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रोजगार की दृष्टि से जापानी एवं जर्मनी भाषा सिखाने के लिए बनाएं कार्ययोजना: मंत्री परमार

उद्योगजगत की जरूरत और भारतीय ज्ञान परम्परा समावेशी पाठ्यक्रम का निर्माण करें : मंत्री परमार रोजगार की दृष्टि से जापानी एवं जर्मनी भाषा सिखाने के लिए बनाएं कार्ययोजना: मंत्री परमार तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने विभागीय गतिविधियों एवं कार्यों की समीक्षा की भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा विभाग की बैठक में विविध विभागीय गतिविधियों एवं कार्यों के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने निर्माण कार्यों एवं एसएफसी उपरांत स्वीकृत कार्यों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सेवा भर्ती नियम-2004 के अंतर्गत नियुक्त उच्च पदों पर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों के पेंशन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने शासकीय तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता नियमों का पुनरावलोकन कर समसामयिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के झाबुआ स्थित परिसर में संचालित यूआईटी (यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के लिए यथावत सतत् संचालन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा। उन्होंने तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के मापदंडों के अनुरूप शैक्षणिक पदों की भर्ती एवं प्रयोगशालाओं आदि के लिए आवश्यक मानव संसाधन की पूर्ति शीघ्र करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने उद्योग जगत की आवश्यकता अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण के लिए क्षेत्रीय आवश्यकताओं एवं मांगों के व्यापक अध्ययन के साथ क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परम्परा के समावेश के लिए आवश्यक क्रियान्यवन करने को कहा। मंत्री परमार ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को जापानी एवं जर्मनी भाषा सिखाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इससे विद्यार्थियों को वहां रोजगार के अवसरों के अनुरूप संवाद में भाषाई सहजता प्राप्त हो सकेगी और देशों के मध्य सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। बैठक में तकनीकी शिक्षण संस्थानों में आईआईटी की तर्ज पर एमपीआईटी की स्थापना, कोडिंग लैब्स, डिजिटल यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की प्रगति, संस्थानों में शोध, अनुसंधान एवं पेटेंट की अद्यतन स्थिति, संस्थानों में तकनीकी शब्दकोश की उपलब्धता, संस्थान परिसरों में विद्यावन स्थापना की प्रगति, शुजालपुर में आरजीपीवी अंतर्गत यूआईटी की स्थापना, इनोवेट एमपी की दृष्टि से सृजन कार्यक्रम की अद्यतन स्थिति सहित विभिन्न विभागीय विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा मनीष सिंह एवं आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

CM डॉ. यादव की पहल: उद्योगपतियों संग वन-टू-वन बैठक कर बढ़ाएंगे निवेश

कोलकाता में 10 सितम्बर को निवेश अवसरों पर इंटरएक्टिव सेशन CM डॉ. यादव की पहल: उद्योगपतियों संग वन-टू-वन बैठक कर बढ़ाएंगे निवेश निवेश बढ़ाने के लिए CM डॉ. यादव की सीधी बातचीत, उद्योगपतियों से होगी खास बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों से निवेश के संदर्भ में करेंगे वन-टू-वन बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 सितम्बर को कोलकाता में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन (वन-टू-वन) बैठकें करेंगे। साथ ही टेक्सटाइल, वस्त्र एवं परिधान, आई टी, ईएसडीएम, मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी सहित सभी प्रमुख सेक्टर में संभावित निवेश अवसरों और व्यावसायिक साझेदारी पर विस्तार से चर्चा करेंगे। कोलकाता में होने वाले इंटरएक्टिव सेशन में पीएम मित्रा पार्क की निवेश संभावनाओं को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही निवेश-उपयुक्त परियोजनाएं, इंटीग्रेटेड लैंड बैंक, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स, प्लग-एंड-प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाल ही में लागू की गई 18 नई निवेश नीतियों की जानकारी साझा की जाएगी। इज ऑफ डुईंग बिजनेस के तहत निवेशकों के लिए सुगम वातावरण और राज्य की मजबूत आधारभूत संरचना को भी उजागर किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान "इनफिनिट पॉसिबिलिटीज इन मध्यप्रदेश" फिल्म प्रदर्शित की जाएगी, जिसमें प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और निवेश-अनुकूल माहौल को दिखाया जाएगा। यह फिल्म उद्योग जगत को निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और लाभों से परिचित कराएगी। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह निवेशकों को विस्तृत प्रस्तुति देंगे, जिसमें निवेश-उपयुक्त परियोजनाओं, औद्योगिक क्षेत्रों में अवसरों और नीतिगत सुविधाओं की जानकारी दी जायेगी।  

