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अजमेर में पानी सप्लाई बहाल, कई इलाकों को राहत

अजमेर अजमेर में बीसलपुर पाइपलाइन मरम्मत का काम पूरा हो गया. 30 घंटे का शटडाउन खत्‍म हो गया. कई इलाकों में सप्लाई बहाल हो गई. कल तक जलापूर्ति पूरी तरह पटरी पर आने की उम्मीद है. अब लोगों को पानी की समस्‍या नहीं होगी. पहले की तरह से पानी की सप्‍लाई शुरू हो जाएगी. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने बीसलपुर-अजमेर पेयजल परियोजना के अंतर्गत 30 घंटे का शटडाउन लिया था. 30 घंटे का शटडाउन अजमेर में 12 अप्रैल रात 12 बजे से 14 अप्रैल सुबह 6 बजे तक 30 घंटे पेयजल सप्लाई बंद थी. इस दौरान 1600 एमएम और 1500 एमएम पाइपलाइन पर जरूरी तकनीकी कार्य किए गए. इन इलाको में सप्लाई बाधित शटडाउन के कारण अजमेर शहर के साथ-साथ ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सरवाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित रही. शहर के प्रमुख इलाकों में वैशाली नगर, पंचशील, आदर्श नगर, माकड़वाली रोड, धोलाभाटा, क्रिश्चियनगंज, केसरगंज, रामगंज, सिविल लाइंस, फॉयसागर रोड और दरगाह क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बंद थी. लोगों को हुई परेशानी? 30 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. घरों में पानी स्टोरेज सीमित होने से खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई जैसी दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा.

सीलबंद Maaza में प्लास्टिक मिला, आयोग का बड़ा फैसला

  जैसलमेर खाने-पीने की चीजों में लापरवाही बरतने जैसलमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कंपनी को कड़ा सबक सिखाया है. माजा (Maaza) कोल्ड ड्रिंक की सीलबंद बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा मिलने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनी और विक्रेताओं पर कुल 2.50 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है. साथ ही आयोग ने परिवादी को क्षतिपूर्ति रकम के तौर पर 40 हजार रुपये और परिवाद लड़ने में हुए खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया है. माजा की बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा दरअसल, 16 जुलाई 2025 को जैसलमेर के डिब्बा पाड़ा निवासी तुषार पुरोहित ने स्थानीय विक्रेता 'शिवम् मार्केटिंग' से माजा कोल्ड ड्रिंक की एक पूरी केरेट खरीदी थी. जब उन्होंने बोतलों की जांच की तो वह यह देखकर दंग रह गए कि माजा कोल्ड ड्रिंक की बोतल पूरी तरह सीलबंद थी, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या पॉलीथिन जैसी कोई चीज नजर आई. इस पर ताषर ने स्वास्थ्य के साथ इसे खिलवाड़ लापरवाही मानते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई. मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी ने वह सीलबंद बोतल साक्ष्य के तौर पर आयोग के सामने पेश की. आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गोड की पीठ ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी होने के बावजूद गुणवत्ता में कमी गंभीर लापरवाही है. निरीक्षण में कोल्ड ड्रिंक की बोतल के अंदर बाहरी पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई. परिवादी को 40 हजार रुपये देने का आदेश साक्ष्यों और बहस के आधार पर आयोग ने 9 अप्रैल 2026 को कंपनी को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया. आयोग ने कंपनी को परिवादी को 40,000 रुपए क्षतिपूर्ति राशि और 10,000 रुपए परिवाद व्यय देने के निर्देश दिए. साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में गंभीर कमी को देखते हुए 2 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश भी दिया गया. परिवादी के अधिवक्ता प्रथमेश आचार्य ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

