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अभी तक 4.61 लाख किसानों द्वारा 1 करोड़ 96 लाख 92 हजार क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक : मंत्री राजपूत

136237 किसानों से 59 लाख 48 हजार 980 क्विंटल गेहूँ उपार्जित भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक एक लाख 36 हज़ार 237 किसानों से 59 लाख 48 हजार 980 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 575 करोड़ 86 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। अभी तक 4 लाख 61 हजार 271 किसानों द्वारा 1 करोड़ 96 लाख 92 हजार 550 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसान गेहूँ बिक्रय के लिये 30 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। सेटेलाइट ई-मेल में मिलान नहीं पाए गए खसरों को छोड़कर उसी किसान के शेष खसरों पर गेहूँ की फसल विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूँ में से 45 लाख 92 हजार 610 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

अनूपपुर में ट्रांसमिशन लाइनों के समीप निर्माण बना जानलेवा खतरा

ट्रांसको ने चलाया विशेष जागरूकता एवं कार्रवाई अभियान भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा अनूपपुर जिले में एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास हो रहे खतरनाक एवं अवैध निर्माणों के विरुद्ध सख्त अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल ऐसे निर्माणों को हटाना है, बल्कि नागरिकों को यह स्पष्ट रूप से समझाना भी है कि ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किया गया निर्माण सीधे जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारीडोर जरूरी नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है। घरेलू बिजली से 600 से 950 गुना घातक विद्युत प्रभाव होती है इन ट्रांसमिशन लाइनों में ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक अदृश्य खतरे के साए में रहने जैसा है। अनूपपुर क्षेत्र में दो दर्जन निर्माण खतरनाक जद में अनूपपुर और कोतमा क्षेत्र में अब तक 23 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। अभी हटाए जा चुके हैं चार निर्माण एम.पी. ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता आर.एस. पांडे एवं कार्यपालन अभियंता ए.पी.एस. चौहान के निर्देशन में शहडोल टीएलएम टीम द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। क्षेत्र में रेलवे को आपूर्ति करने वाली 220 केवी ट्रैक्शन -ट्रांसमिशन लाइन के नजदीक बने निर्माण सहित चार ऐसे निर्माणों को हटाया जा चुका है जो मानव जीवन के लिए खतरा हो सकते थे। सहायक अभियंता जगदीश असाटी द्वारा स्थानीय प्रशासन की मदद से पब्लिक एड्रेस सिस्टम, व्यक्तिगत संपर्क और नोटिस के माध्यम से लोगों को समझाया जा रहा है कि थोड़ी सी लापरवाही, बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऊर्जा मंत्री की अपील ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें। सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही जीवन की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।  

विश्वास सारंग का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

वार्ड 68 में 1 करोड़ 37 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया भोपाल गोविंदपुरा क्षेत्र के विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वार्ड 68 में 1.37 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण के दौरान मंत्री ने निर्माण कार्य में देरी और अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने और टेंडर निरस्त करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने वार्ड 68 अयोध्या नगर में परशुराम चौराहे से जोन कार्यालय मंगल भवन तक पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य का भूमिपूजन किया , जिसकी लागत 26 लाख रुपए है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए ठेकेदार मेसर्स वैभव सक्सेना को निर्माण कार्य में लापरवाही पर कमिश्नर से शिकायत और टेंडर रद्द करने के आदेश मौजूद अधिकारियों को दिए। वार्ड 68 में 4 लाख रुपए की लागत से एल सेक्टर पार्क में पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य, प्लेग्राउंड इक्यूपमेंट्स एवं ओपन जीप इक्विपमेंट लगाने के निर्माण कार्य और 10 लाख की लागत से जी सेक्टर में बाबूलाल गौर पार्क में बाउंड्री वॉल व पाथवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने गीत बंगलो फेस 4 में लगभग 7 लाख की लागत से बनने वाली आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया और एम सेक्टर में कम्युनिटी हॉल के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 4 लाख रुपए है। राज्यमंत्री ने अयोध्या नगर मारुति विहार के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 3 लाख रुपए आएगी। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 में कम्यूनिटी हाल की बाउंड्री वाल का काम 10 लाख की लागत से किया जाएगा। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 2 में सीवेज कार्य का भूमिपूजन भी किया गया, जिसकी लागत 31 लाख रुपए है। सुख सागर फेस-1 में 4 लाख रुपये की लागत से कम्यूनिटी हाल का निर्माण कार्य भी किया जाएगा और भवानी केम्पस में शेड लगाने का कार्य लगभग 2 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। उन्होंने अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 के रहवासियों के लिए लोकार्पण कर सामुदायिक भवन की सौगात दी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से चर्चा की और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी निर्देशित किया। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती उर्मिला मौर्य, श्रीमती शिरोमणी शर्मा, श्री लवकुश यादव, श्री भीकम सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।  

