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चित्तौड़गढ़: भक्तों की ‘पार्टनरशिप भक्ति’ से बढ़ा सांवलिया सेठ का खजाना

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के प्रसिद्ध श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में इस साल आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। पिछले एक साल में मंदिर के भंडार में 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है, जो पिछले 34 वर्षों में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेकिन इस दान की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें एक बड़ा हिस्सा 'भक्ति के मुनाफे' का है। दुनिया के सबसे अनोखे 'बिजनेस पार्टनर' भक्तों के बीच मान्यता है कि सांवलिया जी यहां 'सेठ' के रूप में विराजमान हैं। यही कारण है कि देशभर के बड़े कारोबारी और शेयर बाजार के खिलाड़ी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं। यहां दान केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि 'पार्टनरशिप डीड' के तहत आता है। स्टाम्प पेपर पर होती है 'साझेदारी' यह जानकर आपको हैरानी होगी कि भक्त यहां बाकायदा स्टाम्प पेपर पर पार्टनरशिप करार बनवाकर लाते हैं। मंदिर में इस तरह के पत्र चढ़ाए जाते हैं- 'मैं निवासी जयपुर, यह साझेदारी करार श्री सांवलिया मंदिर के साथ करता हूं कि मेरे शेयर बाजार और व्यापारिक स्रोतों से होने वाले मुनाफे में 10% हिस्से की साझेदारी ठाकुर जी की रहेगी।' जब मन्नत पूरी होती है और व्यापार चमकता है, तो भक्त अपनी कंपनी के लेटर हेड पर पूरी जानकारी लिखकर लाखों-करोड़ों की राशि ठाकुर जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं। 34 साल का रिकॉर्ड टूटा, मुनाफे में डूबे भक्त भक्तों का अटूट विश्वास है कि एक बार अगर 'सांवलिया सेठ' को अपना पार्टनर बना लिया, तो व्यापार कभी घाटे में नहीं जाता। जैसे-जैसे व्यापार बढ़ता है, मंदिर के भंडार में आने वाली 'प्रॉफिट शेयरिंग' भी बढ़ती जाती है। इसी का नतीजा है कि इस वित्तीय वर्ष में चढ़ावे ने 337 करोड़ का जादुई आंकड़ा छू लिया है।  

NET-PhD धारकों का आक्रोश बढ़ा, संविदा भर्ती को बताया भविष्य से खिलवाड़

जयपुर  राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा कॉलेजों में 3,540 पदों पर 'टीचिंग एसोसिएट' की संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शिक्षित युवाओं में आक्रोश भर दिया है. युवा इस योजना को 'शिक्षावीर' करार देकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. नेट और PhD धारकों के साथ धोखा विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि जिन्होंने बरसों मेहनत कर NET, JRF और PhD जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, उनके भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. युवाओं का तर्क है कि सरकार स्थाई भर्ती करने के बजाय अस्थायी नियुक्तियां कर रही है, जिससे उच्च शिक्षा का स्तर गिरेगा. छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों में स्थाई आचार्य नहीं होंगे, तो शोध (Research) और नए विमर्श पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की स्किल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा. वेतन पर भड़के युवा भर्ती के विरोध का सबसे बड़ा कारण तय किया गया मानदेय है. टीचिंग एसोसिएट के लिए मात्र 28,500 रुपये वेतन तय किया गया है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक से भी कम है. UGC के मानकों के अनुसार, एक सहायक आचार्य की बेसिक पे ही 57,700 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में आधे वेतन पर उच्च शिक्षित युवाओं से काम कराना उनका अपमान है. खाली पदों से जूझते विश्वविद्यालय प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत पहले ही जर्जर है. कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 32% पद खाली पड़े हैं. प्रदेश की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने घेरी सरकार अब इस मुद्दे पर सियासत भी गर्मा गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सेना में 'अग्निवीर' की तर्ज पर अब सरकार 'शिक्षावीर' और 'डॉक्टरवीर' बनाकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है. युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती वापस लेकर स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा.

