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मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सामने म.प्र. और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ एमओयू हस्ताक्षर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में म.प्र. और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ एमओयू लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग के लिए बनी सहमति संयुक्त अरब अमीरात स्थित वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है डीपी वर्ल्ड भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में बुधवार को दावोस में मध्यप्रदेश और वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन क्षेत्र की संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) में स्थित अग्रणी कंपनी डीपी वर्ल्ड के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मध्यप्रदेश शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने एवं डीपी वर्ल्ड की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा वित्त एवं व्यवसाय विकास अधिकारी श्री अनिल मोहता ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। इस अवसर पर डीपी वर्ल्ड के समूह अध्यक्ष श्री सुल्तान अहमद बिन सुलायेम उपस्थित रहे। इस एमओयू के माध्यम से औद्योगिक विकास और निवेश सहयोग से जुड़े विषयों पर सहमति बनी, जो राज्य में लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। एमओयू में डीपी वर्ल्ड द्वारा मध्यप्रदेश में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। यह पहल राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक सप्लाई चेन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण एवं बुनियादी ढांचे के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। एमओयू के दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और औपचारिक रूप से समझौता दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। यह समझौता ज्ञापन मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स और व्यापार के क्षेत्र में एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।  

26 जनवरी पर तिरंगा फहराने के लिए राज्यपाल और सीएम के साथ मंत्री किस जिले में जाएंगे? देखें पूरी लिस्ट

भोपाल  देश के अन्य राज्यों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए एक पत्र जारी किया है और बताया है कि इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों कौन से प्रतिनिधि कहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। राज्य के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस पत्र में बताया गया है कि राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मध्य प्रदेश में 26 जनवरी पर मनाए जाने वाले भारत के गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरो शोर से चल रही है। इस दिन प्रदेशभर के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सूची जारी करते हुए बताया है कि, इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों में कौन किस जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहराएगा। प्रदेश के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस लिस्ट में बताया गया है कि, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे राज्यपाल विभाग की ओर से जारी सूची क अनुसार, राज्यपाल मंगुभाई पटेल राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान में होने वाले मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने गृह नगर उज्जैन में होने वाले आयोजन में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर जिले में ध्वज फहराएंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। पत्र के अनुसार, प्रदेश के 23 जिले ऐसे भी हैं, जहां पर स्थानीय कलेक्टर ही ध्वज फहराएंगे। जबकि, शेष में जनप्रतिनिधी झंडावंदन करेंगे। किस जिले में कौनसा मंत्री फहराएगा ध्वज -इंदौर : जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री -सागर : राजेन्द्र शुक्ल, उप मुख्यमंत्री -रतलाम : कुंवर विजय शाह, मंत्री -रीवा : प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री -छिंदवाडा : राकेश सिंह, मंत्री -सिवनी : करण सिंह वर्मा, मंत्री -कटनी : उदय प्रताप सिंह, मंत्री -जबलपुर : सम्पतिया उईके, मंत्री -बुरहानपुर : तुलसीराम सिलावट, मंत्री -दतिया : एदल सिंह कंषाना, मंत्री -नीमच : निर्मला भूरिया, मंत्री -गुना : गोविन्द सिंह राजपूत, मंत्री -खरगोन : विश्वास सारंग, मंत्री -शाजापुर : नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री -आगर मालवा : नागर सिंह चौहान, मंत्री -शिवपुरी : प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्री -अशोकनगर : राकेश शुक्ला, मंत्री -राजगढ़ : चेतन्य काश्यप, मंत्री -दमोह : इंदर सिंह परमार, मंत्री -सीहोर : कृष्णा गौर, राज्यमंत्री -खंडवा : धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, राज्यमंत्री -मंडला : दिलीप जायसवाल, राज्यमंत्री -बड़वानी : गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री -विदिशा : लखन सिंह पटेल, राज्यमंत्री -रायसेन : नारायण सिंह पंवार, राज्यमंत्री -नर्मदापुरम : नरेंद्र शिवाजी पटेल, राज्यमंत्री -डिंडौरी : प्रतिमा बागरी, राज्यमंत्री -अनूपपुर : दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री -मैहर : राधा सिंह, राज्यमंत्री इन 23 जिलों में कलेक्टर ध्वज फहराकर पढ़ेंगे सीएम का संदेश 1-देवास, 2-धार, 3-झाबुआ, 4-अलीराजपुर, 5-मुरैना, 6-मंदसौर, 7-श्योपुर, 8-भिंड, 9-सीधी, 10-सतना, 11-मऊगंज, 12-शहडोल, 13-उमरिया, 14-पन्ना, 15-छतरपुर, 16-टीकमगढ़, 17-निवाड़ी, 18-बैतूल, 19-हरदा, 20-सिंगरौली, 21-नरसिंहपुर, 22-बालाघाट, 23-पांढुर्णा।

