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उदयपुर शिविर में लाभार्थियों को मिली सरकारी योजनाओं की सौगात

 उदयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को उदयपुर में शहरी सेवा शिविर का अवलोकन कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने उदयपुर विकास प्राधिकरण परिसर में आयोजित शिविर में उपस्थित लाभार्थियों से संवाद कर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं शिविर के संबंध में फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सरकारी सेवाओं का लाभ पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक व्यक्ति को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सेवा शिविरों के माध्यम से पट्टा वितरण, नामांतरण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व एवं नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रकरणों का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यक जांच अथवा प्रक्रिया के कारण अतिरिक्त समय लगने वाले प्रकरणों के निस्तारण के लिए फॉलोअप शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविरों में आमजन से जुड़े छोटे से लेकर बड़े कार्यों को भी गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने अधिकारियोें से कहा कि शिविरों में आमजन की समस्याओं का समाधान हर हाल में किया जाए तथा इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, महिलाओं और वंचित वर्गों सहित सभी वर्गों को मूलभूत सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों। पार्क, सड़क, नाली, सीवरेज, बिजली तथा अन्य नगरीय सुविधाओं से संबंधित समस्याओं का भी प्राथमिकता से समाधान किया जाए। मुख्यमंत्री ने आमजन से आह्वान किया कि वे अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों को शिविरों तक पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि पात्र व्यक्ति योजनाओं और सेवाओं का लाभ सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से ही इन शिविरों की सार्थकता सुनिश्चित होगी मुख्यमंत्री ने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को पट्टे, प्रमाण पत्र, भवन निर्माण स्वीकृति एवं सहायता राशि के चेक तथा दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण भी प्रदान किए। लाभार्थियों ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, विधायक ताराचंद जैन, फूल सिंह मीणा, उदयलाल डांगी, श्रीचंद कृपलानी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं आमजन उपस्थित रहे।

ब्यावर में खातेदारी भूमि विवाद का त्वरित समाधान, शिविर में निपटा जयसिंह का मामला

 ब्यावर  ब्यावर जिले की जवाजा पंचायत समिति के अतीतमण्ड निवासी जयसिंह पुत्र गोकुल सिंह खातेदारी भूमि का बंटवारा नहीं होने से परेशान था। उसे लोन लेने, उन्नत बीज, कृषि यंत्र अनुदान, पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए पहले साझेदारों के चक्कर काटने पड़ते, फिर पूरा लाभ भी नहीं मिल पाता। जमीन का मामला होने के कारण उसे धोखाधड़ी का भी डर था लेकिन विभिन्न कारणों से बंटवारा नहीं हो पा रहा था।  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयसिंह जैसे लोगों के मन की मुराद सुनी और गत 12 जून से प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामीण सेवा शिविर लगवाना शुरू किया। अतीतमण्ड में सेवा शिविर लगने की जानकारी मिलने पर जयसिंह शिविर में पहुंचा और शिविर प्रभारी को इस सम्बंध में प्रार्थना पत्र दिया। शिविर प्रभारी उपखण्ड अधिकारी ने तहसीलदार को प्रार्थी की खातेदारी भूमि का बंटवारा करके उनके समक्ष प्रकरण पेश करने का आदेश दिया। ब्यावर तहसीलदार ने हलका पटवारी व गिरदावर को बंटवारा करने के आदेश दिए। हलका पटवारी व गिरदार ने मौके पर जाकर बंटवारा प्रस्ताव तैयार कर शिविर में तहसीलदार ब्यावर को पेश किया जिसे तहसीलदार ने शिविर में स्वीकृत किया। यह पूरी प्रक्रिया 1 घंटे में हो गयी।  इस पर जयसिंह ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार प्रकट करते हुए कहा कि नेता भाषण देते हैं, आश्वासन देते हैं, हमारे मुख्यमंत्री पब्लिक के काम करते हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि हीरे जैसा मुख्यमंत्री हमको मिला है। भगवान मुख्यमंत्री जी पर स्वास्थ्य एवं दीर्घायु का आर्शीवाद बनाये रखें।  

207 वर्ग किमी में रेयर अर्थ एक्सप्लोरेशन को मंजूरी, राजस्थान में विकास और रोजगार पर फोकस