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप, सीनियर IPS पर FIR से हड़कंप

जयपुर राजस्थान पुलिस के एक सीनियर आईपीएस अफसर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ है। जयपुर शहर के मालवीय नगर थाने 29 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर एक महिला के पत्र के आधार पर दर्ज की गई है। महिला ने डाक के जरिए पुलिस थाने पत्र भेजा था। इस पत्र में आरोप लगाया कि आईपीएस किशन सहाय मीणा ने शादी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया। जयपुर आयुक्तालय की एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा इस मामले की जांच कर रही है। मारपीट और धमकी का भी लगया आरोप पीड़िता महिला की उम्र करीब 53 वर्ष है। उसका आरोप है कि आईपीएस किशन सहाय मीणा ने शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया। कई दिनों तक शारीरिक संबंध बनाए। बाद में मिलना कम कर दिया। जब शादी के लिए कहा तो मारपीट करने लगा। साथ ही यह धमकी भी देता रहा कि अगर किसी से शिकायत की तो वे उसे जान से मरवा देंगे। मारपीट, धमकी और दुष्कर्म के गंभीर आरोपों के बाद मालवीय नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सफाई में यह कहा आईपीएस ने दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद सीनियर आईपीएस किशन सहाय मीणा का कहना है कि एक साजिश के तहत उन्हें फंसाने के लिए मुकदमा दर्ज कराया गया है। मीणा का कहना है कि वे पिछले दस साल से विज्ञानवाद का प्रचार करते हैं। ऐसे में अंध विश्वास में डूबे लोग विज्ञानवाद को हजम नहीं कर पा रहे। उन्हें बदनाम करने के लिए षड़यंत्र पूर्वक एफआईआर दर्ज कराई है। मीणा ने यह भी कहा कि महिला ने उन्हें कई बार मैसेज किए। चैट से स्पष्ट है कि उसने ब्लैकमेल करने के लिहाज से मुकदमा दर्ज कराया है। कौन हैं आईपीएस किशन सहाय मीणा आईपीएस किशन सहाय मीणा अलवर जिले के रहने वाले हैं। वे राजस्थान पुलिस सेवा में अधिकारी के तौर पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2013 में पदोन्नत होकर आईपीएस बन गए। आईपीएस बनने के बाद वे टोंक जिले के एसपी रहे। जीआरपी और क्राइम ब्रांच में भी एसपी के तौर पर कार्य किया। वर्तमान में वे पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी मानवाधिकार प्रकोष्ठ के पद पर पुलिस मुख्यालय में कार्यरत हैं। लोकसभा चुनाव में बिना सूचना के ड्यूटी छोड़ी, सस्पेंड हुए वर्ष 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान झारखंड में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। वे झारखंड गए लेकिन बिना सूचना के वापस जयपुर लौट आए। बिना किसी सूचना के ड्यूटी छोड़ने पर चुनाव आयोग ने इसे बड़ी गंभीर लापरवाही माना। चुनाव आयोग की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने आईपीएस किशन सहाय मीणा को सस्पेंड कर दिया था। भगवान और धर्म को लेकर उठाए थे सवाल आईपीएस किशन सहाय मीणा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। अपने फेसबुक पेज पर वे आए दिन पोस्ट करते रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने धर्म और भगवान के अस्तित्व को लेकर पोस्ट किया जिससे काफी विवाद हो गया था। उन्होंने लिखा है कि 'धार्मिक अंधविश्वास' जैसे भगवान, अल्लाह, गॉड, वाहेगुरु, फरिश्ते, देवी-देवता, स्वर्ग-नरक, जन्नत-जहन्नुम आदि का सिर्फ एक प्रकार से नहीं बल्कि, बहुत प्रकार से खंडन किया जा सकता है, क्योंकि ये हैं ही नहीं। उनके मुताबिक, 'ये सिर्फ कल्पना मात्र और मनगढ़ंत हैं।' विज्ञान को बताया था तरक्की का रास्ता आईपीएस किशन सहाय मीणा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर विज्ञानवाद का प्रचार करते रहे हैं। साथ ही ढोंगी बाबाओं के झांसों से दूर रहने की सलाह भी देते रहते हैं। उनका कहना है कि धर्म और भगवान के भरोसे तरक्की संभव नहीं है। विज्ञान ही तरक्की का सही रास्ता है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि लगभग सभी भारतीयों की प्रबल इच्छा है कि भारत सुपर पावर बने लेकिन यह केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विज्ञानवाद से ही संभव है। धार्मिक-महजबी अंधविश्वास भटकने का मार्ग है जिसे समाज और देश को त्यागना होगा।

