samacharsecretary.com

महाराष्ट्र के शोलापुर से 53 मजदूरों को आज़ादी दिलाई, प्रतापगढ़ पुलिस ने किया रेस्क्यू

प्रतापगढ़ जिले में पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी मानवीय कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के शोलापुर जिले में बंधक बनाए गए 53 आदिवासी मजदूरों को सकुशल रेस्क्यू कर लिया है। यह कार्रवाई “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य आमजन में विश्वास और अपराधियों में भय का वातावरण स्थापित करना है। जिला पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ बी. आदित्य के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री गजेन्द्र सिंह जोधा के मार्गदर्शन में थाना घंटाली के उप निरीक्षक सोहनलाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यह बड़ी कार्रवाई की। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में 13 महिलाएं और 40 पुरुष शामिल हैं, जो जिले के विभिन्न आदिवासी बहुल गांवों से संबंधित हैं। मजदूरी का झांसा देकर बनाया गया बंधक : दिनांक 22 दिसंबर 2025 को जिला पुलिस अधीक्षक को सूचना प्राप्त हुई कि प्रतापगढ़ जिले के थाना घंटाली, पीपलखूंट एवं पारसोला क्षेत्र के ग्राम वरदा, जामली, मालिया, गोठड़ा, उमरिया पाड़ा, बड़ा काली घाटी, ठेसला, कुमारी सहित अन्य गांवों के महिला-पुरुषों को मजदूरी दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के अकलूज थाना क्षेत्र के जाबुड़ गांव ले जाया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दलाल सीताराम पाटिल (महाराष्ट्र निवासी) एवं खान निवासी अलवर (राजस्थान) ने स्थानीय व्यक्ति की मदद से मजदूरों को इंदौर में ₹500 प्रतिदिन मजदूरी, मुफ्त भोजन व आवास का झांसा दिया। इसके बाद लगभग 100 मजदूरों को शोलापुर ले जाकर अलग-अलग जमींदारों के यहां गन्ने के खेतों में काम पर लगा दिया गया। दलालों द्वारा लाखों की रकम हड़पी : जांच में यह भी सामने आया कि दलाल खान ने जमींदारों से मजदूरों की मजदूरी के रूप में करीब 9.50 लाख रुपये अग्रिम लेकर फरार हो गया, वहीं दलाल सीताराम पाटिल ने भी लगभग 18 लाख रुपये एडवांस के रूप में प्राप्त किए। इसके बाद मजदूरों को न तो मजदूरी दी गई और न ही वापस जाने दिया गया। अत्याचार और अमानवीय व्यवहार : मजदूरों द्वारा मजदूरी मांगने पर उनके साथ मारपीट की गई तथा उन्हें जबरन खेतों के फार्म हाउसों और बाड़ों में बंद कर बंधक बनाकर रखा गया। महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने की जानकारी सामने आई है। कई मजदूर मौका पाकर किसी तरह वहां से भाग निकले, जबकि 53 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया था।पुलिस की तत्परता से रेस्क्यू : सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर उप निरीक्षक श्री सोहनलाल मय टीम मजदूरों के परिजनों के साथ महाराष्ट्र रवाना हुए। कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पुलिस टीम ने अलग-अलग स्थानों से सभी 53 मजदूरों को सकुशल रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान मजदूरों के पास न भोजन था और न ही वापसी का किराया। ऐसे में थाना घंटाली क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों के सहयोग से भोजन, यात्रा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कर सभी मजदूरों को सुरक्षित प्रतापगढ़ लाया गया। मामला दर्ज, आगे की कार्रवाई जारी : इस प्रकरण में थाना घंटाली पर प्रकरण संख्या 128/2025 के तहत आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। सभी रेस्क्यू किए गए मजदूरों को उनके गांव सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। जिला पुलिस की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से न केवल 53 परिवारों को राहत मिली है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि प्रतापगढ़ पुलिस आमजन की सुरक्षा के लिए हर समय तत्पर है और अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है।

शिक्षा सुधार पर मंथन: मंत्री मदन दिलावर ने NCERT की राज्य स्तरीय बैठक का किया शुभारंभ