ग्राम स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन कर विकास गतिविधियां की जाएं संचालित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सामाजिक-आर्थिक जीवन स्तर के उन्नयन का प्रभावी माध्यम हैं पंचायतें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्राम स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन कर विकास गतिविधियां की जाएं संचालित त्यौहारों से पहले सभी गांवों में साफ-सफाई सुनिश्चित हो नगरों के नजदीकी ग्रामों और ग्राम पंचायतों में अधोसंरचना विकास प्रबंधन की करें विशेष व्यवस्था प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में देश में मध्यप्रदेश अव्वल जिन स्व-सहायता समूहों के सभी सदस्य लखपति हैं, उन्हें रोल मॉडल के रूप में किया जाए प्रस्तुत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पंचायतें सामाजिक-आर्थिक जीवन स्तर के उन्नयन का प्रभावी माध्यम हैं। शासन की कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में पंचायतराज संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता और उनकी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आवश्यक है। प्रदेश की सभी पंचायतों में सभी लोगों को मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन कराते हुए विकास गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि त्यौहारों से पहले सभी गांवों में साफ-सफाई सुनिश्चित करें। साथ ही धार्मिक पर्वों पर होने वाले भंडारों और धार्मिक आयोजनों को प्लास्टिक कचरा मुक्त बनाने में ग्राम पंचायतें पहल करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए हों गतिविधियां संचालित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम स्तर की जरूरतों, प्राथमिकताओं और सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर सहभागी नियोजन और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन आवश्यक है। स्थानीय स्तर पर कार्य कर रहे पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए भी गतिविधियां संचालित की जाएं। प्रदेश में हो रहे नगरीय विस्तार को देखते हुए नगरों के पास के ग्रामों और ग्राम पंचायतों में अधोसंरचना विकास प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। स्वावलंबी गौशालाओं के प्रबंधन का दस्तावेजीकरण किया जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बन रहे आवासों का निर्माण जलवायु की अनुकूलता और ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव का आकलन करते हुए किया जाए। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बन रहे पीएम आवास काडिजाइन ऐसा हो, जिससे इनकी विशेष पहचान बनी रहे। उन्होंने कहा कि स्वावलंबी रूप में संचालित हो रही गौशालाओं के प्रबंधन का दस्तावेजीकरण किया जाए तथा अन्य जिलों के गौशाला संचालक भी स्वावलंबी प्रबंधन प्रक्रिया का अनुसरण करें। गौशालाओं के प्रबंधन को धार्मिक संस्थाओं और समाज की दान-पुण्य गतिविधियों से जोड़ा जाए। इसके साथ ही जिन स्व-सहायता समूहों के सभी सदस्य लखपति हैं, उन समूहों को प्रदेश में रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाए। स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को एमएसएमई तथा बड़े उद्योग समूहों से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास हो। परम्परागत आवास निर्माण तकनीकों का कराया रहा रहा है अध्ययन बैठक में मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, मनरेगा, आजीविका