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किसानों से धोखाधड़ी, नकली बीज की सप्लाई पर मचा हड़कंप, प्रशासन ने की त्वरित कार्रवाई

शिवपुरी  शिवपुरी जिले में किसानों को नकली सोयाबीन बीज दिए जाने की शिकायत पर प्रशासन ने जांच शुरू की है। बैराड़ में एक बीज दुकान सील कर बीज के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए। खेतों का निरीक्षण कर खराब अंकुरण के कारणों की जांच की जा रही है। शिवपुरी जिले में इस समय खरीफ सीजन में सोयाबीन सहित अन्य फसलों की बोवनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। इसी बीच, कई किसानों को सोयाबीन और अन्य फसलों के नकली बीज दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों ने इस संबंध में जिला प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद कृषि विभाग द्वारा एक जांच टीम गठित की र्ग है, जो इन शिकायतों पर कार्रवाई कर रही है। गठित टीम ने पोहरी विधानसभा क्षेत्र के बैराड़, गाजीगढ़ और टोड़ा गांव में किसानों के खेतों में जाकर संबंधित बीज की जांच की। साथ ही बीज को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। इस दौरान एक बीज विक्रेता की दुकान को भी सील किया गया है। दरअसल, जिले की बैराड़ तहसील के कुछ किसानों ने बीते दिनों सोयाबीन बीज के अंकुरण न होने की शिकायत जिला प्रशासन से की थी और बीज के नमूनों की जांच की मांग की थी। इसके बाद कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी के निर्देश पर एक जांच टीम गठित की गई। उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के नेतृत्व में गठित इस टीम ने मेसर्स राजौरिया कृषि सेवा केंद्र बैराड़ का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि विक्रेता बीज अनुज्ञप्तिधारी है तथा उसने अरिहंत एग्रो सीड्स, उज्जैन का प्रमाणित लगभग 150 क्विंटल सोयाबीन बीज किसानों को विक्रय किया था। बीज भौतिक रूप से सही पाया गया है। अंकुरण परीक्षण के लिए उसका नमूना प्रयोगशाला भेजा गया है। शिकायत के आधार पर खेतों में जांच उप संचालक, कृषि विभाग ने बताया कि शिकायत के आधार पर विक्रेता की दुकान सील की गई है। प्रयोगशाला परीक्षण की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। शिकायत की विस्तृत जांच के लिए दल ने गाजीगढ़ एवं टोड़ा गांव के संबंधित किसानों के खेतों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि बुवाई के बाद हुई बारिश के कारण सोयाबीन बीज का अंकुरण प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर बीज की अधिक गहराई, जलभराव, और मिट्टी की ऊपरी सतह का कठोर होना जैसे कारण भी सामने आए हैं। जिन खेतों में मूंगफली एवं बाजरे की फसल बोई गई थी, उनकी स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर पाई गई।

भोपाल के तालाब में पर्यावरण अनुकूल क्रूज की वापसी, इलेक्ट्रॉनिक इंजन से होगा संचालन

