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सोलर संयंत्र स्‍थापना में लापरवाही बरतने वाले वेंडरों को चयन सूची से हटाया गया

भोपाल मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत सोलर संयंत्र स्‍थापना में लापरवाही करने वाले वेंडरों को चयन सूची से हटाने की कार्रवाई की गई है। कंपनी द्वारा विगत 2 वर्षों से लगातार वेंडरों को उनके द्वारा स्‍थापित किये गये सोलर संयंत्र के सभी प्रोजेक्ट्स का मध्‍यक्षेत्र कंपनी के सर्वर के साथ 100 प्रतिशत कम्युनिकेशन कराये जाने के लिये पत्राचार करने के बावजूद कतिपय वेंडरों द्वारा कंपनी के दिशा-निर्देशों की अवेहलना की जाने पर उनका पंजीयन निष्क्रिय किया गया है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के सोलर संयंत्र स्थापित होने के उपरांत सोलर वेंडरों की लापरवाही से मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सर्वर के साथ कम्युनिकेशन नहीं होने के कारण कंपनी के मीटर रीडर द्वारा उपभोक्ताओं के परिसर में जाकर मीटर की ऑफलाइन रीडिंग लेने से उपभोक्ताओं में असंतोष के साथ ही रीडिंग में त्रुटि होने की संभावना बनी रहती है। साथ ही योजना के उदेश्‍यपूर्ण परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इसी के दृष्टिगत कंपनी द्वारा ऐसे वेंडरों को पीएम सूर्य घर योजना के पोर्टल पर प्रदर्शित हो रही सूची से हटाये जाने की कार्यवाही की जा रही है। कंपनी ने सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत नवीन आवेदन करने के दौरान निष्क्रिय पंजीयन वाले वेंडरों का चयन न करें। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लापरवाही बरतने वाले जिन सोलर वेंडरों का पंजीयन निष्क्रिय किया गया है, उनमें सूर्याय नमः एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, प्रतिष्ठा एंटरप्राइजेज, भगवती कृपा सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड, इक्विपोलेंट एनर्जी सॉल्यूशंस कंसल्टेंसी ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड, लाभ ग्रीन एनर्जी, सेंटौर पॉवर्स एंड सोलर एनर्जी, स्पार्कल एनर्जी सॉल्यूशन, माँ रीवा एंटरप्राइजेज, बटेश्वर सोलर प्राइवेट लिमिटेड, लाइटहाउस एनर्जी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, नायक सोलर सॉल्यूशन, एन्हांस मल्टी ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, एकेएन पावर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सर्वोटेक पावर सिस्टम्स लिमिटेड, एसयू-विट्र टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, आदित्य सोलर सॉल्यूशंस, अस्तित्व एनर्जीज़, एनर्जी सॉल्यूशन सर्विसेज़, हेडस्ट्रीम इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ओपीसी, के के इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स, सोलरसेंस इको एनर्जी सॉल्यूशंस, साउदर्नलाइट सोलर एलएलपी एवं तिरुहरि इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का क्रियान्वयन मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में किया जा रहा है। योजना में कंपनी अंतर्गत पंजीकृत वेंडरों के माध्यम से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।  

नगरीय प्रशासन संचालनालय में योग शिविर का आयोजन

भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय पालिका भवन में एक विशेष योग प्रशिक्षण शिविर का आयोजन मंगलवार को किया गया। यह कार्यक्रम विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे की पहल पर आयोजित किया गया। इनका उद्देश्य कर्मचारियों एवं अधिकारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने की दिशा में जागरूक करना था। इस योग शिविर का संचालन सुप्रसिद्ध योग प्रशिक्षिका सुश्री अंजना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा ध्यान की तकनीकों का अभ्यास कराया और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने योग अभ्यास में उत्साहपूर्वक भाग लिया और नियमित योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। यह निःशुल्क योग शिविर "मिशन कर्मयोगी" के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शासन के कर्मियों को न केवल दक्ष बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की दिशा में प्रेरित करना है। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने योग प्रशिक्षिका सुश्री अंजना श्रीवास्तव का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही।  

राष्ट्रीय पोषण माह अभियान 17 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक

भोपाल  मिशन पोषण 2.0 के तहत मध्यप्रदेश में 17 सितम्बर से 16 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाएगा। इस वर्ष का आयोजन आठवाँ पोषण माह होगा, जिसमें राज्य, जिला, परियोजना और आंगनबाड़ी स्तर तक सामुदायिक सहभागिता से थीम-आधारित गतिविधियाँ संचालित होंगी। पोषण माह की प्रमुख थीम हैं मोटापा नियंत्रण (कम नमक, कम चीनी, कम तेल), प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (पोषण भी पढ़ाई भी), शिशु एवं बाल आहार प्रथाएँ (IYCF), पुरुष सहभागिता (Men-streaming) और एक पेड़ माँ के नाम एवं स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा। पोषण माह के दौरान आईवाईसीएफ परामर्श सत्र, व्यंजन प्रतियोगिता, फिटनेस चैलेंज, योग दिवस, किचन गार्डन अभियान तथा स्थानीय उत्पादों का प्रचार जैसी गतिविधियाँ होंगी। “पोषण भी पढ़ाई भी” थीम के तहत आंगनबाड़ियों में स्टोरी टेलिंग, पपेट शो और एक्टिविटी आधारित शिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे। जन-जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक, रेडियो जिंगल्स, सोशल मीडिया अभियान (#PoshanMaah2025) और सामुदायिक रेडियो का उपयोग किया जाएगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत, कृषि, खाद्य, आयुष, जल जीवन मिशन, खेल एवं युवा कल्याण सहित विभिन्न विभागों और स्थानीय अशासकीय संगठनों की सहभागिता से यह अभियान सुपोषित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। 

आयुष विभाग को उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिलेगा प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड – 2025

भोपाल आयुष विभाग को प्रतिष्ठित "स्कॉच अवार्ड-2025" सम्मान आयुष ई-मॉनिटरिंग सिस्टम' परियोजना के सफल क्रियान्वयन एवं उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रदान किया गया है। यह अवार्ड तीन चरणों की विस्तृत प्रस्तुतियाँ और दो चरणों की सार्वजनिक डिजिटल वोटिंग के बाद प्रदान किया गया, जो इस उपलब्धि की पारदर्शिता और गुणवत्ता की और अधिक प्रमाणित करता है। "स्कॉच अवॉर्ड-2025" का वितरण नई दिल्ली में आयोजित होने वाले स्कॉच समिट में मिलेगा। आयुष विभाग, राज्य सरकार की मंशानुरूप परंपरागत चिकित्सा पद्धति को मुख्य धारा में लाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ क्रियाशील है। आयुष विभाग, आयुर्वेद जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समकक्ष स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। आयुष विभाग को देश के प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड 2025 से नवाजा जाना, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह अवॉर्ड, टीम भावना, नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों सहित विविध मानको पर खरा उतरने पर दिया जाता है। आयुष ई-मॉनिटरिंग के मुख्य उद्देश्य आयुष ई-मॉनिटरिंग के मुख्य उद्देश्य प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों और चिकित्सा महावि‌द्यालयों में OPD में अधिकतम वृद्धि करना, अधिक से अधिक नागरिकों की आयुष सुविधा कवरेज में लाना, लोगों को स्वस्थ एवं रोगमुक्त बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं उपलब्ध कराना है। आयुष विभाग में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक माह में दो बार वीडियो कॉन्फ्रेसिंग (VC) कर सभी आयुष चिकित्सा अधिकारियों एवं आयुष मेडिकल कॉलेज के साथ अनुभव साझा करना एवं समस्याओं का समाधान, कठोर निगरानी और मूल्यांकन हर केंद्र के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा अनुभव करना एवं श्रेष्ठ प्रथाओं को बढ़ावा देना, प्रत्येक आयुष सुविधा की रैंकिंग प्रकाशित करना, प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार कर गुणवत्ता बढ़ाना, आयुष अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना, अस्पतालों और कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं का विकास करना जैसे अनेक नवाचार अपनाए है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने आयुष विभाग को प्रतिष्ठित स्कॉच अवाई- 2025 मिलने पर हर्ष व्यक्त करते आयुष विभाग को स्कॉप अवॉर्ड 2025" मिलना, प्रदेश के लिए गौरव की बात बताई है। मंत्री श्री परमार ने विभाग की इस उपलब्धि के पीछे टीम भावना नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों का क्रियान्वयन बताया है, जिससे नागरिकों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो रही है। प्रमुख सचिव आयुष श्री डी.पी. आहूजा ने बताया कि "आयुष ई-मॉनिटरिंग ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है तथा राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में आयुष चिकित्सा की सुलभता और गुणवत्ता को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया है। श्री आहूजा ने बताया कि अपर सचिव आयुष श्री संजय मिश्रा की सतत निगरानी एवं समन्वय ने विभाग की इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से ई-मानिटरिंग सिस्टम के सभी घटकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ जिससे राज्यभर में आयुष सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ हैं।  

