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CM मोहन यादव का बंगाल दौरा: कोलकाता में बोले- TMC पर निशाना, बंगाल चाहता है बदलाव

भोपाल /कलकत्ता पश्चिम बंगाल चुनावी माहौल के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने Kolkata की गलियों में उतरकर जोरदार प्रचार किया। कमरहाटी क्षेत्र के वार्ड 24 और 112 में उन्होंने घर-घर और दुकानों तक पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। घर-घर पहुंचकर जनता से जुड़ने की कोशिश सीएम डॉ. यादव ने गलियों में घूमते हुए आम नागरिकों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और भरोसा दिलाया कि यदि भाजपा की सरकार बनती है, तो जनकल्याण की योजनाओं की रफ्तार कई गुना तेज होगी। सीएम ने कहा कि वर्षों से विकास की दौड़ में पीछे छूटा पश्चिम बंगाल डबल इंजन सरकार के तहत नई ऊर्जा, नई दिशा और तेज विकास के साथ आगे बढ़ेगा। हर वर्ग के जीवन में वास्तविक बदलाव देखने को मिलेगा। मीडिया से चर्चा के दौरान डॉ. यादव ने कहा कि कोलकाता के अंदरूनी इलाकों में काफी गरीबी है और हालात चिंताजनक हैं। युवाओं के पास रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, जिसके कारण लोगों को परिवार चलाने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल कभी देश के सबसे बेहतर राज्यों में गिना जाता था, लेकिन पहले कम्युनिस्ट सरकारों और बाद में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकारों ने राज्य को विकास की राह से पीछे धकेल दिया। सीएम ने कहा कि बंगाल में विकास की असीमित संभावनाएं हैं और प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में अब यहां की जनता टीएमसी शासन से मुक्ति चाहती है। यदि बंगाल देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा, तो विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है। उन्होंने आगे कहा कि देश की युवा शक्ति, नारी शक्ति, गरीब और अन्नदाताओं के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री लगातार कार्य कर रहे हैं। बंगाल के उत्थान के लिए खिलता कमल और भाजपा की सरकार आवश्यक है। ‘बंगाल बदलाव चाहता है’ – सीएम यादव Mohan Yadav ने कहा कि बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं, बल्कि परिवर्तन और विकास की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है। उनका दावा है कि “डबल इंजन सरकार” आने पर राज्य में नई ऊर्जा और तेज प्रगति देखने को मिलेगी। रोजगार और गरीबी पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कोलकाता के अंदरूनी इलाकों में गरीबी और बेरोजगारी गंभीर समस्या बनी हुई है। युवाओं के पास रोजगार के अवसर नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें पलायन करना पड़ रहा है। टीएमसी और वामपंथ पर साधा निशाना सीएम यादव ने आरोप लगाया कि पहले कम्युनिस्ट सरकार और बाद में All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने राज्य के विकास को पीछे धकेला है। उन्होंने कहा कि कभी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल बंगाल आज विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। विकास की संभावनाओं पर जोर उन्होंने कहा कि बंगाल में अपार संभावनाएं हैं और अगर राज्य देश के साथ कदम मिलाकर चले, तो यह फिर से विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश के हर वर्ग—युवा, महिला, किसान और गरीब—के लिए काम हो रहा है। सीएम डॉ. यादव का यह रोड प्रचार बंगाल चुनाव में भाजपा की रणनीति को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जहां जनता के बीच जाकर सीधा संवाद स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।  

कलेक्टर दफ्तर में टीवी एक्ट्रेस की एंट्री, 300 करोड़ की जमीन पर कब्जे की साजिश का मामला

इंदौर  टीवी इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस रेमन कक्कड़  जमीन विवाद के मामले में इंदौर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। एक्ट्रेस का आरोप है कि शहर की सबसे महंगी जमीनों में शामिल उनकी करीब 300 करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। एक्ट्रेस का कहना है कि एक कारोबारी ने इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की है। एक्ट्रेस के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक्ट्रेस ने पूरे मामले को लेकर प्रशासन को लिखित आवेदन सौंपा और साफ आरोप लगाया कि उनकी पैतृक संपत्ति पर सुनियोजित तरीके से कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में पहले ही इंदौर पुलिस एक शराब कारोबारी सूरज रजक के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है, जिससे मामले की गंभीरता साफ झलकती है। परिवार की जमीन पर ‘नजर’, चार वारिसों का दावा मीडिया से बातचीत में रेमन कक्कड़ ने बताया कि विवादित जमीन उनके पिता की संपत्ति थी, जो अब उनकी मां, दोनों भाइयों और उनके नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि “एक कारोबारी ने इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की, जिसके बाद हमें पुलिस का सहारा लेना पड़ा।” सोशल मीडिया पर ‘झूठ का खेल’, एक्ट्रेस ने दी चेतावनी रेमन कक्कड़ ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भ्रामक और साजिशन फैलाया गया झूठ बताया। उन्होंने साफ कहा कि “कुछ लोग जानबूझकर गलत जानकारी फैला रहे हैं, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और जल्द सच्चाई सामने आएगी।” कलेक्टर से मुलाकात नहीं, फिर भी सौंपे अहम दस्तावेज हालांकि एक्ट्रेस की किसी वरिष्ठ अधिकारी से सीधी मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन उन्होंने जरूरी दस्तावेज संबंधित अधिकारियों को सौंप दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन अब इस पूरे मामले की गहन जांच की तैयारी में है। पुलिस की कार्रवाई पर जताया भरोसा रेमन कक्कड़ ने पुलिस की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होते ही कार्रवाई शुरू हो गई, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। सड़क के लिए दी गई जमीन पर ‘व्यापारिक खेल’? इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा खुलासा यह है कि यह जमीन पहले ही इंदौर विकास प्राधिकरण को सड़क निर्माण के लिए दी जा चुकी है। ऐसे में इस जमीन पर किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।