भोपाल  भोपाल के बड़ा तालाब में दो साल बाद एक बार फिर से क्रूज चलाने की तैयारी चल रही है। एनजीटी के आदेश के बाद इसे बंद कर दिया गया था। अब क्रूज को डीजल की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंजन (ईवी) से चलने की तैयारी की जा रही है। राजधानी भोपाल झीलों का शहर है यहां लोग तालाबों के किनारे पहुंचकर तरह-तरह के लुफ्त उठाते हैं। पिछले 2 साल से बड़ा तालाब में बंद पडे़ क्रूज को एक बार फिर से रन करने की तैयारी की जा रही है। यह क्रूज 2011 से चलाया जा रहा है, इसका नाम लेक प्रिंसेस (क्रूज) है। इसके साथ जलपरी (मोटर बोट) भी बंद हैं। दरअसल एनजीटी ने प्रदूषण का हवाला देते हुए इन पर रोक लगा दी है। अब मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी)  क्रूज को डीजल की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंजन (ईवी) से चलने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के मुताबिक आने वाले समय में क्रूज न सिर्फ सैलानियों के साथ नजर आएगा, बल्कि मोटर बोट से लोग झील की लहरों पर फर्राटा भरेंगे।  इलेक्ट्रॉनिक इंजन लगाने से यह होगा फायदा एमपीटी के अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक क्रूज जहाज डीजल इंजन वाले क्रूज की तुलना में कम प्रदूषण करते हैं। और पर्यावरण पर कम प्रभाव डालते हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक क्रूज जहाजों को चलाने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे परिचालन लागत कम हो जाती है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक क्रूज जहाजों को चलाने में कम शोर होता है, जिससे यात्रियों को शांत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है। इलेक्ट्रिक क्रूज जहाजों में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी संख्या में पहुंचते हैं लोग राजधानी भोपाल स्थित बड़ा तालाब में हर दिन सैकड़ो की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इनमें से अधिकांश बोटिंग का लुत्फ भी उठाते हैं। क्रूज और मोटर बोट के जरिए बड़ी झील की लहरों को करीब से देखते हैं। इसके अलावा प्राइवेट नाव का संचालन भी यहां से होता है। क्रूज बंद होने से लोगों में मायूसी आ गई थी। हालांकि सरकार यहां पर जल्द ही शिकारे शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसी महीने 20 शिकारे बड़ा तालाब में शुरू हो जाएंगे।   अभी चल रही है तैयारी मध्य प्रदेश पर्यटन निगम के एमडी डॉ. इलैया राजा टी ने बताया कि बड़ा तालाब में एनजीटी के आदेश के बाद क्रूज बंद कर दिए गए थे। अब हम पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इलेक्ट्रिकल इंजन से क्रूज चलाने पर विचार कर रहे हैं। हम इसी महीने बड़े तालाब में शिकारे चलाना शुरु कर देंगे। 10 शिकारे पहुंच चुके हैं 10 और मांगे गए हैं।  

इंदौर :DAVV बनाएगा छात्र जानकारी का ऑनलाइन डेटाबेस, 1990–2020 तक की मार्कशीट तुरंत डाउनलोड करें

 इंदौर  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) अब अपने 50 साल पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने जा रहा है। यह कदम विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। इस परियोजना के पहले चरण में वर्ष 1970 से लेकर 2020 तक के विद्यार्थियों की अंकसूचियों (Mark Sheets), डिग्रियों और टेबुलेशन चार्ट्स (Tabulation Charts) को डिजिटलाइज किया जाएगा। रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के बाहर नहीं भेजे जाएंगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी गोपनीय दस्तावेज को विश्वविद्यालय परिसर से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इसके लिए आरएनटी मार्ग स्थित नालंदा परिसर में ही संबंधित आईटी कंपनी का कार्यालय स्थापित किया जा रहा है। यह कंपनी डिजिटलीकरण का सारा कार्य विश्वविद्यालय परिसर में ही करेगी। पुराने दस्तावेजों की हालत खराब डीएवीवी की स्थापना 1964 में हुई थी और वर्षों से जमा रिकॉर्ड अब जर्जर होने लगा है। कई दस्तावेजों में दीमक लग चुकी है, टेबुलेशन चार्ट्स क्षतिग्रस्त हो गए हैं और जगह की भी कमी हो रही है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने डिजिटल संरक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया है। 50 सालों में लाखों छात्रों का रिकॉर्ड 1970 से 2020 तक विश्वविद्यालय से लाखों छात्रों ने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। बीए, बीकॉम, बीएससी, एमए, एमकॉम, एमएससी, बीबीए आदि पाठ्यक्रमों के छात्रों का पूरा डेटा अब डिजी-लॉकर (DigiLocker) में संरक्षित किया जाएगा। साल 2018 से चल रही थी तैयारी वर्ष 2018 में ही विश्वविद्यालय ने इस दिशा में पहल की थी। राजभवन द्वारा एक समिति बनाई गई थी जिसमें कई विश्वविद्यालयों के अधिकारी शामिल थे। कई सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी थीं, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते प्रक्रिया धीमी हो गई। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग ने डेटा डिजिटलीकरण को अनिवार्य किया है। 80 हजार छात्रों का डेटा पहले से ऑनलाइन वर्तमान में DAVV ने सत्र 2023-24 में स्नातक अंतिम वर्ष के 80 हजार छात्रों का डेटा पहले ही ऑनलाइन कर दिया है। अब यह काम पुराने रिकार्ड्स तक भी विस्तार पा रहा है। 10 महीनों में पूरा होगा कार्य आईटी कंपनी को रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के लिए 10 महीनों की डेडलाइन दी गई है। कार्य पूरा होने के बाद डेटा विशेष सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा, जिसे कभी भी कर्मचारी या संबंधित विभाग देख सकेंगे। इससे न केवल प्रशासन को सुविधा होगी, बल्कि छात्रों को भी भविष्य में दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ने पर तुरंत लाभ मिलेगा। डॉ. राकेश सिंघई, कुलगुरु, डीएवीवी ने बताया कि विश्वविद्यालय पूरी पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ इस कार्य को शीघ्र पूरा करेगा।

