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बधाई के अधिकार को लेकर दादरी और नारनौल के मंगलामुखी गुटों में विवाद, तीन लोग हुए घायल

महेंद्रगढ़ हरियाणा में महेंद्रगढ़ के हट्टा बाजार में बधाई मांगने को लेकर किन्नर समुदाय के दो गुट आमने-सामने आ गए. कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें तीन लोग घायल हुए. इस दौरान गाड़ियों में तोड़फोड़ भी कर दी गई. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है. हरियाणा में महेंद्रगढ़ शहर के 11 हट्टा बाजार में दादरी और नारनौल के मंगलामुखी किन्नर गुटों में हिंसक झड़प हो गई. इस विवाद में दादरी से आए 3 किन्नरों को चोटें आई हैं. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की. लोगों का कहना है कि दादरी से मंगलामुखी किन्नर महेंद्रगढ़ शहर पहुंचे थे. इसकी खबर नारनौल के मंगलामुखी किन्नर समाज को मिली. इसके बाद नारनौल के किन्नर भी मौके पर आ गए. दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई. झड़प के दौरान दादरी नंबर की एक गाड़ी और नारनौल नंबर की दूसरी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और क्षतिग्रस्त वाहनों को कब्जे में ले लिया. बाद में दोनों पक्ष शहर पुलिस थाने पहुंचे. शहरवासियों का कहना है कि दोनों गुटों के बीच यह विवाद क्षेत्र में बधाई के अधिकार को लेकर है. दादरी क्षेत्र से एक नया गुट महेंद्रगढ़ में सक्रिय हो गया है और इलाके पर अपना अधिकार जता रहा है, जिसका स्थानीय गुट विरोध कर रहा है. लोगों ने लगाए जबरन वसूली के आरोप शहरवासियों का कहना है कि कुछ किन्नर समूह अब लोगों से जबरदस्ती पैसे वसूल रहे हैं, जिससे आमजन में असंतोष बढ़ रहा है. उनका कहना है कि पहले किन्नर परंपरागत रूप से मांगलिक अवसरों पर आशीर्वाद देते थे और स्वेच्छा से मिलने वाली भेंट से अपना जीवन यापन करते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. इस मामले को लेकर शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन में दादरी से आए गुट की गतिविधियों पर रोक लगाने तथा जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है. संगठनों ने प्रशासन से शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आमजन को राहत दिलाने की अपील की है.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए फरीदाबाद के यात्रियों को अभी करना होगा इंतजार, एक साल में तैयार होगा नया रास्ता

फरीदाबाद फरीदाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए फिलहाल यात्रियों को लंबा और समय लेने वाला सफर तय करना पड़ रहा है. ग्रीन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी भले ही 35 मिनट में सिमट जाएगी, लेकिन अभी इसके पूरा होने में करीब एक साल बाकी है. ग्रीन एक्सप्रेसवे पूरा होने के बाद आसान होगा रास्ता नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण शुरू हो चुका है, लेकिन फरीदाबाद के लोगों के लिए वहां तक पहुंचना अभी भी आसान नहीं है. बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सेक्टर-65 से एयरपोर्ट तक ग्रीन एक्सप्रेसवे का निर्माण जारी है, जिसे पूरा होने में अभी करीब एक साल का समय लगेगा. करीब 31 किलोमीटर लंबे इस ग्रीन एक्सप्रेसवे का 24 किमी हिस्सा फरीदाबाद और 7 किमी हिस्सा ग्रेटर नोएडा में आता है. जून 2023 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि 30 प्रतिशत हिस्सा अभी बाकी है. शुरुआत में इसकी लागत 1600 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन हरियाणा सरकार की आपत्ति के बाद 11 किमी हिस्से को एलिवेटेड बनाने का फैसला लिया गया. दरअसल, एक्सप्रेसवे के कारण नए सेक्टर दो हिस्सों में बंटने का खतरा था, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया. इसके बाद परियोजना की लागत बढ़कर 3200 करोड़ रुपये हो गई. फिलहाल फरीदाबाद से एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए तीन मुख्य रास्ते हैं. पहला, यमुना पर बने पुराने पुल का रास्ता, जहां गांवों की संकरी गलियों से गुजरते हुए करीब 40 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है और लगभग 2 घंटे लगते हैं. दूसरा रास्ता कालिंदी कुंज के जरिए है, जहां दूरी करीब 85 किमी हो जाती है और कैब का किराया 1250 से 1400 रुपये तक आता है. तीसरा विकल्प पलवल का है, जहां करीब 70 किमी की दूरी तय करने में लगभग 2 घंटे लगते हैं और कैब का किराया करीब 1300 रुपये है. अभी तक हरियाणा रोडवेज की ओर से फरीदाबाद से एयरपोर्ट के लिए कोई सीधी बस सेवा शुरू नहीं की गई है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि फरीदाबाद से अलीगढ़ के लिए कुछ बसें संचालित होती हैं. ग्रीन एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद फरीदाबाद से एयरपोर्ट की दूरी महज 35 मिनट में तय की जा सकेगी. तब तक के लिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा फरीदाबाद के यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प बना हुआ है, जहां करीब 42 किमी की दूरी डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकती है.

