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‘तरंग शक्ति-2026’ के समापन पर राजनाथ सिंह का संदेश, तेजस-आकाश से 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट तक तैयारी

जाधपुर राजस्थान की ऐतिहासिक और रणनीतिक सरजमीं जोधपुर एक बार फिर भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और अंतरराष्ट्रीय सामरिक संबंधों की नई मिसाल बनी है। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' के दूसरे संस्करण के भव्य समापन अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। भारतीय वायुसेना और दुनिया भर से आई मित्र देशों की वायुसेनाओं के जवानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आधुनिक दौर में सुरक्षा का मतलब केवल सीमा की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों और आत्मनिर्भरता के बल पर वैश्विक स्तर पर खुद को मजबूत बनाना भी है। जोधपुर के आसमान में गर्जते लड़ाकू विमानों की आवाज के बीच रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत लगातार अपने आसपास के क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की गतिविधियों पर बारीक नजर बनाए हुए है। उन्होंने जोधपुर की इस पावन भूमि से देश की थल, जल और नभ सेनाओं में हो रहे ऐतिहासिक बदलावों का जिक्र किया। अपने सम्बोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने भारत की सैन्य तैयारियों, स्वदेशी हथियारों, ड्रोन तकनीक, एआई और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दिशा में तेजी से बढ़ रहे भारत के कदमों पर विस्तार से अपनी बात रखी। 1. संकट के समय स्वदेशी तकनीक ही असली ताकत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर में कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध और संकट के समय कोई भी देश लंबे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकता, जब तक कि वह खुद अपने हथियार और महत्वपूर्ण तकनीक न बनाता हो। इसी कड़ी सोच ने भारत को रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' को अपनी राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए प्रेरित किया है। 2. आत्मनिर्भरता का मतलब अकेलापन नहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि 'आत्मनिर्भर भारत' का मतलब दुनिया से अलग-थलग (Isolation) होना बिल्कुल नहीं है। इसका सीधा अर्थ देश के भीतर अपनी घरेलू क्षमता को इतना मजबूत बनाना है कि हम जटिल और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों को खुद डिजाइन और विकसित कर सकें। 3. सशस्त्र बलों का बुनियादी रूपांतरण भारतीय सशस्त्र बल वर्तमान में संरचनात्मक (structurally), भौतिक (materially) और रणनीतिक (strategically) रूप से एक बुनियादी बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं, जो भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। 4. ड्रोन और एआई ने बदला युद्ध का स्वरूप अनमैन्ड सिस्टम और ड्रोन तकनीक ने सैन्य ऑपरेशन्स की गति, पैमाने और प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब युद्ध के दौरान फैसले लेने की प्रक्रिया को नया आकार दे रही है। 5. प्लेटफॉर्म की संख्या नहीं, फैसले लेने की स्पीड अहम राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सैन्य ताकत केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि हमारे पास कितने फाइटर जेट या प्लेटफॉर्म हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगी कि हम कितनी तेजी से खतरों को भांपते हैं, समझते हैं, फैसले लेते हैं और एक्शन (Sensing, Understanding, Deciding, Acting) लेते हैं। 6. तेजस और आकाश प्रणाली का विशेष उल्लेख भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान 'तेजस' और मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'आकाश' का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ये उपकरण भारत की स्वदेशी क्षमता और सैन्य आत्मनिर्भरता के सबसे बड़े प्रतीक बनकर उभरे हैं। 7. 5th जनरेशन फाइटर जेट और भविष्य की तैयारी रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के लड़ाकू विमानों की तकनीक विकसित करने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और बहुत जल्द भारत इस क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल करेगा। 8. स्पेक्ट्रम कंट्रोल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर जोर आधुनिक युद्ध अब केवल थल, जल और वायु तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्पेस, साइबर और सूचना क्षेत्र (Information Domain) की अहमियत बहुत अधिक बढ़ गई है, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स वॉरफेयर के लिए एब्सोल्यूट स्पेक्ट्रम कंट्रोल बेहद जरूरी है। 9. सह-विकास और सह-उत्पादन पर फोकस रक्षा अनुसंधान (R&D) से लेकर ट्रेनिंग और हथियारों के मेंटेनेंस तक, भारत अपने मित्र राष्ट्रों के साथ 'को-डेवलपमेंट' (Co-development) और 'को-प्रोडक्शन' (Co-production) पर विशेष जोर दे रहा है। साझा तकनीक और अनुभव से सभी देशों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। 10. जोधपुर की धरा से मित्र देशों का आभार 'तरंग शक्ति-2026' के सफल आयोजन पर भारतीय वायुसेना और शामिल हुए सभी 8 देशों की वायुसेनाओं, उनके क्रू मेंबर्स और 32 देशों के पर्यवेक्षकों का अभिनंदन करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभ्यास आपसी विश्वास, साझा अनुभव और भावी रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।  

