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ऑनलाइन ठगी पर सरकार का अलर्ट, अनधिकृत लोन ऐप्स और फर्जी पार्ट-टाइम जॉब ऑफर्स से बचने की सलाह

 जयपुर राज्य सरकार द्वारा साइबर स्वच्छता को बढ़ावा देने तथा डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से दो साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी में अवैध एवं अनधिकृत इंस्टेंट लोन ऐप्स के माध्यम से होने वाली जबरन वसूली ओर डिजिटल उत्पीड़न से बचाव पर विशेष बल दिया गया है। साथही टास्क स्कैम से बचाव के लिए आमजन को सावधान रहने की अपील की गई है।  इंस्टेंट लोन ऐप आधारित जबरन वसूली के मामलों से सावधान रहें। अनधिकृत इंस्टेंट लोन ऐप्स द्वारा तत्काल वित्तीय आवश्यकता वाले व्यक्तियों को निशाना बनाने के लिए बिना गारंटी केतुरंत नकद देने का वादा किया जाता है। एक बार एप इंस्टॉल करने पर स्कैमर्स उपयोगकर्ताओं के मोबाइल डेटा, संपर्क सूची एवं निजी जानकारी तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद अत्यधिक ब्याज, धमकी, ब्लैकमेल और मॉर्फ्ड तस्वीरों के माध्यम से दबाव बनाकर अवैध वसूली करते हैं। नागरिकों को केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म एवं आधिकारिक ऐप स्टोर से ही वित्तीय एप्लीकेशन डाउनलोड करने तथा किसी भी ऐप को अनावश्यक अनुमति प्रदान करने सेबचने की सलाह दी गई है। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव हेतु विशेष एडवाइजरी जारी, टास्क स्कैम के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता गृह विभाग द्वारा जारी दूसरी एडवाइजरी में "टास्क स्कैम" अथवा ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब धोखाधड़ी के संबंध में नागरिकों को सचेत किया गया है। साइबर अपराधी प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को आसान कार्यों के बदले आकर्षक आय का प्रलोभन देते हैं तथा प्रारंभिक भुगतान कर विश्वास अर्जित करने के बाद उनसे बड़ी धनराशि निवेश करवाने का प्रयास करते हैं। आमजन से अपील की गई है कि बिना सत्यापन के किसी भी ऑनलाइन कार्य या निवेश प्रस्ताव पर विश्वास न करें तथा किसी अज्ञात व्यक्ति या संस्था को धन राशि हस्तांतरित न करें। संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल रिपोर्टिंग का आह्वान प्रदेश सरकार ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी,ऑनलाइन ठगी, जबरन वसूली अथवा संदिग्ध डिजिटल गतिविधि की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें तथा शिकायत को https://www.cybercrime.gov.inपर दर्ज कराएं। साथ ही, संबंधित बैंक अथवा वित्तीय संस्था को तत्काल सूचित कर आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की भी सलाह दी गईहै। 

पदोन्नति नियमों में बदलाव, राजस्थान कर्मचारियों और युवाओं को मिलेगा लाभ

जयपुर  राजस्थान सरकार ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत जरूरी और लाभकारी फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट घोषणा 2026-27 के क्रियान्वयन के तहत पदोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए आवश्यक सेवा अवधि में दो साल की छूट देने का ऐलान किया है. इस निर्णय से उन कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा जो अनुभव की कमी के कारण पदोन्नति से वंचित रह रहे थे. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ उन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा जिन्होंने डीपीसी वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान पहले ही ऐसी छूट का लाभ प्राप्त कर लिया है. इस कदम से विभागीय कार्यक्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है. सचिवालय में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर पदोन्नति में छूट के अलावा राज्य सरकार ने सचिवालय में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 149 नए पदों को सृजित करने की मंजूरी दी है. इसमें सहायक शासन सचिव के 15 पद, सहायक अनुभाग अधिकारी के 67 पद और लिपिक ग्रेड प्रथम के 67 पदों को शामिल किया गया है. मुख्यमंत्री के इस फैसले से जहां एक ओर विभागीय कर्मचारियों को पदोन्नति के नए और बेहतर अवसर मिलेंगे वहीं दूसरी ओर राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे. सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में गति लाना और कर्मचारियों के मनोबल को ऊंचा रखना है. प्रशासनिक सुधार की दिशा में यह एक दूरगामी परिणाम देने वाला निर्णय माना जा रहा है. जल्द ही इस संबंध में विभिन्न सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

