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हरियाणा के पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प, PDP मॉडल पर बनेगा प्लान

चंडीगढ़. दिल्ली-एनसीआर के 428 करोड़ घरेलू पर्यटन बाजार पर हरियाणा की नजर टिकी हुई है। हरियाणा सरकार प्रदेश को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के लिए चुनिंदा पर्यटन स्थलों और परिसरों को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करेगी। निजी निवेश, तकनीक और विशेषज्ञता के जरिए इन स्थलों पर बेहतर आवास, खान-पान, मनरंजन, आयोजन और साहसिक गतिविधियों जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार की प्राथमिकता पर्यटन विकास के साथ प्रदेश की प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना है। पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम स्वरा राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन में हरियाणा के पर्यटन विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर्यटन को निवेश, रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और विरासत संरक्षण से जोड़कर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने होटल समूहों, टूर आपरेटरों, स्टार्टअप, तकनीकी कंपनियों और स्थानीय उद्यमियों से पर्यटन क्षेत्र में निवेश और भागीदारी का आह्वान किया।

घर में टीवी तक नहीं, नीरू का कबड्डी में कमाल; 2 दिन में 3 मेडल

जींद. जब जींद जिले के संगतपुरा गांव की रहने वाली सुदेश देवी बीपीएल राशन कार्ड पर अनाज लेने के लिए घर से निकली थीं तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी बेटी सात समंदर पार जापान में तिरंगा फहराने जा रही है। 2026 एशियाई खेलों से आई इस खबर ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। मां सुदेश ने एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वे गरीबी रेखा के तहत मिलने वाला राशन लेने जा रही थी तभी उन्हें नीरू के गोल्ड मेडल जीतने का पता चला। एक तरफ राशन लेने की मजबूरी थी तो दूसरी तरफ पोडियम पर सबसे ऊपर खड़ी उनकी बेटी नीरू ढांडा, जिन्होंने एशियाई खेलों की महिला ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 30 में से 28 सटीक निशाने और नया एशियाई रिकॉर्ड 26 साल की नीरू ने निशानेबाजी के फाइनल दौर में जबरदस्त एकाग्रता दिखाई। उन्होंने 30 में से 28 निशाने एकदम सटीक लगाए और नया एशियाई खेल रिकॉर्ड कायम किया। चीन की दिग्गज निशानेबाज सन युनोंग 26 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। नीरू के लिए यह मेडल केवल एक खेल प्रतियोगिता की जीत नहीं है बल्कि उस लंबे आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का नतीजा है जिसे उनके परिवार ने सालों तक झेला है। कबड्डी के मैदान से गन थामने तक की कहानी नीरू शुरुआत से शूटिंग में नहीं थीं। वे स्कूल और स्टेट लेवल पर कबड्डी खेला करती थीं। साल 2018 में जब उनके चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जकार्ता एशियन गेम्स में सिल्वर जीता, तब नीरू के मन में भी इस खेल को अपनाने का विचार आया। सुदेश देवी ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने बयान में कहा, 'हमारे पास केवल दो एकड़ जमीन और कुछ पशु हैं। नीरू कबड्डी खेलती थी, लेकिन लक्ष्य के पदक जीतने के बाद उसने शूटिंग करने की इच्छा जताई। हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हम बंदूक खरीद सकें या ट्रेनिंग का खर्च उठा सकें।' तालाब किनारे टीन के डिब्बों पर साधे शुरुआती निशाने जब जेब खाली हो तो महंगे खेलों का सपना देखना भी भारी पड़ता है। ऐसे में नीरू के चाचा सोमवीर श्योराण मदद के लिए आगे आए। शुरुआत में नीरू के पास अभ्यास के लिए अपनी राइफल तक नहीं थी इसलिए वे लक्ष्य की गन से ही प्रैक्टिस करती थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने बयान में नीरू ने उस दौर को याद करते हुए कहा, 'मेरे चाचा मुझे एक तालाब के पास ले गए और उन्होंने मुझे टीन के एक छोटे टुकड़े पर निशाना लगाने को कहा। मैंने खुद से कहा कि चलो देखते हैं मैं क्या कर सकती हूं, और मैंने वह टेस्ट पास कर लिया।' इसके बाद वे औपचारिक कोचिंग के लिए मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी (भोपाल) पहुंचीं। भारतीय सेना में नायब सूबेदार आज नीरू भारतीय सेना की कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं और महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में अपनी ट्रेनिंग करती हैं। खेल मंत्रालय ने उन्हें TOPS स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप में भी शामिल किया है। 2022 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाली नीरू ने 2025 एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था।