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के समग्र विकास, सुशासन और नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इन निर्णयों से खनन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सहभागिता सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत निर्णयों की क्रियान्वयन प्रक्रिया समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाए ताकि आमजन को इनका लाभ शीघ्र प्राप्त हो सके। 207.63 वर्ग किमी में रेयर अर्थ एलिमेंट्स खनिज के एक्सप्लोरेशन की स्वीकृति मुख्यमंत्री ने राज्य में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के एक्सप्लोरेशन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए माइनिंग लीज प्रदान करने के प्रस्तावों को स्वीकृति दी है। उन्होंने  बालोतरा के पचपदरा व शेरगढ़ के ग्राम नवातला एवं देवीगढ़ में 207.63 वर्ग किमी में रेयर अर्थ एलिमेंट्स खनिज के ब्लॉक की नीलामी में मैसर्स सेन्ट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट को एक्सप्लोरेशन लाइसेंस की स्वीकृति दी है। एनआईए मामलों के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना को दी मंजूरी मुख्यमंत्री ने राज्य में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) मामलों की सुनवाई हेतु विशेष न्यायालय की स्थापना करने की स्वीकृति दी है। इससे राज्य में न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और प्रभावी होगी तथा मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता मिलेगी। 8 नवीन जिलों में होगा ‘नागरिक सुरक्षा कोर’ का गठन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा  की क्रियान्विति के क्रम में 8 नवीन जिलों- बालोतरा, डीडवाना-कुचामन, फलौदी, सलूम्बर, खैरथल-तिजारा, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ एवं ब्यावर में ‘नागरिक सुरक्षा कोर’ का गठन किए जाने की स्वीकृति प्रदान की। यह इन जिलों में आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा तथा आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

