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उज्जैन के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव, सिंहस्थ के लिए 2,451 करोड़ से पीने के पानी से सीवरेज तक सब होगा चकाचक

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और घाटों का विस्तार करना है। इसके लिए ₹2,698 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जो नदी के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होगी। गंदे पानी से मिलेगी मुक्ति शिप्रा में मिलने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ₹919 करोड़ का क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 30 किलोमीटर लंबी नहर और टनल प्रणाली बनाई जाएगी। इसके अलावा, ₹614 करोड़ के सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के जरिए 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण और विनियमन किया जाएगा, जिससे नदी में जल स्तर बना रहे। 2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बन रहे हैं नए घाट आगामी सिंहस्थ और प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। ₹778 करोड़ की लागत से 29.21 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जाएंगे। वहीं, पुराने 9 किलोमीटर के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि भीड़ के दिनों में एक साथ 2.5 करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। मेडिकल कॉलेज और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तोहफा केवल नदी ही नहीं, बल्कि शहर के ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है: स्वास्थ्य: ₹592 करोड़ की लागत से 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनेगा। पर्यटन और व्यापार: ₹284 करोड़ से यूनिटी मॉल और पर्यटन सर्किट, उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू का विकास। शहरी सुविधाएं: ₹2,451 करोड़ पेयजल, सीवरेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए। इसमें 250 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट और 700 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।

13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी होंगे IAS, सूची जारी; गैर-राप्रसे अधिकारियों के लिए निराशा

भोपाल  मध्य प्रदेश में बहुत जल्द राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारियों को एक बड़ी सौगात मिल सकती है। दरअसल मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत करने के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है और आने वाले समय में इन अधिकारियो को ये तोहफा मिल सकता है। 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को IAS पद पर पदोन्नति मिलने के आसार दरअसल मध्य प्रदेश में जल्द ही 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नति मिल सकती है लेकिन इस बार भी गैर-राप्रसे अधिकारियों को मायूसी ही मिलेगी। दरअसल गैर-राप्रसे अधिकारियों को इस बार भी मौका नहीं मिलने की खबर है। जिससे  इस  मामले का काफी चर्चा हो रही है । राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति देने के लिए जल्द ही विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित होगी, जिसमें 13 पदों पर चयन किया जाएगा लेकिन इसमें Non-SAS अधिकारियों को पदोन्नति का मौका नहीं मिलेगा। राप्रसे संघ (SAS)  के विरोध के चलते Non-SAS अधिकारियों प्रक्रिया से बाहर दरअसल राप्रसे संघ के विरोध के चलते यह प्रक्रिया केवल SAS अधिकारियों तक ही सीमित हो गई है। जानकारी के अनुसार, 13 पदों के लिए कुल 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।  इसी आधार पर सूची को तैयार करके आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। इन 39 नामों में से 13 नामों पर लगेगी मुहर IAS अवार्ड के लिए होने वाली DPC में जिन 39 नामों पर विचान मंथन होगा वो इस तरह से हैं.. इच्छित गढ़पाले, जयेंद्र कुमार विजयावत, डॉ. अभय सिंह खरारी, रजनीश कसेरा, एकता जायसवाल, हृदयेश कुमार श्रीवास्तव, लता शरणागत, महीप किशोर तेजस्वी, मिलिंद कुमार नागदेवे, राज कुमार खत्री, कृष्ण कुमार रावत, प्रियंका गोयल, अभिषेक दुबे, नरोत्तम प्रसाद भार्गव, निधि सिंह राजपूत, निमिषा जायसवाल, संदीप कुमार सोनी, रिंकिश कुमार वैश्य, माया अवस्थी, भूपेंद्र कुमार गोयल, मनोज मालवीय, कमल चंद्र नगर, मिनिषा पांडेय, इला तिवारी, सपना एम. लोवंशी, नीता राठौर, शैलेंद्र सिंह सोलंकी, रानी पासी, रंजना देवड़ा, माधवी नागेंद्र, वर्षा सोलंकी,विवेक कुमार रघुवंशी, प्रदीप जैन, अखिलेश कुमार जैन, विशाल चौहान, मेहताब सिंह गुर्जर, अतेंद्र सिंह गुर्जर सुरभि तिवारी और वंदना मेहरा है।  लिहाजा GAD  ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अब नजरें DPC बैठक पर टिकी हैं। इसमें ही 39 नामों में से 13 अधिकारियों को IAS बनने का अवसर मिलेगा। इस बार भी गैर-राप्रसे अधिकारियों को दिल छोटा करके रहना पड़ेगा।