जयपुर  शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विद्यालयों मे तनाव मुक्त शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूलों को सीखने के आनंद का केंद्र बनने का आह्वान किया है! शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी, सीकर मे आयोजित मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम संबंधित राज्य स्तरीय विमर्श बैठक के उद्घाटन सत्र को मुख्यअथिति के रूप मे संबोधित कर रहे थे! शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने वीडिओ कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपना सम्बोधन देते हुए कहा कि शिक्षा को तनाव मुक्त बनाने के लिए हमें ग्रेड्स और अंको की दौड़ से बाहर निकलकर "सीखने के आनंद" पर ध्यान देना होगा! मनोदर्पण पहल भारत सरकार की इसी दिशा मे एक बड़ा कदम है, जो छात्रों को उनके कठिन समय मे संबल प्रदान करती है! शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला माध्यम नहीं, बल्कि वह छात्र के मानसिक स्वास्थ्य का प्रथम सजग प्रहरी है! मंत्री दिलावर ने कहा कि शिक्षकों को छात्रों के व्यवहार मे आने वाले शुक्ष्म बदलावो को पहचानना होगा! यदि कोई छात्र अचानक चुप रहने लगे या उसके व्यवहार मे चिड़चिड़ापन आये, तो उसे डांटने के बजाय सहानुभूति के साथ सुनने की अवश्यकता है! एक मानसिक रूप से स्वस्थ शिक्षक ही एक स्वस्थ कक्षा का निर्माण कर सकता है! इसलिए शिक्षकों को भी अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा! हम सब मिलकर ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार करें जहाँ हमारे बच्चे न केवल अच्छे डॉक्टर या इंजीनियर बने, बल्कि एक स्वस्थ और संस्कारवान व्यक्तित्व वाले इंसान भी बने! शिक्षा मंत्री कहा कि एक समृद्धि राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब उसके नागरिक मानसिक रूप से सशक्त और खुशहाल हो!  उन्होंने आशा व्यक्त कि की प्रदेश मे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की दिशा मे यह बैठक महत्वपूर्ण साबित होंगी! बैठक मे एन सी ई आर टी, दिल्ली के निदेशक प्रोफ़ेसर दिनेश प्रसाद सकलानी, मनोदर्पण प्रकोष्ठ, एन सी ई आर टी दिल्ली के प्रोफ़ेसर विनोद कुमार सानवाल, शिक्षा विभाग राजस्थान के निदेशक सीताराम जाट, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय बीकानेर के समन्वयक डी पी सिंह उपस्थित थे! सीकर मे आयोजित हो रही इस दो दिवसीय बैठक मे कुल 210 प्रतिभागी भाग ले रहे है! जिनमे से 50% शिक्षक माध्यमिक /उच्च माध्यमिक के! 25% स्कूल कॉउंसलर /विशेष शिक्षक तथा 25% शैक्षिक प्रशासकीय अधिकारी शामिल है! कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों वह हित धारकों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना! प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान वह अंत: क्षेप हेतु आवश्यक कौशलों से परिचित कराना! प्रतिभागियों को मनोदर्पण टेली- हेल्पलाइन व टेली – मानस जैसी राष्ट्रीय पहलो से परिचित करना तथा श्रेष्ठ प्रार्थओ का आदान-प्रदान बढ़ाना व मास्टर ट्रेन तैयार करना है!  

बर्थडे पार्टी के बाद आफ्टर पार्टी का झांसा: उदयपुर मामले में महिला मैनेजर के साथ गंभीर अपराध का आरोप