हरियाणा BJP विधायकों की PM मोदी से मुलाकात, 3 अक्टूबर को दिल्ली में होगा कार्यक्रम

चंडीगढ़  हरियाणा की राजनीति में 3 अक्टूबर का दिन भाजपा के लिए अहम रहने वाला है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता की अगुवाई में पार्टी के सभी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ विधायकों की यह मुलाकात दोपहर 3 बजे प्रस्तावित है। इसके लिए प्रदेश भाजपा ने विधायकों को दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री से मुलाकात से करीब एक घंटे पहले दोपहर 2 बजे सभी विधायक हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ लंच करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सभी विधायक प्रधानमंत्री से मिलने जाएंगे। एक साथ होने वाली इस मुलाकात को सरकार और संगठन के बीच समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायकों के साथ प्रधानमंत्री की सीधी बातचीत का कार्यक्रम मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के भाजपा विधायकों से सीधे संवाद कर सकते हैं। हालांकि, बैठक का विस्तृत एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आने की संभावना है। मुख्यमंत्री नायब सैनी की अगुवाई में भाजपा सरकार के कार्यों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी प्रधानमंत्री के समक्ष जानकारी रखे जाने की संभावना है। लंच से लेकर प्रधानमंत्री मुलाकात तक सियासी मायने विधायकों का पहले हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री के साथ एक साथ बैठना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। विधानसभा के भीतर और अपने-अपने क्षेत्रों में विधायकों की भूमिका, जनता से जुड़े मुद्दों और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री के साथ अनौपचारिक चर्चा का अवसर मिलेगा। इसके बाद प्रधानमंत्री के साथ सामूहिक मुलाकात से केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश सरकार और विधायकों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब पार्टी सरकार और संगठन के स्तर पर अपने कामकाज को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में 3 अक्टूबर का कार्यक्रम केवल शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित रहने के बजाय प्रदेश के राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर संवाद का अवसर भी बन सकता है।  

फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल प्रगति योजना से जुड़े, शहरी सुविधाओं पर बढ़ेगा फोकस

 चंडीगढ़  हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल शहरों को केंद्र सरकार की प्रगति योजना से जुड़ी 50 शहरों की सूची में शामिल किया गया है। केंद्र की सूची में इन तीनों शहरों के संबंधित नगर निकायों को भी स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। फरीदाबाद नगर निगम, गुरुग्राम नगर निगम और करनाल नगर निगम इस सूची में शामिल हैं। प्रगति यानी प्रो एक्टिव गवर्नेस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी और जमीनी स्तर पर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल होने वाला तंत्र है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली प्रगति की बैठकों में महत्वपूर्ण परियोजनाओं और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाती है। केंद्र सरकार फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल का चयन, नगर निकायों की भूमिका अहम के अनुसार प्रगति का जोर केवल योजनाएं बनाने पर नहीं, बल्कि उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और नागरिकों को दिखाई देने वाले परिणामों पर है। प्रगति की सूची में शहरों को शामिल किए जाने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि केंद्र सरकार शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन, कचरा प्रसंस्करण, स्वच्छता, हरियाली और नागरिक सुविधाओं को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है। मई 2026 की प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं और कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया था। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था भी शुरू की गई। हरियाणा के तीनों शहरों के लिए इसका सीधा मतलब शहरी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने से है। इसमें कचरे का संग्रह और निस्तारण, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, सड़क और फुटपाथ व्यवस्था, हरित क्षेत्र बढ़ाना तथा नागरिक सेवाओं की निगरानी जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे। फरीदाबाद और गुरुग्राम के मामले में स्वच्छता के साथ वायु प्रदूषण, सड़क की धूल, हरियाली और यातायात प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होंगे।