Udaipur में अचानक तापमान उछाल, मौसम विभाग ने दी हीटवेव की चेतावनी

  जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर में भीषण गर्मी पड़ने लगी है. तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार को अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे ज्यादा है. दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने हालात और भी मुश्किल कर दिए. सड़कों पर सन्नाटा नजर आया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले.   आने वाले समय में और बढ़ेगा तापमान शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए प्याऊ और मटकी का ठंडा पानी राहगीरों के लिए राहत का जरिया बन रहा है. लोग रुककर पानी पीते नजर आ रहे हैं, जिससे कुछ हद तक गर्मी से राहत मिल रही है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सावधानी बरतने, दोपहर में धूप से बचने और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है. उदयपुर के तापमान में अचानक उछाल उदयपुर में पिछले तीन दिनों में तापमान में अचानक उछाल देखने को मिला हैं. सोमवार को तापमान 39.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो कि इस महीने का सबसे गर्म दिन रहा. यहीं नहीं, मौसम विभाग ने इस सप्ताह आसमान साफ रहने और तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई हैं. वहीं मंगलवार दोपहर को अचानक गर्म हवाएं चलने लगी और हीटवेव का अहसास दिलाने लगी.    इस बार सामान्य रहेगी बारिश   इस साल मानसून को लेकर तस्वीर थोड़ी चिंताजनक नजर आ रही है.  मौसम विभाग के पहले पूर्वानुमान में साफ कहा गया है कि देश में इस बार सामान्य से कम बारिश हो सकती है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, यानी लगभग 8 प्रतिशत की कमी होने का अनुमान है. मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह अल नीनो को माना जा रहा है.  यह प्रशांत महासागर के पानी के गर्म होने की स्थिति होती है जो भारत में मानसून को कमजोर कर देती है.  इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है जिससे मानसून की शुरुआत और उसकी रफ्तार दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

अजमेर में पानी संकट के बीच अवैध कनेक्शन से पानी चोरी का मामला सामने आया

 माखुपुरा राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के विदा होते ही सूर्यदेव ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. अजमेर में पारा 36.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जिले में पेयजल संकट गहराने लगा है. इस संकट के बीच, माखुपुरा इलाके में पानी चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जनता के पीने के पानी से खेतों की सिंचाई की जा रही थी. जिसकी भनक  जलदाय विभाग को लगते ही टीम ने  कार्रवाई करते हुए इस पूरे खेल का खुलासा कर दिया. खेत में टैंक बनाकर पीने के पानी का कर रहा था स्टोरेज मामला माखुपुरा इलाके का है जहां जलदाय विभाग ने  जांच के दौरान पाया की आरोपी ने न केवल मुख्य पाइपलाइन से कनेक्शन लिया, बल्कि खेत में टैंक बनाकर पानी का स्टोरेज भी कर रहा था. मामले की जांच कर रहे विभाग के जेईएन बीना मीणा ने जलापूर्ति निरीक्षण के दौरान इस अवैध कनेक्शन को पकड़ा. जांच के दौरान पाया कि माखुपुरा के रहने वाले लेखराज के खेत तक सीधे एक पाइपलाइन जोड़ी गई थी. जब उससे कनेक्शन के वैध दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका. जिसके बाद इसकी सूचना विभाग को दी. सूचना के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर एईएन सत्यवीर ने कार्रवाई की. आदर्श नगर थाने में आरोपी के खिलाफ  पानी की चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई.  मामले को लेकर विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि यह केवल पानी चोरी का केस नहीं है. बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और आम जनता के हक पर डाका डालने जैसा है. इलाके में अवैध कनेक्शन की जांच में जुटा जलदाय विभाग फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. साथ ही यह पता लगाने का काम कर रहा है कि कहीं इस तरह के अवैध कनेक्शन इलाके में और तो नहीं हैं. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अजमेर में कई इलाकों में पानी की किल्लत बनी हुई है. ऐसे में पीने के पानी का दुरुपयोग और अवैध दोहन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

