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भोपाल मेट्रो का बड़ा कदम: 15 मीटर नीचे पहुंची TBM मशीन, पुराने शहर में बनेगी अंडरग्राउंड सुरंग

भोपाल राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक चरण में प्रवेश कर रही है। भोपाल मेट्रो की आरेंज लाइन के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ट्विन टनल को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का पहला पार्ट क्रेन के जरिए करीब 15 मीटर जमीन की गहराई में उतारा जा चुका है। तकनीकी इंस्टालेशन और जांच के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह से जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए जमीन की खोदाई का काम शुरू हो सकता है। पुल पातरा और सिंधी कालोनी में एक अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके जरिए मेट्रो ट्रेन भूमिगत स्टेशन तक पहुंचेगी। दिसंबर में बेंगलुरु से आई थी टीबीएम मशीन यह टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल पहुंची थी। टीबीएम के कुल तीन से चार बड़े हिस्से हैं, जिन्हें एक-एक कर जमीन के नीचे उतारा जाएगा। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर सुरंग के लिए जमीन की खोदाई करेगी। यह टनल भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे शहर के सबसे घने और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम से खोदाई के दौरान किसी भी प्रकार का कंपन नहीं होगा और ऊपर रहने वाले लोगों को इसका आभास भी नहीं होगा। पुरानी इमारतों की सुरक्षा और विरासत की चुनौती सुरक्षा के लिहाज से प्रबंधन उन पुरानी इमारतों और होटलों को लेकर सतर्क है जो पुल पातरा से सिंधी कालोनी के बीच स्थित हैं। इनमें से कई इमारतें काफी जर्जर और पुरानी हैं। इस भूमिगत तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहर के व्यस्ततम रास्तों के नीचे काम चलने के बावजूद ऊपर का ट्रैफिक और ऐतिहासिक विरासतें पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पैकेज बीएच-04 के तहत संचालित किया जा रहा है। एक नजर में भूमिगत कॉरिडोर (ऑरेंज लाइन)     क्षेत्र: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक     टनल की लंबाई: लगभग 3.39 किलोमीटर     संरचना: 02 समानांतर सुरंगें     गहराई: 20 मीटर की गहराई में सुरंग बनाएगी मशीन मशीन की तकनीकी क्षमता     नाम: टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम)     आगमन: दिसंबर 2025 (बेंगलुरु से भोपाल लाई गई)     व्यास: 5.8 मीटर     क्षमता: एक मशीन की प्रतिदिन 15 मीटर खोदाई की क्षमता     स्थिति: 15 मीटर गहराई पर उतारा गया मशीन का पहला पार्ट  

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की तैयारी: सिंगापुर-लंदन में रोड शो करेगी मोहन सरकार, सौर ऊर्जा में आगे बढ़ेगा MP

भोपाल मध्य प्रदेश ने 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। इसे और गति देने के लिए निवेश बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस साल दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में रोड शो आयोजित कर मुरैना-2 सौर सहित ऊर्जा भंडारण परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुरैना-2 परियोजना में छह माह बिजली उत्तर प्रदेश और छह माह मध्य प्रदेश को मिलेगी। वैश्विक स्तर पर निवेशकों को लुभाने की तैयारी रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक कर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएंगे। बता दें कि 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इससे 1.4 लाख रोजगार सृजन संभावित हैं। मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम कर रही है। प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो रही है। मुरैना और अन्य जिलों में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं आठ हजार मेगावाट की दो सौर ऊर्जा की परियोजनाएं मुरैना में स्थापित की जाएंगी। वहीं साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियां सांची मप्र की पहली सोलर-सिटी है। देश के सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश 8.2 प्रतिशत के योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। रीवा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्लांट (750 मेगावाट) दिल्ली मेट्रो को बिजली प्रदान करता है। नीमच जिले में भारत की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजना 7,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को एकीकृत करती है। पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन नर्मदापुरम के मोहासा बाबई में 884 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं, जिससे बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर मती सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक  कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।  