फायर सेफ्टी में खामियां मिलीं, अंबाला के चमन वाटिका स्कूल के हॉस्टल पर बड़ा एक्शन

 चंडीगढ़  देश-प्रदेश में लगातार सामने आ रही भवन गिरने और आगजनी की घटनाओं से हरियाणा सरकार ने सबक लिया है। खासकर ऐसे भवन, जो पुराने हैं, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुके हैं अथवा जिनमें अग्नि सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हैं, वे जांच के दायरे में हैं। इसके लिए सरकार ने भवनों का सुरक्षा और फायर सेफ्टी ऑडिट आरंभ कर दिया है। इस अभियान की पहली बड़ी कार्रवाई अंबाला के चमन वाटिका स्कूल में हुई है। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर स्थित इस स्कूल परिसर में बने छात्रावासों में फिलहाल विद्यार्थियों के रहने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में सामने आया कि परिसर में अग्निशमन की बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदेश सरकार के निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक स्कूल परिसर में किसी विद्यार्थी को रहने की अनुमति नहीं होगी। चमन वाटिका स्कूल का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि हाल ही में अंबाला में एक भवन गिरा है, जिसमें कई लोग मारे गए। चमन वाटिका का करीब 35 वर्ष पुराना भवन तीन बार बाढ़ का सामना कर चुका है। छात्रावास और स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए यहां छात्राओं के लिए संचालित आवासीय गुरुकुल को मार्च 2026 में बंद कर दिया गया था। गुरुकुल के तत्कालीन प्रबंधन ने चमन वाटिका से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को धोखे में रखकर अक्टूबर 2026 से इसमें दाखिले होने की सूचना प्रसारित की जा रही है, जिसे फायर सेफ्टी विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। अंबाला के अग्निशमन अधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन के पास जो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट है, वह केवल 374.86 वर्ग मीटर के ग्राउंड कवरेज के लिए है, जबकि मौके पर परिसर का वास्तविक कवर क्षेत्र इससे काफी अधिक पाया गया। परिसर के तीन गर्ल्स हास्टल ब्लॉक, मेस और स्विमिंग पूल क्षेत्र मौजूदा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के दायरे में नहीं आते। सरकार ने स्कूल को नया स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही हास्टल और स्कूल भवनों के सक्षम अधिकारी से स्वीकृत नक्शे भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं अग्निशमन विभाग ने साफ कर दिया है कि सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिसर के सभी भवन और वास्तविक क्षेत्र उसके दायरे में होने चाहिए। इसी तरह पुराने अथवा प्राकृतिक आपदा झेल चुके भवनों के लिए संरचनात्मक स्थिरता का प्रमाण भी जरूरी होगा। दिल्ली-अंबाला समेत हालिया घटनाओं के बाद शुरू हुआ सुरक्षा ऑडिट यह संकेत दे रहा है कि सरकार अब संभावित रूप से असुरक्षित भवनों की पहचान कर उन्हें हादसे का कारण बनने से पहले कार्रवाई के दायरे में ला रही है। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले भवनों की जांच पर रहेगा जोर हरियाणा में सुरक्षा ऑडिट की यह कवायद ऐसे समय शुरू हुई है, जब दिल्ली, अंबाला और देश के अन्य हिस्सों में भवन गिरने तथा आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने खासतौर पर स्कूलों, हास्टलों और ऐसे सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जहां बड़ी संख्या में बच्चे और लोग एकसाथ मौजूद रहते हैं। सरकार अब ऐसे भवनों की पहचान और जांच पर जोर दे रही है, जिनकी संरचनात्मक मजबूती संदिग्ध है या जिनमें अग्निरोधी व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। सुरक्षा ऑडिट का उद्देश्य हादसा होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले ही जोखिम वाले भवनों की पहचान करना है।  

