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सच्चा वादा, पक्का काम के संकल्प के साथ किसानों से किए वादे पूरे कर रही सरकार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट विजन ‘सच्चा वादा और पक्का काम’ के अनुरूप प्रदेश सरकार किसानों से किए गए हर संकल्प को धरातल पर उतार रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट कहा है कि ‘मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सच्चा वादा और पक्का काम, यही हमारी सरकार का संकल्प है। हमने किसानों से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया है।’ किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस मंशा को विभाग हर योजना में आत्मसात कर रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य और बोनस से किसानों को सीधा लाभ किसानों से किए वादों को पूरा करने की दिशा में सरकार ने एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदी की है। वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित था। राज्य सरकार ने उस पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया, इस प्रकार 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की गई थी। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस अलग से दिया जा रहा है। इस प्रकार इस वर्ष प्रदेश में किसानों से गेहूं की खरीदी कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 रुपये अधिक है। उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है और किसानों के खातों में सीधे भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक प्रोन्नति योजना शुरू की गई है। इसके तहत धान की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 4000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। यंत्रीकरण और वैज्ञानिक खेती से बढ़ रही किसानों की आय : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि कृषि उत्पादन की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत सुपर सीडर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, बीज-उर्वरक ड्रिल आदि कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। प्रदेश के 2,500 कस्टम हायरिंग सेंटर से किसान किराए पर मशीनें ले रहे हैं। साथ ही बेहतर फसल उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य के लिए एवं संतुलित पौध पोषण के लिए विभाग निःशुल्क मिट्टी परीक्षण कर रहा है। मिट्टी परीक्षण से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर व सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी मिलती है, जिससे किसान संतुलित मात्रा में उर्वरक डालकर लागत घटा सकते हैं। जायद सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रमाणित बीज भंडारित किए गए हैं और मूंग-उड़द बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। रायजोबियम कल्चर सभी विकासखंडों में निःशुल्क उपलब्ध है। किसानों को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली और ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ योजना में ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। पात्र किसानों को सोलर पंप 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जायद फसलों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है और नुकसान होने पर 72 घंटे में सर्वे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मक्का, बाजरा, सोयाबीन की उन्नत किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मक्का की एच.एम.-10, एच.क्यू.पी.एम.-1 जैसी 50 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता वाली किस्में किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंत्री  कंषाना ने कहा कि जायद सीजन में मूंग, उड़द, मक्का, सूरजमुखी जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसान 60 से 70 दिन में अतिरिक्त आय ले सकते हैं। दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रही हैं। विभाग द्वारा ‘कृषि चौपाल’ व ‘किसान पाठशाला’ के माध्यम से हर गांव तक तकनीकी मार्गदर्शन पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि नरवाई न जलाएं और उसे खेत में मिलाकर जायद की बुवाई करें। ई-कृषि यंत्र अनुदान के लिए www.mpkrishi.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का किसान न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि विकसित भारत 2047 के निर्माण में मजबूत स्तंभ सिद्ध होगा।  