बच्चों के नाम बदलने की पहल, शिक्षा विभाग ने तैयार की 3000 नामों की लिस्ट

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें अपने अजीबोगरीब नाम या सरनेम की वजह से अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर शिक्षा विभाग ने 'सार्थक नाम अभियान' की पूरी तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास का आधार होता है. इसी सोच के साथ अब उन बच्चों के नाम और उपनाम बदले जाएंगे जो सुनने में नकारात्मक या अर्थहीन लगते हैं. विभाग ने तैयार की 3 हजार 'सार्थक' नामों की लिस्ट इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3000 सार्थक और गौरवपूर्ण नामों की एक आधिकारिक लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में बालिकाओं के लिए 1529 और बालकों के लिए 1409 बेहतरीन नाम शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि ये नाम बच्चों की राशि और उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और विश्वास के अनुसार सही नाम का चुनाव कर सकें. शिक्षा मंत्री का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में बच्चों के नाम 'कजोड़मल', 'शेरू' या 'घीसा' जैसे रख दिए जाते हैं, जिससे बड़े होने पर उन्हें समाज में अजीब लगता है. विभाग अब इन नामों की जगह सम्मानजनक विकल्प दे रहा है. इस अभियान का एक अहम पहलू बच्चों के सरनेम में बदलाव करना भी है. सरकार ने उन उपनामों को बदलने का सुझाव दिया है जो आज के दौर में गरिमापूर्ण नहीं माने जाते. शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन पुराने उपनामों की जगह 'वाल्मीकि' या अन्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. इससे न केवल बच्चों की सामाजिक छवि बेहतर होगी, बल्कि उनमें जातिगत हीन भावना को खत्म करने में भी मदद मिलेगी. शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. चयन के लिए पेरेंट्स की लिखित सहमति जरूरी स्कूलों में होने वाली एसएमसी (SMC) और पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान शिक्षक उन बच्चों की पहचान करेंगे जिनके नाम सुधारने की जरूरत है. इसके बाद विभाग द्वारा सुझाई गई लिस्ट अभिभावकों को दिखाई जाएगी. यदि माता-पिता अपने बच्चे का नाम या सरनेम बदलने के लिए तैयार होते हैं, तो उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही सरकारी दस्तावेजों, शाला दर्पण पोर्टल और यूडीआईएसई प्लस पर नाम बदला जाएगा. यह प्रक्रिया फिलहाल कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए ही लागू की गई है. विरोध के स्वर: नाम जरूरी या सुविधाओं में सुधार? जहां सरकार इसे बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों ने इसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त अभिभावक संघ और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को बच्चों के नाम बदलने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने, स्कूलों के जर्जर ढांचे को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका तर्क है कि नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि शिक्षा का असली सुधार धरातल पर सुविधाओं को बढ़ाने से होगा.

अल नीनो का असर, मानसून कमजोर पड़ने की आशंका

जयपुर अगर आप भीषण गर्मी के बाद झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं, तो मौसम विभाग का यह ताजा अपडेट आपको थोड़ा निराश कर सकता है. विभाग के पहले पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का केवल 92 प्रतिशत ही रह सकती है, यानी सीधा-सीधा 8 प्रतिशत का घाटा. क्यों रूठेंगे बादल? 'अल नीनो' है बड़ी वजह जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने मंगलवार को NDTV राजस्थान से बातचीत में बताया कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह 'अल नीनो' को माना जा रहा है. दरअसल, प्रशांत महासागर का पानी जब गर्म होने लगता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है. इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है, जिससे न सिर्फ मानसून की शुरुआत धीमी होगी, बल्कि उसकी रफ्तार पर भी ब्रेक लग सकता है. राजस्थान समेत इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर आंकड़ों की मानें तो उत्तर भारत के राज्यों- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका है. मध्य भारत में भी 5 से 10 प्रतिशत की कमी रह सकती है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है. पिछले 10 साल में यह दूसरी बार है जब मानसून इतना कमजोर रहने वाला है. जेब और खेती पर पड़ेगा बुरा असर देश की 75 प्रतिशत बारिश मानसून पर टिकी है. अगर बारिश कम हुई, तो धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है. जब पैदावार कम होगी, तो बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ सकती है. इसके अलावा, कम बारिश का मतलब है पानी की कमी और बिजली की बढ़ती मांग. राजस्थान में 44 डिग्री का 'टॉर्चर' शुरू मानसून तो बाद में आएगा, लेकिन गर्मी ने अभी से पसीने छुड़ा दिए हैं. पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है. मौसम विभाग का कहना है कि 17 और 18 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव (लू) चलने की भी चेतावनी दी गई है. आमतौर पर देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर तक रह सकती है. यह गिरावट भले बहुत बड़ी न लगे लेकिन इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है.