SC का बड़ा आदेश: धार भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग टाइमिंग निर्धारित

धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में विवादित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के साथ नमाज भी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला देते हुए कहा कि हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी। वहीं, मुसलमानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक शुक्रवार की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने भोजशाला में पूजा-अर्चना के लिए कानून व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया और कुछ उपाय भी सुझाए। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विवादित भोजशाला में नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों की संख्या जिला प्रशासन को बताई जाए। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। एएसआई की 7 अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमान हर शुक्रवार यहां नमाज पढ़ सकते हैं। पिछले 23 सालों से यह व्यवस्था है। इस बार शुक्रवार के दिन ही बसंत पंचमी होने की वजह से प्रशासन के लिए सामने चुनौती खड़ो हो गई है। दरअसल, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई याचिका में आगामी बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026, शुक्रवार) को भोजशाला में केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा की अनुमति देने और मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोकने की मांग की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिंदू पक्ष को बसंत पंचमी पर पूरे दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति दे दी है, लेकिन नमाज के समय (1-3 बजे) स्थान उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है.  इसके बाद CJI ने महाधिवक्ता से पूछा कि क्या आप ये व्यवस्थाएं कर पाएंगे? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि इससे पूजा पूरे दिन जारी रह सकती है. मुस्लिम पक्ष को देनी होगी अनुमानित संख्या इसके अलावा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को गुरुवार शाम तक धार के जिला मजिस्ट्रेट को नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बतानी होगी, ताकि पास जारी हो सकें और प्रवेश-निकास की व्यवस्था हो सके. अदालत ने दोनों पक्षों से अपील की कि वे आपसी सम्मान, सहिष्णुता और सहयोग दिखाएं तथा प्रशासन के साथ मिलकर शांति बनाए रखें. पहले भी चुका है ऐसा वहीं, कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि मुख्य याचिका पहले ही अप्रभावी हो चुकी है और ये आवेदन एक लंबित मामले में दायर किया गया है. उन्होंने अदालत को बताया कि पहले की व्यवस्थाओं के अनुसार कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जा सकते हैं. साथ ही एएसजी और महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि पहले की तरह पूरी व्यवस्था की जाएगी.   मस्जिद कमेटी की ओर से पेश हुए खुर्शीद दूसरी ओर मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा की अनुमति दी है. उन्होंने कहा, 'ऐसा ही दोबारा होने दिया जाए. जुमा की नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक होती है, हम 3 बजे तक जगह खाली कर देंगे. हम न्यूनतम समय मांग रहे हैं और खुशी से समायोजन करने को तैयार हैं. पूजा बाहर भी जारी रह सकती है.' हिंदू पक्ष का तर्क एएसआई की ओर से पेश वकील ने बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है और वे हिंदू पक्ष को अनुमति दे सकते हैं. हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने जोर देकर कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नमाज शाम 5 बजे कर ली जाए तो हिंदू पक्ष पूजा पूरी कर 5 बजे जगह खाली कर देगा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पंडाल-बैरिकेड लगाए जा सकते हैं, जबकि मुख्य प्रवेश द्वार साझा रहेगा तो न्यायमूर्ति जे. बागची ने कहा कि एक तरफ हवन कुंड रखा जाए और दूसरी तरफ नमाज के लिए विभाजन किया जाए, क्या ये संभव है? इससे पहले वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन थी। तब भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं। इस बार प्रशासन ने पहले से ही यहां सुरक्षा बढ़ा दी है।

शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोती का नाम रखा इस देवी के नाम पर, जानें उसका अर्थ