नो-एंट्री ज़ोन में ट्रक कैसे घुसा? इंदौर हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, कमिश्नर से जवाब तलब

जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यामूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इंदौर एयरपोर्ट रोड पर हुए भीषण हादसे के मामले में स्वत: संज्ञान आधार पर सुनवाई प्रारंभ की है। मंगलवार को प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इंदौर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे 23 सितंबर को वर्चुअल हाजिर होकर स्पष्टीकरण दें। उन्हें यह साफ करना होगा कि शहर में नो-एंट्री होते हुए ट्रक कैसे घुस गया और बिना किसी रोक-टोक के इतने आगे तक कैसे पहुंच गया। कोर्ट ने प्रशासन की बड़ी विफलता माना कोर्ट ने इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासन की बड़ी विफलता माना है। अदालत ने कहा कि अगर नियमों का कड़ाई से पालन हुआ होता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। कोर्ट ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब सड़क सुरक्षा के सख्त नियम मौजूद हैं, तो इस तरह के हादसे होना बेहद चिंताजनक है। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की हाई कोर्ट ने इंदौर के दर्दनाक हादसे को लेकर प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की व्यवस्था दी है। राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली खड़े हुए। उन्होंने अवगत कराया कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कर दी जाएगी। क्या है मामला? उल्लेखनीय है कि सोमवार शाम तेज रफ्तार ट्रक ने इंदौर में एयरपोर्ट रोड पर कोहराम मचा दिया था। उसने लगभग एक किलोमीटर तक कई वाहनों को टक्कर मारी। वहीं कुचले जाने से दो लोगों की मौके पर ही मौत तक हो गई। जबकि एक युवक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 12 घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

चीता परियोजना के सफल तीन वर्ष: प्रोजेक्ट चीता को ‘इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड’