फर्जी ट्रैवल पैकेज से सावधान! यात्रा सीजन में ऑनलाइन ठगी पर पुलिस की चेतावनी

जयपुर चारधाम यात्रा सीजन से पहले राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने श्रद्धालुओं के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह के निर्देश पर जारी इस एडवाइजरी का उद्देश्य यात्रियों को साइबर अपराधियों से बचाना है. डीआईजी ने चेतावनी दी   साइबर क्राइम के डीआईजी शंतनु कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि श्रद्धालु केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल या भरोसेमंद ट्रैवल एजेंसियों के जरिए ही बुकिंग करें. ठग फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सस्ते पैकेज या तुरंत दर्शन के नाम पर लुभावने विज्ञापन डालकर लोगों को फंसाते हैं. एडवाइजरी में लोगों से अपील की गई है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी यूपीआई डिटेल, ओटीपी या कार्ड संबंधी जानकारी साझा न करें और अनचाहे कॉल पर भुगतान करने से बचें. पब्लिक वाई-फाई यूज नहीं करने की सलाह इसके अलावा, यात्रा के दौरान सुरक्षित डिजिटल लेनदेन पर भी जोर दिया गया है.  रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या धर्मशालाओं में पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल कर वित्तीय लेनदेन न करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे डेटा चोरी का खतरा रहता है. पुलिस ने यह भी चेताया है कि पैसे प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती, और पिन केवल पैसे भेजते समय ही डाला जाता है.  यात्रियों को सुरक्षित और भीड़भाड़ वाले स्थानों, खासकर बैंक परिसर में स्थित एटीएम का उपयोग करने की सलाह दी गई है. मोबाइल सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखने और पब्लिक यूएसबी चार्जिंग पोर्ट के बजाय पर्सनल पावर बैंक इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. फर्जी काल से सावधान रहें श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे अपनी लाइव लोकेशन केवल विश्वसनीय परिवार के सदस्यों के साथ साझा करें और मंदिर या पुलिस अधिकारी बनकर आने वाले फर्जी कॉल से सावधान रहें.  किसी भी आपातकालीन स्थिति में पहले सत्यापन करने की सलाह दी गई है. साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है. राजस्थान पुलिस ने सभी श्रद्धालुओं से सुरक्षित और सतर्क रहकर यात्रा करने की अपील की है.

CM भजनलाल का मास्टर प्लान: 72 बीट्स, ज्यादा पुलिस और ITMS से बदलेगा जयपुर ट्रैफिक