भोपाल में ‘कुत्ते’ से पंगा पड़ा महंगा! भेल कर्मचारी ने 8 दिन की छुट्टी लेकर किया सर्च ऑपरेशन

भोपाल राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में इन दिनों एक ''आवारा कुत्ते'' चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कालोनी से श्वानों को बाहर निकालने का फैसला ''भेल'' के जिम्मेदार कर्मचारियों पर इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी सड़कों पर खाक छानते हुए बितानी पड़ी। मामले में मेनका गांधी की सक्रियता और प्रशासन के कड़े रुख ने कॉलोनी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी। पदाधिकारी जिन सरकारी और निजी संस्थानों में ऊंचे पदों पर कार्यरत थे, वहां भी शिकायतें पहुंचने लगीं। दबाव इतना बढ़ा कि इन जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपने दफ्तरों से छुट्टी लेनी पड़ी। मेनका गांधी और पीएमओ तक पहुंची शिकायत दरअसल, भोपाल स्थित नवरत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल) के कर्मचारी आठ दिनों तक एक कुत्ते को खोजते रहे। हुआ यह कि ये कर्मचारी अवधपुरी क्षेत्र की जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहां एक कुत्ता प्रेमी महिला एक आवारा कुतिया को रोज खाना खिलाती थी। कालोनी में घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के क्रम में रहवासियों ने उसे भी भगा दिया। इससे दुखी होकर उस महिला ने भेल प्रबंधन, पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय और पेटा जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक रहवासी कालोनी की सोसायटी के पदाधिकारियों की शिकायत कर दी। साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी कुत्ते के गायब होने को लेकर पत्र लिख दिया। छुट्टियों में कुत्ते पकड़ने का अनूठा 'ऑपरेशन' वहीं, भेल के जो कर्मचारी हैं, वे सोसायटी के पदाधिकारी थे। मामला बढ़ता देख भेल प्रबंधन ने भी कर्मचारियों को कुत्ते को खोजकर देने को कहा। ऐसे में भेल के कर्मचारी सहित सोसायटी के सभी पदाधिकारी अपनी होली और रंगपंचमी सहित आठ दिन तक खेतों में कुत्ते को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे घूमते रहे। कुत्ते की तलाश का ''आपरेशन'' कुछ यूं चला – पदाधिकारियों ने शहर की गली-गली में कुत्ते को ढूंढा। सातवें दिन वह एक सुदूर इलाके में खेतों में मिली, लेकिन हाथ नहीं आई। कुत्ते को पकड़ने के लिए पदाधिकारी अगले दो दिनों तक बिस्कुट, ब्रेड और मछली-मुर्गे का मांस लेकर उसके पीछे घूमते रहे, ताकि उसे लालच देकर काबू किया जा सके। 'नॉन-वेज' डिप्लोमेसी से मिली कामयाबी जहां पूरा शहर होली, भाईदूज और रंगपंचमी के जश्न में डूबा था, वहीं ये पदाधिकारी कुत्ते पकड़ने वालों की भूमिका निभा रहे थे। आखिरकार भारी मशक्कत और ''नान-वेज'' डिप्लोमेसी के बाद आठवें दिन कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर वापस कालोनी लाया गया। तब जाकर महिला डाक्टर का गुस्सा शांत हुआ और प्रशासन ने अपनी फाइलें बंद कीं। कालोनी के लोग अब दबी जुबान में कह रहे हैं कि श्वानों को कालोनी से बाहर निकालना तो आसान था, लेकिन कानून और रसूख के शिकंजे से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया था।

रातभर सफाई के दावे, लेकिन भोपाल के इन बाजारों में फिर भी पसरी गंदगी

भोपाल स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियों को लेकर नगर निगम भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर के कई हिस्सों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। पुराने शहर के व्यापारिक केंद्रों में सफाई व्यवस्था के हाल बेहाल हैं। जहांगीराबाद चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख व्यस्त केंद्र है, वहां देर रात तक सड़कों का कचरा नहीं उठने से सुबह सड़कों के किनारे कचरा पसरा रहता है। यही स्थिति अशोका गार्डन क्षेत्र के परिक्रमा मार्ग की है। रात में यहां सफाई टीम के न पहुंचने के कारण कचरे का अंबार लग जाता है, जिससे यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कागजों