 उदयपुर  पहले होटल में सीईओ का जन्मदिन मनाया गया. केक कटा, जश्न हुआ और देर रात तक पार्टी चली. इसी जश्न के बीच ‘आफ्टर पार्टी’ का न्योता भी दिया गया, जिसे सामान्य औपचारिकता माना गया. किसी को अंदाजा नहीं था कि यही आफ्टर पार्टी एक महिला मैनेजर की जिंदगी का सबसे भयावह कहानी बन जाएगी. पार्टी खत्म होने के बाद जब महिला मैनेजर को घर छोड़ने की बात आई, तो उसे कार में बैठाया गया. उस कार में पहले से कंपनी का सीईओ और महिला एग्जीक्यूटिव हेड का पति मौजूद थे. भरोसे और पद की आड़ में यह सफर आगे बढ़ा. आफ्टर पार्टी के नाम पर रास्ते में स्मोक खरीदा गया, कार में सभी ने स्मोक किया और इसके बाद ऐसी घटनाएं हुईं, उसे जिसने भी सुना वह दंग रह गया. अब इसी मामले में गैंगरेप का मुकदमा दर्ज हो चुका है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है. उदयपुर के सुखेर थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला ‘आफ्टर पार्टी’ जैसे शब्दों के पीछे छिपे खतरनाक सच को उजागर करता है. FIR में क्या-क्या दर्ज? एफआईआर के मुताबिक, पीड़िता एक निजी कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत है. 20 दिसंबर को कंपनी के सीईओ की बर्थडे और न्यू ईयर पार्टी का आयोजन शोभागपुरा स्थित एक होटल में किया गया था. पीड़िता रात करीब 9 बजे पार्टी में पहुंची. पार्टी देर रात तक चली और करीब 1:30 बजे कार्यक्रम औपचारिक रूप से समाप्त हुआ. पार्टी में कंपनी के सीईओ के साथ महिला एग्जीक्यूटिव हेड और उसका पति भी मौजूद थे. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि पार्टी के दौरान देर रात उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेहोशी जैसी हालत में आ गई. इसी बीच कुछ लोग उसे घर छोड़ने की बात करने लगे, लेकिन तभी महिला एग्जीक्यूटिव हेड ने ‘आफ्टर पार्टी’ का प्रस्ताव रखा और उसे उसमें शामिल होने के लिए कहा. ‘आफ्टर पार्टी’ का न्योता और आगे की कहानी एफआईआर के अनुसार, रात करीब 1:45 बजे पीड़िता को कार में बिठाया गया. कार में पहले से ही सीईओ और महिला एग्जीक्यूटिव हेड का पति मौजूद था. तीनों ने उसे घर छोड़ने का भरोसा दिलाया. रास्ते में एक दुकान से स्मोकिंग सामग्री खरीदी गई और पीड़िता को भी स्मोक करने के लिए कहा गया. स्मोकिंग के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई और वह पूरी तरह बेसुध हो गई. कुछ देर बाद जब पीड़िता को होश आया तो उसने आरोप लगाया कि सीईओ उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा था. इसके बाद सीईओ, महिला एग्जीक्यूटिव हेड और उसके पति ने मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया. पीड़िता के मुताबिक, वह लगातार खुद को बचाने और घर छोड़ने की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक नहीं सुनी. सुबह तक चला सिलसिला पीड़िता ने पुलिस को बताया कि तड़के करीब 5 बजे उसे घर छोड़ा गया. घर पहुंचने पर भी वह पूरी तरह सामान्य नहीं थी. जब उसे पूरी तरह होश आया तो उसने पाया कि उसका एक इयरिंग, मोजे और अंडर गारमेंट्स गायब थे. उसके प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई. मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुकी पीड़िता ने बाद में हिम्मत जुटाकर पुलिस का रुख किया. कार के डैशकैम ने खोले राज इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया, जब पीड़िता और जांच एजेंसियों ने कार के डैशकैम के ऑडियो-वीडियो फुटेज की जांच की. एफआईआर के अनुसार, जांच में सामने आया कि कार में हुई पूरी घटना डैशकैम में रिकॉर्ड हो गई थी. फुटेज में सीईओ, महिला एग्जीक्यूटिव हेड और उसके पति की गतिविधियां कैद होने का दावा किया गया है. यही फुटेज जांच के लिए अहम सबूत माने जा रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई सुखेर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के बाद त्वरित कार्रवाई की. पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया. अदालत ने आरोपियों को चार दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर घटना के हर पहलू की गहन जांच कर रही है, जिसमें होटल पार्टी, आफ्टर पार्टी, कार की लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य शामिल हैं. आफ्टर पार्टी क्या होती है? इस पूरे मामले के बाद ‘आफ्टर पार्टी’ शब्द चर्चा के केंद्र में आ गया है. आम तौर पर आफ्टर पार्टी का मतलब किसी मुख्य कार्यक्रम या इवेंट के खत्म होने के बाद होने वाली दूसरी, अनौपचारिक पार्टी से होता है. आसान भाषा में समझें तो जन्मदिन, कॉन्सर्ट या किसी बड़े शो  के बाद जब कुछ करीबी लोग आपस में आराम से मिलते हैं. यहां भी खाना-पीना, संगीत, बातचीत या हल्की-फुल्की मस्ती होती है. लेकिन इस मामले में आरोप है कि इसी आफ्टर पार्टी के बहाने पीड़िता को एक ऐसी स्थिति में ले जाया गया, जहां उसके साथ गंभीर अपराध किया गया.