12 याचिकाओं पर बहस के बाद कोर्ट ने रखा आदेश सुरक्षित, पक्षकार तय होंगे

अजमेर अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे पर जिला कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई. दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर दायर याचिका पर शनिवार (2 मई) को जिला न्यायालय में सुनवाई हुई. इस दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने दावे के समर्थन में कानूनी तर्क और दस्तावेज पेश किए. हिंदू सेना और महाराणा प्रताप सेना के पदाधिकारियों द्वारा याचिका दायर की गई है. सुनवाई के दौरान करीब 12 अलग-अलग याचिकाओं पर बहस हुई, जिनमें कई पक्षकारों ने खुद को इस मामले में शामिल करने की मांग की. मामले से जुड़ी 12 याचिकाओं पर बहस के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है. अब तय होगा- केस में पक्षकार कौन? हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया, "अदालत ने सभी नई अर्जियों पर सुनवाई की और सभी पक्षों को विस्तार से सुना. अब देखते हैं कौन पक्षकार बनता है और किसे खारिज कर दिया जाता है." मामले में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता संदीप कुमार ने कहा कि कई याचिकाओं का विरोध किया गया है, क्योंकि उनमें पर्याप्त तथ्य और आधार नहीं हैं. अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे को लेकर दायर याचिका पर शनिवार को जिला न्यायालय में विस्तृत सुनवाई हुई। याचिका हिंदू सेना और महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्षों द्वारा दायर की गई है। सुनवाई के दौरान दरगाह के दीवान और खादिमों ने भी पक्षकार बनने की मांग की। महाराणा प्रताप सेना ने भी पेश की याचिका विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता संदीप कुमार ने कहा कि 2 मई का दिन बहुत महत्वपूर्ण रहा और हमारे पक्ष के लिए खासा अहम रहा. अधिवक्ता के मुताबिक, एक याचिकाकर्ता फरार है और उसके खिलाफ नॉन-बिलेबल वारंट जारी है. एक याचिकाकर्ता ऐसे भी थे जो वादी पक्ष का सहयोग करना चाहते थे- जैसे महाराणा प्रताप सेना के राजवर्धन सिंह, लेकिन वे तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं कर सके. दरगाह की ओर से भी आवेदन पेश दरगाह के दीवान और खादिमों की ओर से भी पक्षकार बनने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया. अधिवक्ता सिद्धार्थ ने कहा, "मैंने दरगाह दीवान साहब की ओर से पक्षकार बनाए जाने के प्रार्थना पत्र की पैरवी की थी. सभी अर्ज़ियों को सुनकर कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है. उम्मीद है कि आगामी तारीख पर सुनाया जाएगा." अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने सभी आवेदनों पर विचार करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई में फैसला सुनाया जा सकता है. वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप सेना की ओर से राजवर्धन सिंह परिहार मुख्य याचिकाकर्ता हैं. इस मामले में अन्य लोगों ने भी आवेदन लगाए थे.