सिंहस्थ‑2028 से पहले उज्जैन में बनेगा रेलवे स्टेशन से महाकाल तक 1.76 किमी रोपवे, 55 गोन्डोला के साथ

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक रोपवे चलाए जाएंगे। इसके लिए के लिए काम शुरु हो गया। रोपवे का ठेका डोप्पेलमेयर को दिया गया है। जो कि अपनी टेक्नोलॉजी के जरिए डिजाइन तैयार कर रही है। 1.7 किलोमीटर लंबा रोपवे होगा तैयार उज्जैन रेलवे स्टेशन से लेकर महाकाल मंदिर तक 1.7 किलोमीटर लंबा रोपवे तैयार किया जा रहा है। इसके रूट पर तीन स्टेशन बनाए जा रहे हैं। यहां पर यात्री रोपवे के जरिए आना-जाना कर सकेंगे। जिसमें यात्री सीधा मंदिर में ही उतरेंगे। 1.7 किलोमीटर के रूट में 55 केबिन चलाए जाएंगे। जो कि दिन में 16 घंटे चलेंगे। इस दूरी को तय करने में सिर्फ 5-7 मिनट का समय लगेगा। रोपवे के लिए तीन स्टेशन बनेंगे महाकाल लोक की पार्किंग पर उतरकर नंदी द्वारा से सीधा महाकाल लोक में प्रवेश होगा। गणेश कॉलोनी में उतरने के बाद भक्त रूद्र सागर पर बने नए ब्रिज से सीधे महाकाल मंदिर के पास स्थित मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर पहुंचेंगे। रोपवे हरिफाटक ब्रिज के ऊपर से गुजरेगा। एक घंटे में 2 हजार कर सकेंगे दर्शन रोपवे प्रोजेक्ट को पूरा होने में 2026 तक का समय लगेगा। रोपवे में 3 स्टेशन, 13 टावर और 55 केबिन होंगे। रोपवे की क्षमता प्रति घंटे 2 हजार यात्री होगी। यह पूरे दिन में 16 घंटे तक चलेगा। पब्लिक सेफ्टी रहेगी प्राथमिकता उज्जैन में लगाया जा रहा रोपवे यूरोपीय मानकों पर आधारित है। सरकार के द्वारा पहले प्राथमिकता नागरिकों सुरक्षा रखी गई है। कंपनी की ओर से गारंटी दी जाती है कि किसी प्रकार की समस्या आने पर यह केबिन अपने आप ही स्टेशन पर पहुंच जाएगा।   