मिशन, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों और उनकी प्रगति पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के अंतर्गत आवास पूर्णता में देश में प्रदेश प्रथम स्थान पर है। योजना के अंतर्गत स्वीकृत 49 लाख 42 हजार आवासों में से 39 लाख 5 हजार आवास पूर्ण हो गए हैं। योजना के अंतर्गत निर्मित हो रहे आवास स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बने, इस उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न अंचलों में आवास निर्माण के लिए प्रचलित परम्परागत तकनीकों का भी अध्ययन स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्टिटेक्चर द्वारा कराया गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान सहित जल संरक्षण कार्यों में सामूहिक भागीदारी के बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। वार्षिक लेबर बजट के अंतर्गत आवास कार्यों से 324 लाख मानव दिवस सृजित किए गए। जल गंगा संवर्धन अभियान से 350 लाख मानव दिवस सृजित करते हुए 826 करोड़ रूपए की मजदूरी का भुगतान किया गया। मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार देने में देश में प्रथम स्थान पर है। एक बगिया मां के नाम योजना में 5 जिलों ने दर्ज की बेहतर उपलब्धि बैठक में बताया गया कि एक बगिया मां के नाम योजना के अंतर्गत सिंगरौली, खण्डवा, बैतूल, देवास और आगर-मालवा जिलों ने बेहतर उपलब्धि दर्ज की है। मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों की भूमि पर पौधरोपण के साथ फेंसिंग से पौधों को सुरक्षित रखने में मदद मिली है। प्रदेश में 11 संस्थाओं द्वारा बिना आर्थिक सहायता के 85 गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 5 हजार 393 अद्यतन जल संग्रहण संरचनाएं निर्मित की गईं। योजना से नदी पुनर्जीवन की दिशा में भी खण्डवा जिले में घोड़ापछाड़ नदी और रतलाम जिले में मलेनी नदी पर हुए कार्य से अप्रैल-मई माह तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सफलता मिली है। बेहतर जल प्रबंधन से क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन आय का बेहतर विकल्प सिद्ध हो रहा है और किसान फल-सब्जी उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं। आजीविका मिशन की गतिविधियों का अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ईप्लेटफार्म तक हुआ विस्तार आजीविका मिशन के अंतर्गत कृषि और पशुपालन आधारित गतिविधियों से 30 लाख और गैर कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों से 11 लाख परिवार जुड़े हैं। लखपति दीदी इनिशिएटिव के अंतर्गत 11 लाख 26 हजार दीदीयों ने उपलब्धि दर्ज कराई है। आजीविका मिशन की गतिविधियों का विस्तार अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ईप्लेटफार्म तक भी हुआ है। बैठक में एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों, स्व-सहायता समूहों और प्रायवेट कम्पनी/स्टार्टअप के माध्यम से पार्टनरशिप के लिए की जा रही पहल की भी जानकारी दी गई। नवीन अटल सेवा सदन और अटल ई-सेवा केन्द्र स्थापना का कार्य जारी बैठक में बताया गया कि सभी पंचायतों में भवन उपलब्ध कराने के लिए नवीन अटल सेवा सदन का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर अटल ई-सेवा केन्द्र स्थापना, प्रदेश के प्रत्येक ग्राम के शमशान घाट तक पहुंच मार्ग और शमशान घाट की व्यवस्था की दिशा में कार्य जारी है। सभी ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत यूपीआई आधारित भुगतान प्राप्ति व्यवस्था स्थापित की गई है। उल्लेखनीय है कि … Read more