भिंड में तापमान 43.1 डिग्री के पार, लू से हड़कंप—स्वास्थ्य विभाग ने दी चेतावनी

भिंड अप्रैल माह में पहली बार शनिवार को गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाए। अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी 27.2 डिग्री दर्ज किया गया। तेज धूप और गर्म हवाओं ने शहरवासियों को दिनभर परेशान किया। हालात यह रहे कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा छा गया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। लू के थपेड़ों से सड़कें सूनी रहीं और दोपहर में लोग घरों में कैद रहे। गर्म हवाओं का बढ़ा असर मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को आर्द्रता 27 प्रतिशत रही, जबकि हवाएं करीब 4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। इससे पहले गुरुवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, लेकिन शनिवार को पारा और चढ़ गया। सुबह 9 बजे के बाद ही गर्म हवाओं का असर शुरू हो गया, जो दोपहर 2 बजे के बाद और तेज हो गया। गर्मी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हुई। बिना मुंह ढके बाहर निकलना मुश्किल हो गया। लोग सिर और चेहरे को कपड़े से ढककर ही बाहर निकले। बाजारों में भी दोपहर के समय भीड़ काफी कम दिखाई दी। वायरल और मलेरिया का बढ़ा खतरा मौसम में बदलाव के साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। इन दिनों अस्पतालों में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में मलेरिया का खतरा भी अधिक रहता है, जो अन्य संक्रमणों के कारण शरीर को प्रभावित कर सकता है। डाक्टरों ने सलाह दी है कि तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाव बेहद जरूरी है। घर से बाहर निकलते समय मुंह और कान ढककर रखें तथा दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त पानी पिएं और स्वच्छता का ध्यान रखें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें और तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर की सलाह तापमान बढ़ने से वायरल और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों को धूप से बचाव करना चाहिए और स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। – डा. आरएन राजौरिया, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल भिंड

एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेंस को मिला सशक्त आधार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