जयपुर घूमने जा रहे हैं तो ध्यान दें! आमेर और चारदीवारी में बदलेगा ट्रैफिक प्लान, पार्किंग की भी व्यवस्था

जयपुर  टूरिस्ट सीजन में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही और यातायात के दबाव को देखते हुए जयपुर यातायात पुलिस ने 10 और 11 अक्टूबर को चारदीवारी और आमेर क्षेत्र में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। इसके तहत वाहनों के रूट में बदलाव किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए पुरातत्व विभाग की ओर से परियों का बाग पार्किंग भी शुरू की जाएगी। आमेर से जयपुर आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों से गुजरना होगा। वहीं, चारदीवारी क्षेत्र में मालवाहक वाहनों के प्रवेश का समय भी तय किया गया है, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे और पर्यटकों को परेशानी का सामना न करना पड़े आमेर किला ट्रैफिक डायवर्जन: जयपुर पुलिस ने जारी किया नया प्लान आमेर से जयपुर आने वाले वाहन आमेर तिराहा, दिल्ली रोड, गलता गेट चौराहा और ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा होकर गुजरेंगे। दिल्ली रोड की तरफ से आने वाले पर्यटक आमेर तिराहा से धोबीघाट चौराहा, रामगढ़ मोड़ और आमेर रोड होते हुए आमेर फोर्ट पहुंच सकेंगे। जयगढ़ टी-पॉइंट से रामगढ़ मोड़ की ओर ट्रैफिक बंद रहेगा। जयगढ़ से वाहन केवल आमेर की ओर जा सकेंगे। आमेर से रामगढ़ मोड़ और आमेर तिराहा से आमेर गांधी चौक की तरफ प्रवेश निषेध रहेगा। जयपुर चारदीवारी ट्रैफिक अपडेट: पर्यटकों के लिए पार्किंग और नए रूट बड़ी पर्यटक बसें रामनिवास बाग में होंगी पार्कः बड़ी टूरिस्ट बसों को रामनिवास बाग सैटेलाइट पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा। व्यापारियों से अपने वाहन जेडीए भूमिगत पार्किंग (रामनिवास बाग), चौगान स्टेडियम पार्किंग या आतिया मार्केट के अंदर पार्क करने की अपील की गई है। रात 11 से सुबह 7 बजे तक मालवाहक वाहनों को प्रवेशः चारदीवारी क्षेत्र में मालवाहक वाहनों को रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक ही प्रवेश मिलेगा। सुभाष चौक से आने-जाने का रूट बदलेगाः बड़ी चौपड़ से सुभाष चौक की ओर दोनों तरफ से वाहनों का संचालन होगा। वहीं, सुभाष चौक से बड़ी चौपड़ की ओर आने वाले यातायात को चार दरवाजा और घोड़ा निकास रोड होते हुए रामगंज चौपड़ की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। गणगौरी बाजार में भी बदलावः बांदरवाल गेट से आने वाले वाहन नगर परिषद की मोरी और शार्दुल सिंह की नाल से होते हुए गणगौरी बाजार जा सकेंगे। गणगौरी बाजार से शार्दुल सिंह की नाल होते हुए सिटी पैलेस की ओर वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी।  

बालोतरा के प्रसिद्ध रणछोड़राय मंदिर को मिले ₹4.52 करोड़, दो मंजिला भवन और म्यूजिकल फाउंटेन बनेंगे