प्रकाश पर्व पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संदेश— गुरु गोबिंद सिंह का जीवन साहस और त्याग की प्रेरणा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिखों के दसवें गुरु व खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व (27 दिसम्बर) पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन्होंने अन्याय के विरूद्ध लोगों को संगठित किया। उनका जीवन त्याग, तपस्या और बलिदान का अनुपम उदाहरण है। शर्मा ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाओं को आत्मसात कर देश और प्रदेश के विकास मेें भागीदारी निभाएं।

जब भ्रम टूटा और सच्चाई जीती: राजस्थान पुलिस ने कायम की भरोसे की मिसाल

जयपुर राजस्थान की वीर धरा पर 'खाकी' केवल एक वर्दी नहीं, बल्कि लाखों युवाओं का स्वाभिमान और प्रदेश की सेवा का संकल्प है। जब एक युवा पुलिस मुख्यालय की सीढ़ियां चढ़ने का सपना देखता है, तो उसके पीछे सालों की तपस्या, माता-पिता की उम्मीदें और एक निष्पक्ष व्यवस्था का भरोसा होता है। हाल ही में राजस्थान पुलिस दूरसंचार विभाग द्वारा कांस्टेबल (ऑपरेटर/चालक) भर्ती-2025 के जो परिणाम जारी किए गए हैं, वे इसी अटूट विश्वास और अटूट पारदर्शिता की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं। ​ भ्रामक खबरों का अंत: केवल योग्यता को सलाम ​अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई बड़ी भर्ती प्रक्रिया अपने अंतिम चरणों में होती है, तो कुछ स्वार्थी तत्व और अफवाहों के सौदागर प्रक्रिया को धूमिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि "न्याय केवल तथ्यों और योग्यता के आधार पर होगा, न कि धारणाओं के आधार पर।" ​ पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि विभाग हर एक पहलू पर पैनी नज़र बनाए हुए है। विभाग ने उन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिणाम 'अस्थाई' (Tentative) है। इसका अर्थ यह है कि अभी केवल लिखित और शारीरिक दक्षता के अंकों के आधार पर एक सूची तैयार हुई है, लेकिन अंतिम चयन की अग्निपरीक्षा अभी बाकी है। ​ दस्तावेज़ सत्यापन: जहां दूध का दूध और पानी का पानी होगा ​राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया (Multi-layered verification) है। विभाग ने यह साफ कर दिया है कि 26 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक चलने वाले दस्तावेज सत्यापन (DV) में एक-एक कागज़ की बारीकी से जांच की जाएगी। ​विशेष संज्ञान: विभाग के ध्यान में यह बात आई है कि कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी मूल कैटेगरी के अलावा अन्य कैटेगरी (जैसे OBC से MBC) में फॉर्म भरे हैं। यहां पुलिस का रुख बेहद सख्त और स्पष्ट है—"मात्र सूची में नाम आने से नियुक्ति नहीं मिलेगी।" ​ यह कदम उन मेहनती अभ्यर्थियों के लिए एक सुरक्षा कवच है, जिन्हें डर था कि गलत जानकारी देकर कोई उनकी सीट छीन लेगा। राजस्थान पुलिस ने वचन दिया है कि मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही श्रेणी का अंतिम निर्धारण होगा। यदि कोई अभ्यर्थी गलत पाया जाता है, तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित कर मेरिट के आधार पर अगले पात्र उम्मीदवार को अवसर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि यहाँ "सिफारिश नहीं, केवल सर्टिफिकेट और सच्चाई" चलती है। ​ एक भावुक कहानी: पसीने की बूंद और खाकी का सम्मान ​कल्पना कीजिए शेखावाटी की तपती रेत में सुबह 4 बजे दौड़ने वाले उस युवा की, जिसके पिता मजदूरी करते हैं ताकि बेटा पुलिस में भर्ती हो सके। या उस बेटी की, जिसने गृहस्थी संभालते हुए रातों को जागकर ऑपरेटर परीक्षा की तैयारी की। इन युवाओं के लिए पुलिस विभाग केवल एक नियोक्ता नहीं, बल्कि एक 'अभिभावक' है। राजस्थान पुलिस ने इन भावनाओं को समझा है। इसीलिए प्रेस नोट में यह संवेदना झलकती है कि विभाग अभ्यर्थियों की 'कड़ी मेहनत और प्रयास' का सम्मान करता है। पुलिस विभाग जानता है कि एक भी गलत चयन हज़ारों मेहनती युवाओं का मनोबल तोड़ सकता है। इसीलिए, मेडिकल परीक्षण, चरित्र सत्यापन और शैक्षणिक योग्यता की जांच को इतना कठोर बनाया गया है कि कोई भी 'अपात्र' व्यक्ति सिस्टम में सेंध न लगा सके। ​ कानूनी और नैतिक पक्ष: क्यों निराधार हैं सवाल? ​किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सवाल उठाना आसान है, लेकिन व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण। राजस्थान पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार किया है। कानूनी दृष्टि से देखें तो विभाग ने अपनी हर कार्रवाई को नियमों के दायरे में रखा है। ​अस्थाई सूची: यह फाइनल सिलेक्शन नहीं है, अतः किसी के अधिकारों का हनन नहीं हुआ। ​सत्यापन का अवसर: सभी को अपने दस्तावेज पेश करने का समान अवसर दिया गया है। ​पारदर्शिता: आधिकारिक वेबसाइट पर सूचनाएं साझा कर विभाग ने 'सूचना के अधिकार' और 'न्यायिक सुचिता' का पालन किया है। आमजन को संदेश: अफवाहों से बचें, खाकी पर भरोसा रखें ​इस डिजिटल युग में 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' के दावों पर यकीन करने से बेहतर है कि हम उस विभाग पर भरोसा करें जो दिन-रात हमारी सुरक्षा में तैनात है। राजस्थान पुलिस की भर्ती सेल ने आधुनिक तकनीक और निष्पक्ष जांच के तालमेल से यह सुनिश्चित किया है कि "मेहनत करने वाला कभी हारेगा नहीं, और धोखाधड़ी करने वाला कभी जीतेगा नहीं।" यह परीक्षा केवल अंकों की नहीं थी, बल्कि राजस्थान पुलिस की ईमानदारी की भी थी, जिसमें वह शत-प्रतिशत सफल रही है। विभाग का यह कहना कि "हम आपकी मेहनत और भरोसे के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे," हर अभ्यर्थी के दिल में सुरक्षा का भाव पैदा करता है। सुशासन और पारदर्शिता का नया अध्याय ​अंत में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि राजस्थान पुलिस ने इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सुशासन (Good Governance) का एक नया मानक स्थापित किया है। चयन प्रक्रिया के हर पड़ाव पर पारदर्शिता का पहरा है। यह उन सभी के लिए करारा जवाब है जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह करते थे। ​राजस्थान के युवाओं को अब निश्चिंत होकर अपने अगले पड़ाव की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि उनकी खाकी, उनकी मेहनत और उनकी ईमानदारी का रक्षक स्वयं राजस्थान पुलिस मुख्यालय है।  