कल से बढ़ेगा हाईवे का खर्च, हरियाणा में टोल टैक्स 5% महंगा

चंडीगढ़. राष्ट्रीय राजमार्गों पर बुधवार से निजी वाहनों में यात्रा करना महंगा होगा। मंगलवार की रात 12 बजते ही टोल की नई दरें लागू हो जाएंगी। टोल में औसतन पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। विशेषकर दिल्ली-गुरुग्राम, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे सहित प्रमुख हाईवे पर आने-जाने वालों का मासिक खर्च बढ़ेगा। राज्य में कुल 75 टोल प्लाजा हैं, जिन पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की ओर से टोल लिया जाता है। नई दरों के तहत अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए टोल शुल्क में बढ़ोतरी लागू होगी। यह बढ़ोतरी थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर तय की जाती है। नकद भुगतान पर पूरी तरह रोक रहेगी और केवल फास्ट टैग या डिजिटल भुगतान ही मान्य होगा। सबसे व्यस्त रहने वाले दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे (एनएच-48) पर खेड़की दौला टोल प्लाजा पर 5 से 15 रुपये तक बढ़ाए गए हैं। यहां पिछले साल नवंबर में भी टोल दरों में 15 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। हिसार-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-152 पर थाना टोल प्लाजा पर हर श्रेणी में 5 से 10 रुपये रेट बढ़ेगा। पहले कार/जीप/वैन के लगभग 85 से 95 (प्रति टोल प्लाजा, औसत) थे। अब नई दरों के अनुसार अब यह दरें 90 से 105 रुपये होंगी। प्रति यात्रा 5 से 10 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। हल्के वाणिज्यिक वाहनो को पहले 140 से 160 रुपये देने पड़ते थे। अब 150 से 175 रुपये देने होंगे। बस/ट्रक (2-एक्सल) वाहनों को पहले 290 से 320 रुपये तक देने पड़ते थे जो अब एक अप्रैल से 310 से 350 रुपये तक होंगे। इस श्रेणी के वाहनों की टोल दरों में 20 से 30 तक बढ़ोतरी की गई है। भारी वाहन (मल्टी-एक्सल) श्रेणी के लिए पहले 450 से 500 रुपये थे। नई दरें 480 से 540 रुपये तक होंगी। हालांकि यह दरें अलग-अलग टोल प्लाजा पर दूरी और प्रोजेक्ट के हिसाब से थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। फस्ट टैग की वार्षिक पास की फीस भी 3000 रुपये से बढ़कर 3075 रुपये हो जाएगी। अब नकद भुगतान पर पूरी तरह रोक रहेगी और केवल फास्ट टैग या डिजिटल भुगतान ही मान्य होगा।

सेक्टर-47 में खुदाई के दौरान टूटी मास्टर पाइपलाइन, 42 से 75 सेक्टरों में मचा हाहाकार, पुलिस केस दर्ज