भोपाल  मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय पिता बन गए. उनकी पत्नी अमानत ने एक बेटी को जन्म दिया. इसी खुशी में शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार की रात को अपने X हैंडल पर अपनी पोती से जुड़ा एक भावुक वीडियो शेयर किया. उस पोस्ट में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि, 'हमारे घर आज लाडली लक्ष्मी आई है. कार्तिकेय पिता बन गए और अमानत मां. कोकिला अब दादी जी हैं और मां दादा. कुणाल और ऋद्धि चाचा और चाची. अनुपम जी नाना, रुचिता जी नानी और आर्यन मामा. 2025 में हमारे घर दो बेटियां आईं- अमानत और ऋद्धि. 2026 में फिर बेटी इला का शुभ आगमन हुआ. स्वागतम लक्ष्मी.' पोती का नाम रखा है 'इला', ये है मतलब शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोती का नाम इला रखा है. यह नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ मुख्य रूप से पृथ्वी, वाणी और उर्वरता की देवी से जुड़ा है, जो वैदिक साहित्य में 'इदा' के रूप में भी जानी जाती हैं और सरस्वती तथा भारती के साथ पूजी जाती हैं. पुराणों के अनुसार, इला वैवस्वत मनु की पुत्री और बुध देवता की पत्नी हैं, जिनसे पुरूरवा का जन्म हुआ. आसान शब्दों में कहें तो इला का संबंध शक्ति, पवित्रता और सुंदरता से है. संस्कृत के अलावा यह नाम हिब्रू, और फिनिश जैसी विभिन्न भाषाओं से जुड़ा है, जहां इन्हें शक्ति, सहनशक्ति और आनंद का प्रतीक माना जाता है. शिवराज सिंह चौहान बने दादा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दादा बन गए हैं। उनके बड़े बेटे कार्तिकेय और बहू अमानत के घर बेटी का जन्म हुआ है। पूर्व सीएम ने अपने घर आई इस खुशखबरी को सोशल मीडिया पर शेयर किया। अपनी पोस्ट में उन्होंने अपनी पोती का नाम भी बताया। उन्होंने बताया कि उनके घर लाडली लक्ष्मी आई है और कार्तिकेय पिता बन गए हैं और अमानत मां बन गई हैं। चौहान ने बताया कि कोकिला अब दादी जी हैं और मैं दादा। साथ ही कुणाल और ऋद्धि अब चाचा-चाची बन गए हैं। शिवराज ने आगे बताया कि पिछले साल हमारे घर दो बेटियां आई अमानत और ऋद्धि, वहीं अब तीसरी बेटी आई है। अपनी इस पोस्ट में उन्होंने अपनी पोती के नाम का खुलासा भी कर दिया। उन्होंने बताया कि 2026 में बेटी इला का शुभ आगमन हुआ है। दादी खुशी से बोलीं- लाडली लक्ष्मी आई है अपनी पोस्ट के साथ शिवराज ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें डॉक्टर उनकी पोती को लेकर गोद में लेकर आते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि बैकग्राउंड में गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए कृषि मंत्री की आवाज सुनाई दे रही है। इस दौरान वहां पर दोनों परिवारों के सदस्य मौजूद दिखाई दे रहे हैं। शिवराज के बेटे कार्तिकेय बेटी को सबसे पहले गोद में लेते हैं और उसके कान में कुछ सुनाते हैं। इसी दौरान दादी बनी साधना चौहान खुशी से उछलते हुए कहती हैं हमारे घर लाडली लक्ष्मी आई है। पोती के कान में दादू ने सुनाया गायत्री मंत्र इसके बाद डॉक्टर बेटी का नाम पूछती हैं तो कार्तिकेय उन्हें इला नाम बताते हैं। इसके बाद पहले कार्तिकेय और फिर दादू बने शिवराज सिंह चौहान अपनी पोती के कानों में गायत्री मंत्र सुनाते हैं। बता दें कि शिवराज सिंह चौहान के दो बेटे हैं, जिनमें से बड़े बेटे का नाम कार्तिकेय और छोटे बेटे का नाम कुणाल है। कार्तिकेय की शादी पिछले साल 6 मार्च को जोधपुर के भव्य उम्मेद भवन पैलेस में लिबर्टी शू कंपनी के डायरेक्टर अनुपम बंसल की बेटी अमानत बंसल से हुई थी। इस समारोह के बाद दिल्ली में एक ग्रैंड रिसेप्शन भी रखा गया था। जिसमें राजनीति और उद्योग जगत की कई हस्तियां शामिल हुई थीं। शिवराज सिंह ने दिखाई अपनी पोती की पहली झलक हॉस्पिटल से सामने आए वीडियो में शिवराज सिंह का पूरा परिवार बहुत ही खुश नजर आ रहा है. जैसे ही ऑपरेशन थिएटर से बच्ची को बाहर लाया गया, अस्पताल में खुशी का माहौल बन गया. दादी साधना सिंह अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं और खुश होते हुए बोलीं कि, 'घर में लक्ष्मी आई है'. पापा बने कार्तिकेय ने बेटी को अपनी गोद में उठाते हुए उसका नाम 'इला' रखा. गायत्री मंत्र से किया पोती इला का स्वागत वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि पोती के बाहर आते ही शिवराज सिंह चौहान गायत्री मंत्र का जाप करते हुए दिख रहे हैं. उसके बाद पोती को गोद में लेने के बाद भी शिवराज सिंह ने उसके कान में एक बार फिर गायत्री मंत्र पढ़ा. कार्तिकेय भी अपनी बेटी को थामे हुए मंत्रों का जप करते नजर आए. 

