samacharsecretary.com

मां नर्मदा के जल को निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए नमन मिशन तैयार, 2026 का क्रियान्वयन रोड मैप भी तैयार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। यह आबादी नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर ही निर्भर है। नर्मदा हमारी धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे हर तरह से निर्मल और अविरल बनाए रख कर नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न आयोजन किए जायें। नर्मदा और इसकी सहायक नदियों सहित पूरे प्रदेश में नदियों के संरक्षण के लिए समाज को विशेषकर युवाओं को जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की बैठक में इस नदी क्षेत्र के विकास के निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा के विकास से जुड़ना एक पवित्र काम है। सभी विभाग के अधिकारी पूरे समर्पण से यह काम करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूर्णत: अतिक्रमण मुक्त कर पथिकों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाये और परिक्रमा मार्ग पर संकेतक (सूचना पट्टिकाएं) भी लगाए जाए। नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर जहां मंदिर हैं वहां श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र भी स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ कराने की व्यवस्था भी कराएगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्मदा समग्र से समन्वय कर नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सभी आश्रमों की सूचियां तैयार कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देशित किया कि वे सामूहिक प्रयास कर किसानों को घाटी क्षेत्र में नकद फसलों की पैदावार लेने के लिए प्रेरित करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि नर्मदा नदी के सीमावर्ती प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर आयोजन किए जाएंगे। माँ नर्मदा की भव्य आरती, नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाएंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि माँ नर्मदा के जल को सदैव निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए विभाग द्वारा 'नमन मिशन' तैयार किया गया है। यह मिशन मां नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्राधिकृत होगा। मुख्यमंत्री इस नमन मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिशन की साधारण सभा के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव इस मिशन के सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मिशन के सह-सचिव होंगे। मिशन को क्रियान्वित करने के लिए इस साल 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है। एसीएस श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पहले से विद्यमान 3 समितियों (मंत्रिमण्डल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति) का भी सहयोग लिया जाएगा। मिशन के संचालन में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय विकास, वन, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, वित्त, पर्यटन, विधि, उद्यानिकी, मत्स्य, राजस्व, जनजातीय कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, धर्मस्व, योजना एवं आर्थिकी सांख्यिकी एवं खनिज संसाधन विभाग सदस्य के रूप में तथा 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे। इस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राज्य अनुदान की व्यवस्था का प्रस्ताव है। अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने बताया कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए 32 लाख रुपये का योजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी क्षेत्र में करीब 415 हैक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग 2.70 लाख पौधे लगायेगा। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नर्मदा घाटों को निर्मल बनाये रखने की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा कोष पोर्टल भी बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों के सीएमओ को नर्मदा क्षेत्र के विकास के लिए नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 एसटीपी तैयार किए जा रहे है। यह काम दिसम्बर 2027 तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के विकास के लिए यहां स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) तैयार की जाएगी। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि महेश्वर में 18 होमस्टे तैयार किए है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 13 गावों में 79 होमस्टे तैयार किए गये हैं। बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, खनिज साधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, योजना आर्थिकी सांख्यिकी, एवं अन्य विभागों ने भी नर्मदा घाटी क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।  

78 कार्यालय सहायक ग्रेड- तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति

भोपाल  मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण एवं युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन के 78 प्रशिक्षुओं की नई भर्ती एवं नियुक्ति की गई है। नवनियुक्त सभी 78 कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं ने 29 मई को पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेंटर (PDTC), भोपाल में कार्यभार ग्रहण कर प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रारंभिक प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत उन्हें कंपनी के विभिन्न शहर एवं संचालन-संधारण वृत्तों में प्रशिक्षण के शेष मॉड्यूल पूर्ण करने के लिये पदस्थ किया गया है। इससे प्रशिक्षुओं को मैदानी स्तर पर कार्य का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा तथा वे भविष्य में अधिक दक्षता एवं प्रभावशीलता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे। यह भर्ती कंपनी के मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे प्रदेश के योग्य एवं शिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही कंपनी के विभिन्न कार्यालयों एवं क्षेत्रीय इकाइयों में मानव संसाधन की आवश्यकता की पूर्ति की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया गया है। कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति से कंपनी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक गति मिलेगी तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त होगी।  