गुरुग्राम गुरुग्राम के सेक्टर-47 में खुदाई के दौरान मुख्य पाइपलाइन फटने से 34 सेक्टरों और गांवों में पानी की सप्लाई रुक गई है। जीएमडीए मरम्मत कार्य में जुटा है। लोगों को पानी संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। गुरुग्राम में पाइपलाइन फटने से जल संकट; 34 सेक्टरों में पानी की सप्लाई ठप गुरुग्राम के बख्तावर चौक के पास खुदाई के दौरान 1200 एमएम की मुख्य पाइपलाइन फटने से सेक्टर-42 से 75 तक के लगभग 34 सेक्टरों समेत कई गांवों में पानी की सप्लाई ठप हो गई है। यह हादसा रविवार शाम एक व्यावसायिक परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान हुआ। इसके बाद जीएमडीए ने दोषी एजेंसी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अस्थायी मरम्मत का काम जारी है ताकि जल्द पानी की आपूर्ति शुरू की जा सके। अधिकारियों ने लोगों से पानी का सीमित इस्तेमाल करने की अपील की है। निर्माण कार्य के दौरान फटी पाइप रविवार को सेक्टर 47 में निर्माणाधीन एक व्यावसायिक परियोजना की तरफ से की जा रही खुदाई के दौरान 1200 एमएम की एक मास्टर पेयजल पाइपलाइन टूट गई। इसके क्षतिग्रस्त होने के बाद जीएमडीए हरकत में आया और चंदू बुढेड़ा से सेक्टर-51 के बूस्टिंग स्टेशन की तरफ हो रही पानी की सप्लाई को रोक दिया। बताया जाता है कि इससे कम से कम 34 सेक्टरों और कई गांवों में पानी की सप्लाई रुक गई। इस बूस्टिंग स्टेशन से सेक्टर-42 से लेकर सेक्टर-75 तक पानी की सप्लाई होती है। एजेंसी के खिलाफ पुलिस कंप्लैंट इसके बाद जीएमडीए ने कॉन्ट्रैक्टिंग एजेंसी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जीएमडीए की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, सेक्टर 47 में मेन लाइन तब टूटी जब कॉन्ट्रैक्टिंग एजेंसी वहां खंभे लगाने के लिए कंस्ट्रक्शन का काम कर रही थी। घटना रविवार शाम को हुई। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान रिग मशीन की जद में आने के कारण उक्त पाइपलाइन टूटी। एक अधिकारी ने बताया कि हम टूटे हिस्से पर एक क्लैंप लगाकर अस्थायी मरम्मत कर रहे हैं ताकि पानी की सप्लाई जल्द से जल्द शुरू की जा सके। पक्की मरम्मत में लगेगा टाइम अधिकारी ने बताया कि अभी पक्की मरम्मत नहीं की जा रही है। पक्की मरम्मत के लिए एक खास तरह का मैकेनिकल जॉइंट की जरूरत पड़ेगी। यह सामान मंगाने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। पाइपलाइन को पिछले साल ही ग्रीन बेल्ट में शिफ्ट कर दिया गया था लेकिन सेक्टर रोड के अंदर काम के दौरान यह लाइन रिग मशीन की चपेट में आकर टूट गई। पाइप फटने के तुरंत बाद दोनों तरफ से टीमें मौके पर पहुंची। काम में तेजी लाने के लिए साइट से पानी निकालने का काम भी किया गया। इससे मरम्मत में देरी हुई है। लोग बोले- कब आएगा पानी नहीं दी जा रही जानकारी अधिकारी ने यह भी बताया कि घटना के लिए जिम्मेदार कॉन्ट्रैक्टिंग एजेंसी अपने खर्च पर मरम्मत का काम करा रही है। जीएमडीए इस काम में तकनीकी मदद कर रहा है। इस बीच प्रभावित इलाकों में रहने वाले निवासियों ने पानी की सप्लाई फिर से शुरू होने के समय को लेकर साफ जानकारी नहीं मिलने की बात कही है। लोगों का कहना है कि अभी तक जमा हुए पानी से ही काम चल रहा था। यदि पानी की सप्लाई बाधित रही तो मुश्किल हो जाएगी। फिलहाल सोसाइटियां स्टोर किए पानी से काम चला रही हैं।