पर तैनात फौज, धरातल पर कर्मचारी गायब इसकी वजह यह है कि निगम के रिकॉर्ड में शहर के 85 वार्डों की सड़कों और बाजारों को चमकाने के लिए 326 सफाईकर्मियों की फौज तैनात है, लेकिन धरातल पर इनमें से बमुश्किल 50 कर्मचारी ही काम करते नजर आते हैं। नतीजा यह है कि सुबह होते ही पुराने शहर के प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते मिलते हैं। अशोका गार्डन के परिक्रमा मार्ग के आसपास रात 11:57 बजे फल, सब्जी सहित अन्य सामान के हाथ ठेले लग जाते हैं, जो सड़क किनारे ही कचरा फैलाते रहते हैं। ऐसे में सड़क किनारे कचरे का ढेर लग जाता है। वहीं, रात में सफाई के लिए तैनात अमले की अनुपस्थिति के कारण सड़क के दोनों ओर कचरा फैला रहता है। इससे रहवासी क्षेत्रों की सफाई भी प्रभावित हो रही है। जहांगीराबाद चौराहा: मुख्य मार्ग पर कचरे का अंबार पुराने शहर का हृदय कहे जाने वाले जहांगीराबाद चौराहा पर रात 12:38 बजे रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था का बुरा हाल मिला। चौराहे के पास ही मुख्य मार्ग किनारे कचरा फैला हुआ था। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि रात दुकानों का कचरा लेने के लिए गाड़ी तो आती है, लेकिन सड़कों की सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आते। आलम यह है कि सुबह व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से पहले ही मुख्य सड़क और चौराहे के किनारों पर कचरे का अंबार लग जाता है। स्वच्छ सर्वेक्षण के दावों के बीच यह व्यस्ततम इलाका नगर निगम की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था में शहर की मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों की सफाई कराई जाती है। रोजाना करीब 25 से 30 टन कचरा रात में उठाया जाता है और कर्मचारियों की मॉनिटरिंग जीपीएस युक्त फोटो के जरिए की जा रही है। सुपरवाइजर द्वारा निगरानी की जाती है। बाजार क्षेत्र में रात में जहां सफाई नहीं हो पाती है, वहां सुबह जल्दी सफाई करा दी जाती है। – नितेश मिश्रा, एचओ, रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था  

स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों एवं निबंध तथा पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को किया पुरस्कृत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने सभी को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि एक सशक्त और जागरूक उपभोक्ता ही मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव होता है।  राजपूत ने कहा कि खाद्य पदार्थों के रूप में धीमा जहर देने वाले के विरूद्ध कठोर कार्रवाई करें, तभी इस दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में उपभोक्ता है इसलिए उसके अधिकारों की रक्षा करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और उचित मूल्य पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध हो, यह हमारा दायित्व भी है और संकल्प भी है। मंत्री  राजपूत ने कहा कि खरीददारी करते समय बिल लेना, उत्पाद की गुणवत्ता और समाप्ति की तिथि अवश्य देखना, किसी भी प्रकार की अनियमितता होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराना, यह सभी जागरूक उपभोक्ता को मजबूत बनाते हैं। उपभोक्ताओं के हित में भारत सरकार ने वर्ष 2019 में नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया। यह कानून उपभोक्ताओं के रक्षा की गारंटी देता है। इसमें 06 प्रकार के अधिकार चुनने का अधिकार, सूचित होने का अधिकार, उपभोक्ताओं की सुरक्षा का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, उपभोक्ता की समस्याओं के निराकरण का अधिकार और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (जागरूक बने रहने का अधिकार) बताये गये हैं।  राजपूत ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध हैं। भ्रामक खबरों से सावधान रहें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वर्तमान परिस्थितियों में बड़े आयोजनों से बचें। जिद्दी उपभोक्ता बनें मंत्री  राजपूत ने कहा कि अपने अधिकारों के लिये उपभोक्ताओं को जिद करना चाहिये। ठगी होने पर उपभोक्ताओं को उपभोक्ता न्यायालयों की मदद लेनी चाहिए और इस संबंध में दूसरों को भी जागरूक करना चाहिये। उन्होंने इस संबंध में एक घटना का उल्लेख करते हुए सागर के डॉक्टर हरिसिंह गौर को भी याद किया।  