देवरीफाटक पर बड़ा रेल हादसा टला, ट्रक के फंसने पर चालक की सतर्कता ने बचाई जानें

कटनी कटनी-दमोह मार्ग पर रीठी थाना क्षेत्र के देवरीकला रेलवे फाटक में बुधवार की शाम एक बड़ा हादसा टल गया। गुड्स ट्रेन के चालक की सूझबूझ के और स्थानीय लोगों की मदद से समय रहते स्थिति संभल गई। बुधवार शाम लगभग पांच बजे जब देवरीकला रेलवे फाटक ट्रेन के आने से पहले बंद होने लगा तो सायरन बजने लगा। इसी दौरान ट्रक क्रमांक एमपी 09 एचएच 1791 का चालक जल्दी में फाटक पार करने की कोशिश करने लगा। दोनों गेट के बीच रेलवे ट्रैक पर पहुंचते ही ट्रक अचानक से बंद हो गया और चालक द्वारा बार-बार प्रयास करने के बावजूद ट्रक स्टार्ट नहीं हो सका। इस बीच दमोह की ओर से तेज रफ्तार मालगाड़ी आ रही थी। ट्रैक पर खड़े ट्रक को देख मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मालगाड़ी चालक ने सतर्कता दिखाई और ट्रेन की रफ्तार धीमी कर दी। इस बीच गेटमैन और आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बंद पड़े ट्रक को पीछे से एक अन्य ट्रक की मदद से धक्का लगाकर रेलवे ट्रैक से बाहर किया। इसके बाद ही फाटक को पूरी तरह बंद किया गया और मालगाड़ी को सुरक्षित रवाना किया गया। जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। 

20-20 हजार रूपए के इनामी अंतरराज्यीय शातिर मूर्ति चोर सहित 03 आरोपी गिरफ्तार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संपत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध सतत एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में दतिया पुलिस ने जैन धर्म के प्रमुख आस्था केंद्र सोनागिर स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर में हुई हाई प्रोफाइल मूर्ति चोरी का खुलासा करते हुए लगभग 25 लाख रुपए मूल्य की भगवान की चांदी की मूर्ति, चांदी का सिंहासन, चांदी के यंत्र एवं अन्य सामग्री जब्‍त कर 20-20 हजार रुपए के इनामी अंतरराज्यीय शातिर मूर्ति चोर सहित 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उल्लेखनीय है कि दिनांक 4-5 अप्रैल की रात्रि में दतिया जिले के सोनागिर पहाड़ी स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर से भगवान की चांदी की मूर्ति एवं अन्य कीमती सामग्री चोरी हो गई थी। यह मंदिर जैन समाज का प्रमुख तीर्थस्थल एवं आस्था का केंद्र है। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा त्वरित पतारसी हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। प्रकरण की सतत मॉनिटरिंग की गई तथा घटनास्थल का निरीक्षण कर विवेचना की लगातार समीक्षा की गई। आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु 20-20 हजार रुपए के इनाम की उद्घोषणा की गई। घटना का त्वरित खुलासा करने हेतु विशेष टीम गठित कर थाना स्तर, तकनीकी शाखा एवं साइबर सेल के अधिकारियों-कर्मचारियों को सक्रिय किया गया। तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र एवं सतत निगरानी के माध्यम से पुलिस ने इस संवेदनशील प्रकरण का सफल खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी गई संपूर्ण संपत्ति जब्‍त की। गिरफ्तार आरोपियों में एक अंतरराज्यीय शातिर मूर्ति चोर शामिल है, जो लगभग 100 से अधिक मूर्ति चोरी के मामलों में संलिप्त रहा है। इसके अतिरिक्त दो स्थानीय सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है।  