बालोतरा  राजस्थान के बालोतरा जिले के प्रसिद्ध सनातनी तीर्थ खेड़ श्री रणछोड़राय मंदिर में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विकास कार्यों की राह खुल गई है। देवस्थान विभाग की ओर से तीर्थ के विकास के लिए 4 करोड़ 52 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग ने कार्यादेश जारी कर दिए हैं। नवरात्र की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू होगा। एक वर्ष में काम पूरा होने पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर वाहनों की पार्किंग तक की सुविधाओं का विस्तार होगा। दो मंजिला भवन, म्यूजिकल फाउंटेन और चारदीवारी सहित विभिन्न विकास कार्यों से प्राचीन तीर्थ का स्वरूप निखरेगा। सदियों पुराना तीर्थ, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था खेड़ स्थित रणछोड़राय तीर्थ कई शताब्दियों पुराना है। यह जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होने के साथ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भगवान रणछोड़राय की आदमकद संगमरमर की प्रतिमा सहित अन्य देव प्रतिमाएं स्थापित हैं। राधाष्टमी पर यहां वार्षिक मेले का आयोजन होता है। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी श्रद्धालु उत्साह से भाग लेते हैं। तीर्थ ट्रस्ट मंडल की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समय-समय पर विकास कार्य करवाए जाते रहे हैं। ठहरने से लेकर पार्किंग तक की सुविधाओं का विस्तार देवस्थान विभाग की ओर से स्वीकृत बजट से मंदिर परिसर में यात्रियों के ठहरने के लिए सर्वसुविधायुक्त दो मंजिला भवन का निर्माण करवाया जाएगा। इसमें कुल 16 कमरे होंगे। इसके अलावा श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग विकसित की जाएगी। मंदिर परिसर में म्यूजिकल फाउंटेन लगाने के साथ चारदीवारी का निर्माण भी करवाया जाएगा। अन्य आवश्यक विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं के विकसित होने से धार्मिक आयोजनों और मेलों के दौरान मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं श्री खेड़ रणछोड़राय मंदिर शताब्दियों पुराना प्राचीन तीर्थ है। यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसके विकास के लिए सरकार की ओर से बजट स्वीकृत किया जाना खुशी की बात है। प्रस्तावित कार्य पूरे होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। भंवरलाल टावरी, अध्यक्ष, खेड़ रणछोड़राय मंदिर ट्रस्ट मंडल इनका कहना है बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्यादेश जारी किए गए हैं। नवरात्र की शुरुआत में कार्य का शुभारंभ किया जाएगा। निर्माण कार्य प्राथमिकता से करवाया जाएगा।  गौतम कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, बालोतरा

जगतपुरा के गंगा मार्ग पर चला JCB, दुकानें और मकान हटे; हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

जयपुर सड़क 200 फीट थी, लेकिन अतिक्रमण के कारण एक हिस्से में रास्ता ही सिमट गया। नतीजतन वाहनों का दबाव बढ़ा और हादसों का खतरा बना रहा। आखिरकार जगतपुरा के इंदिरा गांधी नगर स्थित कुंदनपुरा के गंगा मार्ग पर राजस्थान आवासन मंडल ने कार्रवाई की। मंडल अधिकारियों के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद आपसी सहमति से निर्माणकर्ताओं ने अपने निर्माण हटाए। करीब 450 मीटर लंबी लेन में जेसीबी से 20 से अधिक स्ट्रक्चर हटाए गए। इनमें आठ दुकानें, 15 ढांचे और तीन से चार मकान शामिल थे। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर 1.30 बजे तक चली। हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश की पालना में हुई कार्रवाई से सड़क विकास का रास्ता साफ हुआ। इससे पहले करीब दो साल पहले भी इसी स्थान से 60 स्ट्रक्चर हटाए गए थे। कार्रवाई शांतिपूर्ण इससे पहले बोर्ड प्रशासन ने नोटिस जारी कर जगह खाली करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद कुछ निर्माणकर्ताओं ने सुबह से ही सामान और निर्माण हटाने शुरू कर दिए। हाउसिंग बोर्ड के उप आवासन आयुक्त राजेश व्यास ने बताया कि गंगा मार्ग इंदिरा गांधी नगर के मास्टर प्लान की महत्वपूर्ण सड़क है। पुनर्वास योजना के तहत अब तक 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं। संबंधित लोगों से शपथ पत्र भी लिए गए हैं। पात्र प्रभावितों को इंदिरा गांधी नगर के सेक्टर-5 में लॉटरी के माध्यम से व्यावसायिक और आवासीय भूखंड व दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसकी कवायद शुरू हो चुकी है। व्यास ने बताया कि पूरे गंगा मार्ग का निर्माण 2024 में किया गया था, लेकिन 450 मीटर का यह हिस्सा अधूरा छूट गया था। यह सड़क 60 मीटर चौड़ी है। यहां शांतिपूर्ण तरीके से कार्रवाई पूरी कर ली गई। जगतपुरा में सीबीआइ फाटक से गोनेर रोड रेलवे ओवरब्रिज तक बनी 200 फीट रोड पर फाटक से आगे अतिक्रमण के कारण एक तरफ का रास्ता बंद था। ऐसे में वाहनों को दूसरी लेन से गुजरना पड़ता था। सेक्टर रोड पर एक ही तरफ सड़क होने से वाहनों का दबाव बढ़ रहा था और रात के समय आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थीं। मास्टर प्लान के मुताबिक, यह सड़क पूरी तरह 200 फीट चौड़ी प्रस्तावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से आवागमन सुगम होगा और हादसों की आशंका कम होगी। उन्होंने मंडल से जल्द से जल्द सड़क निर्माण पूरा करने की मांग की। पत्रिका ने भी पिछले कई अंकों में इस मार्ग की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। सर्विस लेन में अब भी कुछ निर्माण शेष कार्रवाई के बाद भी इस रास्ते पर कुछ स्ट्रक्चर के हिस्से नहीं हटाए गए हैं। इससे आगे सर्विस लेन बनाने में परेशानी आ सकती है। अधिकारियों के अनुसार, आपसी सहमति से संबंधित निर्माणकर्ताओं को मकानों के शेष दो से तीन फीट हिस्से स्वयं हटाने के लिए समय दिया गया है। सड़क विकास कार्य शुरू होने पर इन्हें भी हटाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि गंगा मार्ग के इस कैरिज एरिया में कोई व्यक्ति निवास नहीं कर रहा था।

भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि, कपूरथला में बनी 16 कोच वाली वंदे भारत ने 180 KM/H पर भरी रफ्तार

कोटा  भारतीय रेलवे ने स्वदेशी रेल तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) में निर्मित 16 कोच वाली नई वंदे भारत चेयर कार ट्रेन का पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल हाईस्पीड परीक्षण किया गया। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) की निगरानी में गुरुवार को मथुरा से कोटा होते हुए नागदा रेलमार्ग पर यह परीक्षण किया गया। इस दौरान उच्च गति पर ट्रेन की कार्यक्षमता, परिचालन दक्षता और संरक्षा से जुड़े तकनीकी मानकों का आकलन किया गया। यह परीक्षण आधुनिक, तेज रफ्तार और स्वदेशी तकनीक से निर्मित ट्रेनों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। परीक्षण के दौरान तेज गति पर ट्रेन के प्रदर्शन और परिचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की निगरानी में हुए इस ट्रायल का उद्देश्य उच्च गति पर ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन करना था। कोटा मंडल में हुआ यह परीक्षण हाईस्पीड ट्रायल के लिए इस रेलखंड की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है। कपूरथला फैक्ट्री ने बनाया उत्पादन रिकॉर्ड रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला आधुनिक रेल कोच निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के कोच और ट्रेनसेट तैयार किए जा रहे हैं। फैक्ट्री में निर्मित रेल कोच एशिया और अफ्रीका के कई देशों में निर्यात भी किए जा चुके हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय रेल निर्माण बाजार में भारत की पहचान को मजबूती मिली है। एक वर्ष में बनाए 2,383 रेल कोच फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 2,383 रेल कोच का निर्माण किया। इसे फैक्ट्री का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन बताया गया है। यह उपलब्धि उसकी उत्पादन क्षमता और आधुनिक रेल निर्माण के क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। स्वदेशी रेल तकनीक को मिलेगा बढ़ावा वंदे भारत ट्रेन का 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल परीक्षण आधुनिक रेल तकनीक, संरक्षा मानकों और स्वदेशी निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि है। यह केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ अभियान के अनुरूप देश में आधुनिक रेल उपकरणों और ट्रेनों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को भी मजबूती देगा।

जयपुर में डिजिटल शासन पर मंथन, पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के प्रतिनिधिमंडल ने समझी राजस्थान की तकनीक