चंदेरी में हवाई सेवा की शुरुआत, बॉलीवुड सिटी को मिलेगा नया कनेक्टिविटी तो सीएम की बड़ी सौगात

चंदेरी पर्यटन के नए युग की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में अंतरराज्यीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मप्र टूरिज्म बोर्ड द्वारा निजी संस्था जेट सर्व एविएशन के सहयोग से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन किया जा रहा है।  चंदेरी में आज से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो सकती है। दरअसल यह सेवा पूर्व में 12 फरवरी से शुरू होनी थी, लेकिन कुछ कारणवश यह शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद एक बार फिर 19 अप्रेल से इसे शुरू किया जाना प्रस्तावित है। चंदेरी बन चुकी है बॉलीवुड नगरी चंदेरी में आने वाले पर्यटको और यहां होने वाली फिल्मों की शूटिंग के लिए बड़े बडे शहरों से कलाकार आते हैं। साथ ही विदेशा सैलानी भी यहां पहुंचते हैं। ऐसे में अभी तक उनके पास दो ही मार्ग थे,जिसमें ट्रेन का मार्ग ललितपुर जो युपी में आता है वहां से सुगम था। वहीं सड़क मार्ग। ऐसे में पीएमश्री हेलीकॉप्टर सेवा से यहां आने वाले सैलानियों को सुविधा होगी। वहीं ओरछा तक के लिए यह सेवा रहेगी,जिसमें जिलेवासी भी सफर कर सकते हैं। कल से शुरू होगी सेवा मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निजी संस्थानों के सहयोग से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत 19 अप्रेल से की जा रही है। इसका शुभारंभ आज मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया जाना है। रविवार सुबह 9.30 बजे स्टेट हैंगर भोपाल से इसका शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा स्टेट हैंगर भोपाल से ओरछा और चंदेरी के लिए हेलीकॉप्टर का फ्लैग ऑफ किया जाना प्रस्तावित है। चंदेरी और ओरछा में शुरू हो जाएगी हेलीकॉप्टर सेवा इससे भोपाल से चंदेरी और ओरछा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत हो जाएगी। जिसके संबंध में अपर प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड ने पत्र भी जारी किया है। अब देखना यह है कि यह सेवा शुरू होती है या फिर इसकी तारीख में फिर से आगे बढ़ाई जा सकती है। बढ़ेगा रोजगार, पर्यटन को मिलेगा लाभ मध्य प्रदेश देश के बेस्ट टूरिज्म स्टेट में से एक है। जहां हर साल लाखों टूरिस्ट आते हैं। ऐसे में पीएमश्री योजना के तहत हवाई सेवा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ एमपी टूरिज्म को ही मिलेगा। इस सेवा के शुरू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि यहां आने वाले टूरिस्ट की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा सकता है। इसका सीधा असर यह होगा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय अर्थव्यस्था को बूम मिलेगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा। बता दें कि चंदेरी मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में एक छोटे शहर जैसा है। ऐतिहासिक स्थल है और अपनी चंदेरी की साड़ियों के लिए जाना जाता है। दुनिया भर में मशहूर यह शहर अब सिर्फ चंदेरी की साड़ियों के लिए ही नहीं बल्कि यहां होने वाली बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी एक अनोखी पहचान स्थापित कर चुका है। वहीं ओरछा भी अब ऐतिहासिक और राजा राम की नगरी कहलाने वाला ओरछा भी इस दौड़ में आगे बढ़ रहा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: 10वीं-12वीं बोर्ड विद्यार्थियों को मिलेगा द्वितीय अवसर परीक्षा