 जयपुर जयपुर की सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की किच-किच को खत्म करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आदेश पर बनी इस योजना का मकसद सिर्फ ट्रैफिक रोकना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को हाई-टेक और स्मार्ट बनाना है. अब जयपुर का ट्रैफिक सिस्टम पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नई तकनीक और ज्यादा पुलिस फोर्स के साथ चलेगा. अफसरों की संख्या बढ़ी, हर इलाके पर होगी पैनी नजर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए सरकार ने पुलिस अधिकारियों की टीम को काफी बड़ा कर दिया है. पहले निगरानी के लिए एडीसीपी ट्रैफिक के 2 पद थे जिन्हें अब बढ़ाकर 4 कर दिया गया है. इसी तरह एसीपी ट्रैफिक के पदों को 4 से बढ़ाकर 8 और ट्रैफिक इंस्पेक्टरों की संख्या 15 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है. इससे फायदा यह होगा कि जयपुर के हर कोने में एक बड़ा अधिकारी मौजूद रहेगा और जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा. ड्रोन कैमरों से निगरानी, 72 बीट्स का शहर को बांटा अब ट्रैफिक पुलिस सिर्फ चौराहों पर खड़ी नजर नहीं आएगी, बल्कि आसमान से भी ड्रोन के जरिए आप पर नजर रखी जाएगी. पूरे शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में बांटा गया है, जहां अलग-अलग टीमें तैनात रहेंगी ताकि पीक ऑवर्स में जाम की स्थिति न बने. इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें दी गई हैं, ताकि पुलिसकर्मी भीड़भाड़ वाली तंग गलियों में भी तुरंत पहुंच सकें और जाम खुलवा सकें. टोंक रोड को बनाया जाएगा सबसे बेहतरीन रास्ता इस नए प्लान के तहत सबसे पहले टोंक रोड की सूरत बदली जाएगी. यादगार से लेकर सांगानेर तक के रास्ते को एक 'मॉडल रोड' के तौर पर विकसित किया जा रहा है. यहां सड़कों के डिजाइन को इस तरह ठीक किया जाएगा कि बेवजह के कट्स बंद हों और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ साफ मिले. सड़क पर यू-टर्न और क्रॉसिंग को वैज्ञानिक तरीके से सेट किया जाएगा ताकि गाड़ियों की रफ्तार न थमे. अतिक्रमण और गलत पार्किंग पर चलेगा डंडा जाम की एक बड़ी वजह सड़कों पर होने वाले कब्जे और गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां हैं. अब सरकार इसे लेकर बहुत सख्त है. सड़कों और फुटपाथों से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे और अवैध पार्किंग के खिलाफ अतिरिक्त क्रेनें तैनात की जाएंगी. शहर में पार्किंग और नो-पार्किंग जोन के बोर्ड साफ-साफ लगाए जाएंगे ताकि जनता को पता रहे कि गाड़ी कहां खड़ी करनी है. गाड़ियों की संख्या देखकर बदलेगी लाइट अब आपको लाल बत्ती पर बेवजह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' लागू करने जा रही है, जिससे सिग्नल अब 'डायनेमिक' होंगे. यानी लाइटें खुद गाड़ियों की भीड़ को देखकर तय करेंगी कि किधर का रास्ता कितनी देर खोलना है. सरकार का मानना है कि अगर जनता और प्रशासन मिलकर साथ दें, तो जयपुर की सड़कों को वाकई में जाम मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है.

जयपुर केस पर बवाल: IMA के ऐलान से पूरे प्रदेश में ठप स्वास्थ्य सेवाएं

जयपुर राजस्थान में  आज (14 अप्रैल) से 24 घंटे तक पूरी तरह से प्राइवेट अस्पताल बंद रहेंगे. इस दौरान प्रदेशभर के प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी. जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ्तारी के खिलाफ राज्य के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है. प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों के इस ऐलान से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ने वाला है और इस हड़ताल से मरीजों का भी भारी दिक्कत होगी. 24 घंटे का हड़ताल का ऐलान दरअसल, जयपुर में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी हुई थी. उन्हें हाल ही में चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब पुलिस की इसी कार्रवाई के विरोध में 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) ने मंगलवार से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में 24 घंटे की संपूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया. जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह तक ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. डॉक्टरों का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा लापरवाही का सबूत न मिलने के बावजूद सरकार ने मामूली अनियमितताओं के आधार पर यह दमनकारी कदम उठाया है. इस गतिरोध से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट मंडरा रहा है. IMA राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पहले गठित एक मेडिकल बोर्ड ने मामले में चिकित्सीय लापरवाही का कोई सबूत नहीं पाया था. डॉक्टर सोनदेव बंसल की क्यों हुई गिरफ्तारी डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने डॉक्टर सोनदेव बंसल से जुड़े केस के बारे में बताया कि अक्टूबर 2025 में जितेन्द्र कुमार शर्मा ने मानसरोवर थाने में रिपोर्ट दी कि उनकी मां शशि शर्मा को 01 सितंबर 2025 को निविक हॉस्पिटल में न्यूरो के इलाज के लिए भर्ती कराया था. अस्पताल ने उनकी माता का इलाज शुरू कर दिया और उनसे इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल कर लिये गये, जिनका आज तक कोई हिसाब किताब बिल रशीद नहीं दी. जितेंद्र ने रिपोर्ट में कहा कि उनकी मां का इलाज कुछ समय तक RGHS से भी किया गया और उनसे लाखों रुपये नकद भी लिए गए. इस दौरान अस्पताल प्रशासन आश्वासन देता रहा कि उनकी मां का इलाज अच्छा चल रहा है. हालांकि, कुछ दिनों बाद जितेंद्र की मां की मौत हो गई. जब जितेंद्र ने अपनी मां के इलाज के दस्तावेज और इलाज की रशीद व बिल मांगे तो अस्पताल ने देने से इनकार कर दिया. वही फ़र्जी फर्जी रिकार्ड तैयार किया गया. पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि अस्पताल प्रबंधक ने आरजीएचएस कार्यालय में जितेंद्र की मां को इलाज के लिए बार-बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती किया दिखाया. परिवादी की बिना सहमति से एक ही सहमति पत्र (consent form) पर कांट-छांट कर अलग-अलग डेट डालकर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड किया गया. आरजीएचएस ऑफिस ने अस्पताल के खिलाफ जांच में अनियमितता के आरोप प्रमाणित माने है और एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार भी दस्तावेजों में कांटछांट करना प्रमाणित पाया जाने पर संचालक डॉ. सोनदेव बंसल को गिरफ्तार किया गया.

