट, नमकीन मेकिंग यूनिट और कोल्ड प्रेस ऑइल यूनिट भी हैं. इसके साथ ही एक एनिमल फीड लाइन भी शुरू होने जा रही है।  भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री भी होंगे शामिल राज्यपाल मंगू भाई पटेल का यह दौरा टाइट शेड्यूल में रहेगा. दीक्षांत समारोह दोपहर तीन बजे से विश्वविद्यालय के दत्तोपंत थेगड़ी सभागार में शुरू होगा. राज्यपाल और कृषि मंत्री के अलावा भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। 

भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर 25 अक्टूबर तक मौका, भूमि उपयोग और ग्रीन बेल्ट को लेकर उठे सवाल

भोपाल  भावी विकास की रूपरेखा तय करने वाले ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान 2047 को लेकर शहर में गहमागहमी बढ़ गई है। इस ड्राफ्ट में जमीन के इस्तेमाल (लैंड-यूज) के वर्गीकरण, सड़कों के अलाइनमेंट और मौजूदा रिहायशी इलाकों के भविष्य को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। आम नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रस्तावित ज़ोनिंग और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में बदलाव की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। 25 अक्टूबर तक आए 800 से अधिक सुझाव और आपत्तियां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग के पास आगामी 25 अक्टूबर की अंतिम तिथि से पहले लगभग 800 सुझाव और आपत्तियां पहुंच चुकी हैं। विभाग अब इन सभी सबमिशन की बारीकी से जांच करेगा और इसके बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। नागरिकों और विभिन्न संगठनों द्वारा उठाए गए इन मुद्दों ने प्रशासन की प्लानिंग पर नए सिरे से विचार करने का दबाव बना दिया है। मुख्य मांगें और आपत्तियां क्या हैं? प्राप्त जानकारियों के अनुसार, सबसे प्रमुख मांग 'बीआईजेड-2' (BIZ-2) लैंड-यूज कैटेगरी को हटाने की है, ताकि वहां रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियां आसानी से संचालित हो सकें। इसके अलावा, ग्रीन बेल्ट और कृषि भूमि को आवासीय उपयोग के लिए फिर से वर्गीकृत करने, 18 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़कों के अलाइनमेंट बदलने और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को इको-संवेदनशील जोन से बाहर करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। स्थानीय स्तर पर विरोध और पर्यावरण की चिंताएं शहर के पॉश इलाकों जैसे बावडिया कलां और बाघमुग़लिया के निवासियों ने प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास के साथ कनेक्टिविटी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, पर्यावरण के मोर्चे पर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। लाहरपुर में 643 एकड़ कृषि भूमि को, जो कथित तौर पर पिछले 30 वर्षों से खेती के अधीन है, निर्धारित सबमर्जेंस (डूब) क्षेत्र से बाहर करने की मांग की गई है। इसके अलावा, उन इलाकों में प्रस्तावित सड़कों को लेकर भी गहरी चिंता जताई गई है जो बाघों की आवाजाही (टाइगर मूवमेंट) के लिए जाने जाते हैं। सेफ सिटी के यह है आठ पैरामीटर     प्रमुख स्थानों पर एआइ आधारित सीसीटीवी, ड्रोन, अलार्म, कंट्रोल सेंटर और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट के लिए विशेष मोबाइल ऐप।     सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए निजी भवन और कालोनियों के गेट लगे कैमरों को पुलिस व प्रशासन के सेंट्रल सर्वर से जोड़ना।     संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक हथियारों और बेहतर सुविधाओं से लैस पुलिस बल की तैनाती।     पार्कों व भवनों में ऊंची दीवारों की जगह पारदर्शी फेंसिंग, चौतरफा स्ट्रीट लाइट्स और सक्रिय सामाजिक निगरानी।     नियंत्रित गति, सही ज्यामिति, डिवाइडर, सिग्नल और पैदल यात्रियों के लिए मानक जेब्रा क्रासिंग व फुटपाथ।     बसों व मेट्रो में आधुनिक सुरक्षा उपकरण, चालक-परिचालकों का प्रशिक्षण और बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी।     कॉम्प्रेहेंसिव फायर मैनेजमेंट प्लान के तहत हर 50 हजार की आबादी पर एक नए फायर स्टेशन का निर्माण।     आपातकाल के लिए स्कूल, कॉलेज व सामुदायिक भवनों को भूकंपरोधी व बाढ़ से सुरक्षित राहत केंद्रों के रूप में तैयार करना।