चीता परियोजना की सफलता से मध्यप्रदेश बना एशिया का गौरव   भोपाल  पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ते चीतों के परिवार के साथ मध्यप्रदेश एशिया का गौरव बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 3 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश को चीता परियोजना की सौगात मिली थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 17 सितम्बर 2022 को अपने जन्म दिवस पर पहले पालपुर कूनो में चीते छोड़कर प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। आज चीतों के परिवारों में वृद्ध‍ि हो रही है। 'प्रोजेक्ट चीता को ‘इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार हाल ही में नई दिल्ली में आईएफएस एसोसिएशन और इंडियन मास्टरमाइंड्स द्वारा आयोजित तीसरे इको वॉरियर अवॉर्ड्स कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अवॉर्ड मिलने पर चीता परियोजना से जुड़ी प्रबंधन टीम को बधाई दी है। तीन वर्षों की साहसिक पहल प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाकर हुई। इसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल ध्यान आकर्षित किया। कई शंकाएँ भी उठीं कि भारतीय वातावरण चीता के लिए उपयुक्त नहीं है। इस अवधारणा को तोड़ते हुए कूनो पालपुर और गांधी सागर अभयारण में चीते फर्राटे भर रहे है और उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। चीतो को भायी म.प्र. की आवोहवा चीता ने भारतीय वातावरण को आश्चर्यजनक रूप से तेज़ी से अपना लिया है। पिछले तीन वर्षों में पाँच चीता मादाओं द्वारा 6 बार शावकों को जन्म देना इस परियोजना की सफलता और लचीलापन का परिचायक है। वे भारतीय शिकार जैसे चीतल के प्रति अच्छी अनुकूलता दिखा रहे हैं। शुरुआत में डर था कि तेंदुओं से संघर्ष होगा, लेकिन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र ने खुद को संतुलित किया, और शिकारी प्रजातियाँ अपने-अपने क्षेत्र में सीमित हो गईं। नवाचार, संकल्प और आशा का प्रतीक प्रोजेक्ट चीता प्रोजेक्ट चीता की तीन वर्ष की यात्रा चुनौतीपूर्ण होने के साथ प्रेरणादायक भी रही है। यह परियोजना अब और अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में चीता परियोजना प्रबंधन टीम ने कभी हार नहीं मानने का पाठ सीखा। चीता प्रबंधन के हर पहलू से ऐसी मूल्यवान जानकारियाँ मिलीं हैं, जिससे अनुभव रखने वाले और नए दोनों पेशेवरों की समझ में वृद्धि हुई है। किसी जीवित प्राणी के साथ काम करते समय जोखिम अनिवार्य होते हैं। पिछले तीन वर्षों में केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, फील्ड मैनेजर्स, पशु चिकित्सकों और फ्रंटलाइन स्टाफ का आत्मविश्वास मज़बूत हुआ। इन वर्षों में यह भी साबित हो गया कि मध्यप्रदेश आपात स्थितियों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है। प्रोजेक्ट चीता की सफलता टीमवर्क का प्रतीक है जहाँ सभी पेशेवर एक ही उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता और कौशल के साथ कार्य कर रहे हैं। तीन वर्षों की सीख और सफलता प्रोजेक्ट चीता की टीम के अथक प्रयासों के परिणाम सामने हैं। चीते न केवल जीवित रहे बल्कि सफलतापूर्वक अपना परिवार भी बढ़ाया। उनकी उपस्थिति ने घास के मैदानों और खुले जंगलों की ओर फिर से ध्यान आकर्षित किया। ऐसे परिस्थितिकी तंत्र पहले उपेक्षित थे। कूनो में घास के मैदानों में सुधार, जैव विविधता में वृद्धि और स्थानीय समुदायों को पर्यटन के माध्यम से लाभ पहुँचना इस चीता परियोजना की बड़ी उपलब्धियाँ हैं। चीतों की पुन:र्स्थापना से पारिस्थितिकी को कोई नुकसान नहीं हुआ। हर चीते की बारीकी से निगरानी, पेशेवर पशु चिकित्सकों द्वारा देखभाल, और सुरक्षित वातावरण ने चीता परियोजना को वैश्विक मानकों के बराबर खड़ा कर दिया है। चीता की लगातार बढ़ती संख्या चीता परियोजना की सबसे उत्साहजनक उपलब्धि रही है कि भारत में शावकों का जन्म हुआ। वर्तमान में 25 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हैं। दो नर गांधी सागर सेंचुरी में सफलतापूर्वक पुनर्वासित हो चुके हैं। इस प्रकार कुल 27 चीते है। कूनो के परिदृश्य में एक आत्मनिर्भर और मुक्त विचरण करने वाली चीता आबादी स्थापित करना निकट भविष्य का लक्ष्य है। तीन वर्षों की सफलता के साथ प्रोजेक्ट चीता का यह संदेश है कि यह केवल एक प्रजाति की वापसी नहीं है, बल्कि वैश्विक प्रकृति संरक्षण में भारत के समर्प‍ित नेतृत्व का प्रतीक है। चीता की वापसी यह सिद्ध करती है कि विलुप्ति अंतिम नहीं होती और दूरदृष्टि तथा संकल्प के साथ खोई विरासत को वापस लाया जा सकता है। 

एमपीसीएसटी में अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस पर हुआ विशेष कार्यक्रम