राजस्थान में इंडिया स्टोनमार्ट 2028 की तैयारियां शुरू, वैश्विक भागीदारी पर जोर

जयपुर  इंडिया स्टोनेमार्ट 2028 के आयोजन के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सिडोस) और लघु उद्योग भारती के मध्य मंगलवार को त्रि-पक्षीय एमओयू हस्ताक्षर किया गया। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के विश्नोई, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, रीको एमडी सुरेश ओला, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र, संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव नरेश पारीक, इंडिया स्टोन मार्ट के संयोजक नटवर अजमेरा तथा सिडोस के उपाध्यक्ष श्री दीपक अजमेरा सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति मौजूद रहे।  उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान को औद्योगिक हब बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि इंडिया स्टोन मार्ट 2026 सर्वश्रेष्ठ आयोजनों में से एक है। वर्ष 2028 के आयोजन को इससे भी भव्य रूप में आयोजित किया जाए। अभी से इसकी तैयारी शुरू की जाए और देश-विदेश में पत्थर से जुड़े उद्यमियों से चर्चा की जाए। साथ ही, पिछले संस्करण में आर्किटेक्ट्स को आयोजन से जोड़ा गया था, अगले आयोजन में देश के साथ ही विदेश के आर्किटेक्ट्स को राजस्थान के पत्थर के बारे में जानकारी दी जाए।  कर्नल राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले आयोजन में अधिक से अधिक देशों की भागीदारी, रिकॉर्ड विदेशी खरीददारी, वैश्विक निवेशकों की सहभागिता, आधुनीकीकरण और स्टार्टअप्स पर जोर होना चाहिए। साथ ही, चीन, लंदन और इटली सहित अन्य देशों में होने वाली स्टोन प्रदर्शनियों की खूबियों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए। पत्थर उद्योग से जुड़े मशीन, डिजाइन आदि क्षेत्रों से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए  एमओयू तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई के विश्वास का संगम—  कर्नल राठौड़ ने कहा कि सिडोस पत्थर से जुड़ी तकनीक, डिजाइन और टेस्टिंग से जुड़ा है। रीको के पास इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सामर्थ्य है। वहीं, लघु उद्योग भारती के एमएसएमई सेक्टर विश्ववास है। इसलिए यह एमओयू तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के विश्वास का संगम है। इससे इंडिया स्टोन मार्ट-2028 का ऐतिहासिक आयोजन होगा और राजस्थान का पत्थर पूरी दुनिया में पहुंचेगा।  अब राजस्थान में भी बनेंगी सेमीकंडक्टर चिप्स: उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री  उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के. के. विश्नोई ने कहा कि राजस्थान में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लागू की गई है। राजस्थान में भी शीघ्र ही सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन शुरू होगा। राज्य सरकार द्वारा हर वो छोटे से छोटा कदम उठाया जा रहा है, जिससे निवेश की प्रक्रिया आसान हो और अधिक से अधिक उद्योग लगें। इसी क्रम में करीब 34 नई नीतियां लागू की गई हैं। उन्होंने कहा स्टोन मार्ट-2026 का आयोजन ऐतिहासिक था। लघु उद्योग भारती सरकार के साथ मिलकर देशहित में नीति-निर्माण का कार्य कर रहा है।  इस अवसर पर एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें इंडिया स्‍टोन मार्ट – 2028 की तैयारियों के  साथ स्‍टोन इंडस्ट्री में नई तकनीक, नवाचार, वैश्‍विक बाजार की संभावनाओं, निर्यात संवर्धन और चुनौतियों पर सरकार और प्रदेश की स्‍टोन इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच  चर्चा की गई।  17-20 फरवरी को होगा 14वां इंडिया स्टोनमार्ट  स्टोन मार्ट के अगले संस्करण का आयोजन 17-20 फरवरी, 2028 को होगा। इसमें अधिक से अधिक देशों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, 11 देशों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे। इंडिया स्टोनमार्ट 2026 में लगभग 45,000 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र विकसित किया गया, जिसमें 450 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इनमें 59 विदेशी कंपनियां शामिल थीं तथा तुर्किये, चीन एवं ईरान सहित 3 अंतरराष्ट्रीय कंट्री पवेलियन स्थापित किए गए। विश्व के 8 देशों तथा भारत के 15 राज्यों से सहभागिता प्राप्त हुई। गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड एवं ओडिशा जैसे राज्यों ने पहली बार संगठित राज्य पवेलियन के रूप में भागीदारी की। इस आयोजन में 27,000 से अधिक आगंतुक आए, जिनमें 21,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुक शामिल थे। विश्व के 58 देशों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि इंडिया स्टोनमार्ट अब केवल भारत का आयोजन नहीं, बल्कि एक वैश्विक व्यापारिक मंच बन चुका है। इसके अतिरिक्त 400 से अधिक आर्किटेक्ट्स एवं डिजाइन पेशेवरों की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि भविष्य में प्राकृतिक पत्थरों की मांग और उपयोग की संभावनाएं और अधिक बढ़ने वाली हैं।  प्रमुख तथ्य : इंडिया स्टोनमार्ट 2026 कुल प्रदर्शनी क्षेत्र : लगभग 45,000 वर्गमीटर कुल प्रदर्शक : 450 विदेशी प्रदर्शक : 59 अंतरराष्ट्रीय पवेलियन : 3 सहभागी देश : 8 भारतीय राज्य : 15 कुल आगंतुक : 27,256 व्यापारिक आगंतुक : 21,431 विदेशी प्रतिनिधि : 58 देशों से सहभागिता आर्किटेक्ट एवं डिजाइन विशेषज्ञ : 429

