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जून गया, अब मानसून की एंट्री का इंतजार खत्म! जानिए कब बरसेंगे बादल

जयपुर  राजस्थान में प्री-मानसून की बारिश का दौर थमने के बाद पिछले कुछ दिनों से पारा चढ़ा हुआ है. तापमान 40 से 45 डिग्री तक होने के चलते कई जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं. अब मानसून का इंतजार है और प्रदेशवासियों का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून का काउंटडाउन शुरू हो गया है. पिछले 24 घंटों में प्रतापगढ़ के अरनोद में सर्वाधिक 94 मिमी वर्षा दर्ज की गई. वहीं, अगले 3–4 दिनों तक तेज आंधी के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिसमें हवाओं की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है. दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में अनुकूल स्थिति मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है. जबकि अगले 2–3 दिनों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो सकती है. दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं. पूर्वानुमान के मुताबिक, जयपुर, भरतपुर, कोटा और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. जबकि जोधपुर और बीकानेर में फिलहाल उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. राजस्थान में 300 से ज्यादा बांध सूखे वहीं, इस साल मानसून की धीमी शुरुआत ने जल संकट के संकेत भी दिए हैं. कुल 693 बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 44.22% पानी ही उपलब्ध है, जो पिछले साल इसी अवधि में 46.59% था. इनमें से 307 बांध पूरी तरह से सूख चुके हैं, 381 आंशिक रूप से भरे हैं और केवल 5 छोटे बांध ही पूरी तरह लबालब हो पाए हैं. जल संसाधन विभाग की 23 जून की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 23 प्रमुख बड़े बांधों में फिलहाल 56.09% पानी मौजूद है.  इस हफ्ते हो सकती है मध्यम से भारी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा इस समय गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार के कुछ भागों से होकर गुजर रही है. अगले 2-3 दिन में गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ भागों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. विभाग के मुताबिक, कोटा और उदयपुर संभागों में कुछ भागों में आगामी दिनों में कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है. 3 से 5 जुलाई तक पूर्वी राजस्थान के कुछ और भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी और कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.

विद्यालयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, सभी भवनों की जांच और मरम्मत के सख्त निर्देश जारी

 जयपुर  प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  राजेश कुमार यादव ने मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों के भवनों की सुरक्षा, मरम्मत कार्यों, निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में जर्जर अथवा असुरक्षित भवनों का उपयोग नहीं किया जाए। बैठक में एसीएस ने निर्देश दिए कि पूर्व में चिन्हित जर्जर विद्यालय भवनों के साथ-साथ वर्तमान में उपयोग में लिए जा रहे सभी विद्यालय भवनों की पुनः गहनता से जांच कराई जाए। प्रत्येक भवन की सुरक्षा का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए तथा सुरक्षा संबंधी सभी मानकों और नियमों की पूर्ण पालना की जाए। उन्होंने कहा कि जो भवन या कक्ष किसी भी दृष्टि से असुरक्षित पाए जाएं, उन्हें तत्काल प्रभाव से लॉक किया जाए, बैरिकेडिंग कर उपयोग से बाहर किया जाए तथा उनकी यथास्थिति की विस्तृत रिपोर्ट पुनः प्रस्तुत की जाए। अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय भवनों के मरम्मत कार्यों एवं नवीन भवनों के निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है, इसलिए कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। बैठक में शिक्षा विभाग की विभिन्न प्रमुख योजनाओं, गतिविधियों एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, जिससे योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से विद्यार्थियों तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि बजट घोषणाओं के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में राज्यभर में 2,000 से अधिक विद्यालयों से संबंधित विकास एवं निर्माण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वहीं वर्ष 2026-27 में लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विद्यालयों के विकास के लिए भामाशाहों, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा अन्य उपलब्ध मदों से भी सहयोग एवं वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा, ताकि राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में आवश्यक विकास एवं आधारभूत सुविधाओं के कार्य प्रभावी ढंग से कराए जा सकें।