जयपुर  राजस्थान में संचालित डिजिटल परियोजनाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर स्थित भामाशाह डेटा सेंटर पहुंचा। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने यहां आयोजित कार्यशाला में भाग लिया। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के विस्तार, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया। दो दिवसीय अध्ययन दौरे में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में प्रतिनिधिमंडल को भामाशाह डेटा सेंटर, नेटवर्क संचालन केंद्र, सुरक्षा संचालन केंद्र, राजस्थान राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (आरस्वान) और राजनेट की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं के तकनीकी पहलुओं और अन्य राज्यों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल शासन की सफलता केवल किसी राज्य की आर्थिक स्थिति या उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, स्पष्ट कार्ययोजना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में पहले से संचालित सफल डिजिटल परियोजनाओं के अनुभवों का लाभ उठाकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ लागू किया जा सकता है।  नंद कुमारम ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका केवल तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य विभागों की सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वहां प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आमजन की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सही पहचान करने और लाभ वितरण में त्रुटियां कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के डिजिटल विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जा सके।  नंद कुमारम ने डेटा सेंटर जैसी तकनीकी सुविधाओं के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को वैकल्पिक केंद्र के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले उनकी लागत, समयसीमा, आवश्यक मानव संसाधन और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही, तकनीकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विभागों के अनुभवी अधिकारियों को जोड़ने पर भी जोर दिया। कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के तकनीकी निदेशक  अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दूसरे दिन शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय में जन आधार योजना की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इसके बाद अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 का दौरा कर जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करेंगे।  

राजस्थान में अनोखा चुनावी वादा वायरल, कुंवारों के लिए दूसरे राज्यों से बहुएं लाने का दावा

जयपुर राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों की आहट के बीच ग्रामीण सियासत का पारा चढ़ने लगा है। इस बार चुनावी समर में जनता को रिझाने के लिए पारंपरिक मुद्दों से हटकर सोशल मीडिया पर बेहद अनोखे और चौंकाने वाले चुनावी वादे सुर्खियां बटोर रहे हैं। ऐसे अनूठे और लोक-लुभावन वादे जहाँ एक ओर वोटरों के बीच हंसी-मजाक और मीम्स का जरिया बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों के युवाओं की वास्तविक सामाजिक समस्याओं को भी एक नए अंदाज में चुनावी पटल पर लाकर खड़ा कर रहे हैं। झुंझुनूं जिले की झाझड़ ग्राम पंचायत से सरपंच पद की दावेदार का गांव के कुंवारे लड़कों की शादी कराने और दूसरे राज्यों से बहुएं लाने का अजीबोगरीब वादा इसी सिलसिले की एक कड़ी है। झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र की झाझड़ ग्राम पंचायत से सरपंच पद की भावी उम्मीदवार अनिता का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने गांव के कुंवारे लड़कों की शादी करवाने का बेहद अनोखा चुनावी वादा किया है। अनोखा चुनावी वादा क्या है? "कुंवारों के लिए लुगाई की व्यवस्था": वायरल वीडियो में अनिता ने कहा कि गांव का विकास (सड़क, पानी, बिजली) करवाना तो हर सरपंच की सामान्य जिम्मेदारी होती है, लेकिन उनकी प्राथमिकता गांव के कुंवारे भाई हैं। उन्होंने खुले मंच से वादा किया, "सारा कुंवारा बाया के लिए लुगाई की व्यवस्था करांगा" (सभी कुंवारे भाइयों के लिए पत्नी/बहू की व्यवस्था करवाऊंगी)। अनिता ने दावा किया कि अगर उन्हें गांव के लड़कों के लिए योग्य दुल्हनें तलाशने के लिए दूसरे राज्यों में भी जाना पड़े, तो वह पीछे नहीं हटेंगी। क्या ऐसे अनोखे वादे से समर्थन मिलेगा? वैसे इस वादे का दूसरा पहलू देखें तो इस अनोखे वादे के पीछे झुंझुनूं और शेखावाटी क्षेत्र की एक गंभीर सामाजिक समस्या छिपी है, जिसके कारण यह चुनावी मुद्दा युवाओं को प्रभावित कर सकता है। राजस्थान के झुंझुनूं और हरियाणा से सटे सीमावर्ती इलाकों में लिंगानुपात कम होने और युवाओं के पास सरकारी नौकरी या पर्याप्त रोजगार न होने के कारण बड़ी संख्या में लड़के कुंवारे रह जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उम्रदराज हो रहे युवकों की शादी न होना एक बहुत बड़ा सामाजिक दर्द और मुद्दा है। सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया अनिता सैनी के इस बयान पर लोग खुलकर मजे ले रहे हैं और तरह-तरह के मीम्स शेयर कर रहे हैं। कई यूजर्स कमेंट कर रहे हैं कि "इस बार तो पूरा गांव अनिता जी को ही वोट देगा, क्योंकि उन्होंने सीधे दिल की बात कह दी है।" वहीं कुछ लोग इसे केवल चुनाव जीतने के लिए किया गया एक "पब्लिसिटी स्टंट" और गैर-जिम्मेदाराना वादा बता रहे हैं। क्या सस्ती लोकप्रियता के लिए अनूठे वादे? चुनावों में मतदाताओं का ध्यान खींचने के लिए अनूठे और अजीबोगरीब वादे करना अक्सर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का एक आसान जरिया माना जाता है। धरातल पर बुनियादी विकास जैसे सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर काम करने में लंबा समय और बड़ी बजटीय योजनाओं की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, 'कुंवारों की शादी कराने' या 'दूसरे राज्यों से दुल्हनें लाने' जैसे लोक-लुभावन और विवादित बयान सोशल मीडिया के इस दौर में उम्मीदवारों को रातों-रात बिना किसी खर्च के पूरे प्रदेश में मशहूर कर देते हैं। इस तरह के वादे अक्सर गंभीर राजनीति को एक तमाशे में बदल देते हैं, जहाँ जनसेवा के वास्तविक एजेंडे पीछे छूट जाते हैं और केवल सुर्खियां बटोरने की होड़ मच जाती है। हालांकि, इन अनूठे वादों का दूसरा पहलू यह भी है कि ये ग्रामीण समाज की उन दबी हुई और कड़वी सच्चाइयों को उजागर करते हैं, जिन पर मुख्यधारा के राजनीतिक दल कभी खुलकर बात नहीं करते। शेखावाटी और पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में लिंगानुपात की कमी और रोजगार के अभाव के कारण युवाओं की शादी न हो पाना एक वास्तविक और गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है। ऐसे में उम्मीदवारों द्वारा इस मुद्दे को उठाना भले ही पब्लिसिटी स्टंट या सस्ती लोकप्रियता का हिस्सा लगे, लेकिन यह वोटरों, विशेषकर युवाओं के उस दर्द को सीधे छूता है जिससे वे रोज जूझ रहे हैं। यही वजह है कि जनता इन्हें पूरी तरह खारिज करने के बजाय इनके पीछे छिपी मजबूरी और चुनावी चालाकी दोनों को एक साथ देख रही है।