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को बताया आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी में  काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विश्व की अनूठी 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' का सूक्ष्म अवलोकन किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने घड़ी के डिजिटल फलक पर प्रदर्शित हो रहे भारतीय पंचांग, मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की गणना की सराहना करते हुए इसे आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम बताया। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा वर्ष 2024 में कालगणना के केन्द्र महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गौरवशाली अतीत को सहेजते हुए उसे वर्तमान में जीवंत बनाए रखने की मंशानुरूप वैदिक घड़ी को देश के सभी ज्योतिर्लिंगों में स्थापित किया जा रहा है। सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (3 अप्रैल 2026) को यह घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी, जिसे 4 अप्रैल को मंदिर प्रांगण में स्थापित किया गया था। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है, जिस स्थान पर जो सूर्योदय का समय होता है उस स्थान की काल गणना तदनुसार दिखाई देती है। स्टेंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहता है। इस घड़ी में वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टेंडर्ड टाइम, भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत् मास, ग्रह स्थिति, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति आदि की जानकारी समाहित है। जानिए क्या है 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' भारत का समय- पृथ्वी का समय संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण फाल्गुन 2080, कृष्ण पक्ष, पंचमी, वरुण मुहूर्त (13वाँ मुहूर्त) में किया गया। (दिनांक 29 फ़रवरी 2024) वैदिक समय प्रणाली यह घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के मध्य समय की गणना करती है। दो सूर्योदयों के बीच एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त = 15 मुहूर्त सूर्यास्त से अगले सूर्योदय = 15 मुहूर्त इस प्रकार एक पूर्ण वैदिक दिवस 30 मुहूर्त का होता है। मुहूर्त, कला एवं काष्ठा प्रत्येक मुहूर्त सामान्यतः लगभग 48 मिनट के बराबर होता है, किंतु इसकी अवधि घड़ी की भौगोलिक स्थिति, सूर्योदय-सूर्यास्त समय तथा सूर्य के कोण के अनुसार परिवर्तित होती है। मुहूर्त मुहूर्त = 30 कला 1 कला = 96 सेकंड 1 कला = 30 काष्ठा 1 काष्ठा = 3.2 सेकंड अर्थात् 30 मुहूर्त : 30 कला : 30 काष्ठा इनकी अवधि भी पर्यवेक्षक के स्थानानुसार परिवर्तित हो सकती है। समय निर्धारण का आधार यह घड़ी सूर्य के कोण तथा पर्यवेक्षक की स्थान-विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को सम्मिलित कर समय का निर्धारण करती है। सूर्योदय के समय के अनुसार ही स्थान का वैदिक समय प्रदर्शित किया जाता है। घड़ी में प्रदर्शित जानकारी वैदिक समय, भारतीय मानक समय, स्थान, पंचांग, विक्रम सम्वत्, तिथि, मुहूर्त, योग, करण, नक्षत्र, सूर्य राशि, चन्द्र राशि। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार अपनी ऐतिहासिक स्मृतियों और गौरवशाली अतीत को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वाराणसी के बाद आगामी समय में अयोध्या के  राम मंदिर सहित देश के सभी ज्योतिर्लिंगों पर भी ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है। यह पहल न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है, बल्कि नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध विरासत और काल-गणना की प्रामाणिक पद्धति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।  

