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‘डिजिटल वोटिंग’ के नाम पर ठगी से बचें, राजस्थान पुलिस ने जारी किया साइबर अलर्ट

जयपुर चुनावी माहौल में राजस्थान पुलिस ने आमजन को सतर्क रहने की महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। राजस्थान पुलिस ने आधिकारिक हैंडल के जरिए आमजन को ने चेतावनी दी है कि ‘डिजिटल वोटिंग’, ‘वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने’ या ‘पार्टी सदस्यता’ के नाम पर फर्जी लिंक, डीपफेक वीडियो और भ्रामक संदेशों का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। साइबर फ्रॉड, जिसमें AI की अहम भूमिका यह साफ तौर पर साइबर फ्रॉड है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, खासकर डीपफेक तकनीक के जरिए। डिजिटल वोटिंग और फर्जी लिंक का खतरा चुनाव के दौरान अपराधी WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज भेजते हैं जिनमें कहा जाता है कि “अपना नाम वोटर लिस्ट में चेक करें”, “डिजिटल वोटिंग के लिए यहां क्लिक करें” या “पार्टी सदस्यता के लिए लिंक पर जाएं”। ये लिंक फर्जी होते हैं। जैसे ही व्यक्ति उस पर क्लिक करता है, उसका फोन मालवेयर से संक्रमित हो सकता है या फिशिंग पेज खुल जाता है जहां OTP, बैंक डिटेल्स या आधार नंबर मांगे जाते हैं। कई बार ये लिंक असली सरकारी वेबसाइट जैसे लगते हैं, लेकिन असल में डेटा चोरी का जाल होते हैं। राजस्थान पुलिस ने साफ कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। डीपफेक वीडियो और AI की भूमिका यहां AI का रोल सबसे खतरनाक है। साइबर अपराधी डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर नेताओं, अधिकारियों या मशहूर हस्तियों के नकली वीडियो बना रहे हैं। इनमें कोई नेता या अधिकारी बोलते नजर आते हैं कि “वोटर लिस्ट अपडेट करवाएं” या “इस लिंक से वोट डालें”। ये वीडियो इतने रियल लगते हैं कि आम आदमी आसानी से विश्वास कर लेता है। डीपफेक AI टूल्स से बनाए जाते हैं, जिनमें फेस स्वैप, वॉइस क्लोनिंग और लिप-सिंक तकनीक इस्तेमाल होती है। राजस्थान पुलिस की चेतावनी में साफ तौर पर डीपफेक वीडियो का जिक्र है, जो बताता है कि यह सिर्फ सामान्य साइबर फ्रॉड नहीं, बल्कि AI-सक्षम आधुनिक ठगी है। पहले भी पुलिस ने अमिताभ बच्चन जैसे सेलिब्रिटीज के फर्जी वीडियो से इन्वेस्टमेंट स्कैम के मामले में अलर्ट जारी किया था। पुलिस ने तीन मुख्य सावधानियां बताई हैं     किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।     अपना OTP, बैंक PIN या कोई भी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।     सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज की सत्यता जांचे बिना उसे शेयर न करें। ठगी होने पर यहां संपर्क करें अगर फिर भी कोई ठगी हो जाए तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 9256001930, 9257510100 या 1930 पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप ही विश्वसनीय स्रोत हैं। किसी भी जानकारी के लिए उन्हीं पर निर्भर रहें। राजस्थान पुलिस का यह अलर्ट समय की मांग है। AI ने अपराधियों को और ताकतवर बना दिया है चुनावी मौसम में फेक न्यूज और साइबर ठगी दोनों बढ़ जाती हैं। AI तकनीक ने अपराधियों को और ताकतवर बना दिया है, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। नागरिकों से अपील है कि सतर्क रहें, परिवार और दोस्तों को भी बताएं। याद रखें – कोई भी सरकारी एजेंसी OTP या बैंक डिटेल्स नहीं मांगती। थोड़ी सी सावधानी से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

निकाय चुनाव को हल्के में न लें! BL संतोष का BJP नेताओं को अल्टीमेटम, भीतरघात पर जीरो टॉलरेंस