राजस्थान: मुख्य सचिव ने की समीक्षा बैठक, साइबर अपराध रोकने और पीड़ितों को तुरंत राहत देने पर जोर

जयपुर  मुख्य सचिव  वी. निवास ने शुक्रवार को बूंदी जिला कलक्ट्रेट सभागार में जल संचय-जल संवर्धन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान, सिंचाई तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की विभिन्न पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के विभिन्न चरणों में हुए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अभियान के तहत वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों का उपवन संरक्षक को स्वयं नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की पेयजल परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कर आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने हिण्डोली-नैनवां, गरड़दा और नवनेरा पेयजल परियोजनाओं सहित ईआरसीपी के तहत संचालित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न परियोजनाओं में संवेदकों के लंबित भुगतान संबंधी प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर कार्यों को गति देने को कहा। जल संचय-जल संवर्धन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने, कार्यों का नियमित निरीक्षण करने तथा गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत गांवों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता और सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की भी जानकारी ली। मुख्य सचिव ने किया साइबर थाने का निरीक्षण मुख्य सचिव  वी. निवास ने शुक्रवार को बूंदी साइबर पुलिस थाने का निरीक्षण कर साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने थाने के स्वागत कक्ष और अनुसंधान कक्ष का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने साइबर थाने में दर्ज प्रकरणों के निस्तारण, अनुसंधान, आरोपियों की गिरफ्तारी, कार्यप्रणाली तथा विभिन्न पोर्टलों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय तथा समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान से पीड़ितों की मेहनत की कमाई बचाई जा सकती है। इस दौरान संभागीय आयुक्त व कोटा जिला कलक्टर  पीयूष समारिया, पुलिस महानिरीक्षक कोटा  हरेन्द्र महावर, जिला कलक्टर  हरफूल सिंह यादव, जिला पुलिस अधीक्षक  अवनीश कुमार शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर  एच.डी. सिंह, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चारू, अतिरिक्त जिला कलक्टर (सीलिंग)  रमेश देव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

राजस्थान में प्रमोशन की दौड़ बनी जानलेवा, 2 किलोमीटर दौड़ के बाद ASI दुर्गाराम को आया हार्ट अटैक