वैश्विक निवेश को साधने निकले सीएम मोहन यादव, 19 जुलाई तक विदेश में रहेंगे सक्रिय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 जुलाई से 19 जुलाई तक दुबई और स्पेन के दौरे पर रहेंगे हुए रवाना । यह यात्रा मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने और विदेशी कंपनियों को प्रदेश में उद्योग, टेक्सटाइल, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 से 19 जुलाई को दुबई और स्पेन की यात्रा पर है । यह दौरा मध्यप्रदेश की वैश्विक निवेश रणनीति में महत्वपूर्ण कदम होगा। दुबई में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेश को लेकर इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ प्रमुख बैठक प्रस्तावित है, जहां मध्य प्रदेश की औद्योगिक तैयारियों और निवेश नीति को लेकर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई में कार्यरत लुलु इंटरनेशनल ग्रुप, लैंडमार्क ग्रुप और नखील ग्रुप जैसे अंतर्राष्ट्रीय रिटेल और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिनमें प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, रिटेल चेन और निवेश संबंधी अन्य सहयोग पर विचार किया जाएगा।  16 से 19 जुलाई तक स्पेन दौरे पर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई के बाद 16 से 19 जुलाई तक स्पेन के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना में स्पेन की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनियों और ग्रीन मोबिलिटी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे निवेशकों के साथ महत्वपूर्ण संवाद करेंगे। बार्सिलोना में होने वाली बैठकों में टेक्सटाइल, गारमेंट और डिजाइन सेक्टर की अग्रणी कंपनियों से भी चर्चा की जाएगी, जिससे मध्य प्रदेश में पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल ओडीओपी और वर्धमान सहित टेक्सटाइल क्लस्टर को और गति दी जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पेन यात्रा का एक बड़ा फोकस पर्यटन और हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी रहेगा। निवेश पर रणनीतिक संवाद होगा  इन निवेश यात्राओं की खास बात है कि निवेश पर रणनीतिक संवादों की प्रमुखता रहेगी। मुख्यमंत्री का उद्देश्य निवेश के जरिए न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है, बल्कि युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना भी है। बता दें इससे पहले सीएम यूके से लेकर जापान गए थे। मुख्यमंत्री ने कहना है कि इन यात्राओं के जरिए सामने आ रहे निवेश प्रस्ताव, संवाद और उद्योग समूहों का उत्साह इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां अवसर केवल दस्तक नहीं दे रहे है, बल्कि आगे बढ़कर साझेदारी कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 जुलाई को भोपाल से दुबई के लिए रवाना हुए जहां वे 15 जुलाई तक रहेंगे। इसके बाद 16 से 19 जुलाई तक वे स्पेन की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान उनकी दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों, व्यापार संगठनों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें होंगी। उन्होंने कहा कि ये यात्रा मध्यप्रदेश को औद्योगिक विकास और वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश में उद्योग और रोजगार बढ़ाने के साथ निवेशकों को आमंत्रित करने के प्रयास लगातार जारी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इसे खुद लीड कर रहे हैं, वे अलग अलग शहरों में जाकर मध्य प्रदेश की विशेषताएं, यहाँ उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देकर निवेशकों को आमंत्रित कर रहे हैं साथ ही विदेशी निवेशकों को भी आमंत्रित कर रहे हैं जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आ रहे हैं, मुख्यमंत्री डॉ यादव एक बार फिर निवेशकों को मध्य प्रदेश में आमंत्रित करने के लिए विदेश यात्रा पर जाने वाले हैं। राज्य शासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 13 से 19 जुलाई को दुबई और स्पेन की यात्रा पर रवाना । यह दौरा मध्य प्रदेश की वैश्विक निवेश रणनीति में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दुबई में मुख्यमंत्री निवेश को लेकर इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल कॉउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ प्रमुख बैठक प्रस्तावित है, जहां मध्य प्रदेश की औद्योगिक तैयारियों और निवेश नीति को लेकर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। दुबई प्रवास पर इन बड़े ग्रुपों से करेंगे चर्चा  निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई में कार्यरत लुलु इंटरनेशनल ग्रुप, लैंडमार्क ग्रुप और नखील ग्रुप जैसे अंतर्राष्ट्रीय रिटेल और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिनमें प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, रिटेल चेन और निवेश संबंधी अन्य सहयोग पर विचार किया जाएगा। 16 से 19 जुलाई तक स्पेन के प्रवास पर, बार्सिलोना में करेंगे संवाद  दुबई के बाद सीएम डॉ मोहन यादव 16 से 19 जुलाई तक स्पेन के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे बार्सिलोना में स्पेन की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनियों और ग्रीन मोबिलिटी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे निवेशकों के साथ महत्वपूर्ण संवाद करेंगे। बार्सिलोना में होने वाली बैठकों में टेक्सटाइल, गारमेंट और डिजाइन सेक्टर की अग्रणी कंपनियों से भी चर्चा की जाएगी, जिससे मध्य प्रदेश में पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल ओडीओपी और वर्धमान सहित टेक्सटाइल क्लस्टर को और गति दी जा सके। MP की औद्योगिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता का रोडमैप बनेगी यात्रा  सरकार के अनुसार इन निवेश यात्राओं की खास बात है कि निवेश पर रणनीतिक संवादों की प्रमुखता रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्देश्य निवेश के ज़रिए न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है, बल्कि युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना भी है। यह निवेश यात्राएं मध्य प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता का रोडमैप बनती जा रही हैं। पिछले वर्ष की थी यूके, जर्मनी, जापान की यात्रा  उल्लेखनीय है कि यूके, जर्मनी , जापान और अब दुबई से लेकर स्पेन तक मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह सतत प्रयास मध्य प्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी संकल्प का प्रमाण है। इन यात्राओं के ज़रिए सामने आ रहे निवेश प्रस्ताव, संवाद और उद्योग समूहों का उत्साह इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां अवसर केवल दस्तक नहीं दे रहे है, बल्कि आगे बढ़कर साझेदारी कर रहे हैं। निवेश और रोजगार पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री दुबई में इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल के लोगों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे मध्यप्रदेश की उद्योग नीति और निवेश के मौके पर जानकारी देंगे। दुबई मिडिल ईस्ट का बड़ा व्यापारिक शहर है और वहां से प्रदेश में रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और टूरिज़्म जैसे क्षेत्रों में निवेश लाने की कोशिश होगी। वहीं स्पेन में मुख्यमंत्री ऑटोमोबाइल, शिप मेकिंग और फैशन इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा करेंगे। स्पेन की डिजाइन, मशीनरी और … Read more

विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में वित्तीय अनुशासन की मजबूत नींव

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट अनुमान और वर्ष 2026-27 के बजट निर्माण की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इसके लिये वित्त विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं। इस बार भी राज्य सरकार द्वारा शून्य आधार बजटिंग (Zero Base Budgeting) की प्रक्रिया को जारी रखते हुए वित्तीय अनुशासन और परिणाम आधारित बजट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही सरकार ने पहली बार वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के लिए “त्रिवर्षीय रोलिंग बजट” तैयार करने का निर्णय लिया गया है, जो प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति ‘विकसित मध्यप्रदेश 2047’ पर केन्द्रित है। बजट स्वीकृति के पहले हर योजना का होगा मूल्यांकन वित्त विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अब प्रत्येक योजना के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि उस पर खर्च क्यों किया जा रहा है, उसका लाभ किसे होगा और उसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। इस प्रक्रिया में गैर-प्रभावी योजनाओं को समाप्त करने और समान प्रकृति की योजनाओं को एकीकृत करने पर भी विचार किया जाएगा। बजट निर्माण की प्रमुख तिथियां     28–31 जुलाई 2025: विभागीय प्रशिक्षण और प्रारंभिक चर्चा।     10 सितम्बर 2025: IFMIS में आंकड़े भरने की अंतिम तिथि।     15–30 सितम्बर 2025 : प्रथम चरण चर्चा।     31 अक्टूबर: नवीन योजनाओं के प्रस्ताव की अंतिम तिथि।     1 अक्टूबर – 15 नवम्बर: द्वितीय चरण चर्चा।     दिसम्बर–जनवरी: मंत्री स्तरीय बैठकें।     31 मार्च 2026: समायोजन प्रस्तावों की अंतिम तिथि। वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की भी अलग होगी गणना     विभागों को अपने स्थायी खर्चों जैसे वेतन, पेंशन, भत्तों की गणना करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।     प्रत्येक वित्तीय वर्ष के वेतन में 3% वार्षिक वृद्धि जोड़ी जाएगी।     महंगाई भत्ते की गणना क्रमशः 74%, 84% और 94% के हिसाब से होगी।     संविदा कर्मचारियों के वेतन में 4% वार्षिक वृद्धि का भी प्रावधान रहेगा। अजा-अजजा उपयोजना के लिए न्यूनतम बजट सुनिश्चित करना होगा अनिवार्य वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16% और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23% बजट सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए सेगमेंट कोडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। ऑफ-बजट व्यय और केंद्रीय योजनाओं पर भी निगरानी जिन विभागों को भारत सरकार से सीधे फंड प्राप्त होता है, उन्हें वह राशि भी बजट प्रस्ताव में दर्शानी होगी। इसके अलावा, ऑफ-बजट ऋण, प्रोत्साहन योजनाओं का वित्तीय असर, और नवीन योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। सभी प्रस्ताव तय समय पर IFMIS में हों दर्ज सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि बजट की तैयारी के लिए जो आई.एफ.एम.आई.एस. (IFMIS) प्रणाली अपनाई गई है, उसमें तय समय के बाद प्रविष्टि की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी प्रस्ताव निर्धारित समयसीमा में दर्ज करें और विभागीय बैठक के पूर्व पूरी जानकारी तैयार रखें। जनहित में होगा व्यय शून्य आधार बजटिंग प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर योजना के पीछे ठोस उद्देश्य हो, उसका समाज पर प्रभाव दिखे और प्रत्येक व्यय राज्य की विकास प्राथमिकताओं से मेल खाता हो। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल राजकोषीय अनुशासन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रभावी शासन और नागरिक सेवा सुधार के लिए भी सराहनीय कदम साबित होगा।  

केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 के स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों की घोषणा की, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

भोपाल  केन्द्र सरकार द्वारा शनिवार वर्ष 2024 के स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इन सम्मानों में स्वच्छता लीग सम्मान, राष्ट्रपति सम्मान, देश और राज्यों की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले निकायों को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिये 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक गरिमामय आयोजन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू करेंगी। मध्यप्रदेश के आठ शहर होंगे सम्मानित हर वर्ष की तरह मध्यप्रदेश ने इस वर्ष भी अपनी विजय पताका फहराई है। प्रदेश के आठ शहरों को इस राष्ट्रीय आयोजन में सम्मानित किया जाएगा। इसमें सुपर लीग श्रेणी में इंदौर, उज्जैन और बुधनी हैं। इस श्रेणी में सिर्फ वे शहर शामिल किए जाते हैं, जिन्होंने पिछले तीन सालों में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया हो और उत्तरोत्तर प्रगति की संभावनाएं सृजित की हों। राष्ट्रपति सम्मान इसी प्रकार राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त करने वाले शहरों में भोपाल, देवास और शाहगंज शामिल हैं। इसके अलावा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी द्वारा प्रदेश के जबलपुर और ग्वालियर को उनके उल्लेखनीय प्रयासों के लिये सम्मानित किया जाएगा। कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग और ओडीएफ/ वॉटर प्लस के परिणाम भी उसी दिन जारी किए जाएंगे। प्रदेश से इस आयोजन में विभागीय मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी के साथ विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधियों की बड़ी टीम इस आयोजन में शिरकत करेगी।  

मंत्री सारंग ने नरेला विधानसभा अंतर्गत निर्माणाधीन गोविंदपुरा शासकीय सांदीपनि विद्यालय का निरीक्षण किया