एजुकेशन समिट में राज्यपाल का संबोधन, नई शिक्षा नीति को बताया भारत की पहचान

जयपुर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा ही ज्ञान का बड़ा आधार है। इसके जरिए भारत को विश्वभर में श्रेष्ठ बनाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के टेलेंट की दुनिया भर में मांग है। उन्होंने बच्चों की बौद्धिक क्षमता विशिष्ट क्षेत्रों में विकसित किए जाने पर जोर दिया। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान के आलोक में विकसित भारत के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में बच्चों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कार निर्माण के लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता जताई। राज्यपाल श्री बागडे मंगलवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित "एजुकेशन समिट" में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से विकास को सही मायने में गति दी जा सकती है। संवाद से सुसंवाद होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो आविष्कार हुए, उनका श्रेय पश्चिम ने ले लिया। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहला विमान मुंबई के संस्कृत विद्वान शिवकर बापूजी तलपड़े ने उड़ाया परंतु श्रेय राइट बंधुओं को मिला। इसी तरह गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भास्कराचार्य था, दुनिया में न्यूटन प्रसिद्ध हुए। उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान का नई पीढ़ी में प्रसार किए जाने पर जोर दिया राज्यपाल ने कहा कि विश्व में जब कहीं विश्वविद्यालय नहीं था, तब भारत में 19 विश्वविद्यालय थे। उन्होंने कहा कि ईस्वी सन 725 में रावल पिंडी में तक्षशिला विश्वविद्यालय विश्व का श्रेष्ठ शिक्षा केंद्र था। राज्यपाल ने बप्पा रावल की महानता की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अरबों को भारत से खदेड़ा। उनके नाम से ही बाद में पाकिस्तान का रावल पिंडी स्थान हुआ। उन्होंने कहा कि गुरुकुल पद्धति भारत की श्रेष्ठ शिक्षा पद्धति रही है। गुरुकुल में किसी एक विषय का नहीं सभी विषयों का ज्ञान दिया जाता था। उन्होंने "गुरुकुल गए रघुराई अल्प काल में शिक्षा पाई" चौपाई की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान राम ने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की, इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम बने। राज्यपाल ने प्राचीन ज्ञान परम्परा की चर्चा करते हुए कहा कि विश्व को शून्य का ज्ञान भारत ने दिया। उसी से पूरी दुनिया को गिनती करना आया।  दशमलव का ज्ञान, व्याकरण आदि से भारत ने ही विश्व को शिक्षा दी। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया की चर्चा करते हुए कहा कि मैक्समूलर ने उसमें लिखा है कि महाभारत और रामायण जैसे दो अद्भुत ग्रन्थ भारत ने विश्व को दिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान, आज का बर्मा, श्रीलंका, कंबोडिया, गांधार आदि प्राचीन भारत में ही थे। कश्मीर का शारदा पीठ देश में ज्ञान का बहुत बड़ा केंद्र था। बागडे ने विनोबा भावे के कहे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आजाद होने के साथ ही जैसे अंग्रेजों का झंडा उतारा गया और बदला गया उसी तरह देश की शिक्षा नीति बदली जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति हमें दी उसका मूल आधार ही यही था कि अंग्रेजी के ज्ञान के साथ पश्चिम को श्रेष्ठ  साबित किया जाए। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि घरेलू उद्योग बंद किए जाएं, ताकि भारत के लोग भूखे रहे और सदा अंग्रेजों पर आश्रित रहे और गुलाम बने रहे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीयता के मूल्यों में गूंथी हुई है। इसके आलोक में देश को हर क्षेत्र में अग्रणी करने के प्रयास किए जाएं इससे पहले राज्यपाल ने वहां शैक्षिक उन्नयन और कौशल शिक्षा से जुड़े विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ रहे राजस्थान के लाखों असंगठित श्रमिक