CS अनुराग जैन का कड़ा संदेश: कलेक्टर-SP को दिया अल्टीमेटम, अब नहीं चलेगी मनमानी

भोपाल  मध्यप्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है – अफसर सुधरें, जनता के काम रुकने नहीं चाहिए, नहीं तो अंजाम ठीक नहीं होगा।” कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के तहत वर्चुअल समीक्षा के दौरान CS जैन ने संभागायुक्त, कलेक्टर, DIG, पुलिस कमिश्नर और SP को दो-टूक निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिलों में किसी भी तरह का अवैध काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, खासकर अवैध खनन पर तत्काल और सख़्त कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी साफ किया कि CM हेल्पलाइन की शिकायतों के निपटारे में लापरवाही मुख्यमंत्री को नाराज़ कर रही है। अवैध खनन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर फटकार CS जैन ने समीक्षा में पाया कि कई जिलों में अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। भिंड जिले का उदाहरण देते हुए उन्होंने SP से सीधा सवाल किया – पुलिस का डर कहां है? ऐसे नहीं चलेगा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को लेकर भी नाराज़गी जताई। भिंड से बड़ी संख्या में नवजातों को ग्वालियर रेफर किए जाने पर कलेक्टर को निर्देश दिए कि जिले में ही बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। एयर एंबुलेंस में भी बड़ा अंतर समीक्षा में सामने आया कि रीवा (44), जबलपुर (21), भोपाल (14), छतरपुर (11) और ग्वालियर (5) ने एयर एंबुलेंस सेवा का उपयोग किया जबकि 32 जिलों ने एक भी बार सेवा नहीं ली, जिसे CS ने गंभीर लापरवाही माना जिलों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड ST-SC मामलों में मुआवजा वितरण अव्वल: जबलपुर, सीहोर, राजगढ़ पिछड़े: विदिशा, मऊगंज, भोपाल शहरी सड़क हादसों में कमी आगे: बैतूल, रतलाम, आगर मालवा   पिछड़े: गुना, डिंडौरी, मैहर, मुरैना, श्योपुर, सीधी, अनूपपुर, दमोह, इंदौर, विदिशा, टीकमगढ़ नामांतरण प्रकरण निपटारा अव्वल: दतिया, हरदा, बड़वानी, बालाघाट, खंडवा पीछे: दमोह, सीधी सीमांकन व बंटवारा प्रकरण  आगे: मंडला, बड़वानी, छतरपुर, अशोकनगर पीछे: मैहर, टीकमगढ़, सीधी एक बगिया मां के नाम योजना आगे: खंडवा, सिंगरौली  पीछे: सतना, मुरैना राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम  टॉप: इंदौर, देवास पिछड़े: भोपाल, ग्वालियर नर्मदा परिक्रमा पथ सीवरेज योजना आगे: अनूपपुर, नरसिंहपुर, खंडवा पीछे: खरगोन, नर्मदापुरम साफ संदेश: अब बहाने नहीं चलेंगे मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट कर दिया कि अब कामकाज में लापरवाही, जनता की अनदेखी और अवैध गतिविधियों पर सीधे एक्शन होगा। अच्छा काम करने वाले अफसरों की पीठ थपथपाई गई, लेकिन पिछड़े जिलों को अंतिम चेतावनी भी दे दी गई।