जयपुर राजस्थान में होने जा रहे नगरीय निकाय चुनाव 2026 के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष का जयपुर दौरा केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रदेश की भावी राजनीति का नया रुख तय कर दिया है। जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को दिनभर चली मैराथन बैठकों में बीएल संतोष ने साफ संदेश दिया कि स्थानीय निकाय चुनाव को कोई भी कार्यकर्ता या बड़ा नेता हल्के में न ले। उन्होंने नेताओं को आगाह करते हुए कहा कि निकाय चुनाव भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन इसका सीधा असर राष्ट्रीय स्तर के चुनावों और राजनीतिक नैरेटिव पर पड़ता है। इस दौरान उन्होंने पार्टी में टिकट वितरण के बाद पनपे असंतोष और भीतरघात करने वाले नेताओं के खिलाफ गोपनीय सूची तैयार कर तुरंत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दिनभर चली इन बैठकों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल, चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी और संगठन महामंत्री अजय कुमार सहित पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे। भीतरघातियों की बनाओ अलग लिस्ट: बीएल संतोष निकाय चुनाव के दौरान अक्सर पार्टी के भीतर ही खड़े होने वाले बागियों और भीतरघातियों को लेकर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट कहा- गोपनीय सूची तैयार होगी: जो भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी के घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ काम कर रहे हैं या चुपचाप विरोधियों की मदद कर रहे हैं, उनकी जिलेवार सूची बनाई जाए। जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ चुनाव के बाद नहीं, बल्कि चुनाव के दौरान ही सख्त एक्शन लिया जाएगा। पार्टी अनुशासन सर्वोपरि: उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यक्तिगत मतभेदों को किनारे रखकर सभी को केवल कमल के निशान के लिए मैदान में उतरना होगा। 'प्रत्याशी कमजोर हो तो संगठन बने ताकत' भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने कहा कि जिसे जो जिम्मेदारी दी गई है, वह उसे पूरी मजबूती से निभाए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव को हल्के में न लें और हर निकाय में जीत के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से चुनाव लड़ा जाए। एयरपोर्ट जाते समय बीएल संतोष जयपुर शहर कार्यालय पहुंचे और जयपुर नगर निगम की कोर कमेटी की बैठक ली। जयपुर नगर निगम में बोर्ड कैसे बनेगा, इसका प्लान समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रत्याशी कमजोर होने के बावजूद संगठन को उसके साथ मजबूती से खड़ा रहकर हर हाल में जीत का प्रयास करना होगा। स्थानीय नेतृत्व का बनेगा रिपोर्ट कार्ड विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय नेताओं ने निकाय चुनाव में संगठन के लिए कितना काम किया, किन क्षेत्रों में नेतृत्व प्रभावी रहा और कहां कमी रही, इसका फीडबैक भी केंद्रीय संगठन तक पहुंचेगा। युवाओं को गढ़ने का समय उन्होंने चुनावी रणनीति में युवाओं (जेन-जी) को केंद्र में रखने की जरूरत जताई। कहा कि युवाओं की बदलती सोच और उनकी अपेक्षाओं को समझना होगा। अब युवाओं को गढ़ने और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने का भी समय है। संतोष ने कहा कि केवल डबल इंजन नहीं, अब ट्रिपल इंजन सरकार बनानी है। इसके लिए प्रदेश के हर निकाय में भाजपा की जीत जरूरी है। बैठक के दूसरे अहम सत्र में बीएल संतोष ने मीडिया और सोशल मीडिया टीम के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र नए दौर के युवाओं यानी 'Gen-Z' (18 से 25 वर्ष के मतदाताओं) को पार्टी से जोड़ना रहा। डिजिटल नैरेटिव पर जोर: उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को युवाओं की भाषा में रील्स, इंफोग्राफिक्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए पेश किया जाए। लोकल इश्यूज पर घेराबंदी: विरोधी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव का तुरंत और तथ्यों के आधार पर जवाब देने के लिए सोशल मीडिया टीमों को 24 घंटे एक्टिव रहने को कहा गया है। CM भजनलाल शर्मा से मैराथन चर्चा शुक्रवार शाम को बीएल संतोष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ अलग से एक बंद कमरे में लंबी बैठक की। इस बैठक में राज्य सरकार की योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन, नगरीय क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों और जनता के बीच सरकार की छवि को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बीएल संतोष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार के 32 महीनों के कामकाज का सीधा लाभ निकाय चुनाव में पार्टी को मिलना चाहिए। स्पीकर देवनानी के खिलाफ कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग एक तरफ जहां जयपुर में भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को धार दे रही थी, वहीं दूसरी तरफ अजमेर में इस चुनाव को लेकर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन की लिखित शिकायत सौंपी है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने आरोप लगाया है कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए वासुदेव देवनानी लगातार भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। प्रचार के दौरान वे सरकारी गाड़ियों और संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं तथा भाजपा का दुपट्टा पहनकर बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेकर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है।

10 मेगा रोड शो से BJP का शक्ति प्रदर्शन, कांग्रेस ने स्थानीय नेताओं के भरोसे साधा वार्ड-वार मुकाबला