जयपुर किसी भी देश या प्रदेश के विकास की यात्रा तभी सार्थक होती है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसके हक और योजनाओं की पहुंच हो। अंत्योदय के इसी संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में ‘ई-श्रम पोर्टल’ एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है। इस पोर्टल के जरिए ना केवल श्रमिकों का एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, बल्कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर के जरिए उन तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों, कृषि, घरेलू सेवाओं, रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, परिवहन, वस्त्र उद्योग के साथ ही गिग वर्कर्स अपनी मेहनत से देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। इन असंगठित श्रमिकों की कोई समग्र और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने से उन तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत की गई। ई-श्रम पोर्टल के प्रति राजस्थान के श्रमिकों में बढ़ती जागरुकता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान भी इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। राज्य में ई-श्रम पोर्टल के प्रति श्रमिकों की बढ़ती जागरुकता के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक राजस्थान में 1 करोड़ 54 लाख 50 हजार 294 श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 82 लाख 40 हजार 291 महिलाएं और 72 लाख 9 हजार 896 पुरुष श्रमिक शामिल हैं। यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि महिलाओं की भागीदारी 53.33 प्रतिशत है, जो आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता का परिचायक है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक पंजीकरण राजस्थान में पंजीकृत श्रमिकों के क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो कृषि क्षेत्र सबसे आगे है। राज्य में 85 लाख 99 हजार 316 कृषि श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। इसके बाद निर्माण क्षेत्र के 24 लाख 29 हजार 179 तथा वस्त्र एवं परिधान उद्योग के 8 लाख 2 हजार 650 श्रमिक पंजीकृत हुए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि ई-श्रम पोर्टल ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को एक साझा मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की है। पंजीकरण के विभिन्न माध्यमों का विश्लेषण करें तो स्वयं पंजीकरण की प्रक्रिया को श्रमिकों ने व्यापक रूप से अपनाया है। राज्य में 1 करोड़ 2 लाख 27 हजार 852 श्रमिकों ने स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से 51 लाख 62 हजार 175 श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। राज्य सेवा केंद्रों, उमंग प्लेटफॉर्म तथा अन्य माध्यमों से भी हजारों श्रमिक इस अभियान से जुड़े हैं। यह दर्शाता है कि सरकार ने श्रमिकों तक पहुंच बनाने के प्रभावी प्रयास किए हैं। वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ से एक क्लिक दूर योजनाएं ई-श्रम पोर्टल पर 21 अक्टूबर 2024 को ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं को एकीकृत किया गया। इस व्यवस्था ने श्रमिकों के लिए योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना और लाभ उठाने को पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल बना दिया है। अब पंजीकृत श्रमिक एक क्लिक पर प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना, व्यापारियों एवं स्व-रोजगार व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम-वृद्धावस्था सुरक्षा, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, बुनकर स्वास्थ्य बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना तथा सफाई कर्मचारियों-हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों के पुनर्वास संबंधी योजनाओं जैसी अनेक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही ई-श्रम पोर्टल रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे रहा है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, गरीब कल्याण रोजगार योजना, दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं को पोर्टल से जोड़कर श्रमिकों के लिए रोजगार और आजीविका के नए द्वार खोले गए हैं। इससे ना केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि श्रमिक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। सरल और सुलभ पंजीकरण प्रक्रिया से बढ़ी सक्रियता ई-श्रम पोर्टल की एक बड़ी विशेषता इसकी सरल और सुलभ पंजीकरण प्रक्रिया है। 16 से 59 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी असंगठित श्रमिक (जो ईपीएफओ, ईएसआईसी या सरकारी वित्त पोषित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का सदस्य नहीं हो) इस पोर्टल पर पंजीकरण कर सकता है। श्रमिक अपने आधार और मोबाइल नंबर के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या राज्य सेवा केंद्र में भी निःशुल्क पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। उमंग ऐप और पोर्टल के माध्यम से भी श्रमिक अपनी प्रोफाइल को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राजस्थान सहित पूरे देश में ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से असंगठित श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का नया अध्याय लिखा जा रहा है। वर्तमान समय में ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों के लिए केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यह श्रमिकों को पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास और रोजगार जैसी आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने वाला एकीकृत मंच है। साथ ही, सरकार को भी लक्षित लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में सहायता मिल रही है। यह पहल ना केवल श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को पूरा करने में उनकी भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रही है।

संवेदनशील पहल से बदली दाखू देवी की जिंदगी, मिली सरकारी योजनाओं की सौगात

जैसलमेर जैसलमेर जिले की राजमथाई ग्राम पंचायत निवासी दाखू देवी जोगी पूर्व में हुई एक भीषण आगजनी की घटना में लगभग 75 प्रतिशत तक झुलस गई थी। इस दुर्घटना में उनका चेहरा एवं हाथों की उंगलियां भी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी। शारीरिक स्थिति के कारण उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था, जिसके चलते वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लाभ से वंचित थी।  पहले पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी की उपस्थिति में पंचायत समिति भणियाणा के विकास अधिकारी हनुमान राम ने दाखू देवी की समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने निजी वाहन से दाखू देवी को पांच बार जोधपुर ले जाकर आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करवाईं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप दाखू देवी का आधार कार्ड,जन आधार कार्ड एवं बैंक खाता बनवाया गया एवं उनकी वृद्धावस्था पेंशन भी स्वीकृत करवाई गई। ग्राम पंचायत राजमथाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने दाखू देवी को पेंशन पीपीओ सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए।  दस्तावेज प्राप्त कर भावुक हुई दाखू देवी ने कहा कि अब उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और उनका जीवन पहले से अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनेगा। उन्होंने पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी, विकास अधिकारी हनुमान राम, ग्राम विकास अधिकारी भीमदान चारण तथा वरिष्ठ सहायक राणा राम गौरा सहित सभी संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों का आभार व्यक्त किया।   दाखू देवी की यह सच्ची कहानी दर्शाती है कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता, समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करे तो कठिन से कठिन समस्या का समाधान संभव है।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

श्रीडूंगरगढ़ में मंत्री सुमित गोदारा का संवाद, एनएफएसए लाभार्थियों को मिला प्रमाण पत्र