राजस्थान में पेयजल परियोजनाओं को बड़ा बजट, लंबे समय से रुके काम होंगे शुरू

जयपुर  राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में लंबे समय से चल रहा बजट संकट फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है. राज्य सरकार ने विभाग के लिए 935 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि करीब ढाई साल बाद पेयजल योजनाओं के लिए इस स्तर पर बजट जारी किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रक्रिया में तेजी लाई गई है. लंबित कार्यों को मिलेगी गति जारी बजट में सबसे बड़ा हिस्सा मेजर प्रोजेक्ट्स के लिए रखा गया है. इन परियोजनाओं के लिए 735 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं.  जायका (JICA) और OTMP परियोजनाओं के लिए 100-100 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, जिससे इन योजनाओं के लंबित कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है.  1 हजार करोड़ अतिरिक्त बजट जारी करने की तैयारी  सरकार अगले महीने भी करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट जारी करने की तैयारी में है. इससे प्रदेश भर में चल रही पेयजल परियोजनाओं के भुगतान और नए कार्यों में तेजी आने की संभावना है.  मंत्री मामले की कर रहे मॉनिटरिंंग  बताया जा रहा है कि भुगतान को लेकर ठेकेदारों और सरकार के बीच पहले ही सहमति बन चुकी थी. इसके बाद बजट जारी करने की प्रक्रिया तेज की गई. जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. 

पंडित के बेटे से चंबल का डाकू बना जगन, आखिर जेल की बैरक में खत्म हुआ

चंबल  कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक के दम पर अपना कानून चलाने वाला डाकू जगन गुर्जर अब सिर्फ एक फाइल, एक आपराधिक इतिहास और एक अधूरी कहानी बनकर रह गया है। 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी हत्या के साथ उस शख्स का अंत हो गया, जिसका नाम तीन राज्यों की पुलिस के लिए सालों तक चुनौती बना रहा। यह वही जगन गुर्जर था, जिसके एनकाउंटर की मांग देश की संसद तक पहुंची थी। लेकिन विडंबना देखिए, जो कभी लाखों के इनामी डाकू के रूप में पहचाना जाता था, वही बाद के वर्षों में 3 रुपए के खुले पैसों और पंचर ठीक से नहीं बनाने जैसी मामूली बातों पर झगड़ा करने लगा था। पंडित का बेटा कैसे बन गया चंबल का डाकू जगन गुर्जर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भवुतीपुरा गांव में जन्मे जगन का बचपन बेहद साधारण था। उसके पिता शिवचरण गुर्जर मंदिर में पूजा-पाठ करते थे और परिवार दूध बेचकर भी गुजर-बसर करता था। लेकिन एक विवाद ने उसकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। मंदिर कमेटी से हुए झगड़े के बाद पुलिस से बचने के लिए वह बीहड़ों में भागा और फिर कभी सामान्य जिंदगी में लौट नहीं सका। 20 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में एंट्री साल 1994 में महज 20 साल की उम्र में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में ऐसा कदम रखा कि पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले डकैत मोहन गुर्जर के गिरोह में शामिल हुआ और फिर अपने ही गुरु तथा जीजा के हत्यारों की हत्या कर खुद अलग गैंग बना ली। धीरे-धीरे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में उसका नाम खौफ का पर्याय बन गया। हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और लूट जैसे 125 से अधिक मुकदमे उसके नाम दर्ज हुए। जब संसद में गूंजी एनकाउंटर की मांग उसका आतंक इतना बढ़ गया कि साल 2019 में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में खड़े होकर उसके एनकाउंटर की मांग की। संसद में उन्होंने कहा था कि जगन गुर्जर जैसे खूंखार अपराधी के कारण लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और केंद्र सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। किसी डाकू के खिलाफ संसद में इस तरह एनकाउंटर की मांग उठना अपने आप में असाधारण घटना थी। एनकाउंटर का डर, इसलिए करता रहा सरेंडर लेकिन जितना बड़ा उसका आतंक था, उतना ही बड़ा उसके भीतर एनकाउंटर का डर भी था। पुलिस का दबाव बढ़ता तो वह आत्मसमर्पण कर देता। साल 2001 में उसने पहली बार धौलपुर के तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने सरेंडर किया। जेल से बाहर आया तो फिर अपराध में लौट गया। 2009 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में दूसरी बार आत्मसमर्पण किया। इसके बाद भी कोई बदलाव नहीं आया। तीसरी बार 2018 में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने हथियार डाल दिए। पूछताछ में उसने माना था कि बीहड़ों की जिंदगी, गंदा पानी और लगातार भागते रहने की थकान ने उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया। बेटी की कसम भी नहीं बदल सकी आदत सरेंडर के बाद कुछ समय ऐसा भी आया जब लगा कि शायद जगन बदल जाएगा। उसने अपनी बेटी की शादी में अपराध छोड़ने की कसम भी खाई। पत्नी को चुनाव भी लड़वाया, लेकिन हार के बाद फिर हथियार उठा लिए। इसके बाद उसका व्यवहार और ज्यादा अस्थिर होता गया। साल 2019 में वह महज 3 रुपए के खुले पैसों को लेकर दुकानदार से भिड़ गया। दूसरी बार पंचर ठीक से नहीं बनाने पर विवाद कर बैठा। छोटी-छोटी बातों पर हिंसक हो जाना उसकी पहचान बन चुका था। आतंक से बहिष्कार तक का सफर इसी दौरान उसने दो महिलाओं के साथ अमानवीय मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने जैसी वारदात को अंजाम दिया, जिससे पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। कभी धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देने वाला यही डाकू बाद में मीडिया के सामने यह शिकायत करता नजर आया कि उसे मनरेगा में भी काम नहीं मिल रहा और समाज ने पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया है। उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी और परिवार की सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। एक दौर ऐसा जब गांवों में नहीं बजी शहनाई एक समय ऐसा भी था जब उसके डर से गांवों में शादियां तक रुक गई थीं। खुद उसके गांव में लगभग दस साल तक कोई बारात नहीं आई। उसके आतंक का असर सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड तक सीमित नहीं था, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देता था। जेल की बैरक में खत्म हुआ चंबल का अध्याय आखिरकार 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी कहानी खत्म हो गई। आरोप है कि भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने तौलिए से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। जिस व्यक्ति ने तीन दशक तक पुलिस, प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुनौती दी, उसका अंत जेल की चारदीवारी के भीतर हुआ। खौफ, बंदूक और दर्दनाक अंजाम जगन गुर्जर की जिंदगी यह बताती है कि अपराध की दुनिया में बंदूक भले कुछ समय के लिए ताकत दे दे, लेकिन उसका अंजाम अक्सर अकेलापन, डर और हिंसक मौत ही होता है। चंबल के बीहड़ों का यह चर्चित नाम अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है, लेकिन उसके अपराधों की दहशत और उसके जीवन का विरोधाभास लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।