सीएम भजनलाल शर्मा का बड़ा फैसला: मंडी यार्ड और संपर्क सड़कों का होगा विकास

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य की विभिन्न कृषि उपज मण्डी समितियों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए 18 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत के विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इससे मण्डी यार्ड निर्माण, संपर्क सड़कों का निर्माण तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के कार्य करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान की गई इस स्वीकृति से कृषि उपज मण्डी समिति सोजत सिटी (पाली), पलसाना एवं श्रीमाधोपुर (सीकर), अनाज मण्डी (बीकानेर), मेड़ता सिटी (नागौर) तथा दूदू (जयपुर) में विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगें। इन विकास कार्यों से मण्डियों में किसानों और व्यापारियों के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। इससे कृषि विपणन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि उपज मण्डी समितियों से जुड़ी संपर्क सड़कों के निर्माण एवं क्षतिग्रस्त सम्पर्क सड़कों की मरम्मत से ग्रामीण क्षेत्रों के किसान अपनी उपज सुगमता से मण्डी तक ला सकेंगे। इससे मण्डियों में फसलों की आवक बढ़ेगी, किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी तथा मण्डी राजस्व में भी वृद्धि होगी।

खोड़ गांव में खजूर खेती बनी मॉडल, मंत्री ने किसान की सराहना की

 पाली पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के खोड़ मण्डल स्थित खैरोफड़ा ग्राम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसान द्वारा विकसित किए गए प्राकृतिक खेती आधारित खजूर के बाग का गहन निरीक्षण किया। मंत्री ने वहां अपनाई जा रही आधुनिक कृषि पद्धति, उन्नत जल प्रबंधन और उत्पादन व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने इसे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक अनुकरणीय और प्रेरणादायी उदाहरण बताया। 5 वर्ष की मेहनत लाई रंग, सालाना आय 10 लाख रूपये निरीक्षण के दौरान उपस्थित प्रगतिशील कृषक ने मंत्री कुमावत को बताया कि लगभग 5 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने खेत में खजूर के 270 पौधे लगाए थे। बेहतर देखरेख और सही प्रबंधन के चलते आज ये सभी पौधे पूरी तरह विकसित होकर फल देने लगे हैं। किसान ने बताया कि खजूर के इस बाग से अब उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रूपये की शानदार वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस सफलता को देख कैबिनेट मंत्री ने किसान के प्रयासों की पीठ थपथपाई। बूंद-बूंद सिंचाई और प्राकृतिक खाद का अनूठा संगम इस कृषि मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। कृषक द्वारा बाग में बूंद-बूंद (ड्रिप) सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी की एक-एक बूंद का समुचित और किफायती उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके साथ ही, पौधों को पोषण देने के लिए रासायनिक उर्वरकों की जगह पूरी तरह प्राकृतिक खाद का प्रयोग किया जा रहा है। इस दोहरे प्रबंधन से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर खेती की लागत कम होकर यह अधिक लाभकारी साबित हो रही है। क्षेत्र के किसानों के लिए बनेगा रोल मॉडल मंत्री कुमावत ने कहा कि सीमित पानी में प्राकृतिक तरीके से खजूर की खेती करना कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव है। प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और सटीक कृषि प्रबंधन का यह अनूठा प्रयास मरूभूमि के लिए वरदान है। यह मॉडल न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखता है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को भी पूरा करता है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों और स्थानीय किसानों से इस सफल प्रयोग को देखने और सीखने का आह्वान किया ताकि क्षेत्र में बागवानी को और बढ़ावा दिया जा सके।