10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अनुपस्थित, अनुत्तीर्ण और अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी ले सकेंगे लाभ 22 अप्रैल तक किया जा सकेगा आवेदन 7 से 25 मई तक आयोजित होगी परीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के बच्चों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय स्तर पर की गई पहल के साथ-साथ यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण भी है। इस वर्ष किसी भी छात्र का परीक्षाफल पूरक घोषित नहीं किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब विद्यार्थियों के लिए द्वितीय परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, अनुत्तीर्ण हुए या अंक सुधारना चाहते हैं, वे निराश न हों, सरकार उनके साथ खड़ी है। "द्वितीय अवसर परीक्षा" 7 से 25 मई तक आयोजित होगी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पिछली बार से अधिक परिश्रम और बेहतर करने के लिए एक मौका और दिया गया है। अनुत्तीर्ण हुए बच्चों के माता-पिता को ऐसे मौके पर अपने बच्चे के साथ खड़े होने और उन्हें हौसला देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि आज की असफलता से निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। जीवन की राह में छोटी-मोटी असफलताएं हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती है। गिरकर संभलने वाला ही असली विजेता कहलाता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही द्वितीय अवसर परीक्षा में ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुपस्थित/अनुत्तीर्ण रहे हों, सम्मिलित हो सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधारने के लिए द्वितीय अवसर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। परीक्षार्थियों का प्रथम एवं द्वितीय अवसर में से जो भी श्रेष्ठ परिणाम होगा, वह अंतिम रूप से मान्य रहेगा। प्रायोगिक विषयों में किसी छात्र को प्रायोगिक और आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने की पात्रता होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में परीक्षार्थी को विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल रात 12 बजे तक एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भरे जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर 'ड्रॉप आउट रेट' शून्य (Zero) हो गया है। प्रदेश में 369 सर्वसुविधायुक्त सांदीपनी विद्यालय और 730 पीएम स्कूल, शालेय शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। शिक्षा के लिए बजट में 36 हज़ार 730 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। यह निवेश अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 8 लाख 50 हज़ार से अधिक बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहे।  

भोपाल मेट्रोपॉलिटन का विस्तार: 12,098 स्क्वायर किमी में 6 जिलों के 2510 गांव शामिल, नोटिफिकेशन जारी

 भोपाल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12,098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें छह जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया है। भूमि के क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम का है तो भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र रखा गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। छह जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले में आठ तहसील आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी व सीहोर। रायसेन जिले में तीन तहसील गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर। राजगढ़ में सात तहसील ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में पांच तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम शामिल की गई है। बता दें कि मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया। किस जिले में कितनी तहसीलें अब भोपाल में वहीं, रायसेन जिले की बात करें तो इससे 3 तहसीलें जिनमें गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर रहेंगी। इसके अलावा, राजगढ़ जिले में 7 तहसीलें, जिनमें ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में 5 तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को शामिल किया गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट को 2025 में मिली मंजूरी आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में मोहन कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया था। क्षेत्रफल के हिसाब से किस जिले से कितना क्षेत्र जिला — क्षेत्र (वर्ग किमी) — प्रतिशत -सीहोर– 3302 — 50.46% -राजगढ़ — 2812– 46.61% -रायसेन– 2422– 28.57% -भोपाल — 2275– 82.25% -विदिशा– 804– 11.01% -नर्मदापुरम — 480 — 7.16% मुंबई से बड़े क्षेत्र में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन देश की आर्थिक मुंबई से भी बड़े इलाके में डेवलप किया जा रहा है, जिसमें राजधानी भोपाल और इसके पड़ोसी जिले रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम की कुल 12 हजार वर्गकिमी जमीन पर मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया जाएगा। अगर क्षेत्रफल की बात करें तो भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का एरिया 12,098 वर्ग किमी में फैला रहेगा तो वहीं मुंबई मेट्रोपॉलिटन सिटी 6,300 वर्गकिमी में फैली रहेगी। मेट्रोपॉलिटन रीजन में ये इलाके रहेंगे मेट्रोपॉलिटन रीजन का भोपाल केंद्र बिंदु रहेगा, यानी राजधानी भोपाल ही सेंटर पॉइंट होगा, जिसमें भोपाल की हुजूर, बैरसिया, कोलार तहसील मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल हुई है. इसके साथ ही सीहोर जिले की इछावर, आष्टा, सीहोर श्यामपुर, जावर को भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का हिस्सा बनाया गया है. इसके साथ ही विदिशा जिले की ग्यारसपुर, गुलाबगंज और विदिशा तहसील को इस रीजन में जगह मिली है। राजगढ़ की नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खुजनेर तहसील को शामिल किया गया है। जबकि नर्मदापुरम की होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को जोड़ा है। इसके अलावा रायसेन जिले की औबेदुल्लागंज और रायसेन तहसील को जगह मिली है।