भजनलाल शर्मा ने यमुना जल समझौते को बताया ऐतिहासिक, प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली जोधपुर हाउस में यमुना जल समझौते को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राजस्थान को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता है, और यह समझौता प्रदेश के लिए ऐतिहासिक साबित होगा. उन्होंने कहा कि 29 जून का दिन राजस्थान के लिए ऐतिहासिक है, और प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया.  "कांग्रेस ने नहीं किया समाधान"  मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने वर्षों तक इस मुद्दे का समाधान नहीं किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की पानी की पीड़ा को समझते हुए इसे प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा कि इस समझौते से राजस्थान की प्यासी धरती को पानी मिलेगा.  सीएम भजनलाल ने गृह मंत्री का जताया आभार  भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भी सहयोग के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से यह महत्वपूर्ण पहल संभव हो सकी.  "राजस्थान कर रहा विकास" मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और प्रदेश विकास योजनाओं के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. उन्होंने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में अनेक विकास कार्य हुए हैं, और डबल इंजन की सरकार जनता के विश्वास पर खरी उतरी है.  उन्होंने कांग्रेस पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने कभी जनता के हित में काम नहीं किया. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान में रिफाइनरी परियोजना का उद्घाटन करेंगे. 

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से होगा देश का विकास: राज्यपाल

जयपुर  राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि प्राचीन भारत में आठ लाख गुरुकुल थे। इनमें व्यावहारिक जीवन के लिए 18 विद्याएं और 64 कलाओं का ज्ञान विद्यार्थियों को दिया जाता था। गुरुकुल में समग्र जीवन से जुड़ा ज्ञान विद्यार्थियों को मिलता था। इसमें नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दिया गया था। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति प्राचीन ज्ञान से आधुनिक विज्ञान के विकास के समन्वय से भारत के सर्वांगीण विकास से जुड़ी है।  बागडे सोमवार को पूर्णिमा विश्वविद्यालय में विद्याभारती के सहयोग से आयोजित "भारतीय ज्ञान परंपरा-पारंपरिक ज्ञान से आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार" विषयक पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने 16 वीं शताब्दी में महाराणा प्रताप के दरबारी लेखक चक्रपाणी मिश्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने "विश्व वल्लभ" ग्रन्थ लिखा। इसमें भू जल की खोज, मौसम की भविष्यवाणी, जल शुद्धिकरण, कुंड निर्माण, बावड़ियां और पर्यावरण संरक्षण की विरल जानकारिया हैं। उन्होंने कहा कि यह ग्रन्थ बागवानी, वृक्ष से संबंधित बीमारियां, उन्हें दूर करने के उपायों, कृषि वानिकी आदि की उन्नत तकनीक पर बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां लिए है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परम्परा की यही विशेषता रही है कि वह युगीन संदर्भों में ऐसी उपयोगी तकनीक से जुड़ी थी, जिसे आज आधुनिक विज्ञान कहा जा रहा है।       उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली मुख्य रूप से वैदिक परंपरा थी। हमारे यहां शिक्षा केवल पाठ्य पुस्तकों पर आधारित नहीं थी बल्कि जीवन के सर्वांगीण विकास से जुड़ी रही है। इसमें नैतिकता को सबसे अधिक प्रमुखता दी गई थी। उन्होंने कहा कि प्रभु राम ने भी गुरुकुल शिक्षा पद्धति से शिक्षा पाई। इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम हुए। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र ने दशरथ से राम को आश्रमों में राक्षसों के उत्पात से बचाने के लिए मांग लिया था। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र ने ही सिखाया कि हिंसा का प्रतिकार कई बार जब उसी भाषा में नहीं दिया जाता तो हिंसा से ग्रस्त डरपोक समाज बनता है। हिंसा का प्रतिकार ही हमारे यहां अहिंसा का सर्वोत्तम मार्ग है।    राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजो ने जब देश पर शासन किया तब जो गजेटियर निकाले उनमें यह सामने आया कि हमारे देश में 8 लाख गुरुकुल थे। भारत तब बहुत बड़ा था। पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका आदि भारत में ही थे। गुरुकुल में शिक्षा निशुल्क थी। इनका खर्च आम जन के सहयोग से निकलता था। प्राचीन शिक्षा में ज्ञान मौखिक रूप में अधिक प्रचलित था। श्रुति परंपरा के साथ शिष्य ज्ञान का श्रवण करते थे। उस पर चिंतन और मनन करते थे। व्यावहारिक जीवन के लिए 18 विद्याएं और 64 कलाएं थी। इनका ज्ञान विधार्थी पाते थे। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में समग्र ज्ञान दिया जाता था। शिक्षा कौशल से जुड़ी थी। उन्होंने रणकपुर के जैन मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि शिल्प में यह इसीलिए अद्वितीय है कि इसका निर्माण कला कौशल से हुआ था।        राज्यपाल ने कहा कि लार्ड मैकाले ने इसीलिए भारत की शिक्षा पद्धति बदली कि यहां तब नैतिकता प्रबल थी। समृद्ध विरासत थी। अंग्रेजों ने इसलिए यह तरकीब निकाली की देश की शिक्षा पद्धति यदि बदल दी जाती है तो लंबे समय तक देश को गुलाम बनाए रखा जा सकता है। इसके अंतर्गत देश के उद्योग धंधे बंद कर दिए गए। देश के निवासियों को भूखे मरने पर बाध्य किया गया।     उन्होंने महर्षि कणाद की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अणु परमाणु का ज्ञान सदियों पहले विश्व को दे दिया था परंतु आधुनिक विज्ञान में उनका नाम नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि  दशमलव पद्धति का ज्ञान भारत से शुरू हुआ। इसी से दुनिया में गिनती प्रारम्भ हुई। उन्होंने कहा कि पश्चिम में टुकड़ों टुकड़ों में ज्ञान देने की परम्परा है वहीं भारत आरम्भ से ही समग्र ज्ञान के विज्ञान से जुड़ा रहा। प्राचीन भारत कला, चिकित्सा, धातुविज्ञान आदि सभी में अग्रणी था।  राज्यपाल ने बप्पा रावल की चर्चा करते हुए कहा कि अपने समय में उन्होंने अरबों को भारत से सौ साल के लिए खदेड़ा था। उन्होंने पाकिस्तान में पिंडी यानी विश्राम किया था। उनके नाम से फिर रावल पिंडी नगर बसा था। उन्होंने महर्षि अरविंद घोष के चिंतन आलोक में विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने, संयम और शांति के साथ नैतिक मूल्यों को बढ़ाए जाने का आह्वान किया।       सांसद  मदन राठौड़ ने भारतीय ज्ञान परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में आरम्भ से ही विज्ञान विकसित अवस्था में था। उन्होंने पुराणों की चर्चा करते हुए कहा कि उनमें जो उन्नत विमान, तकनीकी के किस्से कहानियां हैं, उनका आज वैज्ञानिक आधार दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान सोने की चिड़िया कहलाता था, इसलिए पाश्चात्य देश यहां आने के लिए प्रयत्नशील थे। ज्ञान किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, इसे भी हमारे देश ने विश्व को सिखाया।  इससे पहले राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों ने कांफ्रेस के पोस्टर का विमोचन किया। पूर्णिमा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष  शशिकांत सिंधी ने शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