भोपाल   सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत निर्माणाधीन गोविंदपुरा शासकीय सांदीपनि विद्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय परिसर के प्रत्येक खंड का बारीकी से अवलोकन किया और निर्माण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री सारंग ने निर्माण कार्य में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को निर्देश दिये कि निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण ढंग से और निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और शासकीय सांदीपनि विद्यालय इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। शासकीय सांदीपनि विद्यालय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो न केवल सरकारी शिक्षा को मजबूती देगा, बल्कि निजी विद्यालयों की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित और उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गोविंदपुरा में बन रहा यह विद्यालय क्षेत्र के बच्चों के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगा। गाइडलाइन के अनुरूप हो बैठक व्यवस्था मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सांदीपनि विद्यालयों को विकसित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार, समावेश और आधुनिकता सुनिश्चित हो सके। मंत्री श्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय भवन में शाला कक्षों की बैठने की व्यवस्था का पुन: परीक्षण किया जाए और निर्माण कार्य पूरी तरह गाइडलाइन के अनुरूप हो। सांदिपनी विद्यालय में विद्यार्थियों को मिलेगी बेहतर शिक्षा मंत्री श्री सारंग ने कहा कि गोविंदपुरा शासकीय सांदीपनि विद्यालय को मॉडल स्कूल एवं स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की वरीयता के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और समग्र विकास के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय में आधुनिक क्लासरूम के साथ विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर जैसे विषयों की प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जा रही हैं। इसके अलावा बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल मैदान, बास्केटबॉल कोर्ट, पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण कक्ष, और स्वच्छता की दृष्टि से पर्याप्त संख्या में शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

सोनम केस में नई पहल: भाई ने लौटाए गहने, दहेज वापसी से किया इंकार

इंदौर ट्रांसपोर्टर राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने सोनम के भाई गोविंद से आभूषण वापस ले लिए है। राजा के परिवार ने सोनम (बहू) के लिए उसकी पसंद से ही शादी में आभूषण बनवाए थे। इसकी बाकायदा राजेंद्र नगर थाने में लिखापढ़ी भी करवाई गई है। हालांकि गोविंद ने राजा को दी कार, वाशिंग मशीन, फ्रीज लेने से इनकार कर दिया है।   11 मई को सोनम और राजा की हुई थी शादी बता दें कि सहकार नगर (केट रोड़)निवासी 30 वर्षीय राजा रघुवंशी की गोविंनगर (खारचा) निवासी सोनम से 11 मई को शादी हुई थी। 20 मई को दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए और सोनम ने आकाश, आनंद व विशाल उर्फ विक्की के साथ मिलकर राजा की हत्या कर दी। राजा के भाई विपिन के मुताबिक सोनम से उनका कोई रिश्ता नहीं रहा। उन्होंने बहू मानकर उसकी पसंद से सोना-चांदी के आभूषण बनवाए थे। कुछ दिनों पूर्व गोविंद से कहा था कि वह शादी में चढ़ाए आभूषण लौटा दे। गोविंद ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। कभी चाबी न मिलने का बहाना बनाया तो कभी कहा कि वह माता-पिता से पूछकर बताएगा। विपिन ने इसकी राजेंद्र नगर थाने में की शिकायत सोनम के भाई द्वारा कॉल न उठाने पर उसने पुलिस से कॉल लगवाया और गोविंद को थाने तलब किया। गोविंद रघुवंशी समाज के पदाधिकारी और पिता देवी सिंह के साथ पहुंचा और उनकी मौजूदगी में सोने का हार, रानी हार, टीका, चूड़ियां, पायल, बिछुड़ी व अंगूठी लौटा दी। विपिन के मुताबिक आभूषणों की कीमत करीब 10 लाख रुपये है और मंगलसूत्र, पायल, बिछुड़ी और अंगूठी शिलांग के ईस्ट खासी हिल्स थाने में जब्त है। सोनम के भाई ने नहीं मांगी कार और इलेक्ट्रानिक सामान गोविंद ने कहा उसने भी शादी में कार और वाशिंग मशीन, फ्रीज व अन्य सामान उपहार स्वरुप दिए थे। लेकिन उसने सामान वापस लेने से इनकार कर दिया। देवी सिंह ने कहा सामान बेटी को कन्यादान के रुप में दिया था। वह हम कभी नहीं लेंगे। कार 4 लाख रुपये जमा करवा कर फाइनेंस करवाई थी। विपिन ने कहा कार राजा के नाम से है और उसकी किस्तें वह भरता है।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा- सुपोषित मध्यप्रदेश’ की दिशा में मजबूत क़दम