ब्लैक फिल्म, हूटर और मॉडिफाइड वाहनों पर राजस्थान पुलिस का बड़ा शिकंजा

जयपुर राजस्थान की सड़कों पर सुगम, सुरक्षित और नियमबद्ध यातायात व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर शुरू हुआ महा-अभियान हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के बाद प्रदेश के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल मुस्तैद है। इस पूरे अभियान की कमान महानिदेशक पुलिस यातायात श्री अनिल पालीवाल और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी.एल. मीणा संभाल रहे हैं, जिनके सुपरविजन में जिला पुलिस और ट्रैफिक टीमें सुबह से देर रात तक काली फिल्म, अवैध हूटर और मॉडिफाइड चेसिस वाले वाहनों को खंगाल रही हैं। समेकित आंकड़ों पर नजर डालें तो 4 जून से 16 जून 2026 तक के 13 दिनों के भीतर राजस्थान पुलिस ने कुल 1,10,206 वाहनों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और विधिक कार्रवाई की है। इनमें ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट, वाहन की अवैध संरचना परिवर्तन, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट, हूटर, प्रेशर हॉर्न तथा वाहनों पर अनाधिकृत शब्द एवं चिन्ह लगाने वालों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन किया गया। अभियान के तहत 16 जून को अकेले 7,328 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। ब्लैक फिल्म और नियम विरुद्ध नंबर प्लेट पर सबसे अधिक कार्रवाई 4 जून से 16 जून तक अभियान के दौरान वाहनों के शीशों पर लगी ब्लैक फिल्म के विरुद्ध सर्वाधिक 41,982 कार्रवाई की गई। इसके अलावा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह के 28,462, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन के 15,156, वाहन की संरचना (बॉडी/चेसिस) में अवैध परिवर्तन के 10,606, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के 8,066 तथा प्रेशर हॉर्न/एयर हॉर्न के 5,934 मामलों में कार्रवाई की गई। 16 जून को 7,328 वाहनों पर कार्रवाई अभियान के तहत 16 जून को प्रदेशभर में कुल 7,328 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इनमें वाहन की संरचना में अवैध परिवर्तन के 736, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के 638, प्रेशर हॉर्न/एयर हॉर्न के 435, ब्लैक फिल्म के 2,565, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन के 1,037 तथा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह के 1,917 मामलों में चालान बनाए गए। जयपुर पश्चिम में सर्वाधिक कार्रवाई 16 जून को जिला स्तर पर जयपुर पश्चिम में सर्वाधिक 487 कार्रवाई दर्ज की गई। इसके बाद जयपुर ग्रामीण में 337, जयपुर यातायात में 294, चित्तौड़गढ़ में 289, धौलपुर में 276, बांसवाड़ा में 261, भीलवाड़ा में 250 तथा निवाड़ी में 249 कार्रवाई की गई। वहीं ब्लैक फिल्म के विरुद्ध सर्वाधिक 186 कार्रवाई जयपुर यातायात में तथा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट के सर्वाधिक 132-132 प्रकरण जयपुर पश्चिम और बारां में दर्ज किए गए। नियमों की पालना ही सुरक्षित यात्रा की कुंजी डीजी ट्रैफिक श्री पालीवाल ने आमजन से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पूर्णतः पालन करें तथा वाहनों में किसी भी प्रकार की अवैध मॉडिफिकेशन, ब्लैक फिल्म, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, प्रेशर हॉर्न एवं नियम विरुद्ध नंबर प्लेट का उपयोग नहीं करें। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित करने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