मध्य प्रदेश पुलिस में बड़ी भर्ती, आरक्षक और उप निरीक्षक के 8,000 पदों के लिए आवेदन जल्द

भोपाल प्रदेश में पुलिस आरक्षक और उप निरीक्षक के पदों पर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। पुलिस आरक्षकों के 7500 और उप निरीक्षकों के 500 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया इसी माह से प्रारंभ होने जा रही है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने इसकी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। एक सप्ताह में विज्ञापन जारी करने की योजना है। ईएसबी की यह भी तैयारी है कि लिखित परीक्षा इसी वर्ष करवा ली जाए। बता दें, छह माह से भर्ती प्रक्रिया रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन को लेकर निर्णय नहीं होने के कारण उलझी हुई थी। सरकार ने अन्य परीक्षाओं में पंजीयन की अनिवार्यता यथावत रखने का निर्णय लिया है, पर पुलिस भर्ती में पंजीयन को लेकर निर्णय पुलिस मुख्यालय पर छोड़ दिया था। मुख्यालय ने तय किया है कि पंजीयन जरूरी नहीं रहेगा। मंडल को भी इसकी नियमावली भेज दी गई है। बता दें, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तीन वर्ष के भीतर आरक्षकों के 22,500 पदों पर भर्ती करने के लिए कहा है। इस वर्ष ईएसबी और आगे दो वर्षों में पुलिस भर्ती बोर्ड से परीक्षा कराई जाएगी। आरक्षक और उप निरीक्षकों के अतिरिक्त पुलिस मुख्यालय में लिपकीय संवर्ग के 500 पदों पर भी भर्ती की जानी है। मुख्यालय की तरफ से इसी वर्ष मार्च में इन संवर्गों में पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव ईएसबी को भेजा गया था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर राज्यों को रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। इस संबंध में निर्णय लेने में सरकार को लगभग छह माह लग गए। अब भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा पूरी कराने में ही कम से कम छह माह लगेंगे। उप निरीक्षकों की भर्ती में पहली बार साक्षात्कार को भी जोड़ा गया है। बता दें, उप निरीक्षकों की भर्ती सात वर्ष बाद हो रही है। इस बीच परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों युवक अधिकतम उम्र सीमा पार कर गए। इसमें इस बार से यह बदलाव भी किया गया है कि इसमें शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंकों को जोड़कर प्रावीण्य सूची बनाई जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