राजपूत ने कहा कि मेरा आग्रह है कि हम सभी उपभोक्ता हैं तथा हम सभी का यह कर्तव्य है कि अनुचित व्यापार को रोकने में अपनी जागरूकता का परिचय दें एवं ठगे जाने से बचें। उपभोक्ता कानून में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का प्रावधान है। सुनवाई वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भी की जाती है। जिला आयोग/फोरम के निर्णय से असंतुष्ट होने पर राज्य आयोग में अपील का भी प्रावधान है। नापतौल में कमी मिलने पर कोई भी उपभोक्ता नापतौल कार्यालय एवं आयोग में शिकायत कर सकता है। जिला उपभोक्ता आयोग में 14 हजार से अधिक मामले निराकृत मंत्री  राजपूत ने बताया कि राज्य उपभोक्ता आयोग में वर्ष 2025-26 तक लगभग 3 हजार मामलों का निराकरण किया गया। इसी प्रकार जिला उपभोक्ता आयोग में 14 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। राज्य उपभोक्ता आयोग में दिसंबर, 2020 से अभी तक 7 हजार 5 सौ से अधिक मामले ऑनलाईन दर्ज किये गये। जिला उपभोक्ता आयोगों में 26 हजार से अधिक मामले ऑनलाईन दर्ज हुये। सदस्य राज्य उपभोक्ता आयोग डॉ. मोनिका मलिक ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य "सुरक्षित उत्पाद-सशक्त उपभोक्ता" है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कुल 2574 मामले निराकृत हुए जबकि 2285 नये मामले दर्ज किये गये। आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण  कर्मवीर शर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों से अवगत कराने के लिये यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने उपभोक्ता अधिकारों के बारे में जानकारी दी। पुरस्कार कार्यक्रम में वर्ष 2025 में बेहतर कार्य करने वाले स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। संस्थाओं में 1 लाख 11 हजार रूपये का प्रथम पुरस्कार अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन कटनी को तथा 51 हजार रूपये का द्वितीय पुरस्कर प्राकृतिक चिकित्सालय महाविद्यालय समिति ग्वालियर को दिया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार उज्जैन की कु. अश्विता पोरवाल, द्वितीय इंदौर की कु. रानी चौधरी तथा तृतीय पुरस्कार छतरपुर की कु. खुसबू रैकवार को मिला। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार छतरपुर की कु. शुभि सेन, द्वितीय छतरपुर की ही कु. तपस्या कुशवाह और तृतीय पुरस्कार धार की कु. पलक सिसोदिया को दिया‍गया। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का पुरस्कार भारतीय खाद्य निगम, द्वितीय पुरस्कार म.प्र. वेयर हाउसिंग और तृतीय खाद्य एवं औषधि प्रशासन को मिला। कार्यक्रम में प्रदर्शनी के माध्यम से उपभोक्ताओं को मिलावट की पहचान, उपभोक्ताओं के अधिकार, औषधि क्रय एवं उपयोग में सावधानियां आदि विषय पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई। आभार प्रदर्शन संयुक्त संचालक  हरेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। इस दौरान आयुक्त नागरिक आपूर्ति निगम  अनुराग वर्मा, नियंत्रक नापतौल  बृजेश सक्सेना, आयोग के सदस्य  नेमी जैन और सुखदेव मिश्रा सहित उपभोक्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।  

5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाएँ जा रहे हैं। गीता भवन के माध्यम से दार्शनिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास है। इन केन्द्रों में युवा पीढ़ी को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने और शोधार्थियों के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना गीता भवन का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए 'गीता भवन' परियोजना को अब वृहद स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 413 शहरों में गीता भवन निर्माण की योजना के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए एक आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है। इंदौर और जबलपुर में निर्मित गीता भवन की सफलता को आधार मानते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। 