पानीपत में 9 कॉलोनियों को वैध कराने की कवायद तेज, 35 अवैध कॉलोनियों पर भी कार्रवाई

 पानीपत नगर निगम ने शहर की नौ कॉलोनियों को वैध कराने की ओर कदम बढ़ाया है। इससे कालोनियों में रहने वाले 50 हजार से अधिक परिवारों को सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहले से और भी बेहतर होने की उम्मीद जगी है। निदेशालय की ओर से बताई गई तकनीकी और दस्तावेजों की कमियों को दूर करने के बाद प्रस्ताव पुनः भेजे गए हैं। वहीं, निगम ने अवैध रूप से विकसित की जा रही 35 कॉलोनियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज करते हुए संबंधित कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए हैं। निगम का उद्देश्य पात्र कालोनियों को राहत देने के साथ नई अवैध कालोनियों के विस्तार पर रोक लगाना है। आयुक्त डा. पंकज राव ने बताया कि निदेशालय की ओर से बताई गई तकनीकी एवं दस्तावेजी कमियों को दूर कर प्रस्ताव दोबारा भेजे गए हैं। अब इन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। पहले निदेशालय ने बताई थीं ये कमियां पहले भेजे प्रस्ताव में निदेशालय की जांच में पाया था कि कालोनी सीमाओं के अक्षांश देशांतर, अप्रोच रोड, खसरा नंबर, सड़क का नेटवर्क, खाली भूमि तथा सैटेलाइट इमेजरी संबंधी जानकारी अधूरी थी। नगर निगम की टाउन प्लानिंग शाखा ने इन सभी बिंदुओं पर सुधार करते हुए संशोधित प्रस्ताव तैयार किए। गुर्जर कॉलोनी और साई कॉलोनी एक्सटेंशन सहित अन्य कॉलोनियों में भी आवश्यक तकनीकी संशोधन किए गए हैं। जानिये… कॉलोनियों के प्रस्ताव के बारे में 1. विकास नगर-1 (38.40 एकड़) 2. गुर्जर कालोनी (3.13 एकड़) 3. साई कॉलोनी एक्सटेंशन (1.30 एकड़) 4.गोपाल कॉलोनी (9.01 एकड़) 5. विर्क नगर (14.02 एकड़) 6. गाबा कॉलोनी (11.58 एकड़) 7. एकता विहार कॉलोनी उझा रोड (1.73 एकड़) 8. ज्योति नगर (2.37 एकड़) और 9. विराट नगर फेज-3 (21.09 एकड़) है। समझें अब तक चली प्रक्रिया के बारे में चार साल के अंतराल में नगर निगम 21 कॉलोनियां वैध करने के लिए प्रस्ताव भेज चुका है। इनमें से दो कॉलोनियां पहले से स्वीकृत हो पाई हैं। 10 कॉलोनियां मानदंड पूरे नहीं कर पाईं। जिनमें से नौ कॉलोनियों के प्रस्ताव सुधार के लिए लौटाए थे। अब संशोधित प्रस्ताव भेजे हैं। इस पर अंतिम निर्णय सरकार और निदेशालय स्तर पर होगा। कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजरों को नोटिस नगर निगम जहां पात्र कॉलोनियों को वैध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, वहीं शहर और आसपास अवैध रूप से विकसित की जा रही 35 कॉलोनियों के मालिकों को नोटिस भी जारी किए हैं। निगम का उद्देश्य एक ओर पुराने निवासियों को राहत देना है, वहीं भविष्य में अनियोजित और अवैध कालोनियों के विस्तार पर रोक लगाना है। मिलेंगे ये पांच बड़े लाभ 1. सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसे विकास कार्यों का रास्ता आसान होगा। 2. सरकारी योजनाओं- आधारभूत सुविधाओं के लिए बजट मिलने की संभावना बढ़ेगी। 3. संपत्तियों के खरीद-फरोख्त और रिकार्ड संबंधी विवाद कम होंगे। 4. पानी, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार में आसानी होगी। 5. क्षेत्र के नियोजित विकास और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति मिलेगी।  