संबल योजना सच्चे अर्थों में श्रमिक भाई-बहनों का सहारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने 7,953 हितग्राहियों के खातों में 175 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक से की अंतरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति में मान्यता है कि 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई' यानी दूसरों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और संबल योजना दूसरों की सेवा करने की इसी भावना को चरितार्थ करने का मार्ग है। राज्य सरकार की इस पहल का ही परिणाम है कि संबल योजना सच्चे अर्थों में श्रमिक भाई-बहनों का सहारा बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से संबल योजना के 7 हजार 953 हितग्राहियों के खातों में 175 करोड़ रुपये अंतरित कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि यह राशि श्रमिक भाई-बहनों के लिए बड़ी मदद साबित होगी। प्रदेश में 1 करोड़ 77 लाख से अधिक श्रमिक इस योजना में पंजीकृत हैं। पंजीयन की प्रक्रिया लगातार जारी है। इस अवसर पर पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल उपस्थित थे। कार्यक्रम से सभी जिले वर्चुअली रूप से जुड़े। श्रमिकों के कल्याण के लिए "श्रीपहल" को मंजूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना की शुरूआत वर्ष 2018 में हुई थी, तब से अब तक कुल 7 लाख 60 हजार 886 प्रकरणों में 7 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि हितग्राहियों को वितरित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीबी देखी है, इसलिए वे गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं। संबल योजना उसी मुश्किल वक्त के साथी का नाम है। इसी क्रम में श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में मदद के लिए को "श्रीपहल" को मंजूरी प्रदान की गई है। इसका एक और उद्देश्य श्रमिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों की नई श्रेणी बनाकर संबल योजना में किया शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार सबका साथ और सबका विकास की राह पर अग्रसर है। मार्च 2024 से घर-घर जाकर सामान और सेवायें देने वाले गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों की नई श्रेणी बनाकर संबल योजना में शामिल किया गया है। अब ये श्रमिक भाई-बहन अधिकाधिक संख्या में संबल योजना में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं और सभी आर्थिक हितलाभ ले रहे हैं। इसी क्रम में पत्थर तोड़ने वाले, ईंट बनाने वाले, पापड़-अचार बनाने वाले, खाना बनाने वाले, घरों में काम करने वाले मजदूर या तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले सभी श्रमिक और उनके परिवार इस योजना से जुड़कर आर्थिक मदद पा रहे हैं। संबल योजना के जरिए श्रमिक भाई-बहनों और उनके परिवार के जीवन को आसान और बेहतर बनाने तथा उनका बेहतर भविष्य गढ़ने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना में रजिस्टर्ड श्रमिकों के आंशिक स्थाई रूप से अपंग होने पर 01 लाख रुपये और स्थाई रूप से अपंग होने पर 02 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। दुर्घटना में संबल हितग्राही भाई-बहन की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 4 लाख रुपये और सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये अनुग्रह सहायता दिये जाने का प्रावधान है। संबल हितग्राही के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता राशि देने का भी प्रावधान है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। इसमें पांच लाख रुपये तक निःशुल्क इलाज की सुविधा का प्रावधान किया गया है। कम से कम समय में प्रभावितों को उपलब्ध कराया जाएगा हितलाभ : मंत्री पटेल पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 5वीं बार श्रमिकों के खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। आज अंतरित हुई राशि में 28 दिसम्बर 2024 तक के सभी प्रकरणों का निराकरण हो गया है। दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कम से कम समय में संबंधित श्रमिक या उनके परिजन को हितलाभ अंतरित कराने की दिशा में विभाग निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर सचिव रघुराज राजेन्द्रन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर रचा इतिहास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में इंदौर प्रथम, जबलपुर द्वितीय और श्रेणी-3 में देवास प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी प्रदेशवासियों को बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में इंदौर, जबलपुर और देवास को 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण- 2025" सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर इतिहास रचा है। संपूर्ण भारत के लिए यह सफलता अत्यंत प्रेरणादायी है। मध्यप्रदेश के इन शहरों के नागरिकों की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, अटूट संकल्प और अद्वितीय जनभागीदारी सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में "स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025" के पुरस्कार समारोह में श्रेणी-1 के अंतर्गत इंदौर को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 1.5 करोड़ रुपए), जबलपुर को द्वितीय पुरस्कार (पुरस्कार राशि एक करोड़) और श्रेणी -3 के अंतर्गत देवास को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 37.50 लाख रुपए) देकर सम्मानित किया। राष्ट्रीय स्तर के इस सर्वेक्षण में इंदौर ने 200 में से 200 अंक, जबलपुर ने 199 अंक और देवास ने 193 अंक प्राप्त किए हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव निवार्चित उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेता श्री सी.पी. राधाकृष्णन को देश के 15वें उप राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर बधाई दी है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री राधा कृष्णन का जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित रहा है। निश्चित ही वे उप राष्ट्रपति पद की गरिमा को बढ़ाने का कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन का मार्गदर्शन भी हमारे राष्ट्र को प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री राधाकृष्णन को मध्यप्रदेश की समस्त 9 करोड़ जनता की ओर से बधाई और अनंत शुभकामनाएं दी हैं।