CM सैनी का बड़ा कदम: सफाई व्यवस्था होगी स्मार्ट, कैमरों से होगी निगरानी

चंडीगढ़. हरियाणा में स्वीपिंग मशीनों की निगरानी के लिए कैमरे लगाए जाएंगे। सफाई कर्मचारियों के लिए एक जैसी ड्रेस लागू की जाएगी। सभी सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू किया जाएगा और साथ ही नई जगह भी तलाशी जाएंगी। बरसाती मौसम में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए अभी से तैयारियां शुरू की जाएंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई स्थानीय निकाय विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिए गए। इस दौरान वर्षा से पहले ड्रेन को सफाई, जल निकासी और सफाई व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां जल निकासी में दिक्कत है, उन स्थानों की पहचान कर वहां वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं। ऐसे स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के विकल्प तलाशे जाएं, ताकि वर्षा जल का संचयन हो सके और जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सके। बैठक में बताया गया कि सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आरआइएफडी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ी है। जीपीएस आधारित कचरा कलेक्शन सिस्टम कारगर रहा है। स्वीपिंग मशीनों की निगरानी के लिए चार कैमरे लगाए जाएंगे। एक आगे की ओर, एक ऊपर, एक नीचे और एक पीछे की ओर। यदि सफाई के दौरान मशीन का नीचे लगा सेंसर बंद पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसी को भुगतान नहीं किया जाएगा। एजेंसियों को हर महीने अपने बिल के साथ काम से संबंधित वीडियो फुटेज भी जमा करनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच की जा सके। इस व्यवस्था में 1250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पेनल्टी का प्रावधान किया गया है, जिससे एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी और काम में लापरवाही नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को ड्रेस, जूते और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। पूरे हरियाणा में कार्यरत सेनेटरी वर्करों के लिए एक जैसी ड्रेस लागू की जाएगी। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में सफाई व्यवस्था, जल निकासी और पानी की उपलब्धता को लेकर सुनिश्चित किया जाएगा कि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. साकेत कुमार, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, विभाग के निदेशक मुकुल कुमार ने भी अपनी बात रखी।

विज्ञापन संख्या 01/2023 के तहत चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की होगी जांच, अंबाला से गुरुग्राम तक तय हुईं तारीखें

चंडीगढ़ हरियाणा में पिछले साल भर्ती 13 हजार 246 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जाएगा। राज्य सरकार ने विज्ञापन संख्या 01/2023 के तहत चयनित कॉमन काडर ग्रुप-डी के 13 हजार 246 कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। हरियाणा में पिछले साल भर्ती 13 हजार 246 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन  राज्य सरकार ने विज्ञापन संख्या 01/2023 के तहत चयनित कॉमन काडर ग्रुप-डी के 13 हजार 246 कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। पंचकूला में उपायुक्त तो शेष अन्य जिलों में मंडलायुक्त के स्तर पर यह कार्य किया जाएगा। मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अंबाला मंडल में 20 अप्रैल को 1451 कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इनमें 1417 कर्मचारी विभिन्न विभागों में तैनात हैं, जबकि 34 कर्मचारी मंडल आयुक्त कार्यालय से संबद्ध हैं।  करनाल मंडल में 21 अप्रैल को कुल 1662 कर्मचारियों का सत्यापन किया जाएगा  इनमें से 1584 कर्मचारी विभागों में कार्यरत हैं जबकि 78 कर्मचारी मंडल आयुक्त कार्यालय से संबद्ध हैं। रोहतक मंडल में 22 और 23 अप्रैल को 3750 कर्मचारियों का सत्यापन किया जाएगा। इनमें से 3389 कर्मचारी विभागों में कार्यरत हैं तथा 361 कर्मचारी मंडल आयुक्त कार्यालय से संबद्ध हैं। हिसार मंडल में 24 और 27 अप्रैल को 2918 कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इनमें 2585 कर्मचारी विभागों में कार्यरत हैं जबकि 333 कर्मचारी मंडल आयुक्त कार्यालय से संबद्ध हैं। फरीदाबाद मंडल में 28 अप्रैल को 960 कर्मचारियों का सत्यापन किया जाएगा, जिनमें 954 विभागों में कार्यरत हैं तथा छह कर्मचारी मंडल आयुक्त कार्यालय से संबद्ध हैं। गुरुग्राम मंडल में 29 अप्रैल को 1841 कर्मचारियों का सत्यापन किया जाएगा, जिनमें 1801 विभागों में कार्यरत हैं तथा 40 कर्मचारी मंडल आयुक्त कार्यालय से संबद्ध हैं। पंचकूला में 30 अप्रैल को 664 कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इनमें चंडीगढ़, पंचकूला तथा विभिन्न विभागों एवं मंडल आयुक्त कार्यालयों से संबद्ध शेष अभ्यर्थी शामिल होंगे। सभी मंडल आयुक्तों तथा उपायुक्त पंचकूला से अनुरोध किया गया है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बायोमेट्रिक सत्यापन के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक स्टाफ एवं संसाधन उपलब्ध करवाएं। साथ ही सत्यापन के उपरांत उपस्थित, अनुपस्थित तथा सत्यापित उम्मीदवारों की संख्या संबंधी रिपोर्ट भी उपलब्ध करवाने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग का नया फरमान, ओपीडी मरीजों के लिए निशुल्क स्कैनिंग सुविधा हुई बंद