भोपाल गुजरात के केवड़िया में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित जोनल सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने राज्य में चल रहे योजनाओं, नवाचारों और ज़मीनी पहल का प्रभावशाली विवरण प्रस्तुत किया। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि “मध्यप्रदेश, अपनी जनजातीय बहुलता और भौगोलिक विविधता के बावजूद, महिलाओं और बच्चों के संपूर्ण सशक्तिकरण के लिये निरंतर प्रयासरत है। डिजिटल पारदर्शिता और नियुक्ति प्रणाली में सुधार मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की ऑनलाइन नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे लगभग 19,500 पदों की पारदर्शी तरीके से पूर्ति हो रही है। यह प्रक्रिया हर छह माह में रिक्तियों के अनुसार नियमित रूप से संचालित की जाएगी। पोषण सुधार और तकनीकी नवाचार महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि AIIMS भोपाल के सहयोग से पोषण ट्रैकर डेटा की गुणवत्ता में सुधार किया गया है।कार्यकर्ताओं के लिए नेत्र परीक्षण अभियान भी चलाया जा रहा है जिससे स्मार्टफोन आधारित ऐप संचालन में उन्हें सुविधा मिले।उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि झाबुआ जिले में “मोटी आई कार्यक्रम” और डिण्डौरी जिले में “रेवा प्रोजेक्ट” जैसे नवाचारों के माध्यम से कुपोषण उन्मूलन में अद्भुत परिणाम मिल रहे हैं। बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु प्रशिक्षण “ सशक्त वाहिनी कार्यक्रम” के तहत अब तक 11,000 से अधिक बालिकाओं को निःशुल्क शारीरिक और शैक्षणिक प्रशिक्षण दिया गया है। कई बालिकाएं आज पुलिस, चिकित्सा एवं अन्य सेवाओं में चयनित होकर सेवा दे रही हैं। महिला सुरक्षा और सहायता सेवाओं का विस्तार हेल्पलाइन 181 और 1098 का ERSS-112 से तकनीकी एकीकरण जुलाई 2024 में सफलतापूर्वक किया गया।विगत छह महीनों में 86,000 से अधिक मामलों में 91% से अधिक का समाधान हुआ है।शक्ति निवास” के माध्यम से कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित आवास की सुविधा दी जा रही है। इंदौर में 100-बेड का नया शक्ति निवास तैयार है, प्रदेश के चार और शहरों में निर्माण जारी है। महिलाओं की आर्थिक उन्नति के लिये योजनाएं “ मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना” के अंतर्गत हर माह 1.27 करोड़ महिलाओं को ₹1250 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक ₹38,000 करोड़ से अधिक राशि वितरित की जा चुकी है। अटल पेंशन योजना से जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बाल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम “ मिशन वात्सल्य” के अंतर्गत चार बड़े जिलों में कंपोजिट शेल्टर होम का निर्माण कार्य प्रगति पर है। “ मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना” के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को ₹4000 प्रति माह की सहायता और आफ्टर केयर बच्चों को ₹5000 की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है। केंद्रीय योजनाओं को मजबूत बनाने के लिये सुझाव मंत्री सुश्री भूरिया ने केन्द्र सरकार के समक्ष योजनाओं को और प्रभावशाली बनाने के लिये सुझाव भी रखे। उन्होंने कहा की  दरों को CPI के अनुसार संशोधित करने, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि, 2019-20 से लंबित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बहाली, प्री-स्कूल शिक्षा सामग्री में वृद्धि और ‘जादुई पिटारा’ जैसी पहल, PMMVY योजना में द्वितीय गर्भावस्था पर भी मातृत्व सहायता, शक्ति सदन एवं सखी केंद्रों के कर्मचारियों के वेतन में संशोधन, स्पॉन्सरशिप योजना में बजट वृद्धि, आफ्टर केयर लाभार्थियों की सहायता राशि में बढ़ोतरी आदि प्रमुख मुद्दे शामिल थे।