मध्यप्रदेश में चौथी रेल लाइन की तैयारी तेज, कटनी-पेंड्रा रोड रूट पर जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण

  कटनी कटनी से पेंड्रा रोड के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की तैयारी अब जमीन अधिग्रहण की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि रेल लाइन के लिए किन गांवों की कितनी निजी जमीन की जरूरत पड़ेगी। सर्वे शुरू होने के साथ ही संभावित प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों की नजर इस बात पर रहेगी कि उनकी जमीन परियोजना के दायरे में आती है या नहीं और अधिग्रहण होने पर उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा। इन जिलों से होकर गुजरेगी रेललाइन, 201 किलोमीटर है कुल लंबाई जानकारी के अनुसार कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड पर चौथी लाइन बिछाने की परियोजना की लंबाई 201.37 किलोमीटर है। इसके लिए मध्य प्रदेश के कटनी सहित उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत संबंधित अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे परियोजना के लिए जमीन चिह्नित करने की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। जिले में जमीन अधिग्रहण के लिए एसडीएम को नियुक्त किया गया है। चौथी लाइन से यह होगा फायदा कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड पर चौथी लाइन बनने का फायदा सिर्फ मालगाडियों को नहीं, यात्रियों को भी मिलेगा। इस रूट पर कोयला मालगाडियों का दबाव लगातार बढने की संभावना है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे ट्रेनों को एक दूसरे के लिए रास्ता देने में होने वाली देरी और अनावश्यक ठहराव कम हो सकते हैं। कटनी से बिलासपुर, अनूपपुर, शहडोल और छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए इसका सीधा फायदा बेहतर परिचालन के रूप में मिल सकता है। ट्रैक क्षमता बढने से समयपालन में सुधार, अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाने और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। यानी चौथी लाइन बढ़ते माल यातायात के साथ यात्री सुविधाओं के विस्तार का रास्ता भी खोलेगी। 2975 करोड़ की है परियोजना केंद्र सरकार ने 9 सितंबर 2026 को कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन सहित तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। तीनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपए है। कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन पर करीब 2,975 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। चौथी लाइन बनने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मालगाडियों को होगा, क्योंकि कोयले की बढ़ती खेप को अधिक क्षमता के साथ निकाला जा सकेगा। जमीनों का सर्वे इस परियोजना का अहम चरण होगा। इसी से पता चलेगा कि किन गांवों में रेल लाइन के लिए जमीन की जरूरत है और किन किसानों के खेत या जमीन का कुछ हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन भी होती है। ऐसे में यदि किसी किसान की खेती की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आती है, तो उसके सामने खेती के रकबे में कमी और भविष्य की आय को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मुआवजे का होगा।

बिना लोहा-स्टील के तैयार हो रहा संत रविदास लोक, नागर शैली की भव्य इमारत का निर्माण अंतिम चरण में