प्रदेशभर में धर्मकांटों की जांच अभियान, 18 जब्त, अनियमितताओं पर चार लाख रुपये के करीब जुर्माना

जयपुर उपभोक्ता मामलात मंत्री श्री सुमित गोदारा के निर्देशानुसार राज्य में निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा उपभोक्ताओं के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा 23 से 25 जून तक प्रदेशभर में धर्मकांटों (वे-ब्रिज) का विशेष सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया।  अभियान के दौरान कुल 311 धर्मकांटों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में 179 संस्थानों पर विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई करते हुए 3 लाख 99 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं गंभीर अनियमितताओं के मामलों में 18 धर्मकांटे भी जब्त किए गए।  निरीक्षण में 116 मामलों में बिना सत्यापन के धर्मकांटे संचालित पाए गए। इसके अलावा 98 मामलों में सत्यापन प्रमाण-पत्र प्रदर्शित नहीं किया गया, 48 मामलों में मानक बाट सत्यापित नहीं मिले, जबकि 27 संस्थानों पर अनिवार्य एक टन मानक भार उपलब्ध नहीं था। वहीं 2 मामलों में निर्धारित अधिकतम स्वीकार्य त्रुटि से अधिक वजन पाया गया, जिससे व्यापारिक लेन-देन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका है।  जिला स्तर पर ब्यावर में सर्वाधिक 34 हजार 500, चूरू में 30 हजार, हनुमानगढ़ में 26 हजार, अलवर में 22 हजार 500 तथा अजमेर में 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। साथ ही अलवर जिले में सर्वाधिक 9 धर्मकांटे जब्त किए गए। विभाग की ओर से बताया कि व्यापारिक लेन-देन में उपयोग होने वाले सभी धर्मकांटों का समय पर सत्यापन कराना, सत्यापन प्रमाण-पत्र का सार्वजनिक प्रदर्शन करना तथा निर्धारित मानक भार उपलब्ध रखना अनिवार्य है। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध विधिक माप विज्ञान अधिनियम एवं नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी धर्मकांटा संचालकों से अपील की है कि वे अपने उपकरणों का समय पर सत्यापन कराएं, आवश्यक मानक भार उपलब्ध रखें तथा सभी वैधानिक प्रावधानों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित करें। विभाग द्वारा भविष्य में भी प्रदेशभर में ऐसे विशेष निरीक्षण अभियान नियमित रूप से संचालित किए जाएंगे, ताकि व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और उपभोक्ताओं का विश्वास कायम रखा जा सके।

आमेर अरावली पैलेस हादसा: निर्माणाधीन दीवार ढही, मलबे में डेढ़ दर्जन लोगों के दबने की आशंका