रिफॉर्म : अब हर होर्डिंग पर रहेगी रीयल-टाइम नजर

रायपुर सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों और नई पहलों के प्रचार-प्रसार में आउटडोर मीडिया एक अत्यंत प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित है। इसमें होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, ब्रांडिंग, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स और एलईडी वैन अभियान शामिल हैं। हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों, बस स्टॉप्स तथा प्रमुख यातायात मार्गों जैसे उच्च आवागमन वाले स्थानों पर इसका प्रभाव विशेष रूप से अधिक होता है।  आउटडोर मीडिया के क्षेत्र में प्रभावी मॉनिटरिंग एक बड़ी चुनौती रही है। कई मामलों में यह शिकायतें सामने आई हैं कि वेंडर्स द्वारा सरकारी विज्ञापनों की स्थापना में देरी की गई या निगरानी के अभाव में उन्हें समय से पहले हटाकर उनकी जगह व्यावसायिक विज्ञापन लगा दिए गए।      इस समस्या के समाधान के लिए जनसंपर्क विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल करते हुए प्रौद्योगिकी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम ”प्रचार ऐप” विकसित किया गया है। यह प्रणाली तीन चरणों में कार्य करती है। पहले चरण में विभाग प्रचार अभियान की योजना बनाती है, पैनल में शामिल एजेंसियों और उनके एसेट्स का चयन कर प्रचार अभियान कार्य आवंटित करती है। दूसरे चरण में वेंडर्स प्रचार अभियान की समीक्षा कर क्रियान्वयन की योजना बनाती है और एसेट्स को माउंटर्स को सौंपती है। तीसरे चरण में माउंटर्स मैदानी स्तर पर निर्धारित स्थानों पर क्रिएटिव सामग्री स्थापित करती है।     रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करने के लिए माउंटर्स हेतु एक एंड्रॉइड ऐप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से माउंटर्स को जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो तीन चरणों में अपलोड करना अनिवार्य किया गया है-स्थापना से पहले, स्थापना के तुरंत बाद, और अभियान अवधि के दौरान प्रतिदिन कम से कम एक बार। इन तस्वीरों की पहले वेंडर एजेंसी द्वारा समीक्षा की जाती है और फिर उन्हें ऑनलाइन विभाग को भेजा जाता है।      यह एंड-टू-एंड प्रणाली पारदर्शिता को सुनिश्चित करती है और विभाग को सभी सक्रिय अभियानों की लगभग वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रत्येक आउटडोर एसेट की अलग-अलग ट्रैकिंग संभव हो पाती है और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।      इसी क्रम में जनसंपर्क आयुक्त  रजत बंसल ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को पैनल में शामिल सभी एजेंसियों के साथ एक कार्यशाला आयोजित की। उन्होंने आउटडोर मीडिया की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए तकनीक आधारित ”प्रचार ऐप” समाधान अपनाने पर विशेष जोर दिया।      यह नई प्रणाली 01 अप्रैल 2026 से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स के लिए लागू की जा चुकी है और जल्द ही इसे एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग तथा डिजिटल वॉल पेंटिंग्स जैसे अन्य प्रारूपों तक भी विस्तारित किया जाएगा।      इसी तरह प्रिंटिंग पर काफी शिकायतें सामने आ रही थीं, इन शिकायतों के कारण टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। नई प्रिंटिंग पॉलिसी यथा-शीघ्र लागू की जावेगी। इस हेतु बेहतर एवं पारदर्शी पॉलिसी लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों की मुद्रण नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है।

रीवा शहर में जल प्रदाय योजना एवं सीवरेज सिस्टम कार्यों की वृहद समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा शहर में संचालित जल प्रदाय योजना एवं सीवरेज सिस्टम से संबंधित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समय-सीमा तथा वित्तीय प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएँ, जिससे आम नागरिकों को समय पर सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास  संजय दुबे, आयुक्त  संकेत भोंडवे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जल प्रदाय व्यवस्था के शेष सभी कार्य, विशेषकर ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण एवं जल वितरण नेटवर्क का विस्तार, आगामी वर्षा ऋतु से पहले हर स्थिति में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों में नागरिकों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित न हो, इसके लिए कार्यों को सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाए। आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर उन्होंने बल दिया। सीवरेज सिस्टम की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने शेष पाइपलाइन बिछाने के कार्य तथा हाउस सर्विस कनेक्शनों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवरेज नेटवर्क का समय पर पूर्ण होना शहरी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है, इसमें किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने एसटीपी निर्माण कार्य को भी प्राथमिकता से पूर्ण करने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए

ग्राम हांफा में मनाया जाएगा भगवान श्री नृसिंह देव जी का प्रगटोत्सव”