अशोकनगर के कलेक्टर आदित्य सिंह की अचानक बर्खास्तगी, शिकायत दिल्ली तक पहुंची थी

अशोकनगर   मोहन सरकार ने  देर रात अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह का ट्रांसफर कर दिया है. आनंदपुर ट्रस्ट के पदाधिकारी की शिकायत पर अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाया गया है. उनकी जगह अब साकेत मालवीय अशोकनगर कलेक्टर का पद संभालेंगे. आदित्य सिंह को हटाकर भोपाल गैस त्रासदी राहत व पुनर्वास विभाग में उपसचिव के पद पर भेजा गया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने देर रात तबादले के ये आदेश जारी कर दिए हैं. संगठन से शिकायत के बाद हटाए गए आदित्य सिंह आनंदपुर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने दिल्ली भाजपा हाई कमान से अशोकनगर में पदस्थ कलेक्टर आदित्य सिंह की शिकायत की थी. निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बाद प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाया गया, जबकि उनकी जगह पर साकेत मालवीय को अशोकनगर जिले की कमान सौंपी गई है. बुधवार देर शाम नए कलेक्टर के नाम की घोषणा कर दी गई है. आनंदपुर ट्रस्ट के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर आदित्य सिंह को लेकर सीधे भाजपा हाई कमान दिल्ली से शिकायत की थी. शिकायत सामने आते ही सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया.और कलेक्टर को हटाने के लिए अंदरूनी स्तर पर प्रयास तेज कर दिए. आदित्य सिंह पर क्या आरोप? अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाए जाने का प्रमुखा कारण आनंदपुर ट्रस्ट विवाद है. आनंदपुर ट्रस्ट ने कथित तौर पर आदित्य सिंह द्वारा 3 करोड़ रु मांगने के आरोप लगाए थे, जिसके बाग ये कार्रवाई की गई है. हालांकि, ट्रस्ट द्वारा किसी भी प्रकार की शिकायत या आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया गया है. कलेक्टर को हटाने से पहले चुनाव आयोग से क्यो पूछा गया? दरअसल, मध्य प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया SIR का काम अंतिम चरण में चल रहा है. इसे लेकर सरकार 21 फरवरी तक सीधे कलेक्टरों को हटाने का फैसला नहीं दे सकती, जिसके कारण वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सरकार ने तीन आईएएस का पैनल तैयार किया और चुनाव आयोग को भेजा गया. इसमें आयोग ने साकेत मालवीय के नाम पर अपनी मोहर लगाई है. कलेक्टर मालवीय को व्यापम भोपाल से अशोकनगर कलेक्टर बनाया गया है. मालवीय भी आदित्य सिंह की तरह 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. 25 जनवरी को होना है सम्मान, हो गया ट्रांसफर इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आईएएस आदित्य सिंह का 25 जनवरी को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान होना है, उसके पहले ही उनका कई आरोपों के साथ ट्रांसफर हो गया. दरअसल, वोटर लिस्ट में एसआईआर के काम में सबसे अच्छा परफॉर्म करने पर अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को राज्यपाल मंगुभाई पटेल के हाथों 25 जनवरी को सम्मान मिलना तय किया गया था.