जयपुर राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। इन्हीं हलचलों के बीच अब बड़ी खबर ये है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सबसे बड़े चेहरे के तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चुनावी फ्रंटलाइन पर उतार रही है। 'पार्षद चुनाव' में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट अपील के लिए मुख्यमंत्री के उतरने से प्रचार अभियान का पूरी तरह से हाई-वोल्टेज मोड पर आना तय है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस बार स्टेट या सेंट्रल लेवल के बड़े नेताओं के बजाय पूरी तरह से स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर दांव लगाने की साइलेंट स्ट्रेटजी अपनाई है। BJP जहां मुख्यमंत्री के 10 मेगा रोड शो और केंद्रीय मंत्रियों के सघन डोर-टू-डोर कैम्पेन के जरिए हर एक बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, मोहल्ला-लेवल कनेक्ट और वार्ड प्रत्याशियों की व्यक्तिगत साख के दम पर चुनाव जीतने का दावा कर रही है। राजस्थान के इस सियासी परिदृश्य में यह मुकाबला इस बात का बड़ा टेस्ट है कि क्या भाजपा की मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय नेतृत्व की हाई-प्रोफ़ाइल ब्रैंडिंग, कांग्रेस की ग्राउंड-लेवल पर स्थानीय  नेटवर्क पर भारी पड़ पाएगी या नहीं? BJP ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कैम्पेन को इस तरह डिजाइन किया है कि राज्य के सबसे महत्वपूर्ण शहरों को कवर किया जा सके। फाइनल फेज के प्रचार में CM भजनलाल शर्मा सीधे voters से कनेक्ट करेंगे और पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगेंगे। शनिवार (उदयपुर एवं भीलवाड़ा): कैम्पेन की शुरुआत मेवाड़ अंचल से हो रही है। CM भजनलाल शर्मा उदयपुर और भीलवाड़ा में भव्य रोड शो करेंगे, जहां मेवाड़ के शहरी वोटों को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा 6 सितंबर (बीकानेर, अजमेर एवं जोधपुर): एक ही दिन में तीन बड़े जिलों को कवर करने का टारगेट रखा गया है। मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान के इन प्रमुख शहरों में रोड शो के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जाएगा। 7 सितंबर (भरतपुर एवं अलवर): पूर्वी राजस्थान और मत्स्य क्षेत्र के सबसे अहम केंद्रों भरतपुर और अलवर में CM के रोड शो प्रस्तावित हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र काफी संवेदनशील माना जाता है। 8 सितंबर (पाली एवं कोटा): हाड़ौती क्षेत्र के कोचिंग हब कोटा और औद्योगिक शहर पाली में कैम्पेन को बनाए रखने के लिए रोड शो आयोजित किए जाएंगे। 9 सितंबर (जयपुर): Election campaign के आखिरी दिन राजधानी जयपुर में मेगा रोड शो होगा। जयपुर नगर निगम के अलग-अलग वार्डों में CM का यह शो पूरे प्रचार अभियान का भव्य समापन होगा। रोड शोके साथ सांगठनिक बैठकें BJP की इस आक्रामक रणनीति में सिर्फ रोड शो और जनसभाएं ही शामिल नहीं हैं, बल्कि संगठन को पूरी तरह एक्टिव करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। रोड शो के साथ-साथ मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रदेश नेता हर जिले में अहम सांगठनिक बैठकें भी लेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बूथ कार्यकर्ताओं के साथ डायरेक्ट संवाद कायम करना और स्थानीय स्तर पर यदि कोई अंदरूनी गुटबाजी या कमजोरी है, तो उसे मौके पर ही दूर करना है। पार्टी के Central Election In-charge, Co-incharge और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी इन क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों और स्थानीय मुद्दों के हिसाब से विशिष्ट वार्डों और नगर निगमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस का 'लोकल फॉर्मूला': बड़ा चेहरा नहीं, लोकल कैंडिडेट ही हीरो जहां BJP स्टार प्रचारकों की फौज के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने इस बार अपना पूरा फोकस स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय नेताओं पर शिफ्ट कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार, नगरीय निकाय चुनाव सफाई, स्ट्रीट लाइट्स, स्थानीय सड़कों और वार्ड विकास जैसे local issues पर लड़े जाते हैं, इसलिए इसमें स्थानीय नेतृत्व का ही एक्टिव होना सबसे ज्यादा जरूरी है। कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे मुख्य बिंदु: रीजनल ओनरशिप: स्थानीय विधायकों, पूर्व विधायकों और वार्ड स्तर के नेताओं को पूरी छूट दी गई है कि वे अपने हिसाब से campaign डिजाइन करें। डोर-टू-डोर माइक्रो कनेक्ट: बड़े तामझाम के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी वार्डों में घर-घर जाकर स्थानीय समस्याओं को उठा रहे हैं। नो सेंट्रल इंटरवेंशन: जब तक स्थानीय unit विशेष मांग न करे, तब तक जयपुर या दिल्ली से किसी बड़े नेता को प्रचार में नहीं उतारा जाएगा। स्टार पावर vs वार्ड-लेवल कनेक्ट राजस्थान का शहरी वोटर हमेशा से राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाकर मतदान करता आया है। निकाय चुनाव 2026 में दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं आमने-सामने हैं: BJP की ताकत: Chief Minister का सीधा जुड़ाव, केंद्रीय मंत्रियों का प्रभाव और मजबूत संगठन जो हर बूथ तक वोटर को रीच करती है। कांग्रेस की ताकत: वार्ड स्तर की नाराजगी को भुनाना, local issues को हाइलाइट करना और प्रत्याशी की चौबीसों घंटे उपलब्धता पर जोर देना। सितंबर 2026 में होने वाले इन चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि राजस्थान के शहरी मतदाताओं पर CM भजनलाल शर्मा के रोड शो का कितना असर हुआ है और क्या कांग्रेस का 'शांत एवं स्थानीय' फॉर्मूला राजस्थान के नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब होता है या नहीं।  

75 हजार CWSN विद्यार्थियों के लिए बड़ी पहल, विशेष शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियों से मिलेगी मुक्ति