मध्यप्रदेश में गर्मी का कहर: खजुराहो में 43.2°C, 9 शहरों में 42 डिग्री से अधिक, 16 जिलों में लू का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट बदलते हुए भीषण गर्मी का रूप ले लिया है। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में एंट्री के साथ ही तापमान तेजी से उछला है और अब हालात लू जैसे बन गए हैं। शुक्रवार को छतरपुर के खजुराहो में पारा 43.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है। खास बात यह रही कि जबलपुर जैसे शहर ने भोपाल और इंदौर को भी पीछे छोड़ते हुए ज्यादा गर्मी दर्ज की। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 42 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है। खजुराहो के बाद उमरिया (42.9), टीकमगढ़-नौगांव (42.8), मंडला (42.5), दमोह, गुना और दतिया (42.2) जैसे शहर भी भीषण गर्मी की चपेट में रहे। वहीं बड़े शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 42 डिग्री दर्ज हुआ। भोपाल और ग्वालियर 41.3 डिग्री, इंदौर 40.6 और उज्जैन 40.5 डिग्री पर रहे।  सीजन का सबसे गर्म दिन रहा शुक्रवार शुक्रवार को प्रदेश में इस सीजन की सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई। छतरपुर जिले के खजुराहो में तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके अलावा उमरिया में 42.9 डिग्री, टीकमगढ़ और नौगांव में 42.8 डिग्री, मंडला में 42.5 डिग्री और दमोह, गुना व दतिया में 42.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। सागर और सतना में 41.8 डिग्री, जबकि छिंदवाड़ा और रायसेन में 41.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42 डिग्री पहुंच गया। भोपाल और ग्वालियर में 41.3 डिग्री, इंदौर में 40.6 और उज्जैन में 40.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। 16 जिलों में लू का अलर्ट, बढ़ेगी परेशानी IMD के अनुसार, शनिवार के लिए 16 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। इनमें अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, धार, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना शामिल हैं। मौसम विभाग का कहना है कि, अगले 2-3 दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे लू का असर और तेज हो जाएगा। सीजन में पहली बार तापमान बढ़ा प्रदेश में शुक्रवार को गर्मी ने तीखे तेवर दिखाए। छतरपुर के खजुराहो में पारा सबसे ज्यादा 43.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं, उमरिया में 42.9 डिग्री, टीकमगढ़-नौगांव में 42.8 डिग्री, नौगांव में 42.6 डिग्री, मंडला में 42.5 डिग्री, दमोह, गुना-दतिया में 42.2 डिग्री, सागर-सतना में 41.8 डिग्री, छिंदवाड़ा में 41.6 डिग्री, नर्मदापुरम-शाजापुर में 41.4 डिग्री, सीधी, नरसिंहपुर, रीवा-मलाजखंड में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में सबसे ज्यादा 42 डिग्री रहा। भोपाल-ग्वालियर में 41.3 डिग्री, इंदौर में 40.6 डिग्री, उज्जैन में 40.5 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो समेत कई जिलों में लू भी चली। गर्मी से बचने के लिए एडवायजरी जारी गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने बचाव की एडवायजरी भी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। दोपहर के समय लंबे समय तक धूप में न रहे। हल्के वजन और रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर ध्यान रखें। गर्मी का असर- स्कूलों का बदला समय भीषण गर्मी का असर अब बच्चों पर भी दिखने लगा है। तेज धूप में स्कूल से घर लौटने वाले बच्चों की सेहत पर खतरा बढ़ गया था। इसी को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। राजधानी भोपाल में अब स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही संचालित होंगे। इसके अलावा ग्वालियर, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, रायसेन, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, डिंडौरी और रतलाम समेत कई जिलों में भी नई टाइमिंग लागू कर दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। अगले 3 दिन का मौसम पूर्वानुमान 18 अप्रैल: कई जिलों में भीषण लू, तापमान 45°C तक पहुंचने की संभावना 19 अप्रैल: उज्जैन, भिंड, दतिया, छतरपुर समेत कई जिलों में लू का असर जारी 20 अप्रैल: बुरहानपुर, खंडवा, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में बारिश के आसार