भजनलाल सरकार के शिविरों में हजारों लंबित प्रकरणों का मौके पर निस्तारण

लखनऊ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आमजन को प्रशासन के द्वार तक लाने के बजाय प्रशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने की अवधारणा के साथ संचालित जनकल्याण शिविर अभियान के अंतर्गत आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर-2026 ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन का प्रभावी माध्यम बनकर उभरे हैं। इन शिविरों का आयोजन 12 जून से हो रहा है।  इस अभियान के तहत 16 जून तक प्रदेशभर में 1407 शिविर आयोजित किए गए। इनमें विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं सेवाओं से 5 लाख 76 हजार 292 से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं। शिविरों में वर्षों से लंबित प्रकरणों का मौके पर निस्तारण कर आमजन को राहत प्रदान की जा रही है। राजस्व विभाग बना त्वरित समाधान का माध्यम राजस्व विभाग द्वारा शिविरों में 16 जून तक ई-धरती पोर्टल के माध्यम से 20,057 नामांतरण, 5,039 सीमाज्ञान एवं पत्थरगढ़ी प्रकरण तथा 2,855 आपसी सहमति से विभाजन प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा 42,216 जाति, मूल निवास एवं हैसियत प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसी प्रकार 19,035 राजस्व अभिलेखों का शुद्धिकरण, 1,817 रास्ता प्रकरणों का समाधान तथा 815 अतिक्रमण,749 गैर खातेदारी से खातेदारी संबंधी प्रकरणों में कार्यवाही की गई। शिविरों के माध्यम से 39,267 किसान फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए। पंचायत राज विभाग ने पट्टा वितरण में बनाया नया रिकॉर्ड पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीणों को स्वामित्व अधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं। अभियान अवधि में 87,626 पट्टे जारी किए गए। इनमें राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के तहत बड़ी संख्या में पात्र परिवारों को लाभ मिला। इसी प्रकार 5,369 विमुक्त , घुमन्तू एवं अर्द्ध-घुमंतू परिवारों को पट्टे जारी किये गये। साथ ही 7,762 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय स्वीकृतियां,2,038 सामुदायिक स्वच्छता परिसर को ​क्रियाशील बनाया, 9,325 सोख्ता गड्ढों एवं मैजिक पिटों की स्वीकृतियां तथा 10,921 सोख्ता गड्ढों एवं मैजिक पिटों की सफाई की गई। साथ ही 5,12,161 ग्रामीणों को ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 की जानकारी प्रदान की गई। स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं गांव-गांव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविरों में 2 लाख 83 हजार 745 लोगों का उपचार किया गया। 1 लाख 84 हजार 250 व्यक्तियों की एनसीडी स्क्रीनिंग, 1 लाख 31 हजार 563 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग, 57,821 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग तथा 8,747 बच्चों का टीकाकरण किया गया। इसी प्रकार 12,165 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच एवं 3,471 महिलाओं की ​सिकल सैल रोग की स्क्रीनिंग की गई। इसके अतिरिक्त 20,221 पीएमजेवाई कार्ड वितरित किए गए और 1,724 पोषण किटें प्रदान की गईं। पशुपालन एवं कृषि क्षेत्र को मिला विशेष लाभ पशुपालन विभाग द्वारा 3 लाख 38 हजार 528 पशुओं को कृमिनाशक दवा, 2 लाख 8 हजार से अधिक पशुओं का एच.एस ,बी.क्यू. एवं पी.पी.आर. टीकाकरण,2,07,491 पशुओं का एमएफडी टीकाकरण तथा 39,912 पशुओं का मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत बीमा किया गया। वहीं कृषि एवं उद्यानिकी विभाग ने 3 लाख 33 हजार 472 किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की तथा 25,416 प्रधानमंत्री फसल बीमा पॉलिसियां वितरित कीं। ऊर्जा विभाग ने बिजली संबंधी शिकायतों का किया त्वरित समाधान ऊर्जा विभाग द्वारा 9,504 विद्युत आपूर्ति बाधा संबंधी शिकायतों, 7,444 ढीले तार एवं खंभों से संबंधित समस्याओं, तथा 2,191 लोड संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया गया। साथ ही 1,344 नए विद्युत कनेक्शन जारी किए गए। इसी प्रकार 1,465 त्रुटिपूर्ण मीटर एवं 988 ट्रान्सफॉर्मर संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया गया। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का मिला लाभ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 4,381 पालनहार सत्यापन, 702 सामाजिक सुरक्षा पेंशन सत्यापन, तथा 354 संयुक्त सहायता योजना आवेदनों का निस्तारण किया गया। दिव्यांगजन हितार्थ विभिन्न योजनाओं के आवेदन भी स्वीकृत किए गए। खाद्य, पेयजल एवं शिक्षा सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति खाद्य विभाग ने 7,033 एनएफएसए परिवारों की ई-केवाईसी, 5,962 नए पात्र परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ने तथा 5,124 राशन कार्डों की एलपीजी आईडी मैपिंग का कार्य किया। जल संसाधन विभाग ने मानसून पूर्व तैयारियों के अंतर्गत 168 जल भराव के क्षेत्रों, 126 जल निकासी मार्गों, 103 बांधों की मरम्मत एवं चिन्हांकन से संबंधित अनेक प्रस्ताव तैयार किए। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 4,812 पेयजल गुणवत्ता जांच, 3,728 पाइप लाइन लीकेज मरम्मत, 3,078 हैंडपंप मरम्मत तथा 4,441 अन्य पेयजल शिकायतों का निस्तारण किया गया। शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए 1 लाख 70 हजार 133 विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित किया। वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को दिया जनआंदोलन का स्वरूप ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया। विभाग द्वारा 16 जून तक 2 लाख 29 हजार 873 पौधों का वितरण किया गया। साथ ही वन भूमि संबंधी प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष प्रयास करते हुए 368 परिवादों का समाधान किया गया तथा राजस्व विभाग के सहयोग से वन भूमि पर अतिक्रमण चिन्हांकन एवं सीमांकन संबंधी कार्यवाही भी संपादित की गई। शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के प्रति भी जागरूक किया गया। परिवहन विभाग ने पात्र नागरिकों को प्रदान की राहत परिवहन विभाग द्वारा शिविरों में विशेष योग्यजन एवं अन्य पात्र नागरिकों को परिवहन सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्य किया गया। विभाग ने 632 विशेष योग्यजन पास तथा 2,162 अन्य पात्र नागरिकों को पास जारी कर आवागमन की सुविधा सुनिश्चित की। शिविरों में आमजन को परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं एवं सुविधाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। आयुर्वेद विभाग की सेवाओं का लाभ हजारों ग्रामीणों को- आयुर्वेद विभाग द्वारा आयोजित चिकित्सा परामर्श शिविरों में ग्रामीणों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। विभाग ने 78 हजार 688 रोगियों को आयुर्वेदिक परामर्श प्रदान किया तथा 45 हजार 248 रोगियों को औषधियां वितरित कीं। आयुर्वेद विशेषज्ञों ने लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करते हुए रोगों की रोकथाम संबंधी उपयोगी जानकारी भी दी। सैनिक कल्याण विभाग ने पूर्व सैनिकों एवं आश्रितों की समस्याओं का किया समाधान सैनिक कल्याण विभाग द्वारा शिविरों में पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं एवं उनके आश्रितों को राहत प्रदान की गई। विभाग ने 113 पेंशन संबंधी प्रकरणों का निस्तारण किया तथा 39 पूर्व सैनिकों एवं विधवाओं के पहचान पत्र जारी किए। इसके अतिरिक्त 1,963 नागरिकों को केंद्र एवं राज्य सरकार की सैनिक कल्याणकारी योजनाओं एवं नवीन निर्णयों की जानकारी उपलब्ध कराई गई। सहकारिता विभाग ने किसानों को दी वित्तीय सशक्तिकरण की … Read more