3 मई को नीट छात्रों के लिए दो स्पेशल ट्रेनें, हजारों परीक्षार्थियों को राहत

चूरू  देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर रेलवे ने छात्रों को बड़ी राहत दी है। 3 मई को होने वाली नीट परीक्षा के मद्देनजऱ उत्तर पश्चिम रेलवे ने खास तौर पर दो अनारक्षित स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है, जिससे हजारों छात्रों को आवागमन में राहत मिलेगी। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, ये ट्रेनें खास तौर पर उन छात्रों के लिए चलाई जा रही हैं जो परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुंचने में दिक्कत महसूस करते हैं। नीट छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन दरअसल, तीन मई को होने वाली नीट छात्रों के लिए रेलवे की ओर से सौगात दी गई है। उत्तर पश्चिम रेलवे मंडल सीपीआरओं अमित सुदर्शन ने बताया कि नीट परीक्षा को देखते हुए फिलहाल छात्रों की सुविधा के लिए राजाधानी जयपुर से अलवर और शेखावाटी अंचल के चूरू से जयपुर अनारक्षित नीट एग्जाम स्पेशल रेल सेवाओं का संचालन करने का ऐलान किया गया है। दो ट्रेनें परीक्षा वाले दिन तीन मई को संचालित होगी जिससे नीट छात्रों को आवगमन में बड़ी राहत मिलेगी। बताया जा रहा है कि शनिवार को दिन में नीट छात्रों के मद्देनजर राजस्थान के अन्य इलाकों के बीच भी परीक्षा एग्जाम स्पेशल चलाने की घोषणा की जा सकती है। एग्जाम स्पेशल ट्रेनों का संचालन और रूट     3 मई, रविवार को चलेगी चूरू से वाया सीकर होकर जयपुर स्पेशल ट्रेन (09717) यह ट्रेन शेखावाटी क्षेत्र के छात्रों के लिए खुशखबरी के रुप में है। यह ट्रेन चूरू से सुबह 06:10 बजे चलेगी जो सीकर सुबह 08:15 बजे बजे पहुंचेगी और दस मिनट के ठहराव के बाद 08:20 बजे आगे के स्टेशनों के लिए प्रस्थान कर जाएगी। यह ट्रेन रास्ते में विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव करती हुई रेलवे स्टेशन जयपुर सुबह 11:00 बजे पहुंचेगी इन स्टेशनों पर करेगी ठहराव यह ट्रेन बिसाऊ, रामगढ़ शेखावाटी, फतेहपुर शेखावाटी, लक्ष्मणगढ़, सीकर, पलसाना, रींगस, गोविंदगढ़, चौमूं सामोद, ढेहर का बालाजी जैसे स्टेशनों पर रुकेगी। 12 डिब्बों वाली इस ट्रेन में 10 साधारण कोच होंगे, जिससे अधिक से अधिक छात्र सफर कर सकेंगे। परीक्षा देकर लौटने वाले छात्रों के लिए को भी राहत तीन मई को ही चलने वाली यह ट्रेन राजधानी जयपुर, दौसा सहित मत्स्य क्षेत्र के उन छात्रों के लिए राहतवाली साबित होगी जो दिन में एग्जाम देकर वापस अपने गंतव्य की ओर रेल सेवा मार्ग का लाभ उठाना चाहेंगे। जानकारी के अनुसार यह ट्रेन राजधानी जयपुर जंक्शन से शाम 07:10 बजे रवाना होगी जो दौसा रात 08:22 बजे पहुंचेगी। यहा चार मिनट का ठहराव 08:24 बजे आगे के स्टेशनों के प्रस्थान कर जाएगी। रास्ते में तय स्टेशनों पर ठहराव करते हुए रात 10:55 बजे अलवर स्टेशन पहुंचेगी।     इन स्टेशनों से होकर चलेगी यह ट्रेन     यह ट्रेन जयपुर जंक्शन से चलकर रास्ते में गांधीनगर जयपुर, जगतपुरा, खातीपुरा, बस्सी, दौसा, बांदीकुई, बसवा, राजगढ़, मालाखेड़ा स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें भी 12 कोच (10 साधारण + 2 गार्ड) होंगे। रोडवेज बसों में तो फ्री यात्रा यहा आपको बताते चले कि राजस्थान सरकार ने तो तमाम प्रतियोगी छात्रों को बजट में प्रावधान रखकर Rajasthan State Road Transport Corporation यानि रोडेवज की बसों में पहले से परीक्षा से 1 दिन पहले और 1 दिन बाद तक सिर्फ एडमिट कार्ड दिखाकर मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का नियम बना रखा है। ऐसे में नीट छात्रों को घोषित समय अवधि में लाभ मिलने की बात कही जा रही हैं। जबकि परीक्षा स्पेशल ट्रेनों में परीक्षार्थी को टिकट लेकर सफर करना होगा।  

राजस्थान पुलिस में हड़कंप, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग आईजी अचानक हुए गायब

