samacharsecretary.com

भोपाल स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे, भारतीय राग गंभीर बीमारियों में भी दे रहे राहत

भोपाल  भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मिक ध्वनियां अब सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने विज्ञान की प्रयोगशाला में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। एम्स भोपाल के फिजियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा की समीक्षा आधारित स्टडी ने यह साबित किया है कि भारतीय क्लासिकल राग न सिर्फ मस्तिष्क को शांत और सक्रिय रखते हैं, बल्कि दिल को स्वस्थ, सांसों को संतुलित और तनाव को नियंत्रित करने की क्षमता भी रखते हैं। अध्ययन में शामिल 28 शोधपत्रों और 6 विशेषज्ञों के सहयोग ने यह बताया कि संगीत, विशेष रूप से राग, हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय करते हैं जो दर्द घटाते और मन को संतुलित रखते हैं। यह शोध रागों को केवल कला नहीं, बल्कि विज्ञान आधारित थेरेपी के रूप में सामने रखने का काम करता है। दिल पर भी दिखते हैं बेहतर रिजल्ट डॉ. मल्होत्रा बताते हैं कि संगीत सुनते समय दिल की धड़कन (हार्ट रेट) स्वाभाविक रूप से ऊपर–नीचे होती है। यह बदलाव दिल की “एक्सरसाइज” की तरह काम करता है। यदि पल्स लगातार एक समान रहे तो सडन कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ता है, लेकिन संगीत सुनने पर रिदमिक बदलाव दिल को मजबूत बनाते हैं। राग से होने वाले असर     तनाव घटता है     फोकस बढ़ता है     भावनात्मक संतुलन बनता है     नशा छुड़ाने में मदद मिलती है     न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में रिकवरी तेज होती है राग सिर्फ संगीत नहीं एक विज्ञान है डॉ. वरुण मल्होत्रा बताते हैं कि राग की मूल परिभाषा ही यह है कि जो मन को आनंद के रंग से भर दे, वही राग है। हर राग का एक व्यक्तित्व होता है, एक प्रभाव होता है। कुछ राग मन को शांत करते हैं, कुछ ऊर्जा बढ़ाते हैं, जबकि कुछ दिमाग के गहरे हिस्सों को सक्रिय कर हीलिंग की प्रक्रिया तेज करते हैं। राग के स्वर दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय करते हैं जो मूड, हॉर्मोन, याददाश्त, फोकस और दर्द नियंत्रण को संभालते हैं। स्वर कंपन (vibrations) ब्रेन सेल्स में माइक्रो-एक्टिवेशन करते हैं। राग सुनने से एंडॉर्फिन और एनकेफेलिन जैसे प्राकृतिक दर्द-निवारक हार्मोन एक्टिव होते हैं, जो शरीर में हीलिंग की गति तेज कर देते हैं। एंडॉर्फिन है नैचुरल मूड-लिफ्टर एंडॉर्फिन हमारे शरीर में बनने वाले प्राकृतिक हॉर्मोन हैं, जो दर्द, तनाव या टेंशन होने पर दिमाग से रिलीज होते हैं। इन्हें शरीर का “फील-गुड केमिकल” भी कहा जाता है, क्योंकि ये दर्द कम करते हैं, स्ट्रेस घटाते हैं और मूड को खुश रखते हैं। जब आप एक्सरसाइज करते हैं, हंसते हैं, पसंदीदा खाना खाते हैं, सेक्स करते हैं या मसाज लेते हैं, तब एंडॉर्फ़िन बढ़ते