मंत्री सारंग से की सौजन्य भेंट, मंत्री ने अनिमेष दी शुभकामनाएं

भोपाल विश्वास सारंग क्रिकेट अकादमी के उभरते तेज गेदबाज  अनिमेष सिंह का चयन एमपीसीए इमर्जिंग टीम में चयन हुआ है।  सिंह 7 से 21 जुलाई 2026 तक मध्यप्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए रणजी ट्राफी विजेता जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के साथ चार अभ्यास मैच खेलेंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग से  अनिमेष सिंह ने उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मंत्री  सारंग ने शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पूरी निष्ठा एवं आत्मविश्वास के साथ प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित किया। मंत्री  सारंग ने कहा कि “मध्यप्रदेश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण लगातार मजबूत हो रहा है। राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर खेल अधोसंरचना, आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं और लगातार निखरकर सामने आ रही हैं। हमें विश्वास है कि हमारे युवा खिलाड़ी आने वाले समय में देश और प्रदेश का नाम और ऊंचा करेंगे।” एमपीसीए इमर्जिंग टीम में भोपाल के चार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को स्थान मिला है। इनमें अनिमेष सिंह, पृथ्वीराज सिंह तोमर, तनिष्क यादव और तनमय पांडे शामिल हैं। इन खिलाड़ियों का चयन हाल के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। पहले दो अभ्यास मैचों के लिए चयनित खिलाड़ियों को 3 जुलाई को होलकर स्टेडियम, इंदौर में रिपोर्ट करना होगा, जबकि अंतिम दो मैचों के लिए चयनित खिलाड़ियों को 12 जुलाई को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर जैसी मजबूत टीम के खिलाफ होने वाले ये अभ्यास मैच युवा खिलाड़ियों के लिए उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर होंगे और आगामी घरेलू क्रिकेट सत्र की तैयारियों में भी अहम भूमिका निभाएंगे।  

PTRI में दो दिवसीय प्रशिक्षण

भोपाल सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात की नवीन तकनीकों से परिचय कराने तथा वाहन दुर्घटनाओं में पीडितों को शासकीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, केशलेस उपचार सहायता उपलब्ध कराने के लिये ELECTRONIC ENFORCEMENT IN MP& TIME BOUND INVESTIGATION FOR ROAD ACCIDENT & GOVT SCHEMES विषय पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  मोहम्मद शाहिद अबरार के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में किया गया। प्रशिक्षण सत्र में मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटनाओ एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से एवं वाहन दुर्घटनाओं में पीडितों को शासकीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, केशलेस उपचार सहायता उपलब्ध कराने के लिये उप पुलिस अधीक्षक से आरक्षक स्तर के अधिकारियों/ कर्मचारियों को दो दिवसीय आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्र में शासकीय योजनाओं PM RAHAT योजना, RAHVEER योजना, हिंट एंड रन (पीड़ित प्रतिकर योजना 2022) का व्यापक प्रयोग एवं प्रचार प्रसार करने पर बल दिया गया। साथ ही यातायात प्रवर्तन की नवीन तकनीकों, आधुनिक यातायात उपकरणों, नवीन टेक्नोलॉजी की जानकारी POS, ITMS, E-CHALLAN इन्टरसेप्टर व्हीकल, स्पीड रडार गन, ब्रीथ एनालाइजर आदि जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक रूप से विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। सड़क सुरक्षा प्रबंधन का उददेश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना है, जिसमें पदयात्रियों तथा साइकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता दी गयी है। भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करना रखा गया है। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई  टी. के. विद्यार्थी द्वारा वाहन दुघटनाओं का विश्लेषण करना उनकी रोकथाम करने के संबंध में कार्य योजना तैयार करना तथा शासकीय योजनाओं पी. एम. राहत योजना, राहवीर योजना, आदि योजनाओं के बारे में तथा सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अभिनीत कुमार रंजन के द्वारा शासकीय योजना हिट एण्ड रन योजना (पीडित प्रतिकर योजना 2022), cctns एवं E DAR में एंट्री एवं भिन्नता की स्थिति में सुधार करना व FAR/IAR/DAR विषय पर विस्तृत रूप से जानकारी दी जाकर योजनाओं का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करने के लिये प्रशिक्षित किया गया। व्याख्याता  एस.एस. लल्ली से.नि. अति.पु.अधी. द्वारा TIME BOUND INVESTIGTION FOR ROAD ACCIDENT एवं  आशीष शर्मा, 108 हेड भोपाल द्वारा FIRST AID एवं CPR, BLS CONCERN OF ROAD SAFETY, HANDLING & CARING OF ROAD ACCIDENT VICTIM विषय पर प्रशिक्षणर्थियों को जानकारी देकर प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान पीटीआरआई के समनि  राजेश मिश्रा, समनि  मनोज कुमार शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक  मनोज खत्री, उप पुलिस अधीक्षक  हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कोर्स के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों की पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर प्रमाण-पत्र दिया गया।  