विश्व कप विजेता कपिल देव पहुंचे चित्तौड़गढ़, युवाओं में भरा जोश और आत्मविश्वास

चित्तौड़गढ़ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और 1983 विश्व कप विजेता टीम के महानायक कपिल देव गुरुवार को चित्तौड़गढ़ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित सांसद खेलकूद महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह को संबोधित करते हुए कपिल देव ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार द्वारा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए कई मंच उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सांसद खेलकूद प्रतियोगिता भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे आयोजनों से ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलता है और यही खिलाड़ी आगे चलकर देश का नाम रोशन करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खेल के समय आज जैसी सुविधाएं खिलाड़ियों को उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन अब सरकार और विभिन्न संस्थाएं खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। इससे भारत में खेलों का भविष्य उज्ज्वल नजर आता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन का उल्लेख करते हुए कपिल देव ने कहा, “खून-पसीने की कमाई का मजा ही अलग होता है। अगर पूरी लगन और मेहनत से प्रयास किया जाए, तो उसका परिणाम अवश्य अच्छा आता है।” उन्होंने युवाओं से कहा कि जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति चैंपियन ही बने, लेकिन निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। कई बार अगली पीढ़ी वही सपना साकार करती है, जिसके लिए आज मेहनत की जाती है। कपिल देव ने कहा कि मेहनत का परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन प्रयास पूरी तरह हमारे नियंत्रण में होता है। इसलिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए, सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिस तरह आज युवा खिलाड़ी धूप में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, कभी वह स्वयं भी इसी तरह मैदान में बैठकर सीखते थे। आज उन्होंने जो कुछ हासिल किया है, वह उसी मेहनत और सीख का परिणाम है। इससे पूर्व इंदिरा गांधी स्टेडियम पहुंचने पर कपिल देव का भव्य स्वागत किया गया। सांसद सीपी जोशी, जिला कलेक्टर आलोक रंजन, पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी, निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद्र कृपलानी, चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह, कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर एवं बेगूं विधायक सुरेश धाकड़ ने उन्हें उपरणा ओढ़ाकर तथा विजय स्तंभ का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।  