धान किसानों की बढ़ी परेशानी, पोर्टल पर खेत में धान की जगह दिख रहा गन्ना

कैथल प्रदेश के डेढ लाख किसानों ने पीआर धान की खेती छोड़ दी है। पिछली बार 11.07 लाख किसानों ने 73.48 लाख एकड़ का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर कराया था, जबकि इस बार 9,60,874 किसानों ने 57,75,937 एकड़ का पंजीकरण कराया। जो किसान 31 जुलाई तक पंजीकरण नहीं करा पाए, उनके लिए सरकार ने 21 से 29 सितंबर तक पोर्टल फिर खोला था। सात दिनों में सिर्फ 5874 किसानों ने 38 हजार एकड़ का पंजीकरण कराया। अब तहसील और एसडीएम कार्यालय में जांच का काम चल रहा है। काफी किसानों का अब भी डाटा मिसमैच हो रहा है। जिस खेत में धान की फसल खड़ी है, पोर्टल पर उसमें गन्ना लहलहा रहा है। 30 सितंबर तक सत्यापन करना है। यह चुनौती है। भिवानी हिसार में रकबा कब कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीकरण का वेरिफिकेशन चल रहा है, अब अगले दो से तीन दिनों में एरिया का डाटा बढ़ सकता है। धान की सुचारू खरीद के लिए 883 सीसीटी कैमरे लगाए गए हैं, कैमरे मंडियों के गेटों पर लगाए गए हैं। पिछले साल की अपेक्षा भिवानी और हिसार में अब भी सबसे कम पंजीकरण हुआ है। हिसार में 2025 में 6.86 लाख एकड़ का पंजीकरण हुआ था, इस बार अब तक 3074.82 एकड़ का पंजीकरण हुआ है। प्रमुख जिलों का पंजीकरण ब्योरा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अंबाला में 37,507 किसानों ने 2,29345.37 एकड़ फसल का पंजीकरण कराया। इसी प्रकार भिवानी में 70,402 किसानों ने 4,06118.30 एकड़, चरखीदादरी में 43,077 किसानों ने 2,05300 एकड़, फतेहबाद में 59301 किसानों ने 4,17,768.92 एकड़, हांसी में 27,345 किसानों ने 1,63,934.39 एकड़, हिसार में 54,900 किसानों ने 3,07,434.82 एकड़, झज्जर में 31,747 किसानों ने 2,01,481.72 एकड़, जींद में 38,659 किसानों ने 3,72,491.25 एकड़, कैथल में 50,825 किसानों ने 3,89,490.61 एकड़। करनाल में 54,002 किसानों ने 4,07,495.11 एकड़, कुरुक्षेत्र में 45,548 किसानों ने 3,01,091.25 एकड़, पानीपत में 19,727 किसानों ने 1,50,290.30 एकड़, रोहतक में 29,853 किसानों ने 1,75,994.75 एकड़, सिरसा में 91,088 किसानों ने 6,71,925.49 एकड़, सोनीपत में 35,315 किसानों ने 2,15,959.85 और यमुनानगर में 46,382 किसानों ने 2,38,738.81 एकड़ पीआर धान का पंजीकरण कराया है। दो लाख एकड़ मिसमैच, गड़बड़ाया हिसाब पिछले दिनों पटवारियों की हड़ताल के कारण किसान के सामने समस्या खड़ी हो गई है। सत्यापन नहीं होने से पोर्टल पर डाटा मिसमैच हो रहा है। जिस खेत में धान की फसल खड़ृी है पोर्टल पर उसमें गन्ने की फसल दिखाई है। इसी मिसमैच के कारण गेटपास नहीं कट पा रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान मंडियों में गेट पास कटवाने पहुंच रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी फसल मिसमैच दिखाई दे रही है। अकेले यमुनानगर में ही करीब एक लाख 10 हजार एकड़ से अधिक रकबा मिसमैच है। हड़ताल के कारण आई दिक्कत किसानों की बोई फसल का सही ब्योरा दर्ज करने के लिए हर वर्ष गिरदावरी कराई जाती है। सामान्य तौर पर राजस्व विभाग के पटवारी 10 से 15 सितंबर तक खेतों में जाकर यह कार्य पूरा करते हैं। इस बार निर्धारित अवधि में गिरदावरी नहीं हो सकी। बाद में आनन-फानन में गिरदावरी कराई, लेकिन खामियां रह गईं