भोजशाला की 700 साल पुरानी त्रासदी: 271 साल तक ज्ञान का केंद्र रही, जानें इतिहास

धार  क्या काशी की ज्ञानवापी के बाद अब मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में हिंदुओँ को पूजा का हक मिलेगा? दरअसल ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में मुस्लिम मस्जिद है. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू मंदिर होने की मान्यता है.ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू पक्ष पूजा अर्चना की इजाजत मांग रहा है. ज्ञानवापी के सर्वे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदुओं को ज्ञानवापी में पूजा की इजाजत दे दी थी. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला के भी ASI सर्वे का आदेश कोर्ट ने दिया था. अब भोजशाला में भी हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि पूजा की इजाजत मिल जाएगी. 23 जनवरी को बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर धार भोजशाला पर एक बार फिर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। दरअसल, इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है। हिंदू संगठनों ने दिन भर माता सरस्वती की पूजा- अर्चना की प्रशासन से इजाजत मांगी है।  इससे पहले 2003 से लेकर 2016 के बीच तीन बार ऐसा मौका आया जब बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी। तीनों ही बार विवाद की स्थिति बनी। इस बार ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे दिन पूजा के अधिकार की मांग है। इस पर आज यानी 22 जनवरी को सुनवाई है। धार की भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। इसके बाद कई बार मुस्लिम आक्रांताओं ने भोजशाला पर हमले किए। कई सालों तक मां सरस्वती की प्रतिमा भोजशाला में दबी रही। इसके बाद अंग्रेज आए। वे यहां से खुदाई कर वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम ले गए। खिलजी के आक्रमण से लेकर अब तक भोजशाला को उसकी पहचान दिलाने के लिए संघर्ष जारी है। खिलजी ने कईं बार किया आक्रमण  भोजशाला का निर्माण परमार वंश के महान राजा राजा भोज ने 1034 ईस्वी के आसपास किया था. वह एक महान योद्धा के साथ ही कला साहित्य और विज्ञान के संरक्षक भी थे. उन्होंने ही यहां वाग्देवी यानी मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित की थी. उस समय यह एक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका था. जहां दुनिया भर से लोग व्याकरण और खगोल विज्ञान पढ़ने आते है. ‌ वाग्देवी की यही प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है. कहा जाता है कि 1875 के आसपास खुदाई के दौरान यहां से सरस्वती माता की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा मिली थी. जिसे एक अंग्रेज अफसर मेजर किनकैड अपने साथ लंदन ले गया. लंबे समय इसे वहां से वापस लाकर भोजशाला में ससम्मान स्थापित करने की मांग की जा रही है. भोजशाला विवाद के दौरान भी यही मूर्ति इसका सबसे बड़ा प्रमाण बनती है. दरअसल खिलजी के धार पर आक्रमण कर भोजशाला को काफी नुकसान पहुंचाया था. इसके बाद मुस्लिम शासकों ने इसके ढांचे में भी कई बदलाव किए. 15 सी सदी के आसपास मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने यहां कुछ उसको मस्जिद के रूप में भी इस्तेमाल किया था. उसी दौरान यहां कुछ दरगाह और मस्जिद भी बनाई गई. मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद मानता है. बसंत पंचमी पर यहां भव्य आयोजन होते रहे हैं जबकि कईं बार विवाद की स्थिति भी बन चुकी है. धार में पहले कई बार धार्मिक तनाव रह चुका है. लेकिन धार्मिक गुरु और प्रशासन की सहमति से अब सब कुछ शांत वातावरण में होता है. भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होते है. मंगलवार को हिंदू पूजा करते है जबकि शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते है. बाकी दिनों के लिए यह स्थल पर्यटकों के लिए खुला रहता है. यहां बड़ी संख्या में पुरानी मूर्तियां और कलाकृति देखने को मिलती है. ‌ भोजशाला की बनावट देखते ही आपको उस समय की हिंदू संस्कृति और कलाकृति की झलक मिलती है. ‌यहां के खंभों पर संस्कृत में कई शिलालेख खुदे हुए है. जिनमें व्याकरण और काव्य के नियम लिखे गए है. दीवारों पर परमार काली मूर्तियां, श्लोक और संरचनाएं दिख जाती है. भोजशाला काफी बड़े क्षेत्र में फैली हुई है जानकार मानते है कि इसकी संरचना किसी मस्जिद जैसी नहीं बल्कि एक पारंपरिक भारतीय पाठशाला या मंदिर जैसी है. एक बार फिर वसंत पंचमी से पहले भोजशाला का मुद्दा गरमा गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 2024 में ही यहां वैज्ञानिक सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट बनाई है. इस सर्वे का मकसद यह पता लगाना था कि मौजूदा ढांचे के नीचे क्या कोई मंदिर के अवशेष मौजूद है. फिलहाल इस‌ सर्वे की रिपोर्ट आना बाकि है. अगर आप भी भोजशाला जाना चाहते है तो मंगलवार और शुक्रवार छोड़कर कभी भी जाकर इसके इतिहास को और करीब से देख सकते हैं. अब जानिए कोर्ट में क्या है भोजशाला के मामले का स्टेटस भोजशाला मंदिर या मस्जिद, साइंटिफिक सर्वे पूरा हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1 मई 2022 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि भोजशाला का पूर्ण आधिपत्य हिंदुओं को सौंपा जाए। ये मंदिर है या मस्जिद इसका कैरेक्टर तय करने के लिए एएसआई से साइंटिफिक सर्वे कराया जाए। 11 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने एएसआई को भोजशाला का साइंटिफिक सर्वे कर 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। एएसआई ने और समय मांगा जिसपर 2 जुलाई 2024 तक का समय दिया गया। एएसआई ने फिर समय मांगा जिसपर कोर्ट ने 15 जुलाई तक की तारीख दी। इस तारीख को एएसआई ने साइंटिफिक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी। एएसआई ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और कार्बन डेटिंग मेथड की मदद से अपना सर्वे शुरू किया। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दूसरी तरफ हाईकोर्ट के 11 मार्च के 2024 के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2024 को विशेष अनुमति याचिका लगाई। इसमें पूरा पक्ष सुनने की मांग की गई। 1 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर दिया। जिसमें साइंटिफिक सर्वे पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सर्वे रिजल्ट के आधार पर बिना सुप्रीम … Read 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सिंगरौली में नाले में पड़ा मिला CISF जवान, अधमरी हालत में मिली सूचना से हड़कंप