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर से बड़ी खबर सामने आई है। एसआई पद पर प्रमोशन के लिए फिजिकल टेस्ट देने आए एएसआई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक एएसआई दुर्गाराम (50) बाड़मेर जिले के नेतराड़ गांव के रहने वाले थे। वे शुक्रवार सुबह मंडोर स्थित राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रमोशन के लिए आयोजित फिजिकल परीक्षा देने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि दो किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के बाद उनके सीने में अचानक दर्द उठा। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को जोधपुर के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। जानकारी के अनुसार एएसआई दुर्गाराम शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे फिजिकल टेस्ट में शामिल होने के लिए जोधपुर के मंडोर स्थित राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे थे। यहां एसआई पद पर प्रमोशन के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। दुर्गाराम ने परीक्षा के तहत दो किलोमीटर की दौड़ पूरी कर ली थी। इसके बाद उन्हें शारीरिक परीक्षा के अन्य चरणों में शामिल होना था। दौड़ पूरी करने के कुछ समय बाद दुर्गाराम की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सुबह करीब 8:30 बजे उनके सीने में तेज दर्द हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी हालत बिगड़ती देख उन्हें तुरंत उपचार के लिए नजदीकी मंदिर हॉस्पिटल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान ही उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके चलते उनकी मौत हो गई। प्रमोशन के लिए आए थे दुर्गाराम एएसआई दुर्गाराम बाड़मेर जिले के नेतराड़ गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में वे गिराब पुलिस थाने में एएसआई के पद पर कार्यरत थे। वे एसआई पद पर प्रमोशन पाने के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने जोधपुर आए थे। परीक्षा के दौरान अचानक हुई इस घटना से पुलिस महकमे में शोक का माहौल है। एएसआई दुर्गाराम की मौत की सूचना मिलते ही पैतृक गांव नेतराड़ में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

राजस्थान में गिवअप अभियान का दूसरा चरण, अक्टूबर से दिसंबर तक घर-घर जाकर होगी जांच

 कोटपूतली-बहरोड़ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्र लाभार्थियों को चिन्हित कर योजना से बाहर करने तथा पात्र एवं वंचित परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ने के उद्देश्य से गिवअप अभियान के द्वितीय चरण के तहत जिले में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, जयपुर के निर्देशानुसार एवं जिला कलेक्टर के निर्देशन में अभियान के तहत डोर-टू-डोर सर्वे कर पात्र एवं अपात्र लाभार्थियों की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। अभियान के तहत विशेष रूप से ऐसे शहरी वार्डों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां जनगणना-2011 के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक आबादी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर रही है। प्रथम चरण में पावटा क्षेत्र एवं नारायणपुर की ग्राम पंचायत जोधपुरा में सर्वे कार्य प्रारंभ किया जाएगा। सर्वे के दौरान ऐसे व्यक्ति एवं परिवारों को चिन्हित किया जाएगा, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार बहिष्करण श्रेणी में आते हैं। इनमें आयकर दाता, सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति तथा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले लाभार्थी शामिल हैं। अधिकारियों एवं सर्वे दलों द्वारा ऐसे अपात्र लाभार्थियों को स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा योजना से अपना नाम हटवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वेच्छा से नाम नहीं हटवाने की स्थिति में नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अभियान को प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए दैनिक सर्वे लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। पात्र एवं जरूरतमंद परिवार लाभ से नहीं रहे वंचित सर्वे के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र एवं जरूरतमंद परिवार खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित नहीं रहे। सर्वे में चिन्हित पात्र एवं वंचित परिवारों के आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करवाए जाएंगे, ताकि पात्र परिवारों को नियमानुसार खाद्यान्न का लाभ उपलब्ध कराया जा सके। पात्रता के अनुरूप किया जा रहा लाभार्थियों का सत्यापन जिला रसद अधिकारी निकिता राठौड़ ने बताया कि गिवअप अभियान के माध्यम से खाद्य सुरक्षा योजना में पात्रता के अनुरूप लाभार्थियों का सत्यापन किया जा रहा है। पारदर्शी डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से अपात्र लाभार्थियों को योजना से हटाने तथा वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे राज्य के खाद्यान्न बजट पर पड़ने वाले अनावश्यक भार को कम करने के साथ-साथ सरकार की कल्याणकारी योजना का लाभ वास्तविक पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों तक सुनिश्चित किया जा सकेगा।