हाड़ कंपा देने वाली ठंड: सर्द हवाओं से कांपा राजस्थान, सीकर और अलवर में दिखी बर्फ की परत

जयपुर उत्तर भारत से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर समाप्त होते ही उत्तरी हवाएं एक बार फिर मैदानी इलाकों में सक्रिय हो गई हैं। इसके चलते राजस्थान में सर्दी ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। सीकर में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में दूसरी बार 1 डिग्री तक पहुंचा है। सीकर और अलवर में सुबह खेतों में फसलों पर बर्फ और ओस की परत जमी नजर आई। अलवर में सूखी घास और लकड़ियों पर भी ओस जम गई। वहीं माउंट आबू में न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जहां गाड़ियों की छतों पर बर्फ की परत दिखाई दी। चार जिलों में कोल्ड वेव की चेतावनी मौसम केंद्र जयपुर ने अगले दो दिनों के लिए चूरू, झुंझुनूं, सीकर और नागौर जिलों में कोल्ड वेव की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में आगामी एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा और सर्द हवाओं के कारण ठंड का असर बना रहेगा। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से नीचे बीते 24 घंटों में फतेहपुर (सीकर) में न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री और नागौर में 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा लूणकरणसर में 5.4, चूरू में 5.8, झुंझुनूं और पाली में 6.8, करौली में 6.9, पिलानी में 7.2, दौसा में 8.1, अलवर में 8.6, बीकानेर और जैसलमेर में 8.8 तथा सिरोही में 9.3 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा। सीकर, फतेहपुर, चूरू और बीकानेर क्षेत्रों में सुबह-शाम सर्द हवाओं के कारण ठिठुरन बनी रही। सर्द हवा के प्रभाव से दिन के अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। 16 शहरों में दिन का तापमान 25 डिग्री से नीचे बुधवार को प्रदेश के सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। सबसे ठंडा दिन सिरोही में दर्ज हुआ, जहां अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रहा। जयपुर में 22.3, अलवर में 22, बारां में 22.6, करौली में 22.7, झुंझुनूं में 22.8, श्रीगंगानगर में 23.5, चूरू में 23.6, बीकानेर और दौसा में 23.8, कोटा में 23.3, अजमेर में 24.3, भीलवाड़ा में 24.4, नागौर में 24.4 और पाली में 24.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज हुआ। अगले एक सप्ताह रहेगा मौसम शुष्क मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि अगले दो दिनों तक सर्द हवाओं का प्रभाव अधिक रहेगा, जिससे तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है। इसके बाद भी अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क बना रहेगा।