56 विभागों की 1700 सेवाएँ एक ही पोर्टल पर उपलब्ध सेवा वितरण प्रणाली हुई अधिक जवाबदेह एवं सुव्यवस्थित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ के माध्यम से प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त आधार मिला है। इससे नागरिक सेवाएँ अब अधिक सरल, सुगम और सुलभ हुई हैं। डिजिटल तकनीक आज सुशासन की आधारशिला बन चुकी है और प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश में नई पहचान स्थापित कर रहा है। अब प्रदेशवासियों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ सहज, त्वरित और पारदर्शी रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से सेवा वितरण प्रणाली अधिक जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनी है। साथ ही नागरिकों के समय एवं संसाधनों की बचत सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत नागरिक सेवा मंच 56 विभागों की 1700 से अधिक सरकारी सेवाओं और योजनाओं को एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2026 तक 100 प्रतिशत ई-सेवा डिलीवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म नागरिकों, विभागों एवं सेवाओं को एकीकृत डिजिटल इको-सिस्टम में जोड़ते हुए सुशासन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगा। एकीकृत पोर्टल पर सभी सेवाएँ: प्रक्रिया हुई सरल एमपी ई-सेवा पोर्टल पर विभिन्न विभागों की 1700 सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल पर जाने और दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता समाप्त की गई है। नागरिक अब eseva.mp.gov.in और मोबाइल ऐप के माध्यम से पात्रता जांच, आवेदन, स्टेटस ट्रैकिंग और अनुमोदन जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस बनाई गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। समग्र पोर्टल से एकीकरण: ऑटो-वेरिफिकेशन की सुविधा ‘एमपी ई-सेवा’ को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के समग्र पोर्टल से जोड़ा गया है। प्रत्येक परिवार को 8 अंकीय परिवार आईडी और हर सदस्य को 9 अंकीय सदस्य आईडी दी गई है। इससे ऑटो-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को सक्षम बनाया गया है। इससे पात्रता निर्धारण स्वतः हो जाता है और अनावश्यक देरी व दोहराव समाप्त होता है। पोर्टल की प्रमुख विशेषता ‘ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स’ है, जिससे नागरिकों को बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती।एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज आगे की सेवाओं में स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं। सुगम, सुरक्षित एवं नागरिक केंद्रित ‘ऐप-डिज़ाइन’ एमपी ई-सेवा पोर्टल को मोबाइल-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया है। इसमें बहुभाषीय सुविधा के साथ दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष डिज़ाइन किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिक आसानी से इसका उपयोग कर सकें। प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक 2 लाख 14 हजार से अधिक ट्रांसेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 3 हजार 446 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 1 लाख 64 हजार 600 से अधिक ट्रैक/डाउनलोड गतिविधियाँ और 45 हजार 954 समग्र पात्रता जांचें की गई हैं। डिजिटल गवर्नेंस में प्रदेश की सशक्त उपस्थिति राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को 100 प्रतिशत एकीकृत करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।प्रदेश को ‘सायबर तहसील’ के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा ‘संपदा 2.0’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।  

फर्जी आरोप साबित: दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट मामले में महिला को 10 साल की जेल

दतिया दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट में झूठा मामला दर्ज कराने पर महिला को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार 500 रुपये के अर्थदंड की सजा न्यायालय ने सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी ने वैभवी सनोरिया प्रकरण में शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हाल के समय में झूठे प्रकरण दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी बढ़ता है।   मामले के अनुसार, वैभवी सनोरिया ने थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 22 सितंबर 2021 की रात उसका पड़ोसी कालीचरण घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही आरोपित पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच पूरी की और चालान अदालत में पेश किया। विचारण के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया, जब फरियादिया अपने ही बयान से मुकर गई। उसने अदालत में स्वीकार किया कि रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इस खुलासे के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोपित कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही फरियादिया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने के संबंध में कार्रवाई के आदेश दिए गए। अदालत के निर्देश के बाद वैभवी सनोरिया के खिलाफ नया प्रकरण दर्ज किया गया। प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने वैभवी सनोरिया को धारा 182, 195 एवं 211 के तहत दोषी ठहराया। सभी साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अदालत ने आरोपों को प्रमाणित माना और दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई।

बिहार में छापा, महाराष्ट्र बैंक डकैती के आरोपी को गिरफ्तार किया, दूसरा आरोपी भी पकड़ने का सुराग मिला