धान खरीद के पहले दिन किसानों की बढ़ी परेशानी, कहीं खरीद धीमी तो कहीं गेट पास अटके

पानीपत पीआर धार की मंगलवार को सरकारी खरीद शुरू हो गई। ढांड मंडी में 800 क्विंटल धान की खरीद हुई। धान (पीआर) सामान्य का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और धान (पीआर) ग्रेड "ए" का एमएसपी 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया हैं। कुरुक्षेत्र में पहले दिन धान की खरीद शुरू होते ही 13,720 क्विंटल धान की खरीद हुई। इसमें से 1200 क्विंटल थानेसर मंडी में खरीदा गया है। यमुनानगर में पहले दिन 13 अनाज मंडियों में केवल 3400 क्विंटल की खरीद हो पाई है। अधिक नमी के कारण खरीद कम हो पाई। मिसमैच के कारण पोर्टल वेरिफाई न होने के कारण कई किसानों के गेट पास नहीं कट पा रहे हैं। कई मंडियों में पोर्टल में गड़बड़ी भी आड़े आई। करनाल में भी 470 क्विंटल की खरीद हुई। जींद और पानीपत में खरीद नहीं हुई। सिरसा मंडी में अभी पीआर धान की आवक नहीं हुई है। प्राइवेट खरीदार लगा रहे 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव कई किसान तो ऐसे हैं, जो एक सप्ताह से मंडियों में धान लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो पा रही। निजी बिक्री में भाव 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है। सरकारी भाव 2461 रुपये प्रति क्विंटल है। 1509 के भाव 4345 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचे कैथल अनाज मंडी में 1509 धान के मिल रहे भाव से किसान खुश नजर आ रहे हैं। मंगलवार को अब तक के सबसे ज्यादा भाव 4345 रुपये प्रति क्विंटल भाव 1509 के मिले हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही है। किसानों ने बताया कि इससे पहले पीआर धान के भाव इतने कभी भी नहीं मिले हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विटंल भाव ज्यादा मिल रहे हैं। पिछले साल 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिले थे। धान एक, नमी मीटर में नमी की मात्रा अलग अलग करनाल मंडी में निरीक्षण के दौरान डीसी ने मंडी में पहुंचकर धान की ढेरियों पर नमी मापक यंत्र से नमी की जांच करवाई। एक माइश्चर मीटर में धान की नमी 21 प्रतिशत तो दूसरे माइश्चर मीटर में नमी की मात्रा 19 प्रतिशत आई। डीसी ने माइश्चर मीटर ठीक कराने के निर्देश दिए। असंध के विधायक योगेंद्र राणा ने मंगलवार को असंध की नई अनाज मंडी का दौरा कर धान खरीद कार्य शुरू करवाया। जींद-पानीपत में राइस मिलर्स ने नहीं कराया रजिस्ट्रेशन धान की पेराई के लिए जींद और पानीपत में किसी भी राइस मिलर्स ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। सरकार के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। यदि धान खरीद भी लिया तो उठान कैसे होगा। कैथल में मिलर्स मांगें पूरी करने की मांग कर रहे हैं, जबकि करनाल में आढ़ती बकाया आढ़त मांग रहे हैं।  