भजनलाल सरकार ने नागरिक सुरक्षा कोर गठन और NIA कोर्ट को दी मंजूरी

जयपुर मुख्‍यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्‍थान में रेयर अर्थ एल‍िमेंट्स के एक्‍सप्‍लोरेशन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए माइनिंग लीज के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृत दे दी है. बाड़मेर की पचपदरा और शेरगढ़ के नवातला और देवीगढ़ में 207.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रेयर अर्थ एलिमेंट्स खनिज ब्लॉक के एक्सप्लोरेशन को मंजूरी दी है. मैसर्स सेन्ट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट को एक्सप्लोरेशन लाइसेंस म‍िला है. नागरिक सुरक्षा कोर का गठन सीएम भजनलाल शर्मा ने 8 ज‍िलों में नागर‍िक सुरक्षा कोर का गठन क‍िया है. बालोतरा, डीडवाना-कुचामन, फलौदी, सलूंबर, खैरथल-तिजारा, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और ब्यावर में ‘नागरिक सुरक्षा कोर' का गठन करने की हरी झंडी म‍िल गई है. जिले में आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी. NIA कोर्ट की स्थापना होगी एनआईए मामलों के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना की मंजूरी दी है. सीएम ने राज्य में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) मामलों की सुनवाई के ल‍िए विशेष न्यायालय की स्थापना करने की अनुमत‍ि दी है. इससे राज्य में न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और प्रभावी होगी. मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता मिलेगी. इन निर्णयों से खनन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सहभागिता सुनिश्चित होगी. मुख्यमंत्री ने समय से लागू करने के न‍िर्देश द‍ि‍ए, ज‍िससे लोगों को लाभ म‍िल सके.  

हल्दीघाटी इतिहास पर सवाल, मोहन भागवत बोले महाराणा प्रताप विजयी रहे

उदयपुर  महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उदयपुर के गांधी ग्राउंड में आयोजित 'राष्ट्र चेतना संकल्प सभा' में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इतिहास को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में जीत महाराणा प्रताप की ही हुई थी. इतिहासरों की व्याख्या पर सवाल डॉ. भागवत ने इतिहासकारों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर वर्षों से जो तथ्य परोसे गए हैं, वे वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि जब मुगलकालीन इतिहासकार स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि युद्ध में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था, तो फिर जीत किसकी हुई, इसका उत्तर स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप की जयंती पूरे विश्व में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई जाती है. यह इस बात का प्रमाण है कि जनता सही इतिहास को भली-भांति जानती है. स्वाभिमान का प्रतीक है भारत का इतिहास सरसंघचालक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास कभी भी गुलामी का इतिहास नहीं रहा है बल्कि यह आक्रमणकारियों के विरुद्ध निरंतर संघर्ष और स्वाभिमान का इतिहास है. महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल उनकी सेना का नहीं, बल्कि पूरे समाज का था. उस समय अकबर के पास संसाधनों और शस्त्रों की विशाल शक्ति थी, फिर भी महाराणा प्रताप ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया. महापुरुषों से सुरक्षित है अस्मिता सभा के दौरान उन्होंने बप्पा रावल और ललितादित्य जैसे महान नायकों को नमन करते हुए कहा कि इन्हीं महापुरुषों के त्याग और बलिदान के कारण आज भारत की संस्कृति और अस्मिता सुरक्षित है. डॉ. भागवत ने कहा कि प्रताप का अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने बल देकर कहा कि वास्तविक इतिहास को सामने लाना आवश्यक है ताकि देश का युवा अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ सके