 सिंगरौली  सिंगरौली में स्थित महाराष्ट्र बैंक में दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज डकैती के मामले में पुलिस ने घटना के 24 घंटे बाद ही एक आरोपी को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि, दूसरे आरोपी के झारखंड में छिपे होने की जानकारी मिली है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग – अलग टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसके कब्जे से 14 लाख रुपए कैश और 70 लाख रुपए का सोना बरामद कर लिया है। पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। बिहार से धराया एक बदमाश आपको बता दें कि, डकैती की इस सनसनीखेज वारदात में कुल पांच बदमाश शामिल थे। इनमें से अब तक एक ही आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ सका है। बाकी चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। 10 विशेष टीमें तलाश में जुटीं घटना की गंभीरता को देखते हुए डजीपी कैलाश मकवाना और पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में करीब 10 विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग राज्यों में जाकर आरोपियों की तलाश कर रही हैं। साथ ही, तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भी आरोपियों के मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। 50-50 हजार का इनाम घोषित पुलिस ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान वारदात की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है। कट्टे की नोक पर की थी बैंक में डकैती गौरतलब है कि, बीते शुक्रवार की दोपहर नकाबपोश बदमाशों ने कट्टे की नोक पर बैंक में घुसकर डकैती को अंजाम दिया था। वारदात के दौरान बदमाशों ने दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की थी। घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं व्यापारी और आमजन सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि, मामले का जल्द खुलासा कर सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। पुलिस बोली- आमलोग मदद के लिए आगे आएं बदमाश पिट्ठू बैग और एक बड़े थैले में सारा माल भरकर ले गए। घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लेते हुए। डीजीपी कैलाश मकवाना और रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। वहीं, आम लोगों से बदमाशों को तलाशने में मदद करने की अपील भी की गई है। इस तरह दिया गया वारदात को अंजाम आपको बता दें कि, शुक्रवार को सिंगरौली जिले के बैढन में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में पहले दो बदमाश घुसे। बदमाशों ने बंदूक लहराते हुए सबसे पहले बैंक कर्मचारियों और मौजूद ग्राहकों को बंधक बनाया। इतने में बदमाशों के तीन अन्य साथी भी हथियार लहराते हुए बैंक में पहुंच गए। बंदूक के दम पर पूरे बैंक को हाईजेक कर बैंक कर्मचारी से कैश और लाकर की चाबी ले ली। 15 करोड़ रुपए आंकी जा रही डकैती की कीमत आरोप है कि, बैंक कर्मियों के विरोध करने पर बदमाशों ने उनके साथ मारपीट भी की थी। इस दौरान बैंक में मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। डीजीपी ने बताया कि, दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपी बैंक से करीब 6 किलो सोना और लगभग 20 लाख रुपए की डकैती करके फरार हुए हैं। बता जा रहा है कि, बैंक से लूटा गया पूरा सोना ग्राहकों का है, जिसे बैंक द्वारा गिरवी रखा गया था। सोने मौजूदा कीमत ही 15 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। पुलिस बोली- आमलोग मदद के लिए आगे आएं बदमाश पिट्ठू बैग और एक बड़े थैले में सारा माल भरकर ले गए। घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लेते हुए। डीजीपी कैलाश मकवाना और रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। वहीं, आम लोगों से बदमाशों को तलाशने में मदद करने की अपील भी की गई है।

मध्यप्रदेश को साधना सप्ताह में अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने पर मिला राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान

साधना सप्ताह में मप्र को अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान राज्य में जनजातीय कार्य व‍िभाग प्रथम स्थान पर नये व‍िषयों, एआई आधार‍ित पाठयक्रमों में लोकसेवकों ने द‍िखाई व‍िशेष रूच‍ि भोपाल  भारत सरकार द्वारा म‍िशन कर्मयोगी के अंतर्गत लोक सेवकों के ल‍िए संचाल‍ित ऑनलाइन प्रश‍िक्षण एवं क्षमता न‍िर्माण के ल‍िये चलाये गये साधना सप्ताह में मध्यप्रदेश को आईगाट पोर्टल पर अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने के ल‍िए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान म‍िला है। साधना सप्ताह गत दो अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलाया गया था। राष्ट्रव्यापी साधना सप्ताह में व‍िभ‍िन्न पाठयक्रमों में पंजीयन करने वाले लोक सेवकों की संख्या 9 लाख 49 हजार 215 रही। एक घण्टे के कोर्स पूरा करने वाले प्रदेश के लोक सेवकों की संख्या 3 लाख 12 हजार 662 रही। चार घंटे के कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 2 लाख 25 हजार 700 और कम से कम एक एआई कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 1 लाख 85 हजार 562 रही। साधना सप्ताह के दौरान कर्मयोगी उत्कर्ष बैच 855 को म‍िला जबक‍ि 92,432 को एआई दक्ष बैच म‍िला। केन्द्रीय कार्म‍िक मंत्री डॉ. ज‍ितेन्द्र सिंह ने नई द‍िल्ली में गत द‍िवस गर‍िमापूर्ण समारोह में मप्र को सम्मान‍ित क‍िया। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महान‍िदेशक सच‍िन स‍िन्हा ने पुरस्कार ग्रहण क‍िया। उन्होने व‍िभागों के लोक सेवकों को न‍िरंतर मार्गदर्शन द‍िया और व‍िभागों में न‍िरंतर समन्वय बनाये रखा। अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने बताया क‍ि अकादम‍िक स्टाफ और व‍िभागों के सहयोग से प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान म‍िला है। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी को व‍िभागों के ल‍िए एआई आधार‍ित क्षमता न‍िर्माण कार्ययोजनाएं बनाने में उल्लेखनीय योगदान के ल‍िये पुरस्कृत क‍िया गया। राज्य स्तर पर जनजातीय कार्य व‍िभाग द्वारा 10 हजार से ज्यादा लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर व‍िजय शाह ने व‍िभाग के सभी अध‍िकार‍ियों-कर्मचार‍ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होने कहा क‍ि प्रश‍िक्षण एक न‍िरंतर प्रक्र‍िया है। लोकह‍ित के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने के ल‍िए कार्यदक्षता अन‍िवार्य है। साधना सप्ताह में क्या हुआ साधना सप्‍ताह का उद्देश्य शासकीय सेवकों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्‍यम से शासकीय तंत्र में सुदृढ़ता सुनिश्चित करना था। प्रशिक्षण की विभिन्‍न प्रणालियों को अपनाने और iGoT कर्मयोगी पर उपलब्‍ध पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए लोक सेवकों को प्रेरित क‍िया गया। साधना सप्ताह का ढांचा तीन प्रमुख सूत्रों पर केंद्रित था — टेक्नोलॉजी, परंपरा और ठोस परिणाम। “साधना सप्ताह’’ के दौरान प्रत्‍येक अधिकारी/कर्मचारी को न्‍यूनतम 05 प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्‍य दिया गया था। प्रत्येक विभाग में 4 से 5 व्यक्तियों का समूह बनाया गया, जिसमें विभागाध्यक्ष, स्थापना एवं तकनीकि शाखाओं से जुड़े अधिकारी थे। संभाग, जिला, विकास खंड एवं प्रत्येक कार्यालय प्रमुख के स्तर पर समूह बनाए गये। साधना सप्‍ताह अतंर्गत विभागों के शासकीय सेवकों/संविदा अधिकारियों/कर्मचारियों को उनके पदों के अनुसार कम से कम 10 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आंवटित किए गए। कम से कम तीन एआई कोर्स पूर्ण करने पर “AI दक्ष बैज” दिया जा रहा है। डिजिटल प्रशिक्षण में आगे मध्यप्रदेश सर्वाधिक डिजिटल प्रशिक्षण iGOT पोर्टल पर कोर्स निर्मित करने वाला पहला राज्य बन गया है और सबसे अधिक लोकसेवकों को iGOT पोर्टल पर पंजीकृत करने वाला तीसरा राज्य है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केन्द्र सरकार द्वारा लोकसेवकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनको नागरिक केन्द्र‍ित होकर कर्मयोगी के रूप में दक्षतापूर्वक अपनी भूमिका निभाने मिशन कर्मयोगी वर्ष 2020 में लागू किया गया था। यह ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने का ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी कहीं भी – कभी भी – किसी भी स्थान से अपनी सुविधानुसार स्व-प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। वे अपनी दक्षता और ज्ञान बढ़ाने अपने विभाग से संबंधित विषयों पर उपलब्ध पाठयक्रमों में प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। इसके अलावा अपनी रूचि अनुसार अन्य विभागों के लिए बने पाठयक्रमों में भी प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। एआई आधार‍ित क्षमता निर्माण कार्ययोजना में अग्रणी क्षमता निर्माण आयोग से मिले इनपुट को शामिल कर बनी क्षमता निर्माण नीति लागू करने में भी मध्यप्रदेश अग्रणी है। सभी विभागों में क्षमता निर्माण इकाइयाँ स्थापित हो गई हैं और प्रशिक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण करने के बाद कैडर-वार क्षमता निर्माण कार्य योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। विभागों में क्षमता निर्माण प्रबंधकों की सेवाएँ लेने का भी प्रावधान है। उन्हें क्षमता निर्माण इकाइयों द्वारा सहयोग दिया जायेगा। क्षमता निर्माण प्रबंधकों द्वारा वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की जाएंगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत मानव संसाधन की दक्षता दर्शाने वाला एक डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिससे माध्यम से मुख्यमंत्री कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति जान सकेंगे।  