ड्रग्स तस्करी पर करारा प्रहार: नागौर में 21 लाख की स्मैक जब्त, दो आरोपी पकड़े गए

नागौर नागौर जिले में मादक पदार्थों की तस्करी पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई में मेड़ता थाना पुलिस ने 21 लाख रुपए कीमत के 101.12 ग्राम स्मैक के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान तस्करी में प्रयुक्त एक वेन्यू कार भी पुलिस ने जब्त की। नागौर जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के निर्देशन में चलाए गए ऑपरेशन नीलकंठ के तहत मोहम्मद आबिद (32) पुत्र मोहम्मद सुलेमान निवासी तारकिशन जी की दरगाह और जयसिंह उर्फ राजेंद्र सिंह (31) पुत्र कल्याण सिंह निवासी जैन मंदिर रेलवे स्टेशन को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी मोहम्मद आबिद नागौर कोतवाली थाना का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर है और पहले कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। दोनों आरोपियों के खिलाफ मेड़ता रोड थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज किया है। मेड़ता रोड थाना अधिकारी सत्यनारायण चौधरी ने बताया कि पुलिस रात्रि गस्त के दौरान गुप्त सूचना के आधार पर रेण कस्बे क्षेत्र में नाकाबंदी कर एक वेन्यू कार (RJ 21 CD 0253) को रोका। तलाशी लेने पर दोनों आरोपियों के पास 101.12 ग्राम स्मैक मिली, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत लगभग 21 लाख रुपए बताई जा रही है। जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बताया कि ऑपरेशन नीलकंठ का उद्देश्य जिले को मादक पदार्थों के जहर से मुक्त करना है। इस कार्रवाई से नशे के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा। पुलिस अब आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर अवैध मादक पदार्थ की सप्लाई चेन का पता लगाएगी, ताकि बड़े तस्करों तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह कार्रवाई जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की सतत मुहिम और युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने के प्रयासों का उदाहरण है।  

रेलिंग लगाने को लेकर बवाल, भीड़ ने राजस्थान पुलिस पर किया पथराव, आधा दर्जन पुलिसकर्मी जख्मी

जयपुर  जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में शुक्रवार तड़के सांप्रदायिक तनाव और पुलिस पर हमले की खबर सामने आई है। बस स्टैंड के पास स्थित एक मस्जिद की रेलिंग लगाने के विवाद ने इतना तूल पकड़ लिया कि उपद्रवियों ने पुलिस जाब्ते पर जमकर पथराव किया। इस हिंसक झड़प में 6 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।   विवाद की जड़ मस्जिद के बाहर सड़क किनारे लगे पत्थरों को हटाने से जुड़ी है। प्रशासन के साथ हुई वार्ता में समुदाय के लोगों ने खुद पत्थर हटाने का आश्वासन दिया था। लेकिन शुक्रवार सुबह करीब 3 बजे, पत्थर हटाने के बाद वहां लोहे की रेलिंग लगाकर बाउंड्री बनाने का काम शुरू कर दिया गया। जब मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने इस निर्माण को रोकने की कोशिश की, तो भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर हमला कर दिया। अचानक हुए पथराव में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को संभलने का मौका नहीं मिला। घायल 6 जवानों को तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. राजीव पचार और डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद भारी जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। चौमूं, हरमाड़ा, विश्वकर्मा और दौलतपुरा थानों की पुलिस तैनात है। उपद्रवियों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है।

IT मैनेजर पीड़िता ने साझा की दर्दनाक कहानी, उदयपुर गैंगरेप कांड में वस्तुएं हुईं लूट