 सकरी   (कैलाश वस्त्रकार)ग्राम हांफा में कल 30 अप्रैल, गुरुवार को भगवान श्री नृसिंह देव जी का पावन प्रगटोत्सव बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ बघर्रा पाठ मंदिर परिसर में भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे ग्राम सहित आसपास क्षेत्रों में उत्साह का माहौल बना हुआ है।मंदिर के आचार्य पंडित धनेश उपाध्याय ने समस्त ग्रामवासियों, भक्त माताओं,बुजुर्गों एवं युवा साथियों से इस पावन उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित करने अपील की है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ग्राम की एकता और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।उत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में भगवान नृसिंह नाथ की विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, छप्पन भोग-प्रसाद वितरण, महिला संकीर्तन एवं रामायण पाठ का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के अनुसार संध्या 6:30 बजे से महाआरती एवं उसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भोग प्रसाद भंडारे की व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से इस आयोजन को और अधिक भव्य बनाने के लिए अपनी श्रद्धा अनुसार तन मन धन से उपस्थिति का आग्रह किया है। बघर्रा पाठ महराज ग्राम हांफा के सुरक्षा प्रहरी के रूप में स्थापित मान्य देवता माने जाते हैं। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार पुराने समय में जब ग्राम के चारों ओर घना जंगल हुआ करता था और जंगली जानवर मवेशियों को नुकसान पहुंचाते थे, तब ग्रामवासियों ने इस समस्या के समाधान हेतु गोकने नाला के किनारे ऊंचे स्थान पर बघर्रा पाठ महराज की स्थापना की थी। तभी से ग्राम की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और मंगल कार्यों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। भक्तजन बघर्रा पाठ महाराज जी को नरसिंह देव का प्रतिरूप मानते है। आस पास के ग्रामीण भक्तजन विवाह के बाद  नववधू के गृह प्रवेश से पूर्व सबसे पहले बघर्रा पाठ महराज के दर्शन और आशीर्वाद लेते है, इसी प्रकार प्रत्येक मांगलिक कार्य उनकी पूजा-अर्चना के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है।भगवान श्री नृसिंह देव जी का प्रगटोत्सव कार्यक्रम  को सफ़ल बनाने के लिए पंडित धनेश उपाध्याय एवं श्रद्धालुगण जुटे हुए है।

4 लाख 88 हजार किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन

4 लाख 88 हजार किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन बड़े एवं मध्यम श्रेणी के 1.60 लाख किसानों ने स्लॉट कराये बुक भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में 4 लाख 88 हजार 270 किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले किसानों को 2548 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान किए गए हैं। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रो पर प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र किया गया। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 60 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

एमपी टूरिज्म को मिला ‘लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन’ का प्रतिष्ठित सम्मान

एमपी टूरिज्म को मिला लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन का प्रतिष्ठित सम्मान जयपुर में फिक्की ट्रैवल एंड टूरिज्म एक्सीलेंस अवॉर्ड्स में मिला गौरव अतिरिक्त प्रबंध संचालक डॉ. बेडेकर ने प्राप्त किया सम्मान जीआईटीबी 2026 में आकर्षण का केंद्र बना मध्यप्रदेश पेवेलियन भोपाल  वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान को और अधिक मजबूत बनाते हुए, एमपी टूरिज्म को जयपुर में आयोजित ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार (जीआईटीबी) 2026 में प्रतिष्ठित “लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान फिक्की द्वारा, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और राजस्थान पर्यटन के सहयोग से आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (द्वितीय संस्करण) में दिया गया। यह पुरस्कार अतिरिक्त प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने ग्रहण किया। यह सम्मान मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड, डॉ. इलैयाराजा टी ने कहा कि जीआईटीबी 2026 में मिला यह सम्मान मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है। हमारा प्रयास हमेशा से ऐसे पर्यटन को बढ़ावा देना रहा है, जिसमें हमारी समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जीवंत परंपराओं का अनुभव, सब एक साथ मिल सके। हम अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर मध्यप्रदेश को विश्व के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। जीआईटीबी 2026 में आकर्षण का केंद्र बना मध्यप्रदेश पवेलियन जयपुर में 26 से 28 अप्रैल तक आयोजित जीआईटीबी 2026 में देश-विदेश के प्रमुख टूर ऑपरेटर, ट्रैवल ट्रेड से जुड़े हितधारक और विशेषज्ञ शामिल हुए। आयोजन के दूसरे दिन भी एमपी टूरिज्म बोर्ड अपने विशेष पेवेलियन के माध्यम से विरासत, आध्यात्मिकता, वन्य-जीव और सांस्कृतिक अनुभवों की विविधता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। पेवेलियन में पारंपरिक ‘बधाई’ नृत्य की जीवंत प्रस्तुतियां दर्शकों को राज्य की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से परिचित करा रही हैं। साथ ही ‘सेव’, ‘गजक’ और ‘आम पना’ जैसे स्थानीय व्यंजनों के माध्यम से आगंतुकों को मध्यप्रदेश के स्वाद का अनुभव भी कराया जा रहा है। मध्यप्रदेश अपने पर्यटन परिदृश्य को क्यूरेटेड अनुभवों और थीमैटिक सर्किट्स के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा है। पेवेलियन में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों, प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों और आध्यात्मिक स्थलों के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन, वेलनेस और ईको-टूरिज्म जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है।  व्यापारिक सहभागिता के माध्यम से वैश्विक साझेदारियों का विस्तार मध्यप्रदेश का प्रतिनिधिमंडल अंतर्राष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल प्रोफेशनल्स के साथ पूर्व निर्धारित B2B बैठकों में भाग ले रहा है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना और इनबाउंड पर्यटन के अवसरों का विस्तार करना है। ये संवाद ज्ञान आदान-प्रदान, यात्रा योजनाओं के विकास और वैश्विक पर्यटन उत्पादों में मध्यप्रदेश के समावेशन को सुदृढ़ कर रहे हैं। मध्यप्रदेश निरंतर एक अनुभव-आधारित पर्यटन गंतव्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है। जीआईटीबी जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली यह उपलब्धि उत्कृष्टता, सतत विकास और सांस्कृतिक प्रामाणिकता के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो इसे वैश्विक यात्रियों के लिए “अतुल्य भारत का हृदय” बनाती है।  

कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या, गांधीसागर और नौरादेही के जंगल बने नए घर, आठ बाड़े तैयार, जल्द शिफ्ट होंगे चीते

श्योपुर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से चीतों को अब नौरादेही अभयारण्य में भी बसाने की तैयारी है। फिलहाल वहां बाड़ा निर्माण चल रहा है। दो माह में काम पूरा होने की संभावना है। यही वजह है कि जुलाई में चार चीते शिफ्ट किए जा सकते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में चीतों का दूसरा घर गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी दो और चीते भेजने का प्लान है। शिफ्टिंग जून में संभव है। गांधीसागर में शिफ्ट चीतों को सड़क मार्ग से ले जाया गया था। बोत्सवाना और भारतीय चीतों में से जाएंगे कूनो में कुल 54 चीते हैं। इनमें 37 भारतीय हैं। बताया जा रहा है कि जिन चीतों को शिफ्ट किया जाना है, उनमें बोत्सवाना के नौ में से 4 और 2 भारतीय चीते होंगे। इनमें आशा के दोनों शावक केएपी-2 और केएपी-3 हो सकते हैं। ये वर्तमान में राजस्थान की सीमा में घूम रहे हैं। 440 हेक्टेयर में आठ बाड़े तैयार सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य (वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) में चीतों के लिए मुहली, सिंगपुर और झापन रेंज के लगभग 440 हेक्टेयर में आठ विशेष बाड़े बनाए जा रहे हैं। 8-10 फीट ऊंची फेंसिंग की जा रही है, जिसमें सोलर इलेिट्रक फेंसिंग का उपयोग किया जा रहा है। चीतों को पहले चार अलग-अलग छोटे बाड़ों में क्वारंटीन रखा जाएगा, उसके बाद जंगल में छोड़ा जाएगा। गांधीसागर में 64 वर्ग किमी का बाड़ा गांधीसागर अभयारण्य में 64 वर्ग किमी (लगभग 6400 हेक्टेयर) का बाड़ा है। तीन चीते 2025 में शिफ्ट किए गए थे। कब जाएंगे कितने जाएंगे यह तय होना बाकी कितने चीते कब जाएंगे ये तय होना बाकी है। नौरादेही में बाड़ा निर्माण चल रहा है। -उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, चीता प्रोजेक्ट, कूनो नेशनल पार्क