जयपुर राजस्थान पुलिस महकमे में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। अमूमन अपराधी गायब होते हैं और पुलिस उन्हें तलाशती है, लेकिन यहां तो 'कानून के रखवाले' और एक उच्च पदस्थ आईपीएस अधिकारी ही रहस्यमयी तरीके से लापता हैं। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नवनियुक्त आईजी कालूराम रावत पिछले साढ़े तीन महीने से ड्यूटी से 'गायब' हैं। दिलचस्प बात यह है कि वे सिर्फ एक दिन की छुट्टी का मैसेज भेजकर गए थे, जो आज तक खत्म नहीं हुई। मैसेज में लिखा 'बुखार है', फिर नहीं लौटे पूरा मामला किसी फिल्मी पटकथा जैसा है। आईपीएस कालूराम रावत जुलाई 2025 में डीआईजी (पुलिस हाउसिंग) के पद पर तैनात थे। 12 जनवरी को उन्होंने अपने बॉस एडीजी (हाउसिंग) भूपेंद्र साहू को एक छोटा सा मोबाइल मैसेज भेजा। मैसेज में लिखा था कि 'बुखार होने के कारण आज कार्यालय नहीं आ सकूंगा।' विभाग को लगा कि साहब अगले दिन लौट आएंगे, लेकिन उस एक दिन के बाद से रावत न तो दफ्तर लौटे और न ही किसी के संपर्क में आए। बिना जॉइनिंग के ही हो गया प्रमोशन और तबादला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हैरानी की बात यह है कि उनकी अनुपस्थिति के दौरान ही विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया हुई और वे डीआईजी से आईजी बन गए। 23 फरवरी को सरकार ने उनका तबादला आईजी (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के महत्वपूर्ण पद पर कर दिया। नियमानुसार उन्हें पुराने पद से रिलीव होकर नए पद का कार्यभार संभालना था, लेकिन साढ़े तीन महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने नए दफ्तर में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। मुख्यालय ने थमाया 'रिकॉल नोटिस', फोन भी बंद जब आईजी रावत लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं लौटे, तो एडीजी (सिविल राइट्स व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) लता मनोज ने डीजीपी ऑफिस को लिखित में इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा ने उन्हें 'रिकॉल नोटिस' जारी किया है। नोटिस में उन्हें तुरंत हाजिर होने की चेतावनी दी गई है, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वर्तमान में उनका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है और पुलिस मुख्यालय का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जूनियर अफसरों में बढ़ी हलचल अधिकारी के इस तरह अचानक ओझल हो जाने से महकमे के जूनियर अफसर और कर्मचारी भी अचंभे में हैं। चर्चा है कि रावत पहले हमेशा अपनी छुट्टियों की विधिवत सूचना देते थे, लेकिन इस बार सिर्फ एक मैसेज ने पूरे मुख्यालय को उलझन में डाल दिया है। अधिकारी और उनके मातहत अब अपने-अपने स्तर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर साहब गए तो गए कहां?  

राजस्थान में मेट्रो विस्तार तेज, जयपुर में 10 नए एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे

जयपुर  जयपुर मेट्रो के फेज-2 का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है. अब तक जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए बैठकों का दौर चल रहा था. हाल ही में केंद्र ने जयपुर मेट्रो के सेकंड फेज को मंजूरी दी. दूसरे फेज में 41 किलोमीटर मेट्रो जोड़ने का काम होने वाला है. हालांकि भविष्य में इसे 125 किलोमीटर बनाने का है. जो साल 2055 तक का टारगेट है. जबकि 41 किलोमीटर मेट्रो को 2031 तक पूरा करने का टारगेट है. इस बीच केंद्र सरकार से 918 करोड़ की मंजूरी मिली है जिससे 12 किलोमीटर कॉरिडोर का निर्माण कराया जाएगा. सीएम भजनलाल शर्मा के निर्देश पर जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण को लेकर प्रक्रिया में तेजी आ गई है. राजधानी में सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ मानी जा रही इस परियोजना के तहत अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है. 10 एलिवेटेड स्टेशनों का डिजाइन और निर्माण जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने फेज-2 के पहले पैकेज के लिए 918.04 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों हेतु स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है. इस पैकेज में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल गोशाला तक करीब 12 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण शामिल है. इसके तहत एलिवेटेड वायाडक्ट और 10 एलिवेटेड स्टेशनों का डिजाइन और निर्माण किया जाएगा. इस कॉरिडोर में प्रहलादपुरा, मानपुरा, बीलवा कलां, बीलवा, गोनेर मोड़, सीतापुरा, जेईसीसी, कुंभा मार्ग, हल्दीघाटी गेट और पिंजरापोल गोशाला स्टेशन शामिल हैं. इसके साथ ही मेट्रो डिपो तक जाने वाली स्पर लाइन का निर्माण भी इसी पैकेज का हिस्सा होगा. 29 किलोमीटर के लिए भी जल्द निविदा प्रक्रिया शुरू मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कुल 41 किलोमीटर के प्रस्तावित नेटवर्क में से शेष 29 किलोमीटर के लिए भी जल्द निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि पूरे प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके. गौरतलब है कि इस मेट्रो परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 13,037.66 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी. इसके बाद राज्य स्तर पर उच्च स्तरीय बैठकों में इसके तेजी से क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए थे. अब स्वीकृति पत्र जारी होने के साथ ही जयपुर मेट्रो फेज-2 के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे शहर के यातायात ढांचे में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है.