हैं। यही वजह है कि ऐसी गतिविधियों के बाद मन हल्का और अच्छा महसूस होता है। शरीर को हेल्दी और मानसिक रूप से स्ट्रॉन्ग रखने में एंडॉर्फ़िन की बड़ी भूमिका होती है। एनकेफेलिन दर्द भगाने वाला केमिकल एनकेफेलिन एक प्राकृतिक न्यूरोपेप्टाइड है, जो हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम में बनता है। यह शरीर के अंदर ओपिओइड रिसेप्टर्स से जुड़कर दर्द कम करने में मदद करता है, इसलिए इसे नेचुरल एनाल्जेसिक यानी प्राकृतिक पेनकिलर कहा जाता है। यह तनाव और भावनाओं को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है, जिससे मन शांत रहता है। एनकेफेलिन पांच अमीनो एसिड से बना होता है और मुख्य रूप से ब्रेन में पाया जाता है। जब शरीर दर्द, चोट या तनाव महसूस करता है, तब एनकेफेलिन तुरंत सक्रिय होकर राहत देता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)  न्यूरोसाइंस अध्ययन ने यह सिद्ध किया है कि भारतीय राग न केवल मन को छूते हैं, बल्कि मस्तिष्क की गहराई में भी स्पष्ट और मापनीय बदलाव उत्पन्न करते हैं। यूएसए के फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस शोध का नेतृत्व आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने किया है। इसमें आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों का भी सहयोग रहा। अध्ययन में आधुनिक ईईजी माइक्रोस्टेट विश्लेषण तकनीक का उपयोग कर 40 प्रतिभागियों के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया को विश्लेषित किया गया। यह तकनीक मस्तिष्क की बहुत ही सूक्ष्म और क्षणिक स्थितियों को रिकॉर्ड करती है, जिससे विज्ञानी यह समझ पाए कि कौन-से राग मस्तिष्क की किन गतिविधियों को सक्रिय या शांत करते हैं। न्यूरो सर्जरी में भी बेहतर रिजल्ट न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल की स्टडी में यह पाया गया कि सर्जरी के दौरान और बाद में म्यूजिक सुनने से मरीजों की रिकवरी बेहतर होती है। उनका फोकस, सहयोग और मानसिक स्थिरता बढ़ती है, जिससे उपचार तेज होता है। मशीन बताती है दिमागी कितना सक्रिय? एम्स में एक विशेष रूसी तकनीक आधारित न्यूरो–चेक मशीन है, जिसकी कीमत लगभग ढाई लाख रुपए है। यह मशीन सिर्फ 5 मिनट में यह बता देती है कि व्यक्ति के दिमाग का कौन सा हिस्सा ज्यादा सक्रिय है, दैनिक ऊर्जा स्तर कब हाई या लो होता है और उसकी सांसों का पैटर्न कैसा है। निजी अस्पतालों में यही टेस्ट 25,000 रुपए तक में होता है, जबकि एम्स में यह मुफ्त है। संगीत सुनने से इस टेस्ट में दिल और दिमाग दोनों में सुधार दर्ज हुआ। 40 से 45 मिनट सुनना चाहिए डॉ. मल्होत्रा कहते हैं कि राग बच्चों में ध्यान, भावनात्मक संतुलन और मानसिक विकास को तेज करते हैं। यह कला ही नहीं, एक वैज्ञानिक तरीका है, जो बच्चों को बेहतर जीवन, बेहतर करियर और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य देता है। 40–45 मिनट सुनने पर नींद, बीपी और फोकस में सुधार आता है।