जयपुर  विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए श्रीगंगानगर और अलवर से राहत की खबर सामने आई है। दोनों जिलों के शिक्षा विभागों ने निर्देश जारी कर विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां नहीं देने को कहा है। यानी अब इन शिक्षकों को कार्यक्रमों और परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे ऐसे कामों में नहीं लगाया जाएगा, जो उनकी मुख्य जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं हैं। 75 हजार से ज्यादा बच्चों की जिम्मेदारी यह निर्देश ऐसे समय आया है जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 75 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में विशेष शिक्षा शिक्षकों की महत्लपूर्ण भूमिका है। ऐसे में विभाग का मानना है कि शिक्षकों का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय उन्हें CWSN बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षकों को किन कामों पर देना होगा ध्यान? आदेश में बताया गया है कि सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए जिला स्तर पर विशेष शिक्षा शिक्षक और रिसोर्स पर्सन नियुक्त किए हैं। इन शिक्षकों को CWSN बच्चों को पढ़ाने और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से विशेष दक्षताएं देने की ट्रेनिंग मिली हुई है। इन शिक्षकों का काम सिर्फ अपने स्कूल के CWSN बच्चों को पढ़ाना नहीं है। उन्हें अपने स्कूल के अलावा आसपास के प्राथमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और शहरी क्लस्टर प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के क्षेत्र में आने वाले CWSN बच्चों को भी पढ़ाई में मदद देनी होती है। इसके साथ ही इन शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़ी कई गतिविधियां भी संभालनी होती हैं। इनमें CWSN बच्चों के लिए परिवहन, एस्कॉर्ट, रीडर और छात्रवृत्ति भत्ते से जुड़ी सुविधाओं का काम शामिल है। इसके अलावा ऐसे बच्चों की पहचान करना भी इन शिक्षकों की जिम्मेदारी है, जिन्हें विशेष शिक्षा और सहायता की जरूरत है। संस्थान प्रधानों को दिए निर्देश विभाग ने सभी संस्थान प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए। उनसे गैर-शैक्षणिक काम कराने के बजाय उन्हें विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई, मदद और ऐसे बच्चों की पहचान से जुड़े कामों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने भी कहा कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन शिक्षकों का काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना ही नहीं है। वे स्कूल में विशेष जरूरत वाले बच्चों के व्यवहार को संभालने और उन्हें सहज महसूस कराने में भी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद ब्लॉक स्तर पर तैनात विशेष शिक्षक ऐसे दूसरे बच्चों की पहचान करने और उन्हें सही स्कूलिंग से जोड़ने का काम भी करते हैं। इसलिए इन शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। पहले भी हो चुकी है भर्ती और पदोन्नति पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार ने 242 विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के लिए वित्तीय मंजूरी दी थी। इसके बाद कक्षा 11वीं और 12वीं के विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष शिक्षक मिलने का रास्ता साफ हुआ। राज्य में पहली बार विशेष शिक्षा शिक्षकों को व्याख्याता के पद पर भर्ती और पदोन्नत किया गया। इससे पहले साल 2007 में ग्रेड-III शिक्षक के पद पर विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके बाद 2015 में कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती की गई थी।    

सांवरिया सेठ मंदिर के भंडार में मिली 60 देशों की विदेशी मुद्रा, भारतीय रुपए में करीब 59 लाख कीमत

भीलवाड़ा  श्रीसांवरिया सेठ मंदिर में देश के साथ विदेशों से भी विदेशी मुद्रा पहुंच रही है। आठ महीनों में मंदिर के भंडार में 60 देशों की मुद्राएं मिली हैं। इनमें अमरीका, यूएई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीका के देशों की करेंसी शामिल है। विदेशी मुद्रा में इस वर्ष अब तक सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर मिले हैं। इसके बाद 21,485 यूएई दिरहम, 1,310.25 कुवैती दिनार, 1,367 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और 1,630 कनाडाई डॉलर प्राप्त हुए हैं। मंदिर के भंडार में प्राप्त विभिन्न देशों की मुद्राओं को अमरीकी डॉलर में परिवर्तित करने पर इनका कुल मूल्य 62,800 अमरीकी डॉलर आंका गया है। प्रचलित विनिमय दर के आधार पर यह राशि भारतीय मुद्रा में करीब 59 लाख रुपए है। प्रमुख विदेशी मुद्रा देश                    मुद्रा अमरीका       45,351 डॉलर यूएई            21,485 दिरहम कुवैत           1,310.25 दिनार ऑस्ट्रेलिया    1,367 डॉलर कनाडा          1,630 डॉलर अप्रेल में डॉलर, अगस्त में दिरहम 16 अप्रेल की गणना में एक बार में 21,127 अमरीकी डॉलर मिले। वहीं 11 अगस्त की गणना में 8,955 यूएई दिरहम प्राप्त हुए। फरवरी-मार्च में ईरान के 4,63,500 रियाल, वियतनाम के 2,29,000 डोंग भी मिले। मुस्लिम बहुल देशों से भी चढ़ावा सेठ के भंडार में मुस्लिम बहुल देशों की मुद्राएं भी पहुंच रही हैं। पिछले आठ महीने के आंकड़ों में यूएई से 21,485 दिरहम मिले हैं। इसके अलावा ईरान से 4,68,500 रियाल और इंडोनेशिया से 1,63,000 रुपया प्राप्त हुए। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और खाड़ी देशों कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन व कतर की मुद्राएं भी भंडार में मिली हैं। अधिकृत बैंकों से रुपए में बदली जाती है मुद्रा मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिनेश चंद्र धाकड़ ने बताया कि मंदिर मंडल विदेशी नोटों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अधिकृत बैंकों के जरिए भारतीय रुपए में परिवर्तित करवाता है। प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर के भंडारे और सामाजिक-धार्मिक सेवा कार्यों में किया जाता है। व्यापारी सांवरिया सेठ को मानते हैं बिजनेस पार्टनर चित्तौड़गढ़ के मंडफिया गांव में स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर अपनी अलग मान्यताओं और भक्तों की गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। यहां खास तौर पर व्यापारी भगवान सांवरिया सेठ को अपने बिजनेस पार्टनर के रूप में मानते हैं। मान्यता के अनुसार, लोग अपने व्यापार के मुनाफे का कुछ हिस्सा भगवान के नाम पर निकालकर मंदिर में चढ़ाते हैं। इसी वजह से मंदिर में हर महीने बड़ी मात्रा में चढ़ावा आने की जानाकारी सामने आती है।

बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता, राजस्थान में 21 जिले सूखे; 4-5 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट

जयपुर  राजस्थान में मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 3 सितंबर तक प्रदेश में 295.30 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 374.55 मिमी रहती है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य के मुकाबले 21.16 % कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के 21 जिलों में बारिश कम दर्ज की गई है, जबकि 18 जिलों में बारिश सामान्य रही। वहीं सिर्फ दो जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। प्रदेश में कोई भी जिला असामान्य या बहुत कम बारिश वाली श्रेणी में नहीं है Weather Report, Jodhpur Weather Report, Jodhpur December Weather Report, Winter, Winter in Jodhpur, Jodhpur Weather News, IMD, Jodhpur News, वेदर रिपोर्ट, जोधपुर वेदर रिपोर्ट, जोधपुर दिसंबर वेदर रिपोर्ट, सर्दी, जोधपुर में सर्दी, जोधपुर वेदर न्यूज, आईएमडी, जोधपुर न्यूज आंकड़ों के मुताबिक अगर सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो, डीग में सबसे ज्यादा अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है। यहां सामान्य से 31.04 फीसदी अधिक बारिश हुई। इसके बाद फलोदी में 21.57 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। वहीं सलूंबर सामान्य बारिश वाली श्रेणी में रहा। यानी प्रदेश में कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन कई जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से पीछे रही। बता दें राजस्थान में इस बार मानसून सम से पहले आ गया था, उसके बाद भी ऐसे हालात हैं। गहलोत ने दी यह सलाह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार से संभावित सूखे जैसे हालात के लिए अभी से आकस्मिक योजना तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। सूखे से निपटने के पिछले अनुभवों को देखते हुए सरकार को पहले से ही तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए। पूर्वी राजस्थान में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। 4 और 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं पश्चिमी राजस्थान में मानसून फिलहाल कमजोर रहने के आसार हैं। जोधपुर संभाग के अधिकांश हिस्सों में गतिविधियां कमजोर रहेंगी, जबकि 4 से 6 सितंबर के बीच बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और नागौर में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।  

सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका और महिलाओं को राहत! ट्रेनिंग बॉन्ड से लेकर चाइल्ड केयर लीव तक बदले नियम

बीकानेर सरकारी नौकरी में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए है। वहीं महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामले में राहत दी गई है। नए नियम के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद स्वतंत्र प्रभार संभालने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारी को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बॉन्ड देना होगा। प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देने अथवा दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर सरकार प्रशिक्षण पर किए गए खर्च और अन्य प्रशिक्षण संबंधी खर्च की वसूली कर सकेगी। हालांकि, वसूली में कर्मचारी को दिया गया वेतन तथा नियमानुसार मिले यात्रा एवं दैनिक भत्ते शामिल नहीं होंगे। यदि कर्मचारी को केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राजस्थान सरकार के पूर्ण अथवा आंशिक स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम, क्वासी-गवर्नमेंट संगठन, आरबीआई या ग्रामीण बैंक में नौकरी मिलती है और इसके लिए राजस्थान सरकार की सेवा छोड़नी पड़ती है, तो बॉन्ड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी। ऐसे कर्मचारी से नए नियोक्ता के यहां निर्धारित अवधि तक सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा। अवधि और शर्ते संबंधित प्रशासनिक विभाग तय करेगा। 6 माह तक की ट्रेनिंग पर 1 साल की सेवा जरूरी तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए और नियम 7 (8) (बी) के तहत ड्यूटी पर माने गए कर्मचारियों पर भी बॉन्ड की शर्त लागू होगी। 3 महीने से अधिक और 6 महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम एक वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। 6 महीने से अधिक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम दो वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। निर्धारित अवधि पूरी किए बिना सेवा छोड़ने या दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली का प्रावधान रहेगा। पहले से आवेदन किया है, तो भी मिल सकेगी अनुमति यदि किसी ने राजस्थान सरकार की सेवा में आने से पहले ही केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार, सरकारी उपक्रम या संबंधित संस्थाओं में आवेदन कर रखा था और उस समय आवेदन उचित माध्यम से भेजना संभव नहीं था, तो उसे भी इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है। इसके लिए कर्मचारी को राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने के एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब सामान्य स्थिति में यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन से अधिक स्पेल में नहीं दिया जाएगा। पहली बार अलग मातृत्व अवकाश यदि सरोगेट मां और कमीशनिंग मां में से कोई एक या दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो सरोगेट मां को 180 दिन तक मातृत्व अवकाश, कमीशनिंग मां को 90 दिन तक मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। सरोगेट मां के लिए विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना, उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना और इम्प्लांटेशन के समय उसका स्वयं का बच्चा होना जैसी शर्तें रखी गई हैं। वहीं कमीशनिंग मां की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