राजस्थान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट और निवेश फ्रॉड गैंग के 3 आरोपी गिरफ्तार

कोटा राजस्थान के कोटा ग्रामीण पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. जिसमें पिछले 10 दिनों में 4 प्रकरण दर्ज कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह से जुड़े बैंक खातों में देशभर में करीब 70 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं. डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर बिछाया जाल  पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर के मुताबिक, यह गिरोह ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग, शेयर मार्केट निवेश, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन टास्क पूरा करने के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर ठगी करता था.आरोपी नवनीत विजयवर्गीय कोटा के महावीर नगर का रहने वाला है जबकि सलमान अहमद तलवंडी क्षेत्र का रहने वाला है वही एक नाबालिग को भी निरूद्ध किया गया है . आरोपी भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल करते थे, जिन्हें बाद में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किया जाता था. पेंशन के बहाने 58 करोड़ का 'खूनी' लिंक जांच में सामने आया कि अलग-अलग मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी की गई. एक मामले में पेंशन चालू करवाने के बहाने सिम और बैंक डिटेल लेकर करीब 58 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से लिंक मिला. वहीं अन्य मामलों में 1.69 करोड़, 71 लाख और करीब 9.71 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन सामने आए हैं. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल फोन और 3 सिम कार्ड जब्त किए हैं. गिरफ्तार आरोपियों में कोटा शहर और ग्रामीण क्षेत्र के युवक शामिल हैं, जो व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए देशभर के साइबर गिरोहों से जुड़े हुए थे.  साइबर सेल ने किया खुलासा इस कार्रवाई में सुल्तानपुर, इटावा, दीगोद और रामगंजमंडी थाना पुलिस सहित साइबर सेल की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया. पुलिस का कहना है कि अभियान लगातार जारी रहेगा और साइबर ठगों के पूरे नेटवर्क को खत्म किया जाएगा.

कोचिंग सिटी कोटा में दर्दनाक घटना, नीट परीक्षा से एक दिन पहले छात्र ने किया सुसाइड

 कोटा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 (NEET UG 2026) के आयोजन से ठीक एक दिन पहले राजस्थान के कोटा से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रहे छात्र दीक्षित प्रसाद ने छत से कूदकर आत्महत्या (Dixit Prasad Suicide) कर ली. मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला दीक्षित पिछले दो साल से कोटा में रहकर कड़ी मेहनत कर रहा था. पुलिस ने परिजनों को दी सूचना घटना की सूचना मिलते ही कुन्हाड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया. बताया जा रहा है कि दीक्षित ने हॉस्टल की छत से छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या छात्र कल होने वाली परीक्षा के तनाव में था या आत्महत्या के पीछे कोई और कारण था. पुलिस ने अल्मोड़ा में छात्र के परिजनों को सूचना दे दी है और उनके आने के बाद ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाएगी. रविवार को होने वाली परीक्षा से ठीक पहले उठाए गए इस खौफनाक कदम ने एक बार फिर कोचिंग सिटी में छात्रों के मानसिक दबाव और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गूगल मैप के भरोसे न रहें छात्र बता दें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कल यानी 3 मई को होने वाली परीक्षा के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है. एजेंसी ने परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को सख्त हिदायत दी है कि वे परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए पूरी तरह गूगल मैप पर निर्भर न रहें. एनटीए के मुताबिक, कई परीक्षा केंद्रों की भौगोलिक स्थिति गूगल मैप पर स्पष्ट या सटीक नहीं है. ऐसे में किसी भी तरह की देरी या असुविधा से बचने के लिए छात्र अपने एडमिट कार्ड पर दिए गए पते की पुष्टि पहले ही केंद्र पर जाकर कर लें. रिकॉर्ड 22.8 लाख उम्मीदवार इस साल नीट-यूजी 2026 के लिए रिकॉर्ड तोड़ रजिस्ट्रेशन हुए हैं. कुल 22,79,743 उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है, जिनमें महिला उम्मीदवारों की संख्या करीब 13.3 लाख और पुरुषों की संख्या 9.4 लाख है. इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. जयपुर के जिला कलेक्टर संदेश नायक ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं में कोई कसर न छोड़ी जाए. छात्रों के लिए जरूरी सलाह और नियम एनटीए ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय से काफी पहले केंद्र पर पहुंचें और अपने साथ जरूरी दस्तावेज व एडमिट कार्ड रखें. गूगल मैप वाली चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने भी छात्रों से अपील की है कि वे अंतिम समय की भागदौड़ से बचें.