लाड़ली बहनों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा यह खास तोहफा, पूरी डिटेल जानें

भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए मोहन सरकार एक और बड़ी सौगात की तैयारी में है। अब केवल हर महीने आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार की नई योजना के तहत इच्छुक लाड़ली बहनों को गाय-भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें। सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत गोवर्धन पूजा से की जा सकती है। इस योजना के तहत सभी महिलाओं के लिए पशुपालन अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि खेती-किसानी और पशुपालन में रुचि रखने वाली महिलाएं ही इसका लाभ ले सकेंगी। सरकार पशुधन खरीदने के लिए आर्थिक मदद देगी, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। फिलहाल प्रदेश की करीब 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की राशि दी जा रही है, जिस पर सरकार को लगभग 1836 करोड़ रुपए का मासिक भार उठाना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए 3000 रुपए प्रतिमाह देने के वादे की याद दिला रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भविष्य में इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाने की योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल नकद सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी सोच के तहत नवंबर 2026 से महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। महिला आधारित योजनाओं की समीक्षा के लिए सरकार ने मंत्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है। इस समिति में मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और संपतिया उइके को शामिल किया गया है। समिति इस बात पर काम कर रही है कि महिलाओं को मासिक किस्त के बजाय एकमुश्त सहायता देकर स्थायी काम-धंधे से कैसे जोड़ा जाए, ताकि उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सके। सरकार योजना का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। संभावना है कि इसे प्रदेश की किसी ऐसी वीरांगना के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने समाज और जनकल्याण के लिए साहसिक कार्य किए हों। हाल ही में नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। योजना शुरू होने से अब तक प्रति बहन 40,500 रुपए से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच चुकी है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बहनों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार आगे भी हरसंभव मदद करेगी और योजना को और मजबूत बनाया जाएगा।

उमरिया की पूजा सिंह बनी मिसाल, आत्मनिर्भरता की अनोखी कहानी

भोपाल उमरिया जिले के घंघरी ग्राम की पूजा सिंह ने अपनी वस्त्र निर्माण इकाई स्थापित कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी रची है। आज उनकी इकाई द्वारा निर्मित वस्त्र प्रदेश के विभिन्न जिलों तक जा रहे हैं। उनकी यह सफलता अन्य महिलाओं के लिये भी प्रेरणा बन रही है। पूजा सिंह ने इस सफलता को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में मिले ऋण की मदद से साकार किया है। सीमित संसाधनों के कारण लंबे समय तक स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में असमर्थ रहीं पूजा सिंह को जब मुद्रा योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने बैंक में आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें मुद्रा योजना के तहत 8 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने “हीरा फैब्रिक” नाम से अपनी वस्त्र निर्माण इकाई स्थापित की। आज उनकी यूनिट में स्कूल ड्रेस, शर्ट, पैंट, ट्रैक सूट, टी-शर्ट और लोअर जैसे परिधानों का निर्माण किया जा रहा है। उत्पादों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति के कारण उन्हें होशंगाबाद, सीधी, मैहर, सतना, कटनी, इटारसी और बुधनी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से निरंतर ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है और पहचान भी बन रही है। पूजा सिंह आज न केवल अपने परिवार के लिए आर्थिक रूप से मजबूत सहारा बनी हैं, बल्कि अपने उद्यम के माध्यम से 8 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। पूजा सिंह के पति धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि यदि सही जानकारी और मार्गदर्शन मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुद्रा योजना ने उनके जीवन को नई दिशा और पहचान दी है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार को नई दिशा दे रही है। वर्ष 2015 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य छोटे उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं और स्टार्टअप्स को बिना गारंटी के सरल ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख) और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख) श्रेणियों में ऋण प्रदान किया जाता है।  