4 शहरों में प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, 100 निकायों में भूमि चिन्हांकित योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए विभाग ने चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड (Brownfield) प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें रीवा (5 करोड़ रुपये), छिंदवाड़ा (2.5 करोड़ रुपये), कटनी (2.4 करोड़ रुपये) तथा खंडवा (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है, जिनकी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शेष 313 नगरीय निकायों में भी भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया प्रचलन में है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे सांस्कृतिक केंद्र प्रत्येक 'गीता भवन' को एक बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके प्रमुख घटकों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: वृहद स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के लिये ज्ञान का केंद्र: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध लाइब्रेरी एवं हाई-टेक ई-लाइब्रेरी। व्यावसायिक एवं जन-सुविधाएं: कैफेटेरिया और विशेष रूप से पुस्तकों एवं आध्यात्मिक सामग्री के लिए समर्पित विक्रय केंद्र शामिल हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 16 मार्च को अभिमुखीकरण कार्यक्रम में होंगे शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा 16 मार्च को सुबह 11 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों का अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं मंत्रीगण सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रबुद्धजनों को आमंत्रित किया गया है। यह कार्यक्रम कृषि वर्ष में सक्रिय सहभागिता के लिए आयोजित किया जा रहा है। किसानों की समृद्धि और खुशहाली राज्य सरकार का उद्देश्य है। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सहित उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सहकारिता एवं पशुपालन विभाग अंतर्गत क्रियान्वित योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी से अवगत कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कृषि, उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग का विशेष सत्र का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री डॉ. यादव शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने उद्बोधन के माध्यम से किसान कल्याण की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों से साझा करेंगे। संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विभागीय प्रस्तुतिकरण और प्रश्नों का समाधान भी किया जाएगा।  

प्रगति के आयामों में लोकतांत्रिक मूल्यों की महत्ता का अनुभव करें: राज्यपाल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अध्ययन भ्रमण आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और संसाधन प्रबंधन के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर होता है। अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे भ्रमण के दौरान समझने और सीखने का प्रयास करें। प्रतिदिन भ्रमण के अंत में दिनभर की गतिविधियों और अनुभवों का चिंतन करें। भ्रमण टीप का अभिलेखन करें। राज्यपाल  पटेल रविवार को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली में अध्ययनरत वरिष्ठ सैन्य एवं सिविल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। दल 15 से 21 मार्च तक मध्यप्रदेश के अध्ययन भ्रमण आया है। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि भ्रमण नये अनुभवों, सामाजिक विशिष्टताओं, आध्यात्मिक आस्था और विकास के विभिन्न आयामों को देखने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करने का सुअवसर होता है। विगत दिनों बौद्ध अवशेषों को कोलंबो, लंका से वापस भारत लाने की उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका में 7 दिवस की अवधि के लिए प्रदर्शित पवित्र अवशेषों का 14 लाख लोगों ने दर्शन किया। प्रदर्शन के आखिरी दिन सारी रात लाखोंश्रद्धालुओं ने लाइन लगाकर दर्शन किए। आस्था के प्रति समर्पण और आध्यात्मिकता का उनके लिए यह अद्भुत अनुभव रहा है।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भारत में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक क्षेत्रों में आई क्रांतिकारी प्रगति, वास्तव में 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के विराट स्वरूप को समझने का सुअवसर है।जरूरी है कि आप प्रशासनिक ढांचे, विकास योजनाओं तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के विभिन्न आयामों को नजदीक से देखे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, की महत्ता का अनुभव करें।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य की धरती आदिम सभ्यता, प्राचीन भारत की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप है।