राजस्थान निकाय चुनाव में बगावत का सैलाब, BJP को 9 हजार तो कांग्रेस को 8 हजार बागियों से चुनौती

जयपुर. राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के सामने मुकाबला सिर्फ एक-दूशरे से नहीं है. दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने खुद के ही लोग बन गए हैं. टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने बड़ी संख्या में निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है और अब मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं. कुल मिलाकर देखें तो ये दोनों पार्टियों के बीच ऐसे लोग हैं जो ये समझने में मुश्किल हालात बना रहे कि कौन जीत दर्ज कर सकता है. आंकड़ों और पार्टी पदाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में मोटे तौर पर बीजेपी के करीब 9 हजार और कांग्रेस के 8 हजार से ज्यादा बागी चुनाव मैदान में हैं. दोनों पार्टियों के पास अभी सभी निकायों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन आंकड़ों को मोटा अनुमान माना जा रहा है. लेकिन संख्या से ज्यादा चिंता इस बात की है कि इन बागियों में केवल सामान्य दावेदार ही नहीं हैं. कई पुराने पार्टी पदाधिकारी, पूर्व जनप्रतिनिधि, पूर्व पार्षद और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ रखने वाले नेता भी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद अब दोनों दलों की पूरी रणनीति बदलती दिखाई दे रही है. पहले टिकट देने की लड़ाई थी, अब टिकट बचाने के बाद वोट बचाने की लड़ाई शुरू हो गई है किन इलाकों में सबसे ज्यादा बागी पार्टी    बागियों की अनुमानित संख्या    सबसे ज्यादा चर्चा वाले इलाके बीजेपी    करीब 9 हजार    श्रीगंगानगर, बालोतरा, निम्बाहेड़ा, कोटपूतली, जैसलमेर कांग्रेस    8 हजार से ज्यादा    बालोतरा, जैसलमेर, बाड़मेर, टपूतली, सीसवाली, कुचेरा, झालरापाटन यहां सबसे अहम बात यह है कि यह पूरे प्रदेश का मोटा अनुमान है. दोनों पार्टियों के पास अभी हर निकाय का पूरा आंकड़ा नहीं है. इसलिए इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द श्रीगंगानगर बीजेपी की बगावत में श्रीगंगानगर सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है. यहां नगर परिषद में 70 बागी मैदान में हैं. यह संख्या अपने आप में बताती है कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदर असंतोष किस स्तर तक पहुंचा है. इसके बाद बालोतरा में 57, निम्बाहेड़ा में 37, कोटपूतली में 35, जैसलमेर में 30 और पदमपुर में 25 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा बाड़मेर में 23, बारां में 22, सीसवाली में 24 और भीलवाड़ा में 21 बागियों ने बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. बीकानेर नगर निगम में 15, सादुलशहर में 17 और श्रीविजयनगर में 12 बागी मैदान में हैं. बीजेपी के प्रमुख बागी आंकड़े निकाय    बीजेपी के बागी श्रीगंगानगर    70 बालोतरा    57 निम्बाहेड़ा    37 कोटपूतली    35 जैसलमेर    30 पदमपुर    25 सीसवाली    24 बाड़मेर    23 बारां    22 भीलवाड़ा    21 सादुलशहर    17 बीकानेर    15 श्रीविजयनगर    12 बीजेपी में सिर्फ दावेदार नहीं, बड़े नाम भी मैदान में बीजेपी की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कई जगह बगावत करने वालों की स्थानीय पहचान मजबूत है. डीग में बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश कौशिक निर्दलीय मैदान में हैं. बूंदी में नेता प्रतिपक्ष मुकेश माधवानी ने भी मोर्चा खोल दिया है. सादड़ी में पूर्व पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष घीसाराम जाट और बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष नारायण राइका निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. राजसमंद में पूर्व पार्षद गोवर्धन लड्ढा, सुरेश माली और हिम्मत मेहता भी अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव मैदान में हैं. यह सामान्य टिकट नाराजगी से थोड़ा अलग मामला है. ऐसे नेताओं के अपने समर्थक और स्थानीय संपर्क होते हैं. अगर ये लोग चुनाव तक मैदान में टिके रहते हैं तो बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार को सीधे नुकसान पहुंच सकता है. कांग्रेस की कहानी भी बहुत अलग नहीं कांग्रेस में भी बगावत का आंकड़ा बड़ा है. श्रीगंगानगर में कांग्रेस के 45 बागी मैदान में हैं. बालोतरा में 34, जैसलमेर में 24 और बाड़मेर में 21 बागी कांग्रेस प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर रहे हैं. सीसवाली और कुचेरा में 21-21 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. झालरापाटन में 19 और पिड़ावा में 18 बागी मैदान में हैं. कोटपूतली और पदमपुर में कांग्रेस के 25-25 बागी बताए जा रहे हैं, जबकि बीकानेर में 13 बागियों ने पार्टी का गणित बिगाड़ा है. कांग्रेस के प्रमुख बागी आंकड़े निकाय    कांग्रेस के बागी श्रीगंगानगर    45 बालोतरा    34 कोटपूतली    25 जैसलमेर    24 बाड़मेर    21 सीसवाली    21 कुचेरा    21 झालरापाटन    19 पिड़ावा    18 पदमपुर    25 बीकानेर    13 मान लीजिए किसी वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों पार्टियों का अपना मजबूत वोट बैंक है. इसी बीच बीजेपी का कोई मजबूत स्थानीय दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ता है. ऐसे में वह वोट सीधे कांग्रेस को नहीं देता, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार के वोट जरूर काट सकता है. इसलिए बागी उम्मीदवार कई सीटों पर जीतने के लिए नहीं, बल्कि अधिकृत प्रत्याशी की जीत रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है. निकाय चुनाव में कई वार्डों में जीत और हार का अंतर बहुत कम रहता है. ऐसे में कुछ सौ वोट भी पूरा चुनाव पलट सकते हैं. अगर किसी मजबूत बागी को एक-दो हजार वोट मिल जाते हैं तो वह अपनी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार की जीत का रास्ता रोक सकता है. अब दोनों पार्टियों का फोकस एक ही है , बागी बैठाओ नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की कोशिश अब यही है कि प्रभावशाली बागियों को किसी तरह चुनाव मैदान से हटाया जाए. पार्टी के नेता ऐसे दावेदारों से संपर्क कर रहे हैं. उन्हें समझाया जा रहा है कि चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाने से संगठन को नुकसान होगा. लेकिन मुश्किल यह है कि कई बागी सिर्फ टिकट के लिए नाराज नहीं हैं. वे लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि चुनाव जीतने की स्थिति में होने के बावजूद उनका टिकट काट दिया गया. ऐसे लोगों के लिए सिर्फ यह कहना कि पार्टी का फैसला मानिए, काफी नहीं होगा. यहीं से मान-मनुहार की राजनीति शुरू होती है. वापसी की आखिरी कोशिश क्यों जरूरी है? पार्टी नेतृत्व के … Read more