बिजली उत्पादन का हब बनेगा विंध्य, टाटा एनर्जी 28 हजार करोड़ से लगाएगी न्यूक्लियर पावर प्लांट

रीवा  रीवा अब सिर्फ विंध्य क्षेत्र का प्रमुख शहर नहीं रहेगा, बल्कि देश के सबसे बड़े बिजली उत्पादन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है। जिले में टाटा एनर्जी 28 हजार करोड़ रुपये के बड़े निवेश के साथ न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने जा रही है। यह देश का पहला निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट माना जा रहा है, क्योंकि अब तक ऐसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र केवल सरकारी कंपनियों द्वारा लगाए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार की नई हरित ऊर्जा नीतियों के बाद अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। रीवा के सिरमौर तहसील के क्योटी के पास रोजहांई क्षेत्र में यह परियोजना स्थापित होगी। इससे पूरे विंध्य क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जिले में टाटा एनर्जी 28 हजार करोड़ से न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाएगा। यह देश का पहला निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट होगा। अब तक ऐसे प्लांट सरकार चलाती है। केंद्र की हालिया व्यवस्थाओं के बाद रिलायंस, अदानी व टाटा ग्रुप ने इस क्षेत्र में कदम रखे हैं। रीवा के लिए केंद्र ने टाटा को अनुमति दे दी है। यह सिरमौर तहसील के क्योंटी के पास रोझौंहीं में बनेगा। मप्र औद्योगिक विकास प्राधिकरण 169 हेक्टेयर जमीन आवंटित करेगा। प्लांट में पहले 220 मेगावॉट बिजली बनेगी। बाद में 1000 मेगावॉट और आगे 2400 मेगावॉट बिजली उत्पादन होगा। इससे 5 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। रीवा न्यूक्लियर पावर प्लांट: 28 हजार करोड़ निवेश और 2400 मेगावॉट उत्पादन टाटा एनर्जी द्वारा प्रस्तावित इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की शुरुआत 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन से होगी। इसके बाद इसे बढ़ाकर 1000 मेगावॉट और फिर आगे 2400 मेगावॉट तक ले जाने की योजना बनाई गई है। यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से विकसित होगी ताकि बिजली उत्पादन के साथ स्थानीय संसाधनों और रोजगार को भी मजबूत किया जा सके। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण इस प्रोजेक्ट के लिए 169 हेक्टेयर भूमि आवंटित करेगा। बताया जा रहा है कि यह भूमि पर्यावरणीय रूप से बंजर क्षेत्र में है, जिससे वन क्षेत्र पर असर कम होगा। इस प्लांट के शुरू होने के बाद रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा। यह सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं बल्कि औद्योगिक विकास का नया द्वार भी खोलेगा। 5000 युवाओं को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा इस न्यूक्लियर पावर प्लांट का सबसे बड़ा लाभ रोजगार के रूप में सामने आएगा। अनुमान है कि करीब 5000 युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। निर्माण कार्य, तकनीकी सेवाएं, सुरक्षा, परिवहन, मशीन संचालन और रखरखाव जैसे कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए अवसर बनेंगे। इसके अलावा आसपास छोटे व्यवसाय जैसे होटल, दुकानें, परिवहन सेवाएं और ठेकेदारी भी तेजी से बढ़ेंगे। लंबे समय से रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह परियोजना उम्मीद की बड़ी किरण बन सकती है। खास बात यह है कि रीवा के युवाओं को अपने ही जिले में बेहतर नौकरी के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन भी कम होगा। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया, यह पथरीली-बंजर भूमि पर बनेगा। पहले यहां सोलर प्लांट बनना था। वन भूमि के कारण एनओसी न मिलने से प्रोजेक्ट रद्द हुआ। शुक्ल ने शुक्रवार को समीक्षा बैठक भी की। कमिश्नर बीएस जामोद ने बैठक में बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक जमीनें तय समय सीमा में टाटा एनर्जी को उपलब्ध करा दी जाएंगी। निजी जमीनों को टाटा एनर्जी स्वयं प्राप्त करेगी। प्रशासनिक स्तर पर पूरा सहयोग किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि रीवा एयरपोर्ट से केवल 30 मिनट की दूरी पर मैहर जिले में अमझर में 170 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। एमपीआईडीसी के अधिकारी इसमें निवेश के लिए केन्द्र सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य योजना) के तहत प्रस्ताव बनाएं। एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक यूके तिवारी ने बताया कि अमझर में औद्योगिक पार्क में 50 से अधिक औद्योगिक इकाईयां स्थापित की जाएंगी। औद्योगिक केन्द्र के लिए अतिरिक्त भूमि की भी तलाश की जा रही है। अमझर में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क का लाभ भी सीसीएफ राजेश राय ने कहा कि वन भूमि में अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर समय सीमा में अनुमति जारी कर दी जाएगी। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि जिले में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव सहायता दी जाएगी। जिले के औद्योगिक विकास में तेजी के लिए निवेश आवश्यक है। अमझर में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क का लाभ भी रीवा जिले को मिलेगा। टाटा एनर्जी के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित परियोजना की विस्तार से जानकारी दी। टाटा एनर्जी के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मिल रहे सहयोग की प्रशंसा की। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी नितिन पटेल तथा टाटा एनर्जी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रीवा संभाग में हर तरह के पावर प्लांट – रीवा संभाग बिजली उत्पादन का हब बन रहा है। सिंगरौली में पहले से ही थर्मल पावर प्लांट हैं। रीवा में 750 मेगावॉट का सोलर पावर प्लांट है। सिरमौर और सिलपरा में हाइड्रो पावर प्लांट के साथ पहडिय़ा में कचरे से भी बिजली बन रही है। अब न्यूक्लियर पावर प्लांट से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी।