55 की उम्र में 138 डिग्रियां और 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: राजस्थान के ‘महा पढ़ाकू’ दशरथ सिंह का असाधारण सफर

झुंझुनू  आज के दौर में जब एक ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने में अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, किताबें देख कर सिर घूमने लगता है और साल दर साल एक ही विषय पढ़ते-पढ़ते लोग ऊब जाते हैं, वहीं राजस्थान की वीर धरा से एक व्यक्ति ने डिग्रियों की झड़ी लगा दी है. हम बात कर रहे हैं पूर्व सैनिक दशरथ सिंह की, जिन्होंने अपनी मेहनत से कॉलेज और यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड बुक ही बदल डाले. जहां, लोग एक डिग्री के लिए रातों-रात जागते हैं, वहां इस जांबाज ने 55 साल की उम्र में 138 डिग्रियां अपने नाम कर ली हैं. उच्च शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं. इसलिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल हो चुका है।  देश सेवा में सबसे आगे रहने वाले राजस्थान के वीर सपूत वैसे तो आए दिन नए कीर्तिमान हासिल करते हैं. दुश्मनों से लोहा लेने की बात हो या खेती की बात हमेशा नए टेक्नोलॉजी का विकास करते रहते हैं. लेकिन झुंझुनू जिले के नवागढ़ तहसील के खीरोड़ गांव के रहने वाले एक किसान परिवार के दशरथ सिंह ने 55 साल की उम्र में 138 डिग्रियां हासिल की है. साल 1988 में उन्होंने भारतीय सेवा ज्वाइन की और 16 साल तक पंजाब जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यों में देश की सेवा के लिए तैनात रहे।  सेना में रहते हुए जारी रखी पढ़ाई  सेना में रहते हुए भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और हर साल मिलने वाले 2 महीने की छुट्टी का उपयोग करते हुए परीक्षा दी और पढ़ाई की. साल 2004 में प्रोसेशन से रिटायर हो गए. इसके बाद उन्होंने पूरा ध्यान अपनी शिक्षा पर लगाया लगातार वो अपनी पढ़ाई करते रहे. उन्होंने बीकॉम, एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी, B.Ed सहित कई डिग्री हासिल की हैं।  52 सर्टिफिकेट, 13 डिप्लोमा…  दशरथ सिंह का दावा है कि वो अभी तक तीन पीएचडी, 7 विषय में ग्रेजुएशन डिग्री और 46 पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री, 23 डिप्लोमा, 7 मिलिट्री स्टडीज डिग्री और 52 सर्टिफिकेट ले चुके हैं. सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर फोकस रखा. उन्होंने बताया कि उन्होंने इग्नू, जैन विश्वविद्यालय भारतीय संस्थान और अन्य विश्वविद्यालय से अपनी डिग्रियां की हैं. एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ. परिवार के आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. फिर भी उन्होंने किसी तरह से सरकारी स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की. पढ़ाई करने में उनको दिक्कत आ रही थी लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने बताया की वो सेना के सब शक्ति कमान में लीगल एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके हैं. साथ ही अब सेनारत और रिटायर्ड सैनिकों के न्यायालय से जुड़े मामलों को संभालते हैं।