यात्रियों को मिलेगा जाम से निजात: एबी रोड पर 622 करोड़ से बनेंगे 9 फ्लायओवर

इंदौर  प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर कलेक्टर ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा है। इसमें जिलास्तरीय यातायात समिति की रिपोर्ट भी संलग्न की गई है। पत्र में एबी रोड पर 9 फ्लायओवरों के निर्माण को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है। कुल 622 करोड़ रुपए की लागत से इन फ्लायओवरों का निर्माण प्रस्तावित है। नीरंजनपुर से लेकर राजीव गांधी चौराहा तक इनका निर्माण होगा। बीआरटीएस हटाने की कवायद के बीच फ्लायओवर योजना वर्तमान में एबी रोड पर बीआरटीएस को हटाने का कार्य शुरू हो चुका है। निगम ने लगभग ढाई करोड़ रुपए के टेंडर को मंजूरी दी है और ठेकेदार फर्म द्वारा रेलिंग हटाने का कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। साथ ही लगभग 13 करोड़ रुपए की राशि डिवाइडर निर्माण के लिए भी स्वीकृत कर दी गई है। ऐसे में फ्लायओवर योजना को लेकर प्राधिकरण का सर्वे और कलेक्टर का पत्र नई दिशा देता है। अधूरे एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी सवाल नीरंजनपुर और सत्यसांई चौराहे पर एमपीआरडीसी द्वारा फ्लायओवर निर्माण का कार्य पहले से ही जारी है। वहीं एलआईजी से नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का टेंडर लोक निर्माण विभाग ने कुछ वर्ष पूर्व मंजूर किया था, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना से असहमति जताई, जिसके चलते यह अधर में है। हाईकोर्ट के आदेश पर बीआरटीएस को हटाया जा रहा है और अब एबी रोड के प्रमुख चौराहों पर फ्लायओवर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। 622 करोड़ में होगा 9 फ्लायओवरों का निर्माण कलेक्टर ने पहले चरण में एलआईजी चौराहा, शिवाजी वाटिका और गीता भवन चौराहा पर फ्लायओवर बनाने का अनुरोध किया है। इन तीन फ्लायओवरों की अनुमानित लागत 283.56 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा अन्य 11 चौराहों में से पांच फ्लायओवर—जंजीरवाला चौराहा, टॉवर, चाणक्यपुरी, गौपुर और अग्रसेन चौराहा पर निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर 380 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस तरह कुल 9 फ्लायओवरों पर 622 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

यात्रियों की सुरक्षा पर जोर: शताब्दी एक्सप्रेस में लागू हुआ वंदे भारत जैसा डोर सिस्टम

ग्वालियर नई दिल्ली से रानी कमलापति के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस अब हाईटेक हो गई है। इस ट्रेन में मेट्रो, वंदे भारत और तेजस एक्सप्रेस की तर्ज पर अब ऑटोमेटिक डोर लगा दिए गए हैं। इसका ट्रायल भी हो चुका है और अब वंदे भारत की तरह इसके गेट खुलने भी लगे हैं। कोच के दरवाजों पर इंडिकेटर और अलार्म भी लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और आपराधिक घटनाओं को रोकने में यह ऑटोमेटिक डोर कारगर साबित होंगे। शताब्दी के चलने से 10 सेकंड पहले इसके सभी दरवाजे अपने आप बंद होने लगे हैं। इस ट्रेन में अभी हाल ही में इस व्यवस्था को शुरू किया गया है। चेन पुलिंग पर भी नहीं खुलेंगे गेट शताब्दी एक्सप्रेस के डोर लॉकिंग सिस्टम को वंदे भारत एक्सप्रेस की तर्ज पर विकसित किया गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस में अगला स्टेशन आने की सूचना के साथ यह भी बताया जाता है कि दरवाजे किस ओर खुलेंगे। इसी तरह की व्यवस्था शताब्दी एक्सप्रेस में की गई है। कई बार लोग परिजनों के छूट जाने या अन्य किसी कारण से ट्रेन में चेन पुलिंग कर देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब चेन पुलिंग करने पर भी दरवाजे नहीं खुलेंगे। चोटिल होने से भी बचेंगे अभी तक देखने में आ रहा है कि ट्रेनों के चलते समय प्लेटफॉर्म पर यात्री चढऩे और उतरने के प्रयास में चोटिल हो जाते हैं। कभी- कभी तो यात्रियों की मौत तक हो जाती है, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से शताब्दी में इस तरह की घटनाएं नहीं हो सकेंगी। क्योंकि दरवाजे अपने आप ही बंद हो जाएंगे। चोरी, छीना-झपटी की घटनाओं से मिलेगी राहत शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान यात्रियों को चोरी छीना-झपटी की घटनाओं से भी इस व्यवस्था के शुरू होने से राहत मिल जाएगी। इसके पहले शताब्दी एक्सप्रेस के दरवाजों को मैन्युअल तरीके से बंद किया जाता था। ट्रेन के चलने के दौरान रास्ते में आमतौर पर दोनों तरफ के दरवाजे खुले रहते थे और इसका फायदा शरारती तत्व उठा लेते थे, जिस नई प्रणाली से ट्रेन को लैस किया गया है। वह इसके स्टेशन पहुंचने और चलने के समय ही कार्य करेंगे। शताब्दी एक्सप्रेस में ऑटोमेटिक डोर लगाए गए हैं। यह ट्रेन उत्तर रेलवे मंडल की है। उन्हीं के द्वारा इसे नया रूप दिया है।– शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ उत्तर मध्य रेलवे