जयपुर  जयपुर ग्रामीण के आमेर थाना क्षेत्र स्थित ‘अरावली पैलेस’ (तालामोड़) में हुए दर्दनाक हादसे से इस वक्त की बेहद बड़ी और अत्यंत दुःखद खबर सामने आ रही है. निर्माणाधीन दीवार गिरने के बाद मलबे को हटाने के लिए रात-दिन जारी युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे के नीचे से दो और मजदूरों के शव बरामद किए गए हैं. इसके साथ ही इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले कुल मजदूरों की संख्या 3 हो गई है. सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार भारी मलबे को हटाने में जुटी हुई हैं. जैसे-जैसे कंक्रीट और पत्थरों को हटाया जा रहा है, हादसे की भयावहता और साफ होती जा रही है. बाद में निकाले गए दोनों मजदूरों को भी तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  6 मजदूरों की मौत की सूचना, प्रशासन ने की 3 की पुष्टि; दो महिला और एक पुरुष की मौत की पुष्टि की जयपुर ग्रामीण के आमेर थाना क्षेत्र स्थित ‘अरावली पैलेस’ (तालामोड़) में हुए दर्दनाक हादसे से इस वक्त की सबसे बड़ी और नई अपडेट सामने आ रही है. निर्माणाधीन दीवार गिरने के बाद मलबे को हटाने के लिए रात-दिन जारी युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच अब तक 6 मजदूरों की मौत की सूचना है. इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अब तक 3 मजदूरों की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिन तीन मृतकों की पुष्टि हुई है, उनमें दो महिला और एक पुरुष मजदूर शामिल हैं. मलबे के नीचे से निकाले गए अन्य तीन शवों और मजदूरों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की जा रही है. सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार भारी मलबे को हटाने और कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।   

राजस्थान में जल संरक्षण अभियान तेज: वरुण सागर से लेकर नदियों तक डीसिल्टिंग कार्य का शुभारंभ