यहां कि विश्व धरोहर सांची स्तूप, भीमबेटका और खजुराहों, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थल हमारे गौरवशाली इतिहास के साक्षी है। भ्रमण अवसर पर ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन, पर्यटन संवर्धन तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के मॉडल में जन सहभागिता की भूमिका और महत्व को भी जानने का प्रयास करें। उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में बड़े आयोजनों में प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास के मॉडल का गहन अध्ययन जरूर करें।कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल को प्रशासन अकादमी और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल ने भ्रमण दल के प्रमुख मेजर जनरल पवन पाल सिंह को गोंड कला की पेटिंग भेंट की। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक  मुजीबुर्रहमान खान ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में 47 सप्ताह के पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में से 16 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल प्रदेश प्रवास पर आया है।उन्होंने बताया कि अध्ययन दल प्रदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। उनको राज्य के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, स्थलों औद्योगिक प्रगति, विभिन्न नवाचारों और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं से रू-ब-रू कराया जाएगा। कोमोडोर सुमीत शिदौरे ने महाविद्यालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में प्रशिक्षण में 122 अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण को 6 मॉड्यूल में संयोजित किया गया है। अध्ययन भ्रमण के लिए प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों के 8 बैच बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे गए हैं। आभार प्रदर्शन प्रशिक्षण संचालक डॉ. अनुपमा रावत ने किया। इस अवसर पर उप सचिव  सुनील दुबे एवं लोक भवन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सनातन की मर्यादा अमर है और रहेगी, बाबर-औरंगजेब और अकबर के खानदान का पता नहीं, महाराणा प्रताप के वंशज मंच पर बैठे हैं: सीएम योगी

चित्तौड़गढ़/लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातिवाद फैलाने वालों को चित्तौड़गढ़ की धरती से दो टूक संदेश दिया। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां सुनाईं – “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का-वीरों का  धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का  पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर  जाति-जाति का शेर मचाते केवल कायर, क्रूर”  मुख्यमंत्री ने कहा, जिन्हें कुछ नहीं करना है, वे जातिवाद के आधार पर सामाजिक एकता को छिन्न-भिन्न करने का पाप कर रहे हैं। जातिवाद ने समाज की नींव को दरका दिया था, इसलिए देश कमजोर हुआ। जातिवाद की राजनीति भारत की नींव को कमजोर कर रही है। बांटने की राजनीति फिर से हम सबको गुलामी की तरफ धकेल रही है। इससे बचने के लिए हमें एकजुटता के भाव से बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को ईनाणी सिटी सेंटर, चित्तौड़गढ़ में जौहर श्रद्धांजलि समारोह में जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। उन्होंने पंजाब के पूर्व राज्यपाल वीपी सिंह की पुस्तक का विमोचन भी किया।  रामसेतु तोड़ने को उतावले लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे सीएम योगी ने जनसमूह से पूछा कि वे कौन लोग हैं, जो जातिवाद के आधार पर समाज को बांट रहे हैं। अफवाह के आधार पर विश्वास का संकट खड़ा कर रहे हैं। भारत-भारत न बना रहे, इसके लिए दुष्चक्र कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने कहा था कि राम-कृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर आंदोलन में विरोधी पक्ष के साथ मिले और फैसला न होने देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। ये लोग रामसेतु तोड़ने के लिए उतावले दिखाई देते हैं, राम मंदिर निर्माण का विरोध करते हैं। ये लोग देश में अविश्वास का वातावरण पैदा कर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनका मकसद भारत को कठघरे में खड़ा करके अविश्वसनीय बना देना है। इन्हें देश की चिंता नहीं है। इनके अपने अस्तित्व पर संकट है, इसलिए भारत की अस्मिता से खिलवाड़ करने पर उतारू हैं।  