टीबी नियंत्रण अभियान में राजस्थान का बड़ा कदम, ग्रामीण अंचलों में बीमारी पर काबू

जयपुर राजस्थान को टीबी की बेड़ियों से आजाद करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में चलाए गए गहन 'टीबी नियंत्रण अभियान' के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2025 के लिए प्रदेश की 6,547 ग्राम पंचायतों को 'टीबी मुक्त' घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र सरकार की मुहर का इंतजार राज्य स्वास्थ्य विभाग के टीबी नोडल अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर इन 6,547 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त चिह्नित कर लिया है। अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम सत्यापन और आधिकारिक मुहर लगने का इंतजार है, जिसके बाद इन्हें सार्वजनिक रूप से टीबी मुक्त घोषित कर दिया जाएगा। इन 6 कड़े मानकों पर परखी गई पंचायतों की 'सेहत' किसी भी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करना इतना आसान नहीं होता। इसके लिए केंद्र सरकार ने छह बेहद कड़े मानक तय किए हैं। राजस्थान की इन 6,547 पंचायतों ने इन सभी संकेतकों पर शानदार प्रदर्शन किया है।     प्रति 1,000 की जनसंख्या पर टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान की दर 30 या उससे अधिक होनी चाहिए।     प्रति 1,000 की आबादी पर टीबी के नए पुष्ट मरीजों की संख्या 1 या उससे कम होनी चाहिए।     अधिसूचित सभी टीबी रोगियों में से कम से कम 60% मरीजों का 'दवा संवेदनशीलता परीक्षण' (DST) होना अनिवार्य है।     कम से कम 50% पात्र मरीजों को सीधा आर्थिक लाभ मिला हो और उनके खाते में कम से कम एक भुगतान पहुंच चुका हो।     इस अभियान के तहत चिन्हित मरीजों को 100% 'पोषण किट' का वितरण सुनिश्चित किया गया हो।     टीबी के मरीजों में इलाज सफल होने और पूर्ण स्वस्थ होने की दर कम से कम 85% होनी चाहिए। सिर्फ पहचान ही नहीं, पोषण पर भी जोर अधिकारियों के अनुसार, इन मानदंडों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि केवल बीमारी को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि मरीज को सही निदान, सही पोषण और इलाज पूरा करने तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है। 'निक्षय मित्र' पहल ने राजस्थान के गांवों में टीबी मरीजों को सामाजिक और पोषण संबंधी सहारा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। क्यों अहम है यह उपलब्धि? राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से विशाल राज्य में ग्रामीण स्तर पर टीबी पर नियंत्रण पाना एक बड़ी चुनौती रही है। 6,547 पंचायतों का टीबी मुक्त होने की राह पर बढ़ना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल रहा है। केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ये पंचायतें अन्य क्षेत्रों के लिए 'रोल मॉडल' का काम करेंगी। राज्य सरकार का विजन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के '2025 तक टीबी मुक्त भारत' के सपने को साकार करने में राजस्थान अग्रणी भूमिका निभाए। इन गांवों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि राजस्थान टीबी को मात देने के बेहद करीब पहुँच चुका है। पुलकित सक्सेना