सागर  सागर में सामाजिक समरसता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा संत रविदास लोक 92% पूरा हो चुका है। 100 करोड़ रुपए की लागत से 11 एकड़ में बन रहे इस परिसर का निर्माण अब अंतिम चरण में है। यह मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की देखरेख में तैयार हो रहा है। लोक का संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के 650वें जयंती वर्ष के दौरान फरवरी 2027 से पहले लोकार्पण करने का लक्ष्य है। 12 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका भूमिपूजन किया था। अब लोकार्पण के लिए भी उनके आने की तैयारी है। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विशेष टीम परियोजना की सीधे मॉनीटरिंग कर रही है। 1000 साल तक टिकने वाली नागर शैली से निर्माण संत रविदास लोक का निर्माण नागर शैली में किया जा रहा है। दावा है कि इस तकनीक से बना परिसर 1000 साल तक अडिग रह सकेगा। निर्माण में लोहे और स्टील का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। परिसर में संत रविदास के जीवन और विचारों को प्रामाणिकता के साथ सहेजने के लिए मंदिर की गैलरी और म्यूजियम में शामिल किए जा रहे दोहों, साखियों और पदों की भी जांच हो रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और इतिहासकार इनकी सूक्ष्मता से समीक्षा कर रहे हैं, ताकि प्रस्तुत सामग्री की प्रामाणिकता पर भविष्य में सवाल न उठें। युवाओं के लिए क्विज, शाम को लेजर शो परिसर में घूमने के बाद युवाओं के लिए ऑन-द-स्पॉट क्विज प्रतियोगिता होगी। इसमें दोहों, साखियों और पदों का सही अर्थ बताने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा। शाम को ‘रविदास जल कुंड’ में ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की वाणी पर सतरंगी लाइट और साउंड के साथ वॉटर स्क्रीन लेजर शो होगा। परिसर को मध्यप्रदेश का पहला जीरो-वेस्ट धार्मिक परिसर बनाने की भी योजना है। बुंदेलखंड से बाहर भी संदेश पहुंचाने की तैयारी संत रविदास लोक का उद्देश्य संत रविदास के विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 15.6% है, जबकि बुंदेलखंड में यह 17 से 18% बताई गई है। परिसर के जरिए मध्यप्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में फैले संत रविदास के अनुयायियों तक भी संदेश पहुंचाने की तैयारी है। पीएम मोदी ने किया था मंदिर का भूमिपूजन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंदिर निर्माण की प्रगति का जायजा लिया. वहीं उन्होंने मंदिर और संग्रहालय का मॉडल देखकर बन रहे भव्य मंदिर की जानकारी ली. बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 2023 में संत रविदास जयंती के अवसर पर सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में 100 करोड़ की लागत से संत रविदास के भव्य मंदिर और संग्रहालय के निर्माण का ऐलान किया था. रविदास मंदिर और संग्रहालय का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था. मंदिर और संग्रहालय निर्माण कार्य अगस्त 2025 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।  कैसा होगा संत रविदास मंदिर और संग्रहालय रविदास मंदिर और संग्रहालय के निर्माण कार्य पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है. इस सिलसिले में केंद्र और राज्य सरकार के संस्कृति और धर्मस्व विभाग के अधिकारी लगातार दौरा करते रहते हैं और तय समय में मंदिर निर्माण होगा कि नहीं, इसकी प्रगति का जायजा लेते रहते हैं. सरकार ने संत रविदास की अनमोल विरासत को सहेजने और सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके संदेश और दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सागर में 100 करोड़ की लागत से संत रविदास मंदिर और संग्रहालय का निर्माण कार्य शुरू किया है।  संत रविदास मंदिर का डिजाइन वास्तु कला के आधार पर संत रविदास में आस्था रखने वाले और उनके दर्शन और साहित्य पर शोध करने वाले विद्वानों और भक्तों के लिए यह एक अनुपम सौगात होगी. मंदिर का डिजाइन वास्तु कला के आधार पर तैयार किया गया है. करीब 12 एकड़ भूमि में मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. अध्योध्या के राम मंदिर में लगे राजस्थान के धोलपुर वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से संत रविदास मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. संत रविदास मंदिर 66 फीट ऊंचा होगा. मंदिर के गर्भगृह में लोहे का उपयोग नहीं करके केवल पत्थर, रेत, गिटटी का उपयोग किया जा रहा है. मंदिर में अत्याधुनिक संसाधन के साथ-साथ मंदिर परिसर में विशेष रूप से पेड़ पौधे लगाकर हरियाली की जा रही है. रात में आकर्षक साज सज्जा के साथ रोशनी की भी व्यवस्था की जा रही है। 

राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग पर लगाया प्रतिबन्ध

मानव और पशुओं के लिए है ख़तरनाक निर्माता कम्पनियों के पास बचा स्टॉक तत्काल नष्ट करने के निर्देश भोपाल   राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड नामक कीटनाशक के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह कीटनाशक मानव और पशुओं के लिए बेहद हानिकारक है। भारत सरकार ने इस संबंध में पहले ही अधिसूचना  जारी कर दी है। किसान कल्याण और कृषि  विकास विभाग ने इस खतरनाक कीटनाशक का निर्माण करने वाली कंपनियों द्वारा विक्रय और भण्डारण पर तत्काल रोक लगाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।  जिन निर्माताओं के पास पैराक्वेट डायक्लोराइड के पंजीकरण  प्रमाण पत्र है उन्हें तत्काल केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड और पंजीकरण समिति को वापस करने के निर्देश दिए हैं। इस कीटनाशक के बचे स्टाक को वापस बुलाकर नियम, प्रक्रिया अनुसार नष्ट करने की कार्रवाई करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पैराक्वेट डाइक्लोराइड के नए रजिस्ट्रेशन और पहले से जारी सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को रद्द कर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। दुनिया के लगभग 70 देशों में इसका उपयोग पहले से प्रतिबंधित है। कैसे काम करता है? यह पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तेजी से जलाकर नष्ट कर देता था। इसे 'ग्रामोक्सोन' (Gramoxone) जैसे ट्रेड नाम से भी जाना जाता है। यह इंसानों और जानवरों के लिए अत्यधिक विषैला है। इसके शरीर में जाने या संपर्क में आने से फेफड़े और गुर्दे (किडनी) गंभीर रूप से खराब हो जाते हैं। इसका कोई विशिष्ट एंटीडोट (विषारोधी इलाज) उपलब्ध नहीं है। किसान मूंग की फसल में पैराक्वेट डाइक्लोराइड का उपयोग फसल की कटाई से ठीक पहले पत्तियों को सुखाने और फसल को जल्दी पकाने के लिए करते हैं। इसका छिड़काव करने से मूंग के हरे पौधे और पत्तियां 24 से 72 घंटों के भीतर पूरी तरह सूख जाती हैं। पत्तियां सूख जाने से फसल को काटना और थ्रेसिंग करना आसान हो जाता है, जिससे मजदूरों का खर्च और समय बचता है। भारत सरकार के नियमों के अनुसार इसका  उपयोग मूंग की फसल पर करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद किसान अवैध रूप से इसका शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक  यह एक अत्यंत विषैला  केमिकल है। इसके संपर्क में आने या इसके अवशेषों वाली मूंग के सेवन से कैंसर, लिवर, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यदि यह शरीर में चला जाए या गलती से पिया जाए, तो इसका कोई इलाज या एंटीडोट नहीं है, जिससे यह जानलेवा साबित होता है।          

1500 किलोमीटर दूर बिहार के कटिहार से साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार

बैंक अधिकारी बनकर पेंशन कार्ड अपडेट एवं टैक्स में छूट का झांसा देकर सेवानिवृत्त कर्मचारी से 6 लाख रूपए की हुई थी ठगी 5 लाख रूपए नगद जब्‍त   भोपाल मध्यप्रदेश में साइबर अपराधों के विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए संचालित “e-Zero FIR” व्यवस्था के तहत देवास पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। बैंक अधिकारी बनकर पेंशन कार्ड अपडेट कराने और टैक्स में छूट दिलाने का झांसा देकर सेवानिवृत्त कर्मचारी से 6 लाख 03 हजार रूपए की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को देवास पुलिस ने 1500 किलोमीटर दूर बिहार के कटिहार जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर ठगी की राशि में से 5 लाख रूपए नगद जब्‍त किए हैं। थाना कोतवाली, देवास क्षेत्र निवासी 62 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को साइबर ठगों ने बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया। ठगों ने पेंशन कार्ड अपडेट कराने तथा टैक्स में छूट दिलाने का झांसा देकर उनसे कुल6 लाख 3 हजार रूपए की राशि विभिन्न माध्यमों से अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। शिकायत प्राप्त होने पर थाना कोतवाली में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री पुनीत गेहलोद के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम द्वारा साइबर ठगी से संबंधित बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल नंबरों तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। तकनीकी साक्ष्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम बिहार के कटिहार जिले पहुंची और आरोपी की पतारसी करते हुए उसे गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर उसके घर की अलमारी से साइबर ठगी की राशि में से 5 लाख रूपए नगद विधिवत जब्‍त किए। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ तथा विवेचना में प्राप्त तकनीकी एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी गिरोह के मुख्य आरोपियों का संबंध जामताड़ा, झारखंड से होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा गिरोह के अन्य सदस्यों, उनके बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन तथा ठगी की शेष राशि के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है। उल्‍लेखनीय है कि जिले में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के उद्देश्य से संचालित “ऑपरेशन साइबर” के तहत जिला साइबर सेल द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में e-Zero FIR के तहत अब तक कुल 130 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं, जिनमें 26 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा आरोपियों से लगभग 98 लाख 52 हजार रूपए की राशि जब्‍त की गई है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों में त्वरित कार्रवाई, तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग, अंतर्राज्यीय साइबर नेटवर्क की पहचान तथा पीड़ितों की राशि सुरक्षित कराने के लिए लगातार समन्वित कार्रवाई की जा रही है।  

मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा ना बने आर्थिक अभाव : ए. श्रीजा

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भोपाल में हुआ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने पर हुआ मंथन भोपाल आर्थिक अभाव के कारण किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो, इस दिशा में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) देश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शैक्षिक निरंतरता के लिए एक बड़ा संबल है। यह बात भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने राजधानी भोपाल में कही। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एक निजी होटल में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने कहा कि अक्सर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे किशोरावस्था में ही पढ़ाई के स्थान पर आजीविका अर्जित करने की ओर ध्यान देने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित होती है। वहीं, छोटी-मोटी मेहनत-मजदूरी से वे न तो अपने परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को दूर कर पाते हैं और न ही अपने भविष्य को बेहतर बना पाते हैं। ऐसे परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 9 से 12 तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राज्य शिक्षा केंद्र के संयुक्त संचालक श्री प्राचीश जैन ने कहा कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा 8 के बाद उन्हें माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक, निर्धारित पात्रता एवं नवीनीकरण संबंधी शर्तें पूरी करने पर, प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस प्रकार पात्र विद्यार्थी अधिकतम चार वर्षों में कुल 48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है। संयुक्त संचालक श्री जैन ने कहा कि, कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र एवं मेधावी विद्यार्थियों को जानकारी के अभाव, आवेदन में त्रुटियों अथवा सत्यापन में देरी के कारण छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए अधिकारियों एवं शिक्षकों को योजना की पात्रता शर्तों, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीयन तथा संस्थान एवं जिला स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में भारत सरकार के अधिकारियों और योजना से जुडी टीम के सदस्यों ने सहभागियों को समुचित मार्गदर्शन भी प्रदान किया है। प्रदेश में योजना के और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही विद्यालयों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर छात्रवृत्ति का लाभ अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। पात्रता और चयन के प्रमुख नियम उल्लेखनीय है कि योजना अंतर्गत शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त एवं स्थानीय निकाय के विद्यालयों में कक्षा 8 में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होता है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक ना हो। साथ ही विद्यार्थी ने कक्षा 7 में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को प्राप्तांक में 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों का चयन मानसिक योग्यता एवं शैक्षिक अभिरुचि परीक्षण के आधार पर राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से होता है। कार्यशाला में भारत सरकार के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप प्रकोष्ठ की संचालक श्रीमती श्रीकला पी. वेणुगोपाल, सलाहकार श्री राघवेन्द्र खरे, मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, योजना से जुड़े विभिन्न जिलों के नोडल अधिकारी तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला में योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति से लाभान्वित चयनित विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों ने अपने परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता ने उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति से मिले संबल के आधार पर अपनी वर्तमान शैक्षणिक उपलब्धियों और भविष्य की तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।  

सैनिकों के पुनर्वास और कौशल विकास में क्रिस्प की भूमिका सराहनीय : सुकृति लिखी

भोपाल सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में सेंटर फॉर रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल स्टॉफ परफॉर्मेंस (क्रिस्प), भोपाल में बुधवार को रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग की सचिव सुकृति लिखी ने दौरा किया और डी.जी.आर प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। क्रिस्प के कार्यों से प्रभावित हुईं सुकृति लिखी मुख्य अतिथि सुकृति लिखी ने डी.जी.आर के प्रशिक्षणार्थियों से बातचीत की और उनके प्रशिक्षण अनुभवों को जाना। उन्होंने क्रिस्प में संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा, “डी.जी.आर से जुड़े लोग इस संस्थान की तारीफ करते हैं। यहां आकर जब मैंने कार्यक्रमों का जायजा लिया, तो मैं भी प्रभावित हुई कि क्रिस्प वास्तव में इस क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रहा है।” उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अनुशासन, परिश्रम और अपनी क्षमताओं को पहचानना जरूरी: मेजर जनरल एसबीके सिंह महानिदेशक, पुनर्वास महानिदेशालय मेजर जनरल एसबीके सिंह, एसएम ने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिक विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत, अनुशासन और कौशल के बल पर बेहतर करियर बना सकते हैं और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का पूरा लाभ उठाने और प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट पर भी जोर: एम.डी.कुर्रे क्रिस्प के प्रबंध संचालकबसंत कुर्रे ने संस्थान में संचालित विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा, “क्रिस्प के प्रबंध संचालककुर्रे ने बताया कि संस्थान द्वारा डी.जी.आर. के अंतर्गत अब तक 600 से अधिक सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के साथ उनके प्लेसमेंट के लिए भी निरंतर प्रयास किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में सीनियर ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट, बिल्डिंग ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट, सीनियर सी.एन.सी. (प्रोग्रामिंग एंड ऑपरेशन) एग्जीक्यूटिव, 2डी एनीमेशन एंड मोशन ग्राफिक्स तथा ग्राफिक डिजाइन जैसे कोर्स शामिल हैं।” पूर्व सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना क्रिस्प की प्राथमिकता: संचालकवैद्य क्रिस्प के संचालक अमोल वैद्य ने कहा, “क्रिस्प का प्रयास है कि उन्हें आधुनिक तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनके अनुभव को नई दिशा दी जाए। डी.जी.आर. के साथ मिलकर संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद नए करियर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।” क्रिस्प संचालकवैद्य ने आभार व्यक्त किया।  