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के मुआवजे पर छतरपुर में विरोध, प्रशासन के आश्वासन से खत्म हुआ आंदोलन

छतरपुर  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले 14 गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। मुआवजे और पुनर्वास में अनियमितताओं के आरोपों के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने झुकते हुए दोबारा सर्वे कराने का फैसला लिया है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीमों ने  ही जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन और विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। 7 दिन की डेडलाइन प्रशासन ने इस री-सर्वे को कैंपेन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त टीमों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और नए प्रस्ताव पेश करें। इस कदम का उद्देश्य उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो पहले छूट गए थे और उन अपात्रों को बाहर करना है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: किसी भी पात्र व्यक्ति का हक नहीं छिनना चाहिए और किसी भी अपात्र को सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता के लिए दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की ड्यूटी मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने एक अनूठी पहल की है। री-सर्वे की जिम्मेदारी उन स्थानीय कर्मचारियों को नहीं दी गई है जिन पर पहले पक्षपात के आरोप लगे थे। इसके बजाय, बिजावर सब-डिवीजन और अन्य तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को मैदान में उतारा गया है। ये टीमें स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल और स्कूल रिकॉर्ड के जरिए पात्रता की जांच करेंगी। प्रभावितों के लिए क्या है खास? कुल प्रभावित गांव 14 गांव सर्वे की समय सीमा 7 कार्य दिवस (रिपोर्ट सबमिशन) जांच का आधार वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल, स्कूल रिकॉर्ड टीम का गठन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संयुक्त टीम अतिरिक्त लाभ भूमिहीन परिवारों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाएं

यूथ कांग्रेस नेताओं पर FIR, 25 नामजद; केन-बेतवा लिंक परियोजना आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे थे छतरपुर में

छतरपुर   केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद के मामले में बमीठा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार सहित करीब 50 अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने यह कदम शासकीय कर्मचारियों के साथ अभद्रता और सरकारी काम में बाधा डालने के बाद उठाया है।  वन कर्मचारियों व यूथ कांग्रेस नेताओं के बीच बहस बिजावर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोडन बांध पर उचित मुआवजा को लेकर पिछले 10 दिन से आंदोलन पर बैठे आदिवासी, किसानों, ग्रामीणों से मिलने पहुंचे यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार को वन विभाग के अधिकारियों ने भुसोर गेट के अंदर नही जाने दिया. आरोप है कि इसके बाद यूथ कांग्रेस नेताओं ने भुसोर गेट तोड़कर अधिकारिओ से अभद्रता की. यहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर आने-जाने पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने प्रतिबंध लगाया था।  पुलिस ने वीडियो को बनाया साक्ष्य प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम का वीडियो यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया. इसके बाद पुलिस ने रेंजर की शिकायत पर कार्रवाई की. पुलिस का कहना है कि वीडियो साक्ष्य में प्रदर्शनकारियों द्वारा शासकीय संपत्ति के साथ छेड़छाड़ और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार स्पष्ट दिख रहा है. वहीं, फिलहाल धरना 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है. अगर प्रशासन ने आन्दोलनकारियो की मांगें नही मानी तो फिर आंदोलन होनी की चेतावनी है।  25 लोगों की शिनाख्त, जल्द होगी गिरफ्तारी टीआई बमीठा बाल्मीक चौबे ने बताया "राजेन्द्र कुमार सोलंकी वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा थाना में आवेदन दिया गया. अभिषेक परमार एवं उसके 50 से अधिक लोगों के खिलाफ भुसोर गेट पर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियो के कार्य मे बाधा डालना एवं शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर के मामले में धारा 223,132,191(2),190 बीएनएस 3(1) लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. 20 से 25 लोगों की पहचान कर ली है. सभी की गिरफ्तारी  होगी।  इस मामले में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया का कहना है "गरीब,आदिवासियों और किसानों के साथ हमेशा से यूथ कांग्रेस खड़ी है. उनकी हम लड़ाई लड़ रहे हैं. प्रशासन ने हमारे साथियों को रोकने का काम किया है. हम गरीबों की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।