चंडीगढ़ में ₹645 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस, ED ने 14 ठिकानों पर की छापेमारी

चंडीगढ़  ईडी चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-II ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 जगहों पर तलाशी की। यह जांच हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन आदि के 645 करोड़ सार्वजनिक फंड के कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में है। जांच हरियाणा पुलिस के फरवरी 2026 के एफआईआर पर आधारित है, जिसमें डेवलपमेंट एंड पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक खातों में गड़बड़ी पाई गई थी। तलाशी मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स, सुंदर ज्वेलर्स और बिचौलिये गौरव कंसल सहित ज्वेलरी फर्मों पर हुई। कथित गबन की रकम ज्वेलर्स के खातों से व्यापारिक लेनदेन दिखाकर लेयर्ड की गई और आईएएस अधिकारियों तक पहुंचाई गई। सीबीआई ने पहले ही छह हरियाणा कैडर आईएएस समेत आरोपियों के खिलाफ तीसरा चार्जशीट दाखिल किया है। ईडी ने पहले 4 गिरफ्तार किए, 211 करोड़ की संपत्ति अटैच/जब्त की और 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की। नई तलाशियों से और सबूत मिले। जांच जारी है।

CM सैनी के बड़े निर्देश, किसानों-महिलाओं और युवाओं तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे और उनकी जमीनी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बेस्ट प्रैक्टिस का उद्देश्य केवल आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और आमजन को वास्तविक लाभ देना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने गोशालाओं को दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के तहत 10 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी देने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, विकास एवं पंचायत, सिंचाई एवं जल संसाधन तथा सहकारिता विभाग की योजनाओं और तकनीकी सुधारों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि उर्वरक वितरण प्रणाली को ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ से जोड़ने के बाद सत्यापित किसानों को पीओएस मशीन से खाद मिल रही है। आठ अक्टूबर 2025 से 14 सितंबर 2026 तक इससे 820 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचत दर्ज की गई। कृषि वैज्ञानिकों को खेतों में जाकर किसानों से संवाद करने और कीट-रोगों की समस्या पर शोध करने के निर्देश दिए गए। फसलों में कीटों की समय पर पहचान के लिए ई-पेस्ट सर्विलांस सिस्टम विकसित करने के निर्देश सीएम ने दिए हैं। नई फसल किस्मों और कृषि तकनीक पर शोध के लिए विशेष रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। भावांतर भरपाई योजना में फसल उत्पादन और मंडी बिक्री का प्रभावी सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि पात्र किसानों को पूरा भुगतान मिले। किसान जीवन सुरक्षा योजना में बीमा कंपनियों को पात्र किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप पूरा लाभ देने के निर्देश दिए गए। गांवों में शिक्षा, रोजगार, पानी और स्वास्थ्य पर फोकस प्रदेश में 996 अटल लाइब्रेरियां स्थापित हो चुकी हैं और 86.6 करोड़ रुपये से 1,000 नई लाइब्रेरियां बनाई जा रही हैं। इनमें से 500 का उद्घाटन 25 दिसंबर 2026 को सुशासन दिवस पर करने के निर्देश सीएम ने दिए। बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।     स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को शामलात भूमि पर डेयरी से जोड़ने पर जोर। योजना के तहत अब तक 1,005 आवेदन मिले हैं।     468 ग्रामीण इंडोर जिम स्थापित हो चुके हैं और 234 अन्य के आदेश जारी किए गए हैं।     नहरों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाने तथा माइक्रो-इरिगेशन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के निर्देश।     दूध की गुणवत्ता व मिलावट की नियमित जांच और कैटल फीड की निगरानी के निर्देश दिए गए।     सहकारी समितियों का आनलाइन पंजीकरण तीन कार्य दिवस में किया जाना है। 2019 से अब तक 9,165 समितियां आनलाइन पंजीकृत हुई हैं।     चीनी मिलों में एडवांस टोकन सिस्टम से किसानों का इंतजार 11-15 घंटे से घटकर करीब 1-2 घंटे रह गया है।