दुग्ध संकलन के साथ किसानों की आय बढ़ाने हो रहे हैं समन्वित प्रयास : पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री पटेल

सुनियोजित रणनीति अपनाते हुए किये जा रहे हैं नवाचार गौवंश के अवैध परिवहन पर वाहन किये जायेंगे राजसात पशुओं की नस्ल सुधार के लिए संचालित है हिरण्यगर्भा अभियान दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य दो वर्ष की उपलब्धि और आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना की दी जानकारी भोपाल  पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि एवं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये निरंतर प्रयास कर रही है। हमारा यह सतत प्रयास रहा है कि पशुपालन को आजीविका का मजबूत आधार बनाया जाए। श्री पटेल ने बताया कि पिछले 02 वर्षों में प्रदेश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर निरंतर प्रगति की है। हमने शासन की विभिन्न योजनाओं और कार्यकमों के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का संकल्प दृढ़ता से निभाया है। हमारी सरकार ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में निराश्रित पशुओं के लिए नवीन गौशाला नीति बनाई है। राज्यमंत्री श्री पटेल शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभा हॉल में पशुपालन एवं डेयरी विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों से साझा कर रहे थे। गौसंवर्धन राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि गौवंश की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश का देश में दूसरा स्थान है। प्रदेश के 1.87 करोड़ गौवंश में से लगभग 70 प्रतिशत गौवंश अवर्णित नस्ल के हैं। शासन द्वारा निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन के लिए लगभग 2500 से अधिक गौशालाओं में 4 लाख 75 हजार से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय दिया गया है। इसके अतिरिक्त गौशालाओं में निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन हेतु दिए जाने वाले अनुदान की राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रूपये प्रतिदिन/गौवंश की गई है। राज्य शासन द्वारा गौशालाओं के अनुदान के बजट को 250 करोड प्रति वर्ष से बढ़ाकर 505 करोड़ कर दिया गया है, जिसमे से 369.02 करोड़ की राशि गौशालाओ को वितरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता और संकल्पशक्ति के प्रतिफल से हमारी सरकार ने 'स्वावलंबी गौशालाओं (कामधेनु निवास) की स्थापना नीति 2025' लागू की है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना के लिए 5 हजार गौवंश के लिये अधिकतम 130 एकड़ भूमि उपयोग हेतु दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ दी जा सकेगी। इस योजना में 20 स्वावलम्बी गौशाला की स्थापना हेतु निविदा जारी की गयी, जिसकी अंतिम दिनांक 29 दिसम्बर है। दुग्ध उत्पादन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा अनुसार देश के दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 09 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के उददेश्य से अभिनव योजना "डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना" प्रारंभ की गई है। एक हितग्राही को एक आवेदन पर एक इकाई (25 दुधारू पशु) या एक से अधिक इकाई (अधिकतम 08 इकाईयों, 200 दुधारू पशु) लेने की पात्रता होगी। योजना अंतर्गत देशी नस्ल की गाय की इकाई की लागत 36 रूपये लाख तथा संकर नस्ल की गाय तथा भैंस की इकाई की लागत 42 लाख रूपये है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के अंतर्गत पशुपालकों के भैसपालन की रूचि के अनुरूप दो दुधारू भैंस उपलब्ध करायी जाती है। पहले इस योजना को मात्र 3 जिलों सीहोर, विदिशा एवं रायसेन जिलों में थी, जिसे वर्ष 2024-25 से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। सहकारिता के माध्यम से दुग्ध संकलन व प्रसंस्करण सरकार द्वारा सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड को उन्नयन करने के उद्देश्य से एम.पी. स्टेट को-ओपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड तथा संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन एवं प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मध्य होने वाले सहकार्यता अनुबंध पर सहमति दी गई तथा सहकार्यता अनुबंध किया गया। हमारा लक्ष्य राज्य में औसत दुग्ध संकलन तीन वर्षों में 33 लाख लीटर प्रतिदिन से अधिक करना। सहकारिता अंतर्गत ग्रामों का कवरेज आगामी 3 वर्षों में बढ़ाकर 15 हजार से अधिक ग्रामों को कवर करना तथा दुग्ध सहकारी समिति सदस्यों की संख्या बढ़ाकर कुल 470 हजार करना। इस हेतु राज्य में 4000 करोड से अधिक का निवेश होगा। दुग्ध संघो द्वारा दूध खरीद मूल्यों में 2.50 रूपये से 8.50 रूपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। हिरण्यगर्भा अभियान प्रदेश में पशुपालकों को समृद्ध करने हेतु पशुओं का नस्ल सुधार एक महत्वपूर्ण साधन है, इस हेतु "हिरण्यगर्भा अभियान" संचालित किया जा रहा है। परम्परागत सीमन डोज की जगह सॉर्टेड सेक्सड सीमन के ज्यादा से ज्यादा उपयोग हेतु जागरूक किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर लगभग 11500 हजार कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) को प्रशिक्षित किया गया है। इन प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं में से अक्रियाशील कार्यकर्ता की पहचान कर उन्हें क्रियाशील तथा क्रियाशील कार्यकर्ताओं को रिफेंशर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दुग्ध संपर्क समृद्धि अभियान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दो गुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूर्ती हेतु आयोजित इस अभियान में पशुपालकों को पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार से होने वाले आर्थिक लाभ के विषय पर गृह भेंट कर उन्नत पशुपालन हेतु प्रेरित किया जा रहा है। अभियान तीन चरणों में संचालित होना है। प्रथम चरण में 10 या अधिक गाय भैंस के पशुपालक, द्वितीय में 5 या अधिक के पशुपालक तथा तृतीय चरण में 5 से कम पशुसंख्या वाले पशुपालक सम्मिलित होंगे। 

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल : राज्यमंत्री जायसवाल

विभागीय उपलब्धियों की दी जानकारी भोपाल  विकास और सेवा के 2 वर्ष कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। योजना के तहत ऋण प्रकरणों की स्वीकृति में मध्यप्रदेश का देश में चौथा और ऋण वितरण में तृतीय स्थान है। पिछले 2 वर्षों के दौरान 436.34 करोड़ रुपये के 48 हजार 63 ऋण प्रकरण स्वीकृत किये गये हैं। इसी तरह 378.06 करोड़ रुपये के 42 हजार 559 ऋण प्रकरण वितरित किये गये हैं। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने यह जानकारी होटल अशोका लेक व्यू में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान दी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार हस्तशिल्प और हैण्डलूम से जुड़े विभाग के ब्रॉण्ड- मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत के उत्पाद मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाइयों और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केन्द्रों सहित लोकों में विक्रय के लिए आकर्षक रूप से प्रदर्शित कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि साड़ी पहनने की गौरवशाली परम्परा को प्रोत्साहित करने के लिए इंदौर में हुए साड़ी वॉकथान जैसे आयोजन प्रदेश के अन्य शहरों में आयोजित किये जायेंगे। रेशम उत्पादन गतिविधियों का प्रदेश के अन्य जिलों में विस्तार तथा इस गतिविधि में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश के विभिन्न प्रकार के उत्पादों के जीआई टैग प्राप्त करने की जानकारी का संकलन किया जायेगा। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिथियों को भेंट करने के लिए प्रदेश के हेरिटेज महेश्वरी स्टॉल का चयन किया गया है। विभाग द्वारा यह स्टॉल विशेष रूप से गोंड पेंटिंग और बेलमेटल से सुसज्जित लकड़ी के बॉक्स में प्रदाय किए जा रहे हैं। इन स्टॉल की मांग विदेशी दूतावासों से भी प्राप्त हुई है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा 2 लाख 16 हजार 13 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसी तरह 85 हजार 536 हितग्राहियों को टूल-किट वितरण एवं 2 लाख 45 हजार 513 हितग्राहियों को ई-वाउचर वितरण किया गया है। उन्होंने कहा कि हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा 4207.15 लाख रुपये तथा खादी बोर्ड द्वारा 2311.89 लाख रुपये का विक्रय एम्पोरियम और प्रदर्शनियों के माध्यम से किया गया है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में डिण्डोरी जिले के रॉट आयरन, उज्जैन जिले के बटिक प्रिंट, ग्वालियर जिले के कालीन शिल्प, बालाघाट जिले के बारासिवनी हाथकरघा साड़ी एवं जबलपुर जिले के पत्थर शिल्प को जीआई टैग प्रदान किये गये हैं। सीहोर के लकड़ी के खिलौने तथा नीमच के नांदना प्रिंट के लिये जीआई टैग प्रदान कराने की कार्यवाही भी पूर्ण की गयी है। भारत सरकार से नेशनल हैण्डलूम एक्सपो 45 लाख, स्टेट हैण्डलूम एक्सपो 90 लाख, जिला प्रदर्शनी मेला 12 लाख, इंदौर में साड़ी वॉकथान 20 लाख, राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस 14 लाख सहित कुल राशि 181 लाख रुपये प्राप्त कर 32 मेलों और प्रदर्शनियों के आयोजन से 16 हजार 780 शिल्पियों को मॉर्केट उपलब्ध कराया गया है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर इंदौर में साड़ी वॉकथान का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 27 हजार महिलाओं द्वारा भागीदारी की गयी थी। इस कार्यक्रम के लिये गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ है। शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के तहत 875.21 लाख रुपये के वस्त्र सप्लाई कर 3132 बुनकरों को 1.27 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि खादी उत्पादन केन्द्रों के माध्यम से 1015.21 लाख का उत्पादन एवं 650 बुनकरों तथा कारीगरों को रोजगार से जोड़ा गया। खादी बोर्ड द्वारा सेवा पखवाड़ा अंतर्गत 427 बुनकरों का चयन कर खादी वस्त्र उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया। निजी क्षेत्र में मलबरी पौध-रोपण 439 एकड़, शासकीय रेशम केन्द्रों पर मलबरी पौध-रोपण 276 एकड़ सहित कुल 715 एकड़ में 3.51 किलोग्राम मलबरी कोकून उत्पादन कर 5451 किसानों को लाभान्वित किया गया है। साथ ही 1388 कोकून हितग्राहियों से 808.10 लाख टसर कोकून उत्पादन कराया गया। विभाग के नवाचार राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिये विभिन्न नवाचार किये जा रहे हैं। एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत जरी-जरजोदी एवं जूट, लकड़ी के खिलौने, बाग प्रिंट, सीधी कारपेट, चंदेरी साड़ी, दतिया गुड़ एवं उज्जैन के बटिक प्रिंट के उत्पादों की ब्रॉण्डिंग एवं विपणन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली, भोपाल हाट तथा जवाहर चौक भोपाल में मृगनयनी के साथ खादी के संयुक्त नवीन एम्पोरियम प्रारंभ किये गये हैं। रीवा एवं भोपाल में देवी अहिल्याबाई बुनकर मेले का आयोजन किया गया, जिसमें 75 शिल्पियों द्वारा भागीदारी तथा फैशन-शो का प्रदर्शन हुआ। प्रदेश के बाहर मृगनयनी एम्पोरियम द्वारा बैंगलुरु, हैदराबाद एवं गोवा में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मृगनयनी कोलकाता द्वारा भुवनेश्वर में भारत सरकार के हैण्डलूम एक्सपो में भागीदारी की गयी। इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भी भागीदारी हुई। नगद रहित व्यवहारों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से हाथकरघा विकास निगम द्वारा समस्त भुगतान बैंकों के माध्यम से डिजिटली किये जा रहे हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के समस्त विभागीय उत्पादन केन्द्रों एवं विपणन संबंधी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिये ईआरपी सॉफ्टवेयर तैयार करवाया गया है।  

एम.पी. ट्रांसको के लखनादौन सबस्टेशन में जटिल ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल संपन्न

ग्रिड फेल की स्थिति में बहु-सबस्टेशन सिस्टम रिस्टोरेशन का सफल परीक्षण भोपाल  प्रदेश के ट्रांसमिशन ग्रिड की आपातकालीन तैयारियों, सिस्टम रिस्टोरेशन क्षमता तथा बहु-स्तरीय समन्वय को परखने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन जिला सिवनी में एक अत्यंत जटिल ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल सफलतापूर्वक पूरी की गई। यह अभ्यास पेंच हाइडल पावर हाउस के तकनीकी समन्वय से संपन्न हुआ। बहु-सबस्टेशन ग्रिड रिस्टोरेशन बना चुनौतीपूर्ण अभ्यास एम पी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री प्रदीप सचान के अनुसार इस अभ्यास में सामान्य मॉकड्रिल की तुलना में कहीं अधिक जटिलता रही, क्योंकि इसमें चरणबद्ध रूप से कई सबस्टेशनों को जोड़ते हुए ग्रिड रिस्टोरेशन किया गया। मॉकड्रिल के दौरान पेंच पावर हाउस से 132 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी, वहां से 220 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी तथा आगे 220 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी से 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन तक विद्युत आपूर्ति को पूरी तरह नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से बहाल किया गया। इस मॉकड्रिल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि पूरे जटिल अभ्यास के दौरान 33 के.व्ही. फीडरों पर केवल 25 मिनट के सीमित व्यवधान में पूरे सिस्टम के रिस्टोरेशन का सफल परीक्षण किया गया। उत्कृष्ट समन्वय से मिली सफलता मॉकड्रिल के दौरान स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एस.एल.डी.सी.) जबलपुर, कंट्रोल रूम तथा फील्ड स्टाफ के बीच उत्कृष्ट समन्वय रहा। सामान्यतः ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल में एक या दो सबस्टेशनों तक ही अभ्यास सीमित रहता है, जबकि इस मॉकड्रिल में तीन प्रमुख सबस्टेशनों को जोड़ते हुए ग्रिड रिस्टोरेशन किया गया, जो तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण है। ऐसे की गई ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल एम.पी. ट्रांसको सिवनी के कार्यपालन अभियंता श्री अरुण कुमार वैद्य ने बताया कि ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल को वास्तविक ग्रिड फेल्योर जैसी परिस्थितियों के अनुरूप चरणबद्ध ढंग से संपन्न किया गया । सबसे पहले धीरे-धीरे लखनादौन सबस्टेशन का लोड बरगी पावर हाउस से बंद कर पेंच पावर हाउस पर स्थानांतरित किया गया। इसके पश्चात नियंत्रित लोड की स्थिति में जनरेटर को क्रमिक रूप से बंद कर वास्तविक ब्लैकआउट जैसी स्थिति उत्पन्न की गई। इसके बाद जनरेटर को पुनः चालू कर सावधानीपूर्वक लोड बढाते हुये चरणबद्ध रूप से 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन में सामान्य विद्युत आपूर्ति बहाल की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान वोल्टेज एवं फ्रिक्वेंसी नियंत्रण, सिस्टम स्थिरता तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया गया।  

मालवा निमाड़ में इस वर्ष 1.71 लाख से ज्यादा नए बिजली कनेक्शन दिए

भोपाल  मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस कैलेंडर वर्ष में अब तक 1 लाख 71हजार 500 नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए है। यह पिछले वर्ष से करीब दस प्रतिशत ज्यादा है। इंदौर राजस्व संभाग में करीब 1.10 लाख कनेक्शन जारी हुए है। इंदौर जिले में 51 हजार से अधिक कनेक्शन जारी हुए है। धार जिले में 13300, खरगोन जिले में 12000, खंडवा जिले में 9250, बड़वानी में 6800, बुरहानपुर में 6740, झाबुआ में 5300, अलीराजपुर में 3100 से ज्यादा कनेक्शन दिए गए है। उज्जैन संभाग के सातों जिले में 61 हजार से ज्यादा नए बिजली कनेक्शन (एनएससी) जारी किए गए है। कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि मांग के मुताबिक नए सर्विस कनेक्शन एनएससी प्रदान किए जा रहे हैं, ये कनेक्शन ऑन लाइन या ऑफ लाइन दोनों प्रकार के आवेदन दर्ज कर विधिवित दस्तावेजों के साथ प्राप्त किए जा सकते है। उज्जैन जिले में 16716 प्रदान किए गए है। मंदसौर जिले में 10700, रतलाम जिले में 10560, देवास जिले में 9359, नीमच में 5780, शाजापुर में 5300, आगर जिले में 4460 कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। सभी नए कनेक्शनों एवं जारी बिल, लोड इत्यादि की जानकारी संबंधित उपभोक्ता पोर्टल mpwz.co.in एवं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के ऊर्जस ऐप से प्राप्त भी कर सकते हैं।  

मंत्री सारंग ने की अपने जन्म दिन पर पौध-रोपण की अपील

पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को करों सशक्त भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने अपने जन्मदिन के अवसर पर सभी शुभचिंतकों एवं कार्यकर्ताओं से अपना जन्मदिन वर्चुअल और सादगीपूर्ण मनाने की अपील की है। मंत्री श्री सारंग ने सभी से आग्रह किया कि जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए पेड़ लगाएं और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को सशक्त करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व है और आज के समय में हर नागरिक को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि इस वर्ष भी वे अपना जन्मदिन वर्चुअल तरीके से मनाएंगे। सभी शुभचिंतकों से उन्होंने अनुरोध किया कि वे अपनी शुभकामनाएं सोशल मीडिया प्लेटफार्म- फेसबुक व ट्विटर पर हैशटैग #HBDVishvasSarang के साथ, वाट्सएप्प नंबर- 9981222321 पर तथा वर्चुअल माध्यम से ही भेजें। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि वे यथासंभव सभी संदेशों और शुभकामनाओं का उत्तर देने का प्रयास करेंगे।  

मध्यप्रदेश पुलिस और MANIT के बीच हुआ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU)

MANIT भोपाल में स्थापित होगा Center of Excellence for Public Safety पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने ग्लोबल एलुमनाई मीट–2025 में की घोषणा भोपाल  मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल में आज ‘ग्लोबल एलुमनाई मीट–2025’ का आयोजन हुआ। इस अवसर पर संस्थान के 1986 बैच के पूर्व छात्र एवं वर्तमान पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश श्री कैलाश मकवाणा विशेष अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस एवं MANIT के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU के अंतर्गत संस्थान परिसर में ‘सार्वजनिक सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र’ (Center of Excellence for Public Safety) की स्थापना की जाएगी, जिसका उद्देश्य तकनीकी नवाचारों को सार्वजनिक सुरक्षा और पुलिसिंग से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है। तकनीक आधारित भविष्य की पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम इस अवसर पर डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र एक थिंक टैंक एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो पुलिस और शैक्षणिक जगत के बीच सहयोग का राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय मॉडल बनेगा। केंद्र के माध्यम से स्मार्ट पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा एनालिटिक्स, क्राउड मैनेजमेंट तथा यातायात प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध, नवाचार एवं प्रशिक्षण गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी। उन्होंने विशेष रूप से सड़क सुरक्षा को वर्ष 2026 का प्रमुख लक्ष्य बताते हुए कहा कि MANIT की सिविल एवं सड़क इंजीनियरिंग विशेषज्ञता सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह केंद्र सिंहस्थ–2028 जैसे विशाल आयोजनों के लिए वैज्ञानिक क्राउड मॉडलिंग, यातायात योजना और सुरक्षा प्रबंधन में भी सहयोग प्रदान करेगा।  मध्यप्रदेश पुलिस की उपलब्धियाँ अपने संबोधन में डीजीपी श्री मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस की प्रमुख उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रभावी रणनीति, सशक्त अभियानों तथा रिकॉर्ड संख्या में आत्मसमर्पण के चलते मध्यप्रदेश अब नक्सल मुक्त प्रदेश बन चुका है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए शुरू की गई ई–जीरो एफआईआर (e-zero FIR) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक लाख रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड मामलों में शिकायत स्वतः एफआईआर में परिवर्तित हो सकेगी, जिससे पीड़ितों को त्वरित न्याय सुनिश्चित होगा। इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए गए जन-जागरूकता अभियान ‘नशे से दूरी है जरूरी’ को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा सम्मानित किए जाने की जानकारी भी उन्होंने साझा की। संस्थान से जुड़ी स्मृतियाँ और ‘ब्लेजर’ परंपरा का सुझाव पूर्व छात्र के रूप में भावनात्मक क्षण साझा करते हुए डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि उनके छात्र जीवन के दौरान संस्थान की पहचान एक विशिष्ट रंग के ‘ब्लेजर’ से होती थी, जो छात्रों में अनुशासन, गर्व और आत्मीयता की भावना को दर्शाता था। उन्होंने MANIT के निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला से इस परंपरा को पुनः प्रारंभ करने पर विचार करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने संस्थान के 90 प्रतिशत से अधिक प्लेसमेंट, सुदृढ़ होते शैक्षणिक वातावरण एवं निरंतर विकसित हो रहे आधारभूत ढांचे की सराहना की। राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय मॉडल बनेगा उत्कृष्टता केंद्र डीजीपी ने कहा कि यह ‘सार्वजनिक सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र’ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीआईएस मैपिंग, ड्रोन तकनीक एवं उन्नत डेटा विश्लेषण के माध्यम से पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, स्मार्ट और प्रभावी बनाएगा। इस MoU को मूर्त रूप देने में वास्तुकला एवं नियोजन विभाग के डॉ. राहुल तिवारी ने उत्प्रेरक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह साझेदारी एक सुरक्षा कवच के समान है, जिसमें MANIT की तकनीकी दक्षता और मध्यप्रदेश पुलिस का व्यावहारिक अनुभव मिलकर समाज को अपराध, दुर्घटनाओं एवं आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक सशक्त, नवाचारी और स्थायी समाधान प्रस्तुत करेगा। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ पूर्व छात्र, शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।  

संस्कार और सेवा का संगम: लालघाटी गुरुकुल में बच्चों के श्लोक-पाठ व संध्या आरती ने किया सभी को भाव-विभोर

भोपाल  ज्योति जनकल्याण सोसाइटी द्वारा मनभावन टेकरी लालघाटी पर गुरुकुल में विद्यार्थियों  को ठंड से बचाव के लिए ऊनी वस्त्र भोजन प्रसादी वितरित की गई   गुरुकुल में आचार्य श्री द्वारा दिए जा रहे संस्कार और शिक्षा   तारीफ ए काबिल है बच्चों के मुखरबिंद से श्लोक और संध्या आरती करते हुए देख अति प्रसन्नता हुई  और प्रफुल्लित हो गया हम उन बच्चों के मां-बाप को दिल से धन्यवाद करते हैं जिन्होंने इस गुरुकुल में अपने बच्चों को शिक्षा के लिए भेजा  क्योंकि संस्कृति और सभ्यता हमारे राष्ट्रहित के लिए सर्वोपरि है । संस्था  की संयोजक श्रीमती ज्योति राय ने बताया बचपन से  बच्चों में जिस तरह से संस्कार डाले जाते हैं आगे  चलकर वह संस्कार ही काम आते हैं और आज हमें गुरुकुल में इन बच्चों को देखकर बहुत ही गर्व महसूस हो  हुआ है  हमारे साथ सेवा में सहयोगी बने आदरणीय श्री विष्णु श्रीवास्तव जी पूर्व कृषि मंत्री सलाहकार, , रवि महाराज जी,  मुकेश जी,अनीता जी नीतू जी संस्था के सचिव श्री नमन  जी, और कई समाज सेवी सम्मिलित हुए उन सभी का संस्था दिल से धन्यवाद करती है।

गांधी मेडिकल कॉलेज में रिक्त चिकित्सा अधिकारी सीनियर रेसिडेंट एवं जूनियर रेसिडेंट के पदों की भर्ती को लेकर बैठक सम्पन हुई

भोपाल  भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में रिक्त चिकित्सा अधिकारी एवं सीनियर रेसिडेंट एवं जूनियर रेसिडेंट के पदों की भर्ती की जाना प्रस्तावित है। उपरोक्त भर्ती को लेकर एडमिन ब्लाक तृतीय तल में जी. एम. सी. रोस्टर निर्धारण समिति की बैठक का आयोजन किया गया ,जिसमे केई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई।      समिति के सदस्य बंशीलाल धनवाल ने बताया की राज्य के सभी शासकीय अर्ध शासकीय, निगम, मंडल आदि कार्यालयों में कार्यरत शासकीय सेवकों का स्थापना शाखा में एक स्थाई रिकॉर्ड जो रोस्टर पंजी के नाम से संधारित होता है, इसी 100 बिंदु रोस्टर पंजी के मान से सीधी भर्ती अथवा पदोन्नति की प्रक्रिया वर्गवार संपन्न होती है। जो की एक शासकीय नियम है। समिति की बैठक के प्रारंभ में श्री धनवाल ने जीएमसी की स्थानीय यूनिटों में रिक्त पदों को रोस्टर पंजी से मिलान करने के लिए, रोस्टर पंजी का अवलोकन करने की बात कहीं। तो सम्बंधित शाखा प्रभारी ने रोस्टर पंजी संधारित होने की बात तो स्वीकारी,  लेकिन सदन के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाये। तदोपरांत सदन के सभापति डॉक्टर लोकेंद्र दवे ने बैठक स्थगित कर दी, ओर कहा कि भर्ती प्रक्रिया से पहले अगली बैठक में, 100 बिंदु रोस्टर पंजी सदन के समक्ष प्रस्तुत करे।          बैठक में डॉक्टर लोकेंद्र दवे प्राध्यापक रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग,  बंशीलाल धनवाल संभागीय अध्यक्ष अजाक्स  भोपाल संभाग, डॉक्टर आशीष कोष्टी प्राध्यापक पैथोलॉजी विभाग,  डॉक्टर हरेसिंह मकवाने सहायक प्राध्यापक बायोकेमेस्ट्री विभाग , डॉक्टर देवेंद्र चौधरी सहायक प्राध्यापक जनरल सर्जरी विभाग , डॉक्टर अनिल सेजवार प्राध्यापक मेडिसिन विभाग , डॉक्टर मुकेश हिंडोलिया सहायक प्राध्यापक फार्मोक्लॉजी विभाग तथा  अजय वर्मा गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल उपस्थित रहे। 

नए साल में करें नई शुरूआतः 2026 में ओरल हेल्थ पर दें खास ध्यान – डॉ सोनिया दत्ता

भोपाल डॉ सोनिया दत्ता, एमडीएस, पीएचडी; प्रोफेसर, पब्लिक हेल्थ डेन्टिस्ट्री के अनुसार, क्या आप जानते हैं कि आपकी ओरल हेल्थ यानि मुंह के स्वास्थ्य का असर शरीर के पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है। उदाहरण के लिए अगर आपके मसूड़ों में सूजन है तो इसका असर पाचन पर, हृदय पर और पूरी सेहत पर भी पड़ सकता है। तो क्यों न नए साल की शुरूआत के साथ अपनी आदतों में कुछ बदलाव लाएं और मुंह की देखभाल पर विशेष ध्यान दें। अक्सर जब भी सेहत की बात आती है तो हम अपने खाने, व्यायाम, और नींद जैसे पहलुओं की बात करते हैं। क्योंकि हमें लगता है कि ये सभी पहलु हमारे स्वास्थ्य पर सीधा असर डालते हैं। लेकिन एक और महत्वपूर्ण पहलु है आपका मुंह, जिससे पूरे शरीर का स्वास्थ्य जुड़ा है। इसलिए अगर आप 2026 में अपनी सेहत की देखभाल का संकल्प लेने जा रहे हैं, तो सबसे पहले ओरल केयर पर ध्यान दें। आयुर्वेद को अपनाएं-आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां को सदियों से मुंह के स्वास्थ्य के लिए कारगर माना जाता रहा है। ऐसी ही कुछ जड़ी-बूटियां हैं: लौंग का तेल- यह मुंह में बैक्टीरिया को पनपने से रोकता हैं, और असहजता को दूर करता है।; पुदीना सत्वा- सांसों की ताज़गी बनाए रखता है।; तोमर बीज- मसूड़ों को साफ एवं स्वस्थ बनाता है।; डाबर रैड जैसे टूथपेस्ट में ये सभी जड़ी-बूटियां हैं, इसे आईडीए की सील ऑफ एक्सेप्टेन्स भी मिली है। ऐसे में प्राकृतिक और कारगर है।  2026 में अपनाएं छोटी-छोटी आदतें-ये आदतें ला सकती हैं बड़ा बदलाव: दिन में दो बार पूरे दो मिनट तक ब्रश करें-40 सैकण्ड में जल्दी-जल्दी नहीं।; डाबर रैड टूथपेस्ट जैसे आयुर्वेदिक टूथपेस्ट चुनें।; रोज़ाना अपनी जीभ को साफ़ करें।; फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनर का इस्तेमाल करें।; ज़्यादा पानी पीएं, ऐसा करने से लार अच्छी बनेगी, जो आपके मुंह को भीतर से सुरक्षित रखेगी।  अगर आप ओरल केयर के लिए बेहतर रूटीन अपनाते हैं, तो इसका असर आपको तुरंत दिखने लगेगा और लम्बे समय तक महसूस होगा। मुंह की देखभाल सही तरह से करने पर दांतों का इनेमल मजबूत होता है, प्लॉक कम जमता है और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। दोपहर तक भी आपकी सांसों की ताज़गी बरक़रार रहती है। ऐसा करने से आप सेंसिटीविटी, कैविटी और इन्फेक्शन से बचे रहते हैं। इसके अलावा मुंह की सही देखभाल आपके पूरे शरीर के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करती है।