पर्यटन को बढ़ावा: डॉ. मोहन यादव लॉन्च करेंगे हेली सेवा, ओरछा-चंदेरी सफर होगा आसान

भोपाल अब हवाई मार्ग से जुड़ेगा ओरछा और चंदेरी से भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को सुगम, सुरक्षित और आनंददायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रविवार, 19 अप्रैल को सुबह 10:45 बजे, राजधानी के स्टेट हैंगर से "पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा" के अंतर्गत नए सेक्टर (भोपाल-चंदेरी-ओरछा) का विधिवत शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर हेलीकॉप्टर को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और यात्रियों को बोर्डिंग पास भी प्रदान करेंगे। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा यह नया सेक्टर भोपाल को भगवान श्रीराम की राजनगरी ओरछा और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध चंदेरी से जोड़ेगी। इससे श्रद्धालु श्रीरामराजा मंदिर में सुगमता से दर्शन के लिये पहुँच सकेंगे और चंदेरी की सांस्कृतिक विरासत व प्रसिद्ध हस्तशिल्प (चंदेरी साड़ी) का अनुभव ले सकेंगे। एंड टू एंड सेवा का सप्ताह में 5 दिन होगा संचालन सेक्टर-2 अंतर्गत यह सेवा सप्ताह में 5 दिन (बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) संचालित होगी। यात्रियों के लिए भोपाल से चंदेरी का किराया ₹5,500 और भोपाल से ओरछा का किराया ₹6,500 निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ₹14,500 के विशेष पैकेज में टैक्सी, वीआईपी दर्शन और प्रसाद जैसी 'एंड-टू-एंड' सुविधाएं भी शामिल हैं। चंदेरी और ओरछा में पर्यटकों के लिए ₹3,500 में 'जॉय राइड' की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि पीपीपी मॉडल पर संचालित इस सेवा में पर्यटकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। यात्रा के लिए 6 सीटों वाले आधुनिक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जा रहा है। गंतव्य पर होटल, भोजन और स्थानीय भ्रमण के लिए गाइड की व्यवस्था भी पूर्व निर्धारित रहेगी। बुकिंग के लिए पर्यटक www.flyola.in और IRCTC पोर्टल पर बुकिंग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर 2025 के अवसर पर पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ किया गया था। यह सेवा वर्तमान में आध्यात्मिक सेक्टर इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के साथ वाइल्डलाइफ सेक्टर जबलपुर, कान्हा, बांधवगढ़, चित्रकूट और मैहर के बीच सफलतापूर्वक संचालित है। इस सेवा का अब तक 2 हजार 648 पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने लाभ लिया है।  