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल), भोपाल में मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शैक्षिक गतिविधियों, चर्चाओं और विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से ओज़ोन परत के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया। शैक्षिक गतिविधियाँ और साइंस-शो कार्यक्रम की शुरुआत एक ओपन क्विज़ प्रतियोगिता से हुई जिसमें विद्यार्थियों ने ओज़ोन परत की खोज, इसके क्षरण और कार्बन फुटप्रिंट से संबंधित जानकारी प्राप्त की। ग्लोबल वार्मिंग अम्ब्रेला और ओज़ोन हाउस जैसे आकर्षक माध्यमों के ज़रिए ओज़ोन परत की भूमिका और महत्व को समझाया गया। साइंस शो ने बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रेरित किया। विज्ञान संचारक अंजली और नीलू ने ग्लोबल वार्मिंग अम्ब्रेला के माध्यम से ओज़ोन परत के क्षरण से बचाव के उपायों को सरलता से प्रस्तुत किया।विज्ञान संचारक करण ने एक रोचक साइंस शो के माध्यम से बच्चों को विज्ञान की दुनिया से जोड़ा। विशेषज्ञ व्याख्यान और समापन समापन सत्र में एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने विद्यार्थियों को परिषद की सुविधाओं और विज्ञान गतिविधियों से जुड़ने के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) को ध्यान में रखते हुए समाजोपयोगी परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया, जिससे विज्ञान और नवाचार का लाभ समाज तक पहुँच सके। पुणे से आए विशेषज्ञ श्री विनायक बडेकर ने मानव शरीर और प्राकृतिक घटनाओं के आपसी संबंध तथा क्रोनोबायोलॉजी के उभरते भविष्य पर विद्यार्थियों को सरल और प्रभावी ढंग से जानकारी दी। कार्यक्रम से ओज़ोन परत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच तथा नवाचार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।  

सुरखी विधानसभा में बन रहा मध्यप्रदेश का पहला नमो फ्रूट वन उद्यान

बरौदा सागर में लगाए जा रहें 21 हजार फलदार पौधे, मंत्री श्री राजपूत ने किया निरीक्षण 10 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य, फूड प्रोसेसिंग एवं कुटीर उद्योग स्थापित करने की योजना मंत्री श्री राजपूत ने थामी ट्रैक्टर की स्टेरिंग भोपाल खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने मंगलवार को सुरखी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बरौदा सागर में 70 एकड़ भूमि पर विकसित किए जा रहे मध्यप्रदेश के पहले नमो फ्रूट फॉरेस्ट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री राजपूत ग्रामीणों के साथ स्वयं ट्रैक्टर चलाकर नमो फ्रूट फॉरेस्ट स्थल पर पहुंचे। मंत्री श्री राजपूत ने निरीक्षण के दौरान वृक्षारोपण की स्थिति, पौधों की देखरेख, सिंचाई व्यवस्था तथा स्थानीय लोगों की सहभागिता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में सेवा पखवाड़ा के तहत पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सुरखी विधानसभा के ग्राम बरौदा राजघाट के पास नमो फ्रूट फॉरेस्ट में 21 हजार फलदार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि यह प्रदेश का पहला ऐसा उद्यान है जहां सभी प्रकार के फलदार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी इस उद्यान में 21 हजार फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य 10 लाख पौधों के रोपण का है। बरौदा ग्राम में फूड प्रोसेसिंग एवं अन्य कुटीर उद्योग स्थापित करने की भी कार्य योजना तैयार की जा रही है जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर मिलेंगे । उन्होंने बताया कि तालचिरी में भी 10 एकड़ में नमो फल उद्यान बन रहा है। यहां भी फलदार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि नमो फूड फॉरेस्ट स्व सहायता समूह की महिला सदस्यों को सौंपा जाएगा, जिससे वह आत्मनिर्भर बनेंगी एवं आर्थिक रूप से समृद्ध भी होगी। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य समय सीमा के अंदर पूर्ण हो एवं यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी पौधों की नियमित देखभाल हो। फ्रूट फॉरेस्ट में आम, अमरूद, कटहल, आंवला, नींबू, सीताफल,अनार आदि के हजारों फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। निरीक्षण के पश्चात मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने ग्रामीणों से पौधों की देखरेख करने और पर्यावरण सुरक्षा में सहयोग देने का आह्वान किया।  