सागर ग्रीन हिल्स में अवैध पेंट हाउस: SEZ ने शुरु की अनुमतियां निरस्त करने की प्रक्रिया

भोपाल कोलार क्षेत्र की सागर ग्रीन हिल्स कॉलोनी में बने 16 पेंट हाउस अवैध बने हैं। इन पेंट हाउस के लिए साल 2013 में कोलार नगरपालिका ने अनुमति दे दी थी, जबकि भूमि विकास नियम-2012 में इसका प्रावधान नहीं था। यह मामला 2021 में सामने आया था, तब से अब तक चल रही जांच और पत्राचार के बाद नगरीय विकास विभाग ने 16 अप्रैल को इस पर सुनवाई रखी है। इस सुनवाई में बिल्डर के साथ पेंट हाउस के खरीदार और नगर निगम आयुक्त को बुलाया गया है। नगरीय प्रशासन संचालनालय ने इस मामले में सेज बिल्डर के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए वर्ष 2013 में कोलार नगर पालिका से मिली अनुमतियों को खारिज करने एवं भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप तय कर दिए हैं। लोगों के करोड़ों रुपए फंस गए हैं। जांच में दीवारों में दरारें आने, जमीन धंसने और कलियासोत कैचमेंट नियमों में उल्लंघन भी पाया गया। सागर ग्रीन हिल्स कवर्ड कैंपस कलियासोत नदी के किनारे वर्ष 2013 की अनुमति के आधार पर बनाया गया था। नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत बिल्डिंग बनाने के प्रावधान में 18 मीटर की अधिकतम ऊंचाई निर्धारित की गई थी जबकि सेज डेवलपर एवं बिल्डर ने इसे 21 मीटर तक बढ़ा दिया। गड़बड़ी का क्रम यहीं नहीं थमा। सेज डेवलपर्स ने हाई राइज इमारत बनाने के बावजूद निवेशकों से मोटी रकम वसूलने के लिए 16 पेंट हाउस बनाकर बेच दिए। गैर कानूनी रूप से एक पेंट हाउस के बदले 80 लाख रुपए से एक करोड़ के बीच राशि वसूल की गई। राज्य शासन द्वारा बिल्डिंग एवं कवर्ड कैंपस को अवैध घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होने से अब निवेशकों के करोड़ों रुपए इस परिसर में फंस गए हैं। सुनवाई की अगली तारीख पर सेज डेवलपर और बिल्डर को तय किए गए आरोप पर पक्ष रखने का मौका दिया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर राज्य शासन द्वारा संपूर्ण परिसर को विधिवत अवैध घोषित कर दिया जाएगा। ग्राउंड रिपोर्ट: प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ी नगरीय विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने चल रही सुनवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला 2021 में तत्कालीन विधायक अर्जुन सिंह काकोडिय़ा ने विधानसभा सदन में उठाया था। उन्होंने सेज डेवलपर एवं बिल्डर के खिलाफ निर्माण अनुमतियों के उल्लंघन एवं निवेशकों की रकम लेकर उनके साथ गैरकानूनी व्यवहार करने का आरोप लगाया था। रिटेनिंग वॉल में दरारें, कैंपस की जमीन सीलन की वजह से धंसने लगी जांच के बाद पाया गया कि कलियासोत नदी से सटाकर कवर्ड कैंपस का निर्माण किया गया है। रिटेनिंग वॉल में दरारें आ चुकी हैं। कैंपस की जमीन पानी की सीलन की वजह से धंसने लगी है। इस प्रकार बिल्डिंग स्ट्रक्चर भी नागरिकों के लिए खतरनाक घोषित किया जा चुका है। नगरपालिका की आड़ में अवैध निर्माण सेज डेवलपर्स एवं बिल्डर के मालिक ने कोलार नगर पालिका से वर्ष 2013 में नक्शा और लेआउट दिखाकर कॉलोनी विकास की अनुमति मांगी थी। भूमि विकास नियम 2012 का पालन करते हुए नगर पालिका ने चार टावर बनाने एवं उनकी ऊंचाई 18 मीटर रखने के निर्देश जारी किए थे। बिल्डर ने चार टावर के अलावा एक अतिरिक्त मंजिल तैयार कर ली। 18 मीटर की बजाय 21 मीटर तक की ऊंची बिल्डिंग बनाई गई। छत को कॉमन एरिया घोषित करने की बजाय यहां पेंट हाउस बनाकर बेच दिए गए।