उदयपुर  उदयपुर में चलती कार में प्राइवेट IT कंपनी की मैनेजर से गैंगरेप किया गया। बर्थ-डे पार्टी के बाद घर छोड़ने के बहाने वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़ित युवती ने अपनी ही कंपनी के सीईओ, महिला एग्जीक्यूटिव हेड और उसके पति पर ये गंभीर आरोप लगाए हैं। जब सुबह हल्का-हल्का होश आया, तो सबसे पहली उसकी नजर कपड़ों पर गई. देखा तो एक कान की ईयररिंग नहीं थी, मोजे और अंडरगारमेंट तक गायब थे. प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे. यह कहना है उदयपुर की एक आईटी कंपनी की मैनेजर का. उनकी शिकायत पर कंपनी के सीईओ, एक महिला एग्जीक्यूटिव हेड और उसके पति को चलती कार में गैंगरेप के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. यह है पूरा मामला 20 दिसंबर को कंपनी के सीईओ की बर्थडे और न्यू ईयर पार्टी शोभागपुरा स्थित एक होटल में आयोजित की गई थी. पीड़िता रात करीब 9 बजे पार्टी में पहुंची. कार्यक्रम देर रात तक चला और करीब 1:30 बजे पार्टी समाप्त हुई. इस दौरान पीड़िता की तबीयत खराब होने लगी और वह घर लौटना चाहती थी. कुछ लोग उसे घर छोड़ने की तैयारी में थे, तभी कंपनी की एक महिला एग्जीक्यूटिव हेड ने ‘आफ्टर पार्टी’ का प्रस्ताव रखा. इसके बाद पीड़िता को कार में बैठाया गया. कार में पहले से महिला एग्जीक्यूटिव हेड का पति और कंपनी का सीईओ मौजूद थे. पीड़िता को बताया गया कि उसे घर तक छोड़ दिया जाएगा. रास्ते में कार एक दुकान पर रुकी, जहां से स्मोकिंग से संबंधित सामग्री ली गई. इसके बाद कार के भीतर ही पीड़िता को स्मोक कराया गया. कुछ ही समय में उसकी हालत बिगड़ती चली गई और वह सामान्य स्थिति में नहीं रही. पीड़िता के अनुसार, इसके बाद की घटनाएं उसे स्पष्ट रूप से याद नहीं रहीं. होश आया तो पता चला गैंगरेप हुआ जब उसे हल्का होश आया, तो उसने महसूस किया कि उसके साथ छेड़छाड़ की जा रही है. उसने विरोध किया और रुकने की बात कही, लेकिन उसकी बात नहीं मानी गई. आरोप है कि इस दौरान कार में मौजूद तीनों लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया. यह सिलसिला रात करीब 1:45 बजे से सुबह 5 बजे के बीच बताया गया है. सुबह के समय पीड़िता को उसके घर के पास छोड़ा गया. वह किसी तरह घर पहुंची. कुछ देर बाद जब उसे पूरी तरह होश आया, तो शरीर पर चोटों और दर्द का एहसास हुआ. तभी उसे अपनी ईयररिंग, मोजे और अंडरगारमेंट के गायब होने का पता चला. होश आया तो प्राइवेट पार्ट पर घाव थे कुछ देर बाद उसे थोड़ा होश आया तो सीईओ उनसे छेड़छाड़ कर रहा था। फिर सीईओ, एग्जीक्यूटिव हेड के पति ने उससे रेप किया। बार-बार कहने के बाद तीनों ने सुबह करीब 5 बजे उसे घर छोड़ा। पीड़ित युवती सुबह पूरी तरह होश में आई तो पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी ईयर रिंग, मोजे और अंडर गारमेंट्स नहीं मिले। प्राइवेट पार्ट पर घाव थे। पीड़ित ने कार के डैशकैम के ऑडियो-वीडियो चेक किए। इसमें सीईओ, महिला और उसके पति की सारी हरकत रिकॉर्ड हो गई थी। पीड़ित युवती ने 23 दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज कराई है। वह उदयपुर की ही रहने वाली है। मामले की जांच महिला अपराध की एएसपी माधुरी वर्मा को सौंपी गई है। डैशकैम में सब रिकॉर्ड इसके बाद पीड़िता ने घटनाक्रम को समझने की कोशिश की. उसे याद आया कि जिस कार में वह रात भर रही, उसमें डैशकैम लगा हुआ था. उसने कार के डैशकैम के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड खंगाले. रिकॉर्डिंग में बातचीत और आवाजें मिलीं, जो उसके संदेह की पुष्टि करती थीं. यही रिकॉर्डिंग आगे चलकर जांच का अहम आधार बनी. पुलिस ने तेज की जांच  पीड़िता ने उदयपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जिला पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल के अनुसार, पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई. जांच की जिम्मेदारी एएसपी माधुरी वर्मा को सौंपी गई. मेडिकल जांच में शरीर पर चोटों की पुष्टि हुई, जिससे प्रथम दृष्टया गैंगरेप की आशंका सामने आई. तीनों आराेपी गिरफ्तार  पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आईटी कंपनी के सीईओ जयेश, सह-आरोपी गौरव और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया. तीनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीड़िता को नशे की हालत में लाने के लिए किसी विशेष पदार्थ का इस्तेमाल तो नहीं किया गया. एसपी योगेश गोयल ने बताया कि कार के डैशकैम में रिकॉर्ड ऑडियो जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं. पुलिस का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है. कौन है आरोपी  गिरफ्तार आरोपियों में जयेश प्रकाश सिसोदिया, निवासी स्काई मरीना अपार्टमेंट, सुखाडिया सर्किल; गौरव सिरोही, हाल निवासी हितवाना अपार्टमेंट, सुखेर; और कंपनी की महिला एग्जीक्यूटिव हेड शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर और लोगों से भी पूछताछ की जाएगी.