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने ऎतिहासिक अजमेर जिले में वरुण सागर झील के डीसिल्टिंग कार्य का शुभारम्भ किया। लगभग 100 वर्षों बाद पहली बार झील की खुदाई का कार्य प्रारम्भ होने जा रहा है, इससे झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, भराव क्षेत्र का विस्तार होगा तथा अतिक्रमण हटाकर झील को उसका मूल स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह अजमेर के लिए ऎतिहासिक क्षण है। झील के निर्माण के बाद पहली बार इसकी खुदाई की जा रही है। इससे झील अधिक गहरी होगी, जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी और वर्षा के दौरान अतिरिक्त पानी का बेहतर प्रबंधन होने से शहर को जलभराव की समस्या से भी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटने से झील की प्राकृतिक सुंदरता में भी अभूतपूर्व निखार आएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में अजमेर को विकास की अनेक महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। तारागढ़ किला विकास, लैपर्ड सफारी, साइंस पार्क, आनासागर विकास, वरुण सागर विकास तथा चौरसियावास तालाब के सौन्दर्यीकरण जैसे कार्य अजमेर को पर्यटन के नए केन्द्र के रूप में स्थापित करेंगे। इन परियोजनाओं से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। देवनानी ने बताया कि वरुण सागर झील पर भगवान वरुण देव की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी तथा आसपास के उद्यान का भी व्यापक कायाकल्प किया जाएगा, इससे यह क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनेगा। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के विकास के प्रति पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेशभर में लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से झीलों, तालाबों एवं जल आवक मार्गों की डीसिल्टिंग एवं सफाई का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अजमेर जिले में भी जल संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ष्वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियानष् अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर चुका है। प्रदेश में जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता एवं सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं, इससे राजस्थान जल प्रबंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान वरुण सागर झील एवं अन्य विकास कार्यों का शिलान्यास एवं अवलोकन भी किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी, मंडल अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, सीताराम शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। वरुण सागर की भराव क्षमता बढ़ाने के लिए डीसिल्टिंग का कार्य किया जाएगा। इसके अंतर्गत वरुण सागर से गाद लगभग 188400 सीयूएम निकाली जाएगी। यह कार्य से वरुण सागर की भरात क्षमता में 6.65 एमसीएफटी वृद्धि होगी। मुहामी से रूप नदी लगभग 62 किलोमीटर लंबाई में जंगल सफाई व डीसील्टिंग का कार्य करवाया जाएगा। इसके अंतर्गत रूप नदी में वर्षों से वर्षाकाल में बहकर आ रहे सिल्ट, मिट्टी को निकाला जाएगा। इससे नदी अपनी वास्तविक रूप में आ सकेगी व निर्बाध प्रवाह हो सकेगा। यह कार्य की लागत राशि 12.04 करोड़ रूपए आएगी। डाई नदी, सागरमती नदी व इसकी वितरिकाओं के साथ फूलसागर कायड व बीर के प्राकृतिक नालो, कल्याणीपुरा चैनल की डीसील्टिंग का कार्य करवाया जाएगा। इसके अंतर्गत नदी नालों में पहाड़ों व शहर से आ रहे गाद, मिट्टी व सिल्ट को निकालने का कार्य करवाया जाएगा। डाई नदी, सागरमती नदी में लगातार वर्षों से जमा हो रहे गाद व सिल्ट के कारण नदी प्रवाह में कमी आई है तथा नदी क्षमता भी कम हुई है। इससे किसानों के तटबंधों की जमीन का वर्षा के दौरान लगातार कटाव होता है तथा बाढ़ की परिस्थितियों बनती है। इन परिस्थितियों के निस्तारण के लिए नदीं को अपने वास्तविक रूप में लाने का कार्य करवाया जाएंगे। इस कार्य की लागत राशि 3 करोड़ रूपए आएगी। परियोजना के अंतर्गत सहोदरा नदी (देवरिया बाँध से मुण्डोती बाँध) के लगभग 4.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 15.00 मीटर (बंथली से मुण्डोती बाँध) के लगभग 7.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 25.00 मीटर चौड़ाई एव मुण्डोती बाँध के डाउनस्ट्रीम भाग से मनोहरपुरा ग्राम तक सहोदरा नदी के लगभग 1.35 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 40 मीटर चौड़ाई वाले भाग का डी-सिल्टिंग एवं अवांछित वनस्पतियों की सफाई कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य के अंतर्गत वर्षों से संचित गाद, सिल्ट एवं अन्य अवसादों का निष्कासन कर नदी की जल वहन क्षमता में वृद्धि की जाएगी तथा मुण्डोती बाँध तक जल की उपलब्धता में सुधार होगा। यह कार्य से नदी की डाउनस्ट्रीम जल निकासी क्षमता में वृद्धि होगी। मानसून अवधि में जलभराव एवं बाढ़ की समस्या में प्रभावी कमी आएगी। इसके अंतर्गत सहोदरा नदी से गाद लगभग 364200 सीयूएम निकाली जाएगी। इसकी लागत राशि 5.44 करोड रूपए आएगी। परियोजना के अंतर्गत माशी नदी में गागून्दा एनीकट से गोली एनीकट तक लगभग 4.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 20 मीटर चौड़ाई वाले भाग सुख सागर जलाशय के फीडर चैनल की लगभग 1.80 किलोमीटर लम्बाई में डीसिल्टिंग अवांछित वनस्पतियों की सफाई एव पुलिया मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य के अंतर्गत नदी में वर्षों से संचित गाद, सिल्ट एवं अन्य अवसादों का निष्कासन कर नदी की मूल जल वहन क्षमता पुनस्र्थापित की जाएगी। इससे वर्षा ऋतु के दौरान जल प्रवाह सुचारु होगा तथा तटीय क्षेत्रों में कटाव एवं बाढ़ की संभावनाओं में कमी आएगी। इसके अंतर्गत माशी नदी से गाद लगभग 247200 सीयूएम निकाली जाएगी। इसकी लागत राशि 3.69 करोड रूपए आएगी।  

20 लाख से अधिक कार्यों के साथ जयपुर ने ग्रामीण सेवा शिविर-2026 में शीर्ष स्थान हासिल किया