कम पानी और कम अवधि वाली फसलें अपनाने के लिए किसानों को करें प्रेरित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में इस वर्ष प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति के मद्देनज़र किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों की अब तक की पूर्व तैयारियों की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जाए, जिससे वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है और उनकी समृद्धि तथा कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी। अगले दो वर्षों की तैयारी प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार कर अमृत 2.0 के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाओं का समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जायेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद/अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। "जलाभिषेक 2.0" अंतर्गत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, वीबीपी रामजी अभिसरण से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन 2 वर्षों में किया जायेगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण का मिशन मोड कार्यक्रम; "खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में" सिद्धांत पर चलाया जाएगा। नहरों की सफाई मरम्मत रबी से पूर्व पूर्ण, टेल-एंड तक पानी पहुंचाने की जवाबदेही तय की जायेगी। कम जल मांग वाली फसलों यथा दलहन, तिलहन, अन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन, ग्रीष्मकालीन धान/मूंग पर जल उपलब्धता आधारित सलाह, धान क्षेत्रों में सीधी बुवाई एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति एवं प्रत्येक जिले के लिए कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जल विद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों (इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर) के लिए रूल कर्व का कड़ाई से पालन; जल उपयोग की प्राथमिकता दी जाएगी। पहले पेयजल, फिर सिंचाई, फिर विद्युत उत्पादन का स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जा रहा है।     रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाएंगे।     जन-जागरूकता महाअभियान "जल गंगा संवर्धन" की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित सतत् अभियान चलाए जाएंगे।     प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना बनाई जाएगी। आरबीसी 6 (4) अंतर्गत क्षति सर्वे के लिये राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण अभी से पूर्ण; डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं सैटेलाइट इमेजरी आधारित क्षति आंकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जायेगा, जिससे सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके।     फसल बीमा का कवरेज विस्तार एवं दावा तत्परता से हो, इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी। आकस्मिकता की स्थिति से निपटने के लिए राज्य की तैयारियां     राज्य स्तरीय मॉडल आकस्मिक कार्य योजना तैयार कराकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराई गई हैं।     विभिन्न योजनाओं में फसल प्रदर्शनों, उन्नत फसल किस्मों के बीज वितरण के लक्ष्य जिलों को जारी किये गए हैं।     वर्षा जल संरक्षण के लिये बलराम तालाब अन्तर्गत जिलों को लक्ष्य जारी किये गए ।     सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग कर कृषकों को जागरूक करना।     मौसम के पूर्वानुमान, फसलों में मौसम अनुसार किये जाने वाले कार्यों तथा अन्य समसामयिक सलाह कृषकों को उनके मोबाइल संदेश भेजकर उपलब्ध कराई जा रही है।     सभी जिले के कलेक्टर्स को सिंचाई, जल भराव की स्थिति, जीवन रक्षक सिंचाई हेतु विद्युत की उपलब्धता, सूखे की निगरानी व्यवस्था के लिये समस्त विभागों से कार्यवाही की नियमित समीक्षा के लिये निर्देश दिये गए हैं।     26 से 30 जून की अवधि में आयोजित ग्राम सभाओं में आकस्मिक कार्य योजना की चर्चा की गई। बैठक में राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग, किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, मत्स्य पालन राज्य मंत्री  नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव  मनीष रस्तोगी, अन्य प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।  