इंदौर में बाल विवाह पर कार्रवाई: 17 साल की दुल्हन और 13 साल के दूल्हे की शादी रोकी, प्रशासन ने दी दबिश

इंदौर  दौर के अहिल्या पलटन इलाके में शुक्रवार को एक घर में शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी। मंडप सज चुका था। दुल्हन को हल्दी लग रही थी। महिलाएं गीत गा रही थीं, तभी महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम पहुंच गई और नाबालिग बेटी की शादी रुकवा दी। लड़की के पिता ने टीम को बताया कि उनके समाज में 16 साल की उम्र में विवाह की छूट है। जब अधिकारियों ने इस दावे से जुड़ा कोई सरकारी नियम या आदेश दिखाने को कहा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। 18 साल होने में 6 महीने बाकी जांच में सामने आया कि लड़की की उम्र 18 साल होने में करीब 6 महीने बाकी हैं। इसके बाद अधिकारियों ने परिजनों और लड़के पक्ष को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधान, सजा और कम उम्र में शादी के नुकसान समझाए। महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी चित्रा यादव, उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक सदस्य संगीता सिंह चाइल्ड लाइन के फूल सिंह कारपेंटर और टीम के अन्य सदस्यों ने दोनों परिवारों को समझाया। काफी देर तक चली चर्चा के बाद दोनों पक्ष शादी टालने पर राजी हो गए। मेहमानों को भोजन की अनुमति दी गई परिजनों ने बताया कि शादी की तैयारी में खर्च हो चुका है। निमंत्रण भी बंट चुके हैं। ऐसे में मेहमानों को खाली नहीं लौटाया जा सकता। इस पर प्रशासन ने उन्हें केवल भोजन कराने की अनुमति दी। टीम ने साफ किया है कि 19 अप्रैल को शादी के दिन दोनों परिवारों पर नजर रखी जाएगी। शपथ पत्र देने के बावजूद यदि बाल विवाह करने की कोशिश हुई तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले में चल रहा विशेष अभियान जिले में बाल विवाह रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शिकायत मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर उम्र का सत्यापन करती है। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है। मामले में कलेक्टर ने शुक्रवार को प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया है। दूसरा मामला: दुल्हन 18 की, दूल्हा 13 साल का इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र के संजय नगर में भी बाल विवाह रुकवाने का मामला सामने आया है। यहां दुल्हन की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी, लेकिन दूल्हा सिर्फ 13 वर्ष का था। शिकायत मिलते ही दल मौके पर पहुंचा और दस्तावेजों की जांच के बाद विवाह रुकवाया। पूछताछ में पहले परिजनों ने विवाह से इनकार कर दिया था। मौके पर विवाह की तैयारियां स्पष्ट दिख रही थीं। 19 अप्रैल को विवाह प्रस्तावित था। फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी महेंद्र पाठक ने बताया कि हमें बाल विवाह की सूचना मिली थी। शुक्रवार को हल्दी का कार्यक्रम था। मौके पर पहुंचे और परिजन को समझाया। समझाइश पर वे मान गए, लेकिन उनका कहना था कि शादी के कार्ड बंट चुके हैं। ऐसे में हमने अक्षय तृतीया के दिन मेहमानों को भोजन कराने की अनुमति दी है। साथ ही जब तक लड़की बालिग नहीं हो जाती है, वह हर रोज आंगनबाड़ी में जाकर हाजिरी दर्ज कराएगी। कन्यादान योजना के तहत होगा विवाह जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंह ने बताया कि जिन बालक-बालिकाओं के विवाह कम उम्र के कारण निरस्त कराए गए हैं, बालिग होने पर परिवार की इच्छा अनुसार शासन की कन्यादान योजना के तहत उनके विवाह कराए जाएंगे। इस योजना में परिवार को आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

सीएम डॉ. मोहन का कांग्रेस पर कड़ा प्रहार: महिला सशक्तिकरण बिल न पास होने पर जनता को मिलेगा जवाब