वीरभूमि ने दी भारत को पहचान सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में परिवर्तन के पीछे प्रधानमंत्री मोदी जी का मार्गदर्शन है तो तेज राजस्थान, चित्तौड़गढ़ का है। इसके पीछे राजस्थान की वीरभूमि का भी योगदान है, क्योंकि मेरे पूज्य दादा गुरु इसी भूमि से गोरखपुर गए थे। राजस्थान, चित्तौड़गढ़, मेवाड़ के वीरों के शौर्य-पराक्रम, वीरांगनाओं के जौहर और मीराबाई की भक्ति की धुन से भारत अभिभूत होता है। नारी अस्मिता, सम्मान, स्वावलंबन की अमर गाथा हमें प्रेरणा प्रदान कर रही है। वीरभूमि ने भारत को पहचान दी है। चित्तौड़गढ़ का किला केवल पत्थरों से बना दुर्ग नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता का प्रहरी है। हर सच्चे भारतीय के मन में इस वीरभूमि और यहां के राणाओं के शौर्य व राष्ट्र के लिए उनके बलिदान के प्रति श्रद्धा का भाव है।  देश-धर्म के लिए था महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी व गुरु गोबिंद सिंह का संघर्ष सीएम योगी ने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज व गुरु गोविंद सिंह जैसे राष्ट्रनायकों को याद किया। उन्होंने कहा, इन लोगों ने अपने, परिवार या सत्ता के लिए बलिदान नहीं दिया था, बल्कि इनका संघर्ष देश-धर्म और भारत की स्वाधीनता के लिए था। हर संघर्ष में चट्टान की तरह सामने खड़े हुए और उसे नेस्तनाबूद भी किया। गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्र बलिदान हुए, लेकिन उन्होंने उफ नहीं किया। महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा, बप्पा रावल के लिए मन में श्रद्धा का भाव है, क्योंकि जो भी राष्ट्र के प्रति योगदान देगा, उसका स्मरण सदैव होता है।  माता सीता का जो संकल्प था, वही संकल्प महारानी पद्मिनी ने दिखाया  सीएम योगी ने कहा कि यह श्रद्धांजलि समारोह प्रेरित कर रहा है कि आने वाले समय में किसी बेटी-बहन को उस दौर से न गुजरना पड़े। 1303, 1535 और 1568 में तीन बड़े जौहर यहां देखने को मिले। भारत का इतिहास वीरांगनाओं के जौहर से भरा पड़ा है। शत्रु हमेशा धोखे से ही वीरों का मुकाबला कर पाए। आमने-सामने की लड़ाई में वे कहीं नहीं टिके। अलाउद्दीन खिलजी के धोखे से महाराणा रत्न सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। उनके सेनापति गोरा-बादल भी लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तो महारानी पद्मिनी के नेतृत्व में हजारों वीरांगनाओं ने नारी अस्मिता की रक्षा के लिए जौहर व्रत लिया था, क्योंकि वह उस समय की परिस्थिति थी। माता सीता ने धरती मां से कहा था कि अगर मेरा सतीत्व अखंड है तो मुझे अपनी गोद में समाहित करो। माता सीता का जो संकल्प था, वही संकल्प धर्म जौहर के नाम पर महारानी पद्मिनी ने यहां दिखाया था। यह संकल्प नारी गरिमा का प्रतीक था। यह भारत माता को विधर्मियों से मुक्त करने का संकल्प था। 25 करोड़ के उत्तर प्रदेश में बेटियां अब नाइट शिफ्ट में भी काम करके सकुशल घर वापस आती हैं मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में जब हमारी सरकार बनी तो प्रदेशवासियों से कहा कि अपराध-अपराधियों, नारी गरिमा-सुरक्षा के मामले में सरकार जीरो टॉलरेंस के तहत काम करेगी। किसी ने बहन-बेटी की सुरक्षा पर हाथ डाला तो अगले चौराहे पर यमराज उसका इंतजार कर रहे होंगे। 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में बेटियां अब स्कूल भी जाती हैं, नाइट शिफ्ट में काम भी करती हैं और सकुशल घर आती हैं। हर नारी को सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन की गारंटी हर भारतीय नारी का अधिकार होना चाहिए। महाराणा सांगा ने घाव पर घाव सहे, लेकिन विधर्मियों को घुसने नहीं दिया  सीएम योगी ने भारत की अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए महाराणा सांगा के शौर्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, महाराणा सांगा के शरीर पर 80 घाव थे। लेकिन, उन्हें स्वयं की नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता की चिंता थी। घाव पर घाव सहते गए पर विधर्मियों को घुसने नहीं दिया। महाराणा प्रताप ने महज 27 वर्ष की आयु में ही अकबर के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उन्होंने अकबर को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। भारत के इतिहास ने हमेशा उनके शौर्य का स्मरण किया है।  अयोध्या में राम मंदिर भी बना और गुलामी का कोई चिह्न भी नहीं बचा  सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम परमपिता परमेश्वर हैं, … Read more