लाखों विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का लिया संकल्पमध्यप्रदेश पुलिस एवं स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप एवं पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में प्रदेश को साइबर अपराधों से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित राज्यव्यापी "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान के अंतर्गत बुधवार को एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता पहल की गई। स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य साइबर पुलिस के समन्वय से प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में आयोजित प्रार्थना सभाओं के दौरान लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शैक्षणिक स्टाफ ने "साइबर शपथ"लेकर सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का संकल्प लिया। प्रदेश भर में एक साथ आयोजित इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने तथा डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। राजधानी भोपाल से लेकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक विद्यालयों में साइबर सुरक्षा का संदेश एक साथ प्रसारित हुआ और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इस पहल में सहभागिता की। वर्तमान डिजिटल युग में बच्चे एवं युवा इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। इसी कारण वे साइबर ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी लिंक, फेक न्यूज तथा अन्य साइबर अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में यह जागरूकता विकसित करना है कि डिजिटल दुनिया में प्रत्येक क्लिक सोच-समझकर करना आवश्यक है तथा थोड़ी-सी सावधानी उन्हें बड़ी आर्थिक एवं सामाजिक हानि से बचा सकती है। साइबर शपथ के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपनी व्यक्तिगत एवं गोपनीय जानकारी, जैसे पासवर्ड, ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी तथा निजी विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करने, सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने, भ्रामक एवं अपुष्ट सूचनाएं साझा न करने, ऑनलाइन गेमिंग एवं चैटिंग के दौरान किसी भी प्रकार के लालच अथवा धमकी से प्रभावित न होने तथा किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि अथवा साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने का संकल्प लिया। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व से ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं विद्यालयों के प्राचार्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। विद्यालयों में शिक्षकों ने शपथ के साथ विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग तथा ऑनलाइन सतर्कता के संबंध में भी जानकारी प्रदान की। मध्यप्रदेश पुलिस का विश्वास है कि समाज के सबसे महत्वपूर्ण वर्ग—विद्यार्थियोंको साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाकर साइबर अपराधों की रोकथाम की दिशा में दीर्घकालीन एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त होंगे। जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अपने परिवार एवं समाज को भी साइबर अपराधों के प्रति सतर्क करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मध्यप्रदेश पुलिस एवं स्कूल शिक्षा विभाग ने इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाएं तथा किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तत्कालराष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन1930 अथवा संबंधित पुलिस इकाई को दें।  

अब पुलिस कर्मियों के अवकाश होंगे पूरी तरह ऑनलाइन स्वीकृत

भोपाल पुलिस कर्मियों की सेवा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, त्वरित एवं सुगम बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशानुसार प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों में 01 जुलाई 2026 से eHRMS (Electronic Human Resource Management System) काई-लीव मॉड्यूललागू कर दिया गया है। इसके माध्यम से अब प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाइन अवकाश आवेदन, स्वीकृति तथा उसकी अद्यतन स्थिति की जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे अवकाश प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध हो जाएगी। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस कर्मियों की पारंपरिक मैनुअल सेवा अभिलेख व्यवस्था को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से जुलाई 2025 से eHRMS ऑनबोर्डिंग का कार्य प्रारंभ किया गया था। इस दौरान सेवा पुस्तिकाओं का स्कैनिंग एवं अनिवार्य सेवा संबंधी विवरणों का डिजिटलीकरण किया गया। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) के माध्यम सेएक लाख से अधिक सेवा पुस्तिकाओं का स्कैनिंग कार्यसंपन्न किया गया तथा वर्तमान में लगभगएक लाख पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी eHRMS पर ऑनबोर्डकिए जा चुके हैं। पुलिस विभाग में जारी होने वाले सभी महत्वपूर्ण सेवा संबंधी आदेशों को सुरक्षित एवं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 23 मार्च 2026 से eHRMS काऑर्डर बुक (O.B.) मॉड्यूलभी प्रारंभ किया जा चुका है। इसके माध्यम से सेवा पुस्तिका से संबंधित सभी महत्वपूर्ण आदेश अब eHRMS पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेंगे, जिससे अभिलेखों का संरक्षण एवं उपलब्धता और अधिक सुदृढ़ होगी। ई लीव मॉड्यूल को विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के लिए इसे प्रारंभिक रूप सेएससीआरबी, कार्मिक शाखा, विशेष शाखा, पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल तथा 25वीं वाहिनी भोपालमें प्रायोगिक रूप से लागू किया गया था। इन इकाइयों से प्राप्त सुझावों एवं फीडबैक के आधार पर मॉड्यूल में आवश्यक सुधार एवं परिष्करण किए गए, जिसके बाद इसे प्रदेश की लगभग 120 पुलिस इकाइयोंमें लागू किया गया है। अब पुलिस विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी eHRMS पोर्टल (ehrms.mp.gov.in) अथवा eHRMS मोबाइल एपके माध्यम से ऑनलाइन अवकाश आवेदन कर सकेंगे। यह मोबाइल एप Google Play Store तथा Apple App Store दोनों पर उपलब्ध है। पोर्टल पर प्रत्येक कैडर के अनुसार अवकाश के प्रकार, पात्रता एवं उपलब्धता का विवरण पहले से दर्ज किया जा चुका है। कर्मचारी द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने के पश्चात संबंधित लीव क्लर्क उसे सक्षम स्वीकृतकर्ता अधिकारी को अग्रेषित करेगा। अधिकारी ऑनलाइन ही अनुशंसा एवं स्वीकृति प्रदान करेंगे तथा कर्मचारी अपनी लॉगिन आईडी पर अपने अवकाश आवेदन की अद्यतन स्थिति देख सकेगा। इससे अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी बनेगी। उल्लेखनीय है कि eHRMS के ई लीव मॉड्यूल का उपयोग वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के केवल कुछ विभागों द्वारा किया जा रहा है, जिनमें पुलिस विभाग सर्वाधिक उपयोगकर्ता संख्या के साथ अग्रणी है। इसके अंतर्गत लगभग 1,01,928 अधिकारी एवं कर्मचारी इस सुविधा से जुड़े हैं।  