अंबाला  कैंट व सिटी के नागरिक अस्पतालों में पीपीपी मोड पर चल रहे डायग्नोस्टिक केंद्रों में नि:शुल्क स्कैनिंग सुविधाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग के एक ताजा फरमान ने मरीजों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। नियम के मुताबिक अब केवल अस्पताल में दाखिल मरीजों के ही नि:शुल्क यानी बीपीएल के तहत एमआरआई और सीटी स्कैन किए जाएंगे। जिले के दो बड़े नागरिक अस्पतालों में इस नियम को लेकर अलग-अलग कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। सिटी में जहां इसका पालन हो रहा है तो वहीं कैंट के नागरिक अस्पताल में अभी छूट दी जा रही है। यही कारण है कि मरीज असमंजस में फंस गए हैं। अनावश्यक स्कैन रोकने के लिए उठाया कदम स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले के नागरिक अस्पतालों में अनावश्यक तरीके से चल रहे निशुल्क सीटी स्कैन व एमआरआई पर शिकंजा कसने के लिए यह कदम उठाया है। सिटी व कैंट के नागरिक अस्पताल में अब ओपीडी के आधार पर मुफ्त सीटी स्कैन और एमआरआइ की सुविधा बंद कर दी गई है। 25 मार्च को जारी हुए आदेशों के बाद स्कैन के लिए मरीज को कुछ समय के लिए अस्पताल में फाइल बनाकर भर्ती होना पड़ेगा। ऐसे में अब मरीजों के लिए भी परेशानी बढ़ गई है। केस-1 : ओपीडी में भी स्पष्ट नहीं निर्देश सिटी के मनमोहन नगर निवासी सुनीता ने बताया कि बाइक से गिरने के कारण बेटे के सिर में चोट आई थी। तीन दिन से निजी अस्पताल में उपचार करवा रही हूं। स्कैन करवाने के लिए सिटी के नागरिक अस्पताल में गई तो उन्हें स्कैन से मना कर दिया गया। बोले कि पहले अस्पताल में दाखिल होना जरूरी है। बाद में पता चला कि कैंट में स्कैन हो रहा है तो अपने पति को भेजकर वहां से अपना स्कैन करवाया। अगर आदेश है तो उन्हें स्पष्ट तौर पर लगाया जाना चाहिए। केस-2 : सेंटर के कर्मी बोले- नहीं मिले ऑर्डर सोनिया कॉलोनी निवासी रजनी ने बताया कि वह अपनी टांगों में असहनीय दर्द के कारण आ रही हैं। पहले एक्स-रे करवाया था लेकिन उससे कुछ स्पष्ट नहीं हुआ। सीटी स्कैन के लिए बोला गया है लेकिन ओपीडी में जाते हैं तो वो दाखिल होने की बात बोलते हैं व काउंटर में जाते हैं तो वो अभी इस तरह का कोई ऑर्डर नहीं आने की बात बोल रहे हैं। ऐसे में वह असमंजस में हैं। अनावश्यक सीटी स्कैन व एमआरआई को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। अस्पताल में कुछ समय दाखिल होने के बाद ही नि:शुल्क सीटी स्कैन व एमआरआई होंगे ताकि उनके पास मरीज का पूरा रिकॉर्ड हो। यह निर्देश जारी कर दिए गए है। – डाॅ. सुखप्रीत सिंह, पीपीपी मोड सुविधा, नोडल अधिकारी।