भोपाल विमानतल पर यात्री सेवा दिवस का आयोजन

भोपाल  भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण मुख्यालय द्वारा 17 सितम्बर 2025 को “यात्री सेवा दिवस” के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस अवसर पर यात्रियों की सुविधा एवं सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से भाविप्रा के सभी विमानतलों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजा भोज विमानतल, भोपाल पर 17 सितम्बर 2025, “यात्री सेवा दिवस” पर आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है: 17 सितम्बर – यात्री सेवा दिवस 1-    यात्रियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया जाएगा तथा स्थानीय कलाकारों द्वारा मध्य प्रदेश के लोकनृत्य व सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। 2-    विमानतल पर बच्चों के लिए देशभक्ति एवं स्वच्छता पर आधारित क्विज़ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 3-    यात्रियों के लिए आकर्षक सेल्फी प्वाइंट स्थापित किया जाएगा। 4-    विमानतल के रिटेल कन्सेशनर्स द्वारा इस अवसर पर रिटेल दुकानों पर यात्रियों को विशेष डिस्काउंट दिए जाने का निर्णय लिया गया है। 5-    विमानतल पर यात्रियों के लिए फ्री हेल्थ चेकअप कैंप लगाया जाएगा, जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ब्लड प्रेशर, शुगर, ECG , BMI आदि की जाँच होगी और आहार संबंधित सलाह भी दी जाएगी। 6-    विमानतल पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा जिसमें यात्री और स्टाफ अपनी स्वेच्छा से हिस्सा लेंगे। 7-    विमानतल के टैक्सी ड्राइवर्स तथा अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। 8-    “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होगा। 9-    स्थानीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए एविएशन करियर हेतु मार्गदर्शन दिया जाएगा तथा एम पी फ्लाइंग क्लब की विजिट भी कराई जाएगी। 10- विमानतल स्टाफ द्वारा यात्रियों से फीडबैक लिया जाएगा, जिससे यात्री सेवाओं तथा सुविधाओं में और वृद्धि की जा सकेगी।  यह आयोजन यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने एवं हवाई यात्रा को और अधिक सहज एवं सुखद बनाने की दिशा में कदम होगा।

मानवता की सेवा के लिये रक्तदान जरूरी : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

दामोदर युवा संगठन के रक्तदान शिविर में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि गंभीर मरीजों को समय पर रक्त मिल सके इसके लिये जरूरी है कि समाज में रक्तदान करने के लिये जगरूकता कार्यक्रम चलाए जायें। उन्होंने कहा‍ कि युवा वर्ग को इस कार्य के लिये प्रोत्साहित किये जाने की जरूरत है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल मंगलवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में दामोदर युवा संगठन के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रक्तदान करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य सरकार अपने साधनों से बेहतर से बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रही है। इस क्षेत्र में सेवा के विस्तार के लिये स्वयं सेवी संगठनों की अधिक से अधिक मदद की जरूरत है। उन्होंने 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलाये जाने वाले सेवा पखवाड़ा की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने अपने संबोधन में कहा‍ कि प्रत्येक व्यक्ति समाज की भलाई के लिये मन में भाव रखता है, लेकिन इस भाव को स्वयं सेवी संगठनों से जुड़कर पूरा किया जा सकता है। दामोदर युवा संगठन के संस्थापक श्री अशोक नायक ने बताया कि इंदौर में देश का नि:शुल्क ब्लड कॉल सेंटर है। जहाँ देश के किसी भी स्थान से फोन आने पर संगठन द्वारा मरीज को नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराये जाने का प्रयास किया जाता है। संगठन से देशभर के 4 लाख युवा जुड़े हुए है। संगठन ने अभी तक 2 लाख जरूरत मंदों को नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया है। उन्होंने बताया कि रियर ब्लड ग्रुप "ओ बॉम्बे पॉजिटिव" जिसके दानदाता देशभर में 180 है। इस ग्रुप का ब्लड भी 5 जरूरत मंदों को उपलब्ध कराया गया है। संगठन के 2 हेल्प लाइन नबंर 92002-50000 और 70245-12345 है। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री के.पी. त्रिपाठी भी मौजूद थे।