सुरक्षित सुशासन और डेटा संरक्षण के मानकों से सुदृढ़ हुई विभाग की डिजिटल विश्वसनीयता : आयुक्त भोंडवे

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि "नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आधुनिक तकनीकों और सुदृढ़ साइबर सुरक्षा उपायों के समन्वय से सदैव पारदर्शी, सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल नागरिक सेवाओं को सर्वोपरि प्राथमिकता दी है। साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और डेटा संरक्षण के क्षेत्र में अपनाए गए प्रभावी एवं कड़े वैश्विक मानकों का ही प्रतिफल है कि आज हमारी डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ हुई है। विभाग भविष्य में भी नागरिकों को पूरी तरह सुरक्षित, भरोसेमंद और अत्याधुनिक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः कटिबद्ध रहेगा।" मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के 'ई-नगर पालिका' पोर्टल को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत साइबर सुरक्षा श्रेणी में प्रतिष्ठित रजत पुरस्कार (Silver Award) प्राप्त हुआ है। जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार समारोह में यह सम्मान मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आयुक्त  संकेत भोंडवे को प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान राज्य की दूरदर्शी नीति और तकनीकी श्रेष्ठता का जीवंत प्रमाण है। मध्यप्रदेश शासन ने न केवल नागरिक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सुलभ और सुगम बनाया है, बल्कि उन्हें एक अभेद्य सुरक्षा आवरण भी प्रदान किया है। नगरीय निकायों से जुड़े लाखों नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत एवं वित्तीय डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पारदर्शी प्रशासन को अक्षुण्ण रखना तथा सुरक्षित आईटी अवसंरचना का निर्माण करना पोर्टल की विशेषता रही है। डिजिटल गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन के इन उच्चतम मानकों पर 'ई-नगर पालिका' पोर्टल ने देश के अन्य राज्यों के सम्मुख सुरक्षित डिजिटल सुशासन का एक अनुकरणीय प्रतिमान स्थापित किया है। आयुक्त  भोंडवे ने इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय विभाग की संपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक टीम के सामूहिक प्रयासों को दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी टीम भावना के साथ इस दिशा में और बेहतर प्रयास किए जाएंगे, जिससे मध्यप्रदेश डिजिटल गवर्नेंस के शीर्ष पायदान पर सदैव प्रतिष्ठित रहे।  

हेमंत खंडेलवाल का एक साल बेमिसाल, MP BJP संगठन को मिली नई मजबूती; मुख्यमंत्री ने की प्रशंसा

भोपाल  मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण हो गया है। इस अवसर पर शुभकामनाएं देकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संगठन को नई मजबूती मिली है और कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी का वास्तविक आधार उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं। संगठन विस्तार और संवाद को मिली नई रफ्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक विस्तार को गति देने और संगठन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. नए जिला कार्यालयों के निर्माण, नियमित प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन और सहयोग सेल जैसी पहलों ने संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भावना को भी मजबूत किया है. इन प्रयासों से भाजपा की जमीनी पकड़ और अधिक मजबूत हुई है।  ‘भाजपा सिर्फ राजनीतिक दल नहीं, राष्ट्रसेवा का माध्यम’ डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि राष्ट्रसेवा का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने विश्वास जताया कि हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन आने वाले समय में भी नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा और प्रदेश में जनसेवा के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी. मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उनके सफल एक साल के कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन की ऊर्जा, कार्यकर्ताओं का समर्पण और नेतृत्व की प्रतिबद्धता ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  प्रदेेश संगठन को मजबूत बनाया डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक विस्तार को गति देने, नए जिला कार्यालयों के निर्माण, प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन तथा सहयोग सेल जैसी पहलों से संगठन की कार्यक्षमता और सेवा भाव को नई मजबूती मिली है। इन प्रयासों ने भाजपा को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उनके सफल एक वर्ष के कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन आगे भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम है। संगठन की ऊर्जा और कार्यकर्ताओं का समर्पण ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा।

मध्य प्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी पदों पर निकली भर्ती, आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई

मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई तक भोपाल राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा। ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है। रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले … Read more