हरियाणा सरकार की बड़ी पहल, बेसहारा पशुओं के लिए हसनपुर गांव में खुलेगा आधुनिक अस्पताल और जीन बैंक

गुरुग्राम गुरुग्राम और नूंह प्रशासन मिलकर हसनपुर गांव में 100 एकड़ जमीन पर हरियाणा का पहला 'गौ अभ्यारण्य' बनाने जा रहे हैं। यहां न सिर्फ बेसहारा पशुओं को रखा जाएगा, बल्कि बीमार गायों के लिए अस्पताल और देसी नस्लों के लिए जीन बैंक भी बनेगा। इससे शहरों में ट्रैफिक जाम और हादसों से राहत मिलेगी।    गुरुग्राम-नूंह सीमा पर 100 एकड़ में बनेगा राज्य का पहला गौ अभ्यारण्य, 10 हजार गोवंश को मिलेगा आशियाना गुरुग्राम नगर निगम और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने मिलकर नूंह जिले के तावडू के हसनपुर गांव में हरियाणा का पहला गौ अभ्यारण्य स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को हरियाणा के विकास और पंचायत विभाग के महानिदेशक के पास आखिरी मंजूरी के लिए भेजा गया है। सड़कों पर लावारिस घूम रहे पशुओं को सीधे इस अभ्यारण्य में भेजा जाएगा। इससे शहर की यातायात व्यवस्था सुधरेगी और हादसों पर लगाम लगेगी। नगर निगम ने इस संबंध में नूंह के जिला उपायुक्त से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। बता दें कि शहर में दस हजार से अधिक पशु सड़कों पर खुले में घूम रहे हैं। निगम के पास जो गौशालाएं हैं उनमें अब मवेशियों को रखने की जगह नहीं है। नगर निगम और जीएमडीए की इस योजना से मानेसर, गुरुग्राम, सोहना और नूंह के लोगों को सड़कों पर खुले में घूम रहे पशुओं से राहत मिलेगी। ग्राम पंचायत ने जमीन देने के लिए प्रस्ताव पास किया इस परियोजना के लिए हसनपुर गांव में लगभग सौ एकड़ पंचायत की जमीन को चिन्हित किया गया है। सरकारी राजस्व दस्तावेजों में यह जमीन पहले से ही गायों के चरने वाली जगह के रूप में दर्ज है। हसनपुर ग्राम पंचायत ने साल 2023 में ही अपनी जमीन देने का विशेष प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। नगर निगम आयुक्त और विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों में यह बात सामने आई थी कि शहरों में बेसहारा पशु कूड़ा और प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी अकाल मृत्यु हो रही है। खाली जमीन पर अवैध कब्जों पर रोक लगेगी नूंह के उपायुक्त ने इस पहल की सराहना करते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज गायों के चरने वाली ऐसी सभी खाली जमीनों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए। ऐसा करने से एक तरफ बेसहारा पशुओं को रहने के लिए एक सुरक्षित जगह मिल जाएगी। जमीन पर होने वाले अवैध कब्जों, अतिक्रमणों पर भी प्रभावी रूप से पूरी तरह लगाम लग सकेगी। पशु अस्पताल भी बनेगा गौ अभ्यारण्य में विशेष रूप से भारत की देसी गायों को बचाने और उनके जीन बैंक को सुरक्षित रखने पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशासन इस जगह को पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी विकसित करेगा। पूरी जगह को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। बीमार पशुओं के बेहतर इलाज के लिए एक अस्पताल बनाया जाएगा। चारदीवारी, पीने के पानी की पक्की व्यवस्था और अलग-अलग उम्र के गोवंश के लिए अलग बाड़े भी बनाए जाएंगे। गुरुग्राम और मानेसर निगम रखरखाव करेंगे इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार से 25 करोड़ रुपये की शुरुआती धनराशि की मांग की गई है। इसके जाने के बाद इसके नियमित रखरखाव और संचालन का पूरा खर्च गुरुग्राम और मानेसर निगम मिलकर वहन करेंगे। हसनपुर गांव की पंचायत ने प्रशासन से मांग की है कि इस अभ्यारण्य में पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता दी जाए। सरकार भी ऐसी पंचायतों की तारीफ कर रही है जो गायों के लिए जमीन दान कर रही हैं। प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम, ''नूंह के गांव हसनपुर में गौ अभ्यारण्य तैयार करने की योजना है। इसको लेकर प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है।''

नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से टोल टैक्स में 5% की बढ़ोतरी, यात्रियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

दिल्ली नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को नए वित्तीय वर्ष (2026-27) की शुरुआत के साथ ही महंगाई का झटका लगने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मंगलवार रात नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को नए वित्तीय वर्ष (2026-27) की शुरुआत के साथ ही महंगाई का झटका लगने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मंगलवार रात 12 बजे से टोल दरों में औसतन 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से विशेष रूप से दिल्ली-गुरुग्राम, कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का उपयोग करने वाले लाखों यात्रियों का मासिक बजट बढ़ जाएगा। प्रमुख रूटों पर नए रेट्स का असर NHAI के अधिकारियों के मुताबिक, टोल की कीमतों में यह वृद्धि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में बदलाव के आधार पर की गई है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर सराय काले खां से मेरठ तक का सफर अब पहले से महंगा होगा। इसी प्रकार, गुरुग्राम के खेड़की दौला टोल प्लाजा पर भी निजी और वाणिज्यिक वाहनों के लिए प्रति ट्रिप शुल्क बढ़ा दिया गया है कमर्शियल वाहनों पर सबसे ज्यादा मार माल ढुलाई करने वाले भारी वाहनों (ट्रकों और ट्रेलरों) के लिए टोल दरों में की गई बढ़ोतरी से परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि टोल बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं, जैसे फल और सब्जियों के दामों में भी मामूली उछाल आ सकता है। मासिक पास धारकों के लिए नई दरें टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए राहत सीमित कर दी गई है। उनके मासिक पास की वर्तमान दर, जो पहले ₹330 (अनुमानित) थी, उसे बढ़ाकर अब ₹345 से ₹350 के बीच किया जा सकता है।

शिक्षा विभाग ने चिराग योजना के तहत दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र किया अनिवार्य, केवल सत्यापित आय वाले परिवारों को मिलेगा लाभ

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चिराग योजना के तहत 47,250 सीटें निर्धारित की हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य किया गया है, जिसमें दर्ज सत्यापित आय को ही आधार माना जाएगा। हरियाणा में शिक्षा विभाग ने चिराग योजना को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए आय सीमा फिर से घटा दी है। पहले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दायरे को बढ़ाते हुए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई थी, लेकिन अब विभाग ने इस फैसले को वापस लेते हुए दोबारा 1.80 लाख रुपये कर दिया है। इस फैसले के साथ ही योजना का दायरा काफी सीमित हो गया है। अब केवल वही छात्र प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले के पात्र होंगे, जिनके परिवार की सालाना आय 1.80 लाख रुपये या उससे कम है। 47,250 सीटों पर होंगे दाखिले, पीपीपी अनिवार्य शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चिराग योजना के तहत 47,250 सीटें निर्धारित की हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य किया गया है, जिसमें दर्ज सत्यापित आय को ही आधार माना जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए नियमों के अनुसार दाखिला प्रक्रिया शुरू करें और पात्र बच्चों को ही लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। इस बदलाव के बाद अब योजना का फोकस फिर से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर केंद्रित हो गया है।