प्री-मानसून मेंटेनेंस पूरा करने पर जोर, बिजली हादसों से बचाव की तैयारी

जयपुर मानसून के दौरान विद्युत अभियंताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के साथ ही विद्युत हादसे रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। चेयरमैन डिस्कॉम्स एवं जयपुर विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक सुश्री आरती डोगरा ने बुधवार को विद्युत भवन में अभियंताओं से कहा कि प्री-मानसून मेंटिनेंस के सभी कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिए जाएं। बैठक में चेयरमैन डिस्कॉम्स ने कहा कि किसी भी प्रकार के शॉर्ट सर्किट अथवा करंट लीकेज से जनहानि एवं पशुधन के जान की रक्षा करना सभी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में विद्युत तंत्र का समुचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। डिस्कॉम्स चेयरमैन ने कहा कि भारी बारिश या तेज हवा से बिजली की लाइनें प्रभावित न हों। इसके लिए लाइनों के समीप से पेड़ों की टहनियों की छंटाई की जाए। टेढ़े एवं जर्जर पोल अविलम्ब बदलें और झूलते तारों को तुरंत कसा जाए। विद्युत पोल एवं वितरण ट्रांसफार्मर की अर्थिंग की जांच करने के साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर्स के आसपास फेंसिंग की जाए ताकि किसी प्रकार के हादसों की गुंजाइश न रहे। उन्होंने ग्रिड सब स्टेशनों में ट्रांसफॉर्मरों के ऑयल लेवल मेंटेन करने और उसमें नमी को रोकने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी इंतजाम सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। रहें 24 घंटे एक्टिव, फॉल्ट रिपेयरिंग टीम रहें तैनात डिस्कॉम्स चेयरमैन ने कहा कि फॉल्ट या ट्रिपिंग की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सब-डिवीजन स्तर पर फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम एक्टिव रहें। आवश्यक मैटेरियल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। बैठक में निदेशक तकनीकी श्री आरके शर्मा, जयपुर शहर वृत्त उत्तर एवं दक्षिण के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, ओएंडएम तथा एचटीएम के सहायक अभियंता मौजूद रहे।

कुसुम योजना के तहत लोन प्रक्रिया सरल करने पर डिस्कॉम्स की बैठक

लखनऊ पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान) योजना के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने के लिए राजस्थान डिस्कॉम्स ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके अन्तर्गत डिस्कॉम्स चेयरमैन एवं जयपुर विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक सुश्री आरती डोगरा ने ऋण लेने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और बाधाओं को दूर करने के लिए बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा सोलर पावर डवलपर्स के साथ बुधवार को विद्युत भवन में बैठक की। इस दौरान चेयरमैन डिस्कॉम्स ने कहा कि पीएम-कुसुम भारत सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय महत्व की योजना है। इसका उद्देश्य ऊर्जा के क्षेत्र में किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और कृषि में हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। ऐसे में इस योजना की सफलता में बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लोनिंग की प्रक्रिया को सरल बनाएं डिस्कॉम्स चेयरमैन ने बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे सोलर पावर डवलपर्स के ऋण आवेदनों पर सकारात्मक रुख अपनाएं। उन्होंने कहा कि बैंक अपनी आवश्यक औपचारिकताएं और प्रक्रिया जरूर पूर्ण करें, लेकिन पात्र आवेदकों को जटिल लोन मिलने में बेवजह देरी न हो। प्रक्रिया को जितना हो सके सुगम और त्वरित बनाया जाए ताकि पात्र डवलपर्स को समय पर वित्तीय मदद मिल सके। इससे प्लांट्स के स्थापित होने की रफ्तार और तेज होगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना में राजस्थान देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में कुसुम कम्पोनेंट-ए एवं कम्पोनेंट-सी में 4468 मेगावाट के 2034 प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। अब हर महीने जोनल स्तर पर लगेंगे शिविर बैठक में निर्णय किया गया कि अब जुलाई माह से प्रत्येक माह निगम के जोनल स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में बैंकों के प्रतिनिधि, सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए ऋण आवेदन करने वाले डवलपर्स तथा डिस्कॉम के अधिकारियों की उपस्थिति में ऋण आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करेंगे। बैठक में डवलपर्स ने कोलैटरल सिक्योरिटी, लीज रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन, खाता विभाजन, राइट ऑफ वे आदि प्रक्रियाओं के कारण लोन मिलने में आ रही अपनी व्यावहारिक समस्याएं बताईं। बैंकिंग प्रतिनिधियों ने कहा कि कई बार डवलपर्स के स्तर से भी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने की अनदेखी की जाती है। इस कारण ऋण स्वीकृति में स्वाभाविक रूप से विलम्ब होता है। सुश्री डोगरा ने बैंक प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे कुसुम योजना के विशिष्ट मॉडल को ध्यान में रखते हुए लोन की शर्तों में व्यावहारिक लचीलापन लाएं। बैंकिंग संस्थानों के अधिकारियों ने चेयरमैन को आश्वस्त किया कि वे योजना के महत्व को समझते हुए ऋण प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाएंगे तथा लंबित आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करेंगे।