बॉस बनकर साइबर ठगी कर रहे अपराधी, राजस्थान पुलिस ने जारी की खास एडवाइजरी

जयपुर  राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक खतरनाक और नया तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे साइबर सुरक्षा की भाषा में 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) कहा जा रहा है। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के बाद राज्य की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश भर के प्राइवेट कंपनियों, कॉर्पोरेट दफ्तरों में काम करने वाले मैनेजर्स, अकाउंटेंट्स और अन्य कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के वास्तविक मालिक, एमडी या सीनियर अफसर का रूप धारण कर व्हाट्सएप, ईमेल या एसएमएस के जरिए कर्मचारियों से संपर्क साधते हैं और अर्जेंट वित्तीय लेन-देन या गोपनीय डेटा साझा करने का दबाव बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं। राजस्थान के कॉर्पोरेट और बिजनेस सेक्टर में तेजी से पैर पसार रहे इस नए साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। फर्जी आईडी- असली नाम, ऐसे बनाते हैं शिकार अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से काम करता है। ठग सबसे पहले किसी लक्षित कंपनी, उसके वरिष्ठ अधिकारियों के सोशल मीडिया प्रोफाइल, उनके आधिकारिक ईमेल पैटर्न और जारी प्रोजेक्ट्स के बारे में पूरी रिसर्च करते हैं। इसके बाद कर्मचारी के मोबाइल या ईमेल पर कंपनी के बॉस का नाम और फोटो लगाकर मैसेज भेजा जाता है। मैसेज में लिखा होता है कि बॉस एक बेहद जरूरी गुप्त मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए तुरंत किसी नए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की जाए या अर्जेंट गिफ्ट कार्ड खरीदे जाएं। कर्मचारी अपने बॉस का नाम, पद और असली प्रोजेक्ट का जिक्र देखकर झांसे में आ जाता है और बिना वेरिफिकेशन किए पैसे भेज देता है। वेब हाईजैक और ट्रोजन हॉर्स मालवेयर का इस्तेमाल एडीजी वी.के. सिंह ने साइबर ठगों की हाईटेक कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि अपराधी दफ्तरों के कंप्यूटर और लैपटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर भेजकर सिस्टम का एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं। यदि सिस्टम में व्हाट्सएप वेब लॉग-इन है, तो अपराधी क्यूआर कोड हाईजैक करके सीधे कर्मचारी के व्हाट्सएप तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद नकली बॉस की डीपी लगाकर अर्जेंट पेमेंट का मैसेज भेजा जाता है। इस ठगी की रकम को फर्जी म्यूल अकाउंट्स, क्रिप्टोकरेंसी या तुरंत कैश निकालकर एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। 'बॉस स्कैम' को पहचानने के 7 मुख्य संकेत राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने आमजन और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण लक्षण साझा किए हैं: ईमेल एड्रेस के स्पेलिंग या डोमेन नेम में अचानक या मामूली बदलाव होना। दफ्तर का समय समाप्त होने के बाद देर रात या असामान्य समय पर अचानक संदेश आना। बिना किसी पूर्व सूचना के अत्यधिक अर्जेंट या गोपनीय वित्तीय ट्रांसफर करने का दबाव। किसी अनजान या नए बैंक खाते में तुरंत धनराशि भेजने का निर्देश मिलना। सामने वाले व्यक्ति द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बार-बार बचना। मैसेज या ईमेल की भाषा और व्याकरण में अजीब गलतियां होना। व्हाट्सएप, एसएमएस या पर्सनल ईमेल पर असामान्य वित्तीय निर्देश मिलना। क्या करें और क्या न करें? पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल देखकर किसी भी अनजान खाते में भुगतान न करें। जब भी कंपनी के बॉस या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से ऐसा कोई मैसेज आए, तो तुरंत उनके व्यक्तिगत या आधिकारिक फोन नंबर पर सीधे कॉल करके पुष्टि करें। कंपनियों को अपने सिस्टम में सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने चाहिए: बड़े भुगतान या असामान्य वित्तीय लेन-देन के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल (Multilevel Approval) सिस्टम लागू करें। व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज (Linked Devices) को काम खत्म होते ही तुरंत लॉगआउट करें। व्हाट्सएप में टू-फैक्टर वेरिफिकेशन (Two-Factor Verification) हमेशा एक्टिव रखें। सिस्टम में एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर नियमित रूप से अपडेट रखें। साइबर फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर करें शिकायत राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति या कर्मचारी इस प्रकार की ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क के नंबरों 9256001930 और 9257510100 पर तुरंत सूचित करें। आधिकारिक शिकायत के लिए National Cyber Crime Reporting Portal पर विजिट करें। राजस्थान पुलिस के आधिकारिक अपडेट्स के लिए Rajasthan Police Portal का अवलोकन करें।

‘बहू गर्म रोटी न दे तो मेरे पास आ जाना’, SDM की मजेदार बात का वीडियो हुआ वायरल

जयपुर सरकारी कार्यक्रमों की तस्वीर दिमाग में लाइए. मंच पर अफसर, सामने कुर्सियों पर बैठे लोग, फाइलें, भाषण और औपचारिक बातें. लेकिन जयपुर के चौमू में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान ऐसा डायलॉग सुनने को मिला कि पूरा माहौल ही बदल गया. मौका था पट्टा वितरण शिविर का. एक बुजुर्ग महिला अपनी जमीन बेटे के नाम कर रही थीं. सारी कागजी प्रक्रिया पूरी हुई, दस्तावेज सौंपे गए और तभी चौमू के एसडीएम आशीष शर्मा ने मुस्कुराते हुए महिला से कहा- अब जमीन दे दी… बहू गर्म रोटी नहीं दे तो मेरे पास आ जाना. बस… इतना सुनना था कि पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा. खुद बुजुर्ग महिला भी मुस्कुरा दीं. सबसे मजेदार बात ये रही कि उस समय उनका बेटा और बहू भी वहीं खड़े थे और उन्होंने भी इस बात को हंसी-मजाक में ही लिया. दरअसल, अक्सर यह कहा जाता है कि कई बुजुर्ग अपनी सारी संपत्ति बच्चों के नाम कर देते हैं और बाद में उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ता है. एसडीएम ने इसी सामाजिक धारणा को हल्के-फुल्के अंदाज में छेड़ते हुए यह कमेंट किया था. वहां मौजूद लोगों ने इसे मजाक के तौर पर लिया और माहौल खुशगवार हो गया. VIDEO सोशल मीडिया पर छा गया कार्यक्रम में मौजूद किसी शख्स ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया. देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. लोग एसडीएम के इस अंदाज की तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स लिख रहे हैं कि सरकारी कार्यक्रमों में ऐसे हल्के पल कम ही देखने को मिलते हैं. वहीं कुछ लोग इस कमेंट के पीछे छिपे मैसेज की भी चर्चा कर रहे हैं. उनका कहना है कि मजाक के जरिए बुजुर्गों की देखभाल और सम्मान जैसी बात भी सामने आ गई. हालांकि, यह वीडियो सिर्फ इसलिए वायरल नहीं हो रहा कि एसडीएम ने मजेदार बात कही, बल्कि इसलिए भी कि एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम में कुछ पल के लिए माहौल बिल्कुल घरेलू हो गया. और यही वजह है कि चौमू का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है.