भोपाल  लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीतिक विरोध अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस बीच, सरकार को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और मामला अब देश की जनता, खासकर महिला मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।  महिला आरक्षण बिल गिरने पर सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पारित न होने को लेकर कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस की “महिला विरोधी मानसिकता” एक बार फिर उजागर हो गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में गिरने देना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. डॉ. यादव ने अपने बयान में कहा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों और सम्मान के प्रति विपक्ष की असंवेदनशीलता को दिखाता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे विषय पर राजनीति करना उचित नहीं है।  इस मुद्दे पर राजनीति उचित नहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों व सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर इस तरह की राजनीति उचित नहीं है. उन्होंने लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब अवश्य देगी।  “जनता सब देख रही है” : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी. उनके अनुसार, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर किसी तरह की चालबाजी लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।  लोकसभा में गिरी महिला आरक्षण से जुड़ी संशोधन प्रक्रिया लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं दिला सकी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि मत विभाजन के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत पूरे न होने के कारण यह विधेयक विचार के स्तर पर ही गिर गया. अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में हासिल नहीं हो सका।  अन्य विधेयकों पर भी नहीं बढ़ी कार्यवाही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में बताया कि महिला आरक्षण से जुड़े बिल के गिरने के बाद दो अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी. विपक्ष के विरोध के बाद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मत विभाजन के जरिए मतदान कराया गया, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही।  अमित शाह का विपक्ष पर तीखा वार इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष, खासकर कांग्रेस और इंडिया महागठबंधन पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस ने जो प्रस्ताव रखा, वह एक सुनियोजित जाल है, जिससे महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए।  अमित शाह ने कहा कि अगर विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में वोट नहीं देता है तो यह बिल गिर जाएगा, और देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता और इसके बावजूद इंडिया महागठबंधन तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मुस्लिम आरक्षण की मांग कर रहा है।  सियासी संग्राम तेज, महिलाओं की निगाहें संसद पर महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. जहां सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर दोष मढ़ रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण को लेकर दलों के रुख और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह मुद्दा संसद से बाहर जनता, खासकर देश की महिलाओं के बीच अहम राजनीतिक बहस बनता जा रहा है। 

सिंगरौली: बैंक में 15 करोड़ की डकैती, आरोपियों की तस्वीरें सामने आईं, DGP ने लिया हालात का जायजा

सिंगरौली  सिंगरौली में दिनदहाड़े बैंक डकैती की बड़ी वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हथियारों से लैश पांच बदमाश घुसे, फायरिंग की और करीब 15 करोड़ का सोना और 20 लाख रुपए कैश लेकर फरार हो गए। वारदात के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीजीपी खुद सिंगरौली पहुंचे और मामले की जांच की। बैंक मैनेजर को पीटा और फायरिंग से फैलाई दहशत  जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे पांच हथियारबंद बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में बैंक में घुसकर डकैती को अंजाम दिया। बदमाशों ने बैंक में घुसते ही कर्मचारियों और ग्राहकों पर बंदूक तान दी। विरोध करने पर बैंक मैनेजर से मारपीट की और फायरिंग कर दहशत फैला दी।  ग्राहकों के करीब 10 किलो सोना लूटा इसके बाद कुछ ही मिनटों में बदमाश बैंक के अंदर रखे लॉकर तक पहुंच गए और वहां गिरवी रखे ग्राहकों के करीब 9 से 10 किलो सोने को अपने कब्जे में ले लिया। इसके साथ ही 20 लाख रुपये कैश भी लूट लिया। बताया जा रहा है कि लूटा गया सोना ग्राहकों का था, जिसे बैंक ने गोल्ड लोन के तहत गिरवी रखा था। पूरा सोना एक ही लॉकर में रखा गया था। बदमाश अपने साथ पिट्ठू बैग और बड़ा कपड़े का थैला लेकर आए थे और उसी में सारा माल भरकर फरार हो गए।  मैनेजर से मारपीट, हवाई फायरिंग से मची दहशत बदमाशों ने बैंक पर कब्जा करते ही दहशत फैलाने के लिए आक्रामक रुख अपनाया. जब बैंक मैनेजर ने लुटेरों का विरोध करने की कोशिश की तो आरोपियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की. पुलिस के अनुसार मैनेजर के सिर पर बंदूक की बट से वार किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बाद बदमाशों ने बैंक के अंदर और बाहर हवाई फायरिंग भी की, जिससे मौके पर मौजूद लोग सहम गए और जान बचाने के लिए जमीन पर लेट गए।  लॉकर तोड़कर सोना‑कैश समेटा डकैत सीधे बैंक के लॉकर सेक्शन की ओर बढ़े. बताया जा रहा है कि बदमाश पूरी योजना के साथ आए थे. उनके पास पिट्ठू बैग और कपड़े के बड़े थैले थे. बदमाशों ने बैंक स्टाफ को धमकाकर लॉकर खुलवाए और उसमें रखे ग्राहकों के सोने-चांदी के जेवर निकाल लिए. यह सोना गोल्ड लोन के तहत ग्राहकों द्वारा गिरवी रखा गया था. इसके साथ ही बदमाशों ने कैश काउंटर से नकदी भी समेट ली।   बैंक में जान बचाते नजर आए लोग घटना के दौरान बैंक के अंदर अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते नजर आए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पूरे इलाके की घेराबंदी की गई। आरोपियों की तस्वीरें सीसीटीवी में कैद हो गई हैं। पुलिस अलग-अलग टीम बनाकर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।   देर रात डीजीपी भी मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री के निर्देश पर रात करीब 10 बजकर 45 मिनट पर डीजीपी कैलाश मकवाना सिंगरौली पहुंचे। इससे पहले रीवा रेंज के आईजी साकेत प्रसाद पांडे भी मौके पर पहुंचे। रीवा से फोरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।  पुलिस ने की पूरे जिले की घेराबंदी वारदात की खबर मिलते ही सिंगरौली एसपी मनीष खत्री दलबल के साथ खुद मौके पर पहुंचे। शहर के सभी एग्जिट पॉइंट्स को सील कर दिया गया है। बैंक और आसपास के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। एसपी ने बताया कि करीब 14.50 लाख रुपए कल के रखे थे। बाकी आज का उस समय तक का कलेक्शन था। इसके अलावा सोना-चांदी था। गार्ड नहीं था, एक फायर किया एसपी के मुताबिक, घटना के समय यहां गार्ड नहीं था। बदमाशों ने एक फायर भी किया है। प्रत्यक्षदर्शियों और बैंक कर्मचारियों के बयान लिए जाएंगे। जांच में पता चला है कि एक शख्स ने हेलमेट पहना था। बाकी चार के चेहरे खुले थे। सामने आया सीसीटीवी फुटेज बैंक के सामने स्थित एक दुकान का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें तीन आरोपी बैंक से निकलते हुए नजर आ रहे हैं। फुटेज में एक लुटेरा पहले बैंक के अंदर से निकलता है। सामने खड़ी एक बाइक पर वह इंतजार करता है। उसके बाद अंदर से दो लोग एक झोला हाथ में लेकर भागते हुए बैंक से निकलते हैं।