जयपुर पंचायत समिति परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गोदारा ने कहा कि गिव अप अभियान ने प्रदेश के 84 लाख लोगों की खोई मुस्कान लौटाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में प्रदेश में चला यह अभियान देशभर के लिए नजीर बना। अभियान के तहत 82 लाख लोगों द्वारा स्वेच्छा से लाभ त्याग करना देशभर में नजीर है। गोदारा ने कहा कि घर-घर संपर्क के दौरान यह सामने आया कि अपात्र लोग इस योजना का लाभ ले रहे थे जबकि पात्र एवं जरूरतमंद इससे वंचित हैं। खाद्य सुरक्षा अधि​नियम के अनुसार प्रदेश के 4.46 करोड़ लोगों को ही इसका लाभ दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान रखते हुए 1 नवंबर, 2024 को यह अभियान शुरू किया और सक्षम लोगों से स्वेच्छा से एनएफएसए का लाभ त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अभियान से प्रेरित होकर 56 लाख ने इसका त्याग किया और 29 लाख ने ईकेवाईसी नहीं करवाई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक दशक से अधिक समय के बाद 26 जनवरी, 2025 को एनएफएसए पोर्टल चालू किया और अब तक 84 लाख वास्तविक पात्रजनों को लाभ दिया जा सका है। उन्होंने कहा कि इन लाभार्थियों को निःशुल्क इलाज, गैस सिलेंडर सब्सिडी और दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को पांच लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दस साल पूर्व चला ऐसा अभियान गोदारा ने कहा कि दस वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गैस सब्सिडी स्वेच्छा के छोड़ने का अभियान चला। जिसे आमजन का बड़ा समर्थन मिला। गिव अप अभियान को भी आमजन का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसकी सराहना की। इस दौरान उन्होंने लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा प्रमाण पत्र प्रदान किए। जनप्रतिनिधियों में हो सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना गोदारा ने गत ढाई वर्षों में लूणकरणसर क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के बारे में बताया और कहा कि इस अवधि में क्षेत्र में पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा और पशु चिकित्सा के सहित सात प्रमुख क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले ढाई सालों में डूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल होगा। गोदारा ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र में लाभार्थियों से हो रहा संवाद गोदारा ने कहा कि प्रदेश में चले ऐतिहासिक गिव अप अभियान की सफलता के पश्चात मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के एनएफएसए लाभार्थियों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए हैं। इसकी अनुपालना में अब तक नोखा और खाजूवाला में लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है। भविष्य में अन्य विधानसभाओं में भी इसका आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में 34 लाख लोगों ने स्वेच्छा से एनएफएसए का लाभ छोड़ा है, जिससे 30 हजार से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़कर राहत दी गई है। श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि गत ढाई वर्षों में क्षेत्र ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। क्षेत्र में सड़क, पानी, विद्युत तंत्र सुदृढ़ीकरण सहित आधारभूत सुविधाओं का विकास तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव में बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर लगे हैं। जिससे विद्युत तंत्र में आमूलचूल सुधार हुआ है। विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष राम गोपाल सुथार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मजदूरों, गरीबों, महिलाओं, वृद्धजनों और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की अनेक योजनाएं इन वर्गों के लिए चलाई जा रही हैं। पात्र व्यक्ति इनका लाभ उठाएं, उन्होंने शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों में अधिक से अधिक लोगों को पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान जालम सिंह भाटी, रामेश्वर पारीक और छैलू सिंह शेखावत ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में मानमल शर्मा, विनोद गिरी गुसाई, महेंद्रनाथ तंवर, कानाराम, राजकुमार कस्वा, हेमनाथ जाखड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अनेक लोगों ने मंत्री गोदारा का मालाएं पहनाकर स्वागत किया। बीकानेर से श्रीडूंगरगढ़ के बीच दर्जनों स्थानों पर हुआ अभिनन्दन इससे पहले बीकानेर से रवाना होने पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा का रायसर, सेरूणा, झंझेउ, जोधासर और लखासर सहित श्रीडूंगरगढ़ तक दर्जनों स्थानों पर भव्य स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने की मंत्री गोदारा की अगवानी की। इनमें सेरूणा से पूर्व सरपंच, रणवीर सिंह, गौरीशंकर स्वामी, भगवान स्वामी, झंझेउ से श्री भँवर सिंह तंवर, रीडी से बालू राम जाखड़, मुनीराम जाखड़, बादनूं से नवरत्न घिंटाला, लखासर से भंवर सिंह चंद्रावत, गोपालसर से सीताराम बुढ़िया, कुलदीप सारस्वत सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल रहे।