मुक्ता सिंह का कमाल: चंबल की बेटी ने रचा इतिहास, बनीं सेना में पहली महिला लेफ्टिनेंट

ग्वालियर  चंबल की धरती को वीरों की भूमि कहा जाता है। अब इसी धरती की एक बेटी ने देश का नाम रोशन किया है। ग्वालियर की मुक्ता सिंह भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। बिहार के गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्होंने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। विशेष बात यह है कि वे ओटीए गया से कांस्य पदक पाने वाली पहली महिला ऑफिसर कैडेट बनी हैं। ग्वालियर की रहने वाली हैं मुक्ता सिंह मुक्ता सिंह मूल रूप से ग्वालियर की रहने वाली हैं, हालांकि उनका जन्म भिंड स्थित ननिहाल में हुआ। उनके पिता राजबीर सिंह भारतीय वायुसेना में अधिकारी रह चुके हैं, जबकि उनकी मां बृजमोहिनी यादव खेल जगत से जुड़ी रहीं। देशभक्ति का जज़्बा परिवार में पहले से ही था, जिसका असर मुक्ता के जीवन पर भी पड़ा। पिता ने बेटी के जन्म के समय ही तय कर लिया था कि वह डिफेंस में जाएगी और नामकरण के समय ही उसका नाम ‘मुक्ता’ रखा गया। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया मुक्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन ग्वालियर से पूरी की और मालनपुर की एक फैक्ट्री में कुछ समय नौकरी भी की। लेकिन बचपन से ही डिफेंस फोर्सेज में जाने का सपना उन्हें प्रेरित करता रहा। फिजिकल ट्रेनिंग के लिए उन्होंने अपने ननिहाल भिंड में मामा राधे गोपाल यादव से तैराकी व अन्य ट्रेनिंग ली। उनके नाना हरबीर सिंह यादव का सपना था कि घर से कोई आर्मी में जाए, जो अब मुक्ता ने पूरा किया। तीसरी बार में मिली सफलता वहीं, मुक्ता सिंह सफर आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में मेरिट में जगह नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल महिला-32 कोर्स में ऑल इंडिया-1 रैंक हासिल कर सफलता पाई। शुरुआत में प्रशिक्षण चेन्नई ओटीए में हुआ, बाद में कोर्स बिहार के गया ओटीए में ट्रांसफर कर दिया गया। यहां पर उनकी मेहनत ने उन्हें लीडरशिप के कई मौके दिलाए। अकादमी अंडर ऑफिसर (AUO), जूनियर अंडर ऑफिसर (JUO) और बटालियन अंडर ऑफिसर (BUO) जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। तीन बार चोट भी लगी तीन बार चोटों के कारण कोर्स दोबारा शुरू करने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। आखिरकार 6 सितंबर को आयोजित पासिंग आउट परेड में अपनी मेहनत और लगन के दम पर तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्हें 118 इंजीनियर रेजिमेंट में कमीशन मिला है। ग्वालियर और चंबल की यह बेटी आज पूरे देश का गर्व बनी हुई है और जल्द ही अपने गृह नगर ग्वालियर लौटने वाली हैं।