प्रोत्यूष बालापुरे ने 10वीं CBSE बोर्ड में हासिल किए 99% अंक, स्व-अध्ययन और दृढ़ संकल्प से रचा कीर्तिमान

सिवनी मालवा प्रोत्यूष बालापुरे (कक्षा 10वीं, CBSE) ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए हैं। जिस के लिए उनके सागर पब्लिक स्कूल भोपाल ने उन्हें 135000.00  छात्रवत्ति भी प्रदान की है।  इस उपलब्धि के पीछे छात्र का दृढ़ संकल्प, स्व-अध्ययन तथा परिवार और शिक्षकों का सहयोग प्रमुख रहा। छात्र के पिता डॉ. सतीश बालापुरे, शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा में पदस्थ हैं, जबकि माता सुमना बालापुरे मत्स्य विभाग में क्षेत्रीय प्रबंधक, भोपाल  के रूप में कार्यरत हैं। छात्र ने बताया कि उसने 10वीं कक्षा की शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि उसे बोर्ड परीक्षा में 99% अंक प्राप्त करने हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने अपने नाम के साथ सभी विषयों में पूरे अंक लिखकर कई स्टिकी नोट्स बनाए और उन्हें अपने PC, स्टडी टेबल, ड्रेसिंग मिरर, यहाँ तक कि अपनी पानी की बोतल पर भी चिपका दिया। सिलेबस की शुरुआत अच्छी रही, जिसका पूरा श्रेय शिक्षकों को जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्र ने क्विज़ और एलोक्यूशन जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी अन्य क्षमताओं को भी निखारा। छात्र के अनुसार, उसके शिक्षक अत्यंत सहयोगी रहे और किसी भी कॉन्सेप्ट में कठिनाई होने पर उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान की। पूरे वर्ष छात्र ने स्व-अध्ययन जारी रखा, हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव भी आए। प्री-बोर्ड 1 में अपेक्षित अंक नहीं मिलने पर छात्र ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने कमजोर पक्षों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। परीक्षाओं से पहले छात्र ने अपने सीनियर्स से पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र (PYQs) और तैयारी सामग्री एकत्र की, जिससे उसे CBSE के प्रश्नों के पैटर्न को समझने में सहायता मिली। प्रत्येक PYQ पर उसने स्वयं नोट्स तैयार किए, जिसमें प्राप्त अंक, गलतियाँ और सुधार के बिंदु शामिल थे। अंतिम दो महीनों में छात्र ने पूरी तरह से PYQs पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। विशेष रूप से उत्तर लेखन और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर कार्य किया गया। हाल ही में घोषित परिणाम में छात्र ने 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए। इस सफलता में माता-पिता, दादी, चाचा, बड़े पापा   का महत्वपूर्ण योगदान रहा। छात्र के अनुसार, कठिन समय में माता-पिता ने उसे प्रेरित किया और उसका हौसला बढ़ाया। माता ने विभिन्न स्थानों से अध्ययन सामग्री जुटाकर सहायता की, जबकि पिता ने कठिन वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझाया। बहन श्रुष्टि एवं  देव्यानी  ने भी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा पिछले 10 वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अभ्यास करने से छात्र को उत्तर लेखन शैली और समय प्रबंधन में विशेष लाभ मिला। छात्र ने आगे की पढ़ाई के लिए कॉमर्स विषय का चयन किया है और उसका लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सलाहकार बनना है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत है।

डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा: जनकल्याण कार्यों में तेजी लाकर गांवों में करें रात्रि विश्राम