सिंगरौली  मध्य प्रदेश के सिंगरौली में खाकी पर हमले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कबाड़ माफिया अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि, वे सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों पर भी जानलेवा हमला करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। इसी कड़ी में जिले के अमलोरी खदान अलाके में केबल चोरों ने सीआईएसएफ जवान पर जानलेवा हमला कर उसे अधमरी हालत में नाले में फेंक दिया और मौके से फरार हो गए। गंभीर हालत में जवान के मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच में जुटी पुलिस के मुताबिक, सीआईएसएफ के प्रधान आरक्षक सतीशचंद्र भारती पर ये हमला 18-19 जनवरी की मध्य रात्रि करीब 02 बजेहुआ है। जब निरीक्षक विकास कुमार रूटीन चेकिंग पर निकले तो व्यू-पॉइंट पोस्ट से जवान गायब मिला। तलाश के दौरान वो पास के ही नाले में मरणासन्न अवस्था में पड़ा मिला। अपराधियों ने लाठी-डंडों से जवान को इतना पीटा कि, उनके शरीर पर एक भी हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा। यही नहीं, बदमाशों ने जवान को झोले के पट्टे से बांधकर नाले में फेंक दिया, ताकि वे बेखौफ होकर चोरी कर सकें। करीब 15 मीटर कीमती केबल तार लेकर हमलावर मौके से फरार हो गए। गंभीर हालत में जवान वाराणसी रेफर गंभीर हालत में जवान को उपचार के लिए सिंगरौली जिला अस्पताल लाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत ही वाराणसी रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि, जवान की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। इस मामले ने जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है और वो ये है कि, अगर यहां सीआईएसएफ जैसे महत्वपूर्ण विभाग का जवान ही सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन क्या है? आरोपियों पर 10 हजार इनाम अधर, घटना सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है। शहर सीएसपी पीएस. सिंह परस्ते ने बताया कि, अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 307 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। कबाड़ माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस की कई टीमें मैदान में हैं। फरार अज्ञात आरोपियों की सूचना देने वाले को 10 हजार का इनाम देने की घोषणा की गई है।

मध्यप्रदेश में 25 जनवरी से तेज सर्दी का असर: मावठा और कोहरे के बाद बढ़ेगी ठिठुरन

भोपाल  मध्यप्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मावठा गिरने और सुबह-शाम कोहरा छाने के बाद प्रदेश में सर्दी और तीखी होगी। मौसम विभाग भोपाल के मुताबिक, गुरुवार को ग्वालियर-दतिया सहित 5 जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार से उत्तरी मध्यप्रदेश में बारिश के आसार बन रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि 25 जनवरी से न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिम-उत्तर भारत और उत्तरप्रदेश के ऊपर दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन सक्रिय हैं। इसके साथ ही एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी असर दिखा रहा है। ये सभी सिस्टम आगे बढ़ रहे हैं, जिसका असर पहले यूपी-बिहार में नजर आया और अब 24 जनवरी से मध्यप्रदेश में भी दिखेगा। इस दौरान बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि 23 जनवरी को ही ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश के संकेत हैं। सिस्टम गुजरते ही बढ़ेगी ठिठुरन मौसम विभाग का कहना है कि जैसे ही ये सिस्टम आगे बढ़ेंगे, उत्तर से ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ेगी। इसका सीधा असर तापमान पर पड़ेगा और रात का पारा 2 से 3 डिग्री तक नीचे आ सकता है। सिस्टम आगे बढ़ेंगे तो पारे में गिरावट होगी मौसम विभाग के अनुसार, जब ये सिस्टम आगे बढ़ेंगे तो न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी। पारा 2 से 3 डिग्री तक लुढ़क जाएगा। उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर फिलहाल उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर है। गुरुवार सुबह ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मध्यम कोहरा रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में हल्के कोहरे का असर देखने को मिला। मंदसौर सबसे ठंडा, राजगढ़-छतरपुर में भी सर्दी का असर प्रदेश में ठंड का असर भी है। मंगलवार-बुधवार की रात में मंदसौर सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ में 6.2 डिग्री, नौगांव में 7 डिग्री, शाजापुर में 7.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 7.6 डिग्री, दतिया में 7.9 डिग्री, खजुराहो में 8 डिग्री, रीवा में 8.2 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री और पचमढ़ी में पारा 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में सबसे कम 9 डिग्री रहा। भोपाल में 10.8 डिग्री, इंदौर में 12.2 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और जबलपुर में तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तरी MP में कोहरा फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्से कोहरे की गिरफ्त में हैं। गुरुवार सुबह ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मध्यम कोहरा रहा, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में हल्का कोहरा छाया रहा। मंदसौर सबसे ठंडा, कई जिलों में सर्दी  प्रदेश में ठंड का असर साफ नजर आ रहा है। मंगलवार–बुधवार की रात मंदसौर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ 6.2, नौगांव 7, शाजापुर 7.1, कटनी के करौंदी 7.6, दतिया 7.9, खजुराहो 8, रीवा 8.2, शिवपुरी 9 और पचमढ़ी में 9.2 डिग्री तापमान रहा।पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 10.8, इंदौर में 12.2, उज्जैन में 12 और जबलपुर में 12.5 डिग्री सेल्सियस रहा। क्या है वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम विभाग के मुताबिक, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाला हवा–बादलों का सिस्टम होता है। इसके सक्रिय होने पर पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। सिस्टम गुजरने के बाद उत्तर से ठंडी हवाएं चलती हैं, जिससे दिन-रात सर्दी का असर बढ़ जाता है।  क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाली हवा और बादलों का एक सिस्टम होता है। इसके एक्टिव होने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में बारिश होगी। सिस्टम आगे गुजर जाने के बाद उत्तर से आने वाली हवा ठंडी रहती है। जिससे दिन-रात ठंड का असर रहता है। ठंड के लिए इसलिए खास है जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त अहम रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं, इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे।

इंदौर में अवैध आयुर्वेदिक दवा निर्माण: बिना लैब और डिग्री के चल रही कफ सीरप फैक्ट्री

इंदौर  सांवेर तहसील के धरमपुरी सोलसिंदा स्थित रेबिहांस हर्बल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा घर में अवैध तरीके से आयुर्वेदिक कफ सीरप बनाया जा रहा था। संचालक ने इसके लिए न कोई लैब बना रखी थी और न सुरक्षा मानक थे। यहां अन्य कंपनियों के नाम से भी नकली सीरप बनाए जा रहे थे, जांच के दौरान दूसरी कंपनियों के लैबल पाए गए। दिसंबर में यहां से लिए गए सैंपल जांच में फेल हो गए जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई है। धरमपुरी के एक घर में बिना लैब व बिना सुरक्षा मानकों के आयुर्वेदिक सीरप बनाया जा रहा था। दिसंबर में जिला प्रशासन और आयुष विभाग ने कार्रवाई कर "फैक्ट्री" से सैंपल लिए थे। इन सैंपलों को जांच के लिए ग्वालियर भेजा गया था, जिनकी रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। ये सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। अवैध रूप से संचालित इस फैक्ट्री को प्रशासन ने सैंपल लेने के बाद सील कर दिया था। जांच में कफ सीरप तय मानकों पर खरा नहीं उतर सका। केमिस्ट के पास योग्यता नहीं यह फैक्ट्री सुखलिया निवासी सुरेंद्र सिंह के निर्देशन में संचालित होती थी। जांच के दौरान मौके पर केमिस्ट संजय डेविड कार्यरत मिला, जिसने बीएससी मैथ्स किया था। डेविड ने जांच के दौरान बताया था कि सीरप निर्माण का अनुभव एमको फार्मा में कार्य के दौरान प्राप्त हुआ। केमिस्ट के पास निर्धारित तकनीकी योग्यता नहीं पाई गई। प्रशासन की टीम ने आयुर्वेदिक कफ सीरप कंपनी की जांच की थी। कंपनी के पास लाइसेंस था, लेकिन ग्वालियर जांच के लिए भेजे गए सीरप के सैंपल फेल हुए हैं। कंपनी संचालक पर एफआइआर दर्ज कराई गई है और आगे भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। – शिवम वर्मा, कलेक्टर इंदौर 30 प्रकार के सीरप का निर्माण हो रहा था फैक्ट्री में 30 से अधिक प्रकार के कफ सीरप पाए गए थे। ये उत्पाद मनोमय लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड जिरकपुर पंजाब, रेबिहांस बायोटेक प्रालि देहरादून आदि अंकित पाए गए। जांच के दौरान मौके पर सीरप बनाने को लेकर इन कंपनियों से किसी प्रकार का वैध टाई-अप अनुबंध नहीं दिखाया गया था