 जयपुर राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 12 जून से 15 जुलाई तक आयोजित किए जा रहे ग्रामीण सेवा शिविर-2026 में जिला कलक्टर संदेश नायक द्वारा निरन्तर की जा रही प्रभावी मॉनिटरिंग व विभिन्न विभागों द्वारा स्थापित आपसी समन्वय के फलस्वरूप 25 जून तक आयोजित शिविरों में जयपुर जिले ने समग्र प्रदर्शन के आधार पर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्कृष्ट उपलब्धि अर्जित की है। प्रतिदिन उपखण्ड एवं विभागवार की जा रही मॉनिटरिंग का यह परिणाम रहा कि जो उपखण्ड  एवं विभाग निचले पायदान पर थे उन्होंने जिला कलक्टर के मार्गदर्शन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभागों से प्रेरणा प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। जिला कलक्टर ने बताया कि राजस्व विभाग को  रास्ते के कुल 582 प्रकरण प्राप्त हुए थे, जिनमें से 548 का मौके पर ही निस्तारण किया गया है। वहीं जाति, मूल, निवास प्रमाण पत्र हेतु 13,717 प्रकरण आए थे जिनमें से 13,196 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया है। वहीं राजस्व अभिलेखों, खातों में शुद्धीकरण के 12,712 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 12,646 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया है। इन प्रकरणों के साथ-साथ नामान्तरण, सीमांकन, पत्थरगढी, आपसी सहमति से विभाजन, राजकीय प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन, अतिक्रमण, गैर खातेदारी से खातेदारी , आबादी विस्तार आदि के कुल 37,134 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 36,330 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। इसी प्रकार ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छता के कुल 6,46,407 कार्य किए गए हैं। वहीं पंचायती राज विभाग द्वारा अब तक 3,27,851 प्रकरणों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया है तथा 3,12,591 प्रतिभागियों को भी विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान कर लाभान्वित किया गया है। वहीं वन विभाग द्वारा प्राप्त 541 प्रकरणों में से 530 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया है। अब तक कुल 1,91,016 पौधों भी वितरित किए गए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपचार, एनसीडी स्क्रीनिंग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी मुक्त भारत अभियान, पीएमजेवाई के कुल 319987 कार्य संपादित किए गए हैं। इसी प्रकार पशुपालन विभाग द्वारा 33469 बड़े, 53795 छोटे पशुओं की चिकित्सा, एफ एम डी रोग प्रतिरोधक टीकाकरण 93835, एच एस, बी. क्यू, पी वी आर, अन्य रोग प्रतिरोधक टीकाकरण 54274 कृमिनाशक औषधि 94985 पशुओं को पिलाने के साथ मंगला पशु बीमा 12001 सहित कुल 520308 कार्य कर 84340 पशुओं को लाभान्वित किया गया है। वहीं ऊर्जा विभाग, बिजली संबंधित समस्याओं के कुल प्राप्त 23384 प्रकरणों में से 23327 का निस्तारण कर दिया गया है। कृषि विभाग द्वारा 199714 किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ 1017 प्रधानमंत्री फसल बीमा पॉलिसी वितरित की गई हैं। वहीं प्राप्त सभी 731 प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है। इसी प्रकार महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्राप्त सभी 17,28,563 , वहीं आयोजना विभाग द्वारा प्राप्त सभी 13965 प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है इसी प्रकार सहकारिता विभाग द्वारा 1,03,899 किसानों को फसली ऋण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई है। वहीं प्राप्त 119453 प्रकरणों का भी निस्तारण किया है। इसी प्रकार आयुर्वेद विभाग द्वारा 40233 रोगियों को परामर्श, 16750 को औषधि दी गई, वहीं कुल 58295 रोगियों को लाभान्वित किया गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा प्राप्त 14,792 प्रकरणों में से 14,611 प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है। श्रम विभाग द्वारा 25,435 लोगों को पंजीकरण हेतु जागरूक करने के साथ-साथ, 73 टूलकिट आवेदन कर्ताओं की 1,46,000 रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई है। इस तरह सामाजिक न्याय व अधिकारिता, आपदा प्रबंधन एवं सहायता, जल संसाधन, परिवहन, शिक्षा, सैनिक कल्याण, पीडब्ल्यूडी, खाद्य विभाग सहित कुल 22 विभागों द्वारा 198 शिविरों में करीब 20 लाख कार्य कर 17,46,775 ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया है। जिला कलक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण तक सरकार की योजनाओं एवं सेवाओं का त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से लाभ पहुँचाना है।