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खण्डपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण गठन अधिसूचना को माना वैध

भोपाल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खण्डपीठ मे निजी बस ऑपरेटर हरिशंकर सिंह पटेल एवं अन्य द्वारा रिट याचिका क्रमांक 15560/2026 दायर किया गया जिसमे राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से संबंधित राज्य शासन की अधिसूचना दिनांक 10 अगस्त 2026 की वैधता को चुनौती दी गई थी। माननीय न्यायमूर्ति श्री जी. एस. अहलूवालिया एवं माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती अनुराधा शुक्ला द्वारा वादी पक्ष को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान कर सुना गया ओर राज्य शासन द्वारा भी माननीय न्यायालय के समक्ष अधिसूचना की वैधानिकता के अनुरूप सशक्त पक्ष रखे गए। माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के अभिवचनो को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना को विधि के अनुरूप एवं वैध माना गया तथा रिट याचिका क्रमांक 15560/2026 को खारिज कर राज्य शासन को विधि के अनुसार आगे की कार्यवाही करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई। इस निर्णय से राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना की वैधानिकता की पुष्टि होने से इससे संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य शासन को आगे की कार्यवाही करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि इस याचिका के निरस्त होने से अंतरराज्यीय परमिट आवेदनों एवं अन्य संबंधित विषयों पर राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा निर्णय लिया जा सकेगा।

45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से मिलेगी छूट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप राज्य शासन ने मध्यप्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए सहायक ग्रेड 3 और समकक्ष पदों पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी में छूट आदि से संबंधित समेकित निर्देश जारी किया है। अब जहां सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदोन्नति के लिए 45 वर्ष से अधिक के कर्मियों को सीपीसीटी स्कोर कार्ड से पूरी छूट दी है वहां अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के तहत सभी विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आ रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अनिवार्यता के संबंध में संशोधित निर्देश जारी किए हैं।सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को CPCT स्कोर कार्ड की अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। साथ ही अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। अब सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अर्हता प्राप्त करना आवश्यक है, उन्हें पदोन्नति के बाद 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करना होगी तथा मान्यता प्राप्त संस्थान से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा अथवा निर्धारित समकक्ष योग्यता प्राप्त करना होगी। यदि कर्मचारी 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में आवश्यक अर्हताएं प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो उनकी परिवीक्षा अवधि अधिकतम 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। इस प्रकार उन्हें पदोन्नति के बाद कुल 5 वर्ष के भीतर निर्धारित योग्यता प्राप्त करनी होगी। इस अवधि में आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी को उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस पदस्थ कर दिया जाएगा।उक्त प्रावधान केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में लागू होंगे। सीधी भर्ती आदि में नहीं मिलेगा लाभ सीधी भर्ती अथवा अन्य किसी माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की निर्धारित अर्हताएं यथावत अनिवार्य रहेंगी। 45 वर्ष से अधिक वालों को बड़ी राहत आदेश अनुसार शासकीय सेवक अपनी पदोन्नति की तिथि को 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 पर पदोन्नति हेतु CPCT स्कोर कार्ड से छूट प्रदान की गई है, परंतु कम्प्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी।