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जर्मनी के कॉन्सुलेट जनरल क्रिस्टोफ हॉलियर ने इंदौर-पीथमपुर की औद्योगिक एवं आईटी क्षमताओं का किया अवलोकन

भोपाल जर्मनी के कॉन्सुलेट जनरल क्रिस्टोफ हॉलियर ने इंदौर एवं पीथमपुर क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे के दौरान यहां विकसित औद्योगिक अधोसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रगति तथा निवेश संभावनाओं का अवलोकन किया। उन्होंने क्षेत्र में संचालित उद्योगों, आधुनिक विनिर्माण सुविधाओं और तकनीकी नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। पीथमपुर में महले आनंद थर्मल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की उत्पादन इकाई का भ्रमण कर विनिर्माण प्रक्रियाओं एवं औद्योगिक व्यवस्थाओं को देखा। साथ ही इंदौर स्थित इंफोबीन्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड का अवलोकन कर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विकसित हो रहे नवाचारों और सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान एमपीआईडीसी इंदौर के कार्यकारी संचालक श्री हिमांशु प्रजापति ने उन्हें इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र की औद्योगिक प्रगति, निवेश अवसरों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, आईटी इकोसिस्टम तथा व्यापारिक संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध विश्वस्तरीय अधोसंरचना, उद्योग-अनुकूल वातावरण, कुशल मानव संसाधन तथा निवेशकों को प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी भी दी। कॉन्सुलेट जनरल ने इंदौर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से भी परिचय प्राप्त किया। उन्होंने राजवाड़ा और लालबाग पैलेस का भ्रमण कर शहर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन संभावनाओं की सराहना की। क्रिस्टोफ हॉलियर ने बताया कि भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग निरंतर मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग तथा प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएं रखता है और भविष्य में जर्मन निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। यह दौरा मध्यप्रदेश और जर्मनी के बीच औद्योगिक एवं आर्थिक सहयोग को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान में “नेशनल होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस-अमृतम” सम्पन्न

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि होम्योपैथी केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और समर्पण का माध्यम है। चिकित्सकों का दायित्व केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग बनाने में सक्रिय भूमिका निभाना भी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा-भाव, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। मंत्री  परमार भोपाल स्थित पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के रजत जयंती सभागार में आरोग्य भारती एवं शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "नेशनल होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस -अमृतम" शुभारम्भ कर चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रदेश सरकार भी आयुष एवं होम्योपैथी चिकित्सा के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान तथा चिकित्सा अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंत्री  परमार ने उज्जैन में नवीन शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित किए जाने की बात भी कही। कार्यक्रम के सारस्वत वक्ता एवं राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति मानव कल्याण और स्वस्थ समाज के निर्माण की भावना से विकसित हुई है। उन्होंने चिकित्सकों से चिकित्सा पद्धति के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहकर जनसेवा करने का आह्वान किया। आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने समग्र चिकित्सा पद्धतियों के समन्वित विकास पर बल देते हुए कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों को सहयोग, संवाद और सेवा की भावना के साथ कार्य करना चाहिए, जिससे समाज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। देशभर से आए लगभग 450 होम्योपैथिक चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता वाले इस सम्मेलन एवं कार्यशाला में होम्योपैथी चिकित्सा के नवीन आयामों, अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य तथा समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से नवीन ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त किए। कार्यशाला में अपर सचिव सह आयुक्त आयुष डॉ संजय मिश्रा, प्रख्यात प्रबंधन विशेषज्ञ  एस.बी. डंगायच, आरोग्य भारती के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्य, चिकित्सक, शोधकर्ता एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

सीयू स्कॉलर समिट-2026 का भव्य समापन, 1500 मेधावी छात्रों का हुआ सम्मान

उन्नाव/लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी दिशा में शिक्षा, नवाचार और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में आयोजित दो दिवसीय सीयू स्कॉलर समिट-2026 का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए 1500 से अधिक मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। उन्नाव स्थित परिसर में आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय रहे। उनके साथ राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू, कुलपति प्रो. (डॉ.) विनीत कुमार नायर, प्रो वाइस चांसलर प्रो. डॉ. टी.पी. सिंह समेत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। योगी सरकार में यूपी बन रहा उच्च शिक्षा का हब उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों की उपस्थिति प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश सरकार शिक्षा को तकनीक, रोजगार और संस्कारों से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मंत्री ने विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि यहां प्रस्तुत शोध मॉडल और तकनीकी परियोजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का युवा केवल ज्ञान अर्जित नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के समाधान भी तैयार कर रहा है। फुटप्रिंट्स से बिजली उत्पादन जैसी अभिनव अवधारणाएं विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 50 करोड़ की स्कॉलरशिप से मेधाओं को मिल रही नई उड़ान विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आयोजित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CUCET) के माध्यम से 50 करोड़ रुपये तक की स्कॉलरशिप देने की घोषणा की गई है। परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 100 प्रतिशत तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इन्हीं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित सीयू स्कॉलर समिट में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं को दूर कर प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। सीयूसीईटी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का मिशन राज्यसभा सांसद एवं चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा कि सीयूसीईटी केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं बल्कि प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने का एक राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि किसी भी योग्य विद्यार्थी को आर्थिक कारणों से अपने सपनों से समझौता नहीं करना चाहिए। इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय ने व्यापक स्कॉलरशिप कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के सपने वैश्विक हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया को बदल रहा है। आने वाले समय में तकनीक इतनी सक्षम होगी कि एक व्यक्ति स्वयं एक पूरी कंपनी संचालित कर सकेगा। ऐसे में विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि ऐसे भविष्य के नेता तैयार करना है जो एआई और उभरती तकनीकों के माध्यम से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दे सकें। एआई और नई तकनीकों पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में देश के कई प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अमन गुप्ता (को-फाउंडर, बोट), डॉ. शैलेश कुमार (रिलायंस जियो), अस्वथी वेणुगोपाल (कॉग्निजेंट), अर्पित त्रिवेदी (हिताची सिस्टम्स इंडिया) सहित कई विशेषज्ञों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई, डेटा साइंस, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और भविष्य के करियर अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। इसके अलावा अभिनेता एवं गायक अपारशक्ति खुराना, गायिका असीस कौर तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को प्रेरित किया। इनोवेशन, स्किल और ग्लोबल एक्सपोजर पर फोकस विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल स्किल्स, समस्या समाधान क्षमता, नवाचार सोच और नई तकनीकों की समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में एआई और डिजिटल तकनीक लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित करेंगी, इसलिए जो विद्यार्थी समय के साथ स्वयं को अपडेट रखेंगे, उनके लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर अधिक होंगे। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोहराया कि देश की पहली एआई ऑगमेंटेड मल्टीडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी के रूप में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स, वैश्विक अवसर और नवाचार आधारित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

सेज करियर डे-2026 में 4500 से अधिक चयनित विद्यार्थियों की उपलब्धियों का हुआ सम्मान

भोपाल : गुरूवार, जून 11, 2026, 20:17 IST उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि शिक्षा केवल विषयविद बनाने का साधन नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम है। शिक्षित और संस्कारित युवा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मंत्री  परमार भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित "सेज करियर डे-2026" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में वर्ष 2024 से 2026 के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित 4 हजार 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया तथा चयनित विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। मंत्री  परमार ने कहा कि सेज यूनिवर्सिटी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ें तथा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश और समाज के विकास में करें। मंत्री  परमार ने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मंत्री  परमार ने युवाओं से कहा कि" आपने अभी अपने पंख फैलाए हैं, आपकी उड़ान अभी बाकी है। जीवन की प्रत्येक चुनौती आपको और अधिक सशक्त बनाती है।" उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। सेज ग्रुप के डायरेक्टर जनरल डॉ. सर्वेश शुक्ला ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रख्यात प्रबंधन गुरु एवं कॉलमिस्ट  एन. रघुरामन ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए प्रतिबद्धता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। सेज ग्रुप की कार्यकारी निदेशक आर्किटेक्ट शिवानी अग्रवाल ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, कौशल विकास और समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रदेशवासियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की अपील

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों से ऑनलाइन योग सत्र में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। आज अनेक राष्ट्र योग के महत्व को स्वीकार और अंगीकार कर चुके हैं। योग दिवस 21 जून पर अनेक आयोजनों के साथ ही 14 जून को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जा रहा है। बीस मिनिट के इस ऑनलाइन सत्र में कोई भी नागरिक हिस्सा ले सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : 2026 के सातवें काउन्ट डाउन के अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 14 जून, 2026 को प्रातः 06:15 बजे से 07:35 बजे तक एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र के आयोजन का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़ते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग समाज का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें और योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाएं। टोल फ्री नंबर सुविधा कार्यक्रम से जुड़ने के लिए टोल-फ्री नम्बर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की गई अपील में कहा है कि आइए, हम सभी मिलकर "घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग" के संकल्प के साथ अब हर घर योग को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सहभागी बनें और स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।  

MP की लाडली बहनों के लिए बड़ी खबर! 37वीं किस्त की तारीख पर नजर, ₹1500 ट्रांसफर को लेकर नया अपडेट

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं को जल्द ही जून महीने की अच्छी खबर मिलने वाली है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त की तारीख बस नजदीक आ गई है। हर महीने की तरह राज्य की 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में 1500 रुपये आने वाले हैं। हालांकि इस बार लाभार्थी महिलाओं को थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के लाडली बहना योजना के कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई ऐलान नहीं किया गया है। जानकारी मिल रही है कि इस बार 37वीं किस्त जारी करने का कार्यक्रम 15 जून तक खिंच सकता है। पिछले महीने 13 मई को सीएम मोहन यादव ने महिलाओं के खाते में 1500-1500 रुपये भेज दिए थे। लेकिन अभी मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं के चलते इसमें देरी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कुछ भी आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है। लाडली बहना योजना की अगली किस्त को लेकर औपचारिक ऐलान अगले 1-2 दिन में हो सकता है। पिछले 2 साल में 47 हजार करोड़ ट्रांसफर सीएम लाडली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जा रही है। पहले इस योजना के तहत 1000 रुपये दिए जाते थे। बाद में उसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। पिछले साल सीएम मोहन यादव ने इसमें बढ़ोतरी कर 1500 रुपये महीना कर दिया गया। जनवरी 2024 से मई 2026 तक लाडली बहनों के खाते में 47,775 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। लाडली बहना योजना ऑनलाइन आवेदन कब शुरू होंगे लाडली बहना योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। अभी तक सरकार की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा जा रहा है। इस योजना को लेकर नए रजिस्ट्रेशन 2023 से ही बंद पड़े हैं। फिलहाल जो जानकारियां मिल रही हैं, उसके मुताबिक इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जब भी सरकार नए रजिस्ट्रेशन शुरू करेगी, उसके बाद ही लाडली बहना योजना के नए फॉर्म भरे जाने शुरू होंगे। क्या eKYC की वजह से बंद हो गया लाडली बहना का पैसा अगर ईकेवाईसी न कराने की वजह से आपका लाडली बहना योजना का पैसा बंद हो गया है तो अभी आपके पास वक्त है। इस काम को तुरंत करा लें। इसके लिए आपको समग्र पोर्टल पर जाना होगा और वहां आपको ईकेवाईसी करें का विकल्प दिखेगा। वहां जाकर आप अपने आधार कार्ड से ईकेवाईसी कर सकते हैं। लाडली बहना योजना का स्टेटस कैसे चेक करें आपके खाते में पैसा आया है या नहीं, इसकी जानकारी के लिए आपको लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाना होगा। यहां आपको 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' पर क्लिक करना है। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी डाल कर आप जानकारी हासिल कर सकती हैं।  

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता: आयोग अध्यक्ष यादव

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता : आयोग अध्यक्ष यादव राज्य महिला आयोग ने केंद्रीय जेल भोपाल का किया निरीक्षण भोपाल सुधार गृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। महिला बंदियों को सम्मानजनक वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है। यह बात मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने केंद्रीय जेल भोपाल के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक महिला को उसके अधिकार, सम्मान और न्याय मिले। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने महिला बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। आयोग ने जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। आयोग ने महिला वार्ड, चिकित्सालय, रसोई घर, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कक्ष, आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का अवलोकन किया। सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों द्वारा संचालित ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने ऑर्केस्ट्रा की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में प्रभावी पहल बताया। महिला बंदियों से संवाद के दौरान उनकी दिनचर्या, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों और पुनर्वास गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। आयोग ने बंदियों द्वारा आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर में तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन भी किया। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव ने महिला बंदियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है

विशेष लेख प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है भोपाल  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ क्षण ऐसे हैं जो केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं होते, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं और विश्वास का प्रतीक बन जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के देश की जनता के निरंतर विश्वास के साथ ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त कर दीर्घकाल तक राष्ट्र का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त करना गौरवपूर्ण क्षण है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण के संकल्प, सेवा और सुशासन की विजय है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च साधन बनाया। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी एक नई पहचान स्थापित की है। आज विश्व भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हुई है और यह परिवर्तन प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच तथा निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी जी का देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित होना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, यह भारत की जनता के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। निरंतर जनसमर्थन किसी पद या प्रचार से नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, पारदर्शिता, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्य शैली से अर्जित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को सदैव "प्रधान सेवक" के रूप में प्रस्तुत किया और गरीब, किसान, महिला, युवा तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सतत प्रयास किया। यही कारण है कि देश की जनता ने बार-बार उन पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, अथक कार्यशक्ति, दूरदर्शी सोच और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्पष्ट संकल्प करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है तथा उन्हें जन-जन का प्रिय नेता बनाता है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना, रक्षा क्षमता, अंतरिक्ष विज्ञान और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और डिजिटल इंडिया जैसे अनेक कार्यक्रमों से करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। शासन की योजनाएँ पहली बार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी ढंग से पहुँची हैं। भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में रहेगा अंकित भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का भी यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों की सदियों पुरानी आस्था की पूर्ति का क्षण था। यह केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्म गौरव का पुनर्स्थापन था। जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक निर्णयों ने राष्ट्रीय एकीकरण को नई मजबूती प्रदान की। विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए जम्मू-कश्मीर आज नए अवसरों की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी ने यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छा शक्ति और स्पष्ट नीति के साथ कठिन से कठिन निर्णय भी राष्ट्रहित में लिए जा सकते हैं। मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का निरंतर लाभ प्राप्त हुआ है मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का लाभ निरंतर प्राप्त करता रहा है। प्रदेश में सड़क, रेल, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश एवं परियोजनाओं ने विकास को नई गति दी है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से गरीब, किसान, महिला और युवाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली अनेक योजनाओं का प्रभाव प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुँचा है। विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से मेरा गृह क्षेत्र रीवा भी इस परिवर्तनकारी यात्रा का साक्षी बना है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। यह परियोजना प्रधानमंत्री जी के उस विजन का प्रतीक है जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। आज रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और विंध्य की पहचान नई संभावनाओं से जुड़ चुकी है। विंध्य क्षेत्र में सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं, शिक्षा संस्थानों और आधारभूत संरचना के विस्तार ने विकास के नए द्वार खोले हैं। यह क्षेत्र अब पिछड़ेपन की पहचान से आगे बढ़कर प्रगति और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार का सतत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मुझे यह अनुभव करने का अवसर मिला है कि प्रधानमंत्री जी की सोच केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ भारत के व्यापक निर्माण की है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजना ने गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। प्रदेश सरकार भी प्रधानमंत्री जी के इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व हमें यह विश्वास देता है कि विकसित भारत का संकल्प केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक साकार होती राष्ट्रीय यात्रा है। उनके नेतृत्व में भारत ने आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज प्रत्येक भारतीय गर्व के साथ कह सकता है कि उसका देश विश्व पटल पर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। व्यक्तिगत रूप से मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे ऐसे युग निर्माता नेतृत्व के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है। भारतीय चिंतन में आदर्श नेतृत्व का आधार सदैव लोक कल्याण और राष्ट्रहित रहा है। "प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥" शासक का सुख प्रजा के सुख में और उसका हित प्रजा के हित में निहित होता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र प्रथम की यही भावना निरंतर परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश और विंध्य की जनता … Read more

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने किया मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का अध्ययन, मॉडल को समझने पहुंचे प्रतिनिधि

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का किया अध्ययन भोपाल  "मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना" के क्रियान्वयन संबंधी जानकारी लेने और इसमें विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिये छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों का एक दल मध्यप्रदेश भ्रमण पर है। इस दल ने गुरूवार को खाद्य संचालनालय में अधिकारियों से योजना की कार्य प्रणाली, परिवहन व्यवस्था, आईटी आधरित मॉनीटरिंग प्रणाली, संबंधित विभागों के बीच समन्वय, हित धारकों की भूमिका तथा खाद्यान वितरण व्यवस्था में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी ली। अपर संचालक खाद्य एचएस परमार एवं अन्य अधिकारियों ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। छत्तीसगढ़ के दल में सहायक महाप्रबंधक आईटी एवं उपार्जन महेन्द्र साहू, उप सहायक महाप्रबंधक परिवहन मनोज वर्मा, उप सहायक महाप्रबंधक सार्वजनिक वितरण प्रणाली त्रिनाधा रेड्डी, वरिष्ठ सलाहकार सुशील तिवारी और सलाहकार संदीप हलदर शामिल हैं। 9954-मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य' दुकानों तक राशन सामग्री के परिवहन का कार्य परिवहनकर्ता ठेकेदार के स्थान पर बेरोजगार युवकों के माध्यम से कराकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना नवाचार के रूप में लागू की गई है। इसमें लगभग 900 परिवहन कर्ता हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजनांतर्गत ऋण स्वीकृति से 7.5 मीट्रिक टन क्षमता के वाहन उपलब्ध कराएँ गए हैं। वाहनों के लिये राज्य सरकार द्वारा 1.25 लाख रूपये प्रति वाहन मार्जिन मनी और 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है। वाहनों से प्रतिमाह लगभग 3,000 क्विंटल राशन सामग्री का परिवहन किया जा रहा है। योजना में बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ सामग्री का परिवहन भी त्वरित गति से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के वाहनों में जीपीएस के माध्यम से स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से मॉनीटरिंग की जाती है।  

भोपाल के चर्चित त्विषा केस में नया मोड़, जेल में किताब पढ़ती दिखीं गिरिबाला सिंह; महिला आयोग ने जाना हाल

भोपाल  त्विषा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से बुधवार को मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने मुलाकात की। आयोग की टीम महिला कैदियों और बंदियों की स्थिति का जायजा लेने जेल पहुंची थी। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने गिरिबाला सिंह से जेल में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने किसी भी प्रकार की परेशानी से इनकार करते हुए कहा कि जेल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं और उन्हें कोई शिकायत नहीं है। जानकारी के अनुसार, आयोग की टीम जब उनके पास पहुंची, तब वे लेखक देवदत्त पटनायक की पुस्तक 'द प्रेग्नेंट किंग' पढ़ रही थीं। टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान वे काफी शांत नजर आईं। निरीक्षण के दौरान महिला आयोग की टीम को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो।   क्या है 'द प्रेग्नेंट किंग' की कहानी देवदत्त पटनायक का उपन्यास 'द प्रेग्नेंट किंग' पौराणिक कथा से प्रेरित है। कथा के अनुसार राजा युवनाश्व संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ कराते हैं। यज्ञ के बाद रानियों के लिए तैयार किया गया मंत्रयुक्त पेय वे स्वयं पी लेते हैं, जिसके बाद वे गर्भवती हो जाते हैं। बाद में उनके शरीर से पुत्र मांधाता का जन्म होता है। इसी कथा को आधार बनाकर यह उपन्यास लिखा गया है।  लीगल एड के वकीलों ने पेश किया वकालतनामा त्विषा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने जिला अदालत में वकालतनामा प्रस्तुत किया है। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं। इस कारण अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि उन्हें मामले में पैरवी की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने इस संबंध में आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे हैं।  दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच तेज त्विषा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीबीआई को मिल गई है। जांच एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच का फोकस गर्भावस्था, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर है। इसके अलावा मोबाइल और लैपटॉप से रिकवर किए गए चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य डिलीट किए गए डेटा का भी विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मामले की सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके।  CBI जुटा रही मेडिकल और डिजिटल सबूत ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच कर रही सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों का मिलान कर रही है। जांच में प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर फोकस किया जा रहा है। वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला कोर्ट में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण (लीगल सर्विस अथॉरिटी) से जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने प्राधिकरण से अनुमति मांगी है। सीबीआई मोबाइल, लैपटॉप से मिले चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और डिलीट डेटा की भी जांच कर रही है, ताकि मामले की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों की जांच कर रही सीबीआई एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और अन्य तथ्यों को जोड़कर जांच कर रही है। गिरिबाला सिंह की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश दस्तावेज में सामने आया है कि जांच से जुड़े तथ्य पहले ही उनके पास पहुंच रहे थे। ट्विशा के परिजन के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि इसी के चलते गिरिबाला अग्रिम जमानत लेने में सफल हो गईं। मामले की प्रारंभिक जांच और रस्सी जब्त करने वाले एसआई दिनेश शर्मा से दोबारा पूछताछ की जाएगी। शर्मा ने ही घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और क्राइम सीन तैयार किया था। घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की। महिला बंदियों ने प्रस्तुत किए भजन महिला आयोग की टीम ने जेल के महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों से उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली गई। जेल के सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों के ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। निरीक्षण के दौरान आयोग के सचिव सुरेश तोमर, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।  एसआई ने रस्सी जब्त की और कार में रख ली वकील अंकुर पांडे ने कहा– कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा 13 मई 2026 को सुबह करीब 9:42 बजे ट्विशा के घर पहुंचे। उन्होंने गिरिबाला और समर्थ के सामने रस्सी जब्त की, लेकिन दस्तावेज में किसी को चश्मदीद नहीं बनाया। उन्होंने रस्सी अपनी कार में रख ली, जबकि ये तत्काल एम्स के डॉक्टरों को देना था। 13 मई को पीएम कराने भी दिनेश शर्मा ही एम्स पहुंचे थे। ट्विशा के परिजन ने इस पर 14 मई को हंगामा कर दिया। इसके बाद एसआई ने 15 मई को ये रस्सी डॉक्टरों को दी। वकील कहते हैं, ऐसे सबूत जुटाते समय गवाह बनाना कानूनी रूप से जरूरी है। पुलिस को शुरुआत में ही गिरिबाला और पति समर्थ को संदिग्ध के रूप में चिह्नित करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। एक जून को गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर उनके घर पहुंची थी। रस्सी की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं वकील का दावा है कि प्रारंभिक जांच करने वाले एसआई दिनेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध है। अग्रिम जमानत के लिए दिए गए आवेदन में जब्ती से जुड़े दस्तावेज में हुई गलतियों का जिक्र था। इसी आधार पर जमानत मांगी गई। इससे संकेत मिलता है कि केस डायरी … Read more