जनकल्याण के कामों में तेज़ी लायें, निरीक्षण करें, गांवों में करें रात्रि विश्राम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव छोटे किसानों का गेहूं उपार्जन पहले करायें, उपार्जन केन्द्रों में हों सभी जरूरी सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ वीसी से की विभिन्न अभियानों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय से प्रदेश में चलाये जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान, पूर्ण हो चुके संकल्प से समाधान अभियान और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर समुचित दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागीय अधिकारियों एवं कलेक्टर्स से कहा कि प्रदेश और समाज की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा विभिन्न अभियानों के माध्यम से महती प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार के इन सभी प्रयासों एवं अभियानों में जन जुड़ाव एवं सहभागिता बेहद जरूरी है। इन सभी अभियानों की सार्थकता और सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब इनमें अधिकाधिक जनसहयोग एवं जन भागीदारी भी हो। इसके लिए सभी समर्पित और फोकस्ड होकर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे जनता के कल्याण के कामों को तेजी से पूर्ण करायें। सरकार की योजनाओं का फील्ड में पूर्णतया क्षमता और दक्षता के साथ व्यापक स्तर पर सुचारु एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर, उनकी जरुरतों और सुझावों पर अमल करते हुए जनोन्मुखी प्रशासन से खुद की और सरकार की साख बढ़ायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स लगातार जिले में भ्रमण करें, लोगों से चर्चा करें, उनकी समस्या सुनकर समाधान करें और गांवों में रात्रि विश्राम करें, इससे सरकारी योजनाओं का मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च तक 2026 तक "संकल्प से समाधान अभियान" चलाया गया। इस अभियान से सरकार की 106 प्रकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता और जरुरतमंदों तक पहुंचाया गया। सभी कलेक्टर्स इस अभियान के मूल लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हमेशा क्रियाशील रहें और जनता को अधिकतम लाभ दिलायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ हुआ है। यह 30 जून 2026 तक चलेगा। विगत 2 सालों में अभियान के अंतर्गत हुए जल संचयन के कार्यों से यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बन चुका है। अब आवश्यकता है कि इस साल भी जल संरक्षण और सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के भरसक प्रयास किये जायें। गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चल रही गेहूं उपार्जन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि छोटे किसानों का गेहूं पहले खरीदा जाये। उन्हें समय पर भुगतान भी करायें। सभी कलेक्टर्स गेहूं उपार्जन केन्द्रों का सघन निरीक्षण करें और यह देखें कि खरीदी केंद्र पर समुचित छाया-पानी, बारदाना, तेज गर्मी के चलते ओआरएस घोल, पावडर आदि सभी जरूरी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहें। किसानों को किसी भी तरह की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत परेशानी नही हो। अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया निर्बाध रूप में से जारी है।अब तक 1 लाख 13 हज़ार से अधिक किसानों से 4 लाख 96 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इन किसानों को करीब 355 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ऐसा पहली बार हुआ है कि पहले दिन तुलाई वाले किसानों को दूसरे दिन ही भुगतान भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय विकास एवं प्रशासन विभाग से कहा कि वे अपने विभागीय स्वच्छता अभियान को जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ लें। जनसहयोग से जगह-जगह पर प्याऊ लगवायें। इनकी साफ़-सफाई पर भी विशेष ध्यान दें।तकनीक से जुड़कर नवाचार भी करें। सांदीपनि विद्यालयों में करें रैन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के कारण बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट में आये उल्लेखनीय परिणामों को राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आई गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों को लेकर अभिभावकों की धारणा इस कदर परिवर्तित हुई है कि वे अपने बच्चों के दाखिले निजी विद्यालयों से निकालकर शासकीय सांदीपनि विद्यालयों में भर्ती करा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवायें। जून में जब स्कूल पुनः खुलेंगे, तब अधिकाधिक लोगों को सांदीपनि विद्यालयों का अवलोकन करायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बड़ी उपलब्धि है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण हमारा स्कूल ड्रॉप आउट रेशियो जीरो हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी बड़े धार्मिक स्थलों पर कम से कम 50 बेडेड हास्पिटल होने चाहिए। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में बर्न यूनिट्स स्थापित की जाये। ग्रीष्मकालीन स्थायी निर्देशों (मेडिकल प्रोटोकॉल्स) का कढ़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी अस्पतालों में जरूरी दवाएं उपलब्ध रहें। सभी कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी पूरी कर लें। पेयजल आपूर्ति में न रहे कोई कमी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाएं ताकि ग्रीष्मकाल में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था हर हाल में निर्बाध रहे। आवश्यकतानुसार टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जाये। पेयजल संरचनाओं के संरक्षण एवं संधारण पर विशेष ध्यान दें। किसी को भी पेयजल संबंधी परेशानी न होने पाये। ज्ञान भारतम ऐप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक "ज्ञान भारतम ऐप" तैयार किया गया है। कोई भी नागरिक पुरानी साहित्यिक या धार्मिक पांडुलिपियों को इस ऐप में अपलोड कर सकता है। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि 17 अप्रैल 26 तक इस ऐप में साढ़े 6 लाख से अधिक पांडुलिपियां अपलोड की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को इस विषय के … Read more