RTE प्रवेश पर बड़ा अपडेट—25 अप्रैल तक बढ़ी डेडलाइन, प्रदेश के कई निजी स्कूल खाली

भोपाल शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत प्रदेश में प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथि बढ़ाकर अब 25 अप्रैल कर दी गई है। पहले यह प्रक्रिया 15 अप्रैल तक पूरी होनी थी, लेकिन अपेक्षित संख्या में प्रवेश नहीं होने के कारण राज्य शिक्षा केंद्र ने यह निर्णय लिया है। पहले चरण में इतने पात्र इस वर्ष आरटीई के पहले चरण में 1 लाख 78 हजार 714 बच्चे पात्र पाए गए थे, जिनमें से 83 हजार 483 बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश आवंटित किया गया है। इनमें 72 हजार 812 बच्चों को उनकी पहली पसंद के स्कूल मिले हैं। इसके बावजूद कई स्कूलों में सीटें खाली पड़ी हैं।   कई जिलों में हालात गंभीर स्थिति यह है कि प्रदेशभर में 320 निजी स्कूल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जहां 20 प्रतिशत से भी कम प्रवेश हुए हैं। कई जिलों में तो हालात और गंभीर हैं, जहां कुछ स्कूलों में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। भोपाल में 19, इंदौर में 27, ग्वालियर में 13, जबलपुर में 14, देवास में 12 और दमोह में 11 निजी स्कूलों में अब तक शून्य प्रवेश दर्ज किए गए हैं। प्रवेश लेने नहीं पहुंचे बच्चे निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि जिन बच्चों को आवंटन मिला है, वे अभी तक प्रवेश लेने नहीं पहुंचे हैं। राजधानी के कई प्रतिष्ठित सीबीएसई स्कूलों में भी आरटीई के तहत अपेक्षित प्रवेश नहीं हो पाए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के अनुसार, जिन बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं, उन्हें पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए सूचना भेजी जा चुकी है। अभिभावक अब 25 अप्रैल तक संबंधित स्कूल में जाकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इन बच्चों की फीस सरकार द्वारा सीधे स्कूलों के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी। अधिकारियों का क्या कहना राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने कहा कि यदि किसी अभिभावक को प्रवेश में परेशानी होती है या स्कूल द्वारा इनकार किया जाता है, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी और संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर

ग्वालियर में 3.15 करोड़ की सीवर सकर मशीन का किया लोकार्पण भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के आहवान पर 15 ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में शनिवार से सीवर स्वच्छता अभियान शुरू किया गया है। क्षेत्र में सीवर समस्या को लेकर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से परेशानी बनी हुई थी। सीवर समस्या को दूर करने के लिए  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने खुद पहल करते हुए 3 करोड़ 15 लाख रुपए कीमत की सीवर सकर मशीन विधानसभा क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराई है। उप नगर ग्वालियर के कांच मिल क्षेत्र से इस मशीन ने शनिवार से सीवर लाइनों की सफाई करना शुरू कर दिया। मंत्री तोमर ने सीवर सफाई का पूरा शेड्यूल बताते हुए कहा कि 18 अप्रैल से 30 अप्रैल तक किस-किस तारीख को कहां-कहां सफाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन का शुभारंभ कर इसे नगर निगम को समर्पित किया है। अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। उन्होंने जन कल्याण समिति को अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि जहां-जहां सीवर सफाई का काम चले, जन कल्याण समिति के लोग इस कार्य की न केवल निगरानी रखें, बल्कि यह सुनिश्चित करें की सीवर सफाई का कार्य सुव्यवस्थित तरीके से हो। उन्होंने कहा कि यह नगर निगम के लिए चुनौती है। हमने सीवर सफाई के कार्य को अपने हाथ में लिया है और हम इसमें बदलाव लाकर दिखाएंगे। ऊर्जा मंत्री ने सिविल अस्पताल हजीरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमारी और आपकी जिद का ही परिणाम है कि सिविल अस्पताल हजीरा उन मरीजों को सुविधा दे रहा है, जिन्हें इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में सड़क के किनारे बने अस्थाई अतिक्रमण को स्वयं हटाए जाने का भी आहवान किया, जिससे आवागमन में किसी तरह की परेशानी ना हो। ऊर्जा मंत्री ने 15 ग्वालियर विधानसभा में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, आज स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। पहले लोग हमारे पास आकर निजी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराने की बात कहते थे, लेकिन अब यहां के लोग अपने बच्चों को सांदीपनी स्कूल में भर्ती कराने की बात कहते हैं। यही बदलाव है। जो हमने और आपने साथ मिलकर किया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि हमने बदलाव लाने की ठान ली है और जल्दी ही ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक पर होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है। इस अवसर पर वरिष्ठ पार्षद, प्रशासन, नगर निगम, विद्युत वितरण कंपनी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।